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महिलाओं की सुरक्षित यात्रा के लिए बिहार सरकार का कदम, 80 नई पिंक बसें होंगी शुरू

पटना राज्य में महिलाओं के लिए पिंक बस सेवा का विस्तार होने जा रहा है। वर्तमान में 20 पिंक बसें प्रदेश में चल रही है, लेकिन सितंबर में 80 नई बसें सड़कों पर उतरेंगी। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) के अनुसार 30 नई बसें डिपो में पहुंच चुकी हैं। इस सप्ताह शेष बसें भी पहुंच जाएंगी। पटना में वर्तमान में आठ पिंक बसों का विभिन्न रूटों पर परिचालन होता है। 80 नई बसों में से 22 बसें पटना को मिलेगी। जो जल्द नई रूट पर चलेंगी। बीएसआरटीसी ने नई 80 बसें मंगाने का आदेश दिया था, जो चरणबद्ध तरीके से पटना और अन्य जिलों में चलाई जाएंगी। ये बसें महिलाओं की सुरक्षित और आरामदायक यात्रा के लिए हैं, जिसमें महिला कंडक्टर और स्टाफ तैनात होंगे। पिंक बस चलने से महिलाओं को आटो पर निर्भरता कम होगी और सस्ती, सुरक्षित यात्रा का विकल्प मिलेगा। पटना की सड़कों पर महिलाओं के लिए संचालित पिंक बस सेवा का दायरा अब और बढ़ जाएगा। अभी आठ पिंक बसें चल रही हैं, लेकिन सितंबर माह में कुल 30 पिंक बसें पटना की सड़कों पर उतर जाएंगी। 22 नई बसों को जल्द ही रूट पर उतारने की तैयारी 22 नई बसों को जल्द ही रूट पर उतारने की तैयारी चल रही है। अभी 10 बसों के विभिन्न रूट पर परिचालन के लिए आवेदन किया गया है। जल्द ही 12 और बसों की परमिट लिया जाएगा। पटना में 10 नई रूटों पर पिंक बसों को चलाया जाएगा। इसमें पटना से हाजीपुर, पालीगंज, बिहटा व बेली रोड प्रमुख रूप से शामिल है। इसके अतिरिक्त आने वाले समय में कुर्जी, अशोक राजपथ सहित कुछ अन्य रूट पर भी बसों का परिचालन शुरू होगा। अभी पिंक बसें मुख्य रूप से भीड़भाड़ वाले मार्गों जैसे गांधी मैदान, पटना जंक्शन, दानापुर और फुलवारीशरीफ रूट पर चलाई जाती हैं। बीएसआरटीसी के प्रशासक अतुल कुमार वर्मा ने बताया कि जैसे-जैसे नई बसें उपलब्ध होंगी, वैसे-वैसे इन्हें पटना समेत अन्य प्रमुख शहरों में उतारा जाएगा। नई बसों के आने से महिला यात्रियों को ऑटो और अन्य छोटे वाहनों पर निर्भरता कम करनी होगी और उन्हें सस्ती दर पर आरामदायक यात्रा का विकल्प मिलेगा।

