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भारत ने रिलीज़ पर लगी रोका, दुनिया ने सराहा: विपिन शर्मा को हॉलीवुड अवॉर्ड से सम्मानित

लॉस एंजिल्स हॉलीवुड फिल्म 'मंकी मैन' में किन्नर का किरदार निभाने वाले बॉलीवुड एक्टर विपिन शर्मा को 'एस्टार अवार्ड्स 2025' से सम्मानित किया गया है। एक्टर ने मंच पर इसका श्रेय 'स्लमडॉग मिलियनेयर' के एक्टर देव पटेल को दिया। एक्टर विपिन शर्मा को हाल ही में बैंकॉक में आयोजित 'एस्टार अवार्ड्स 2025' के उद्घाटन समारोह में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फिल्म साइंस एंड आर्ट्स (आईआईएफएसए) ने इस कार्यक्रम को आयोजित किया था। इन पुरस्कारों का उद्देश्य सिनेमा के क्षेत्र में उत्कृष्ट काम करने वालों को सम्मानित करना है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान पाने वाले एक्टर इसमें विभिन्न देशों और संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व करने वाले फिल्म प्रड्यूसर और कलाकार मौजूद थे। विपिन शर्मा इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान पाने वाले भारतीय एक्टर्स में से एक बन गए हैं। विपिन शर्मा बोले- ऐसी भूमिका जिसने मेरी जिंदगी बदल दी विपिन शर्मा ने अवॉर्ड पाने के बाद कहा, 'पहले ही एस्टार अवार्ड्स में यह सम्मान पाकर मैं सचमुच अभिभूत हूं। मंकी मैन मेरे लिए एक खास सफर रहा है और दुनिया भर के दर्शकों के साथ इस एक्टिंग से जुड़ते देखना बहुत सुखद है। मैं देव पटेल का भी बहुत आभारी हूं, जिन्होंने मुझे एक ऐसी भूमिका दी जिसे मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा, एक ऐसी भूमिका जिसने मेरी जिंदगी बदल दी। इस तरह के अवॉर्ड हमें सिनेमा की सीमाओं को पार करने और लोगों को जोड़ने की शक्ति की याद दिलाते हैं और मैं इस पल का हिस्सा बनकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं।' इसे भारत में रिलीज नहीं किया गया था फिल्म 'मंकी मैन' को एक्टर देव पटेल ने डायरेक्ट किया था। बतौर निर्देशक यह उनकी पहली फिल्म थी। इसे भारत में रिलीज नहीं किया गया था। अब इस फिल्म को ग्लोबल लेवल पर सम्मान मिल रहा है। सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को इसलिए हरी झंडी नहीं दी, क्योंकि इसमें उन्हें ज्यादा हिंसा, इंटीमेट सीन (अंतरंग दृश्य), हिंदू धर्म और पौराणिक कथाओं को लेकर आपत्ति थी। हालांकि यह फिल्म अब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भारत में भी उपलब्ध है। 'मंकी मैन' में कई और कलाकार इसमें शोभिता धुलिपाला, सिकंदर खेर, विपिन शर्मा, अश्विनी कालसेकर और मकरंद देशपांडे जैसे कलाकार हैं।

तीन चरणों में होंगे बिहार विधानसभा चुनाव, चुनाव शेड्यूल अक्टूबर में जारी होने की उम्मीद

