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बाढ़ से बेहाल पंजाब: प्रधानमंत्री मोदी पहुंचेंगे, जानिए किस हद तक होगा मदद पैकेज

पंजाब पंजाब में विनाशकारी बाढ़ ने हाहाकार मचा रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पंजाब में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने वाले हैं। जानकारी के मुताबिक वह 9 सितंबर को पंजाब जाएंगे और बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे। पीएम मोदी गुरदासपुर जाकर जमीनी स्तर पर हालात देखेंगे। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बड़े राहत पैकेज का भी ऐलान कर सकते हैं। बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 46 हो गई है, जबकि 1.75 लाख हेक्टेयर भूमि पर खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), सेना, सीमा सुरक्षा बल, पंजाब पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। पंजाब दशकों में आई सबसे भीषण बाढ़ का सामना कर रहा है। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी वर्षा के कारण सतलुज, ब्यास और रावी नदियों तथा मौसमी नालों के उफान के चलते यह स्थिति बनी है। इसके अलावा, हाल के दिनों में पंजाब में हुई भारी बारिश ने हालात को और गंभीर कर दिया है, जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को पोंग बांध का जलस्तर मामूली घटकर 1,394.19 फुट दर्ज किया गया, हालांकि यह अब भी उसकी अधिकतम सीमा 1,390 फीट से चार फुट ऊपर है। शुक्रवार शाम बांध का जलस्तर 1,394.8 फुट था। अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार को बांध में पानी का प्रवाह 99,673 क्यूसेक था, जो घटकर 47,162 क्यूसेक रह गया, जबकि निकासी 99,673 क्यूसेक पर यथावत बनी रही। भाखड़ा बांध के मामले में शनिवार को जलस्तर 1,678.14 फुट दर्ज किया गया, जो शुक्रवार को 1,678.47 फुट था। सतलुज नदी पर बने इस बांध में पानी का प्रवाह 62,481 क्यूसेक और निकासी 52,000 क्यूसेक रही। राज्य के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बाढ़ को पांच दशकों में सबसे भीषण बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब और पड़ोसी पहाड़ी राज्यों में लगातार हुई बारिश ने व्यापक तबाही मचाई है, जिससे सभी जिलों के लगभग 2,000 गांव प्रभावित हुए हैं। ताजा बुलेटिन के अनुसार, 3.87 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और 46 मौतों की पुष्टि हुई है। एक अगस्त से पांच सितंबर के बीच 14 जिलों से 43 मौतें दर्ज की गई थीं। कुल 23 जिलों के 1,996 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। सबसे अधिक सात-सात मौतें होशियारपुर और अमृतसर से हुईं। इसके बाद पठानकोट में छह, बरनाला में पांच, लुधियाना और बठिंडा में चार-चार, मानसा में तीन, गुरदासपुर, रूपनगर और एसएएस नगर में दो-दो और पटियाला, संगरूर, फाजिल्का और फिरोजपुर से एक-एक मौत दर्ज की गई। पठानकोट में तीन लोग लापता हैं। इसी बीच, फिरोजपुर जिले के तल्ली गुलाम गांव का 50 वर्षीय व्यक्ति उफनती नदी की तेज धारा में बह गया और उसकी मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से जिले में पानी का स्तर खतरनाक स्तर पर है और लगातार बाढ़ से गांवों में रहने वालों का जीवन कठिन हो गया है। बाढ़ से संबंधित यह आंकड़े एक अगस्त से छह सितंबर तक की अवधि के हैं। अधिकारियों ने बताया कि अब तक 22,854 लोगों को प्रभावित इलाकों से निकाला जा चुका है। चीमा ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि क्षेत्र को 18 जिलों में भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा, बुनियादी ढांचे, मकानों और पशुधन को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। उन्होंने बताया कि घग्गर नदी का जलस्तर भी 750 फुट के खतरे के निशान को पार कर गया है। उन्होंने कहा कि राज्य की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने इस अभूतपूर्व बाढ़ पर तुरंत कार्रवाई करते हुए संवेदनशील रवैया अपनाया है। मंत्री ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से जवाबदेही और समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया तथा कहा कि इस संकट के लिए "राजनीतिक अवसरवाद" के बजाय सहयोगात्मक प्रतिक्रिया की आवश्यकता है। चीमा ने कहा कि तबाही के बावजूद पंजाब सरकार ने तेज और समन्वित तरीके से कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि राज्यभर में लगभग 200 राहत शिविर लगाए गए हैं, जहां 7,000 से अधिक विस्थापित लोगों को शरण दी गई है। एनडीआरएफ की 24 और एसडीआरएफ की दो टीमें, 144 नौकाओं की मदद से राहत और बचाव अभियान चला रही हैं। पंजाब के मंत्री अमन अरोड़ा ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर शनिवार को निशाना साधते हुए कहा कि वह बाढ़ के लिए नदियों में अवैध खनन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, जबकि भाजपा नेता वित्तीय मदद की घोषणा करने के बजाय सिर्फ “फोटो खिंचवाने” के लिए बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करते हैं। ‘आप’ ने भाजपा पर पंजाब के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया और कहा कि चौहान ने बाढ़ सहायता के लिए “एक पैसा” भी घोषित नहीं किया, जबकि राज्य सरकार ने केंद्र से ‘लंबति’ 60,000 करोड़ रुपये की मांग की है। ‘आप’ के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कपूरथला जिले के सुल्तानपुर लोधी में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। वहीं होशियारपुर जिले में टांडा और मुकेरियां उप-विभागों के निचले इलाकों में भारी नुकसान हुआ है, जहां धान, गन्ना और मक्का जैसी फसलों को भारी क्षति हुई है। उपायुक्त आशिका जैन ने कहा कि नुकसान का आकलन करने के लिए विस्तृत सर्वेक्षण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को मुआवज़ा दिया जाएगा और समय पर राहत और बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए सभी विभाग समन्वय से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है। इस बीच, कपूरथला जिले के उपायुक्त अमित कुमार पंचाल ने बताया कि ब्यास नदी में पानी का प्रवाह 1.72 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया। 

