samacharsecretary.com

आवारा कुत्तों का कहर: बुजुर्ग की नाक काटी, बच्चे भी बने शिकार

बड़वानी देश-प्रदेश के साथ शहर में भी आवारा श्वानों द्वारा आमजन को निशाना बनाने का सिलसिला जारी हैं। बुधवार को सुबह से दोपहर तक चंद घंटे में एक दर्जन के करीब लोग श्वान के काटने के शिकार बने। इस दौरान एक बुजुर्ग के मुंह पर श्वान ने झपट्टा मारकर नाक काट दी। लहुलहान हालात में स्वजन उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। वहीं इस दौरान आधे दिन में ही बच्चों सहित बड़े लोग श्वानों के शिकार होकर जिला अस्पताल उपचार के लिए पहुंचे। बुधवार सुबह करीब 10 बजे शहर के गुरुद्वारा के पीछे नवलपुरा मुख्य मार्ग पर वेल्डिंग व ऑटो गैरेज व्यवसायी हाजी बसीर मंसूरी को श्वान ने बुरी तरह जख्मी किया। यह घटना सामने लगे सीसीटीवी में कैद हुई। उक्त घटना का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने जमकर रोष व्यक्त किया। हाजी मंसूरी अपने घर से सटी दुकान पर आए और वहां मंडरा रहे श्वानों को भगाने का प्रयास किया, इस दौरान अचानक श्वान ने लंबी छलांग लगाकर उनके चेहरे पर बुरी तरह झपट्टा मारा। श्वान के हमले से वे सड़क पर गिरे, जिसके बाद श्वान ने उनके हाथ-पैर में निशाना बनाया। आसपास के लोगों के पहुंचने पर श्वान दूर भागा। इस हमले से बुजुर्ग बसीर मंसूरी की नाक का एक ओर का हिस्सा निकल गया और हड्डी तक क्षतिग्रस्त हो गई। स्वजन उन्हें तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। बुधवार को जिला अस्पताल में अवकाश के चलते नए सोलह पलंग वार्ड की इमरजेंसी ओपीडी में उनका टीकाकरण कर भर्ती कर उपचार शुरू किया। वहीं शाम चार बजे तक जिला अस्पताल में श्वान के काटने के शिकार करीब 10 लोग उपचार के लिए पहुंचे। इसमें बड़ों के साथ बच्चे भी शामिल थे। इस वर्ष अब तक 1400 से अधिक घायल जिला अस्पताल से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस वर्ष जनवरी से जुलाई तक श्वान टीकाकरण केंद्र पर 1400 से अधिक लोग दर्ज हुए हैं, जिन्हें श्वानों ने निशाना बनाया हैं। इसमें महिला-पुरुषों के साथ युवा-बच्चे शामिल हैं। वहीं अधिकांश मामलों में श्वानों द्वारा खूंखार रुप से लोगों और बच्चों पर हमला कर घायल किया है। कई लोगों को शरीर में दो-तीन या अधिक स्थानों पर जख्म व खरोंचे भी आई हैं। बता दें कि डेढ़ वर्ष पूर्व न्यू हाउसिंग बोर्ड मैदान के समीप आवारा श्वानों ने दो वर्षीय मासूम को झपटकर मौत के घाट उतार दिया था। कॉलोनियों व स्कूलों के आसपास अधिक समस्या शहर में वर्षाकाल के बीच आवारा श्वानों के जगह-जगह झुंड विचरण करते देखे जा सकते हैं। मुख्य रुप से पालाबाजार, पानवाड़ी, न्यु हाउिंगस बोर्ड, हाट बाजार, मीट मार्केट, माडल स्कूल परिसर, नवलपुरा, राजघाट रोड से सटी कालोनियां, आनंद नगर सहित मुख्य रुप से स्कूलों के आसपास श्वानों के झुंड मंडराने से बच्चों पर खतरा बना हुआ हैं। हालांकि गत दिनों से नगर पालिका अमले द्वारा श्वानों को पकड़कर आबादी क्षेत्र से बाहर छोड़ने की कार्रवाई की जा रही हैं, बावजूद इससे फिलहाल राहत मिलती नहीं दिख रही हैं। इस वर्ष अब तक श्वानों के शिकार     जनवरी में 284     फरवरी में 178     मार्च में 250     अप्रैल में 171     मई में 170     जून में 112     जुलाई में 182     1400 से अधिक अगस्त अब तक (प्रतिदिन औसत 6 से 10 मरीज)

