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CM डॉ. यादव 1 सितंबर को लॉन्च करेंगे अनोखी वैदिक घड़ी और मोबाइल ऐप

भोपाल  विक्रमादित्य वैदिक घडी का अनावरण एवं ऐप का लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 1 सिंतबर 2025 को मुख्यमंत्री निवास से करेंगे। यह बात मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने बताया कि सुबह 9 बजे शौर्य स्मारक पर कॉलेज, विश्वविद्यालय के युवा एवं छात्र-छात्राएं एकत्रित होंगे। शौर्य स्मारक से बाइक रैली आरंभ होगी जो रवींद्र भवन तक जायेगी। रवींद्र भवन से बाइक रैली पैदल मार्च में बदलकर मुख्यमंत्री निवास के द्वार तक पहुंचेगी। इस अवसर पर विक्रमादित्य वैदिक घड़ी: भारत के समय की पुनर्स्थापना की पहल विषय पर युवा संवाद कार्यक्रम भी होगा। जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव युवाओं से संवाद करेंगे।  संस्कृति सलाहकार तिवारी ने बताया कि विक्रमादित्य वैदिक घडी भारतीय काल गणना पर आधारित विश्व की पहली घड़ी है। भारतीय काल गणना सर्वाधिक विश्वसनीय पद्धति का पुनरस्थापन विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के रूप में उज्जैन में माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 29 फरवरी 2024 को किया गया था। जिसे देश और दुनिया में अच्छा प्रतिसाद मिला। उन्होंने कहा कि विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय परंपरा, वैदिक गणना और वैज्ञानिक दृष्टि का अद्भुत संगम है। भारतवर्ष वह पावन भूमि है जिसने संपूर्ण ब्रह्माण्ड को अपने ज्ञान से आलोकित किया है। यहां की संस्कृति का प्रत्येक पहलू प्रकृति और विज्ञान का ऐसा विलक्षण उदाहरण है, जो विश्व कल्याण का पोषक है। इन्हीं धरोहरों के आधार पर निर्मित 'विक्रमादित्य वैदिक घड़ी' भारतीय परम्परा का गौरवपूर्ण प्रतीक है। इस घड़ी के माध्यम से भारत के गौरवपूर्ण समय को पुनर्स्थापित करने का प्रयास है। यह प्रयास विरासत और विकास, प्रकृति और तकनीक का संतुलन होगा। यह स्वदेशी जागरण की महत्वपूर्ण कोशिश है, जो भारत को विश्व मंच पर मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि यह भारत की सांस्कृतिक धुरी बनकर वैश्विक भाषाओं और परंपराओं, आस्थाओं व धार्मिक कार्यों को जोड़ने वाली कड़ी बनेगी। श्रीराम तिवारी ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि भारत दुनिया का पहला और अकेला ऐसा देश है जो पूरी मानवता को, विरासत, प्रकृति और तकनीक के संतुलन के साथ जीना सिखाता रहा है। 

