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योगी सरकार ने अक्षय ऊर्जा और वृक्षारोपण को बनाया जनआंदोलन

‘विकसित यूपी @2047’ सीएम योगी का संकल्प, 2047 तक यूपी के सभी बड़े नगर होंगे 'सोलर सिटी'   योगी सरकार ने अक्षय ऊर्जा और वृक्षारोपण को बनाया जनआंदोलन -2030 तक 15% वक्षाच्छादन और 50% नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य  ग्रीन हाइड्रोजन व अक्षय ऊर्जा में यूपी ने रखा वैश्विक नेतृत्व का लक्ष्य – 2047 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन का सीएम योगी का संकल्प लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘विकसित यूपी@2047’ विजन के तहत उत्तर प्रदेश को ऊर्जा और पर्यावरण के क्षेत्र में नई दिशा देने का खाका तैयार किया है। उनका सबसे बड़ा लक्ष्य आने वाले 22 वर्षों में प्रदेश के सभी प्रमुख नगरों को ‘सोलर सिटी’ के रूप में विकसित करना है। इसके साथ ही यूपी को जलवायु सहिष्णु और शून्य कार्बन उत्सर्जन वाला राज्य बनाने का भी संकल्प लिया गया है। योगी सरकार ने अक्षय ऊर्जा को दिया है बढ़ावा  योगी सरकार ने 2017 के बाद इस स्थिति को बदलने की दिशा में बड़े कदम उठाए। अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने, हरित परिवहन को प्रोत्साहित करने और वृक्षारोपण को जनांदोलन का रूप देने में सफलता मिली। इसी दौरान ‘सोलर सिटी’ की अवधारणा को भी आगे बढ़ाया गया, जिसके तहत अयोध्या से शुरुआत कर सभी बड़े नगरों को सौर ऊर्जा पर आधारित शहर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। बता दें कि 2017 से पहले प्रदेश का ऊर्जा उत्पादन लगभग पूरी तरह थर्मल आधारित था। प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कोई ठोस कार्ययोजना नहीं थी। वृक्षारोपण अभियान सीमित था और अक्षय ऊर्जा का योगदान बेहद कम था।  लघु अवधि (2030) के लक्ष्य योगी सरकार ने लघु अवधि (2030) के लक्ष्य तय कर दिए हैं। इनमें अयोध्या सहित सभी प्रमुख नगरों को ‘सोलर सिटी’ में बदलना, वक्षाच्छादन को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करना, थर्मल ऊर्जा पर निर्भरता घटाकर 50 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा सुनिश्चित करना और सभी पर्यावरणीय एसडीजी लक्ष्यों को प्राप्त करना शामिल है। मध्यम और दीर्घ अवधि (2047) के लक्ष्य  मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप सरकार ने मध्यम और दीर्घ अवधि (2047) में सरकार का लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश को जलवायु सहिष्णु राज्य के रूप में विकसित किया जाए। इस दौरान वक्षाच्छादन को 20 प्रतिशत तक बढ़ाया जाएगा और वन क्षेत्र का राष्ट्रीय योगदान 3 प्रतिशत तक पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों को ‘सोलर सिटी’ में तब्दील करने, शून्य कार्बन उत्सर्जन सुनिश्चित करने और ग्रीन हाइड्रोजन व अक्षय ऊर्जा में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की योजना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट मत है कि 'सोलर सिटी' की परिकल्पना न केवल ऊर्जा सुरक्षा का आधार बनेगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक समृद्धि का भी मजबूत जरिया साबित होगी। ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा और वृक्षारोपण जैसे अभियान प्रदेश को 2047 तक न सिर्फ ‘विकसित यूपी’ बल्कि ‘ग्रीन यूपी’ भी बनाएंगे।

प्रभावित राज्यों की पुलिस ने मंथन किया, नक्सलवाद खत्म करने के लिए बनाई March 26 की योजना