किसानों की भलाई और कृषि विकास पर ध्यान देंगे शिवराज, अध्यक्ष पद की दौड़ से अलग

भोपाल   केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ कर दिया है कि वे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की दौड़ में नहीं हैं। चौहान ने कहा कि उनका पूरा ध्यान किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादन को नई ऊँचाई पर ले जाने पर है। ग्वालियर स्थित राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान गोष्ठी के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा—“मेरा एक ही लक्ष्य है कि कृषि उत्पादन कैसे बढ़े। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे कृषि और ग्रामीण विकास की जिम्मेदारी दी है। इस समय कृषि मेरे रोम-रोम में है और किसान मेरी सांसों में।” लोगों की सेवा करना मेरे लिए ईश्वर की पूजा है भाजपा अध्यक्ष के मुद्दे पर इसी तरह के एक सवाल का फिर से जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मैं फिर से कहूंगा कि न तो मैंने कभी इसके बारे में सोचा है, न ही किसी ने मुझे बताया है। मैं इसके बारे में सोच भी नहीं सकता। इस बार उन्होंने अपने पहले के बयान को दोहराया और कहा कि लोगों की सेवा करना मेरे लिए ईश्वर की पूजा है और मैं अपनी अंतिम सांस तक यही पूजा करता रहना चाहता हूं। चार बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे बता दें कि विदिशा निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सांसद चुने जाने से पहले, 66 वर्षीय केंद्रीय मंत्री चौहान, जो एक प्रमुख ओबीसी नेता हैं, रिकॉर्ड चार बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उन्हें ज़मीनी स्तर से जुड़े राजनेता के रूप में देखा जाता है। 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा और जीता मध्य प्रदेश में नवंबर 2023 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को शानदार जीत दिलाने के बाद, उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया और विदिशा सीट से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा और जीता भी। कार्यकाल बढ़ा दिया गया बाद में, पिछले साल नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के तीसरे कार्यकाल में वे कैबिनेट मंत्री बने। गौरतलब है कि वर्तमान भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा का तीन साल का कार्यकाल लगभग दो साल पहले समाप्त हो गया था और उसके बाद उनका कार्यकाल बढ़ा दिया गया था।   क्या कहा मीडिया ने उनसे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ कथित मुलाकात और भाजपा अध्यक्ष पद की संभावना को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा—“न मैंने इसके बारे में कभी सोचा, न किसी ने मुझसे कहा। मैं इस बारे में सोच भी नहीं सकता। लोगों की सेवा करना ही मेरे लिए ईश्वर की पूजा है और मैं अंतिम सांस तक यही करता रहूंगा।” चार बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे 66 वर्षीय शिवराज सिंह चौहान को जमीनी नेता और प्रभावशाली ओबीसी चेहरा माना जाता है। नवंबर 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को भारी जीत दिलाने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ा और विदिशा से 2024 का लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में वे कैबिनेट मंत्री बने।   केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार (26 अगस्त, 2025) को भाजपा के अगले अध्यक्ष बनने की संभावनाओं पर पूछे गए सवालों को टाल दिया और कहा कि उनका पूरा ध्यान कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय बढ़ाने पर है। पिछले सप्ताहांत नई दिल्ली में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ उनकी कथित मुलाकात के बारे में मीडियाकर्मियों द्वारा पूछे जाने पर, जिससे उनके भाजपा अध्यक्ष पद के दावेदार होने की अटकलों को बल मिला, श्री चौहान ने सवालों को टाल दिया और कहा कि वह अपने मंत्री पद की जिम्मेदारियों को संभालने में व्यस्त हैं। "मैं एक बात कहना चाहता हूँ – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे कृषि, किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्रालयों का कार्यभार सौंपा है। इस समय, कृषि मेरे रोम-रोम में है और किसान मेरी साँसों में हैं।" उन्होंने जोर देकर कहा, "एक पक्षी की आंख की तरह, मेरा एक ही लक्ष्य है – कृषि उत्पादन कैसे बढ़ाया जाए, किसानों की आय कैसे बढ़ाई जाए, ग्रामीण क्षेत्रों का विकास कैसे किया जाए, और अधिक लखपति दीदी कैसे बनाई जाएं।" लखपति दीदी स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की सदस्य होती हैं, जिनकी वार्षिक घरेलू आय 1 लाख रुपये से अधिक होती है। जब पत्रकारों ने अगले भाजपा अध्यक्ष के मुद्दे पर और सवाल पूछे, तो श्री चौहान ने कहा, "न तो मैंने कभी इसके बारे में सोचा है, न ही किसी ने मुझे बताया है। मैं इसके बारे में सोच भी नहीं सकता। मैं कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री हूँ। मैं इस काम को पूजा की तरह कर रहा हूँ। किसानों की सेवा मेरे लिए ईश्वर की पूजा है, और मैं यह पूजा करते रहना चाहता हूँ।" 66 वर्षीय श्री चौहान, एक प्रमुख ओबीसी नेता, रिकॉर्ड चार बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उन्हें ज़मीनी स्तर से जुड़े राजनेता के रूप में देखा जाता है। नवंबर 2023 में मध्य प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा को शानदार जीत दिलाने के बाद, उन्होंने विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी और 2024 का लोकसभा चुनाव विदिशा से लड़ा और जीता। बाद में वे मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के मंत्रिमंडल में शामिल हुए। वर्तमान भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का तीन साल का कार्यकाल करीब दो साल पहले समाप्त हो गया था। उसके बाद उनका कार्यकाल बढ़ा दिया गया था।    