ऐतिहासिक चीन यात्रा पर PM मोदी, SCO शिखर सम्मेलन में रखेंगे भारत का पक्ष

तियानजिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐतिहासिक यात्रा पर चीन पहुंच चुके हैं। वे 31 अगस्त को चीन के तियानजिन शहर में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 25वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह यात्रा 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद उनकी पहली चीन यात्रा है और इसे भारत-चीन संबंधों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह दौरा 1 सितंबर तक चलेगा और इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग, और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। यात्रा का महत्व है बेहद खास प्रधानमंत्री मोदी सात साल बाद चीन यात्रा पर पहुंचे हैं। 2018 में उन्होंने उनकी आखिरी बार चीन की यात्रा की थी। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और चीन, 2020 के गलवान घाटी में हुए सैन्य टकराव के बाद तनाव कम करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। पिछले साल अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात ने दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की नींव रखी थी। विदेश मंत्रालय ने बताया कि सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे जिनमें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात भी होगी। SCO शिखर सम्मेलन का एजेंडा SCO की स्थापना 2001 में हुई थी और इसके 10 सदस्य देश हैं, जिनमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस शामिल हैं। इस साल का शिखर सम्मेलन तियानजिन में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित हो रहा है, जिसे अब तक का सबसे बड़ा SCO सम्मेलन माना जा रहा है। इसमें 20 से अधिक देशों के नेता और 10 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख हिस्सा लेंगे। सम्मेलन का मुख्य एजेंडा क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग, और आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा देना है। भारत ने विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाने की बात कही है। विदेश मंत्रालय के सचिव तन्मय लाल ने कहा कि SCO का उद्देश्य आतंकवाद, उग्रवाद, और अलगाववाद से लड़ना है, और भारत चाहता है कि सभी सदस्य देश इस मुद्दे पर एक साझा बयान जारी करें। अमेरिकी टैरिफ का असर यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल और हथियारों की खरीद के कारण 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया है। ट्रंप ने ब्रिक्स देशों पर भी निशाना साधा है, जिनमें भारत और चीन दोनों शामिल हैं। इस पृष्ठभूमि में SCO समिट को वैश्विक मंच पर अमेरिकी नीतियों के जवाब के रूप में भी देखा जा रहा है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह सम्मेलन भारत, चीन, और रूस को एकजुट होकर वैश्विक दक्षिण के हितों को बढ़ावा देने का अवसर देगा। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन पीएम मोदी का इस सम्मेलन में स्वागत करता है और उम्मीद करता है कि यह समिट दोस्ती, एकता, और सहयोग की मिसाल बनेगा।  

त्योहारों पर राहत: रेलवे छत्तीसगढ़ से गुजार रही 4 स्पेशल ट्रेनें

बिलासपुर भारतीय रेलवे ने त्योहारों में इस बार 150 पूजा स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला लिया है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से बिलासपुर, रायपुर और पश्चिम मध्य रेलवे से भोपाल, कोटा जैसे स्टेशनों को जोड़ते हुए विशेष ट्रेनें चलाई जाएगी। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर जोन से दुर्गापूजा, दीपावली और छठ पर्व पर यात्रियों की सुविधा के लिए 4 पूजा स्पेशल ट्रेन चलेगी। इन ट्रेनों की 30 फेरों की घोषणा की गई है। दुर्ग और हजरत निजामुद्दीन स्टेशन के बीच पूजा स्पेशल ट्रेन के 8 फेरे चलाए जाएंगे। गाड़ी संख्या 08760 दुर्ग से 5 अक्टूबर से 23 नवंबर तक हर रविवार को चलेगी। यह गाड़ी दुर्ग से सुबह 10.45 बजे रवाना होगी और अगली दिन सुबह 11.10 बजे हजरत निजामुद्दीन पहुंचेगी। यह ट्रेन रायपुर, उसलापुर, पेंड्रा रोड, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, कटनी मुरवारा, दमोह, सागर, झांसी, आगरा कैंट, मथुरा जंक्शन और पलवल स्टेशनों पर ठहरेगी। ट्रेन में 20 कोच होंगे, जिनमें एसी, स्लीपर और जनरल डिब्बों की सुविधा उपलब्ध रहेगी। वहीं गाड़ी संख्या 08761 हजरत निजामुद्दीन से 6 अक्टूबर से 24 नवंबर तक हर सोमवार को रवाना होगी।

