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ये 5 क्रिकेटर नहीं बन पाएंगे एशिया कप का हिस्सा, टीम इंडिया अगले हफ्ते करेगी उड़ान

नई दिल्ली  भारतीय टीम आगामी एशिया कप में हिस्सा लेने के लिए चार सितंबर को दुबई में एकत्रित होगी। सूर्यकुमार यादव के नेतृत्व वाली भारतीय टीम 10 सितंबर को अपने अभियान की शुरुआत करेगी। हालांकि बीसीसीसीआई ने कथित तौर पर फैसला किया है कि आगामी एशिया कप 2025 के लिए चुने गए पांच स्टैंडबाय खिलाड़ी यशस्वी जायसवाल, प्रसिद्ध कृष्णा, वाशिंगटन सुंदर, रियान पराग और ध्रुव जुरेल मुख्य टीम के साथ दुबई नहीं जाएंगे।   भारत टूर्नामेंट के अपने पहले मैच में 10 सितंबर को संयुक्त अरब अमीरात से भिड़ेगा और उसके बाद 14 सितंबर को दुबई में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान का सामना करेगा। सुपर फोर चरण से पहले उसका तीसरा ग्रुप मैच 19 सितंबर को ओमान के खिलाफ होगा। जब बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी से पूछा गया कि क्या कोई स्टैंडबाय खिलाड़ी टीम के साथ यात्रा करेगा, तो अधिकारी ने पीटीआई को बताया, "नहीं, स्टैंडबाय खिलाड़ी मुख्य टीम के साथ दुबई नहीं जाएंगे।" अधिकारी के मुताबिक जरूरत पड़ने पर ही खिलाड़ी को बुलाया जाएगा। भारतीय टीम में शुभमन गिल, अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन बतौर ओपनर खेल सकते हैं। यशस्वी जायसवाल की जरूरत तभी पड़ेगी जब उनमें से कोई चोटिल हो। यही बात प्रसिद्ध पर भी लागू होती है, जो जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह या हर्षित राणा के चोटिल होने पर खेल सकते हैं। गौरतलब है कि भारत ने अपनी टीम में केवल 15 खिलाड़ियों को शामिल किया, जबकि एशिया कप के नियम के अनुसार उन्हें 17 खिलाड़ियों की टीम चुनने की अनुमति थी। एशिया कप के लिए भारतीय टीम में शामिल अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा गुरुवार को शुरू हुए दलीप ट्रॉफी क्वार्टर फाइनल में उत्तर क्षेत्र की तरफ से पूर्व क्षेत्र के खिलाफ जबकि कुलदीप यादव मध्य क्षेत्र की तरफ से उत्तर पूर्व क्षेत्र के खिलाफ खेल रहे हैं। सूर्यकुमार एशिया कप में 15 सदस्यीय भारतीय टीम की अगुवाई करेंगे जबकि टेस्ट कप्तान शुभमन गिल उनके उप कप्तान होंगे। एशिया कप के सभी मैच दो स्थान दुबई और अबुधाबी में आयोजित किए जाएंगे।  

महिलाओं के लिए नई उम्मीद: नीतीश की रोजगार स्कीम लॉन्च, तेजस्वी ने किया अलग योजना का ऐलान

