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उज्जैन की प्यास बुझाने वाला गंभीर डैम लबालब, एक गेट खोला गया

उज्जैन उज्जैन शहर में पेयजल का प्रमुख स्त्रोत गंभीर डैम पानी से लबालब हो गया है। पानी कम करने के लिए इसका एक गेट खोला गया है। इंदौर के यशवंत सागर बांध के गेट खोले जाने के बाद गंभीर बांध में लगातार पानी बढ़ता जा रहा था। इसके बाद यह पूर्ण जल संग्रहण क्षमता 2250 एमसीएफटी भर गया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के मुताबिक गंभीर नदी पर इंदौर-देपालपुर रोड पर हातोद गांव के पास बने ‘यशवंत सागर बांध’ का एक गेट 29 अगस्त की रात 11 बजे खोला गया था। ये गेट 30 अगस्त की दोपहर सवा तीन बजे तक खुला रहा। शाम साढ़े 5 बजे दो गेट खोल दिए गए। आवक जारी है और अंचल में मानसून भी सक्रिय है। ऐसे में उज्जैन शहर की जल आपूर्ति के मुख्य केंद्र गंभीर बांध पूरा भर गया। बांध भराने पर कम से कम छह माह तक तो शहरवासियों को नियमित जल प्रदाय निश्चित होगा ही, जैसा कि बीते दो दशक से नगर निगम ने परंपरा बना रखी है। भविष्य में नर्मदा का साथ मिला तो सालभर भी निमित जल प्रदाय हो सकता है। इस स्थिति के पीछे वजह स्पष्ट है कि शहर की सात लाख आबादी की आवश्यकता के अनुरूप उज्जैन में जलभंडारण क्षमता उपलब्ध नहीं है। भारत सरकार के मानकों के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति की दैनिक पानी की जरूरत 135 लीटर है। शहर की आबादी सात लाख है, इस हिसाब से सालभर के लिए 12180 एमसीएफटी पानी चाहिए, जबकि नगर निगम के पास जल प्रदाय को केवल 2361 एमसीएफटी जल संग्रहित करने की ही क्षमता है। वर्षाजल संग्रहण क्षमता का सबसे बड़ा स्रोत 2250 एमसीएफटी का गंभीर बांध, 96 एमसीएफटी का गऊघाट प्लांट और 15.43 एमसीएफटी के दो तालाब- साहिबखेड़ी और उंडासा है। इन्हीं सरंचनाओं का जल खींचकर 44 उच्च स्तरीय टंकियों को भरा जाता है और पाइपलाइन के जरिये पूरे शहर में जल प्रदाय किया जाता है। 95 कॉलोनियों में पानी की पाइपलाइन तक नहीं खास बात ये भी है कि शहर की 450 में से 95 कॉलोनियों में पानी की पाइपलाइन तक नहीं बिछी है। लगभग आधा शहर पानी के लिए निजी बोरिंग और सार्वजनिक कुएं-हैंडपंप पर निर्भर है। इस वर्ष 15 अप्रैल से शहर में एक दिन छोड़कर जल प्रदाय हो रहा है। जल संकट का स्थायी समाधान दो बड़ी परियोजनाओं से मुमकीन है। पहली, 614 करोड़ रुपये की सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी बांध योजना, जो शिप्रा को सालभर प्रवाहित रखेगी और गंभीर पर निर्भरता घटाएगी। दूसरी, 939 करोड़ रुपये की वाटर ट्रीटमेंट प्लांट परियोजना, जिससे उज्जैन की जल शोधन क्षमता 151 एमएलडी से बढ़कर 400 एमएलडी तक पहुंचेगी। सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी बांध परियोजना का काम शुरू हो चुका है। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट परियोजना का काम वर्षाकाल बाद शुरू होने की उम्मीद है। दोनों परियोजनाएं वर्ष 2027 में पूर्ण कराने का लक्ष्य है। जिले में अब तक 588 मिली बारिश, तराना में सर्वाधिक उज्जैन जिले में इस सीजन में अब तक 588 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। ये औसत 906 मिलीमीटर से अभी कम है। कलेक्टर कार्यालय की भू-अभिलेख शाखा के अनुसार तराना तहसील में सर्वाधिक 777 मिमी बारिश दर्ज की गई है। वहीं उज्जैन में 620, खाचरौद में 668, नागदा में 654, झार्डा में 667, बड़नगर में 565, महिदपुर में 518, घट्टिया में 426 और माकड़ौन में 398 मिमी वर्षा दर्ज हुई है। बीते 24 घंटों के दौरान जिले में औसत 6.8 मिमी बारिश हुई है।