रेल यात्रियों के लिए जरूरी खबर! 47 ट्रेनें रद्द, टिकट बुकिंग भी बंद

जम्मू  भारतीय रेलवे ने जम्मू की रेल लाइन में समस्या आने के कारण 47 ट्रेनों को पूरी तरह से रद्द कर दिया है, इसके अलावा 4 ट्रेनों के शॉर्ड टर्मनेट किया गया है। रेल यात्रियों को किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े इसके लिए रेलवे ने वाणिज्य विभाग के कर्मचारियों को भी निर्देश दिए हैं। बताते चलें कि इसी प्रक्रिया के चलते रेलवे द्वारा अंबाला छावनी स्टेशन पर 300 से ज्यादा यात्रियों को करीब अढ़ाई लाख रुपए वापस किए हैं। ऐसा फैसला जम्मू रेल लाइन में पुल टूटने की वजह से लिया गया है जैसे ही मुरम्मत का काम पूरा हो जाएगा ट्रेनों का संचालन दोबारा से शुरू किया जाएगा।  Cancel हुई ट्रेनों का विवरण इस प्रकार है : ट्रेन नंबर 12425, 14661, 14803, 12413, 12355, 19223, 03309, 19027, 13151, 11077, 12331, 74909, 74907, 22401, 22431, 22439, 26405, 22477, 22461, 12588, 11078, 74906, 74910, 22478, 26406, 12920, 12472, 22440, 14610, 14504, 12446,16032, 22462, 12473, 14691 को पूर्ण तौर पर रद रखा गया। जबकि ट्रेन 12237 को अंबाला कैंट स्टेशन पर और 18309 अमृतसर स्टेशन पर रद रखा गया। जबकि ट्रेन नंबर 12238 बेगमपुरा का संचालन अंबाला 14609, 12445, 20433, 19803, छावनी से और 18102 जम्मूतवी- टाटा नगर का संचालन अमृतसर से किया गया। Jammu की टिकटें नहीं मिल रही  रेल यात्रियों को बता दें कि फिलहाल छावनी रेलवे स्टेशन पर जम्मू व कटरा के लिए टिकट बुकिंग को बंद कर दिया गया है। जल्द ट्रेनों का संचालन शुरू होने की उम्मीद अंबाला डिवीजन के वरिष्ठ ने बताया है कि जम्मू रेल लाइन में पुल टूटने की वजह से 47 ट्रेनों को पूरी से तरह रद्द हैं। उन्होंने बताया है कि 2 ट्रेनों को अंबाला सहित अमृतसर में रद्द किया गया और दो ट्रेनों को इन्हीं दो रेलवे स्टेशनों से संचालित किया गया है। उन्होंने कहा कि पुल मुरम्मत के बाद ट्रेनें फिर से शुरू की  जाएंगी। 

धार्मिक पर्यटन में MP नंबर-1: CM डॉ. यादव बोले- सबसे ज्यादा श्रद्धालु यहां आए

CM डॉ. यादव का दावा- धार्मिक पर्यटन के लिए सबसे ज्यादा पर्यटक MP पहुंचे रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव से ग्वालियर क्षेत्र में पर्यटन विकास को मिलेगी नई गति ग्वालियर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत अभियान चल रहा है। राज्य सरकार भी इस अभियान में हरसंभव सहयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने पर्यटन विकास को रोजगार से जोड़ा है। पर्यटन बढ़ता है, तो लोगों को रोजगार के नए-नए अवसर मिलते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि देश में पर्यटन क्षेत्र बहुत तेजी से विकास कर रहा है। इसमें मध्यप्रदेश भी पीछे नहीं है। गत वर्ष धार्मिक पर्यटन के लिए देश में सर्वाधिक पर्यटकों ने मध्यप्रदेश को ही चुना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को जारी संदेश में कहा कि हमारी सरकार सभी क्षेत्रों को समान रूप से बढ़ावा दे रही है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शनिवार को ग्वालियर में रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव आयोजित की गई है। इससे पहले रीवा और उज्जैन में टूरिज्म को लेकर ऐसी ही कॉन्क्लेव आयोजित की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में समृद्ध वन क्षेत्र और वन्य जीव पर्यटन की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। कूनो में देश का पहला राष्ट्रीय चीता अभ्यारण्य है। साथ ही चंबल नदी के आसपास घड़ियाल अभ्यारण्य भी है। कछुओं की लुप्त प्रजातियों का भी संरक्षण मध्यप्रदेश में किया जा रहा है। माधव नेशनल टाइगर पार्क को इसी साल लोकार्पित किया गया है। पर्यटन विकास के जरिए प्रदेश का भविष्य और उज्ज्वल और समृद्ध हो, सभी युवाओं को रोजगार मिले, हमारी सरकार इसी भावना से काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के कई स्थान हैं। देश में कुल 66 स्थान विश्व धरोहर स्थल के रूप में चिन्हित किए गए हैं, इनमें से 27 मध्यप्रदेश में स्थित हैं। यह राज्य के लिए बेहद गौरव की बात है। इस कॉन्क्लेव के जरिए ग्वालियर एवं चंबल अंचल में पर्यटन विकास को एक नई गति मिलेगी।  