बच्चों का PAN कार्ड बनवाना अब आसान: जानें पूरा प्रोसेस स्टेप-बाय-स्टेप

जिस तरह से एक आम व्यस्क आदमी के लिए Pan Card बेहद जरूरी डॉक्यूमेंट है, उसी तरह बच्चों के लिए भी पैन कार्ड उतनी ही ज्यादा जरूरी है। आधार कार्ड के बाद यही वह दूसरा जरूरी डॉक्यूमेंट है जिसे बच्चों के लिए बनवाना बेहद महत्वपूर्ण है। अगर बच्चों के नाम पर निवेश करना हो, म्यूचुअल फंड या फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा लगाना हो या फिर उनके नाम एक बैंक अकाउंट खोलना हो हर चीज के लिए एक Pan Card की जरूरत पड़ती ही है। हालांकि आज के डिजिटल भारत में अच्छी बात यह है कि बच्चों के लिए Pan Card बनवाना बेहद आसान हो गया है। एक समय था जब इसके लिए कागजी काम और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। हालांकि अब सब कुछ डिजिटली और बिना कहीं जाए हो जाता है। बच्चों का Pan Card होता है अलग बच्चों का पैन कार्ड देखने में वैसे ही होता है जैसे बड़ों का, लेकिन इसमें कई फर्क होते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि यह पैन कार्ड "माइनर" यानी अवयस्क श्रेणी में आता है, क्योंकि बच्चा 18 साल से छोटा होता है। इस वजह से इसमें बच्चे की फोटो और सिग्नेचर नहीं होते, जबकि नॉर्मल पैन कार्ड में यह जरूरी होते हैं। बच्चे के पैन कार्ड में उसके माता-पिता या अभिभावक का नाम और उनका पैन नंबर जोड़ा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वही बच्चे के लिए वित्तीय फैसले लेते हैं। यह पैन कार्ड टैक्स भरने के लिए नहीं, बल्कि निवेश करने, म्यूचुअल फंड या फिक्स्ड डिपॉजिट कराने और बैंक खाता खुलवाने जैसे कामों में काम आता है। बच्चों का Pan Card बनवाने के लिए आपको सबसे पहले:     NSDL (https://www.tin-nsdl.com) या UTIITSL (https://www.utiitsl.com) की ऑफीशियल वेबसाइट पर जाना होगा।     इसके बाद “Apply for New PAN (Form 49A)” पर क्लिक करें।     अब आपको कैटेगरी चुनने के लिए कहा जाएगा। जहां आप “Individual” कैटेगरी को चुन सकते हैं।     अब दिए गए फॉर्म में बच्चे की सारी डिटेल्स जैसे कि पूरा नाम, जन्म तिथि, जेंडर और अन्य जानकारियां ठीक-ठीक भरें। यहां आपको माता-पिता या अभिभावक की भी ठीक-ठीक जानकारी जैसे कि नाम और PAN नंबर भरना जरूरी होता है।     इसके बाद आपको बच्चे और माते-पिता के आईडी प्रूफ जैसे कि बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र या आधार कार्ड अपलोड करने होंगे। पते के प्रूफ के तौर पर आप अभिभावक का आधार कार्ड या बिजली/पानी का बिल अपलोड कर सकते हैं। बच्चे का Pan Card बनवाते समय फोटो और सिग्नेचर अपलोड करने के लिए नहीं कहा जाता।     इसके बाद आप 107 रुपये की फीस भरकर अपने फॉर्म को सब्मिट कर सकते हैं। पेमेंट ऑनलाइन क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग से की जी सकती है।     फॉर्म को सबमिट करने के बाद आपको एक Acknowledgment Number मिलेगा। इसकी मदद से आप अपने बच्चे के PAN CARD के स्टेटस को चेक भी कर पाएंगे।     अगल 15-20 दिनों में आपको बच्चे का PanCard अपने पते पर मिल जाएगा। ध्यान रखने वाली बात बच्चों का पैन कार्ड बनवाते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि आवेदन जल्दी और बिना किसी परेशानी के पूरा हो जाए। सबसे पहले, जो भी जानकारी फॉर्म में भरें, वह बिल्कुल सही होनी चाहिए और बच्चे के डॉक्यूमेंट जैसे आधार कार्ड या जन्म प्रमाणपत्र से मेल खानी चाहिए। इसके अलावा, बच्चे के पैन कार्ड में माता-पिता या अभिभावक की जानकारी देना जरूरी होता है, जिसमें उनका नाम और PAN नंबर शामिल होता है। अगर बच्चे का आधार कार्ड बना हुआ है, तो पैन कार्ड अप्लाई करना और भी आसान हो जाता है क्योंकि ई-केवाईसी के जरिए फिजिकल डॉक्युमेंट भेजने की जरूरत नहीं पड़ती। सबसे जरूरी बात यह है कि जब बच्चा 18 साल का हो जाए, तो उसका पैन कार्ड “मेजर” में अपडेट जरूर करवा लें ताकि उसमें उसका फोटो और सिग्नेचर जुड़ सके।  