पटना  बिहार में तेजस्वी यादव और कांग्रेस के ‘माई बहिन मान योजना’ वादे के बाद से जिस तरह की संभावना जताई जा रही थी, उसी अनुरूप सीएम नीतीश कुमार ने महिलाओं को ध्यान में रखते हुए ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ शुरू करने की घोषणा कर दी है। शुक्रवार को कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी और सितंबर से योजना चालू हो जाएगी। महिलाओं की मदद के लिए सरकार इस स्कीम के तहत परिवार की एक औरत को 10 हजार रुपये देगी, जिससे वो अपनी पसंद का रोजगार शुरू कर सके। छह महीने बाद उस महिला के रोजगार का आकलन करके जरूरत हुई तो सरकार 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता भी करेगी। ‘माई बहिन मान योजना’ में सरकार बनने पर महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये नकद देने का वादा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि महिलाओं के हित में एक महत्वपूर्ण और अभूतपूर्व निर्णय लिया गया है, जिसके सकारात्मक दूरगामी परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ का मुख्य लक्ष्य राज्य के सभी परिवारों की एक महिला को उनकी पसंद का रोजगार शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता देना है। इस योजना के तहत आवेदक महिला को पहली किस्त के तौर पर 10 हजार रुपये मिलेंगे, जिस राशि से उसे स्व-रोजगार शुरू करना है। सरकार ने ग्रामीण विकास विभाग को इसका नोडल विभाग बनाया है जबकि निगर विकास और आवास विभाग को जरूरत के हिसाब सहयोग देना है। नीतीश कुमार ने घोषणा की है कि अगले महीने यानी सितम्बर 2025 से ही महिलाओं के खाते में फंड ट्रांसफर शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि महिलाओं द्वारा रोजगार शुरू करने के 6 माह के बाद आकलन करते हुए 2 लाख रुपए तक की अतिरिक्त सहायता आवश्यकतानुसार दी जा सकेगी। इसके साथ ही सरकार गांव से शहर तक महिलाओं के उत्पादों की बिक्री के लिए हाट बाजार विकसित करेगी। नीतीश ने उम्मीद जताई है कि इस योजना से न सिर्फ महिलाओं की स्थिति मजबूत होगी बल्कि राज्य के अंदर ही रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और मजबूरी में काम के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। नीतीश कुमार और उनकी सरकार ने इससे पहले तेजस्वी यादव के ज्यादातर चुनावी वादों पर कुछ ना कुछ ऐक्शन ले रखा है। तेजस्वी ने 200 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा किया है तो नीतीश ने 1 अगस्त से 125 यूनिट फ्री बिजली देना शुरू कर दिया है। सरकारी नौकरी पर दोनों के बीच श्रेय की लड़ाई चल ही रही थी कि जुलाई में नीतीश कैबिनेट ने अगले पांच साल में एक करोड़ नौकरी और रोजगार देने का संकल्प पास कर दिया। नीतीश सरकार ने जून में वृद्धा, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये कर दिया। तेजस्वी ने सरकार बनने पर 1500 करने का वादा किया है। तेजस्वी ने सरकारी नौकरियों में 100 फीसदी डोमिसाइल नीति का वादा किया है तो नीतीश कैबिनेट ने 5 अगस्त को शिक्षक बहाली में 84.4 फीसदी पद बिहार के निवासियों के लिए आरक्षित कर दिया। 60 परसेंट जातीय आरक्षण के ऊपर नीतीश ने इससे पहले ही अनारक्षित 40 फीसदी पदों के अंदर 35 फीसदी पद बिहार की महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया था, जिससे प्रभावी डोमिसाइल 74 फीसदी तक पहुंच गया था। अनारक्षित कोटे में बची 65 फीसदी सीटों पर अगस्त में 40 फीसदी पद बिहार से मैट्रिक या इंटर करने वालों के लिए रिजर्व कर दिया गया था, बोर्ड चाहे कोई भी हो।

