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राजधानी में डेंगू का प्रकोप तेज, एनएमसीएच में बढ़ाई गई चिकित्सा सुविधाएं

पटना  राजधानी पटना में डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। अब तक लगभग पिछले एक सप्ताह में लगभग 72 डेंगू से पीड़ित हो चुके हैं और विगत 24 घंटे में 10 नए मामले सामने आए मिले हैं। अगस्त में 158 मरीज मिले हैं।  24 घंटे में जो 10 मरीज मिले हैं. उनमें तीन मुसल्लहपुर, दो-दो छज्जूबाज और बाजार समिति, एक-एक बाइपास, संदलपुर और गुलजारबाग का बताया जा रहा है। डेंगू के हॉट स्पॉट में कंकड़बाग का पोस्टल पार्क और योगीपुर, पटना सिटी, बोरिंग कैनाल रोड, जक्कनपुर, कॉलोनी, दीघा, गोला रोड, जगनपुरा, पाटलिपुत्र, फुलवारीशरीफ और दानापुर इलाके है। इस संबंध में एनएमसीएच के उपाधीक्षक डॉ. राजीव रंजन सिन्हा ने बताया कि मेडिसिन विभाग में डेंगू दो मरीज भर्ती हैं। इसको लेकर 40 बेड रिजर्व रखे गए हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने के पर बेड़ों की संख्या बढ़ाई जाएगी। मेडिकेटेड मच्छरदानी भी उपलब्ध कराई गई है। ओपीडी में इलाज कराने आने वाले मरीजों में लक्षण मिलने पर जांच कराई जा रही है। उन्होंने इसे रोकने के लिए घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देने की सलाह दी है। इसके साथ ही कूलर, गमलों, बाल्टी, पुराने टायरों और अन्य बर्तनों का पानी खाली करने की सलाह दी है। दिन में भी सोते समय मछरदानी का उपयोग करने की सलाह दी।

डॉलर पर असर? बाबा रामदेव ने ट्रंप के टैरिफ बम पर साझा किया समाधान

 नई दिल्ली  अमेरिका द्वारा भारतीय आयात पर 50% टैरिफ लगाए जाने के फैसले को लेकर भारत में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर कड़ा विरोध सामने आ रहा है। योग गुरु बाबा रामदेव ने अमेरिका द्वारा भारतीय आयात पर टैरिफ लगाए जाने के विरोध में देशवासियों से अमेरिकी कंपनियों और ब्रांड्स के बहिष्कार की अपील की है। बाबा रामदेव ने ट्रंप के इस कदम को राजनीतिक दबंगई, गुंडागर्दी और तानाशाही करार दिया। कहा कि भारतवासियों की प्रतिभा का अमेरिका को अंदाजा नहीं है। इस तरह के संकट ही नए अवसर पैदा करते हैं। अगर भारत , रूस, चीन और कुछ देश मिलकर आ जाएं तो डॉलर आधी कीमत का रह जाएगा। बाबा रामदेव ने कहा, “भारतीय नागरिकों को अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ का कड़ा विरोध करना चाहिए। अमेरिकी कंपनियों और ब्रांड्स का पूरी तरह से बहिष्कार होना चाहिए। कोई भी भारतीय पेप्सी, कोका-कोला, सबवे, KFC या मैकडॉनल्ड्स के काउंटर पर नजर नहीं आना चाहिए। इतना बड़ा बहिष्कार होना चाहिए कि अमेरिका में हड़कंप मच जाए, वहां महंगाई इतनी बढ़े कि ट्रंप को खुद अपने फैसले वापस लेने पड़ें। ट्रंप ने भारत के खिलाफ जाकर बड़ी गलती की है।” भारत और चीन मिल जाएं तो डॉलर आधा बाबा रामदेव ने आगे कहा कि चुनौतियां तो नए अवसर देती है। यहां अगर किसी की नौकरी जाने की संभावना बनती है तो नए रोजगार के अवसर पैदा करने चाहिए। भारत के उद्यमियों को टैक्स, जीएसटी और तमाम तरह के रियायतें देकर मजबूती देनी चाहिए। मुझे उम्मीद है कि देश इस चुनौती से निसंदेह निपटेगा और सशक्त बनकर उभरेगा। अगर भारत, रूस, चीन और कुछ देश मिल जाएं तो डॉलर आधी कीमत का रह जाएगा। अमेरिका में ही घिरे ट्रंप गौरतलब है कि अमेरिका ने अगस्त की शुरुआत में भारत पर 25% टैरिफ लगाया था। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 27 अगस्त से लागू होने वाले अतिरिक्त 25% टैरिफ की घोषणा की। यह कदम भारत द्वारा रूस से तेल खरीद जारी रखने के कारण उठाया गया। इधर, अमेरिकी कांग्रेस की हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के डेमोक्रेट्स ने भी राष्ट्रपति ट्रंप के इस फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि भारत पर टैरिफ लगाने से अमेरिकी नागरिकों को नुकसान हो रहा है और अमेरिका-भारत संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। कमेटी ने सवाल उठाया कि “यदि ट्रंप प्रशासन ने किसी भी देश पर रूस से तेल खरीदने को लेकर सेकेंडरी सैंक्शन्स का फैसला किया होता तो बात अलग थी, लेकिन केवल भारत को ही निशाना बनाना सबसे उलझन भरा कदम है। चीन, जो रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीद रहा है, वह अब भी रियायती कीमतों पर तेल ले रहा है और उस पर किसी तरह की सजा नहीं दी गई।”  

अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति की अहम बैठक 31 अगस्त को छतरपुर में

छतरपुर  अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति के प्रदेश महासचिव दीपू सोनी ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि अधिमान्य पत्रकार नेतृत्व समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डल्लू कुमार सोनी की मुख्य उपस्थिति में यह बैठक आयोजित होगी !जिसमें राष्ट्रीय महासचिव रोहित यादव,राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमेश तिवारी एवं ए के स्वर्णकार प्रदेश सदस्यता प्रभारी,य छत्तीसगढ़ प्रदेश सदस्यता प्रभारी धर्मेंद्र वस्त्रकार, एवं प्रदेश अध्यक्ष सुनील कुमार राय के मुख्य उपस्थिति में सदस्यता अभियान के साथ-साथ बैठक आयोजित होगी यह बैठक समिति को विस्तार एवं समिति में नए पदाधिकारी का चयन के साथ-साथ  सम्मान समारोह कार्यक्रम आयोजित किया गया है

सीतामढ़ी में विपक्ष की ताकत का प्रदर्शन, यात्रा से बढ़ी NDA की मुश्किलें

सीतामढ़ी बिहार में जारी इंडिया गठबंधन की 'वोट अधिकार यात्रा' सीतामढ़ी पहुंच चुकी है। यहां आज राहुल गांधी माता जानकी का आशीर्वाद लेकर अपनी यात्रा को आगे बढ़ाएंगे। राहुल के साथ उनके गठबंधन के कई दिग्गज नेता मौजूद हैं। कार्यकर्ताओं में एक अलग जोश देखने को मिल रहा है। 'गरीब व वंचित परिवारों का वोट चोरी हो रहा' बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर दलों में सियासी घमासान मचा हुआ है। वहीं, प्रदेश में 'वोट अधिकार यात्रा' अपने पड़ाव पर आगे बढ़ रही है। यात्रा के 12वें दिन लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का कारवां सीतामढ़ी पहुंच चुका है। इससे पहले उन्होंने रुन्नी सैदपुर में आयोजित सभा को संबोधित किया। केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जमकर घेरा है। आरोप लगाया कि इसके जरिए माध्यम से गरीब व वंचित परिवारों का वोट चोरी हो रहा है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम गौरतलब है कि वाहनों के लंबे काफिले के बीच सीतामढ़ी में राहुल गांधी ने प्रवेश किया। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। जगह-जगह पुलिस के जवानों को तैनात किया गया था। राहुल गांधी की यात्रा जब शहर में प्रवेश की तो ट्रैफिक व्यवस्था को पूरी तरीके से डायवर्ट कर दिया गया था। 28 अगस्त को राहुल गांधी सीतामढ़ी के रीगा से निशाना साधेंगे। उससे पहले माता जानकी के मंदिर में पूजा अर्चना करेंगे। रीगा से बैरगनिया तक वोटर अधिकार यात्रा के तहत रैली करेंगे। राहुल गांधी के साथ तेजस्वी यादव ,मुकेश सहनी और दीपांकर भट्टाचार्य मौजूद है।