महानदी जल विवाद सुलझाने को आगे आए छत्तीसगढ़-ओडिशा, शुरू हुई साझा पहल

इंजीनियरों की टीम हर हफ़्ते करेगी काम, महानदी पर बनेगा समन्वय का नया ढाँचा नई दिल्ली, भारत की एक प्रमुख नदी, महानदी, जो छत्तीसगढ़ से निकलकर ओडिशा होकर बंगाल की खाड़ी तक जाती है, लंबे समय से विवाद का कारण बनी हुई है। इस लंबे विवाद को बातचीत से हल करने के लिए 30 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में एक अहम बैठक हुई। इसमें छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्य सचिवों और जल संसाधन विभाग के सचिवों ने हिस्सा लिया। बैठक में दोनों राज्यों ने माना कि यह समस्या बहुत पुरानी और कठिन है, लेकिन लोगों और दोनों राज्यों के भले के लिए इसका समाधान मिल-बैठकर निकालना ही होगा। बैठक में यह भी तय हुआ कि सितंबर 2025 से दोनों राज्यों की तकनीकी समितियाँ, जिनमें इंजीनियर और विशेषज्ञ होंगे, हर हफ़्ते बैठक करेंगी। ये समितियाँ मुख्य मुद्दों को पहचानेंगी और उनका हल निकालने की कोशिश करेंगी। साथ ही, वे यह भी देखेंगी कि कैसे दोनों राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है। अक्टूबर 2025 में दोनों राज्यों के मुख्य सचिव एक और बैठक करेंगे। इसमें जल संसाधन सचिव भी शामिल होंगे। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो दिसंबर तक दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री भी मुलाक़ात कर सकते हैं और आगे की दिशा तय करेंगे। अंत में दोनों राज्यों ने यह वादा किया कि वे ईमानदारी और खुले मन से बातचीत करेंगे, ताकि महानदी जल विवाद का हल ऐसा निकले जो सबके लिए लाभकारी हो। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह पहल सफल रही, तो यह न सिर्फ ओडिशा और छत्तीसगढ़ के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल होगी कि बड़े और पुराने विवाद भी आपसी बातचीत और सहयोग से सुलझाए जा सकते हैं।

सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम : रेडियो पर गूंजेगी ‘दीदी के गोठ’

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि सुशासन का वास्तविक अर्थ तभी पूर्ण होगा जब हमारी ग्रामीण महिलाएँ सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक रूप से सशक्त बनें. इसी दूरदर्शी सोच के साथ छत्तीसगढ़ सरकार ने महिलाओं को आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की दिशा में प्रेरित करने के लिए एक नई ऐतिहासिक पहल की है. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत तैयार विशेष रेडियो कार्यक्रम “दीदी के गोठ” का शुभारंभ 31 अगस्त 2025 को दोपहर 12:15 बजे किया जाएगा. यह कार्यक्रम आकाशवाणी रायपुर केंद्र सहित प्रदेश के सभी आकाशवाणी केंद्रों से एक साथ प्रसारित होगा. साथ ही इसकी लाइव स्ट्रीमिंग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (www.onlineradiofm.in/stations/all-india-air-raipur) पर भी उपलब्ध रहेगी. दीदी के गोठ केवल एक रेडियो कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह मुख्यमंत्री विष्णुदेव सायकी सुशासन की सरकार की दूरदर्शी सोच का प्रतिबिंब है. इसका उद्देश्य महिलाओं की आवाज़ को पूरे समाज तक पहुँचाना, उनके संघर्ष और उपलब्धियों को सामने लाना और उन्हें शासन की योजनाओं से जोड़कर सकारात्मक परिवर्तन की राह दिखाना है. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, भारत सरकार के केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री और राज्य के उप मुख्यमंत्री और पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा द्वारा ग्रामीण महिलाओं के नाम विशेष संदेश और प्रेरणादायी शुभकामनाएँ प्रसारित की जाएंगी. यह अवसर न केवल एक कार्यक्रम का शुभारंभ होगा, बल्कि शासन की नीतियों और योजनाओं को सीधे जनता तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम भी बनेगा. दीदी के गोठ का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण अंचलों की महिलाओं को शासन की विभिन्न योजनाओं से जोड़ना, उन्हें स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना और आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की ओर अग्रसर करना है. इस कार्यक्रम में स्व-सहायता समूहों की सफल महिलाओं की कहानियाँ सुनाई जाएंगी—कैसे उन्होंने संघर्ष और कठिनाइयों को पार कर अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से न सिर्फ़ आर्थिक रूप से मजबूती हासिल की, बल्कि समाज में भी एक नई पहचान बनाई. आज छत्तीसगढ़ की लाखों महिलाएँ लखपति दीदी बन चुकी हैं. उनका जीवन बिहान योजना से सकारात्मक रूप से बदला है. इनकी प्रेरणादायी कहानियाँ रेडियो की आवाज़ के माध्यम से हर गाँव और हर घर तक पहुँचेंगी, ताकि अन्य महिलाएँ भी आत्मनिर्भरता की राह पकड़ सकें. इस कार्यक्रम के प्रभाव को और अधिक व्यापक बनाने के लिए पंचायत, ग्राम संगठन और संकुल संगठन स्तर पर सामूहिक श्रवण की व्यवस्था की जा रही है. इसमें जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, स्थानीय समुदाय और स्व-सहायता समूह की दीदियाँ विशेष रूप से शामिल होंगी. सामूहिक श्रवण से ग्रामीण क्षेत्रों में आपसी संवाद, चर्चा और प्रेरणा का वातावरण बनेगा.