जगदलपुर  नक्सलवाद के खात्मे के लिए बस्तर में पुलिस और सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों की आज बड़ी बैठक हुई. बैठक में नक्सल प्रभावित तमाम राज्यों के अधिकारी शामिल हुए. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश-प्रदेश से मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे की समय सीमा तय किए हुए हैं. इस कड़ी में छत्तीसगढ़ सहित अन्य नक्सलवाद से प्रभावित राज्यों में सुरक्षाबल स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई को अंजाम दे रही है. इस कड़ी में जगदलपुर में हुई बैठक में एंटी नक्सल ऑपरेशन के लिए अलग-अलग राज्यों की फोर्स के बीच समन्वय को लेकर छत्तीसगढ़ के साथ महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा के पुलिस अधिकारियों के साथ सीआईएसएफ के उच्च अधिकारियों ने चर्चा की.

पितृपक्ष 2025: पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए करें यह आसान जल अर्पण तरीका

पंचांग के अनुसार, इस साल पितृपक्ष की शुरुआत 7 सितंबर 2025 से हो रही है और यह 21 सितंबर 2025 तक चलेगा. यह 15 दिनों की वह अवधि है जब दिवंगत पूर्वजों को याद करते हैं और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करते हैं. पितृपक्ष में पितरों को जल अर्पित करना, जिसे तर्पण भी कहा जाता है, एक बहुत ही महत्वपूर्ण धार्मिक कर्म है. इस क्रिया को सही नियमों के साथ करना बेहद ज़रूरी है ताकि पितरों की आत्मा को शांति मिल सके और उनका आशीर्वाद प्राप्त हो. आइए, जानते हैं पितृपक्ष में पितरों को जल चढ़ाने के सही नियम और विधि. जल अर्पित करने की सही दिशा तर्पण करते समय दिशा का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है. पितरों को जल हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अर्पित करना चाहिए. दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना जाता है. कैसे करें तर्पण? (सही विधि) स्नान और शुद्धता: तर्पण करने से पहले स्नान करके खुद को शुद्ध करें. साफ़ और धुले हुए वस्त्र धारण करें. सही पात्र: जल अर्पित करने के लिए तांबे, पीतल या चांदी के पात्र का उपयोग करें. प्लास्टिक या स्टील के पात्र का उपयोग वर्जित है. कुशा और तिल का उपयोग: तर्पण के लिए कुशा (एक प्रकार की घास) और काले तिल का उपयोग अनिवार्य माना जाता है. जल में काले तिल मिलाकर अर्पित किए जाते हैं. हाथ की सही मुद्रा: जल अर्पित करते समय अपनी अनामिका (ring finger) और अंगूठे के बीच कुशा और तिल रखकर जल को धीरे-धीरे पात्र से गिराना चाहिए. इस मुद्रा को पितृतीर्थ कहते हैं. जल का प्रवाह: जल अर्पित करते समय ॐ पितृभ्य: नम: या ॐ पितृ देवताभ्यो नमः मंत्र का जाप करना चाहिए. जल को किसी पवित्र नदी, तालाब या जलाशय के पास प्रवाहित करना उत्तम होता है. अगर यह संभव न हो, तो घर में किसी गमले या तुलसी के पौधे को छोड़कर, किसी ऐसी जगह जल गिराएं जहां वह व्यर्थ न हो. ये गलतियां बिल्कुल न करें? गलत दिशा में तर्पण: दक्षिण के बजाय किसी अन्य दिशा में जल अर्पित न करें. अशुद्ध अवस्था: बिना स्नान किए और अशुद्ध वस्त्र पहनकर तर्पण न करें. लोहे या स्टील का पात्र: तर्पण के लिए लोहे या स्टील के बर्तनों का उपयोग बिल्कुल न करें. जूते-चप्पल पहनकर तर्पण: कभी भी जूते-चप्पल पहनकर तर्पण नहीं करना चाहिए. पितृपक्ष का महत्व हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है. मान्यता है कि इन 15 दिनों के दौरान पितर पृथ्वी पर अपने वंशजों से मिलने आते हैं. इस दौरान किए गए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान से उनकी आत्मा तृप्त होती है और वे अपने वंशजों को सुख, समृद्धि और शांति का आशीर्वाद देते हैं.