बिहार सरकार ने पीडीएस डीलरों के कमीशन में किया जबरदस्‍त बढ़ोतरी

50 हजार पीडीएस डीलरों को बिहार सरकार की बड़ी सौगात! 52 फीसद कमीशन बढ़ाया   बिहार के 50 हजार PDS डीलरों की बल्‍ले बल्‍ले! नीतीश सरकार ने किया कमीशन में 52 फीसद का इजाफा पटना, बिहार सरकार ने पीडीएस दुकानदारों की एक पुरानी मांग को मान लिया है। लंबे समय से बिहार के पीडीएस डीलर कमीशन बढ़ाने की मांग कर रहे थे। जिसे सरकार ने मान लिया है। सरकार का यह निर्णय न सिर्फ डीलरों के लिए राहत की खबर है बल्कि लाभुक उपभोक्ताओं तक भी बेहतर सेवा सुनिश्चित करने वाला कदम साबित होगा। 258.40 रुपये मिलेगा कमीशन राज्य मंत्रिमंडल ने मंगलवार को खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए डीलर कमीशन की राशि में 52 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है। अब राज्य के सभी पीडीएस डीलरों को प्रति क्विंटल खाद्यान्न पर 258.40 रुपये कमीशन मिलेगा। पहले यह राशि 211.40 रुपये प्रति क्विंटल थी। यह नई व्यवस्था सितंबर 2025 से प्रभावी होगी। क्या था पहले और अब कितना मिलेगा अब तक डीलरों को केन्द्रांश और राज्यांश मिलाकर 90 रुपये प्रति क्विंटल दिया जाता था। बाद में इसे बढ़ाकर 211.40 रुपये प्रति क्विंटल किया गया। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब इसमें और 47 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है, जिसके बाद दर 258.40 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। 50 हजार डीलरों को फायदा बिहार सरकार की ओर से जनवितरण प्रणाली (PDS) को लगातार सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है। इस फैसले से राज्यभर में काम कर रहे करीब 50 हजार पीडीएस डीलरों को सीधा लाभ होगा। सरकार का मानना है कि इससे खाद्यान्न वितरण प्रणाली और बेहतर होगी और उपभोक्ताओं तक समय पर अनाज पहुंच सकेगा। मंत्री लेशी सिंह ने जताया आभार खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेशी सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कैबिनेट की ओर से लिए गए इस फैसले का स्‍वागत किया है। उन्‍होंने कहा, ये फैसला न केवल पीडीएस ऑपरेटरों के हित में है, बल्कि पीडीएस प्रणाली को और मजबूती देने वाला भी है। पीडीएस डीलर कमीशन की बढ़ोतरी की मांग लंबे समय से कर रहे थे।