अखिलेश यादव का जोरदार हमला: भाजपा के अंदरूनी विवादों पर सियासी तंज

लखनऊ उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने मेरठ में जिलाध्यक्षों की क्लास ली. उन्होंने अध्यक्षों को शुचिता और मर्यादा का पाठ पढ़ाया. इतना ही नहीं एमएलसी और पंचायत चुनाव जीतने के गुर बताए. एमएलसी और पंचायत चुनावों की तैयारी की क्षेत्रीय बैठक में प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि थाने चौकी जैसे सरकारी व्यवस्था से जुड़े कार्यों को सांसद और विधायकों के लिए छोड़ दें. उन्होंने जिलाध्यक्षों को हिदायत देते हुए कहा कि थाना-चौकी छोड़कर जिलाध्यक्ष संगठन को संभालें. इस पर अखिलेश यादव ने चुटकी ली है. अखिलेश यादव ने भाजपा के खात्मे के कई कारण बताए हैं. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि ‘भाजपाइयों को जमीन-कब्जा, भ्रष्टाचार, अंदरूनी लड़ाई और आपसी उठा-पटक से फ़ुरसत मिले तब तो वे संगठन के बारे में सोचें. भाजपा के खात्मे के मूल कारण हैं:       भाजपा की सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की नकारात्मक राजनीति     ⁠अकूत पैसे कमाने की महाभ्रष्ट सोच     ⁠किसान, मजदूर, युवा, महिला, नौकरी-कारोबार विरोधी नीतियां     ⁠भाजपाइयों के किसी के सगे नहीं होने के हर दिन बढ़ते उदाहरण     ⁠भाजपाइयों के हर स्तर व हर तरफ से भ्रष्ट-चारित्रिक पतन के आते समाचार व वीडियो     ⁠भाजपा व उनके संगी-साथियों द्वारा संविधान व आरक्षण को पिछले दरवाजे से खत्म करने की साजिश     ⁠भाजपा द्वारा अपने सहयोगी दलों का घोर अपमान, उपेक्षा व तिरस्कार     ⁠पीडीए के लिए भाजपाइयों के मन में कूट-कूटकर भरी दुर्भावना     ⁠पीडीए समाज के उत्पीड़न-शोषण को बढ़ावा देने की वर्चस्ववादी सोच सच तो ये है कि समाज में दरार डालते-डालते भाजपा खुद ही दरारों से भर गई है. भाजपा गई!’