बिजली घोटाले और गड़बड़ियों पर लगाम, पंजाब पावरकॉम ने उठाए कड़े कदम

लुधियाना  पावरकॉम की सिटी वैस्ट डिवीजन के अंतर्गत पड़ते चौड़ा बाजार कार्यालय में तैनात जे.ई. दीपक कुमार के खिलाफ बाजवा नगर इलाके के रमन चोपड़ा व मयंक चोपड़ा द्वारा लगाए गए दुर्व्यवहार संबंधी समाचार पंजाब केसरी द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद उच्चाधिकारियों द्वारा उसके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए हैं।  उक्त मामले को लेकर आम जनता में पावरकॉम अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कार्यशैली के खिलाफ सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं। उक्त मामले में शिकायतकर्त्ता रमन चोपड़ा और मयंक चोपड़ा द्वारा लगाए गए आरोपों के मुताबिक उनकी बाजवा नगर इलाके में स्थित फैक्टरी में लगा बिजली का मीटर शॉर्ट सर्किट होने के कारण जलकर खराब हो गया जिसकी शिकायत उनके द्वारा विभाग को लिखित में देने सहित पावरकॉम की ऑनलाइन साइट पर भी की गई लेकिन शिकायत का समाधान नहीं हुआ। जब मामले संबंधी जे.ई. दीपक कुमार से बात की गई तो कर्मचारी द्वारा उनके साथ कथित बदसलूकी की गई। शिकायतकर्ताओं ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से जे.ई. दीपक कुमार के खिलाफ विजीलैंस जांच करवाने और उसे तुरंत सस्पैंड करने की अपील की है। पावरकॉम विभाग के चीफ इंजीनियर जगदेव सिंह हांस ने बताया कि दीपक कुमार के खिलाफ लगे आरोपों की विभागीय जांच की जा रही है। आरोप सही पाए जाने पर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। एक सवाल के जवाब में चीफ इंजीनियर ने बताया कि दीपक कुमार के खिलाफ इससे पहले भी उपभोक्ताओं की कई बार शिकायतें मिल चुकी हैं। 