राधा अष्टमी पर बरना में विशेष समारोह, भक्तों में उत्साह का माहौल

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय संगिनी राधारानी का जन्म हुआ था. जहां एक ओर जन्माष्टमी पर संपूर्ण भारत में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है, वहीं राधा अष्टमी विशेष रूप से बरसाना, वृंदावन और मथुरा में भव्य उत्सव का रूप ले लेती है. पंचांग के अनुसार इस वर्ष राधा अष्टमी का पर्व 31 अगस्त 2025, रविवार को मनाया जाएगा. चलिए जानते हैं इस दिन का धार्मिक महत्व. बरसाना का महत्व बरसाना, मथुरा के पास स्थित एक छोटा सा गांव, राधा रानी का जन्मस्थान होने के कारण विशेष महत्व रखता है. यहां के लोग राधा रानी को अपनी आराध्य देवी मानते हैं और उनके जन्मोत्सव को एक बड़े पर्व के रूप में मनाते हैं. इस दिन बरसाना की गलियां, मंदिर और घर रंग-बिरंगी रोशनी से सजे होते हैं, और यहां का माहौल राधा रानी की भक्ति में डूबा रहता है. राधा अष्टमी का विशेष उत्सव राधा अष्टमी के दिन बरसाना में कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं. सुबह से ही, भक्तजन राधा रानी के मंदिर में दर्शन के लिए कतार में लग जाते हैं. इस दिन, मंदिर में राधा रानी की प्रतिमा का विशेष श्रृंगार किया जाता है, जिसमें उन्हें सुंदर वस्त्र, आभूषण और फूलों से सजाया जाता है. इसके बाद, भगवान कृष्ण और राधा रानी की मूर्तियों को पालने में झुलाया जाता है. इस दिन, भक्तजन राधा रानी के जन्मोत्सव को मनाने के लिए रासलीला, भजन, और कीर्तन का आयोजन करते हैं. कई लोग दान-पुण्य करते हैं और गरीबों को भोजन कराते हैं. इस दिन, लोग विशेष पकवान, जैसे कि खीर, पूरी, और लड्डू बनाते हैं, जिन्हें राधा रानी को भोग लगाने के बाद प्रसाद के रूप में बांटा जाता है. पूजा विधि और व्रत नियम राधा अष्टमी पर भक्त प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं. घर या मंदिर में राधा-कृष्ण की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराकर पुष्प और वस्त्रों से सजाया जाता है. इसके बाद धूप-दीप, नैवेद्य और भोग अर्पित किया जाता है.व्रती दिनभर निराहार रहकर रात्रि में व्रत का समापन करते हैं. मान्यता है कि इस दिन राधा नाम का स्मरण करने मात्र से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं. राधा अष्टमी का महत्व हिंदू धर्म में राधारानी को भक्ति और प्रेम की साक्षात स्वरूप माना गया है. पुराणों के अनुसार, राधा बिना कृष्ण अधूरी हैं और कृष्ण बिना राधा. यही कारण है कि राधा-कृष्ण को सदा साथ में पूजा जाता है. इस दिन भक्त राधारानी के प्रति अपनी भक्ति अर्पित करते हैं और मान्यता है कि उनकी पूजा से जीवन में प्रेम, सुख, शांति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है.