भारत की पहली प्रदूषण-रहित ट्रेन का आगाज, हरियाणा से होगी शुरुआत

हरियाणा  भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर के रूट पर सितंबर 2025 में ट्रायल रन के लिए तैयार है। इसका निर्माण चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में किया गया है, और यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है।  इसे भारतीय रेलवे की अभूतपूर्व पहल माना जा रहा है। यह पर्यावरण के अनुकूल कदम है। ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक में ऑक्सीजन के साथ मिलकर बिजली उत्पन्न की जाती है, जिसमें पानी और भाप खर्च होती है। इसका कार्बन उत्सर्जन शून्य रहता है। यह डीजल ट्रेनों की तुलना में प्रदूषण-मुक्त है।    यह ट्रेन 1,200 हॉर्सपावर की क्षमता वाली होगी जो इसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक बनाती है. अन्य देशों (जैसे जर्मनी) की हाइड्रोजन ट्रेनें आमतौर पर 500-600 हॉर्सपावर की होती हैं। ट्रेन में 8 यात्री कोच और 2 हाइड्रोजन स्टोरेज कोच हैं जो एक बार में 2,638 यात्रियों को ले जा सकती है. 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने में सक्षम है। किलो हाइड्रोजन इस ट्रेन को 4.5 लीटर डीजल के बराबर माइलेज देता है. 8-10 कोच खींचने के लिए 2.4 मेगावाट बिजली की आवश्यकता होती है, जिसके लिए ट्रेन में दो पावर प्लांट लगाए गए हैं।    ट्रेन का निर्माण चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में किया गया है, जो 1955 में स्थापित भारत की पहली कोच उत्पादन इकाई है. ट्रेन का डिजाइन लखनऊ के अनुसंधान, अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) द्वारा तैयार किया गया है. यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। इस ट्रेन की अनुमानित लागत 82 करोड़ रुपये है. भारतीय रेलवे ने ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ पहल के तहत 35 ऐसी ट्रेनों के लिए 2,800 करोड़ रुपये और बुनियादी ढांचे के लिए 600 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।   

ट्रंप को करारा झटका, चावल के दाने पर रुक गई करोड़ों की डील

नई दिल्ली  हर देश की अपनी कुछ सांस्कृतिक और लोक मान्यताएं होती हैं. इसकी वजह से वो किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करते हैं. ये न सिर्फ राजनीतिक बल्कि कई बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलाव ले आती हैं. कई बार ये सामने आ जाती हैं तो कई बार समझने पर पता चलता है कि जो दिख रहा है, वैसा है नहीं. कुछ ऐसा ही चल रहा है इस वक्त जापान में, जहां अमेरिका से साथ टैरिफ घटाने पर होने वाली एक डील होते-होते रुक गई. 550 अरब डॉलर के मेगा निवेश समझौते की प्रक्रिया अचानक ही रुक गई. जापान के कारोबार सलाहकार रयोसेई अकाजावा ने अमेरिका जाना था लेकिन उनका दौरा आखिरी मिनट में रद्द कर दिया. अकाजावा का यह दौरा अमेरिकी वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक के साथ फाइनल बातचीत के लिए तय था. निवेश पैकेज की घोषणा इसी हफ्ते की जानी थी, जिसमें मुनाफे के बंटवारे जैसी अहम बातें तय होनी थी. क्या है ये पूरा निवेश समझौता, जो थम गया अमेरिका और जापान के बीच सहमति बनी थी कि अगर जापान यह 550 अरब डॉलर का मेगा इनवेस्टमेंट करता है, तो टोक्यो पर लगने वाले टैरिफ 25% से घटाकर 15% कर दिए जाएंगे. हालांकि इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक अजीबोगरीब बयान देते हुए कहा – ‘यह पैसा हमारा है, हम जैसे चाहें वैसे लगाएंगे’. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस इनवेस्टमेंट का 90 फीसदी मुनाफा अपने पास रखेगा, बस यहीं जापान की बात बिगड़ गई. जापानी सरकार की ओर से कहा गया है कि कुछ अहम बिंदुओं पर सहमति नहीं बनने की वजह से दौरा रद्द किया गया है. इसमें ऑटो पार्ट्स पर तुरंत टैरिफ हटाना और पुराने कार्यकारी आदेश में बदलाव करना शामिल है. ‘चावल’ का है अहम रोल इस पूरे मामले में अहम भूमिका जापानी चावल की है. दरअसल जापान और अमेरिका के समझौते की प्रक्रिया मई से ही चल रही है. अब मु्द्दा ये है कि डोनाल्ड ट्रंप हमेशा की तरह अपनी शर्तों पर निवेश चाहते हैं. उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर ये भी लिख दिया था कि जापान ने अमेरिका के लिए अपना एग्रीकल्चर सेक्टर खोल दिया है. यहां मामला सीधा चावल से जुड़ा था. जापानी किसान कभी नहीं चाहते हैं कि अमेरिका का चावल जापानी बाजारों में आए, जिसे लेकर पहले भी विरोध हो चुका है. दशकों से यहां अमेरिकी चावल का विरोध होता रहा है क्योंकि उन्हें लगता है कि ये सस्ता चावल किसानों के बाजार को खत्म कर देगा. जापानी लोग स्टिकी राइस खाते हैं और वे इसे पौष्टिक मानते हैं. दूसरी तरफ चावल जापान में सांस्कृतिक पहचान माना जाता है. जापानी लोग इसे अपने गांव से जोड़कर देखते हैं. भले ही जापान में बाकी भोजन आयात होता हो लेकिन उनकी कोशिश रहती है कि चावल घरेलू उत्पादन तक ही सीमित रहे, भले ही उनकी कीमतें ज्यादा हों. जापान का चावल आयात वैसे तो जापान में चावल का आयात होता लेकिन अमेरिकी चावल का ज्यादा विरोध है क्योंकि ये सस्ता होता है. जापान टैरिफ बढ़ने की सूरत में जापान से चावल का आयात कम कर चुका ह, जिसे अमेरिका बढ़ाना चाहता है. वहीं भारत का जापान में चावल का निर्यात पिछले दो सालों में बढ़ा है. साल 2024 में जापान ने भारत से $5.74 मिलियन का चावल आयात किया जो साल 2023 ( $2.08 मिलियन) की तुलना में दोगुने से ज्यादा था. ऐसे में अमेरिका से अगर जापान चावल आयात नहीं करता, तो भारत से उसकी डील हो सकती है.