सांसद उम्मेदाराम ने खेत सिंह हत्या मामले में किया बड़ा बयान, मांग की कड़ी सजा

जोधपुर बाड़मेर-जैसलमेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल आज जोधपुर प्रवास पर रहे। सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि खेत सिंह की जिस तरीके से हत्या की गई, वह निंदनीय है। दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी ऐसी घटना करने का दुस्साहस न करें। उन्होंने कहा कि घटना के बाद जो हालात सामने आया, वह और भी निंदनीय है। जिला प्रशासन का रवैया बेहद निराशाजनक रहा और स्थिति को नियंत्रित करने में पूरी तरह असफल साबित हुआ। उससे भी अधिक निंदनीय यह रहा कि जिस तरह भाजपा नेताओं का वहां जमावड़ा होता गया और प्रशासन तमाशबीन बनकर स्थिति बिगड़ते देखता रहा। यह प्रशासन की 100% विफलता रही। घटना को तूल देने और सांप्रदायिक दंगे भड़काने की कोशिश की गई। 'प्रशासन मूकदर्शक बना रहा' बेनीवाल ने कहा कि यह क्षेत्र हमेशा से शांतिप्रिय और आपसी भाईचारे का प्रतीक रहा है, लेकिन भाजपा ने जलती आग में घी डालने का काम किया। वहां जाकर भाजपा नेताओं ने जनता को भड़काया और अलग-अलग तरीके से दिए गए भाषणों से स्थिति और बिगड़ गई। परिणामस्वरूप लोगों के घर जला दिए गए, दुकानों को तोड़ दिया गया और उनमें आग लगा दी गई, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। उन्होंने बताया कि समय रहते उन्होंने एसपी को कॉल किया। एसपी मौके पर पहुंच गए, लेकिन कलेक्टर भी वहां पहुंचे और उनकी मौजूदगी में ही स्थिति को जानबूझकर बिगाड़ा गया। मैंने आईजी साहब से बात की, वे मौके पर गए, लेकिन तब भी हालात नहीं संभले। आखिरकार मैंने फिर आईजी साहब से फोन कर स्थिति को नियंत्रित करवाया। उनकी निगरानी में ही मामला शांत हुआ। 'इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो' सांसद बेनीवाल ने कहा कि हालात बिगड़ने के पीछे भाजपा का हाथ है। भाजपा ने भोली-भाली जनता को भड़काकर स्थिति को खराब किया। मैंने अधिकारियों से मांग की है कि सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। हत्या में शामिल लोगों के साथ-साथ जिन्होंने कानून अपने हाथ में लेकर स्थिति को बिगाड़ा, उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। 'कोई भी कानून से ऊपर नहीं है' उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र हमेशा से भाईचारे का प्रतीक रहा है और यहां की स्थिति सामान्य बनी रहनी चाहिए। लेकिन भाजपा की राजनीति शुरू से ही लोगों को भड़काकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने की रही है। जब जिम्मेदार नेता ही जनता की भावनाओं से खिलवाड़ करें और उन्हें भड़काएं, तो यह बिल्कुल भी उचित नहीं है। कानून सबके लिए है, कोई भी कानून से ऊपर नहीं है और कानून हाथ में लेना बिल्कुल गलत है। भाजपा एक तरफ "डबल इंजन की सरकार" की बात करती है, वहीं कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ती हैं। सबको कानून के दायरे में रहकर चलना चाहिए। मैं हमेशा शांति का पक्षधर रहा हूं। घटना के वक्त भी देखा गया कि राजनीतिक फायदे के लिए अशांति फैलाने की कोशिश की गई। जानें क्या था डांगरी गांव यह चर्चित मामला  जैसलमेर जिले का सीमावर्ती गांव डांगरी पिछले तीन दिनों से मानो युद्धक्षेत्र बना हुआ था। 2 सितंबर की रात पर्यावरण प्रेमी और किसान खेत सिंह की बेरहमी से हत्या के बाद गांव गुस्से और आक्रोश से सुलग उठा। गांव की गलियों से लेकर खेतों तक हर जगह मातम और गुस्से का माहौल था। हालात इस कदर बिगड़े कि प्रशासन को पूरे गांव को छावनी में तब्दील करना पड़ा। आखिरकार 48 घंटे की जद्दोजहद और कई दौर की वार्ता के बाद गुरुवार देर रात समझौता हुआ और शुक्रवार सुबह खेत सिंह की अंतिम यात्रा शांति के बीच निकली।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के प्रयासों से मनेंद्रगढ़ के लोगों की बड़ी मांग पूरी होने की कगार पर

चिरमिरी नागपुर रोड हॉल्ट परियोजना के लिए रेल मंत्रालय ने दावा आपत्ति के बाद 198 भूखंडों के अधिग्रहण के लिए जारी किया अधिसूचना अधिग्रहण की कार्यवाही पूर्ण,  जल्द ही शुरू होगा मुआवजा वितरण का कार्य रायपुर,  स्वास्थ्य मंत्री और स्थानीय विधायक श्याम बिहारी जायसवाल का प्रयास जिले में यात्री सुविधाओं और रेल परियोजनाओं के विस्तार के लिए  रंग ला रहा है। उनकी कोशिशों से रेल मंत्रालय ने चिरमिरी नागपुर हॉल्ट रेल परियोजना के लिए दावा आपत्ति के बाद भू अर्जन की प्रक्रिया पूर्ण हो गई है। रेल मंत्रालय ने इसके लिए एक अधिसूचना जारी की है।  केंद्रीय सरकार ने रेल अधिनियम 1989 के तहत छत्तीसगढ़ राज्य में चिरमिरी नागपुर रोड हाल्ट रेल परियोजना (17 किलोमीटर) के लिए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी कर दी है। इस अधिसूचना के अंतर्गत 36.392 हेक्टेयर रकबे की कुल 198 भूमि खंडों को परियोजना के लिए अधिग्रहित करने का रास्ता साफ हो गया है। इसके साथ ही अब शीघ्र ही प्रभावितों को मुआवजा वितरण का कार्य शुरू किया जाएगा। केंद्र सरकार ने सक्षम प्राधिकारी की रिपोर्ट पर सहमति प्रदान करते हुए अंतिम रूप से भूमि अधिग्रहण की घोषणा की है। अधिसूचना के अनुसार, यह भूमि अब भारत सरकार (रेल मंत्रालय) के नाम दर्ज होगी और परियोजना कार्यों के लिए उपयोग की जाएगी। रेल मंत्रालय (दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस परियोजना को वर्ष 2018-19 में मंजूरी दी गई थी। भूमि अर्जन की प्रक्रिया के दौरान निर्धारित समयावधि में कुल 32 आपत्तियां प्राप्त हुई थीं, जिनमें से 5 आपत्तियां सही पाई गईं। सक्षम प्राधिकारी द्वारा शेष आपत्तियों का निराकरण कर रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी गई।

