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ट्रंप की सख्त टिप्पणी: यूरोप और चीन को रूस के तेल पर निर्भरता कम करने को कहा

वॉशिंगटन  यूक्रेन के साथ पिछले कई सालों से जारी युद्ध को रुकवाने के लिए अमेरिका ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए हुए हैं। इसके बावजूद यूरोप ने रूस से तेल खरीदना बंद नहीं किया है। इससे नाराज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को दुनियाभर के नेताओं के साथ एक बैठक में साफ-साफ कह दिया कि यूरोप को रूस से तेल खरीदना बंद करना चाहिए। इसके अलावा, यूक्रेन के साथ युद्ध खत्म करने के लिए चीन पर भी आर्थिक दबाव डालना चाहिए। उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल आयात करने को लेकर 25 फीसदी अतिरिक्त (कुल 50%) टैरिफ लगाया हुआ है, जबकि दूसरी ओर यूरोप को कोई सजा नहीं दी है। इसको लेकर दुनियाभर में ट्रंप की किरकिरी हो रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने यह टिप्पणी गुरुवार को यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की और अन्य यूरोपीय नेताओं के साथ हुई एक बैठक में की। ट्रंप के इस कदम से माना जा रहा कि अमेरिकी प्रशासन युद्ध को रोकने के लिए अपने सहयोगियों को भी शामिल होने के लिए कह रहा है। इसके बाद, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि 26 देशों ने युद्धविराम समझौते के अंतिम रूप दिए जाने पर संभावित शांति सेना में योगदान देने का वादा किया है। मैक्रों ने गुरुवार को इस बात को स्वीकार करते हुए कहा कि यूक्रेन की सशस्त्र सेनाओं को मजबूत करने और यूक्रेन में यूरोपीय सैनिकों की तैनाती के साथ-साथ, यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी का तीसरा घटक अमेरिकी सुरक्षा जाल होना चाहिए। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा, "आने वाले दिनों में हम इन सुरक्षा गारंटियों के लिए अमेरिकी समर्थन को अंतिम रूप देंगे।" रूस की सरकारी समाचार एजेंसी आरआईए की रिपोर्ट के अनुसार, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने शुक्रवार को कहा कि मॉस्को और कीव के बीच किसी भी शीर्ष-स्तरीय बैठक से पहले काफी काम करने की जरूरत है। व्हाइट हाउस के अधिकारी ने कहा कि मैक्रों और यूरोपीय नेताओं ने ट्रंप को गठबंधन बैठक में बुलाया और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यूरोप को रूसी तेल खरीदना बंद कर देना चाहिए जिससे युद्ध को फायदा हो रहा है। क्योंकि रूस को एक साल में यूरोपीय संघ से ईंधन की बिक्री में 1.1 अरब यूरो मिले हैं।"  

