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पैलेस ऑन व्हील्स का नया अध्याय: निजी कंपनी करेगी संचालन, स्वर्णनगरी में 21 सितंबर को होगा आगमन

जयपुर देश की विभिन्न शाही रेलों में सबसे चर्चित और लोकप्रिय लग्जरी ट्रेन पैलेस ऑन व्हील इस सीजन की पहली यात्रा पर 21 सितंबर को जैसलमेर पहुंचेगी। यह ट्रेन 17 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से रवाना होकर जयपुर, सवाई माधोपुर, चित्तौड़गढ़ और उदयपुर होते हुए रविवार सुबह जैसलमेर पहुंचेगी। 26 जनवरी 1982 को शुरू हुई पैलेस ऑन व्हील का 41 साल बाद दो साल पहले निजीकरण कर दिया गया है। पहले रेलवे इसके संचालन और नवीनीकरण का जिम्मा संभालता था, लेकिन यात्रियों की घटती संख्या और लगातार घाटे के बाद अब इसकी कमान निजी कंपनी को सौंप दी गई है। ट्रेन को इस सीजन के लिए नया कलेवर दिया गया है। 41 बाथरूमों का रेनोवेशन किया गया है, बायो-टॉयलेट्स लगाए गए हैं, फर्नीचर और लाइटिंग बदली गई है तथा स्थानीय व्यंजनों को खाने के मेन्यू में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य सैलानियों को एक बार फिर से शाही रेल का शाही अनुभव देना है। पैलेस ऑन व्हील की यात्रा हमेशा से विदेशी सैलानियों की पहली पसंद रही है लेकिन महंगे किराए और कोविड के प्रभाव से यात्रियों की संख्या लगातार गिरती गई। पांच साल पहले पूरे सीजन में केवल 3500 यात्री ही इसमें सवार हुए। कोविड से ठीक पहले यह संख्या 2500 से भी नीचे चली गई थी। स्थिति और बिगड़ने पर इसे दो साल तक बंद करना पड़ा। 2022 में इसे फिर से शुरू किया गया, लेकिन पूरे सीजन में केवल 11 फेरे ही हो पाए। इस बार निजी कंपनी के हाथों में संचालन सौंपने के बाद ट्रेन 33 फेरे करेगी। उम्मीद है कि बदलाव और नए शाही लुक के साथ पैलेस ऑन व्हील का पुराना आकर्षण एक बार फिर लौटेगा।

8 साल बाद आया न्यायालय का फैसला, नीरज सिंह मर्डर केस में सभी आरोपी बरी

रांची झारखंड में नीरज सिंह हत्याकांड में बीते बुधवार को धनबाद के न्यायालय ने झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह को आरोपों से बरी कर दिया है। न्यायालय ने इस मामले के सभी आरोपियों को नीरज सिंह हत्याकांड से बरी कर दिया। इससे पहले संजीव सिंह को स्ट्रेचर पर कोर्ट के अंदर ले जाया गया। पुलिस उन्हें एंबुलेंस में सिंह मेंशन से लेकर कोर्ट पहुंची थी। इसके पहले वकीलों को कोर्ट में प्रवेश नहीं करने देने पर वकीलों ने पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हालांकि, थोड़ी देर बाद नारेबाजी बंद हो गयी। धनबाद की राजनीति को झकझोर देने वाले चर्चित पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह हत्याकांड में आज आठ साल, पांच महीने और पांच दिन बाद अदालत ने सभी आरोपियों को बरी किया है। जिला और सत्र न्यायाधीश 16 सह विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए कोर्ट दुर्गेश चंद्र अवस्थी ने अपना फैसला सुनाते हुए पूर्व विधायक संजीव सिंह समेत सभी 10 आरोपियों को बरी कर दिया। इस फैसले में झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह, जैनेंद्र सिंह उर्फ पिंटू सिंह, डब्लू मिश्रा, विनोद सिंह, सागर सिंह उर्फ शिबू, चंदन सिंह, कुर्बान अली, पंकज सिंह और रणधीर धनंजय उर्फ धनजी सहित सभी आरोपियों को राहत मिली। ज्ञातव्य है कि 21 मार्च 2017 को धनबाद के तत्कालीन डिप्टी मेयर नीरज सिंह सहित तीन लोगों की हत्या कर दी गयी थी। नीरज सिंह के साथ जिन लोगों की हत्या की गयी थी उसमें अशोक यादव, चंद्र प्रकाश महतो उर्फ घोल्टू और मुन्ना तिवारी का नाम शामिल था। अशोक यादव नीरज सिंह के आप्त सचिव थे जबकि घोल्टू उनका ड्राइवर और मुन्ना तिवारी निजी बॉडीगार्ड था।  