सांसद महुआ मोइत्रा पर फिर घिरा विवाद, अब सीएम ममता करेंगी पूछताछ

कोलकाता तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा का विवाद पीछा नहीं छोड़ रहे हैं। मोइत्रा एक बार फिर विवादों में घिरती दिख रही हैं। उनकी एक कथित विवादित टिप्पणी को लेकर अखिल भारतीय मतुआ महासंघ ने नाराज़गी जताई है। महासंघ की ओर से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर मामले में दखल देकर कार्रवाई की मांग की गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि सीएम ममता बनर्जी उनकी क्लास ले सकतीं हैं। दरअसल, 31 अगस्त को नदिया ज़िले में एक सभा को संबोधित करते हुए महुआ मोइत्रा ने कहा था कि ‘साल भर तृणमूली और चुनाव के समय सनातनी बनने का खेल क्यों? हर एससी बूथ पर जहां एक सामान्य जाति की महिला को 1000 रुपये मिलते हैं, वहां एससी महिला को 1200 रुपये मिलते हैं। फिर भी एससी, नामशूद्र, मतुआ बूथों पर बीजेपी को 100 में से 85 वोट मिलते हैं। काम के वक्त ममता, सड़क के वक्त ममता, और जब लाभ लेने की बात आती है तो कंठमाला पहन कर सब आ जाते हैं। सच्चाई हमेशा कड़वी होती है।  रिपोर्ट के मुताबिक, महासंघ की ओर से 3 सितंबर को भेजे गए इस पत्र में महासचिव सुकैश चंद्र चौधरी ने लिखा है कि महुआ मोइत्रा की टिप्पणी से मतुआ समुदाय आहत और क्रोधित है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि वह ‘एक अभिभावक की तरह कदम उठाकर समुदाय का दर्द कम करें। हालांकि पत्र के लेटरहेड पर महासंघ की अध्यक्ष और तृणमूल की राज्यसभा सांसद ममता बाला ठाकुर का नाम है, लेकिन उस पर हस्ताक्षर महासचिव चौधरी के हैं।  ममता बाला ठाकुर ने इस मुद्दे पर कहा, ‘यह उनकी (महुआ की) व्यक्तिगत राय है। यह धार्मिक मुद्दा है, इसमें मैं बतौर सांसद क्यों बोलूं? संगठन ने निर्णय लिया है। जो कुछ कहा गया वह अपमानजनक है, और मैं इस पर ज़्यादा शब्द बर्बाद नहीं करना चाहती।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या वह महुआ मोइत्रा से इस विषय पर बात करेंगी तो उन्होंने पलटकर कहा, ‘क्यों करूं?’ मोइत्रा की इस टिप्पणी पर भाजपा ने भी कड़ा रुख अपनाया है।  पार्टी नेता दिपंकर सरकार ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए कहा, उन्होंने एससी/एसटी महिलाओं और मतुआ समुदाय का अपमान किया है। न केवल आस्था पर टिप्पणी की, बल्कि महिलाओं का भी अपमान किया। अब उन्हें अदालत में पेश होकर सफाई देनी होगी। इधर, केंद्रीय मंत्री और मतुआ नेता शांतनु ठाकुर, जो ममता बाला ठाकुर के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं, के लिए यह विवाद अपने घरेलू मतभेदों से राहत का मौका बन सकता है। शांतनु का अपने बड़े भाई और विधायक सुब्रत ठाकुर तथा मां छबी रानी ठाकुर के साथ धार्मिक प्रमाणपत्रों के मुद्दे पर टकराव जारी है।  