चिन्नास्वामी में वापसी: भगदड़ के बाद पहली बार आयोजित होगा टूर्नामेंट

बेंगलुरु बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में फिर से क्रिकेट मैच होंगे। जून में एक दुखद घटना हुई थी। स्टेडियम के बाहर भगदड़ मचने के कारण 11 लोगों की जान चली गई थी। यह भगदड़ रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) की आओपीएल जीत के जश्न के दौरान हुई थी। अब कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन इसी वेन्यू पर एक टूर्नामेंट का आयोजन करने जा रहा है। यानी कि एक बार फिर से एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में क्रिकेट की वापसी होने जा रही है। केएससीए इस वेन्यू पर थिम्माप्पैया मेमोरियल ट्रॉफी का आयोजन करेगा। कई स्टार खिलाड़ी लेंगे इस टूर्नामेंट में हिस्सा थिम्माप्पैया मेमोरियल ट्रॉफी एक बड़ा टूर्नामेंट है और इसमें 16 टीमें हिस्सा लेंगी। चिन्नास्वामी स्टेडियम छह मैचों की मेजबानी करेगा, जिसमें एक सेमीफाइनल और फाइनल भी शामिल है। हालांकि, दुख की बात यह है कि फैंस को स्टेडियम में आने की अनुमति नहीं होगी। इस टूर्नामेंट में कई बड़े भारतीय खिलाड़ी खेलेंगे। इनमें अजिंक्य रहाणे, वेंकटेश अय्यर, हनुमा विहारी, विजय शंकर और शशांक सिंह जैसे नाम शामिल हैं। मुंबई, विदर्भ, मध्य प्रदेश, हिमाचल और छत्तीसगढ़ की टीमें भी इस टूर्नामेंट में भाग लेंगी। आरसीबी ने तोड़ी अपनी चुप्पी चिन्नास्वामी स्टेडियम में क्रिकेट की वापसी के साथ ही आरसीबी ने भी भगदड़ की घटना पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। फ्रेंचाइजी ने मृतकों के परिवारों को 25 लाख रुपये की मदद दी है। साथ ही उन्होंने भीड़ को संभालने के लिए बेहतर इंतजाम करने का भी वादा किया है। उस दुखद घटना के बाद से आरसीबी की ओर से कोई रिएक्शन लंबे समय तक सामने नहीं आया था। विवादों में घिरा रहा ये वेन्यू यह स्टेडियम विवादों में रहा है। केएससीए, कर्नाटक सरकार और राज्य पुलिस सभी जांच के दायरे में हैं। जून की घटना के बाद एक जांच कमेटी बनाई गई थी, जो इस मामले की जांच कर रही है। आरसीबी फ्रेंचाइजी भी जांच के घेरे में है। पिछले महीने राज्य सरकार द्वारा बनाई गई एक कमेटी ने चिन्नास्वामी स्टेडियम को बड़ी घटनाओं के लिए असुरक्षित बताया था। कमेटी ने कहा कि बड़ी घटनाओं को उन जगहों पर कराया जाना चाहिए जो भीड़ को संभालने के लिए बेहतर हों। कमेटी ने जोरदार सिफारिश की है कि बड़ी घटनाओं को दूसरी जगह ले जाया जाए।  

नीना मित्तल ने किया ग्रामीणों से संवाद, घग्गर किनारे गांवों का दौरा

पंजाब  घग्गर नदी में लगातार बढ़ रहे पानी के बहाव ने नज़दीक के गावों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इस गम्भीर स्थिति का जायजा लेने के लिये विधायका नीना मित्तल ने टीम के साथ गांव झजो व बुढ़णपुर का दौरा किया और गांव निवासियों को हर सम्भव मदद करने का भरोसा दिलाया। इस मौके पर विधायका नीना मित्तल ने बताया कि मुख्यमंत्री भगंवत मान की अगुवाई में पंजाब सरकार, जिला प्रशासन पूरी तैयारी से स्थिति पर नजर रखे हुये है। उन्होंने कहा कि अभी तक पानी के कारण किसी भी तरह का बड़ा नुक्सान नहीं हुआ है। प्रशासन ने आने वाले खतरे को देखते हुये व्यापक प्रबंध किये है। इस में राहत सामग्री, रैस्क्यू टीमें व एमरजेंसी सहूलियतें भी शामिल है। उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है। इस मौके पर विधायका ने सम्बधित अधिकारियों को आदेश दिये कि गांवों में लोगों के लिये हर सम्भव सहायता यकीनी बनाएं।