कब और कैसे हुआ GST सुधार का आगाज़? जानें वित्त मंत्री की बारीक बातें

नई दिल्ली  जीएसटी में व्यापक सुधार रातों-रात नहीं हुआ बल्कि इसकी शुरुआत माल एवं सेवा कर परिषद की पिछले साल दिसंबर में जैसलमेर में हुई बैठक से पहले ही हो गयी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को फोन कर जीएसटी को व्यवसायों के लिए सुविधाजनक बनाने और दरों को युक्तिसंगत बनाने को कहा था, जिसके बाद इस पर काम तेजी से आगे बढ़ा। यह बात स्वयं सीतारमण ने बतायी। इसके परिणामस्वरूप सरल जीएसटी प्रणाली का रास्ता साफ हुआ जिसमें कर की दरें कम हैं। इससे एक तरफ जहां कंपनियों के लिए अनुपालन का बोझ कम हुआ है वहीं रोजमर्रा के इस्तेमाल के समेत लगभग 400 वस्तुओं पर कर दरें कम हुई हैं। सीतारमण ने पीटीआई-भाषा को दिये साक्षात्कार में कहा, ‘‘वास्तव में जीएसटी में व्यापक सुधारों का काम पहले ही शुरू हो चुका था। राजस्थान के जैसलमेर में हुई पिछली जीएसटी परिषद की बैठक से पहले ही, प्रधानमंत्री ने मुझे फोन करके कहा था,‘एक बार आप जीएसटी को देख लो, व्यवसायों के लिए सुविधाजनक बनाओ और दरों पर इतने सारे भ्रम की स्थिति क्यों है? मुझे लगता है कि नौ महीने पहले हुई जैसलमेर बैठक से पहले की बात है।'' उन्होंने कहा, ‘‘फिर, बजट के दौरान, जब हम आयकर उपायों पर चर्चा कर रहे थे, तो उन्होंने मुझे (प्रधानमंत्री) याद दिलाया कि ‘आप जीएसटी के ऊपर काम कर रही हैं न।' यह एक चीज थी।'' सीतारमण ने कहा, ‘‘दूसरा, मंत्री समूह (जीओएम) डेढ़ साल से काम कर रहे थे और मैं उनमें से प्रत्येक की सराहना करती हूं कि उन्होंने रिपोर्ट तैयार करने के लिए बहुत मेहनत की और उनके सुझाव सामने आए।'' उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन प्रधानमंत्री की बात सुनने के बाद मैंने यह निर्णय लिया कि अब समय आ गया है कि हम जीएसटी के सभी पहलुओं की गहन समीक्षा करें, न केवल दरों की, न केवल स्लैब की संख्या की, बल्कि इस दृष्टिकोण से भी देखें कि एक व्यवसाय, लघु या मझोले व्यवसाय के लिए यह कितना और बेहतर होगा'' वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘हमने इन सब बातों पर गौर किया। वस्तुओं के वर्गीकरण को देखा जिससे काफी भ्रम पैदा हो रहा था… फिर, स्वभाविक रूप से दर पर भी गौर किया। एक फरवरी, 2025 से लेकर लगभग 15 मई तक हम इसकी अध्ययन समीक्षा आदि का काम करते रहे।'' सीतारमण ने कहा, ‘‘मई के मध्य में… मैं प्रधानमंत्री के पास गयी, उन्हें जानकारी दी और बताया कि हम कदम उठाने के करीब हैं। यह एक प्रस्ताव का रूप ले सकता है और उनसे समय देने का अनुरोध किया…। उसके बाद उन्होंने कहा कि आप देखिये इसे कैसे जीएसटी परिषद में ले जा सकती हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘फिर मैं टीम के साथ बैठी और तय किया कि यह केंद्र का प्रस्ताव होगा, जो जीओएम को भेजा जाएगा, क्योंकि जीओएम में राज्यों के मंत्री हैं। मैं वहां नहीं हूं। वास्तव में हम चाहते थे कि यह स्पष्ट हो जाए कि हम जीओएम द्वारा किए गए सभी कार्यों का सम्मान करते हैं। लेकिन यहां एक प्रस्ताव विशेष रूप से केंद्र की ओर से आ रहा है, जो परिषद में एक-तिहाई भागीदार है।'' वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘नियमानुसार, हमने मंत्री समूहों को प्रस्ताव दिया और मंत्री समूहों ने उस पर विचार करना शुरू कर दिया। इस बीच, और उससे भी पहले, जैसलमेर में, वित्त राज्यमंत्री को क्षतिपूर्ति उपकर पर गठित मंत्री समूह का चेयरमैन बनाया गया था और वह उस पर विचार कर रहे थे। लेकिन वहां भी, क्षतिपूर्ति उपकर के बाद, अगर वह उसे समाप्त करने का फैसला लेते हैं, तो उन मदों का क्या होगा जो क्षतिपूर्ति उपकर के अंतर्गत आती हैं? अब वे कहां जाएंगी? यह दरों को युक्तिसंगत बनाने का मामला है। इसलिए मंत्रिसमूह ने यह निर्णय लिया कि उपकर और उसे समाप्त करने के संबंध में, उन्हें हर नियम एवं शर्तों पर काम करना होगा। लेकिन इसके अलावा, दरें तय करने के लिए गठित मंत्रियों का समूह दरों को युक्तिसंगत बनाने पर विचार कर रहा था। इसलिए, मंत्रिसमूह के सदस्यों की सहमति से, यह तय किया गया कि उपकर पर काम कर रहे सदस्य भी दरों को युक्तिसंगत बनाने वाली समूह समिति में भाग लेंगे…।'' फिर दरों को युक्तिसंगत बनाने वाली समिति जिसकी शुरुआत वास्तव में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बासवराज सोमप्पा बोम्मई से हुई थी और जिसका नेतृत्व बाद में बिहार के उपमुख्यमंत्री ने किया, ने मंत्रिसमूह द्वारा किए गए कार्यों के अलावा, केंद्र द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर भी विचार किया। सीतारमण के अनुसार, वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि बेहतर होगा कि यह पूरा मामला परिषद में ही रखा जाए, बजाय इसके कि वे इस प्रस्ताव पर आगे विचार करें। फिर यह सब परिषद के पास आया और परिषद ने इसे स्वीकार कर लिया। जीएसटी परिषद ने पिछले सप्ताह बुधवार को माल एवं सेवा कर के चार स्लैब की जगह दो स्लैब करने का फैसला किया। अब कर की दरें पांच और 18 प्रतिशत होंगी जबकि विलासिता एवं सिगरेट जैसी अहितकर वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की विशेष दर लागू होगी। सिगरेट, तंबाकू और अन्य संबंधित वस्तुओं को छोड़कर नई कर दरें 22 सितंबर से प्रभावी हो जाएंगी। दरों को युक्तिसंगत बनाये जाने के तहत टेलीविजन एवं एयर कंडीशनर जैसे उपभोक्ता उत्पादों के अलावा खानपान और रोजमर्रा के कई सामान समेत करीब 400 वस्तुओं पर दरें कम की गयी हैं।  