OBC आरक्षण पर भोपाल में बड़ी बैठक, कांग्रेस-सपा-आप समेत कई दल हुए शामिल

भोपाल  मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण मामले में 6 साल पहले कानून बन गया था। लेकिन अभी तक नौकरी में 27 फीसदी आरक्षण नहीं मिल पा रहा है। वहीं, आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट में घिरने के बाद सरकार ने इस समस्या का हल निकालना शुरू कर दिया है। ओबीसी आरक्षण पर हल खोजने के लिए सीएम हाउस में सर्वदलीय बैठक बुलाई गई। सभी पार्टी के नेताओं के बीच शुरू हुई चर्चा खत्म हो गई है। गुरुवार की सुबह मुख्यमंत्री निवास के समत्व भवन में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में प्रदेश में ओबीसी के सदस्यों को आरक्षण के संबंध में सर्वदलीय बैठक हुई। इस बैठक में सभी दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। साथ ही ओबीसी आरक्षण मुद्दे पर खुलकर चर्चा की। सर्वदलीय बैठक में ये नेता हुए शामिल इस बैठक में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, कमलेश्वर पटेल और सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट रामेश्वर ठाकुर, वरुण ठाकुर, समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मनोज यादव, आम आदमी पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष रानी अग्रवाल मंत्री प्रहलाद पटेल जैसे मध्य प्रदेश ओबीसी आयोग के अध्यक्ष रामकृष्ण कुसुमरिया मंत्री कृष्णा गौर जैसे दिग्गज नेता मौजूद रहे। चिंताएं और आवश्यकताएं हुई स्पष्ट इस बैठक में सभी नेताओं ने अपने-अपने मत सरकार को दिए। बैठक के दौरान विभिन्न दलों ने अपनी चिंताओं और आवश्यकताओं को स्पष्ट किया। इसके चलते मुद्दे पर दलों के बीच गहन विचार विमर्श हुआ। सीएम की अध्यक्षता में हुई इस बैठक से आरक्षण मुद्दे में आगे की नीतिगत दिशा तय करने में सहायता मिलेगी। इस बैठक का मूल उद्देश्य ही सभी दलों के विचारों को सुनना और सामंजस्यपूर्ण समाधान निकालना था। सीएम डॉक्टर मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार तो हमेशा से ही ओबीसी को 27% आरक्षण देना चाहती है लेकिन सुप्रीम कोर्ट में मामला होने की वजह से कुछ समस्याएं आ रही थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे का हाल सभी दल मिलकर निकालेंगे। इससे समन्वय की स्थिति बनेगी और ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की राह आसान हो जाएगी। जीतू पटवारी ने किए तीखे सवाल बैठक शुरू होने से पहले मीडिया से बात करते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि जिन लोगों ने गड़बड़ की, क्या उनको सजा मिलेगी? पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, बीजेपी सरकार ने कांग्रेस द्वारा दिए आरक्षण को क्यों रोका? नेता प्रतिपक्ष उमार सिंघार का तंज वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि 6 साल पहले कमल नाथ की सरकार में आदेश हुआ था। अध्यादेश भी आया था। इस तरह से पुराने घर में नारियल फोड़कर 27 प्रतिशत आरक्षण का गृह प्रवेश कर रहे हैं। सर्वदलीय बैठक की आवश्यकता तब पड़ती है जब विवाद हो, आपस में समन्वय न हो। कांग्रेस तो पहले से ही तैयार है। कांग्रेस ही अध्यादेश और कानून लेकर आई थी। क्या बोले अन्य पार्टी के नेता समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ मनोज यादव ने कहा पिछड़े वर्ग को आबादी के हिसाब से 52 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए। लेकिन सरकार 14 प्रतिशत दे रही है। 13 प्रतिशत होल्ड आरक्षण तत्काल प्रभाव से लागू करें। वहीं, आम आदमी पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष रानी अग्रवाल ने कहा कि 27 प्रतिशत आरक्षण तो प्रदेश में लागू हो गया था। यह ओबीसी का हक है और उसे मिलना ही चाहिए। केंद्र-राज्य में बीजेपी सरकार है। चाहे तो 27 प्रतिशत आरक्षण हो सकता है पर वह लटकाए हुए हैं।