मोबाइल टावर से रेडिएशन का खतरा? सरकार से ऐसे मांगें जांच

नई दिल्ली अच्छे मोबाइल नेटवर्क के लिए कंपनियां जगह-जगह पर अपने टावर लगाती हैं। पहले ये मोबाइल टावर रिहायशी इलाकों से दूर लगाए जाते थे, लेकिन अब आपने देखा होगा कि रिहायशी इलाकों में टावर लगे होते हैं। कहा जाता है क‍ि बहुत से लोग किराया पाने के लिए अपने घर की छत पर भी टावर लगवाते हैं। क्या आपको पता है कि आपका पड़ोसी पैसे कमाने के चक्कर में आपकी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है। ये टावर कई तरह के रेडिएशन फैलाते हैं, जो आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। यही कारण है कि इन्हें रिहायशी इलाकों से दूर रखा जाता है। अगर आप यह जांच करवाना चाहते हैं कि आपके पड़ोसी की छत पर लगा टावर कितना रेडिएशन फैला रहा है तो आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है। आप घर बैठे ही इसके लिए रिक्वेस्ट कर सकते हैं। आइये, रिक्वेस्ट देने पूरा तरीका नीचे जानते हैं। मोबाइल टावर से होने वाली बीमारियां तमाम र‍िपोर्टों के अनुसार, मोबाइल टावर से रेडियो फ्रिक्वेंसी तरंगें निकलती हैं। लंबे समय तक मोबाइल टावर से निकलने वाले रेडिएशन के संपर्क में आने से लोगों में कई स्‍वास्‍थ्‍य संबधी बीमारियां दिखने लगती हैं। लोगों को सिरदर्द होना, थकान होना, नींद की गड़बड़ी जैसी समस्या आ सकती है। अगर आप जानना चाहते हैं कि आपके घर के पास लगा टावर कितना रेडिएशन फैला रहा है तो इसके लिए सरकार से उसका EMF Measurement करा सकते हैं। क्या होता है EMF Measurement? ईएमएफ (विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र) मापन, खास सेंसर या मीटर का इस्तेमाल करके किसी दिए गए क्षेत्र में विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र की पावर और विशेषताओं को मापने का प्रोसेस है। इसका यूज अक्सर विद्युत उपकरणों, बिजली लाइनों या दूरसंचार उपकरणों से होने वाले रेडिएशन की जांच करने के लिए किया जाता है। EMF मेजरमेंट से स्वास्थ्य जोखिमों और सेफ्टी स्टैंडर्ड के अनुपालन को वेरिफाई करने के लिए किए जाता है। इस सरकारी पोर्टल पर जाकर करें रिक्वेस्ट भारत सरकार के संचार मंत्रालय के Tarang Sanchar पोर्टल पर जाकर EMF Measurement के लिए रिक्वेस्ट डाल सकते हैं। इसके लिए आपको बस कुछ जानकारी भरनी होगी और फिर संबंध‍ित विभाग की तरफ से लोग आकर जांच करेंगे। अगर रेडिएशन पाया गया तो सरकार अपनी ओर से जरूरत के अनुसार एक्शन भी ले सकती है। यह सरकारी पोर्टल आपको अपने फोन से या फिर लैपटॉप से रिक्वेस्ट सबमिट करने की सुविधा देता है। रिक्वेस्ट सबमिट करने के लिए फॉलो करें ये स्टेप्स     ​स्टेप 1- अगर आप किसी टावर के रेडिएशन की जांच कराना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले Tarang Sanchar पोर्टल ओपन करना होगा। इसका बाद वेबसाइट पर स्क्रॉल डाउन करके नीचे आएं।     स्टेप 2- अब आपको यहां सबसे अंत में EMF Measurement Request by Public का ऑप्शन मिलेगा। इस पर क्लिक कर दें।     स्टेप 3- फिर आपको कुछ डिटेल भरनी होंगी। आपको नाम, ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर डालकर Next बटन पर क्लिक करना होगा।     स्टेप 4- बता दें कि आपको इसके लिए 4000 रुपये फीस देनी होगी। फिर Next बटन पर क्लिक कर दें।     स्टेप 5- अब आगे की प्रोसेस करके जांच के लिए रिक्वेस्ट सबम‍िट कर दें।