सरकार की बड़ी पहल: हरियाणा को मिलेंगी 450 इलेक्ट्रिक बसें, कम कीमत में सफर

हरियाणा  देशभर में प्रदूषण की समस्या से निपटने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने ‘पीएम-ई-बस सेवा योजना’ के तहत 10 हजार इलेक्ट्रिक बसें राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में रियायती दरों पर उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय की इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत हरियाणा को 450 ई-बसें स्वीकृत की गई हैं। इनमें से 100 बसें अकेले गुरुग्राम जिले को आवंटित होंगी। यह निर्णय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता में सुधार लाने, सार्वजनिक परिवहन को सशक्त बनाने और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लिया गया है। केंद्र की यह पहल न सिर्फ़ प्रदूषण नियंत्रण में मदद करेगी, बल्कि लोगों को किफायती, आरामदायक और आधुनिक यातायात सुविधा भी प्रदान करेगी। केंद्रीय शहरी विकास, आवास एवं उर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इसकी पुष्टि की है। दरअसल, केंद्र ने अगस्त-2023 में इस योजना की शुरूआत की थी। योजना को लगभग 20 हजार करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता के साथ देशभर में लागू किया जा रहा है। अहम बात यह है कि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत बसों का संचालन होगा। केंद्र द्वारा तय शर्तों के तहत 12 मीटर लंबी स्टैंडर्ड बस के लिए 24 रुपये प्रति किमी, 9 मीटर मिडी बस के लिए 22 रुपये तथा 7 मीटर मिनी बस के लिए 20 रुपये प्रति किलोमीटर की केंद्रीय सहायता तय की है। चार्जिंग स्टेशन व डिपो के लिए भी मदद साथ ही, चार्जिंग स्टेशन, बस डिपो और अन्य नागरिक ढांचे के निर्माण पर भी केंद्र की ओर से 100 प्रतिशत तक की मदद दी जाएगी। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बताया कि योजना के तहत हरियाणा को 450 बसों का कोटा मिला है। इनमें से गुरुग्राम को 100 इलेक्ट्रिक बसें दी जाएंगी। गुरुग्राम को इसलिए प्राथमिकता दी गई है क्योंकि यहां दिल्ली से सटे क्षेत्रों में वाहनों की संख्या सबसे अधिक है और वायु प्रदूषण भी लगातार चिंता का विषय रहा है। अनुबंध में देरी से लटकी डिलीवरी योजना की घोषणा को दो साल बीत चुके हैं, लेकिन गुरुग्राम में 100 ई-बसों का संचालन अब तक शुरू नहीं हो पाया है। सूत्रों के अनुसार, राज्य परिवहन विभाग और निजी ऑपरेटर के बीच अनुबंध पूरा न होने की वजह से बसों की डिलीवरी अटक गई है। बताते हैं कि अब राज्य सरकार इस परियोजना को लेकर गंभीर हो गई है। जल्द ही इसे सिरे चढ़ाया जाएगा ताकि हरियाणा को उसके हिस्से की सभी बसें मिल सकें। रोजगार के अवसर भी मिलेंगे विश्व संसाधन संस्थान का अनुमान है कि यह योजना देशभर में 45 से 55 हजार नए रोजगार पैदा कर सकती है। वहीं, इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन की रिपोर्ट बताती है कि अब तक चल रही 3,800 से ज्यादा ई-बसों से करीब 1,200 टन नाइट्रोजन ऑक्साइड और 700 टन कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आई है। इसका सीधा असर आम जनता के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ेगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया से नई पीढ़ी को मिला सुनहरा अवसर