सीमा पाहवा से ट्रेनिंग ले रही हैं निर्मित कौर अहलूवालिया

मुंबई,  अभिनेत्री निर्मित कौर अहलूवालिया ने शिक्षक दिवस के मौके पर दिग्गज अभिनेत्री और निर्देशक सीमा पाहवा के प्रति अपना गहरा आभार व्यक्त किया। निमृत इस समय सीमा पाहवा के मार्गदर्शन में अपनी कला को निखार रही हैं। आने वाली एक अनटाइटल्ड फिल्म में, जिसे सीमा पाहवा निर्देशित कर रही हैं, निर्मित को उनसे सीखने और अभिनय की बारीकियों को समझने का मौका मिल रहा है। अपने अनुभव साझा करते हुए निर्मित ने कहा, “मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानती हूं कि मुझे सीमा पाहवा मैम के निर्देशन और मार्गदर्शन में काम करने का मौका मिला। वह न सिर्फ बेहतरीन अभिनेत्री हैं बल्कि एक शानदार टीचर भी हैं, जो अपने छात्रों से उनका बेस्ट निकलवाना जानती हैं। इस प्रोजेक्ट के दौरान मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा, चाहे वह किरदार की गहराई समझना हो, परफॉर्मेंस में ईमानदारी लाना हो, या फिर यह देखना कि वह हर सीन को कितनी गंभीरता और बारीकी से अप्रोच करती हैं। उन्होंने मेरी सोच को और गहरा किया है और मुझे बतौर आर्टिस्ट निखारा है। सबसे खास बात जो मैंने उनसे सीखी है, वह यह कि वह आपको अपनी सच्चाई खोजने के लिए प्रेरित करती हैं, न कि केवल उनके बताए अनुसार चलने के लिए। मेरे लिए सीमा मैम सिर्फ डायरेक्टर या मेंटर नहीं बल्कि एक प्रेरणा और मार्गदर्शक हैं। शिक्षक दिवस के मौके पर मैं दिल से उनका धन्यवाद करना चाहती हूँ कि वह मेरी इस यात्रा का इतना अहम हिस्सा बनीं।”  

128 शिक्षकों की मेहनत हुई सराही, 2 टीचर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए नामांकित

रांची शिक्षक दिवस के अवसर पर झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने रांची स्थित अपने सभागार में आज राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षा क्षेत्र में समर्पित 128 शिक्षकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया। राज्य के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा संचालित 50 घंटे के अनिवार्य कार्यक्रम‘कम्प्रेहेंसिव-निरंतर व्यावसायिक विकास'के अंतर्गत ये शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक पूरा किये हैं। शिक्षकों ने मॉड्यूल लेखन, डिजिटल प्रारूप विकास तथा आवासीय एवं गैर-आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सम्मानित शिक्षकों को शॉल, स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त, दो शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था और उन्हें विशेष सम्मान दिया गया। रामगढ़ के पीएम श्री हाई स्कूल, मनुवा के सहायक शिक्षक सुरेंद्र प्रसाद गुप्ता और चतरा के अपग्रेडेड 2 हाई स्कूल, दावरी के सहायक शिक्षक मनोज कुमार चोबे को 25,000 रुपये की नकद राशि, शॉल, स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। टाटा कॉलेज कॉलोनी मिडिल स्कूल की शिक्षिका अनुपमा ने कहा, 'हम व्यस्त जीवन में अक्सर अपनी मेहनत को याद रखना भूल जाते हैं। ऐसे दिवस हमें खुशी के साथ-साथ नई ऊर्जा और प्रेरणा देता है और इससे हम समर्पित भाव से कार्य करते हैं।'

CM मोहन के सामने गरजे इंदौर मेयर के बेटे, रेल हादसे और बुलेट ट्रेन पर उठाए गंभीर सवाल