स्कूल में बर्बरता! मोबाइल चलाने पर छात्र की बेरहमी से पिटाई, बाल आयोग की अध्यक्ष पहुंचीं नवोदय

रायपुर नवोदय विद्यालय माना में शिक्षक द्वारा एक छात्र को पीटे जाने का मामला बाल आयोग तक पहुंच गया है। बाल आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने हॉस्टल में बच्चों के साथ क्रूरता के मामले की सूचना मिलने के बाद उस विद्यालय का तत्काल मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। उन्होंने पीड़ित बच्चों से मुलाकात की और मामले की पूरी जानकारी ली। प्रारंभिक रूप में यह पाया गया कि एक शिक्षक ने बच्चों के साथ मारपीट की है। पीड़ित बच्चों ने बताया कि विद्यालय के ज्योग्राफी शिक्षक ने मारा था। इस क्रूरता के कारण एक बच्चे के हाथ में मामूली फ्रैक्चर और पैर में चोटें आई हैं। पीड़ित बच्चे की स्थिति को देखते हुए विद्यालय की प्राचार्या ने तुरंत उसका एक्सरे कराया, जिसमें हाथ में फ्रैक्चर और पैर में चोट का खुलासा हुआ। बाल आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने घटना की गंभीरता को देखते हुए आयोग को इस मामले का संज्ञान लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जांच प्रभावित न हो, इसलिए दोषी शिक्षक को निलंबित करने की अनुशंसा की जा रही है। डॉ. शर्मा ने कहा कि "बच्चों के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस घटना की पूरी जांच की जाएगी और दोषी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।" उनके साथ बाल कल्याण समिति रायपुर के एक सदस्य भी शामिल हुई, ताकि मामले सही तरीके से जांच हो सके। आयोग ने आगे की कार्रवाई के लिए त्वरित कदम उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है। यह है पूरा मामला जानकारी के अनुसार, नवोदय विद्यालय माना में 10वीं के कुछ बच्चे रात के समय हॉस्टल में फोन चला रहे थे। वार्डन ने इसकी सूचना शिक्षक को दी। जिस पर शिक्षक ने गुस्से में आकर छात्रों के साथ मारपीट की। जिसमें एक छात्र के हाथ में गंभीर चोट आई। वार्डन और शिक्षक का कहना है कि स्कूल में फोन लाने की अनुमति नहीं है, साथ ही बच्चे फोन में गलत चीजें देख रहे थे। क्या बोले आरोपी शिक्षक वहीं इस मामले में आरोपी शिक्षक डीके सिंह ने कहा कि मैं कोई अपराधी नहीं हूं। वार्डन ने छात्रों के रात एक बजे मोबाइल चलाने की बात बताई। मुझे देखते ही छात्र मोबाइल फेंककर भागने की कोशिश करने लगे। मैंने मोबाइल हास्टल में कहां से आया है। उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। एक छात्र को मार दिया। मुझे मारना नहीं चाहिए। छात्र हमारे संरक्षण में रहते हैं। इनकी देखभाल करना और अनुशासित बनाना हमारी जिम्मेदारी है। हम भी छात्रों से उनके माता-पिता की तरह प्यार करते हैं। अनुशासनहीनता करने पर कठोर निर्णय लेना पड़ता है।