बनारस में गंगा-वरुणा का प्रकोप, एक मंजिल तक जलमग्न हुए घर

वाराणसी वाराणसी में गंगा के पलट प्रवाह से वरुणा में आई बाढ़ ने हाहाकार मचा दिया है। कई घर एक मंजिल तक डूब गए हैं। हालांकि राहत की बात यही है कि कई दिनों के बाद गुरुवार की सुबह गंगा स्थिर हो गई हैं। जलस्तर चेतावनी बिंदु को तो बुधवार की सुबह ही पार कर गया था लेकिन खतरे के निशान से करीब 30 सेंटीमीटर नीचे पानी स्थिर हो गया है। इससे लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि अभी गंगा के घटने का तो कोई संकेत नहीं मिल रहा है। सरकारी बुलेटिन के अनुसार भी वाराणसी में शुक्रवार को गंगा के लेवल खतरे के निशान को पार करते हुए 71.4 मीटर तक जाने की आशंका जताई गई है। फिलहाल जलस्तर 70.92 मीटर पर स्थिर हुआ है। यहां चेतावनी बिंदु 70.262 और खतरे का निशान 71.262 है। सोमवार को दस सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा जलस्तर बुधवार को तीन सेमी तक गिर गया था। इसके बाद बुधवार की देर रात रफ्तार केवल एक सेमी प्रतिघंटे रह गई। अब स्थिर हो गया है। गंगा में वेग से वरुणा के बेसिन में बने मकान पूरी तरह से पानी में घिर गए हैं। आपदा नियंत्रण कंट्रोल रूम के मुताबिक बाढ़ राहत शिविरों में मंगलवार को वरुणा किनारे के 26 परिवारों के 108 लोग और बुधवार को 483 परिवारों के 2080 लोग पहुंचे। दो दिन में कुल 509 परिवारों के 2188 सदस्य राहत शिविरों में शिफ्ट हुए हैं। बढ़ाव के कारण गंगा का रुख अब तटवर्ती घाटों और किनारों पर बसी कॉलोनियों की ओर होने लगा था। वरुणा के पानी ने आबादी की ओर रुख करते हुए पुरानापुल इलाके के चार दर्जन घरों में बाढ़ को अपनी आगोश में ले लिया था।   वरुणा किनारे रहने वाले सैकड़ों परिवारों की मुसीबतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इस सीजन में यह तीसरी बार है जब पानी बढ़ने से लोगों को घर खाली करने पड़ रहे हैं। लोग सुरक्षित जगह पलायन कर रहे हैं। अभी अपने घरों में शिफ्ट हुए लोगों को 15 दिन भी नहीं हुए कि उन्हें फिर अपना घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को हो रही है। सिर में गठरी लेकर और गोद में बच्चों को लेकर वह सुरक्षित स्थान पर पलायन करने को मजबूर हैं। गंगा में वृद्धि से चिरईगांव के ढाब सहित किनारे बसे गांवों के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालांकि ढाब के किनारे स्थित सोता में पानी अभीं भी दोनों तटों तक सीमित है लेकिन नालों के माध्यम से निचली भूमि पर तेजी से फैल रहा है। बुधवार शाम तक ढाब क्षेत्र में रामपुर की दलित बस्ती पानी से घिर गई। राजस्व कर्मियों के साथ बीडीओ वीरेन्द्र नारायण द्विवेदी मौके पर पहुंचे और प्रभावित आठ परिवारों के 50 सदस्यों को रामपुर प्राथमिक विद्यालय में बने बाढ़ राहत शिविर में पहुंचाया। नाले के रास्ते सोता के इस पार छितौना और जाल्हूपुर के निचले हिस्से में भी पानी भरना शुरू हो गया है। गांव के प्रभावित किसान लालजी यादव, सत्येन्द्र, चन्द्र शेखर, महेंद्र,राम अशीष,कमला, जयगोविंद आदि ने बताया कि पिछली बाढ़ हटने के बाद धान की फसलों में निकल रहे कल्ले भी इस बार चौपट हो जाएंगे। उधर, रोहनिया क्षेत्र के बेटावर गांव में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे घुसने लगा है। पहले आई बाढ़ से धान की फसल खराब हो गई थी। अब इसी तरह से बढ़ाव रहा तो धान की फसल व मवेशियों के हरे चारे पूरी तरह नष्ट हो जाएंगे। लेखपाल आलोक पाठक ने बताया कि अभी गांव के निचले हिस्से में पानी है रोड पर नहीं आया है लेकिन बढ़ाव तेजी से हो रहा है गांव का मौका-मुआयना किया गया है। बाढ़ के हालात पर नजर बनी हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 29 अगस्त को दो दिनी दौरे पर वाराणसी आ रहे हैं। वे यहां मॉरीशस प्रधानमंत्री के आगमन की तैयारी और बाढ़ से बचाव एवं राहत कार्यों का जायजा लेंगे। मुख्यमंत्री शाम करीब 4:30 बजे प्रतापगढ़ से हेलीकॉप्टर से पुलिस लाइन आएंगे। यहां से सर्किट हाउस जाएंगे। आधे घंटे विश्राम के बाद सवा पांच बजे से मॉरीशस प्रधानमंत्री के 11 सितंबर की बनारस में प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारी की समीक्षा करेंगे। बैठक के पश्चात वह काशी विश्वनाथ और कालभैरव मंदिर में दर्शन-पूजन करने जाएंगे।  