भोपाल  मध्य प्रदेश में इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव के बेटे संघमित्र भार्गव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें संघमित्र सरकार पर निशाना साध रहे हैं. संघमित्र जब सरकार के खिलाफ गरज रहे थे तो मंच पर सीएम मोहन यादव भी मौजूद थे. देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने रेल हादसे और बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर सरकार को घेरा. मंच पर मुख्यमंत्री मोहन यादव के अलावा विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर भी मौजूद थे. संघमित्र के तीखे भाषण को सुनकर मंच पर मौजूद सभी नेता हैरान रह गए. वहीं, इंदौर मेयर के पसीने छूट रहे थे. संघमित्र ने कहा, सरकार कहती है सबका साथ सबका विकास. लेकिन हकीकत यह है कि रेलवे में हो रहा है दलालों का साथ और जनता का विनाश. वेटिंग लिस्ट का आलम यह है कि हर साल 50 लाख से ज्यादा लोग टिकट लेने के बावजूद सफर नहीं कर पाते. उन्होंने आगे कहा, 2022 तक अहमदाबाद-मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन का वादा किया गया था, लेकिन 2025 आ गया और बुलेट ट्रेन तो नहीं, वादाखिलाफी की रफ्तार जरूर दौड़ रही है. करोड़ों रुपए खर्च हो गए, जमीन अधिग्रहण में घोटाले हो गए, लेकिन ट्रेन अब तक सिर्फ पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन तक ही सिमटी है. रेल हादसे पर क्या कहा? संघमित्र ने कहा, कहा गया था कि कवच तकनीक से रेल हादसे खत्म हो जाएंगे, लेकिन पिछले 10 साल में 20 हजार लोग ट्रेन हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं. जब रेल के डिब्बे टूटते हैं या ट्रेन पटरी से उतरती है, तब सिर्फ लोहे के डिब्बे नहीं टूटते, किसी मां की गोद उजड़ जाती है, किसी बच्चे का भविष्य अंधकार में चला जाता है, किसी बूढ़े पिता की आंखों से आखिरी उम्मीद छिन जाती है संघमित्र ने कहा, 400 स्टेशन एयरपोर्ट जैसे बनाने की बात हुई थी, लेकिन अब तक बने कितने हैं. सिर्फ 20. वहां भी चमकते बोर्ड तो हैं, लेकिन पीने का पानी महंगा है और भीड़ वही की वही है. रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सवा लाख करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत हुआ था, लेकिन 80 प्रतिशत परियोजनाएं अब तक अधूरी हैं. 78 प्रतिशत फंड जो सुरक्षा के लिए था, उसे डायवर्ट कर दिया गया. उन्होंने कहा कि एक रिपोर्ट बताती है कि 300 करोड़ रुपए का निवेश सिर्फ एक कंपनी को दे दिया गया. ऐसे में सबका विकास कैसे होगा. संघमित्र के पिता को जानिए संघमित्र के पिता पुष्यमित्र भार्गव इंदौर के मेयर हैं. वह शहर के 24वें महापौर हैं. पुष्यमित्र वकील भी हैं. उन्होंने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के सबसे युवा अतिरिक्त महाधिवक्ता के रूप में भी काम किया है. पुष्यमित्र मध्य प्रदेश बीजेपी के बड़े नेता हैं.

मुख्यमंत्री साय बोले – ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की उपलब्धि देश के युवाओं के लिए प्रेरणादायी

अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने बच्चों के साथ साझा किए अपने अंतरिक्ष यात्रा के अनुभव जिला प्रशासन रायपुर और इग्नाइटिंग ड्रीम्स ऑफ यंग माइंड फाउंडेशन तथा विज्ञान भारती के मध्य हुए दो महत्वपूर्ण समझौते अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारतीय मेधा की बढ़ेगी दखल रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज शिक्षक दिवस के विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री निवास परिसर से स्कूली बच्चों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जागरूकता के लिए मिशन अंतरिक्ष और प्रोजेक्ट जय विज्ञान अभियान का शुभारंभ किया। इस दौरान जिला प्रशासन रायपुर और इग्नाइटिंग ड्रीम्स ऑफ यंग माइंड फाउंडेशन तथा जिला प्रशासन रायपुर और विज्ञान भारती के मध्य दो महत्वपूर्ण समझौते हुए, जिनसे बच्चों को अंतरिक्ष से जुड़े विषयों की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों की ओर से ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को उनकी सफल अंतरिक्ष यात्रा के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और उनका अभिनंदन किया। उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को नमन करते हुए सभी को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री साय ने जिला प्रशासन की इस विशेष पहल की सराहना करते हुए कहा कि इन समझौतों का उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना और विज्ञान के प्रति जिज्ञासा एवं उत्साह को बढ़ाना है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक सोच है। विज्ञान प्रश्न पूछने और तर्क करने की शक्ति और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता प्रदान करता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रोजेक्ट जय विज्ञान के अंतर्गत आयोजित कार्यशालाएं, विज्ञान प्रदर्शनियाँ, प्रतियोगिताएँ और नवाचारी परियोजनाएँ विद्यार्थियों को नई चीजें सीखने और आत्मविश्वास बढ़ाने का अवसर देंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से छत्तीसगढ़ के बच्चे केवल ज्ञान के उपभोक्ता नहीं, बल्कि नए विचारों और खोजों के सृजनकर्ता बनेंगे। यही आत्मनिर्भर भारत और विज्ञान-आधारित समाज की सच्ची नींव है। मुख्यमंत्री ने बच्चों से आह्वान किया कि वे शुभांशु शुक्ला से प्रेरणा लेकर अपनी रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़ें और अपना तथा देश का नाम ऊँचा करें। अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने कहा कि देश ने जो अवसर उन्हें प्रदान किया है, उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा—“मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी का मैं विशेष आभार व्यक्त करता हूँ कि उनकी पहल से ऐसे सार्थक कार्यक्रम आयोजित हो पा रहे हैं। जब प्रदेश का मुखिया विज्ञान और शिक्षा से जुड़े आयोजनों को महत्व देता है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे प्रदेश पर पड़ता है और बच्चों के भीतर नई ऊँचाइयों तक पहुँचने की प्रेरणा उत्पन्न होती है।” इस अवसर पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, कलेक्टर रायपुर गौरव कुमार सिंह, प्रदेश भर से जुड़े स्कूली छात्र-छात्राएँ और शिक्षकगण उपस्थित थे।