सरकारी स्कूल में मचा हड़कंप! 10 फीट लंबा मगरमच्छ मिला, बच्चों में दहशत

चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार उपखंड क्षेत्र के सुवानियां गांव के राजकीय विद्यालय में मंगलवार दोपहर करीब 10 फीट लंबा मगरमच्छ घुस आया। सूचना मिलने पर वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। हालांकि स्कूल परिसर में दो से तीन फीट ऊंची घास होने के कारण अभियान में काफी दिक्कत आई। करीब दो से ढाई घंटे की मशक्कत के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ा गया और बस्सी बांध में छोड़ दिया गया। गनीमत रही कि उस समय स्कूल में छुट्टी हो चुकी थी, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। जानकारी के अनुसार सुवानियां गांव के पास से बहने वाली बेड़च नदी से यह मगरमच्छ गांव तक पहुंच गया था। दोपहर बाद ग्रामीणों ने इसे स्कूल में देखा तो तुरंत सरपंच गोपाललाल गाडरी ने उपवन संरक्षक राहुल झांझड़िया को सूचना दी। निर्देश पर नाथू सिंह के नेतृत्व में वन विभाग की टीम और वन्यजीव प्रेमी मौके पर पहुंचे। संयुक्त टीम ने निरीक्षण किया तो पता चला कि मगरमच्छ स्कूल भवन की बजाय मैदान की तरफ घास में छिपा बैठा है। रेस्क्यू टीम के सदस्य दीवार पर चढ़कर निगरानी कर रहे थे, तभी मगरमच्छ दिखाई दिया। टीम को देखते ही वह हमला करने की स्थिति में आ गया। बड़ी सावधानी से उसे पकड़ा गया और देर शाम बस्सी बांध में छोड़ा गया। वन्यजीव प्रेमी मनीष तिवारी ने बताया कि मगरमच्छ घास में फंस जाने के कारण बाहर नहीं निकल पाया। यदि वह छिपा रह जाता तो अगले दिन बच्चों या स्टाफ के लिए बड़ा खतरा बन सकता था। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी बेड़च नदी से मगरमच्छ निकलकर सुवानियां गांव में आ चुके हैं। करीब एक माह पहले यहां से दो मगरमच्छ रेस्क्यू किए गए थे।