EPF सदस्य ध्यान दें: ऑनलाइन ऐसे निकालें अपना खोया हुआ UAN

 नई दिल्ली अगर आप नौकरी करते हैं तो बता दें कि ज्यादातर नौकरी में सैलरी से प्रोविडेंट फंड यानी PF कटता है। यह पैसा कहीं और वहीं बल्कि PF अकाउंट में सेव होता रहता है। जरूरत पड़ने पर आप इसका पूरा पैसा निकाल सकते हैं। आपका यह भी चेक कर सकते हैं कि आपके PF अकाउंट में कितना पैसा है। हालांकि, चाहे पैसे निकालने हों या फिर बैलेंस देखना हो, सबके लिए UAN (Universal Account Number) की जरूरत है। इसके बिना आप PF से जुड़ी कोई भी जानकारी हासिल नहीं कर सकते हैं। यह 12 अंकों का होता है। अगर आपको UAN नहीं पता है तो परेशान न हों EPFO की वेबसाइट पर जाकर अपना UAN पता कर सकते हैं। आइये, पूरा प्रोसेस जानते हैं। ​ क्या होता है UAN? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि UAN या यूनिवर्सल अकाउंट नंबर, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा जारी किया जाता है। यह 12 अंकों का नंबर होता है। हर कर्मचारी को UAN दिया जाता है और सभी का एक यूनिक UAN होता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगर आपने अलग-अलग कंपनियों में काम किया है तो आपका नया PF अकाउंट तो बन सकता है, लेकिन UAN वही रहेगा। सभी PF अकाउंट एक ही UAN से लिंक हो जाएंगे। UAN पता करने के लिए जरूरी चीजें अगर आपको अपना UAN नहीं पता है तो इसका पता लगाने के लिए आप epfo की वेबसाइट पर जा सकते हैं। हालांकि, आपको अपना आधार नंबर, पैन नंबर या फिर मेंबर आईडी पता होनी चाहिए और PF अकाउंट से लिंक मोबाइल नंबर पता होना चाहिए। UAN जानने के लिए फॉलो करें ये स्टेप्स     ​स्टेप 1- UAN पता करने के लिए सबसे पहले EPFO की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं। इसके बाद आपको सबसे ऊपर Services के ऑप्शन पर क्लिक करना है।     स्टेप 2- यहां For Employees के ऑप्शन पर क्लिक कर दें।     स्टेप 3- अब आपको पेज पर Services के सेक्शन में दिए गए Member UAN/Online Services पर क्लिक करें।     स्टेप 4- ऐसा करते ही आप एक नए पेज पर पहुंच जाएंगे। इस पर राइट साइड में लॉग इन विंडो के नीचे Important Links का सेक्शन मिलेगा।     स्टेप 5- इसमें कई सारे ऑप्शन होंगे। आपको Know Your UAN पर क्लिक करना है।     स्टेप 6- ऐसा करते ही नई विंडो ओपन हो जाएगी। उसमें अपना मोबाइल नंबर और कैप्चा कोड डालें और Request OTP पर क्लिक कर दें।     स्टेप 7- अब आपके नंबर पर एक OTP आएगा। वह डालें इसके बाद आपको अपना नाम, जन्म तिथि, आधार नंबर और कैप्चा कोड डालना होगा।     स्टेप 8- फिर आप Show my UAN पर क्लिक कर दें। इसके बाद स्क्रीन पर आपका UAN आ जाएगा। आधार की जगह डाल सकते हैं ये डिटेल आप आधार कार्ड की जगह पैन नंबर या फिर मेंबर आईडी भी डाल सकते हैं। आधार कार्ड के पास ही बाकी ऑप्शन मिलेंगे। आप अपने अनुसार कोई भी सिलेक्ट कर सकते हैं। हालांकि, आधार नंबर सबसे आसान तरीका है। ज्यादातर लोगों के पास आधार कार्ड नंबर होता है। इस तरह आपको अपना UAN पता चल जाएगा।