पटना बिहार में विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने वाला है। भारत निर्वाचन आयोग अक्टूबर के महीने में विधानसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर सकता है। बिहार चुनाव के लिए वोटिंग नवंबर में संभावित है। विधानसभा चुनाव को तीन चरणों में आयोजित किया जा सकता है। नवंबर 2025 में ही चुनाव के नतीजे घोषित होंगे और नई सरकार का गठन होगा। क्योंकि मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर को खत्म हो रहा है। इससे पहले चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार में चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि नवंबर 2025 के पहले एवं दूसरे सप्ताह में 3 चरणों में बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मतदान कराया जा सकता है। दिवाली और छठ पूजा जैसे त्योहारों को ध्यान में रखते हुए चुनाव की तारीखें तय की जाएंगी। फिलहाल निर्वाचन आयोग चुनाव की तैयारी में जुटा है। करीब 22 साल बाद बिहार में वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कराया जा रहा है। इसके तहत घर-घर सर्वे का काम जुलाई महीने में पूरा कर लिया गया। अगस्त महीने में एसआईआर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर इस पर दावा और आपत्तियां मांगी गई थीं। आयोग अब इनके निपटारों में जुटा हुआ है। 30 सितंबर को फाइनल वोटर लिस्ट जारी की जाएगी। उसी के आधार पर विधानसभा चुनाव होंगे। अक्टूबर में आ सकता है चुनावी शेड्यूल माना जा रहा है कि फाइनल वोटर लिस्ट प्रकाशित होने के बाद निर्वाचन आयोग बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा अक्टूबर महीने के पहले सप्ताह में हो सकती है। चुनाव शेड्यूल जारी होते ही राज्य में आदर्श आचार संहिता लग जाएगी। अक्टूबर महीने में ही दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहार हैं, उस दौरान वोटिंग कराए जाने की संभावना नहीं है। 28 अक्टूबर को उगते हुए सूरज को अर्घ्य देने के बाद छठ महापर्व का समापन होगा। इसके बाद ही विधानसभा चुनाव का मतदान संभव है। पिछली बार भी तीन चरणों में हुई थी वोटिंग 2020 में भी 3 चरणों में विधानसभा चुनाव कराए गए थे। पहले चरण में 71 सीटों पर 28 अक्टूबर को मतदान हुआ था। दूसरे चरण में 94 सीटों पर 3 नवंबर को और 78 सीटों पर 7 नवंबर को वोटिंग हुई थी। 10 नवंबर को मतगणना के बाद चुनाव का रिजल्ट घोषित हुआ था।  

नवजातों को कुतरा चूहे ने, MY अस्पताल में खराब हालतों पर सवाल खड़े

इंदौर मध्य प्रदेश में इंदौर के एमवाय अस्पताल (महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय) के एनआईसीयू वार्ड में भर्ती दो नवजात शिशुओं की मौत से हड़कंच मच गया है। एक तरफ परिजन ने नवजातों की मौत का कारण चूहों का काटना बताया है, जबकि अस्पताल प्रशासन इसे गंभीर बीमारियों और संक्रमण का नतीजा बता रहा है। मामला तूल पकड़ने पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संज्ञान लिया है और अस्पताल पहुंचे। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं और कहा है कि सरकार लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं बता दें कि यह पहला मामला नहीं है, जब अस्पताल की तरफ से ऐसी लापरवाही देखने को मिली है। इससे पहले भी ऐसा हो चुका है, लेकिन इसके बाद भी प्रशासन ने गलतियों से सबक नहीं सीखा। चार साल पहले, यानी मई 2021 में एमवाय अस्पताल की पहली मंजिल पर नवजात शिशु नर्सरी में भर्ती एक नवजात के पैर का अंगूठा और एड़ी को चूहों ने कुतर दिया था।   इससे शिशु की जान खतरे में आ गई। इसके बाद नवजात के घरवालों ने हंगामा भी किया था। शिशु प्री-मेच्योर था और उसका वजन 1.4 किग्रा था। देखरेख के लिए उसे नर्सरी में वार्मर पर रखा गया था। बच्चे की मां दूध पिलाने पहुंची थी, तब मामले का खुलासा हुआ था। जीतू पटवारी ने उठाए सवाल मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में नवजातों की मौत के मामले में कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने जमकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, 'बीजेपी के 22 साल का यह असली चेहरा है। एमवाय में चूहों की हरकत यह पहली बार नहीं हुई। नवजातों को चूहों ने नहीं, भ्रष्टाचारी प्रशासन ने क्षति पहुंचाई है। जितना दोषी वह चूहा है, उससे ज्यादा दोषी यह तंत्र और व्यवस्था है।' वहीं राहुल गांधी ने भी भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह घटना रूह कंपाने वाली है। उन्होंने कहा कि एक मां की गोद से उसका बच्चा छिन गया, सिर्फ इसलिए क्योंकि सरकार ने अपनी सबसे बुनियादी जिम्मेदारी नहीं निभाई।   अस्पताल प्रशासन ने लिया एक्शन नवजातों की मौत के बाद लापरवाही बरतने वाली नर्स श्वेता चौहान और आकांशा बेंजामिन को सस्पेंड कर दिया गया है, साथ ही नर्सिंग सुप्रीडेंट मारग्रेट जोसेफ को भी हटा दिया गया है। इसके अलावा प्रभारी एचओडी डा. मनोज जोशी, आईसीयू इंचार्ज नर्स प्रवीणा सिंह, कलावती भलावी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इस मामले में डॉ. एसबी बंसल की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी भी बनाई है।