भारी बाढ़ का असर, गोदावरी के उफान से NH-163 पूरी तरह बंद

बीजापुर लगातार हो रही बारिश और गोदावरी नदी के उफान ने आवागमन पर बड़ा असर डाला है। छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर स्थित टेकलगुड़म नाला में बाढ़ का पानी चढ़ने से बीजापुर से हैदराबाद को जोड़ने वाला नेशनल हाईवे-163 पिछले 24 घंटे से पूरी तरह बंद है। बर्तमान स्थिति में नाले पर पानी का बहाव कम नहीं हुआ था। सूत्रों के अनुसार सड़क के ऊपर लगभग चार फीट पानी बह रहा है, जिससे मार्ग को पार करना खतरनाक हो गया है। इस कारण भोपालपटनम-तारलागुड़ा और एटूनगरम-हैदराबाद मार्ग भी बाधित हैं। मार्ग बंद होने से दोनों ओर छोटी-बड़ी गाड़ियों की लंबी कतारें लग गई हैं। कई वाहन चालक और यात्री रातभर सड़क किनारे फंसे रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि गोदावरी नदी का जलस्तर लगातार ऊंचा बना हुआ है और फिलहाल कमी के आसार नहीं हैं। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन पानी का बहाव कम हुए बिना यातायात बहाल करना संभव नहीं है। इस वजह से बीजापुर से हैदराबाद जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी जा रही है। गोदावरी के बढ़ते जलस्तर और नेशनल हाईवे के अवरुद्ध होने से आमजन को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल सभी की नजरें पानी घटने पर टिकी हैं, ताकि जल्द से जल्द परिवहन सामान्य हो सके। गौरतलब है कि, पिछले कुछ दिनों से बस्तर संभाग में भारी बारिश हो रही है। जिस कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त व्यस्त हो गया है। 2 दिन पहले संभाग के कई गावों का संपर्क मख्यालयों से कट गया था। दंतेवाड़ा में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो गई थी।

कर्मचारियों को वर्दी भत्ता नहीं मिला, हरियाणा सरकार ने बताई वजह

चंडीगढ़ परिवहन विभाग के चालक-परिचालकों की तर्ज पर स्वास्थ्य विभाग के छह हजार कर्मचारियों को भी इस बार वर्दी धुलाई भत्ता नहीं मिल पाया है। बगैर पूर्व सूचना के वर्दी धुलाई भत्ता रोकने पर भड़के बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कर्मचारियों (एमपीएचडब्ल्यू) ने तुरंत प्रभाव से यह भत्ता जारी करने की मांग की है। बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कर्मचारी एसोसिएशन की राज्य प्रधान शर्मिला देवी और महासचिव सहदेव सांगवान तथा स्वास्थ्य सुपरवाइजर संघ के प्रदेश अध्यक्ष रामेहर वर्मा ने बताया कि अगस्त में जारी जुलाई का जो वेतन जारी किया गया है, उसमें वर्दी धुलाई भत्ता शामिल नहीं है। इस बारे में जब मुख्यालय में संपर्क किया गया तो पता चला कि ई सैलरी से वर्दी धुलाई भत्ता का विकल्प ही वित्त विभाग द्वारा हटा दिया गया है। इससे यह कटौती हुई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में एमपीएचडब्ल्यू वर्ग के लगभग छह हजार महिला एवं पुरुष कर्मचारी एवं निरीक्षक तैनात है, जिन्हें सरकार द्वारा कई वर्षों से 900 रुपये प्रति माह वर्दी धुलाई भत्ता दिया जा रहा था। बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक वर्दी धुलाई भत्ता वेतन से हटाना कर्मचारियों एवं उनके परिवारों से कुठाराघात है। उन्होंने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और विभागीय उच्च अधिकारियों को पत्र लिख मामले में संज्ञान लेकर तुरंत ई सैलरी पर वर्दी धुलाई भत्ते का आप्शन जोड़कर राशि जारी करने की मांग की है।

‘मन की बात’ हर माह देती है नई प्रेरणा, विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सभी करें योगदान : मुख्यमंत्री साय