एशिया कप की तैयारी: सूर्यकुमार यादव नेतृत्व में भारतीय टीम ने दुबई में किया जोरदार अभ्यास

दुबई सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए यहां पहुंची भारतीय टीम ने अभ्यास शुरु कर दिया है। एशिया कप में भारतीय टीम का पहला मुकाबला 10 सितंबर को मेजबान यूएई से होना है। भारतीय टीम आईसीसी अकादमी में अभ्यास के लिए उतरी। भारतीय टीम 14 सितंबर पाकिस्तान और 19 सितंबर को ओमान से खेलेगी। वहीं प्लेऑफ मुकाबले 20 सितंबर से प्रारंभ होंगे। अभ्यास सत्र में कप्तान सूर्यकुमार यादव, उप-कप्तान शुभमन गिल, संजू सैमसन, जितेश शर्मा, तिलक वर्मा और अभिषेक शर्मा सभी ने नेट्स पर लंबे समय तक बल्लेबाजी की। भारतीय टीम यहां बिना अभ्यास के ही पहुंची है। टीम प्रबंधन का मानना था कि दुबई की आबोहवा में स्वयं को ढालने के लिए दुबई में ही अभ्यास करना बेहतर रहेगा। इस टूर्नोमेंट में तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की टी20 में वापसी पर भी सबकी नजर रहेंगी। इसके अलावा ये देखना होगा कि इंग्लैंड में टेस्ट टीम की कप्तानी करते हुए 700 से अधिक रन बनाने वाले शुभमन गिल यहां कितने रन बना पाते हैं। ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या भी लंबे समय के बाद इस टूर्नामेंट से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलते दिखेंगे। भारतीय टीम ने मुख्य कोच गंभीर, बल्लेबाजी कोच सीतांशु कोटक और गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल के मार्गदर्शन में खिलाड़ियों ने अभ्यास शुरु किया। ग्रुप ए में भारतीय टीम, पाकिस्तान, यूएई और ओमान शामिल के साथ हैं जबकि ग्रुप बी में श्रीलंका, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और हांगकांग की टीमें हैं।   

जालंधर में मचा बवाल: सांसद चन्नी लापता, लोग सड़कों पर, Video हो रही तेजी से वायरल