हार्ट अटैक का कारण बन सकती है B12 की कमी, इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

नई दिल्ली इन दिनों हार्ट अटैक और दिल से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। बात जब भी हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट में प्लाक की आती है, तो डॉक्टर अक्सर उनकी डाइट, स्ट्रेस लेवल, एक्सरसाइज और नींद की कमी को इसका जिम्मेदार बताते हैं, लेकिन इसके पीछे कुछ पोषक तत्वों की कमी भी जिम्मेदार हो सकती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि विटामिन-बी12 की कमी वर्षों से ब्लड प्रेशर और हार्ट रिस्क को चुपचाप बढ़ाने में भूमिका निभा रहा है। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एकेडमिक मेडिसिन एंड फार्मेसी के मुताबिक शरीर में विटामिन-बी12 की कमी कई तरह आपकी हार्ट हेल्थ को प्रभावित करती है। आज इस आर्टिकल में हम आपको इसी के बारे में बताएंगे। आइए जानते हैं कैसे हार्ट अटैक का कारण बन सकती है शरीर में विटामिन-बी12 की कमी-   स्टडी में हुआ खुलासा एक शोध में इस बारे में एक दिलचस्प संबंध सामने आया है। जब शरीर में विटामिन बी12 का लेवल कम होता है, तो ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, जो समय के साथ हार्ट वेसल्स को नुकसान पहुंचाता है। यह संबंध हाई ब्लड प्रेशर की रोकथाम और उपचार के लिए जरूरी है, क्योंकि दुनिया भर में करोड़ों लोगों में विटामिन बी12 की कमी पाई जाती है। क्यों जरूरी है विटामिन-बी12? विटामिन-B12 हमारे शरीर के लिए एक जरूरी पोषक तत्व है, तो रेड ब्लड सेल्स को बनाने, नर्वस सिस्टम के काम और डीएनए सिंथसिस के लिए जरूरी है। इन सबके अलावा, यह ब्लड में अमीनो एसिड, होमोसिस्टीन के रेगुलेशन का भी काम करता है। जब होमोसिस्टीन का लेवल बढ़ जाता है, तो यह हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक और दिल के दौरे का रिस्क फैक्टर बन जाता है। विटामिन B12 और हार्ट अटैक में कनेक्शन जब बी12 का लेवल कम होता है, तो शरीर होमोसिस्टीन को जरूरी कंपाउंड में बदल नहीं कर पाता है। ऐसे में हाई होमोसिस्टीन ब्लड वेसल्स के लिए टॉक्सिक होता है, जिससे वे कठोर और कम लचीली हो जाती हैं। इससे सूजन होती है और आर्टरीज की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचता है, जिससे एथेरोस्क्लेरोसिस या प्लाक जमने की प्रोसेस तेज हो जाती है। हाई होमोसिस्टीन खून के थक्के बनने की संभावना को भी बढ़ा सकता है, जिससे ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है, जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का कारण बनते हैं। इसलिए खतरनाक है विटामिन-बी12 की कमी विटामिन-बी12 यूं तो कई वजहों से सेहत के लिए जरूरी होता है, लेकिन यह हार्ट हेल्थ के लिए भी काफी अहम है। दरअसल, विटामिन B12, होमोसिस्टीन को कंट्रोल में रखने के लिए फोलेट और विटामिन B6 के साथ मिलकर काम करता है। ऐसे में अगर इन तीनों में से किसी भी एक की कमी रिस्क फैक्टर को कई गुना बढ़ा सकती है, जिससे ब्लड वेसल्स पर दबाव पड़ता है और हाई ब्लड प्रेशर का कारण बनता है। ऐसे में करें विटामिन-बी12 की कमी के पहचान     बहुत थकान या कमजोरी महसूस     मतली, उल्टी या दस्त होना     सामान्य से कम भूख लगना     वजन कम होना     मुंह या जीभ में दर्द     त्वचा का पीला पड़ना     हाथों और पैरों में सुन्नपन या झुनझुनी होना     विजन संबंधी समस्याएं     चीजों को याद रखने में कठिनाई होना     बोलने में कठिनाई होना     उदास महसूस करना     चिड़चिड़ापन महसूस करना  