जापान दौरे के बाद पीएम मोदी चीन रवाना, SCO शिखर सम्मेलन में करेंगे शिरकत

टोक्यो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जापान की दो दिवसीय यात्रा पूरी करने के बाद शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए शनिवार को चीन रवाना हो गए। मोदी की यात्रा के दौरान, भारत और जापान ने 13 प्रमुख समझौतों एवं घोषणाओं को अंतिम रूप दिया तथा कई परिवर्तनकारी पहलों की शुरुआत की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर लिखा, ‘‘जापान की यह यात्रा उन उपयोगी परिणामों के लिए याद रखी जाएगी जिनसे हमारे देश के लोगों को लाभ होगा। मैं (जापान के) प्रधानमंत्री (शिगेरू) इशिबा, जापानी जनता और सरकार को उनकी गर्मजोशी के लिए धन्यवाद देता हूं।'' चीन रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को जापान में मियागी प्रांत के सेंडाई स्थित सेमीकंडक्टर संयंत्र गए। इससे एक दिन पहले भारत एवं जापान ने महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने का संकल्प लिया था। मोदी अपने जापानी समकक्ष इशिबा के साथ बुलेट ट्रेन से सेंडाई पहुंचे। सेंडाई तोक्यो से 300 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित है। प्रधानमंत्री इशिबा ने सेंडाई में मोदी के सम्मान में दोपहर भोज की मेजबानी की जिसमें मियागी प्रांत के गवर्नर और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी शामिल हुए। एक भारतीय विज्ञप्ति में कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी की सेंडाई स्थित ‘तोक्यो इलेक्ट्रॉन मियागी लिमिटेड' (TEL मियागी) की यात्रा ने भारत के विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र और इस क्षेत्र में जापान की ताकत के बीच पूरकता को उजागर किया। सेमीकंडक्टर क्षेत्र की अग्रणी जापानी कंपनी टीईएल मियागी भारत के साथ सहयोग की योजनाओं पर काम कर रही है। मोदी को वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में टीईएल की भूमिका, उसकी उन्नत विनिर्माण क्षमताओं और भारत के साथ उसके जारी एवं नियोजित सहयोग की जानकारी दी गई। विदेश मंत्रालय (NEA) ने एक बयान में कहा कि इस यात्रा से दोनों देशों के नेताओं को सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला, निर्माण और परीक्षण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच मौजूद अवसरों की व्यावहारिक समझ मिली।   मंत्रालय ने कहा, ‘‘दोनों पक्षों ने इस क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने, जापान-भारत सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला साझेदारी पर सहयोग ज्ञापन के साथ-साथ भारत-जापान औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता साझेदारी एवं आर्थिक सुरक्षा संवाद के अंतर्गत साझेदारियों को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।'' इसमें कहा गया कि मोदी और इशिबा के इस संयंत्र के संयुक्त दौरे ने मजबूत, लचीली और विश्वसनीय सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित करने के भारत और जापान के साझा दृष्टिकोण को भी रेखांकित किया। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी ने उनके साथ (संयंत्र का) दौरा करने के लिए जापान के प्रधानमंत्री इशिबा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और इस रणनीतिक क्षेत्र में जापान के साथ मिलकर काम करने की भारत की तत्परता की पुष्टि की।'' मोदी और इशिबा ने शुक्रवार को व्यापक चर्चा की, जिसमें सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। मोदी शुक्रवार को दो दिवसीय यात्रा पर तोक्यो पहुंचे थे। जापान ने शुक्रवार को भारत में एक दशक में 10 हजार अरब येन (करीब 60,000 करोड़ रुपए) के निवेश का लक्ष्य रखा और दोनों पक्षों ने कई बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें रक्षा संबंधों के लिए एक रूपरेखा और आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए 10-वर्षीय खाका शामिल है। यह निर्णय अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की व्यापार और शुल्क संबंधी नीतियों के कारण पैदा हुई आर्थिक उथल-पुथल के बीच लिया गया। भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के विस्तार की घोषणाएं प्रधानमंत्री मोदी और उनके जापानी समकक्ष इशिबा के बीच शिखर वार्ता के बाद की गईं। दोनों पक्षों ने 13 प्रमुख समझौतों और दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया तथा कई परिवर्तनकारी पहल की शुरुआत की घोषणा की, जिनमें सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा, दूरसंचार, फार्मास्यूटिकल्स, महत्वपूर्ण खनिजों और नयी एवं उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन को बढ़ावा देने के लिए एक आर्थिक सुरक्षा ढांचा शामिल है।    