रायपुर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 125वीं कड़ी का सीधा प्रसारण आज नवा रायपुर स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद उद्योग एवं व्यापार परिसर के कन्वेंशन सेंटर में हुआ। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, उद्योग मंत्री लखन देवांगन, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक इंद्र कुमार साहू तथा छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधिगण और नागरिक उपस्थित थे। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 'मन की बात' रेडियो कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदाओं की घड़ी में देशवासियों द्वारा एक-दूसरे की सहायता करना भारत की असली ताकत है। उन्होंने कहा कि विपत्ति के समय जो सहयोग और एकजुटता दिखाई देती है, वही भारत की संस्कृति और सामूहिक चेतना को परिभाषित करती है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में खेलों को न केवल स्वास्थ्य बल्कि आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का भी आधार बताया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि खेलकूद में सक्रिय भागीदारी कर अपने जीवन और देश दोनों को ऊर्जावान बनाएं. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि ‘मन की बात’ हर माह प्रदेशवासियों को नई ऊर्जा और प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'मन की बात' रेडियो कार्यक्रम समाज के सभी वर्गों में सकारात्मक सोच और राष्ट्रीय चेतना को प्रबल करता है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में अपने जापान और दक्षिण कोरिया प्रवास का उल्लेख करते हुए बताया कि कौशल विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े क्षेत्रों में हुए सहयोग और निवेश से राज्य के युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे और छत्तीसगढ़ में कौशल विकास और रोजगार का नया अध्याय शुरू होगा। राज्य की रजत जयंती वर्ष का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण तभी संभव है जब प्रत्येक नागरिक अपनी भूमिका ईमानदारी से निभाए। उन्होंने कहा कि सरकार और जनता के साझा प्रयासों से राज्य को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी का संदेश हर नागरिक के लिए प्रेरणास्रोत है। हमें सामूहिक जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ते हुए छत्तीसगढ़ को विकास और सुशासन की नई ऊँचाइयों पर ले जाना है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि सभी मिलकर एक समृद्ध और स्वच्छ छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय योगदान दें।