Galaxy Tab S11: सैमसंग का नया महंगा टैबलेट, ताकतवर बैटरी और फीचर्स के साथ

नई दिल्ली Samsung ने अपने लेटेस्ट टैबलेट Galaxy Tab S11 Ultra और Galaxy Tab S11 को लॉन्च कर दिया है। Galaxy AI और One UI 8 से लैस इन दोनो टैबलेट्स को काम और एंटरटेनमेंट को ध्यान में रख कर बनाया है। बता दें कि Tab S11 Ultra सिर्फ 5.1mm मोटा है और अब तक का सबसे पतला Galaxy Tab है। इसमें 3nm वाला प्रोसेसर, शानदार कैमरा और लंबी बैटरी लाइफ मिलती है। अपने नए S Pen डिजाइन और Samsung DeX के बेहतरीन फीचर्स के साथ यह दोनो टैबलेट्स प्रोडक्टिविटी को नई ऊंचाई पर ले जाते हैं। Galaxy Tab S11 सीरीज की कीमत Galaxy Tab S11 सीरीज के Galaxy Tab S11 Ultra और Galaxy Tab S11 की भारतीय कीमत सामने नहीं आई है। जैसे ही इनकी भारतीय कीमत का खुलासा होगा। उसे यहां अपडेट कर दिया जाएगा। Galaxy Tab S11 सीरीज के स्पेसिफिकेशंस Samsung Galaxy Tab S11 सीरीत के दोनो टैबलेट्स Galaxy Tab S11 और Tab S11 Ultra एंड्रॉयड 15 और One UI 8 के साथ आते हैं। इन दोनों ही टैबलेट्स को 7 साल तक ओएस और सिक्योरिटी अपडेट्स मिलते रहेंगे। इससे यह दोनों ही टैबलेट बहुत लंबे समय तक नए जैसे बने रहेंगे। डिस्प्ले की बात करें तो Galaxy Tab S11 में 11-इंच और Tab S11 Ultra में 14.6-इंच का डायनैमिक AMOLED 2X डिस्प्ले दिया गया है। दोनों में 120Hz रिफ्रेश रेट मिलता है जो कि स्मूद स्क्रॉलिंग और बेस्ट गेमिंग एक्सपीरियंस देता है। दोनों ही टैब 1,600 निट्स की पीक ब्राइटनेस के साथ आते हैं और इन्हें धूप में भी बिना किसी परेशानी के इस्तेमाल किया जा सकता है। इमनें एंटी रिफ्लेक्टिव कोटिंग का भी ऑप्शन मिलता है, जो रिफ्लेक्शन को कम कर देता है। परफॉर्मेंस की बात करें तो इनमें 3nm वाला MediaTek Dimensity 9400 चिपसेट मिलता है। इसके साथ 12GB रैम और 512GB तक की internal storage मिलती है। इस कॉम्बिनेशन की वजह से यह दोनो ही टैब्स फास्ट प्रोसेसिंग. स्मूद मल्टीटास्किंग और हैवी गेमिंग के लिए परफेक्ट हैं। इसके अलावा दोनो टैब्स में सैमसंग DeX एक्सपीरियंस को भी अपग्रेड किया गया है। इसकी वजह से अब यह मल्टीपल वर्कस्पेस को सपोर्ट करता है और एक्सटर्नल मोनीटर के साथ भी काम करता है। इसकी वजह से आप टैबलेट को लैपटॉप की तरह प्रोफेशनल कामों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। Camera की बात करें तो Galaxy Tab S11 Ultra में दो रियर कैमरे दिए गए हैं। इसमें 13MP का मेन कैमरा और 8MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा मिलेगा। वहीं Tab S11 में सिर्फ एक 13MP का कैमरा दिया गया है । दोनों मॉडल्स में 12MP का अल्ट्रा-वाइड सेल्फी कैमरा मिलता है जो वीडियो कॉल्स और ग्रुप सेल्फी के लिए बेहतरीन है। डिजाइन और पोर्टेबिलिटी के हिसाब से ये टैबलेट्स शानदार हैं। Galaxy Tab S11 सिर्फ 5.5 मिमी मोटा है और वजन में सिर्फ 469 ग्राम का है। अल्ट्रा मॉडल 5.1 मिमी मोटाई और 692 ग्राम वजन के साथ आता है। इसका इतना पतला और हल्का होना इसे ट्रैवल में साथ रखने के लिए परफेक्ट बनाता है। दोनों ही टैब्स में बैटरी भी शानदार मिलती हैं। Tab S11 में 8,400mAh और अल्ट्रा में में 11,600mAh की बैटरी दी गई है। दोनों ही 45W की फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करते हैं। AI की ताकत से भरपूर Galaxy Tab S11 सीरीज के दोनो टैबलेट्स में Gemini Live फीचर मिलता है और यह रियल टाइम स्क्रीन शेयरिंग करता है। इस फीचर की मदद से आप अपनी स्क्रीन पर दिख रही चीजों के बारे में Gemini से सवाल पूछ सकते हैं। इसके अलावा ड्रॉइंग असिस्ट आपके स्केच को साफ-सुथरे विजुअल्स में बदल सकता है। इसी तरह से राइटिंग असिस्ट आपके द्वारा लिखे हुए टेक्स्ट को बेहतर बना सकता है। इसके अलावा इसमें सर्कल टू सर्च के जरिए किसी भी टेक्स्ट को तुरंत ट्रांसलेट कर सकते हैं। एक बार फिर बता दें कि ये तमाम फीचर्स आपको Galaxy Tab S11 Ultra और Galaxy Tab S11 दोनों में मिलेंगे।