अनुदेशक बोले- यह सफलता केवल उनकी मेहनत ही नहीं, बल्कि सरकार की प्रतिबद्धता का भी परिणाम  उत्तर प्रदेश में अब सिफारिश नहीं, बल्कि योग्यता और मेहनत के दम पर हासिल हो रहे हैं रोजगार के अवसर  लखनऊ उत्तर प्रदेश में रोजगार के अवसर अब योग्यता और मेहनत के दम पर हासिल हो रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया ने हजारों युवाओं के जीवन को नई दिशा दी है। रविवार को लोकभवन के सभागार में नियुक्ति पत्र पाने वाले नवचयनित अनुदेशकों ने मुख्यमंत्री जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता केवल उनकी मेहनत ही नहीं, बल्कि सरकार की प्रतिबद्धता का परिणाम है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री का कहना है कि उत्तर प्रदेश में अब रोजगार के अवसर योग्यता और मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को ही मिलेंगे, न कि सिफारिश वालों को। सीएम योगी के इसी मिशन को उनकी टीम धरातल पर उतारने में लगी है।  मेहनत को मिला सही मंच – सीमा, मैनपुरी मैनपुरी की सीमा ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि मैंने राजकीय महिला पॉलीटेक्निक, बरेली से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग ट्रेड में प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी के प्रयास से यह भर्ती प्रक्रिया पूर्ण पारदर्शिता के साथ पूरी हुई, जिसकी वजह से उनकी मेहनत रंग लाई। बेटियों के सपनों को मिला सहारा – अल्पना श्रीवास्तव, लखनऊ लखनऊ की अल्पना श्रीवास्तव ने फिरोजगांधी पॉलीटेक्निक, रायबरेली से प्रशिक्षण प्राप्त किया और एनएसटीआई कानपुर से सीआईटीएस कोर्स किया। उन्होंने बताया कि समाज की चुनौतियों के बावजूद उनके माता-पिता ने कभी पढ़ाई में कमी नहीं रखी। उन्होंने बताया कि अनुदेशक की नियुक्ति मिलने पर उनके माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू थे। उन्होंने वादा किया कि वह अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाएंगी। उत्तर प्रदेश को उत्तम और कुशल प्रदेश बनाने में सहयोग करूंगी। किसान परिवार का पहला सरकारी रोजगार – श्यामू विश्वकर्मा, गोरखपुर गोरखपुर के श्यामू विश्वकर्मा ने भावुक होकर कहा कि वह किसान परिवार से आते हैं और परिवार में पहले व्यक्ति हैं जिन्हें सरकारी नौकरी मिली है। यह अवसर उन्हें इसलिए मिल पाया क्योंकि प्रदेश सरकार ने निष्पक्ष भर्ती की परंपरा स्थापित की है। उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए विश्वास दिलाया कि वह पूरी लगन और मेहनत से काम कर अपने चयन को सार्थक करेंगे।  रोजगार से बढ़ा आत्मविश्वास – पवन कुमार, पीलीभीत पीलीभीत के पवन कुमार ने बताया कि उन्होंने राजकीय पॉलीटेक्निक पीलीभीत से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया और फिर सीआईटीएस की परीक्षा हैदराबाद से पास की। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र से सरकारी सेवा तक की उनकी यात्रा आसान नहीं थी। लेकिन सरकार की पारदर्शी प्रक्रिया ने उनके सपनों को पंख लगा दिए। नवचयनित अनुदेशकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों नियुक्ति पत्र पाकर खुद को गौरवान्वित महसूस किया। उन्होंने कहा कि यह नियुक्ति न सिर्फ उनके लिए गर्व का क्षण है, बल्कि प्रदेश सरकार के युवाओं को रोजगार देने की प्रतिबद्धता का प्रमाण भी है।