महाराष्ट्र में हलाल लाइफस्टाइल टाउनशिप का ऐलान, विपक्ष ने कहा– बनेगा मिनी पाकिस्तान

मुंबई  महाराष्ट्र में एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के विज्ञापन पर मजहबी बहस छिड़ गई है। इसकी वजह है कि विज्ञापन में इस सोसायटी को 'हलाल लाइफस्टाइल टाउनशिप' बताया गया था। इसे लेकर जब विवाद छिड़ा तो बिल्डर ने विज्ञापन ही वापस ले लिया। प्रोजेक्ट का विज्ञापन यह कहते हुए जारी किया गया था कि यह हलाल लाइफस्टाइल टाउनशिप है, जिसमें मुस्लिमों को अपने मजहब की मान्यताओं के अनुसार ही रहने का मौका मिलेगा। इस विज्ञापन को लेकर आरोप लगे कि यह तो देश के अंदर एक नया मुल्क बनाने जैसा है। खासतौर पर मजहब के आधार पर टाउनशिप बसाने जैसा देश में कहीं और कभी नहीं हुआ है। ऐसे में इस पर विवाद होना तय ही था। इस टाउनशिप को मुंबई से करीब 100 किलोमीटर दूर करजत में बसाने का प्लान है। मुंबई से लगभग 100 किलोमीटर दूर नेरल में प्रस्तावित एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट ने बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है. दरअसल, इस प्रोजेक्ट को ‘हलाल लाइफस्टाइल टाउनशिप’ के नाम से प्रचारित किया जा रहा था. इस विज्ञापन के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही इसे धार्मिक आधार पर विभाजनकारी करार दिया गया है. अब इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी हस्तक्षेप करते हुए महाराष्ट्र सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. विज्ञापन कहता है, 'यहां आप पूरी तरह कम्युनिटी लिविंग का अनुभव लेंगे। आप अपने जैसे विचारों वाले परिवार के साथ ही रहेंगे।' ऐड में लिखा गया कि इस टाउनशिप में कुछ कदमों की ही दूरी पर मस्जिद रहेगी और सामूहिक जुटान वाले आयोजनों के लिए भी स्थान रहेगा। कानूनगो ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि महाराष्ट्र सरकार को इसके लिए नोटिस दिया जा रहा है। इस मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी बरेलवी का भी बयान आया है। उन्होंने कहा कि इस तरह हलाल का इस्तेमाल करना तो नफरत फैलाने वाला है। उन्होंने कहा कि ऐसे काम में शामिल बिल्डर और अन्य लोग नहीं चाहते कि समाज में एकता बनी रहे। फिलहाल इस मामले में महाराष्ट्र सरकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। कैसे शुरू हुआ विवाद? दरअसल, विवाद की शुरुआत तब हुई जब पूर्व राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) अध्यक्ष प्रियंक कानूंगो ने प्रोजेक्ट का एक वीडियो अपने एक्स (X) अकाउंट पर साझा किया. इस वीडियो में हिजाब पहनी एक महिला कहती है, “जब सोसाइटी में अपने प्रिंसिपल्स कॉम्प्रोमाइज करने पड़ें तो सही नहीं है. Sukoon Empire में रीडिस्कवर करें ऑथेंटिक कम्युनिटी लिविंग. यहां लाइक-माइंडेड फैमिलीज रहेंगी, बच्चे हलाल एनवायरनमेंट में सुरक्षित बड़े होंगे, बुजुर्गों को सम्मान और देखभाल मिलेगी. प्रेयर प्लेसेस और कम्युनिटी गैदरिंग वॉकिंग डिस्टेंस पर होंगे. यह