यात्रियों के लिए खुशखबरी, त्योहार सीजन में दौड़ेगी कमलापति-दानापुर पूजा स्पेशल

भोपाल त्योहारों के अवसर पर यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए पश्चिम मध्य रेलवे ने दुर्गा पूजा, दीपावली एवं छठ पर्व के दौरान अतिरिक्त ट्रेन चलाने का फैसला किया है। इस क्रम में रानी कमलापति-दानापुर-रानी कमलापति के बीच द्वि-साप्ताहिक 11-11 ट्रिप पूजा स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। यह विशेष ट्रेन रानी कमलापति से प्रस्थान कर नर्मदापुरम, इटारसी, पिपरिया, गाडरवारा, नरसिंहपुर, जबलपुर, सिहोरा रोड, कटनी, मैहर एवं सतना स्टेशनों से होकर अपने गंतव्य तक पहुंचेगी। ट्रेन 01667 (रानी कमलापति-दानापुर) पूजा स्पेशल ट्रेन 01667 रानी कमलापति से दानापुर स्पेशल ट्रेन 27 सितंबर से 1 नवंबर तक द्वि-साप्ताहिक शनिवार एवं मंगलवार को एक्सप्रेस ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन से दोपहर 2:25 बजे प्रस्थान कर, नर्मदापुरम 3:25 बजे, इटारसी 3:55 बजे, पीपरिया 5:10 बजे, गाडरवारा 5:45 बजे, नरसिंहपुर 6:25 बजे, जबलपुर रात 7:25 बजे, सिहोरा रोड 8:10 बजे, कटनी 9:20 बजे, मैहर 10:10 बजे, सतना 10:45 बजे पहुंचकर और अगले दिन रविवार एवं बुधवार को सुबह 8:45 बजे दानापुर स्टेशन पहुंचेगी।   ट्रेन 01668 (दानापुर-रानी कमलापति) इसी प्रकार ट्रेन 01668 दानापुर से रानी कमलापति स्पेशल ट्रेन 28 सितंबर से 2 नवंबर तक द्वि-साप्ताहिक रविवार एवं बुधवार को एक्सप्रेस ट्रेन दानापुर स्टेशन से सुबह 11 बजे प्रस्थान कर प्रयागराज छिवकी रात 8:30 बजे, पहुंचकर अगले दिन सतना रात 12:55 बजे, मैहर 1:28 बजे, कटनी 2:30 बजे, सिहोरा रोड 3:13 बजे, जबलपुर 3:50 बजे, नरसिंहपुर सुबह 5:00 बजे, गाडरवारा 5:30 बजे, पिपरिया 6 बजे, इटारसी 7:10 बजे, नर्मदापुरम 7:48 बजे पहुंचकर और सोमवार एवं गुरुवार को सुबह में 8:55 बजे रानी कमलापति स्टेशन पहुंचेगी।