दोपहिया वाहन मालिकों के लिए रायपुर में नई रूल्स, आज ही पढ़ें पूरी जानकारी

रायपुर पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने लिया फैसला, सड़क हादसों में लोगों की जान तक जा रही, इसलिए सख्ती, उप मुख्यमंत्री अरुण साव और कलेक्टर को दी सूचना। बिना हेलमेट वाहन चलाने वाले चालकों को अब पंपों से पेट्रोल नहीं मिलेगा। 1 सितंबर से यह फैसला पूरे जिले के पेट्रोल पंपों में लागू होगा। पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने इस संबंध में सख्त फैसला लिया है। एसोसिएशन के सभी सदस्यों ने आपसी सहमति से यह निर्णय लिया है। उनका मानना है कि गाड़ियों में पेट्रोल नहीं मिलेगा तो लोग हेलमेट पहनने के लिए जागरूक होंगे। इसमें प्रशासन और पुलिस वाले भी उनका सहयोग करेंगे। यानी बिना हेलमेट के पेट्रोल पंपों में पेट्रोल लेने पर विवाद करने वालों से अफसर सख्ती से निपटेंगे। जो हंगामा करेंगे उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई भी की जाएगी। राजधानी पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने खुद आगे आकर यह फैसला लिया है। एसोसिएशन की ओर से शुक्रवार को इसकी लिखित सूचना डिप्टी सीएम अरुण साव और रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह को दी है। एसोसिएशन के सभी सदस्यों का मानना है कि राजधानी में सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। इसमें लोगों की जान जा रही है और गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। इस​ वजह से एसोसिएशन के सभी सदस्यों ने यह फैसला लिया है कि वे बिना हेलमेट लगाए लोगों को पेट्रोल नहीं देंगे। पेट्रोल पंप एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिल धगत ने बताया कि यह अभियान रायपुर शहर ही नहीं बल्कि पूरे जिले में चलाया जाएगा। एसोसिएशन ने सभी लोगों से अपील कि है कि वे दोपहिया चलाते समय हेलमेट जरूर लगाए। बिना हेलमेट से पेट्रोल नहीं देने का नियम कुछ साल पहले भी लागू ​किया गया था। लेकिन सख्ती नहीं होने की वजह से लोगों ने इस नियम को नहीं माना। दरअसल, बिना हेलमेट के पेट्रोल की बिक्री नहीं करने पर पंपों की बिक्री प्रभावित हो रही थी। इतना ही नहीं लोग उधार में हेलमेट लेकर पेट्रोल डलवा लेते थे। अधिकतर बार लोग हेलमेट वाले लोगों से हेलमेट मांगकर पेट्रोल डलवाते फिर उन्हें वापस कर देते। सख्ती नहीं होने की वजह से नियम की धज्जियां उड़ रही थी। इस वजह से इस बार पेट्रोल पंप संचालकों को खुद आगे किया गया है। उनसे कहा गया है​ कि वे ही सख्ती करें। यही वजह है कि प्रशासन ने इस बार आदेश न जारी कर एसोसिएशन वालों से ही लिखित में लिया है कि वे बिना हेलमेट के लोगों को पेट्रोल नहीं देंगे।