जालंधर  जालंधर संसदीय क्षेत्र के सांसद चरणजीत सिंह चन्नी इन दिनों राजनीतिक और जनभावनाओं के घेरे में हैं। हालात यह हैं कि क्षेत्र की जनता उन्हें "लापता सांसद" कहकर पुकार रही है। वजह साफ है कि जालंधर के शाहकोट, नकोदर और फिल्लौर इलाके बाढ़ से जूझ रहे हैं। शहर में भी बाढ़ जैसे हालात बने रहे, सैंकड़ों घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, लोग सरकारी मदद की आस लगाए बैठे हैं, मगर उनके सांसद खुद कहीं और अपनी सक्रियता दिखाते नजर आते हैं। आम जनता में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि आखिर जिस जनता ने 2024 में उन्हें रिकॉर्ड मतों से जीताकर लोकसभा भेजा, उस जनता की सुध लेने में चन्नी पीछे क्यों हैं? यूं तो चरणजीत चन्नी का राजनीतिक सफर हमेशा विवादों से घिरा रहा है। मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने वाले चन्नी ने 2022 के विधानसभा चुनावों में चमकौर साहिब और भदौर से एक साथ चुनाव लड़ा, मगर दोनों ही जगह हार का सामना करना पड़ा। जनता ने उन्हें सिरे से नकार साफ संदेश दिया कि मुख्यमंत्री रहने के बावजूद उनकी कार्यशैली पर भरोसा नहीं किया जा सकता। इन हालातों के चन्नी का चमकौर साहिब हलके से लगाव अब भी खत्म नहीं हुआ है। यही कारण है कि हाल के दिनों में वे लगातार उसी हलके में सक्रिय हैं। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें वे बोरियों में मिट्टी भरते, ट्रैक्टर चलाते और राहत कार्यों का हिस्सा बनते नजर आते हैं। दूसरी ओर, जालंधर की जनता इसे "ड्रामा" मान रही है। लोगों का कहना है कि सांसद चन्नी को जालंधर की जनता ने जिताया, मगर वे अभी भी चमकौर साहिब से ही राजनीति चमकाने में लगे हैं। मतदाताओं का कहना है कि चुनावों के दौरान चन्नी ने हर समय जनता के साथ खड़े रहने का वादा किया था, मगर आज जब जनता संकट में है तो वे नदारद हैं। इतना ही नहीं, कांग्रेस पदाधिकारी तक उनसे मिलने को तरस रहे हैं। वहीं जनता की नाराजगी को देखते हुए पंजाब प्रदेश कांग्रेस के महासचिव (ऑर्गेनाइजेशन) कैप्टन संदीप संधू ने द्वारा हाल ही जारी किए पत्र में विशेषकर सांसद चन्नी का जिक्र किया गया और उनसे आग्रह किया गया कि वे हाईकमान के फैसले के अनुरूप अपने संसदीय क्षेत्र जालंधर में सक्रिय रहें। यह आदेश इस बात का संकेत है कि पार्टी भी चन्नी की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं है, कांग्रेस के अंदरूनी सूत्र मानते हैं कि यदि सांसद की यह कार्यप्रणाली जारी रही तो 2027 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को जालंधर में राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। कांग्रेस किस मुंह से 9 विधानसभा हलकों में वोट मांगने जाएगी। भले ही सांसद चन्नी पत्र जारी होने के बाद विगत पिछले दिनों नकोदर व शाहकोट हलकों का हवाहवाई दौरा कर बाढ़ के हालातों में काम करने की अपनी वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर खानापूर्ति कर गए है। चन्नी को जालंधर से मिली राजनीतिक संजीवनी, मगर फिर भी जनता से दूरी 2022 में करारी हार झेलने के बाद चन्नी का राजनीतिक करियर लगभग खत्म माना जा रहा था। मगर जून 2024 में जालंधर की जनता ने उन्हें भारी मतों से जिताकर एक नई राजनीतिक संजीवनी दी। इस जीत ने चन्नी को फिर से राजनीतिक परिदृश्य में स्थापित किया। अब अफसोस है कि चुनाव जीतने के बाद चन्नी का जनता से रिश्ता लगातार कमजोर होता चला गया। वे कब जालंधर आते हैं और कब चले जाते हैं, कहां रहते है, इसका पता गिने-चुने लोगों को ही रहता है। यही वजह है कि पिछले कुछ महीनों में जालंधर के विभिन्न हिस्सों में "सांसद लापता" के पोस्टर तक लगाए गए। बाढ़ त्रासदी पर सांसद की चुप्पी जालंधर में हाल ही में बाढ़ के हालातों ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। कई इलाकों में घर गिर गए, लोग बेघर हुए और रोजमर्रा का जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। ऐसी स्थिति में सांसद का फर्ज था कि वे राहत और पुनर्वास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते। मगर चन्नी की चुप्पी और गैरमौजूदगी ने लोगों को गहरी निराशा में डाल दिया है। जालंधर के कई ग्रामीणों के अलावा शहरी लोगों का कहना है कि यदि उनके सांसद खुद प्रभावित गांवों व शहर के क्षेत्रों में जाकर हालात देखते तो प्रशासन पर भी काम करने का दबाव बढ़ता। जनता की उम्मीदों पर फिरा पानी जालंधर की जनता का गुस्सा इस बात को लेकर ज्यादा है कि उन्होंने जिस नेता को दोबारा राजनीति की मुख्यधारा में लाया, वही नेता आज उनकी तरफ पीठ फेर चुका है। एक बुजुर्ग मतदाता ने कहा कि उन्होंने चन्नी साहब को अपना सांसद बनाया ताकि वे उनकी आवाज संसद तक पहुंचाएं, मगर वे तो खुद ही गायब हो गए। फिल्लौर के एक युवक ने तंज कसते हुए कहा, सांसद को खोजने के लिए अब शायद गुमशुदगी का इश्तहार देना पड़ेगा। वहीं शहर में बारिश से प्रभावित लोगों का कहना है कि उनके घर टूट गए, खेत बर्बाद हो गए, मगर सांसद साहब को यहां आने की फुर्सत नहीं। लोगों का कहना है कि जालंधर की जनता ने उन्हें जिताया, मगर वे आज मात्र चमकौर साहिब के सांसद बने बैठे है।  