बेरोजगारों के लिए खुशखबरी: MP में महीने के ₹1500 पाने का आसान तरीका

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के बेरोजगार युवाओं को आर्थिक सहयोग देने के लिए एमपी बेरोजगारी भत्ता योजना 2025 शुरू की है। इस योजना के तहत योग्य आवेदकों को हर महीने ₹1,500 की सहायता राशि दी जाएगी, जिससे वे नौकरी की तलाश के दौरान अपनी दैनिक ज़रूरतें पूरी कर सकें और कौशल विकास पर ध्यान दे सकें। योजना के मुख्य लाभ आर्थिक सहयोग से युवाओं को नौकरी की तैयारी में मदद। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और आसान। योग्य उम्मीदवारों को समय पर सीधा बैंक खाते में राशि का ट्रांसफर। पात्रता मानदंड इस योजना का लाभ पाने के लिए आवेदक को निम्न शर्तें पूरी करनी होंगी: मध्य प्रदेश का स्थायी निवासी होना आवश्यक है। आयु 21 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए। न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास। परिवार की वार्षिक आय ₹3 लाख से कम होनी चाहिए। वर्तमान में किसी भी प्रकार की नौकरी में न हों। आवश्यक दस्तावेज़ आवेदन के समय इन कागज़ों की जरूरत होगी: आधार कार्ड पैन कार्ड निवास प्रमाण पत्र आय प्रमाण पत्र 12वीं की मार्कशीट बैंक खाता विवरण पासपोर्ट साइज़ फोटो मोबाइल नंबर जन्म प्रमाण पत्र आवेदन की प्रक्रिया एमपी रोजगार पोर्टल पर जाएं। "नया पंजीकरण" विकल्प चुनें। मांगी गई जानकारी को सही तरीके से भरें। आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड करें। आवेदन सबमिट कर भविष्य के लिए रसीद सुरक्षित रखें।

मानसून में बंद हवाई सफर दोबारा शुरू, भोपाल एयरपोर्ट से Indigo-Air India Express की नई उड़ानें