जमकर बरसात जारी: इंदौर में अगले तीन दिन भी गिरेगी बारिश

इंदौर इंदौर में देर रात से शुरू हुआ बारिश का दौर अभी तक जारी है। इस महीने में लगातार तेज बारिश का यह पहला दौर है, जब शहर पूरी तरह पानी से तरबतर हो गया है। बारिश की वजह से कई इलाकों में पानी भर गया है और कुछ जगह तो सड़के जलमग्न हो गई हैं। सड़कों पर जमा हुए पानी की वजह से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार इंदौर शहर में 24 घंटे के अंदर करीब 127 मिमी से ज्यादा बारिश हुई है। वहीं इंदौर में सबसे ज्यादा बारिश देपालपुर इलाके में होना बताया जा रहा है। यहां करीब 170 मिमी बारिश हुई। पिछले महीने में हुई कम बारिश से शहर के लोग परेशान था, जिसे इस झड़ी ने पूरा कर दिया है।   बुधवार को शहर में बादल छाए और दोपहर में रिमझिम फुहारों के साथ हल्की बारिश रुक-रुककर हुई। शाम चार बजे बाद शहर में तेज बारिश हुई। एयरपोर्ट क्षेत्र में रात 8.30 बजे तक 22 मिमी बारिश दर्ज की गई। वहीं रीगल क्षेत्र में रात 10 बजे तक 16 मिमी बारिश दर्ज की गई। भोपाल स्थित मौसम विज्ञानियों के मुताबिक इंदौर में आज मध्यम से तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है। वर्तमान में एक द्रोणिका जैसलमेर, कोटा, गुना व दमोह से गुजर रही है। वहीं विदर्भ पर ऊपरी हवा का चक्रवात बना हुआ है। इस वजह से अरब सागर व बंगाल की खाड़ी से नमी आ रही है। वहीं एक कम दबाव का क्षेत्र उड़ीसा और उससे लगे क्षेत्र झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ होते हुए मप्र की ओर आएगा। इसके प्रभाव से इंदौर में अगले दो से तीन तेज बौछारों से शहर तरबतर होगा। बुधवार को शहर में अधिकतम तापमान सामान्य से पांच डिग्री सेल्सियस कम 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं न्यूनतम तापमान सामान्य एक डिग्री सेल्सियस अधिक 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

तुलसी पूजन से मिलेगा विष्णु का आशीर्वाद, सुख-समृद्धि का होगा आगमन

हिंदू धर्म में हर माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है. इस दिन व्रत किया जाता है. साल में कुल 12 पूर्णिमा पड़ती है, जिसमें हर पूर्णिमा तिथि का अपना अलग महत्व बताया गया है. भाद्रपद माह की पूर्णिमा को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. इस दिन भगवान विष्णु जी की पूजा-अर्चना की जाती हैं और चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित किया जाता है. पूर्णिमा तिथि हिंदू कैलेंडर के अनुसार 15वां दिन होता है. भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि इसलिए भी विशेष होती है क्योंकि यह हिंदू वर्ष की छठवीं पूर्णिमा होती है और इस दिन से पितृपक्ष की शुरुआत होती है. साल 2025 में भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि 7 सितंबर 2025, रविवार के दिन पड़ रही है. भाद्रपद पूर्णिमा 2025 भाद्रपद पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय का समय शाम 06 बजकर 26 मिनट रहेगा. भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि का महत्व पूर्णिमा का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है. इस दिन व्रत, पूजा, दान आदि विशेष महत्व है. इस दिन स्नान, दान को श्रेष्ठ माना गया है. इस दिन दान, व्रत, कथा और भगवान विष्णु का पूजन करने से शुभ फल प्राप्त होता है. पूर्णिमा तिथि के दिन विशेष रूप से इस दिन सत्यनारायण व्रत की जाती है. भाद्रपद पूर्णिमा 2025 पर तुलसी उपाय     भाद्रपद पूर्णिमा के दिन सुबह तुलसी पूजा करने से जीवन में विष्णु जी की कृपा बनी रहती है साथ ही मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं.     इस दिन तुलसी पूजन का संकल्प लें, तुलसी के पौधे में जल को अर्पित करें और घी का दीपक जलाएं.     तुलसी की परिक्रमा करें,     इस दिन तुलसी माला का जाप करें, और साथ में इस मंत्र को बोलें, ‘ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय’.इस जाप को करने से पारिवारिक समस्याओं का समाधान होता है.     पूर्णिमा की रात्रि को आप भगवान विष्णु को खीर का भोग लगा सकते हैं. भोग में तुलसी दल को उसमें शामिल जरूर करें. ऐसा करने से सुख-शांति का आगमन होता है और मानसिक तनाव से छुटकारा मिलता है.     तुलसी माता को सोलह श्रृंगार अर्पित करें, ऐसा करने से सुहाग बना रहता है.  