निवेश न सिर्फ आपकी फैमिली बल्कि आपके भविष्य को भी सुरक्षित करेगा.” प्रियंक कानूनगो का बयान वहीं, प्रियंक कानूनगो ने इस मुद्दे पर ट्वीट कर कहा, “यह विज्ञापन नहीं, विष-व्यापन है. मुंबई के पास करजत इलाके में केवल मुसलमानों के लिए हलाल लाइफस्टाइल वाली टाउनशिप बनाई जा रही है. यह ‘नेशन विदिन द नेशन’ है. महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया गया है.” राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया जैसे ही विज्ञापन वायरल हुआ, राजनीतिक दलों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है. शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के प्रवक्ता कृष्णा हेजे ने विज्ञापन को तुरंत वापस लेने की मांग की. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तरह का प्रचार संविधान में दी गई समानता और धर्मनिरपेक्षता की भावना का उल्लंघन नहीं करता. वहीं, भाजपा ने इसे और बड़ा मुद्दा बनाया. पार्टी प्रवक्ता अजीत चव्हाण ने आरोप लगाया कि यह प्रोजेक्ट ‘गजवा-ए-हिंद’ की मानसिकता का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाएं मुंबई और महाराष्ट्र जैसे बहुधार्मिक समाज में अस्वीकार्य हैं और डेवलपर्स पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. NHRC की दखलअंदाजी बढ़ते विवाद को देखते हुए अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी मामले का संज्ञान लिया है. आयोग ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा है कि क्या इस प्रोजेक्ट का प्रचार सचमुच साम्प्रदायिक आधार पर किया गया है और इसमें कौन से कानूनी या संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है. आयोग की दखल के बाद यह मामला अब सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीरता से लिया जा रहा है. कम्युनिटी-सेंट्रिक मार्केटिंग बना बहस का बड़ा मुद्दा यह विवाद अब रियल एस्टेट सेक्टर की मार्केटिंग रणनीतियों पर भी सवाल खड़े कर रहा है. आमतौर पर डेवलपर्स खरीदारों को आकर्षित करने के लिए लाइफस्टाइल सुविधाएं जैसे: जिम, गार्डन, क्लबहाउस या सीनियर सिटिजन फ्रेंडली सोसायटी का प्रचार करते हैं. लेकिन खुले तौर पर धार्मिक पहचान पर आधारित ‘कम्युनिटी लिविंग’ को बढ़ावा देना, आलोचकों के अनुसार, समाज में अलगाव की दीवार खड़ी कर सकता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इस तरह की परियोजनाओं को प्रोत्साहन मिला तो यह समाज में धार्मिक आधार पर बंटवारे की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे सकता है. अब आगे क्या? फिलहाल महाराष्ट्र सरकार पर दोहरा दबाव है. एक ओर राजनीतिक दल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं और दूसरी ओर NHRC ने औपचारिक रिपोर्ट मांगी है. सरकार को यह तय करना होगा कि इस विज्ञापन और प्रोजेक्ट को किस कानूनी दायरे में जांचा जाए. यह मामला आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति और रियल एस्टेट नियमों के लिए बड़ा मुद्दा बन सकता है.

राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान: राजभवन में आयोजित समारोह में CM साय और राज्यपाल रहे उपस्थित

शिक्षक अपने विद्यार्थियों के लिए रोल मॉडल होता है: राज्यपाल रमेन डेका शिक्षा के बिना जीवन अधूरा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रायपुर राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज शिक्षक दिवस के अवसर पर राजभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में आयोजित गरिमामय समारोह में वर्ष 2024 के उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्य स्तरीय सम्मान प्रदान किया। समारोह में राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने वर्ष 2024 के लिए सभी सम्मानित शिक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं दी। प्रदेश के 64 शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस मौके पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने राज्य शिक्षक सम्मान वर्ष 2025 के लिए चयनित 64 शिक्षकों के नामों की भी घोषणा की। राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि राज्यपाल रमेन डेका ने सर्वप्रथम भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति, महान दार्शानिक और प्रख्यात शिक्षाविद् डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को उनकी जयंती पर नमन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि शिक्षा मानव के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम है। एक शिक्षक अपने विद्यार्थियों के लिए रोल मॉडल होता है। बेहतर शिक्षक एक जिम्मेदार नागरिक तैयार करने में महती भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के जीवन के प्रेरणास्रोत होते है। उनके विकास में शिक्षकों की बहुत बड़ी भूमिका है। आज का जीवन सरल नहीं है। गिरकर खड़े होना और जीवन की चुनौतियों का सामना कैसे किया जाए यह विद्यार्थियों को सीखाना चाहिए। श्री डेका ने कहा कि शिक्षक ऐसा पढ़ाएं जिससे बच्चे स्कूलों की ओर आकर्षित हो। स्कूल भवन नहीं बल्कि उसके अंदर क्या पढ़ा रहे है ये महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्राचीन भारत की गुरूकुल परंपरा को श्रेष्ठ बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एक गेम चेन्जर है। इस नीति के अनुरूप बच्चों को शिक्षा मिले यह शिक्षकों की जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की गई है, जिसका मूल उद्देश्य यही है कि शिक्षा अधिक व्यवहारिक, कौशल आधारित और सर्वांगीण बनाया जाए। इस नीति में विशेष बल मातृभाषा में शिक्षा पर दिया गया है। बालक को उसकी मातृभाषा में शिक्षा देने से वह अधिक रूचि तथा सहजता के साथ शिक्षा ग्रहण करता है। श्री डेका ने कहा कि नवाचारी शिक्षा अपने आप में एक मिसाल है। यह गौरव का विषय है कि हमारे शिक्षक साथी अध्यापन के लिए नए-नए उपयोगी शिक्षण सहायक सामग्री का उपयोग कर रहें हैं, जिससे बच्चों को सिखाना, रुचिकर एवं सहज हो गया है। बदलते  परिवेश के अनुसार बच्चों को शिक्षा दिया जाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। इस हेतु सार्थक पहल एवं प्रयास की आवश्यकता है। पाठ्यक्रमों में भी उचित पाठों का समावेश किया जाना समय की मांग है। समारोह की अध्यक्षता कर रहे मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि शिक्षक ही सच्चे राष्ट्र निर्माता होते हैं। वे देश को ऐसे राष्ट्रभक्त नागरिक देते हैं, जो आगे चलकर समाज और राष्ट्र की उन्नति में योगदान देते हैं। जिस प्रकार दीपक स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देता है, उसी प्रकार शिक्षक भी अनेक कठिनाइयों के बावजूद ज्ञान का उजाला फैलाते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रहा है और इस रजत जयंती वर्ष में प्रदेश ने हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। शिक्षा विकास का मूलमंत्र है और इसके बिना जीवन अधूरा है। पिछले वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में भी व्यापक विस्तार हुआ है। आज प्रदेश में 20 से अधिक विश्वविद्यालय, 15 से ज्यादा मेडिकल कॉलेज और राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्थान जैसे आईआईटी, आईआईएम, एम्स तथा लॉ विश्वविद्यालय स्थापित हैं। श्री साय ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि हर बच्चे को आसानी से शिक्षा उपलब्ध हो। इसी दृष्टि से प्रत्येक 1 किलोमीटर पर प्राथमिक विद्यालय, 3 से 4 किलोमीटर पर माध्यमिक विद्यालय, 6 से 7 किलोमीटर पर हाई स्कूल, 8 से 10 किलोमीटर पर हायर सेकेंडरी विद्यालय और प्रत्येक विकासखंड में महाविद्यालय खोले जा रहे हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग के नवाचारी पहल पर भी अपने विचार साझा किए। समारोह में उपस्थित विशिष्ट अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होेने से प्रदेश में शिक्षा का स्तर आने वाले समय में और बेहतर होगा। उन्होंने आगामी वर्ष के लिए राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित शिक्षकों के नामों की घोषणा की। राज्यस्तरीय समारोह में चार उत्कृष्ट शिक्षकों सूरजपुर जिले के अजय कुमार चतुर्वेदी को डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति पुरस्कार, कबीरधाम जिले के रमेश कुमार चंद्रवंशी को गजानन माधव मुक्तिबोध स्मृति पुरस्कार, सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की  सुनीता यादव को डॉ. मुकुटधर पाण्डेय स्मृति पुरूस्कार और रायगढ़ जिले के भोजराम पटेल को डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसी तरह प्रधान पाठक, व्याख्याता, व्याख्याता एल.बी., शिक्षक एल.बी., सहायक शिक्षक, सहायक शिक्षक एल.बी वर्ग के 64 उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा सचि सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने स्वागत उद्बोधन दिया। आभार प्रदर्शन संचालक लोक शिक्षण ऋतुराज रघुवंशी ने किया। समारोह में राज्य की प्रथम महिला रानी डेका काकोटी, विधायक  पुरन्दर मिश्रा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, समग्र शिक्षा के प्रबंध संचालक संजीव झा सहित स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक उपस्थित थे।