प्रभारी सचिव बाढ़ प्रभावित जिलों का भ्रमण कर राहत कार्यों का करें निरीक्षण : मुख्यमंत्री साय

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर संभाग के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के प्रत्येक बाढ़ प्रभावित परिवार तक हर संभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों की पीड़ा को शीघ्र कम करना प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोगों को यह महसूस होना चाहिए कि संकट की इस घड़ी में प्रशासन उनके साथ मजबूती से खड़ा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बस्तर संभाग के बाढ़ प्रभावित जिलों—बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के कलेक्टरों व वरिष्ठ अधिकारियों से राहत एवं पुनर्वास कार्यों की विस्तृत समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को निर्देशित किया  कि बाढ़ से हुई जनहानि और पशुहानि प्रभावित परिवारों को राहत राशि बिना विलंब के उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त आवासों के सुधार हेतु तिरपाल, बाँस-बल्ली और राहत राशि का वितरण प्राथमिकता से किया जाए। मुख्यमंत्री ने  कहा कि बाढ़ प्रभावित जिलों के प्रभारी सचिव अपने-अपने जिलों का भ्रमण करें और राहत कार्यों का सतत पर्यवेक्षण सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि प्रभावित गाँवों से सड़क संपर्क बहाल करने, क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों की मरम्मत और बिजली आपूर्ति पुनर्स्थापना का कार्य युद्धस्तर पर किया जाए। उन्होंने कहा कि बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की शीघ्र बहाली राहत कार्यों की सफलता की कुंजी है। समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव अमिताभ जैन और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह भी उपस्थित थे। मुख्य सचिव जैन ने कलेक्टरों से कहा कि यदि उन्हें  शासन स्तर से अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता हो तो वे तुरंत प्रस्ताव भेजें, ताकि शासन स्तर पर शीघ्र निर्णय लिया जा सके। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह ने कलेक्टरों को निर्देश दिया कि राहत शिविरों में भोजन, कपड़े और सूखा राशन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही, उन्होंने कहा कि राहत शिविरों और प्रभावित गाँवों में स्वास्थ्य शिविर और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता भी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। बैठक के प्रारंभ में राजस्व सचिव रीना बाबासाहेब कंगाले ने मुख्यमंत्री को बस्तर में बाढ़ की स्थिति और अब तक किए गए राहत कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी बाढ़ प्रभावित जिलों को अतिरिक्त राशन का आबंटन भी कर दिया गया है और सामग्री प्रभावित परिवारों तक पहुँचाई जा रही है। इसके उपरान्त मुख्यमंत्री साय ने चारों जिलों के कलेक्टरों से सीधे संवाद कर उनके-अपने जिलों में चल रहे राहत एवं पुनर्वास कार्यों की प्रगति के बारे में जानकारी ली। कलेक्टरों ने बताया कि अब अधिकांश बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में पानी उतरने लगा है और स्थिति नियंत्रण में है। समीक्षा बैठक में बताया गया कि वर्तमान में प्रशासन का पूरा ध्यान राहत और पुनर्वास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने पर केंद्रित है। समीक्षा बैठक में लोक निर्माण विभाग के सचिव कमलप्रीत सिंह, बस्तर संभाग के आयुक्त डोमन सिंह और पुलिस महानिरीक्षक पी. सुन्दरराज उपस्थित थे।

उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने वैष्णोदेवी में हुई दुर्घटना पर शोक व्यक्त किया

भोपाल  उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने वैष्णोदेवी में हुए भू-स्खलन की घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया। इस दुर्घटना में मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम भीलखेडी से गये तीर्थ यात्रियों के घायल होने और तीन लोगों की मृत्यु की जानकारी प्राप्त हुई है। देवड़ा ने दिवंगतों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए  घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ और सकुशल रहने की प्रार्थना की है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने घटना को लेकर मंदसौर कलेक्टर से चर्चा कर हर संभव मदद करने के लिये निर्देशित किया है।

सर्वसम्मति से पास हुआ प्रस्ताव: शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की सिफारिश

रांची दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत रत्न देने का प्रस्ताव गुरुवार को मानसून सत्र के आखिरी दिन विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित हो गया। झारखंड सरकार के समाज कल्याण मंत्री दीपक बिरुआ ने सदन में शिबू सोरेन को भारत रत्न देने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि, शिबू सोरेन ने झारखंड आंदोलन के लिए अपना जीवन तमाम कर दिया। उनके संघर्ष से नया राज्य और नई पहचान मिली। मंत्री ने कहा कि 4 अगस्त को उनका निधन हो गया। प्रस्ताव करता हूं कि उन्हें भारत रत्न देने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा जाए। भारत रत्न के प्रस्ताव पर बोलते हुए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि हम संकल्प के साथ हैं। उन्होंने मांग रखी कि झारखंड आंदोलन के प्रणेता और झारखंड आंदोलन की नींव रखने वाले मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा और विनोद बिहारी महतो का नाम जरूर जोड़ें। वहीं संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने सुझाव दिया कि प्रस्ताव में यह बात जोड़ी जाए कि भारत की आजादी में आदिवासी समाज का बहुमूल्य योगदान है। लेकिन आदिवासी समाज के किसी आंदोलनकारी, राजनीतिज्ञ, बुद्धिजीवी को आज तक भारत रत्न नहीं मिला। ऐसे में शिबू सोरेन को भारत रत्न दिया जाए, यह जरूर जोड़ा जाए। प्रस्ताव पर स्वीकार रबीन्द्रनाथ महतो में सदन के समक्ष रखा। जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। बता दें कि झारखंड आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले दिशोम गुरू शिबू सोरेन का लंबी बीमारी के बाद 4 अगस्त को सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया था। उनके निधन के बाद पार्थिव शरीर को झारखंड लाया गया और इसके बाद उनके पैतृक गांव नेमरा में अंतिम संस्कार किया गया था। उनके निधन के बाद से ही उन्हें भारत रत्न देने की मांग जोर पकड़ने लगी थी। गुरुवार को उनको भारत रत्न देने की मांग का प्रस्ताव विधानसभा में आया और सर्वसम्मति से उस प्रस्ताव को पारित कर दिया गया।