हिंदू प्रेमियों के लिए अपना धर्म छोड़ा, रुखसाना और जास्मीन की नई पहचान

लखीमपुर खीरी  यूपी के लखीमपुर खीरी जिले में दो मुस्लिम बहनों ने हिंदू लड़कों से मंदिर में शादी रचा ली. हिंदू रीति-रिवाज से जास्मीन और रुखसाना बानो स्थानीय लड़कों रामप्रवेश और सर्वेश के साथ शादी के बंधन में बंध गईं. इनके बीच काफी समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था. नाम बदलकर रुखसाना अब रूबी और जास्मीन चांदनी बन गई हैं. ये शादी इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है.  दरअसल, सोमवार को पड़ुआ थाना क्षेत्र के बैरिया गांव में दो मुस्लिम बहनें जास्मीन और रुखसाना बानो अपने प्रेमियों के घर पहुंच गईं. वे दोनों रविवार देर रात से वहीं मौजूद थीं और शादी की जिद पर अड़ी थीं. दोनों का गांव के ही एक ही परिवार के दो लड़कों- रामप्रवेश और सर्वेश से प्रेम संबंध था. दोनों बहनें बालिग हैं, जिसकी पुष्टि उनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों से हुई.  जानकारी के मुताबिक, रविवार की देर रात दोनों बहनें अपने घर से चुपचाप निकलीं और सीधे रामप्रवेश और सर्वेश के घर पहुंच गईं. उनके अचानक पहुंचने से पूरे गांव में सनसनी फैल गई. गांव वाले और परिवार के लोग हैरान थे कि आखिर ये कैसे हुआ. खबर फैलते ही दोनों परिवारों में हलचल मच गई और लोग इस मामले को सुलझाने के लिए इकट्ठा हुए. गांव में तनाव का माहौल बन गया था, लेकिन दोनों बहनें अपने फैसले पर अडिग थीं.  सोमवार सुबह इस मामले को सुलझाने के लिए गांव के बुजुर्गों ने पंचायत बुलाई. सभी चाहते थे कि दोनों परिवारों के बीच कोई सहमति बन जाए, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका. क्योंकि, दोनों बहनें अपनी बात पर अड़ी रहीं कि वे अपने प्रेमियों से ही शादी करेंगी. उनकी जिद के सामने पंचायत भी नाकाम रही. जब उनकी उम्र की जांच की गई तो शैक्षिक प्रमाणपत्रों के आधार पर पता चला कि दोनों बहनें बालिग हैं.  जब पंचायत में कोई बात नहीं बनी, तो दोनों बहनों और उनके प्रेमियों की खुशी के लिए हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कराने का फैसला लिया गया. जास्मीन और रुखसाना ने अपना धर्म छोड़कर अपने प्यार को चुना. इस फैसले ने न सिर्फ दोनों परिवारों को बल्कि पूरे गांव को चौंका दिया है. 

विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में असहमति, माले विधायक की तीखी टिप्पणी कांग्रेस पर