यूएस ओपन में सिनर अब खिताबी मुकाबले में उनका सामना कार्लोस अल्काराज से होगा

न्यूयॉर्क यानिक सिनर ने यूएस ओपन के मेंस सिंगल्स फाइनल में जगह बना ली है। डिफेंडिंग चैंपियन ने सेमीफाइनल में 25वीं वरीयता प्राप्त फेलिक्स ऑगर-अलियासिम को 6-1, 3-6, 6-3, 6-4 से शिकस्त दी। अब खिताबी मुकाबले में उनका सामना कार्लोस अल्काराज से होगा। दूसरी ओर, कार्लोस अल्काराज आर्थर ऐश स्टेडियम में 24 बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन नोवाक जोकोविच को मात देकर फाइनल में पहुंचे हैं। यानिक सिनर को सेमीफाइनल मैच के पांचवें गेम में थोड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने तेजी से लय हासिल की और सर्विस बचाते हुए पहला सेट आसानी से अपने नाम कर लिया। कनाडाई खिलाड़ी फेलिक्स ऑगर-अलियासिम दूसरी बार यूएस ओपन सेमीफाइनल में उतरे थे। उन्होंने दूसरे सेट में वापसी करते हुए 5-3 की बढ़त लेकर सेट जीता और स्कोर बराबर कर दिया। तीसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला, लेकिन यहां से मोमेंटम फिर से सिनर की ओर मुड़ गया। मेडिकल टाइमआउट लेने के बाद सिनर ने दोबारा लय हासिल कर ली और तीसरा सेट जीतकर बढ़त बनाई। चौथे सेट में भी उन्होंने अहम मौकों पर शानदार सर्विस करते हुए अलियासिम की वापसी की कोशिशों को नाकाम किया और मुकाबला जीतकर फाइनल में जगह पक्की कर ली। अपनी सटीकता के लिए मशहूर सिनर भले ही कुछ मौकों पर लड़खड़ाए, लेकिन आखिर तक मजबूती से टिके रहे। इसी के साथ उन्होंने लगातार तीसरे ग्रैंड स्लैम फाइनल में स्पेनिश स्टार अल्काराज से भिड़ने का मौका हासिल कर लिया। इस जीत के साथ यानिक सिनर ओपन एरा में ऐसे चौथे खिलाड़ी बने, जिन्होंने एक ही सीजन में सभी चार ग्रैंड स्लैम फाइनल में जगह बनाई। सिनर से पहले यह उपलब्धि रॉड लेवर, रोजर फेडरर और नोवाक जोकोविच ने हासिल की थी। यानिक सिनर ने जीत के बाद खुशी जताते हुए कहा, “यह सीजन कमाल का रहा है। ग्रैंड स्लैम हमारे लिए सबसे अहम टूर्नामेंट होते हैं। शानदार दर्शकों के बीच खुद को एक और फाइनल में देखना, खासकर इस सीजन के आखिरी फाइनल में, इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता।”