भोपाल  मानसून के कारण दो महीने पहले बंद हुई उड़ानें फिर से शुरू होंगी। इंडिगो ने एयरपोर्ट अथॉरिटी को इसकी सहमति दे दी है। माना जा रहा है कि दिल्ली, बेंगलुरू तक अतिरिक्त उड़ान फिर से शुरू होगी। रायपुर उड़ान जल्द ही प्रतिदिन संचालित होगी। उड़ानें बढ़ने से किराये में भी कमी हो सकती है। मानसून के दौरान यात्रियों की संख्या कम होने के कारण एयरलाइंस कंपनियां उड़ानों को री-शेड्यूल कर देती हैं। जहां अधिक यात्री मिलते हैं वहां अतिरिक्त उड़ानें संचालित की जाती हैं। इस बार भी दो माह पहले भोपाल से दिल्ली, बेंगलुरू तक उड़ानें कम हो गई थीं। रायपुर उड़ान को सप्ताह में सात दिन से कम कर तीन दिन कर दिया गया था। एयरपोर्ट डायरेक्टर रामजी अवस्थी ने बताया कि 21 सितंबर से दिल्ली की दोपहर की उड़ान फिर से शुरू हो जाएगी। बैंगलुरू मार्निग उड़ान इसी दिन से सप्ताह के सभी सात दिन संचालित होगी। रायपुर उड़ान भी सप्ताह के सभी सातों दिन संचालित होंगी। विंटर में बढ़ेगी एयर कनेक्टिविटीअक्टूबर के अंतिम सप्ताह से लागू हो रहे विंटर शेड्यूल में भोपाल से एयर कनेक्टिविटी बढ़ने की संभावना है। एयर इंडिया एक्सप्रेस ने बेंगलुरू, हैदराबाद एवं मुंबई रूट पर उड़ानें शुरू करने के साथ भोपाल में दस्तक देने की तैयारी की है। इंडिगो भी गोवा, नवीं मुंबई एवं नोएडा तक उड़ान शुरू कर सकता है। रीजनल कनेक्टिविटी योजना के तहत फ्लायबिग रीवा एवं दतिया उड़ान शुरू करने पर विचार कर रहा है। वर्तमान में भोपाल से प्रतिदिन साढ़े तीन से चार हजार यात्री सफर करते हैं। विंटर शेड्यूल में यह संख्या पांच हजार से अधिक हो सकती है।

मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन में बदलाव, नई टीम के साथ सिंधिया परिवार का वारिस अध्यक्ष बनने को तैयार

भोपाल  मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के चुनाव छह साल बाद 2 सितंबर को होने जा रहे है। इस बार कार्यकारिणी में सभी नए चेहरे होंगे, क्योकि लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के अनुसार दो बार पद पर रहने वाले पदाधिकारी तीसरी बार नहीं रह सकते है। इस बार भी चुनाव निर्विरोध होने के आसार है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे महाआर्यमन सिंधिया का नाम एमपीसीए अध्यक्ष के लिए चर्चा में है। अभी तक अन्य किसी सदस्य ने अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी नहीं की है। इसके अलावा सचिव के पद की जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय अंपायर सुधीर असनानी की जा सकती है। वर्तमान में एमपीसीए अध्यक्ष अभिलाष खांडेकर है। शुक्रवार से चुनाव के लिए नामांकन फार्म मिलना शुरू हो जाएंगे। 2 सितंबर को एजीएम में नए अध्यक्षों के नामों की घोषणा हो जाएगी। महाआर्यमन के लिए की जा रही थी जमीन तैयार   सिंधिया परिवार की तीसरी पीढ़ी एमपीसीए के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालने की तैयारी कर रही है। इससे पहले वर्षों तक पूर्व केंद्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया एमपीसीए के अध्यक्ष रहे। उनके निधन के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया अध्यक्ष रहे।दो बार उन्हें मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की चुनौती का सामान भी करना पड़ा। विजयवर्गीय की दावेदारी के कारण एमपीसीए में दो बार चुनाव हुए, लेकिन विजयवर्गीय सिंधिया को हरा नहीं पाए। अब दोनो ही एक ही दल में है। इस कारण एमपीसीए में सर्वसम्मति से कार्यकारिणी घोषित हो रही है। एमपीसीए के अध्यक्ष के दावेदार महाअार्यम सिंधिया के लिए उनके पिता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पहले ही जमीन तैयार कर ली थी। उन्हे पहले ग्वालियर संभागीय एसोसिएशन का उपाध्यक्ष बनाया गया। वे दो बार ग्वालियर में मध्य प्रदेश लीग सफलतापूर्वक आयोजित करवा चुके है। अब एमपीसीए की कमान सौंपने की तैयारी की जा रही है।  

राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता का आयोजन MP में, 15 खेल होंगे शामिल, शेड्यूल जारी

भोपाल स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इण्डिया ने 69वीं राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता के आयोजन में मध्यप्रदेश को 15 खेल विधाओं की राष्ट्रीय प्रतियोगिता के आयोजन का दायित्व सौंपा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इन प्रतियोगिताओं के आयोजन स्थल और तिथियों का निर्धारण कर दिया है। क्र. प्रतियोगिता का नाम आयु वर्ग आयोजन स्थल प्रस्तावित तिथि वर्ष 2025-26 1. वॉलीवाल 19 बालक/बालिका गाडरवाड़ा (नरसिंहपुर) 13 से 17 नवम्बर 2. मलखम्ब 14, 17, 19 बालक/बालिका उज्जैन 24 से 28 नवम्बर 3. फुटबाल 14 बालक उमरिया 01 से 06 दिसम्बर 4. एथेलेटिक्स 14 बालक/बालिका इंदौर 01 से 04 दिसम्बर 5. रायफल शूटिंग 17 बालक/बालिका इंदौर 06 से 09 दिसम्बर 6. सॉफ्ट टेनिस 14, 17, 19 बालक/बालिका देवास 11 से 14 दिसम्बर 7. स्कवॉश 19 बालक/बालिका इंदौर 11 से 13 दिसम्बर 8. कराते 14 बालक/बालिका इंदौर 15 से 19 दिसम्बर 9. स्केटिंग 11, 14, 17, 19 बालक/बालिका ग्वालियर 15 से 20 दिसम्बर 10. बैडमिंटन 14 बालक/बालिका सागर 17 से 21 दिसम्बर 11. बॉस्केटबॉल 14 बालिका शहडोल 19 से 23 दिसम्बर 12. हॉकी 14 बालक टीकमगढ़ 22 से 27 दिसम्बर 13. बॉस्केटबॉल 14 बालक जबलपुर 23 से 28 दिसम्बर 14. खो-खो 19 बालक/बालिका जबलपुर 23 से 28 दिसम्बर 15. बॉक्सिंग 14 बालक गुना 26 से 31 दिसम्बर 16. रायफल शूटिंग 14, 19 बालक/बालिका भोपाल 05 से 09 जनवरी, 2026 17. क्रिकेट 19 बालिका शिवपुरी 01 से 06 जनवरी 18. हॉकी 14, 19 बालिका ग्वालियर 02 से 07 जनवरी

हर खिलाड़ी बनेगा फिटनेस का ब्रांड एंबेसेडर, 10 नागरिकों को प्रेरित करने का आह्वान : खेल मंत्री सारंग