आंगनबाड़ी और स्कूल में गैस चूल्हे से भोजन के साथ बनने लगी है सेहत

खीर, पूड़ी, हलवा, खिचड़ी, पोहा, भजिया और सेवई का मिल रहा स्वाद रायपुर. आंगनबाड़ियों और स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अब पहले से बहुत खुश हैं। समय पर स्कूल और आंगनबाड़ी खुल रहे हैं। वहां मिलने वाले नाश्ते खीर, पूड़ी, हलवा, खिचड़ी, पोहा, भजिया, सेवई तथा भोजन से उन्हें ऊर्जा भी मिल रही है। गैस सिलेण्डर की व्यवस्था से आंगनबाड़ियों और स्कूलों में भोजन पकाने के दौरान उत्पन्न होने वाले धुएं से भी मुक्ति मिल गई है। इससे रसोईयों के साथ ही विद्यार्थियों और शिक्षकों को भी राहत मिली है।   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर कोरबा जिले के सभी आंगनबाड़ियों तथा प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में सुबह के नाश्ते की व्यवस्था डीएमएफ से की जा रही है। नाश्ते और सिलेण्डर की व्यवस्था ने आंगनबाड़ी तथा विद्यालय आने वाले बच्चों की रूचि बढ़ा दी है। अलग-अलग दिनों में निर्धारित मेनू के आधार पर उन्हें नाश्ता और भोजन परोसा जा रहा है। नाश्ते में खीर, पूड़ी, हलवा, खिचड़ी, पोहा व भजिया दी जा रही है। विद्यार्थी नाश्ता खाने बहुत उत्सुक रहते हैं और समय पर विद्यालय भी पहुंच जाते हैं।  पोड़ी उपरोड़ा विकासखण्ड के ग्राम धोबघाट प्राथमिक शाला में कक्षा पहली की छात्रा प्रियांशी, छात्र विनय, कक्षा दूसरी की नेहा, तीसरी की रोशनी और नर्मदा तथा कक्षा पांचवी के भूपेश ने बताया कि अब नाश्ते में अलग-अलग दिनों में उन्हें अलग-अलग खाने को मिलता है। खीर, पूड़ी, हलवा, खिचड़ी, पोहा, भजिया और सेवईयां मिलती है। विद्यालय में प्रधान पाठक श्री चैनसिंह पुहुप ने बताया कि नाश्ते का प्रभाव बच्चों पर पड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि सिलेण्डर की व्यवस्था होने से जल्दी खाना पक जाता है। नाश्ता हो या मध्यान्ह भोजन दोनों को पकाने में आसानी हो गई है।  कोरबा विकासखण्ड के दूरस्थ गांव लामपहाड़ में पहाड़ी कोरवा बच्चों में भी नाश्ते का प्रभाव पड़ा है। आंगनबाड़ी केंद्र हो या स्कूल दोनों जगह उनकी उपस्थिति नजर आती है। पहले सुबह से ही अपने परिजनों के साथ जंगल की ओर प्रस्थान कर जाने वाले पहाड़ी कोरवा बच्चे अब समय से पहले स्कूल पहुंचते हैं। लामपहाड़ आंगनबाड़ी की कार्यकर्ता सुशीला तिर्की और सहायिका सुलोचनी यादव बताती है कि केंद्र में ज्यादातर बच्चे पहाड़ी कोरवा जनजाति के हैं। कई बच्चों को घर पर पर्याप्त आहार उपलब्ध नहीं हो पाता। ऐसे में नाश्ता और भोजन उनके शारीरिक विकास के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। उन्होंने बताया कि सुबह दस बजे के आसपास नाश्ता देने के साथ ही दोपहर को एक बजे भोजन दिया जाता है।  आंगनबाड़ी में आने वाले पहाड़ी कोरवा बच्चों सम्पति, रवीना, सुखमनिया, सुशील और कविता ने बताया कि उन्होंने सुबह नाश्ते में दलिया खाया और दोपहर को दाल, भात और सब्जी खाई है। हर दिन गरम भजिया, पोहा, खीर, पूड़ी, उपमा का नाश्ता मिलता है और इसे खाना भी अच्छा लगता है। यहां भोजन पकाने वाली सहायिका सुलोचनी यादव का कहना था कि पहले बारिश के दिनों में चूल्हा जलाना बहुत मुश्किल हो जाता था। सूखी लकड़ियों की व्यवस्था करना, फिर चूल्हा जलाकर धुएं के बीच खाना पकाना बहुत परेशानी वाला काम था। अब तो गैस से मिनटों में बिना परेशानी के खाना बनने लगा है।  लामपहाड़ के प्राथमिक और माध्यमिक शाला में भी विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों की उपस्थिति तथा नाश्ते व मध्याह्न भोजन में रूचि नजर आने लगी है। कक्षा चौथी की देवशीला एवं फूलमनिया ने बताया कि स्कूल में मिलने वाला नाश्ता उन्हें अच्छा लगता है। पाली विकासखंड के दूरस्थ गांव पण्डोपारा में प्राथमिक शाला में लगभग 25 बच्चे हैं। नये भवन में आंगनबाड़ी संचालित है। दोनों जगह बच्चों को समय पर नाश्ता और भोजन मिलता है। गांव में रहने वाली पूजा पण्डो ने बताया कि उसके पांच बच्चे हैं। एक आंगनबाड़ी में और दो स्कूल में पढ़ाई करते हैं। तीनों को सुबह का नाश्ता और दोपहर का खाना मिलता है। पहले वे बहाना बनाकर स्कूल जाने में आनाकानी करते थे, पर अब नियमित जाते हैं। स्थानीय प्रशासन ने सभी स्कूलों में नाश्ते का मीनू लिखाने तथा स्थानीय उपलब्धता और विद्यार्थियों की पसंद के अनुरूप नाश्ता परोसने के निर्देश दिए हैं। सवा दो लाख बच्चे हो रहे लाभान्वित करीब एक साल पहले 14 अगस्त 2024 को कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा और कोरबा विकासखंड के शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में विद्यार्थियों की थाली में गरम नाश्ता परोसने का सिलसिला प्रारंभ किया गया है। ढाई माह तक नाश्ता परोसने और इससे हुए सकारात्मक प्रभाव को देखते हुए इसे जिले के सभी विकासखण्डों में प्रारंभ करने के निर्देश दिए। पिछले साल दीपावली अवकाश के बाद स्कूल खुलते ही कोरबा, पाली, करतला और कटघोरा के शेष स्कूलों में भी नाश्ता देना प्रारंभ किया गया। जिले के सभी आंगनबाड़ियों, स्कूलों और छात्रावासों में सिलेण्डर की व्यवस्था कर प्रतिमाह गैस रिफलिंग की सुविधा भी प्रदान की गई है।  कोरबा जिले के 2602 आंगनबाड़ियों में छह माह से लेकर तीन वर्ष तक के 48 हजार 217 और तीन वर्ष से छह वर्ष तक के 56 हजार 477 बच्चे दर्ज हैं। इसी तरह 1502 प्राइमरी स्कूलों में 73 हजार 810 और 537 मिडिल स्कूलों में 47 हजार 122 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। ये सभी बच्चे नाश्ते और मध्यान्ह भोजन से लाभान्वित हो रहे हैं। नाश्ता और भोजन पकाने के लिए डीएमएफ से गैस सिलेण्डर की व्यवस्था की गई है।  