फुटबॉल संकट: 30 अक्टूबर तक सुधार नहीं तो AIFF पर लग सकता है प्रतिबंध

नई दिल्ली भारतीय फुटबॉल पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध का खतरा मंडरा रहा है क्योंकि वैश्विक संचालन संस्था फीफा और एशियाई फुटबॉल परिसंघ (एएफसी) ने संकटग्रस्त अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) को सख्त चेतावनी दी है कि उसे 30 अक्टूबर तक नया संविधान अपनाना और उसकी पुष्टि करनी होगी या फिर निलंबन का जोखिम उठाना पड़ेगा। एआईएफएफ अध्यक्ष कल्याण चौबे को मंगलवार को लिखे दो पन्नों के कड़े पत्र में दोनों अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने 2017 से उच्चतम न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद महासंघ द्वारा अपने संविधान को अंतिम रूप देने में विफलता पर ‘गहरी चिंता’ व्यक्त की। शीर्ष अदालत बृहस्पतिवार को इस मामले की सुनवाई करेगी। निलंबन का मतलब होगा कि राष्ट्रीय टीमों और क्लबों को सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा और साथ ही अहमदाबाद में 2036 के ओलंपिक खेलों के लिए भारत की महत्वाकांक्षी बोली भी अनिश्चितता में पड़ जाएगी। फीफा और एएफसी ने चौबे के नेतृत्व वाले एआईएफएफ को संशोधित संविधान को मंजूरी देने के लिए उच्चतम न्यायालय से एक ‘निश्चित आदेश’ प्राप्त करने, इसे फीफा और एएफसी के अनिवार्य नियमों के अनुरूप बनाने और 30 अक्टूबर की समय-सीमा से पहले अगली आम सभा की बैठक में इसकी पुष्टि करने का निर्देश दिया है। पत्र में कहा गया है, ‘‘इस कार्यक्रम का पालन नहीं करने पर हमारे पास इस मामले को निर्णय लेने वाली फीफा की संबंधित संस्था के पास विचार और निर्णय के लिए भेजने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा… जिसमें निलंबन की संभावना भी शामिल है।’’ इस पत्र पर फीफा के मुख्य सदस्य संघ अधिकारी एल्खान मामादोव और एएफसी के उप महासचिव (सदस्य संघ) वाहिद कर्दानी ने संयुक्त रूप से हस्ताक्षर किए हैं। यह पहली बार नहीं है जब भारतीय फुटबॉल को इस तरह की शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है। अगस्त 2022 में फीफा ने भारत को ‘तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप’ के आरोप में निलंबित कर दिया था जब उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) ने अस्थायी रूप से एआईएफएफ का संचालन किया था। यह प्रतिबंध देश की स्वतंत्रता के 75वें वर्ष के जश्न के दौरान लगाया गया था लेकिन सीओए के भंग होने और चुनाव होने के दो सप्ताह के भीतर इसे हटा लिया गया था। चुनावों में चौबे ने एकतरफा परिणाम में दिग्गज फुटबॉलर बाईचुंग भूटिया को हराया था। विश्व निकायों ने ‘अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के संशोधित संविधान को अंतिम रूप देने और लागू करने में निरंतर विफलता’ पर चिंता व्यक्त की। यह मामला 2017 से भारत के माननीय उच्चतम न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। पत्र में कहा गया है, ‘‘बार-बार आश्वासन के बावजूद, एक स्पष्ट और अनुपालनकारी प्रशासनिक ढांचे के अभाव ने भारतीय फुटबॉल के मूल में शून्य और कानूनी अनिश्चितताएं पैदा कर दी हैं।’’ पत्र में इसे ‘लंबे समय से चल रहा गतिरोध’ बताते हुए कहा गया है कि इसने ‘प्रशासन और संचालन संबंधी संकट को जन्म दिया है। पत्र के अनुसार, ‘‘इससे क्लब और खिलाड़ी घरेलू प्रतियोगिता कैलेंडर को लेकर अनिश्चित हैं। दिसंबर 2025 के बाद व्यावसायिक साझेदारियां अभी तक तय नहीं हुई हैं और विकास, प्रतियोगिताओं और विपणन से संबंधित आवश्यक कार्य लगातार कमजोर होते जा रहे हैं।’’ वित्तीय स्थिरता की कमी और ‘भारत के फुटबॉल पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके गहरे नकारात्मक प्रभाव’ की निंदा करते हुए दोनों संस्थाओं ने कहा कि वे इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) में भाग लेने वाले क्लबों के फुटबॉल खिलाड़ियों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। पत्र में कहा गया है, ‘‘हमें फिफप्रो से विभिन्न क्लबों द्वारा खिलाड़ियों के अनुबंधों को एकतरफा रूप से समाप्त करने की चिंताजनक रिपोर्ट मिली है जो मौजूदा गतिरोध का सीधा परिणाम है और खिलाड़ियों की आजीविका और करियर को प्रभावित कर रहा है।’’ दोनों संस्थाओं ने एआईएफएफ को समय-सीमा तक तीन तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। पत्र में कहा गया, ‘‘एआईएफएफ के संशोधित संविधान को मंजूरी देने के लिए भारत के उच्चतम न्यायालय से एक निर्णायक आदेश प्राप्त करें। एआईएफएफ संविधान का फीफा और एएफसी के नियमों और विनियमों के अनिवार्य प्रावधानों के साथ पूर्ण अनुकूलन सुनिश्चित करें।’’ उन्होंने कहा,‘‘एआईएफएफ की अगली आम बैठक में एआईएफएफ संविधान की औपचारिक पुष्टि प्राप्त करें।’’ पत्र के अनुसार, ‘‘एआईएफएफ के निलंबन का परिणाम फीफा और एएफसी के सदस्य के रूप में उसके सभी अधिकारों का नुकसान होगा जैसा कि फीफा और एएफसी के नियमों में परिभाषित है।’’ उच्चतम न्यायालय बृहस्पतिवार को एआईएफएफ और उसके वाणिज्यिक साझेदार फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड (एफएसडीएल) के बीच मास्टर राइट्स समझौते से संबंधित मामले की सुनवाई करने वाला है। यह समझौता आठ दिसंबर को समाप्त हो रहा है। एफएसडीएल ने पिछले महीने करार नवीनीकरण पर अनिश्चितता का हवाला देते हुए आगामी सत्र को ‘रोक’ दिया था। इस फैसले के कारण कम से कम तीन क्लबों को अपना परिचालन स्थगित करना पड़ा या वेतन में देरी करनी पड़ी और सभी 11 आईएसएल क्लबों ने ‘अस्तित्व के संकट’ की चेतावनी दी। उच्चतम न्यायालय ने 22 अगस्त को एआईएफएफ और एफएसडीएल को अंतरिम उपाय तय करने के लिए बातचीत करने की अनुमति दी जिससे कि सत्र समय पर शुरू हो सके।  