खिलाड़ियों को दिलाई फिट इंडिया शपथ राष्ट्रीय खेल दिवस पर मंत्री सारंग ने मेजर ध्यानचंद को पुष्पांजलि अर्पित की भोपाल  हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की 120वीं जयंती राष्ट्रीय खेल दिवस पर खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने तात्या टोपे स्टेडियम भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में मेजर ध्यानचंद को पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि हॉकी के जादूगर, ‘पद्म भूषण’ मेजर ध्यानचंद ने विश्व हॉकी में भारत का परचम लहराया है। उनका जीवन साहस, अनुशासन और खेल भावना का अद्वितीय उदाहरण है, जो सदैव हम सभी को प्रेरित करता रहेगा। मंत्री सारंग ने खिलाड़ियों को फिट इंडिया की शपथ भी दिलाई। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में खेलों के प्रति बना सकारात्मक माहौल मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में खेलों का अभूतपूर्व विकास हुआ है। फिट इंडिया मूवमेंट और खेलो इंडिया जैसे अभियानों ने हर आयु वर्ग में खेल और फिटनेस के प्रति नई जागरूकता पैदा की है। खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। आज भारत एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ और ओलंपिक जैसी प्रतियोगिताओं में ऐतिहासिक सफलताएँ हासिल कर रहा है और गाँव–गाँव तक खेल संस्कृति को नई पहचान मिल रही है। नंबर 1 पर पहुंचना हमारा लक्ष्य मंत्री सारंग ने कहा कि पहले के समय में खेल को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था। प्रदेश में अत्याधुनिक अधोसंरचना, विभिन्न खेलों की अकादमी, प्रशिक्षित प्रशिक्षक और अन्तरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाओं के कारण आज मध्यप्रदेश शीर्ष 3 राज्यों में शामिल हो चुका है। अब हमारा लक्ष्य है कि प्रदेश को देश का नंबर 1 खेल राज्य बनाया जाए। इसके लिये बेहतर व्यवस्थाओं के साथ ही स्कूल–कॉलेज स्तर से प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने की ठोस योजना पर कार्य हो रहा है। मंत्री सारंग ने कहा कि खिलाड़ियों की मेहनत और सरकार के संकल्प से मध्यप्रदेश जल्द ही भारत का अग्रणी खेल राज्य बनेगा। हर खिलाड़ी 10 लोगों को खेल व फिटनेस के लिये प्रेरित करें मंत्री सारंग ने खिलाड़ियों से आहवान किया कि वे सिर्फ मैदान तक सीमित न रहें, बल्कि समाज में खेल और फिटनेस के ब्रांड एंबेसडर बनें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक खिलाड़ी अगले तीन माह में अपने आसपास के कम से कम 10 लोगों को खेल और फिटनेस की ओर प्रेरित करे। ये लोग परिवारजन, पड़ोसी, मित्र या छात्र भी हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि खिलाड़ी नागरिकों को खेल और फिटनेस से जोड़ेंगे, तो यह एक जनआंदोलन का रूप लेगा। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी न केवल पदक जीतकर बल्कि समाज को स्वस्थ और जागरूक बनाकर भी देश की सेवा करते हैं। जब हर घर से कोई न कोई खेलों से जुड़ेगा, तभी भारत ‘फिट इंडिया’ और ‘हिट इंडिया’ बन पाएगा। ’एक घंटा खेल मैदान में’ के तहत रस्साकशी में लिया भाग ‘एक घंटा खेल मैदान में’ थीम के तहत मंत्री सारंग ने खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों के साथ रस्साकशी में भी भाग लिया। इस अवसर पर म.प्र. वॉटर स्पोर्ट्स व हॉकी टीम के खिलाड़ियों के बीच भी रस्साकशी का मैत्री मैच हुआ, जिसमें 2-1 से म.प्र. वॉटर स्पोर्ट्स की टीम विजेता रही। मंत्री सारंग ने स्टेडियम में 100 मीटर स्प्रिंट पुरुष व महिला, फुटबॉल, पॉल वॉल्ट समेत अन्य खेलों का अवलोकन कर खिलाड़ियों से संवाद किया तथा उनका उत्साहवर्धन किया। मार्शल आर्ट अकादमी का किया भ्रमण राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर मंत्री सारंग ने टीटी नगर स्टेडियम स्थित मार्शल आर्ट अकादमी का भ्रमण किया। यहां उन्होंने रेसलिंग, बॉक्सिंग व फेंसिंग खेलों का अवलोकन किया एवं उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण के उप-सचिव अजय श्रीवास्तव, संचालक राकेश गुप्ता, संयुक्त संचालक बी.एस. यादव सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। 31 अगस्त तक प्रदेश में होंगे खेल आयोजन राष्ट्रीय खेल दिवस के तीन दिवसीय कार्यक्रम के तहत 30 अगस्त को सुबह 11:30 बजे नर्मदा क्लब में खेल विषयक विशेष सेमिनार आयोजित किया जा रहा है। जिसमें स्पोर्ट्स इंजरी, साइकोलॉजी एवं एंटी-डोपिंग जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन देंगे। इसके बाद दोपहर 3 बजे बिचारपुर और सरदारपुर की महिला टीमों के बीच फुटबॉल मैच खेला जाएगा। तीसरे दिन 31 अगस्त को सुबह 7:30 बजे राजधानी भोपाल में “संडे ऑन साइकिल” रैली का आयोजन होगा, जो राजा भोज सेतु से प्रारंभ होकर वॉटर स्पोर्ट्स अकादमी पर खत्म होगी।  