श्रेया घोषाल का खुलासा – संजय लीला भंसाली ने मुझे बनाया स्टार

मुंबई, बॉलीवुड की जानीमानी पार्श्वगायिका श्रेया घोषाला का कहना है कि फिल्मकार संजय लीला भंसाली ने उन्हें पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। श्रेया घोषाल ने बताया है कि उन्हें भंसाली के साथ काम करने के लिए बहुत धैर्य और विश्वास की जरूरत थी। उन्होंने अपनी पहली फिल्म देवदास (2002) को भी याद किया। श्रेया घोषाल ने कहा, “अब सच ये था कि संजय जी की फिल्म में एक नई लड़की गा रही है, ये खबर वायरल हो गई थी। बहुत लोगों ने मुझे कॉल किया कि हमारा भी एक गाना है, लेकिन मैंने संजय जी को वर्ड देकर कहा था कि जब तक ये गाना रिलीज़ नहीं होता, मैं कहीं नहीं जाऊंगी।” उन्होंने बताया, “तब मैं सिर्फ 16 साल की थी और ये फैसला असल में मेरे पापा ले रहे थे, क्योंकि मैं तो पढ़ाई कर रही थी और अपना काम कर रही थी। इतनी सारी ऑफर्स आने के बावजूद, गाना रिलीज़ होने से पहले ही, उन्हें ठुकराना आसान नहीं था। लेकिन हमने अपने सिद्धांतों पर टिके रहने का फैसला किया और वही सही लगा।” श्रेया घोषाल ने बताया कि देवदास के रिलीज़ से पहले उन्होंने कई ऑफ़र्स ठुकरा दिए थे। उनका मानना है कि यही फैसला उनकी जगह फिल्म में पक्की करने वाला साबित हुआ। उन्होंने कहा, “ये काम कर गया, यदि मैं उन सबके लिए गा देती तो शायद देवदास में नहीं होती, मुझे पूरा यक़ीन है। संजय जी इस बात को लेकर बहुत साफ थे कि वही मुझे लॉन्च करेंगे और मुझे फिल्म रिलीज़ तक सब्र रखना होगा।”  

बाढ़ से प्रभावित पंजाब, सरकार ने किए महत्वपूर्ण निर्णय

चंडीगढ़  पंजाब और हिमाचल प्रदेश में हो रही बारिश के कारण राज्य के कई इलाके बाढ़ की चपेट में हैं। इन हालातों को देखते हुए पंजाब सरकार ने 'खेडां वतन पंजाब दियां' को स्थगित करने का फैसला किया है। बता दें कि 'खेडां वतन पंजाब दियां' का चौथा सीजन इसी महीने शुरू होना था। इसके तहत 3 सितंबर से ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिताएं शुरू होने वाली थीं। लेकिन बाढ़ से पैदा हुए हालात को देखते हुए पंजाब सरकार ने इन प्रतियोगिताओं को फिलहाल स्थगित करने का फैसला किया है। हालात सुधरने पर इनकी नई तारीखों की घोषणा की जाएगी। 

राहुल गांधी की यात्रा में शामिल होंगे झारखंड CM हेमंत सोरेन, कल करेंगे बिहार की जनता से संवाद