सिख महिला बॉक्सर का धमाका, ब्रिटेन की पहली प्रोफेशनल ने सभी को किया हैरान

लंदन  इंग्लैंड के हल शहर में एक शांत जिम के दरवाज़े पर 13 साल की एक लड़की अपने छोटे भाई के बॉक्सिंग सेशन के शुरू होने का इंतज़ार कर रही थी.उसके पास न ही ग्लव्स थे और न इसमें शामिल होने का कोई इरादा था.आठ साल के बाद चरण कौर ढेसी अब एक प्रोफ़ेशनल बॉक्सर और चर्चित शख़्सियत हैं. 21 साल की उम्र में प्रोफ़ेशनल बॉक्सिंग में उतरने वालीं वह ब्रिटेन की पहली सिख महिला प्रो बॉक्सर हैं. उन्होंने खेल के क्षेत्र और अपने समुदाय में एक नई राह दिखाई है. उन्होंने कहा, "मैंने इतिहास रचा है और अभी तो बस शुरुआत की है." हालांकि, उनकी यह यात्रा आसान नहीं रही है. बॉक्सिंग को एक पुरुष प्रधान खेल माना जाता है.ऐसे में ब्रिटेन में एक दक्षिण एशियाई महिला होने के नाते ढेसी को शक, सांस्कृतिक विरोध और आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ा.लेकिन हर मुक्के के साथ उन्होंने उनकी क्षमताओं पर शक करने वाले हर शख़्स को अपना समर्थक बना लिया.वह कहती हैं, "मेरे समुदाय की पहली महिला होने के नाते यह मेरे लिए बहुत दबाव वाला काम था. लेकिन आप क्या कह सकते हैं? हीरा भी तो दबाव में ही निखरता है." इंग्लैंड की टीम तक का सफ़र दो भाइयों के साथ पली-बढ़ीं ढेसी का परिवार खेलों से प्यार करता था. उनके पिता पढ़ाई से ज़्यादा शारीरिक गतिविधियों को महत्व देते थे.वह कहती हैं, "मेरे माता-पिता ने कभी मेरी पढ़ाई पर ज़ोर नहीं दिया, जिसे लोग अजीब समझते हैं. वह हमेशा बॉक्सिंग के लिए प्रेरित करते थे." ढेसी कहती हैं, "मेरे दो भाई हैं. मेरे पिता ने हम तीनों को ही खेलों में ध्यान देने को कहा."लेकिन बॉक्सिंग शुरुआत में उनकी योजना में शामिल नहीं था. ढेसी ने असल में कराटे से ट्रेनिंग शुरू की थी और उन्हें बॉक्सिंग का पता तब चला जब उनके भाई ने एक स्थानीय जिम जॉइन किया. वह कहती हैं, "मुझे शुरुआत में बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि बॉक्सिंग क्या होती है. यह तो मेरे छोटे भाई की इच्छा थी. मैं उसके साथ जिम गई और बस दरवाज़े पर खड़ी थी, तभी कोच मुझे खेल में शामिल होने के लिए कहने लगे." ढेसी ने शुरुआत में उन्हें मना किया, लेकिन बाद में मौक़ा आज़माया और उन्हें कुछ अलग ही महसूस हुआ.वह कहती हैं, "मैंने एक दिन ट्राई किया और सभी कोच कहने लगे कि मैं कितनी अच्छी हूं. उसी दिन से मैंने इसे जारी रखा. फिर मुझे इंग्लैंड टीम के लिए भी चुना गया." पंजाबी और सिख समुदाय को गर्व उस दिन से ढेसी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. यूथ अमेचर खिलाड़ी के तौर पर उन्होंने तीन राष्ट्रीय, एक यूरोपियन सिल्वर मेडल और तीन इंटरनेशनल क्राउन्स पुरस्कार जीते. लेकिन उनके लिए यह केवल उपलब्धियों तक सीमित नहीं था. ढेसी प्रोफ़ेशनल बॉक्सिंग में उतरकर रूढ़ियों को तोड़ना चाहती थीं.हालांकि, प्रोफ़ेशनल बनने के बाद उन्हें नई चुनौतियों और अपने ही समुदाय की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. वह कहती हैं, "मुझसे पूछा गया, 'अगर तुम्हें चोट लग गई तो तुमसे कौन शादी करेगा?' 'क्या तुम्हें किचन में नहीं रहना चाहिए'. इस तरह की बातें काफ़ी नकारात्मक थीं. यहां तक कि यह सवाल भी किया गया, 'तुम्हारा प्लान बी क्या है?'" वह कहती हैं, "लेकिन मेरा प्लान ए बॉक्सिंग है और मेरा प्लान बी भी बॉक्सिंग ही है." मई में ढेसी ने इन सवालों का जवाब अपने मुक्कों से दिया जब अपने पहले ही प्रोफ़ेशनल मुक़ाबले में उन्होंने नॉकआउट से जीत हासिल की. इसके बाद यह क्लिप और उनकी कहानी वायरल हो गई. वह कहती हैं, "अचानक वही लोग, जो मेरी क्षमता पर शक कर रहे थे, मेरी तारीफ़ करने लगे कि मैंने पंजाबी और सिख समुदाय को गौरवान्वित किया है." "ये वही लोग हैं जो तब साथ नहीं होते जब आप मेहनत कर रहे होते हैं. लेकिन अब वही सीधे मेरे पास आ रहे हैं. उन्हें एहसास हो गया है कि मैंने रिंग में शानदार प्रदर्शन किया है और यह मज़ाक नहीं है. बॉक्सिंग ही मेरी ज़िंदगी है." अब भी हैं चुनौतियां ढेसी की कामयाबी भले ही सुर्ख़ियों में रही हों, लेकिन उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी अब भी संघर्ष से भरी है. स्पॉन्सरशिप न होने की वजह से उनके पूरे करियर का ख़र्च अब भी उनके माता-पिता उठा रहे हैं. वह कहती हैं, "मैं काम नहीं करती क्योंकि मेरा पूरा ध्यान ट्रेनिंग पर है. इसलिए यह मुश्किल है. मेरे ट्रेनिंग और बेहतर किट के कई मौक़े चूक रहे हैं और मैं उतना बाहर नहीं जा पा रही हूं जितना जाना चाहिए." लेकिन उनके लिए बॉक्सिंग कभी सिर्फ़ बेल्ट या इनामी रक़म तक सीमित नहीं रही. बल्कि यह अपनी जड़ों पर गर्व दिखाने और दूसरों के लिए रास्ता खोलने का एक ज़रिया रही है. वह कहती हैं, "कई सिख लड़कियां बॉक्सिंग में आना चाहती हैं. कई बार इवेंट्स में वे मुझसे मिलती हैं और पूछती हैं कि डर को कैसे दूर किया जाए. तब मैं कहती हूं, 'सुनो लड़कियों, मैं तुम्हें रास्ता दिखाऊंगी और पूरा सहयोग दूंगी'." "सच में, अगर कोई लड़की मुझसे मदद मांगे, चाहे वह लंदन में हो या कहीं और, मैं वहां जाऊंगी. यही मेरी चाहत है. मैं चाहती हूं कि ज़्यादा से ज़्यादा सिख लड़कियां बॉक्सिंग में आएं, और सिख लड़के भी."एक दिन वह मिडलैंड्स में अपना ख़ुद का जिम खोलने का सपना देखती हैं, जहां खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दी जा सके.अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए चाहे जो रिंग के अंदर हों या बाहर उनके लिए उनका संदेश साफ़ है.वह कहती हैं, "बस इसे कर ही डालो. आप जो चाहें, कर सकते हैं. जब तक आप ख़ुद पर विश्वास रखते हैं, वही सबसे अहम है. दूसरे क्या सोचते हैं इससे क्या फ़र्क़ पड़ता है?"