पटना बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी समर जारी है। ऐसे में दोनों गठबंधनों को दरार और फूट की बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। महागठबंधन में दरार को लेकर एक खबर जोर पकड़ रही है। दरअसल,  सासाराम क्षेत्र के रोहतास जिले में कांग्रेस कमेटी द्वारा विभिन्न विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों से आवेदन लिए जाने को लेकर महागठबंधन के घटक दलों के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। जिले की काराकाट विधानसभा सीट से भाकपा माले के विधायक अरुण सिंह ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। गौरतलब है कि कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी की सदस्य एवं महाराष्ट्र की सांसद प्रीणीति शिंदे इन दिनों रोहतास समेत बिहार के अलग-अलग जिलों में जाकर कांग्रेस उम्मीदवारों से आवेदन ले रही हैं। कांग्रेस का व्यवहार गठबंधन धर्म के खिलाफ विधायक अरुण सिंह ने कहा कि कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी को महागठबंधन के अन्य घटक दलों वाली सीटों पर उम्मीदवारों के आवेदन नहीं लेने चाहिए। यह पूरी तरह से गठबंधन धर्म के खिलाफ है। कांग्रेस सिर्फ उन्हीं सीटों पर आवेदन लेने की हकदार है, जो उसके खाते में पहले से हैं। जिन विधानसभा सीटों पर पहले से ही राष्ट्रीय जनता दल या भाकपा माले के विधायक हैं, उन पर कांग्रेस अगर उम्मीदवारों से आवेदन ले रही है या चयन प्रक्रिया शुरू कर रही है तो यह बिल्कुल गलत है। कांग्रेस को ऐसा नहीं करना चाहिए। भाकपा माले को कम से कम 40 सीटें चाहिए अरुण सिंह ने कहा कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में भाकपा माले को गठबंधन में कम से कम 40 सीटें मिलनी चाहिए। पिछले विधानसभा चुनाव में 19 सीटों में से 12 पर जीत और लोकसभा चुनाव में 3 सीटों में से 2 सीटों पर जीत दर्ज की गई थी। इस आधार पर माले का स्ट्राइक रेट सबसे बेहतर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को समझना चाहिए कि माले किसी भी हाल में अपनी जीती हुई सीट नहीं छोड़ेगी और हर जिले में माले को कम से कम एक-एक विधानसभा सीट मिलनी ही चाहिए। गठबंधन को होगा फायदा माले विधायक ने कहा कि बिहार में गरीबों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों का वोट हमेशा माले के साथ रहा है। माले की जितनी अधिक हिस्सेदारी होगी, गठबंधन को उतना अधिक फायदा होगा। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी को राजद और माले विधायक वाली सीटों पर उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया रोकनी चाहिए। कांग्रेस को पिछली बार जिले में करगहर और चेनारी सुरक्षित सीट मिली थी, इसलिए उन्हें केवल इन्हीं सीटों के लिए उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया अपनानी चाहिए।

मध्यप्रदेश शिक्षक दिवस: दस शिक्षकों को मिलेगा खास सम्मान

भोपाल   शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को सम्मान की आस है। मध्यप्रदेश के चार लाख शिक्षकों में से दस नामों का चयन किया जाएगा। ये राज्य स्तर पर सम्मान पाने वाले होंगे। इसके अलावा जिला स्तर पर नाम का चयन करने अलग कमेटी है। सम्मान पाने के लिए शिक्षकों से ऑनलाइन आवेदन जमा कराए गए थे। इन आवेदनों के आधार पर रिजल्ट आना बाकी है। राजधानी में शिक्षक दिवस पर आयोजन होगा। शिक्षा में बेहतर योगदान के शिक्षकों को पुरस्कार दिया जाएगा। इस पुस्कार के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने केटेगरी तय की है। इस केटेगरी के तहत शिक्षकों को अपने बायाडाटा सहित परफारमेंस अपडेट करना है। जानकारी विभाग ने ऑनलाइन मांगी है। एजुकेशन पोर्टल के माध्यम से आवेदन लिए गए है। इनमें नामों का चयन होगा। राज्य, जिला, ब्लॉक स्तर पर आयोजन शिक्षक दिवस पर राज्य जिला और ब्लॉक स्तर पर शिक्षक सम्मानित होंगे। इनका चयन शिक्षाविद् और अधिकारी करेंगे। विभाग ने आवेदन के लिए क्राइटेरिया तय किया है। प्रायमरी, मिडिल और हाई हायर सेकेंडरी केटेगरी में शिक्षक शामिल रहेंगे। वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश से दो शिक्षकों का सम्मान होना है। इनमें एक प्रामयरी शिक्षक हैं। ये दमोह जिले से हैं। वहीं एक मिडिल स्कूल के शिक्षक का चयन हुआ है। ये आगरमालवा से हैं। शिक्षक सम्मान के लिए विभाग ने आवेदन मांगे हैं। तय केटेगरी के आधार पर शिक्षकों को जानकारी देनी। उच्च स्तर पर विशेषज्ञों की कमेटी है। जो नाम तय करेगी। नरेन्द्र अहिरवार, जिला शिक्षा अधिकारी