रांची 17 अगस्त से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिहार में वोट अधिकार यात्रा की शुरूआत की थी। कल राहुल गांधी की वोट अधिकार यात्रा का आखिरी दिन है, जिसका समापन पटना के गांधी मैदान में किया जायेगा। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कल राहुल गांधी की वोट अधिकार यात्रा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल होंगे। इसके लिए कल सीएम हेमंत बिहार जाएंगे। इस दौरान वह जनता को संबोधित करेंगे। जनसभा में झारखंड सरकार के कई मंत्री, महागठबंधन के नेता और हजारों की संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हेमंत सोरेन की भागीदारी से बिहार में विपक्षी एकता को और मजबूती मिलेगी। सूत्रों के अनुसार, पटना की इस रैली में झारखंड ही नहीं बल्कि देशभर से कई बड़े नेता भी शामिल होंगे। इनमें समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, डीएमके नेता एम.के. स्टालिन, कनिमोझी सहित विपक्षी दलों के कई दिग्गज चेहरे मौजूद रहेंगे। यह रैली महागठबंधन के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखी जा रही है। बता दें कि ये वोट अधिकार यात्रा राहुल गांधी के नेतृत्व में 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाये जाने के विरोध में इंडिया महागठबंधन के द्वारा चलायी जा रही है, जिसमें राजद नेता तेजस्वी यादव लगातार साथ नजर आ रहे हैं। इस यात्रा की शुरुआत 17 अगस्त को सासाराम से हुई थी जिसे राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस दौरान इंडिया महागठबंधन के कई नेता मौजूद रहे थे।  

आर्यमन ने कसा सबका पसीना, पिता ज्योतिरादित्य सिंधिया का रिकॉर्ड टूटने के कगार पर

ग्वालियर  मध्य प्रदेश के क्रिकेट की राजनीति में सिंधिया परिवार की तीसरी पीढ़ी की आमद अब तय हो चुकी है। महानआर्यमन सिंधिया मध्य प्रदेश क्रिकेट संगठन (एमपीसीए) के आगामी चुनाव में अध्यक्ष पद के अकेले दावेदार हैं, जिससे उनका निर्विरोध चुना जाना तय है। इसके साथ ही मात्र 29 साल की उम्र में वे एमपीसीए के 68 साल के इतिहास में सबसे युवा अध्यक्ष होंगे। इस मामले में वे अपने ही पिता केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का कीर्तिमान तोड़ने जा रहे हैं। अब तक एमपीसीए के सबसे युवा अध्यक्ष का रिकॉर्ड ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम था, जो 35 वर्ष की आयु में अध्यक्ष बने थे। एमपीसीए की चुनावी वार्षिक साधारण सभा की बैठक दो सितंबर को होना है। नामांकन शनिवार को जमा हुए। महानआर्यमन के खिलाफ किसी ने भी नामांकन नहीं भरा है। वे वर्ष 2022 से ग्वालियर संभागीय क्रिकेट संगठन के उपाध्यक्ष भी हैं। बीते दो साल से मध्य प्रदेश क्रिकेट लीग के माध्यम से महानआर्यमन ने अपनी प्रशासनिक क्षमताओं को साबित करने का प्रयास किया। ज्योतिरादित्य सिंधिया वर्ष 2006 में पहली बार अध्यक्ष बने थे, तब उनकी उम्र 35 वर्ष थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया से पहले उनके पिता स्व. माधवराव सिंधिया ने 37 वर्ष की उम्र में पहली बार एमपीसीए के अध्यक्ष की कुर्सी संभाली थी। एमपीसीए के पहले अध्यक्ष मनोहर सिंह मेहता थे, जिन्होंने 1957 में पद संभाला था। कनमड़ीकर परिवार की भी तीसरी पीढ़ी सिंधिया परिवार की तरह कनमड़ीकर परिवार की भी तीसरी पीढ़ी क्रिकेट की राजनीति में आ रही है। कानूनविद प्रसून कनमड़ीकर के खिलाफ भी प्रबंधकारिणी में कोई विरोधी नहीं है। उनके पिता स्व. मिलिंद कनमड़ीकर एमपीसीए के सचिव रहे हैं जबकि दादा स्व. अनंतवागेश कनमड़ीकर बीसीसीआई के सचिव के साथ एमपीसीए के वरिष्ठ पदों पर रहे हैं। जो अब तक सदस्य नहीं वे भी बनेंगे पदाधिकारी कोषाध्यक्ष पद के लिए संजीव दुआ का चयन भी तय है क्योंकि वे अकेले दावेदार हैं। उनके पिता नरेंद्र दुआ और भाई राजीव दुआ दोनों सदस्य हैं, लेकिन संजीव अब तक संगठन के सदस्य नहीं हैं। उन्होंने सीसीआई के प्रतिनिधि के रूप में नामांकन दाखिल किया है।