नशे के खिलाफ पुलिस का प्रहार, 7 महीने में 155 तस्करों को भेजा जेल

दुर्ग दुर्ग पुलिस ने नशा तस्करों के चेन को तोड़ते हुए अब तक 71 मामले में केस दर्ज कर कुल 155 नशा तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा है. इसमें 21 महिलाएं भी शामिल है जो नशा बेचते हुए पकड़ायी है. पुलिस ने सबसे ज्यादा कार्रवाई सूखा नशा गांजे पर कार्रवाई की है. वहीं हेरोइन, ब्राउन शुगर, टेबलेट और सिरप भी जब्त की है. दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल के मुताबिक पुलिस मादक पदार्थों की तस्करी को रोकते हुए नशे के सौदागरों पर शिकंजा कसने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. अभियान के तहत 1 जनवरी से 31 जुलाई तक जिले में नशा तस्करों के खिलाफ 71 मामले दर्ज करते हुए 155 आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया गया है. उन्होंने बताया कि नशे की सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार की है. मादक पदार्थ की तस्करी के मामले में दुर्ग पुलिस की कार्रवाई अच्छी खासी रही. एनडीपीएस एक्ट के तहत पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष मात्र 7 महीनों में बीते वर्ष की गिरफ्तारियों की संख्या में भी वृद्धि हुई है. एसएसपी विजय अग्रवाल के नेतृत्व में पुलिस ने नशे के खिलाफ अभियान चलाया, जिसमें ताबड़तोड़ कार्रवाई की गई है. श्री अग्रवाल के मुताबिक जिले के साथ-साथ बाहरी राज्यों के नशा कारोबारियों और तस्करों पर भी पुलिस नजर बनाए हुए है. पुलिस थानों सहित क्राइम ब्रांच की टीम को भी इस दिशा में सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश हैं.