वैशाली में अजब मामला: जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर डाला, अब प्रशासन पर उठे सवाल

वैशाली बिहार में लगातार मतदाता गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ विरोधी दल के नेताओं के द्वारा 'वोट अधिकार यात्रा' की जा रही है। केंद्र सरकार चुनाव आयोग को विरोधी दल के नेता लगातार निशाना भी बना रहे हैं। वहीं, हाजीपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पर जीवित मतदाता का नाम सूची से काट दिया गया है। यह मामला हाजीपुर विधानसभा क्षेत्र 123 बूथ नंबर 317 के मतदाता सुनील कुमार सिंह से जुड़ा है। सुनील का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। बताया गया है कि सुनील एक सफल बिजनेसमैन हैं और यह टैक्स भी भरते हैं। इनका एपिक नंबर एमएनक्यू 5523220 है। डोर-टू-डोर सत्यापन नहीं करने का आरोप वहीं, सुनील कुमार ने बताया कि हमारे पिता छत्रपति सिंह का नाम 2003 के मतदाता सूची में दर्ज है। लेकिन मेरा नाम काट दिया गया है। सुनील ने बताया कि उन्होंने ऑनलाइन सर्च करने पर पाया कि उनका नाम मृत घोषित कर दिया गया है। बूथ लेवल अधिकारी बीएलओ ने नियमों का उल्लंघन करते हुए डोर-टू-डोर सत्यापन नहीं किया। चुनाव आयोग के स्पष्ट निर्देश थे कि बीएलओ को घर-घर जाकर मतदाता पुनरीक्षण करना था। डीएम ने लिया संज्ञान सुनील के अनुसार, बीएलओ ने न तो उनके घर और न ही अन्य मतदाताओं के घर जाकर सत्यापन किया। सुनील ने वैशाली जिलाधिकारी से इस मामले की शिकायत की है। उन्होंने बताया कि वह नियमित रूप से सरकार को टैक्स का भुगतान कर रहे हैं। बीएलओ ने न तो ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए योग्य मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए कैंप लगाया और न ही नए मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया की। डीएम ने मामले पर संज्ञान लिया है। आगे की कार्रवाई की जा रही है।

ट्रोलिंग पर मोहम्मद शमी का करारा जवाब, उठाया मुस्लिम क्रिकेटरों का मुद्दा

नई दिल्ली तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने एक निजी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में खेल और अपनी जिंदगी से जुड़े तमाम सवालों के जवाब दिए हैं। इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या ट्रोल मुस्लिम क्रिकेटरों को सबसे ज्यादा टारगेट करते हैं? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि ऐसी बातों पर वह ध्यान ही नहीं देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही टिप्पणियां मिलती हैं। मीडिया बातचीत में शमी ने कहा, 'मैं इस तरह की ट्रोलिंग पर ध्यान ही नहीं देता। मुझे एक काम दिया गया है। मैं मशीन नहीं हूं। अगर मैं पूरे साल कड़ी मेहनत करता हूं तो कभी-कभी मैं नाकाम भी होऊंगा, कभी-कभी कामयाब भी। यह तो लोगों के ऊपर है कि उसे कैसे ले रहे हैं।' शमी ने आगे कहा, ‘जब आप अपने देश के लिए खेल रहे होते हैं तब आप सब कुछ भूल जाते हैं। आपके लिए विकेट लेना और मैच जीतना ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। मैं वैसे मौकों पर सोशल मीडिया पर नहीं जाना चाहता। आपको पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों ही कॉमेंट्स मिलेंगे। जब आप खेल रहे हैं तो आपको ऐसी चीजों से बहुत दूरी बनाकर रहने की जरूरत है।’ शमी ने आगे कहा, 'हम सफल होने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। टोल्स को तो सिर्फ 2 लाइन टाइप करना होता है। सच्चा फैन कभी भी इस तरह की चीजें नहीं करेगा। अगर आपको कुछ आपत्तियां हैं तो उन्हें उठाइए- लेकिन सम्मानपूर्वक। अगर आपको लगता है कि आप मुझसे बेहतर कर सकते हैं तो प्लीज आइए और कोशिश कीजिए। यह तो हमेशा खुला हुआ है।' मोहम्मद शमी एक चैंपियन गेंदबाज हैं। वह 2023 के वनडे वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज थे। इसी तरह इस साल चैंपियंस ट्रॉफी में भी वह 9 विकेट के साथ संयुक्त रूप से भारत के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज थे। उनके नाम वनडे और टेस्ट दोनों में ही 200 से ज्यादा विकेट दर्ज हैं। इतने शानदार रिकॉर्ड के बावजूद वह ट्रोल्स का निशाना बने थे। 2021 के टी20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के हाथों हार के बाद सोशल मीडिया पर ट्रोल्स ने उन्हें बुरी तरह ट्रोल किया था। कुछ पोस्ट में उनके खिलाफ 'गद्दार' और 'देशविरोधी' जैसी निहायत ही शर्मनाक टिप्पणियां की गई थीं।  