अब फर्जी कॉल्स की छुट्टी, जानें DoT-TRAI की इस बड़ी पहल की डिटेल

नई दिल्ली  मोबाइल यूजर्स को रोजाना आने वाले फर्जी कॉल्स और स्कैम से राहत देने के लिए DoT और TRAI कॉलर नेम प्रेजेंटेशन (CNAP) सर्विस लागू करने की तैयारी में हैं। इस सर्विस से हर कॉल पर कॉलर का नाम दिखेगा, जिससे धोखाधड़ी रोकी जा सकेगी। मोबाइल फोन पर फर्जी कॉल्स और स्कैमिंग की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए दूरसंचार विभाग (DoT) और TRAI अब कॉलर नेम प्रजेंटेशन (CNAP) सर्विस लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। यह सर्विस लागू होते ही हर इनकमिंग कॉल पर कॉलर का नाम डिस्प्ले होगा, जिससे धोखाधड़ी और फाइनेंशियल फ्रॉड के मामलों पर लगाम लगाई जा सकेगी।   क्या है CNAP सर्विस? CNAP यानी कॉलर नेम प्रेजेंटेशन, एक ऐसी सुविधा है जिसमें आने वाले कॉल पर कॉलर का वही नाम दिखाई देगा, जो उस सिम कार्ड की रजिस्टर्ड आईडी पर दर्ज है। यह सर्विस ट्रू-कॉलर जैसे एप्स से अलग होगी क्योंकि इसमें असली नाम ही दिखेगा। हालांकि, इसके साथ प्राइवेसी और तकनीकी चुनौतियों के मुद्दे भी सामने आ रहे हैं।   ट्रायल शुरू, लेकिन कंफ्यूजन बरकरार रिपोर्ट्स के मुताबिक, Airtel, Jio, Vi और BSNL जैसी बड़ी टेलीकॉम कंपनियां CNAP सर्विस का इंटर और इंट्रा-सर्किल में ट्रायल शुरू कर चुकी हैं। टेस्टिंग में कॉल रिसीव करने वाले यूजर को कॉलर का नाम स्क्रीन पर दिख रहा है। इसके बावजूद ऑपरेटर्स का मानना है कि बिजनेस और फैमिली कनेक्शन में नाम डिस्प्ले करने को लेकर अब भी स्पष्ट दिशा-निर्देश की जरूरत है। ऑपरेटर्स का कहना है कि बिजनेस कनेक्शन में सैकड़ों सिम कार्ड कंपनी के नाम पर खरीदे जाते हैं। ऐसे में कॉल करने पर क्या कंपनी का नाम दिखेगा या किसी कर्मचारी का? इसी तरह फैमिली पोस्टपेड प्लान्स में एक आईडी पर कई सिम जारी होते हैं, तो ऐसे मामलों में किसका नाम डिस्प्ले होगा, यह अब भी तय नहीं है।   TRAI की सिफारिशें TRAI का कहना है कि कॉलर का नाम कंज्यूमर एप्लिकेशन फॉर्म (CAF) के आधार पर डिस्प्ले किया जाएगा। इससे यूजर्स को तुरंत पहचानने में मदद मिलेगी कि कॉल असली है या स्कैम। खासतौर पर इंटरनेट बेस्ड VoIP कॉल्स को ट्रैक करने और स्कैमिंग रोकने में यह सर्विस गेमचेंजर साबित हो सकती है। DoT इस सर्विस को सभी नेटवर्क्स पर लागू करना चाहता है, लेकिन 2G नेटवर्क पर इसे इंप्लिमेंट करना फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती है। इसके समाधान के बाद ही CNAP को पूरे देश में लागू किया जा सकेगा।   सरकार का रुख केंद्रीय संचार राज्यमंत्री पेम्मासानी चंद्र शेखर ने संसद में बताया कि टेलीकॉम कंपनियों द्वारा किए गए ट्रायल और असेसमेंट के बाद CNAP सर्विस को लागू करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। DoT ने टेलीकॉम ऑपरेटर्स से इसे जल्द से जल्द शुरू करने के लिए तैयारी तेज करने को कहा है। 