अब अस्पतालों में नहीं मिलेगा कैशलेस इलाज, 1 सितंबर से लागू होगा नया नियम

भोपाल  मध्यप्रदेश में हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। निजी बीमा कंपनियों और अस्पतालों के बीच भुगतान को लेकर चल रहे विवाद का असर सीधे बीमाधारकों पर पड़ने वाला है। एक सितंबर से दो प्रमुख बीमा कंपनियों के बीमाधारकों का कैशलेस इलाज प्रदेश के अस्पतालों में नहीं हो पाएगा। बीमाधारकों की चिंता अस्पतालों और इंश्योरेंस कंपनियों के बीच खींचतान का खामियाजा बीमाधारक मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। इलाज के लिए उन्हें अपनी जेब से नकद भुगतान करना होगा। प्रदेश में करीब 30 लाख लोग निजी कंपनियों के हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज में आते हैं। इनमें ज्यादातर पॉलिसियां 3 से 5 लाख रुपए तक की हैं। क्यों मचा विवाद? हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां पुराने कॉन्ट्रैक्ट की दरें बढ़ाने को तैयार नहीं हैं। जबकि अस्पतालों का कहना है कि इलाज की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन बीमा कंपनियां भुगतान कम कर रही हैं और क्लेम सेटलमेंट में देरी भी कर रही हैं। इसी कारण एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया ने अपने 15,000 सदस्य अस्पतालों को बजाज एलायंज जैसी कंपनियों के ग्राहकों का कैशलेस इलाज रोकने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों का तर्क अस्पतालों का कहना है कि बीमा कंपनियां कैशलेस इलाज के बाद क्लेम पास करने में काफी समय लगाती हैं। बीमा कंपनियां ट्रीटमेंट की लागत घटाकर या कुछ चार्जेस को नॉन-पेएबल बता कर रकम कम कर देती हैं। सबसे बड़ी शिकायत यह है कि कई बार मरीज के छुट्टी लेने के हफ्तों बाद भी बीमा कंपनी से पूरा क्लेम नहीं मिलता। कभी राशि कम मिलती है तो कभी विवाद में फंसी रहती है। इससे अस्पतालों की वित्तीय स्थिति बिगड़ती है और वे कैशलेस सुविधा देने में हिचकिचाने लगते हैं। अस्पतालों का कहना है कि बीमा कंपनियों के दबाव में वे घाटे में इलाज नहीं कर सकते। सरकारी कंपनियों में राहत विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियां न्यू इंडिया इंश्योरेंस, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस, नेशनल इंश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस की कैशलेस सुविधा फिलहाल जारी रहेगी। इन कंपनियों में क्लेम कटौती और देरी जैसी समस्या कम देखने को मिलती है। क्या कहते हैं एक्सपर्ट? बीमा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि अक्सर अस्पताल इलाज की वास्तविक लागत और अतिरिक्त चार्जेस छिपाते हैं। वहीं, बीमा कंपनियों का टैरिफ घटाने का दबाव भी विवाद को बढ़ा रहा है। ऐसे हालात में बीमाधारकों की साख और भरोसा दोनों प्रभावित हो रहे हैं।