रोहित-विराट-धोनी पर पड़ा असर, BCCI को एक फैसले ने लगाया 250 करोड़ का चूना

नई दिल्ली  ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 ने क्रिकेट जगत में खलबली मचा दी है. ये बिल जैसे ही कानून बना तो भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और खिलाड़ियों को बड़ा नुकसान हुआ है. रियल मनी गेमिंग पर पूरी तरह से बैन लगने के चलते ड्रीम 11 और बीसीसीआई (BCCI) के रास्ते अलग हो चुके हैं. ड्रीम-11 जैसे रियल-मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगने से  बीसीसीआई को करीब 245 करोड़ सालाना नुकसान हुआ है, जबकि स्टार क्रिकेटर्स को भी झटका लगा है. विराट कोहली का 10 से 12 करोड़ और रोहित शर्मा और एमएश धोनी को 6 से 7 करोड़ रुपये का सालाना लॉस हुआ है. दरअसल, ड्रीम 11 से बीसीसीआई (BCCI) को साल भर में करीब 120 करोड़ रुपए मिल रहे थे, जो टीम इंडिया का लीड स्पॉन्सर था. लेकिन नए कानून के लागू होते ही दोनों के बीच 358 करोड़ का करार समय से पहले ही खत्म हो गया. इतना ही नहीं आईपीएल का एसोसिएट स्पॉन्सर माय11सर्किल था, जिसके साथ बीसीसीआई की करीब 125 करोड़ रुपये सीजन की डील थी. इस तरह बोर्ड को साल में 250 करोड़ का सीधा नुकसान हुआ है. बीसीसीआई को इतनी महंगी डील मिलना मुश्किल क्रिकेटबज ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर जोर दियाकि बीसीसीआई (BCCI) को फिर भी दूसरे स्पॉन्सर मिल जाएंगे, लेकिन इस बार शायद डील इतनी महंगी देखने को न मिले. रिपोर्ट के मुताबिक, विराट, रोहित और धोनी को छोड़कर बाकी खिलाड़ियों की फीस उतनी महंगी नहीं थी, लेकिन फिर भी ये करोड़ों रुपये चार्ज कर रहे थे.अब इन सभी खिलाड़ियों को तगड़ा झटका लगा है. किस खिलाड़ी को कितने पैसे मिल रहे थे? विराट कोहली को MPL एड करेन के लिए साल में 10 से 12 करोड़ देता था. रोहित शर्मा को ड्रीम 11 की तरफ से करीब 7 करोड़ आते थे. एमएस धोनी भी विंजो से करीब  6 से 7 करोड़ कमाते थे. जसप्रीत बुमराह, केएल राहुल, ऋषभ पंत, हार्दिक पंड्या को  Dream11 से 3 से 6 करोड़ देता था. इन खिलाड़ियों को भी करोड़ों का नुकसान भारतीय टीम के टेस्ट कप्तान  कप्तान शुभमन गिल, मोहम्मद सिराज, यशस्वी जायसवाल, ऋतुराज गायकवाड़, रिंकू सिंह और पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के साथ My11 Circle से जुड़े हुए थे. इनका भी करोड़ों का नुकसान होने वाला है, क्योंकि भारत में ड्रीम11 और My11 Circle जैसी गेमिंग कंपनियां बैन हो चुकी हैं और वो अपना कारोबार समेट रही हैं. साल में कितने करोड़ का नुकसान? दरअसल, क्रिकेट में ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री ने तेजी से पैर पसारे थे. ये कंपनियां एड कराने के लिए खिलाड़ियों को खूब पैसा दे रहीं थीं. भारत में क्रिकेट जगत का लगभग हर बड़ा नाम इन कंपनियों से सीधे तौर पर जुड़ा था. सभी के पास अलग-अलग गेमिंग कंपनियों के साथ ब्रांड डील थीं. एक रिपोर्ट में दावा किया गा है कि इन गेमिंग एप्स पर बैन लगनेसे बीसीसीआई (BCCI) और खिलाड़ियों को हर साल 150-200 करोड़ रुपये का नुकसान होगा.