यूक्रेन संकट: भारत बेदाग, ट्रंप प्रशासन के अधिकारी अमेरिकी मीडिया में घिरे

वाशिंगटन  अमेरिकी यहूदियों के एक समर्थक समूह ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत की आलोचना करने के लिए अमेरिकी अधिकारियों पर निशाना साधा और कहा कि रूस-यूक्रेन संकट के लिए भारत जिम्मेदार नहीं है। समूह ने अमेरिका-भारत संबंधों को बेहतर बनाने का आह्वान किया। ट्रंप प्रशासन के अधिकारी रूस के तेल खरीदने को लेकर भारत की आलोचना कर रहे हैं। उनका कहना है कि तेल से अर्जित पैसों से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने में मदद मिल रही है। अमेरिका ज्यूइश कमेटी (एजेसी) ने शुक्रवार को इस मामले पर टिप्पणी की। इससे पहले व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने रूस-यूक्रेन संकट को “मोदी का युद्ध” करार देते हुए कहा था कि “शांति का मार्ग आंशिक रूप से नयी दिल्ली से होकर जाता है।” एजेसी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि वह "अमेरिकी अधिकारियों की ओर से भारत पर किये गए जुबानी हमलों से बहुत हैरान और चिंतित है।" समूह ने नवारो की टिप्पणी को "अपमानजनक आरोप" करार दिया। पोस्ट में कहा गया है, "हमें ऊर्जा के जरूरतमंद भारत की रूसी तेल पर निर्भरता पर खेद है, लेकिन भारत पुतिन के युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार नहीं है, यह एक सहयोगी लोकतांत्रिक देश और अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।" पोस्ट में कहा गया है, “यह महत्वपूर्ण संबंधों को पुन: स्थापित करने का समय है।”  

टैरिफ विवाद पर केंद्र का रुख साफ, पीयूष गोयल ने कहा—भारत कभी झुकेगा नहीं

नई दिल्ली  अमेरिका के साथ जारी टैरिफ विवाद पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने खुलकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के सामने नहीं झुकेगा और न ही कमजोर पड़ेगा। इसके बजाय वह दुनिया की नई उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बाजारों में अपनी पैठ बनाने पर अपना ध्यान केंद्रित करेगा। एक निजी कार्यक्रम में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने भारत के निर्यात को बढ़ाने पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने कहा आने वाले कुछ समय में केंद्र सरकार सभी क्षेत्रों को सपोर्ट करने और निर्यात के लिए तमाम फैसले लेगी। भारत हमेशा केंद्रीय मंत्री ने कहा, "मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि इस साल हमारा निर्यात पिछले वित्त वर्ष की तुलना में ज्यादा होगा।" 27 अगस्त को भारत पर टैरिफ लागू होने के बाद अपनी पहली टिप्पणी में केंद्रीय मंत्री ने कहा, "भारत हमेशा से ही मुक्त व्यापार समझौते के लिए तैयार है। लेकिन अगर कोई हमारे साथ भेदभाव करता है, तो मैं समझता हूं कि भारत के 140 करोड़ आबादी के आत्मसम्मान और आत्मविश्वास की बात है। इसको ध्यान में रखते हुए हम कभी नहीं झुकेंगे। इसका सामना करते हुए एक साथ आगे बढ़ते रहेंगे। आपको बता दें केंद्रीय मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने भारत के ऊपर व्यापार को लेकर 25 फीसदी और रूस से तेल खरीदने के नाम पर 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है। ऐसे में भारत से अमेरिका जाने वाले निर्यात में भारी कमी आने की आवश्यकता है। इसकी वजह से हमारे देश में हजारों लोगों की नौकरी पर खतरा मंडराना शुरू हो गया है। एक तरफ अमेरिका का कहना है कि भारत के ऊपर लगाए गए प्रतिबंध रूस के ऊपर यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए दबाव बनाने का एक प्रयास है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका खुद भी रूस से साथ व्यापार में लगा हुआ है और चीन, जो कि रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीददार है, उससे कुछ भी कहने में डर रहा है। जहां तक व्यापारिक क्षेत्र में लगे 25 प्रतिशत टैरिफ की बात है, तो भारत ने यह साफ कर दिया है कि वह डेयरी और कृषि उत्पादों में किसी भी प्रकार की छूट नहीं देगा। अमेरिका की मांग है कि भारत डेयरी क्षेत्र में उसके प्रोडक्ट्स को भी बाजार में आने का मौका दे, लेकिन यह भारतीय किसानों और डेयरी क्षेत्र के लोगों के लिए बहुत बड़ा आत्मघाती कदम साबित होगा। अपने दूसरे कार्यकाल में ट्रंप ने लगातार टैरिफ को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया है। इसका असर यह है कि पूरी ग्लोबल सप्लाई चैन अस्त-व्यस्त हो गई है।  