फलों से भरी बगिया का तोहफा! ‘एक बगिया मां के नाम’ योजना में महिलाओं को सब्सिडी सीधे खाते में

भोपाल  मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए एक और अच्छी खबर है। लाडली बहना योजना की 28वीं किस्त का पैसा तो लाभार्थियों के खाते में आने ही वाला है। हालांकि वे मोहन यादव सरकार की एक और योजना का फायदा उठा सकती हैं। प्रदेश में 'एक बगिया मां के नाम' से योजना चल रही है। इस योजना के तहत फलदार पेड़ लगाने के लिए सरकार की ओर से सब्सिडी दी जा रही है। यह पैसा सीधे महिलाओं के खाते में भेजा जा रहा है। महिला सशक्तिकरण को लेकर मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव द्वारा महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत प्रदेश में एक बगिया मां के नाम की योजना शुरू की है। इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा अपनी निजी भूमि पर फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। इस काम में मदद के लिए सरकार कंटीले तार की फेंसिंग, पौधे खरीदने, खाद, गड्ढे खोदने के साथ सिंचाई के लिए 50000 लीटर का जल कुंड बनाने के लिए पैसा दिया जा रहा है। इस योजना से जुड़ने के लिए 15 सितंबर तक का समय है। 31,300 महिलाओं को किया जाएगा शामिल 'एक बगिया मां के नाम' योजना का शुरुआती लक्ष्य 31,300 महिलाओं को लाभ पहुंचाने का रखा गया है। हालांकि महिलाओं में इस योजना को लेकर इस कदर जोश है कि 40,406 महिलाओं ने इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। निजी भूमि पर बगिया बनाने की योजना 15 अगस्त से शुरू हुई है और 15 सितंबर तक चलेगी। इस योजना के तहत 30 लाख फलदार पौधे लगाए जाने का लक्ष्य है। अभी तक कितने आवेदन को मिली मंजूरी मोबाइल एप के जरिए महिलाओं का चयन किया जा रहा है। इस एप को मनरेगा परिषद द्वारा MPSEDC के माध्यम से तैयार किया गया है। अभी तक 10,162 महिलाओं को इस योजना के तहत मंजूरी मिल गई है। मतलब इन महिलाओं के खाते में पैसा आने की राह खुल गई है। इस योजना के लिए मध्य प्रदेश सरकार 1000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इस योजना में सभी जिलों के अंतर्गत आने वाले 313 ब्लॉक की 9662 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इन पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 10,162 गांवों में सर्वे कर 40,406 महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया गया है। इस योजना के अंतर्गत हर ब्लॉक से कम से कम 100 हितग्रहियों को चुना जाएगा। साल में दो बार महिलाओं को ट्रेनिंग भी दी जाएगी। योजना के लिए पात्रता इस योजना के तहत चुनी गई महिलाओं को बगिया लगाने के लिए कम से कम 0.5 एकड़ और अधिकतम 1 एकड़ जमीन होनी चाहिए। इससे ज्यादा या कम जमीन पर बाग लगाने वाली महिलाओं को योजना का लाभ नहीं मिलेगा। खंडवा जिला नंबर वन बगिया विकसित करने में वर्तमान में खंडवा जिला सबसे आगे है, जबकि सिंगरौली जिला प्रदेश में दूसरे नंबर है। आज 3 सितंबर तक खंडवा, सिंगरौली, बैतूल, देवास और आगर मालवा जिले टॉप-5 में शामिल थे। वहीं टॉप 5 ब्लॉक की बात करें तो खंडवा, चितरंगी, पंधाना, पुनासा और खालवा शामिल है। कब आएगी लाडली बहना योजना की 28वीं किस्त मध्य प्रदेश की महिलाओं को हर महीने लाडली बहना योजना के तहत मिलने वाले पैसों का इंतजार रहता है। लाडली बहना योजना की 28वीं किस्त को लेकर अभी आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। हालांकि 10 सितंबर के बाद पैसा खाते में आ सकता है। इस महीने महिलाओं के खाते में 1250 रुपये ही आएंगे।  