मदरसा का भयानक सच: ओडिशा में छात्र के साथ शोषण और हत्या का मामला

ओडिशा  ओडिशा के नयागढ़ जिले में एक मदरसा में नाबालिग छात्र की कथित तौर पर हत्या कर दी गई है। पुलिस के अनुसार, उस छात्र का लंबे समय तक यौन उत्पीड़न किया गया और फिर उसके ही सीनियर ने उसे मार डाला। इस भयानक घटना के सिलसिले में पांच नाबालिगों को पकड़ा गया है। पीड़ित छात्र कटक जिले का रहने वाला था और नीलमणि में एक मदरसा में पढ़ता था। उसके पिता की शिकायत के अनुसार, उसकी हत्या मदरसा परिसर में एक सुनसान बाथरूम के अंदर की गई और उसके शव को एक सेप्टिक टैंक में फेंक दिया गया। पुलिस ने बताया कि पीड़ित को एक सीनियर छात्र द्वारा बार-बार प्रताड़ित किया जा रहा था। 31 अगस्त को दोपहर 1 बजे के करीब, दो छात्रों ने उसका यौन शोषण करने के बाद उस पर हमला किया और उसे मृत मानकर एक सेप्टिक टैंक में छोड़ दिया। बच्चा उस रात तो भागने में कामयाब रहा, लेकिन 2 सितंबर को उसे बचाने के बहाने दो छात्रों ने फिर से उसी जगह पर बुलाया। तीन अन्य छात्रों के साथ मिलकर उन्होंने कथित तौर पर उसका यौन शोषण किया। इसके बाद गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी और शव को टैंक में फेंक दिया। एक फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से नमूने एकत्र किए और गवाहों के बयानों ने आरोपियों की संलिप्तता की पुष्टि की। 12 से 15 साल की उम्र के सभी पांचों नाबालिगों पर यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने कहा कि उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। मदरसा ने उनके नाम अपने रिकॉर्ड से हटा दिए हैं और उनके जन्म प्रमाण पत्र जब्त कर लिए हैं। आगे की कार्यवाही के लिए यह मामला किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष रखा गया है।