‘शैतान’ शब्द को लेकर कांग्रेस का बवाल, CM बोले- मैंने किया था कर्नल शैतान सिंह का जिक्र

हरियाणा हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन की कार्यवाही प्रश्नकाल से शुरू हुई। लेकिन जैसे-जैसे कार्यवाही आगे बढ़ी, सत्ता पक्ष और कांग्रेस विधायकों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। झज्जर से कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने एक दिन पहले सदन में 'शैतान' शब्द का इस्तेमाल किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री ने यह शब्द किसके लिए कहा था। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जवाब में कहा कि उन्होंने 'कर्नल शैतान सिंह' का जिक्र किया था, जो देश की रक्षा करते हुए सीमा पर शहीद हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है और देश के वीरों का अपमान कर रहा है। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री जी, आप मेरे लिए बाप समान हैं, लेकिन अगर 'शैतान' मेरी औलाद होगी तो मैं क्या करूंगा?" मुख्यमंत्री सैनी ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष झूठे आरोप लगा रहा है और सदन की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा, "मैंने कोई अभद्र भाषा नहीं बोली, बल्कि विपक्ष ने ही मर्यादाएं तोड़ी हैं।" हुड्डा ने भी नाराजगी जताते हुए कहा, "आप पांच-छह और गाली दे दीजिए।" कांग्रेस विधायकों ने मांग की कि मुख्यमंत्री अपने शब्दों को वापस लें। हालांकि, स्पीकर ने कहा कि यह विषय यहीं समाप्त माना जाए।

फर्जी वोटरों की होगी पहचान! कांग्रेस ने सभी जिलाध्यक्षों को दिया मतदाता सूची जांचने का आदेश

रायपुर वोट चोरी को लेकर कांग्रेस लगातार आंदोलन कर रही है. अब छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस फर्जी वोटरों को ढूंढेगी. प्रदेश में मतदाता सूची के परीक्षण के लिए कांग्रेस ने आदेश जारी कर दिया है. प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सभी जिलाध्यक्षों को पत्र लिखकर हर विधानसभा की मतदाता सूची का परीक्षण कर चार बिंदुओं में जानकारी पीसीसी में जमा करने कहा गया है. कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के 2023 विधानसभा चुनाव में मतदाता सूची में हेराफेरी का संदेह जताया है. इसके चलते अब कांग्रेसी प्रदेशभर में अभियान चलाकर फर्जी वोटरों की पहचान करेगी.