नई सड़क से जुड़े बदलाव: गुजरात और MP के बीच 4-लेन हाईवे, 14 गांव प्रभावित

उज्जैन  एमपी में 70 किलोमीटर का नेशनल हाईवे अभी उज्जैन से बदनावर के नागेश्वर धाम तक बना है। अब दूसरे चरण का कार्य बदनावर से टिमरवानी तक 80 किमी का काम शुरू होने वाला है। यह मार्ग भी 552 डी के अंतर्गत ही आएगा तथा इसका निर्माण भी नेशनल हाईवे द्वारा किया जाएगा। इसके टेंडर हो चुके हैं अक्टूबर माह में इस रोड़ का कार्य शुरू हो जाएगा। 1900 करोड़ी की लागत से बन रहा यह नेशनल हाईवे गुजरात से जुड़ेगा तथा इसके बनने से उज्जैन से टिमरवानी की दूरी भी कम हो जाएगी व आवागमन भी सुगम हो होगा। इसका निर्माण सिंहस्थ के पहले किया जाएगा। ताकि गुजरात से आने वाले श्रद्धालुओं को इसका फायदा मिल सके तथा भैंसोला में बन रहा पीएम मेगा टेक्सटाईल पार्क भी इस रोड़ से जुड जाए। 14 गांव की जमीन होगी अधिग्रहित फोरलेन निर्माण के लिए बदनावर तहसील के पश्चिम क्षेत्र की करीब 14 गांवों की भूमि अधिग्रहण की तैयारी शुरू हो गई है। इसके निर्माण के लिए कुल 155.579 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित करेंगे। इसमें सरकारी व निजी भूमि शामिल हैं। भूमि अधिग्रहण के लिए सूची भी प्रकाशित हो चुकी है। इससे संबंधित गांवों के किसानों में भी हलचल तेज हो गई है। यह फोरलेन उज्जैन से सीधा दिल्ली मुंबई एट लेन एक्सप्रेस वे से सीधा जुड़ जाएगा।  तहसीलदार सुरेश नागर के मुताबिक, बदनावर से टिमरवानी तक फोरलेन सड़क बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बदनावर तहसील के 14 गांवों की भूमि से यह फोरलेन निकलेगा। इसके लिए ग्राम व भूमि प्रस्तावित है। संबंधित गांवो के हल्का पटवारी व राजस्व अमले को भूमि की वास्तविक स्थिति का सत्यापन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया गया है। औद्योगिक इकाइयों को मिलेगा फायदा अभी तक मालवांचल से गुजरात जाने के लिए इंदौर-अहमदाबाद मार्ग ही प्रमुख है। अब इस मार्ग के फोरलेन बनाए जाने से यातायात इस पर अधिक डायवर्ट होगा। इससे समय की बचत होगी। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बदनावर के लोग भी गुजरात इसी मार्ग से होकर जाते हैं। भैंसोला में बड़ा पीएम मेगा टेक्सटाइल पार्क बन रहा है, जबकि छायन में कपड़ा कारखाना शुरू हो चुका है। इसी तरह दोतरिया में भी एक फैक्टरी की नींव रखी जा चुकी है। इन उद्योगों के लिए आवागमन में भी इस मार्ग के चौड़ीकरण से यातायात सुगम होगा।

एक बगिया मां के नाम’: पर्यावरण सुधार और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की पहल