पंजाब बाढ़ संकट: भूपेश बघेल ने किया जमीनी हालात का जायजा, सुनी लोगों की समस्याएं

फिरोजपुर पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा और पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने फिरोजपुर के बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया. नेताओं ने बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को समझा. इस दौरान भूपेश बघेल ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला. भूपेश बघेल ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बयान की निंदा करते हुए कहा कि मंत्री का यह दावा कि बाढ़ का कारण खनन है, गैर-जिम्मेदाराना है. उन्होंने सवाल उठाया कि डैम के गेट पहले कब खोले गए और अब कब खोले गए? इतना पानी एक साथ क्यों छोड़ा गया? बघेल ने मांग की कि केंद्रीय मंत्री को इन सवालों का जवाब देना चाहिए.   विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी केंद्र और राज्य सरकार की नाकामी पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पानी की उचित व्यवस्था समय पर न होने के कारण बाढ़ जैसे हालात बने. बाजवा ने आरोप लगाया कि नहरों और नालों की सफाई के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है. नालों की सफाई नहीं हुई और करोड़ों रुपये का गबन किया गया. उन्होंने इसकी जांच की मांग की. पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वडिंग ने कहा कि यह स्थिति सरकार की विफलता का नतीजा है. उन्होंने आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी इस मुश्किल समय में लोगों के साथ खड़ी है और राशन, भोजन, पशुओं के लिए चारा और अन्य सुविधाएं प्रदान करने में कोई कमी नहीं छोड़ेगी. भूपेश बघेल ने कहा कि यह बाढ़ केंद्र और राज्य सरकार की लापरवाही का परिणाम है. अगर समय पर डैमों से पानी छोड़ा गया होता, तो यह स्थिति नहीं बनती. उन्होंने यह भी बताया कि पंजाब सरकार अब तक यह रिपोर्ट तैयार नहीं कर सकी कि कितने लोग और पशु मरे, कितने घर क्षतिग्रस्त हुए और कितनी फसलें बर्बाद हुईं.

बाढ़ पीड़ितों की मदद को आगे आए MP सीएम, 5 करोड़ की सहायता और राहत सामग्री भेजी

भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने छत्तीसगढ़ में बाढ़ प्रभावित जिले दंतेवाड़ा के लिए 5 करोड़ की सहायता राशि दी है। एमपी से राहत सामग्री लेकर एक ट्रेन छत्तीसगढ़ रवाना होगी। मुख्यमंत्री डॉ मोहन ने कहा-छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा इलाके में बाढ़ के हालात हैं। मध्यप्रदेश सरकार की ओर से 5 करोड़ की सहायता राशि सीएम फंड के लिए दी है। राहत सामग्री लेकर ट्रेन भी रवाना हो रही है। मध्य प्रदेश पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के साथ खड़ा है और भी जरूरत होगी तो मध्य प्रदेश की ओर से सहायता प्रदान दी जाएगी। प्रधानमंत्री जी की भावना है दुख और परेशानी के समय सभी सरकारें सहयोग करें। इसी भावना के तहत पड़ोसी राज्य होने के नाते पड़ोसी धर्म का निर्वहन कर रहे हैं

केदार कश्यप को बदनाम करने की कोशिश कर रही कांग्रेस: मंत्री टंकराम वर्मा

रायपुर जगदलपुर सर्किट हाउस के कर्मचारियों ने कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता केदार कश्यप पर मारपीट के गंभीर आरोप लगाए हैं. इस मामले पर आज मंत्री टंकराम वर्मा का बड़ा बयान सामने आया है. मंत्री वर्मा ने कहा कि मंत्री केदार कश्यप को कांग्रेस बदनाम करने की कोशिश कर रही है. कांग्रेस गलत मानसिकता का परिचायक है. उन्होंने मंत्री केदार कश्यप को सुलझा हुआ और गंभीर व्यक्ति बताया. कांग्रेस को हर बात से तकलीफ : मंत्री टंकराम वर्मा हाईकोर्ट में साय कैबिनेट में 14 मंत्रीयों की संख्या पर कांग्रेस ने आपत्ति जताते हुए याचिका लगाई है. इसे लेकर मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि संविधान और नियमों के अनुरूप ही सरकार काम कर रही है. कांग्रेस को तो हर बात से तकलीफ होती है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का तो स्वभाव ही विकास में रोड़ा पैदा करना है.