लंबे इंतजार के बाद समस्तीपुर में अनुकंपा नियुक्तियां, लोगों के चेहरे पर मुस्कान

समस्तीपुर  बिहार के समस्तीपुर जिले के कर्पूरी सभागार में शिक्षा विभाग द्वारा एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें अनुकंपा के आधार पर माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में लिपिक और परिचारी के पदों पर चयनित 134 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इस मौके पर ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार, समस्तीपुर सांसद शांभवी चौधरी, विधान पार्षद डॉ. तरुण कुमार चौधरी और समस्तीपुर विधानसभा के राजद विधायक अख्तरुल इस्लाम शाहीन मौजूद थे। वर्षों से अटके मामलों का हुआ निपटारा ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि वर्षों से कागजात की कमी के कारण अनुकंपा आश्रितों को नियुक्ति पत्र नहीं मिल पाए थे। सभी दस्तावेज पूरे होने के बाद अब इन अभ्यर्थियों को उनका अधिकार सौंपा गया है। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद चयनित अभ्यर्थियों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। नालंदा की घटना पर मंत्री का बयान नालंदा जिले के पामा गांव में हुए हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि वे वहां एक जीविका दीदी के परिवार से मिलने गए थे, जिनकी दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। गांव में नौ लोगों की मौत हुई थी और वे परिवार को सांत्वना देने गए थे। उन्होंने बताया कि कुछ युवाओं ने आपत्तिजनक बातें कहीं, जिसके बाद वे वहां से निकल गए। आगे क्या हुआ, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। विपक्ष पर साधा निशाना मंत्री ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि आज विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है। अगर होता, तो वह जनता के सामने रखते। उन्होंने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उस पर सवाल उठाना नियम संगत नहीं है। विपक्ष केवल बिना आधार के आरोप लगाकर राजनीति कर रहा है। कार्यक्रम में दिखी उत्साह की झलक नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में चयनित अभ्यर्थियों के साथ उनके परिजन भी मौजूद थे। सभी ने सरकार के इस कदम की सराहना की। कार्यक्रम में उपस्थित नेताओं ने आश्रितों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और शिक्षा विभाग में बेहतर योगदान की उम्मीद जताई।

SIR प्रोजेक्ट पर सियासी संग्राम, मरांडी बोले- विकास रोकना चाहती हैं विपक्षी पार्टियां