पर्यावरण और महिलाओं का विकास साथ-साथ, 'एक बगिया मां के नाम' योजना का असर भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में एक बगिया माँ के नाम परियोजना मध्यप्रदेश में पर्यावरण सुधार के साथ महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बन रही है। राज्य शासन ने महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत प्रदेश में 'एक बगिया मां के नाम' परियोजना प्रारंभ की है। इसके अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा अपनी निजी भूमि पर फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। माँ की बगिया विकसित करने के प्रति समूह की महिलाओं में काफी उत्साह दिखाई दे रहा है। अब तक 10 हजार 162 महिलाओं को 'माँ की बगिया' स्वीकृति की चुकी है। परियोजना के अंतर्गत प्रदेश सरकार द्वारा 1000 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जा रही है। इसके अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को पौधों की सुरक्षा से लेकर कटीले तार की फेंसिंग, पौधे खरीदने, खाद, गड्‌ढे खोदने के साथ ही सिंचाई के लिए 50 हजार लीटर का जल कुंड बनाने के लिए राशि भी उपलब्ध कराई जा रही है। फलोद्यान की बगिया विकसित करने में वर्तमान में सिंगरौली जिला सबसे आगे है। खंडवा जिला प्रदेश में दूसरे नंबर है। 40 हजार से अधिक पंजीयन योनजा का लाभ लेने के लिए स्व-सहायता समूह की महिलाओं का चयन एक बगिया मां के नाम ऐप से किया जाता है। ऐप का निर्माण मनरेगा परिषद द्वारा कराया गया है। परियोजना के अंतर्गत प्रदेश समूह की 31 हजार 300 महिलाओं को लाभांवित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। ऐप पर 40 हजार 406 महिलाओं ने 'एक बगिया मां के नाम' पर पंजीयन कराया है, जो निर्धारित लक्ष्य से अधिक है। 9 हजार 662 ग्राम पंचायतें हैं शामिल एक बगिया मां के नाम परियोजना में प्रदेश के सभी जिलों के अंतर्गत आने वाले 313 ब्लॉक की 9 हजार 662 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इन पंचायतों के अंतर्गत आने वाले 10 हजार 162 गांवों में सर्वे कर 40 हजार 406 महिलाओं का पंजीयन किया गया है। परियोजना के अंतर्गत प्रत्येक ब्लॉक से न्यूनतम 100 हितग्राहियों का चयन किया गया है। वर्ष में दो बार महिलाओं को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।  ड्रोन से निगरानी एक बगिया मां के नाम परियोजना अंतर्गत किए जा रहे पौधरोपण कार्य की मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक डेव्हलेपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा ड्रोन के माध्यम से मॉनिटरिंग की जाएगी। इससे चयनित जमीन, गड्‌ढे सहित पौधों की यथास्थिति के बारे में आसानी से जानकारी प्राप्त हो सकेगी। अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग प्रदेश में पहली बार पौधरोपण के लिए सिपरी सॉफ्टवेयर की मदद ली जा रही है। सॉफ्टवेयर के माध्यम से पौधरोपण के लिए जमीन का चयन वैज्ञानिक पद्धति से किया गया है। जलवायु के साथ ही किस जमीन पर कौन सा फलदार पौधा उपयोगी है, पौधा कब और किस समय लगाया जाएगा, पौधों की सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी कहाँ पर उपलब्ध है, यह सब वैज्ञानिक पद्धति (सिपरी सॉफ्टवेयर) के माध्यम से पता लगाया जा रहा है। 30 लाख फलदार पौधे लगाए जाएंगे “एक बगिया मां के नाम’’ परियोजना अंतर्गत प्रदेश की 31 हजार 300 स्व-सहायता समूह की महिलाओं की निजी जमीन पर 30 लाख से अधिक फलदार पौधे लगाएं जाएंगे, जो समूह की महिलाओं की आर्थिक समृद्धि का आधार बनेंगे। डैशबोर्ड से पर्यवेक्षण पौधरोपण का कार्य सही ढंग से हो रहा है या नहीं, इसके पर्यवेक्षण के लिए अलग से एक डैशबोर्ड बनाया गया है। इसके माध्यम से प्रतिदिन जिलों में हो रहे कार्यों की निगरानी की जा रही है। प्रदर्शन के आधार पर प्रथम 3 जिले, 10 जनपद पंचायत व 25 ग्राम पंचायतों को पुरस्कृत किया जाएगा। न्यूनतम 0.5, अधिकतम 1 एकड़ जमीन होना अनिवार्य एक बगिया मां के नाम परियोजना का लाभ लेने के लिए चयनित हुई महिला के पास बगिया लगाने के लिए भूमि भी निर्धारित की गई है। चयनित महिला के पास न्यूनतम 0.5 या अधिकतम एक एकड़ जमीन होना अनिवार्य है।