MEA ने अर्थशास्त्री को कहा पागल, X हैंडल सस्पेंड; भारत तोड़ने का सपना हुआ वायरल

नई दिल्ली  भारत सरकार ने तत्काल कदम उठाते हुए ऑस्ट्रियाई अर्थशास्त्री गुंथर फेहलिंगर याह्न का सोशल मीडिया अकाउंट भारत में ब्लॉक कर दिया है। फेहलिंगर याह्न ने हाल ही में एक विवादित पोस्ट किया था। उन्होंने भारत को तोड़ने की अपील की थी। साथ ही खालिस्तान का नक्शा भी शेयर किया था। उन्होंने लिखा था, “मैं भारत को खत्म कर ‘ExIndia’ बनाने का आह्वान करता हूं। नरेंद्र मोदी रूस के आदमी हैं। हमें खालिस्तान की स्वतंत्रता के लिए मित्रों की जरूरत है।” गृह मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इस पोस्ट को गंभीर मानते हुए एक्स को निर्देश दिया कि संबंधित अकाउंट भारत में ब्लॉक कर दिया जाए। इसके बाद भारत में यह अकाउंट डिसेबल कर दिया गया। गुंथर फेहलिंगर याह्न ऑस्ट्रियन कमेटी फॉर NATO मेंबरशिप ऑफ यूक्रेन, कोसोवो, बोस्निया और ऑस्ट्रिया के अध्यक्ष हैं। वे दक्षिण बाल्कन्स के रीजनल इकोनॉमिक इंटीग्रेशन एक्शन ग्रुप के बोर्ड सदस्य भी हैं। ऑस्ट्रियाई अर्थशास्त्री गुंथर फेहलिंगर याह्न का सोशल मीडिया अकाउंट भारत में ब्लॉक कर दिया गया है। जब विदेश मंत्रालय से पूछा गया कि क्या इस मुद्दे को वियना स्थित ऑस्ट्रियाई सरकार के समक्ष उठाया जाएगा तो एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “उन्हें इतनी अहमियत क्यों दी जाए? वह एक पागल व्यक्ति है। कोई आधिकारिक पद पर नहीं हैं।” फेहलिंगर याह्न के पोस्ट के बाद भारतीय यूजर्स ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने इसे भारत की संप्रभुता और एकता पर हमला बताया। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2024 में ऑस्ट्रिया का ऐतिहासिक दौरा किया था। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की 41 वर्षों बाद पहली यात्रा थी। भारत-ऑस्ट्रिया के 75 साल पुराने राजनयिक संबंधों की वर्षगांठ पर वह पहुंचे थे।