रांची झारखंड में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड सरकार ने जिस प्रकार से एसआईआर का विरोध किया है तो यह वोट बैंक की राजनीति है। मरांडी ने पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि झारखंड प्रदेश में जिस प्रकार से जो डेमोग्राफी बदली है या बदल रही है, बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों को वोट बैंक बनाए रखना इनका मकसद है। इसका एक उदाहरण राज्य सरकार ने कल स्पष्ट रूप से बता दिया है कि वह इन्हें केवल झारखंड में बसाना ही नहीं चाहती है बल्कि साथ में उन्हें मतदाता भी बनाना चाहती है ताकि झारखंड की चुनाव कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय जनता दल अपने पक्ष में करा सके। मरांडी ने कहा कि आप सभी ने कल झारखंड की विधानसभा की कार्यवाही को देखा और आज सवेरे अखबारों में प्रमुखता से छपी इन मुद्दों से जुड़े समाचार को भी देखा होगा। मरांडी ने कहा कि झारखंड की अलार्मिंग सिचुएशन है। इससे तो पूरा राज्य, देश प्रभावित होगा ही, लेकिन इससे सीधा और तत्काल कोई प्रभावित होगा तो वह आदिवासी समाज होगा। संथाल परगना और झारखंड में दर्जनों आदिवासी महिला है जिससे इन रोहिंग्या, बांग्लादेशी मुसलमानों ने न केवल शादी किया बल्कि मुखिया, जिला परिषद भी बने हैं। यही स्थिति रही तो आने वाले समय में इसी तरह से आदिवासी महिलाओं से शादी करके रोहिंग्या, बांग्लादेशी मुसलमान सांसद, विधायक भी बनेंगे। यह दृश्य साफ दिख रहा है। 1951 में जब पहला जनगणना हुआ था तब झारखंड में आदिवासियों की संख्या 35.38 प्रतिशत थी जबकि मुस्लिम की आबादी 8.9त्न थी। 2011 के जनगणना में आदिवासियों की संख्या 35.38 प्रतिशत से घटकर 26.20त्न हो गई। वहीं मुसलमानों की जनसंख्या 8.9त्न से बढ़कर 14.53त्न हो गई। आदिवासियों की जनसंख्या में गिरावट आई जबकि मुसलमानों की आबादी में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। यही जब ओवरऑल बात किया जाए तो 1951 में सनातनियों की आबादी 87.79त्न थी। 2011 में सनातनियों की संख्या घटकर 81.17त्न हो गई। मरांडी ने कहा कि यह नेचुरल तरीके से नहीं बढ़ सकती है। यह कृत्रिम तरीके से बढ़ी और बढ़ाई गई है। बांग्लादेश से लगातार घुसपैठ होना इसका प्रमुख कारण है। कांग्रेस, झामुमो, राजद जैसे दल इसके पक्षधर हैं। ऐसे घुसपैठियों का वोटर कार्ड, राशन कार्ड बनाना, जन्म प्रमाण पत्र बनाना, उनकी जमीन उपलब्ध कराना, उनको बसाना उनकी मंशा है। ताकि वोट में इसका फायदा उठाया जा सके। कल के विधानसभा में उनकी मंशा साफ दिखी। अभी मतदाता सूची ज्वलंत मुद्दा है इस संबंध में एक और उदाहरण देते हुए श्री मरांडी ने कहा कि 2014 से 2019 के बीच देश के अंदर में मतदाताओं में 9.3त्न की वृद्धि दर्ज हुई। जबकि झारखंड में 6.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं 2019 से 2024 के बीच देश में मत प्रतिशत में 10.1त्न वृद्धि हुई जबकि झारखंड में यह वृद्धि 16.7त्न दर्ज की गई। यह गौर करने वाली बात है। 2019 से 2024 के बीच यहां किसकी सरकार रही या बताने की जरूरत नहीं है। 2019 से 2024 के बीच राष्ट्रीय ग्रोथ से भी झारखंड में मत प्रतिशत की वृद्धि अधिक दर्ज होना, आईने की तरह सब कुछ साफ कर रहा है। यह काफी चिंता का विषय है कि इस रफ्तार से आखिर यहां पर आबादी कैसे बढ़ी, यह भी एक गहन जांच का विषय है। चूंकि 2014 से 2019 में झारखंड में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार थी इसलिए यहां पर अवैध घुसपैठियों के लिए कोई जगह नहीं थी इसलिए अधिक वृद्धि दर्ज नहीं हुई। आज वर्तमान सरकार के कार्यकाल में ऐसे लोगों को इन दलों के द्वारा वोटर बनाकर बसाया जा रहा है, इसलिए इन लोगों के पेट में दर्द हो रहा है और ये दल हंगामा कर रहे हैं। मरांडी ने कुछ रिजर्व विधानसभा क्षेत्रों का आंकड़ा भी इस संदर्भ में पेश किया जो काफी चौंकाने वाले हैं। मरांडी ने कहा कि सिमडेगा विधानसभा में 2019 में 2.21 लाख मतदाता थे जो 2024 में बढ़कर 2.44 लाख हो गए। इसमें ओवरऑल 10.2त्न की वृद्धि दर्ज हुई। यहां पर 2019 में 9308 मुस्लिम मतदाता थे जो 2024 में बढ़कर 16605 हो गए। यहां मुस्लिम मतदाताओं में 78.4त्न की वृद्धि दर्ज हुई है, जबकि नन मुस्लिम में 7.2त्न की ही वृद्धि दर्ज हुई है। यह चिंता का विषय है नहीं।