गुजरात दंगों पर तरलोचन सिंह बोले: नरेंद्र मोदी न होते तो पूरा राज्य जल उठता

नई दिल्ली सिख मामलों के जानकार और पूर्व राज्यसभा सांसद तरलोचन सिंह ने 2002 के गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी की भूमिका की सराहना की है। कहा कि यह दंगा साबरमती एक्सप्रेस अग्निकांड से उपजे गुस्सा का नतीजा था और इसे नरेंद्र मोदी ने अच्छे से संभाला वरना पूरा गुजरात ही जल जाता। उन्होंने कहा कि ट्रेन में जिंदा जले लोगों के परिजन उनके शवों को अपने गांव ले जाना चाहते थे, लेकिन नरेंद्र मोदी ने उनका अंतिम संस्कार वहीं करा दिया। तरलोचन सिंह ने कहा कि यदि ये शव उनके गांवों में पहुंचते तो सोचिए कि कितना गुस्सा लोगों का भड़कता और पूरा गुजरात ही जल जाता, लेकिन नरेंद्र मोदी ने साहस दिखाया और ऐसा नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि 2002 का दंगा जनता के गुस्से का परिणाम था, उसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं थी। बता दें कि 2002 में गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम हुआ करते थे। उस दंगे को लेकर उन पर भी कांग्रेस की ओर से आरोप लगाए जाते रहे हैं। 2002 के दंगों के दौरान तरलोचन सिंह अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष थे। उन्होंने कहा कि गुजरात का दंगा दिल्ली में हुए 1984 के दंगों की तरह सरकार प्रायोजित नहीं था। उन्होंने कहा कि 2002 में मैं अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष था। तरलोचन सिंह ने कहा कि घटना होने के बाद सबसे पहले पहुंचने वाले लोगों में मैं था। मैंने उसके बारे में पूछताछ की। कोई उसके बारे में नहीं जानता था। मैं 2000 में अल्पसंख्यक आयोग का चेयरमैन बना था और गुजरात दंगा 2002 में हुआ। मैंने गुजरात दंगे पर एक बुकलेट भी लिखी है। उन्होंने कहा कि यह बुकलेट छपी भी थी और नरेंद्र मोदी ने इसकी 500 कॉपियां बटवाई थीं। मैंने गुजरात दंगों से दिल्ली के सिख दंगों की तुलना की थी। मैंने कहा था कि दिल्ली का दंगा सरकार प्रायोजित था, लेकिन गुजरात का दंगा जनता के गुस्से की अभिव्यक्ति थी। उस दंगे में सरकार या उसके किसी एक भी आदमी की भूमिका नहीं थी। मैंने अपनी जांच में यह बात कही थी। पीएम नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए तरलोचन सिंह ने कहा कि तब गुजरात सीएम के तौर पर उनका रोल सराहनीय था। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने तय किया कि मारे गए सभी कारसेवकों का अंतिम संस्कार वहीं कर दिया जाए। यदि वे शव गांवों में पहुंचते तो कितना गुस्सा भड़कता। हम इसकी कल्पना ही कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में तो पूरा गुजरात ही जल जाता, लेकिन नरेंद्र मोदी ने साहस दिखाया और हालात को संभाल लिया। उन्होंने कहा कि इसी का परिणाम था कि दंगे अहमदाबाद और उसके आसपास के इलाके में ही हुए। पूरे गुजरात में स्थिति नहीं बिगड़ी।

CM सैनी का बयान: क्यों हटाए गए लाखों परिवार BPL लिस्ट से

हरियाणा  हरियाणा विधानसभा में बीपीएल कार्ड के मुद्दे पर भी काफी बहस हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने विधानसभा चुनाव के दौरान गरीब परिवारों को लुभाने के लिए बड़े पैमाने पर बीपीएल लिस्ट में नाम डाले और चुनाव के तुरंत बाद लाखों परिवारों को बाहर कर दिया। कांग्रेस विधायक शीशपाल केहरवाला ने सरकार से पूछा कि पहली जनवरी, 2024 से 31 जुलाई, 2025 के बीच कितने नए बीपीएल कार्ड बने और कितने काटे गए। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि बीपीएल कार्ड बंद करने का आधार क्या रखा गया। सरकार की ओर से सदन में जवाब देते हुए विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि इस अवधि में लाखों परिवार बाहर हुए हैं तो करीब उतने ही बीपीएल कैटेगरी में शामिल भी हुए हैं। पंवार ने सदन में आंकड़े रखते हुए कहा कि इस अवधि में 8,73,507 परिवार जोड़े गए। वहीं 9,68,506 परिवार बाहर किए गए। 31 मार्च, 2025 को बीपीएल परिवारों की संख्या 52 लाख 37 हजार 671 थी जो अब छंटनी के बाद घटकर 41 लाख 93 हजार 669 रह गई है। यह आंकड़ा 22 अगस्त तक का है। केहरवाला ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनावों में फायदा लेने के लिए भाजपा ने बीपीएल परिवारों की संख्या बढ़ाई। नतीजों के बाद फिर से कम कर दिए।   विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने गुपचुप सर्वे करवाकर गरीब परिवारों को योजनाओं से वंचित कर दिया। विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि विपक्ष ने चुनाव के दौरान बीपीएल के नाम पर जनता को गुमराह किया। सरकार ने पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई, पोर्टल पर लोगों ने खुद अपनी आय घोषित की। उन्होंने कहा कि जो परिवार सालाना 1.80 लाख रुपये से ज्यादा कमाते थे, वे स्वेच्छा से बीपीएल लिस्ट से बाहर हो गए।