फिशर का नया समाधान: AIIMS भोपाल में होम्योपैथी दवा से मरीजों को मिली जबरदस्त राहत

 भोपाल  गुदा विदर (एनल फिशर) जैसी गंभीर और दर्दनाक बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भोपाल से एक बड़ी खुशखबरी आई है। एम्स के डाक्टरों ने एक अध्ययन में यह साबित किया है कि होम्योपैथी की एक दवा से इस बीमारी का इलाज बिना किसी ऑपरेशन के संभव है। इस सफलता के बाद अब मरीजों को असहनीय दर्द और सर्जरी की पीड़ा से मुक्ति मिलने की एक नई उम्मीद जगी है। यह महत्वपूर्ण अध्ययन एम्स के आयुष (होम्योपैथी) विभाग के डॉ. आशीष कुमार दीक्षित और सर्जरी विभाग के डा. मूरत सिंह यादव की टीम ने मिलकर किया है। इस शोध में एनल फिशर से पीड़ित 34 मरीजों को शामिल किया गया। इन सभी को तीन महीने तक होम्योपैथी दवा ''पियोनिया ऑफिसिनेलिस'' दी गई और साथ ही खान-पान में जरूरी परहेज और सुधार की सलाह दी गई। तीन महीने के इलाज में आए चौकाने वाले नतीजे तीन महीने के इलाज के बाद जो नतीजे सामने आए, वे चौंकाने वाले थे। अध्ययन में शामिल मरीजों के दर्द में 99 प्रतिशत तक की आश्चर्यजनक कमी दर्ज की गई। इलाज से पहले जहां दर्द का स्तर 10 में से नौ अंक पर था, वह इलाज के बाद घटकर लगभग शून्य पर आ गया। इसके अलावा मल त्याग के दौरान होने वाला असहनीय दबाव भी पूरी तरह समाप्त हो गया। सबसे बड़ी सफलता यह रही कि 34 में से 30 मरीजों, यानी लगभग 88 प्रतिशत लोगों के घाव पूरी तरह भर गए। इस पूरे इलाज के दौरान किसी भी मरीज पर कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं देखा गया। सरल और सुरक्षित इलाज का विकल्प इस सफल अध्ययन पर डॉ. आशीष कुमार दीक्षित ने बताया कि हमारे नतीजे यह प्रमाणित करते हैं कि पियोनिया ऑफिसिनैलिस दवा एनल फिशर के दर्द को जड़ से कम करने, घाव को भरने और मल त्याग को सुगम बनाने में अत्यंत प्रभावी है। यह मरीजों को एक सरल और सुरक्षित इलाज का विकल्प देती है। वहीं, सर्जरी विभाग के डॉ. मूरत सिंह यादव ने कहा कि एनल फिशर के कई मरीजों को अंततः सर्जरी का सहारा लेना पड़ता है, जो कष्टदायक हो सकती है। यह शोध एक सुरक्षित और बिना ऑपरेशन वाले इलाज का रास्ता खोलता है।

नर्मदापुरम में नया स्टार्टअप: कला-शिल्प और पुरातात्विक धरोहर को मिलेगी नई पहचान

भोपाल राज्य की पुरातात्विक महत्व की कला को सुदृढ़ करने और सतत बाज़ार की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से नर्मदापुरम में कला और शिल्प पर आधारित स्टार्टअप के लिए 'राफ्ट एंड रीज़न'  ने 'तसल्ली ब्रांड' के अंतर्गत नवाचार प्रारंभ किया है। इसमें नर्मदापुरम, भोपाल, छिंदवाड़ा, सीहोर, महेश्वर तथा धार जिले के चिन्हित शिल्प पर नवाचार किया जा रहा है। इसके अंतर्गत पुरातात्विक महत्व की कलाकृति को स्टोन पाउडर से बनाया जा रहा है और इस पर स्थानीय सागौन लकड़ी के साथ प्रयोग भी किया जा रहा है। यह कार्य हाथकरघा एवं हस्तशिल्प संचालनालय भोपाल, पुरातत्व संचालनालय भोपाल एवं पाटर्स द स्टूडियो नर्मदापुरम के सहयोग से किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि स्टार्टअप की पहली डिलीवरी बॉउर्नमाउथ, यूके में की गई है। इसे अमेजन ग्लोबल पर भी खरीदा जा सकता है। स्टार्टअप ने निर्यात लाइसेंस भी प्राप्त कर लिया है।