जोकोविच ने यूएस ओपन में बनाई चौथे दौर की जगह

न्यूयॉर्क नोवाक जोकोविच ने यूएस ओपन के चौथे दौर में जगह बना ली है। जोकोविच ने गैरवरीय ब्रिटिश खिलाड़ी कैमरन नॉरी को 6-4, 6-7(4), 6-2, 6-3 से हराकर चौथे दौर में जगह बनाई। 38 साल के जोकोविच यूएस ओपन के अंतिम 16 में पहुंचने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन गए। उनसे पहले 1991 में जिमी कॉनर्स ने यह उपलब्धि हासिल की थी। जोकोविच ने मेजर टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा हार्डकोर्ट जीत के मामले में रोजर फेडरर को पीछे छोड़ते हुए अपनी 102वीं जीत दर्ज की। चार बार के यूएस ओपन चैंपियन ने नॉरी के खिलाफ अपना शानदार रिकॉर्ड 7-0 तक भी पहुंचाया। जीत के बाद जोकोविच ने कहा, “मुझे लगता है कि किसी भी मैच में आप बिना किसी नाटकीयता के सीधे सेटों में जीतना चाहते हैं और आसानी से जीत हासिल करना चाहते हैं, लेकिन यह संभव नहीं है। मेरी टीम चाहती है कि मैं कोर्ट पर संघर्ष करूं ताकि मैं मैच खेलने में कुछ और समय बिता सकूं। मैंने विंबलडन के बाद से कोई मैच नहीं खेला था।” उन्होंने कहा, “मैं अभी भी कोर्ट पर अपनी लय और लय ढूंढ़ने की कोशिश कर रहा हूं।” पहले सेट में 5-4 की बढ़त लेने के बाद नोवाक जोकोविच को पीठ की समस्या महसूस हुई। सेट खत्म करने के लिए वापस लौटने से पहले उन्होंने इलाज के लिए कुछ देर के लिए कोर्ट छोड़ दिया। दूसरे सेट की शुरुआत उन्होंने ज्यादा सावधानीपूर्वक की। उनकी सर्विस की गति कम रही। जोकोविच को एक कड़े टाईब्रेकर में संघर्ष करना पड़ा, जिसे नॉरी ने जीत लिया। तीसरे सेट में ब्रिटिश खिलाड़ी ने जल्दी ही अपनी सर्विस तोड़ दी, लेकिन जोकोविच ने लगातार तीन गेम जीतकर जवाब दिया। पूरी तरह से नियंत्रण हासिल करते हुए, जोकोविच ने तीसरे सेट को खत्म किया और चौथे सेट में दबदबा बनाते हुए जीत पक्की कर ली। जोकोविच का अगला मुकाबला जान-लेनार्ड स्ट्रफ के साथ होगा।