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प्रधानमंत्री मोदी के धार आगमन पर स्वास्थ्य गतिविधियों की तैयारी की उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने की समीक्षा

भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रस्तावित धार आगमन पर उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में प्रदेश में स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा की जाने वाली गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि सभी कार्य योजनाबद्ध रूप से किए जाएँ ताकि विशेष स्वास्थ्य सेवाओं से अधिक से अधिक लक्षित समूह लाभान्वित हो सके। उन्होंने आगामी 17 सितंबर से “स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान” पखवाड़े को सुव्यवस्थित रूप से आयोजित कर अधिक से अधिक नागरिकों को लाभान्वित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि अभियान की सतत मॉनिटरिंग की व्यवस्था की जाये। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में मेडिकल टीचर्स की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सेवा शर्तों, मानदेय और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं और व्यवस्थाओं से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री संदीप यादव, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा श्री तरुण राठी, मिशन संचालक डॉ. सलोनी सिडाना और सीईओ आयुष्मान मध्यप्रदेश डॉ. योगेश भरसट उपस्थित थे।  

पौधे लगाने का काम शुरू: सिंगरौली, खंडवा, रायसेन और देवास में लक्ष्य से अधिक स्वीकृति

भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के एक पेड़ मां के नाम अभियान 2.0 से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में मनरेगा योजना के अंतर्गत एक बगिया मां के नाम से परियोजना शुरू की है। इसके माध्यम से स्व-सहायता समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाया जा रहा है। समूह की महिलाओं की निजी भूमि पर फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। फलोद्यान की बगिया विकसित करने में प्रदेश में सिंगरौली, खंडवा, रायसेन और देवास जिलों की महिलाएं सबसे अधिक जागरूक दिखाई दे रही हैं। इन जिलों की महिलाओं ने निर्धारित लक्ष्य को पूर्ण कर लिया है। सिंगरौली जिले में समूह की 300 महिलाओं को परियोजना का लाभ दिए जाने का लक्ष्य रखा गया था, जबकि यहां 571 महिलाओं को फलदार पौधे लगाने की स्वीकृति मिली है। इसी तरह से खंडवा जिले में 700 की जगह 1187, रायसेन जिले में 700 की जगह 1178 और देवास जिले में 600 की जगह 751 महिलाओं को फलोद्यान की बगिया लगाने की स्वीकृति मिली है। अब तक 15 हजार 377 महिलाओं को मिली स्वीकृति प्रदेश में समूह की 31 हजार 300 महिलाओं को एक बगिया मां के नाम परियोजना का लाभ दिए जाने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 15 हजार 377 महिलाओं को फलोद्यान की बगिया लगाने की स्वीकृति भी मिल चुकी है। साथ ही इन महिलाओं की निजी जमीन पर विभिन्न प्रकार के फलदार पौधों को लगाने का कार्य भी शुरू हो गया है। पौधों की सुरक्षा से लेकर कटीले तार की फेंसिंग, पौधे खरीदने, खाद, गड्ढे खोदने के साथ ही सिंचाई के लिए 50 हजार लीटर का जल कुंड बनाने के लिए राशि भी उपलब्ध कराई जा रही है। ड्रोन से निगरानी एक बगिया मां के नाम परियोजना अंतर्गत किए जा रहे पौधरोपण की मध्यप्रदेश इलेक्ट्रिक डेव्हलेपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा ड्रोन के माध्यम से मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि चयनित जमीन, गड्ढे सहित पौधों की यथास्थिति के बारे में आसानी से जानकारी प्राप्त हो सकें। सिपरी सॉफ्टवेयर की मदद से किया जा रहा पौधरोपण का कार्य प्रदेश में पहली बार पौधरोपण का कार्य सिपरी सॉफ्टवेयर के माध्यम से किया जा रहा है। जलवायु के साथ ही किस जमीन पर कौन सा फलदार पौधा उपयोगी है, पौधा कब और किस समय लगाया जाएगा, पौधों की सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी कहां पर उपलब्ध है, यह सब वैज्ञानिक पद्धति (सिपरी सॉफ्टवेयर) के माध्यम से पता लगाया जा रहा है। साथ ही जमीन के उपयोगी नहीं पाए जाने पर पौधरोपण का कार्य नहीं होगा। । 30 लाख लगाए जाएंगे फलदार पौधे प्रदेश में “एक बगिया मां के नाम’’ परियोजना अंतर्गत 31 हजार 300 स्व-सहायता समूह की महिलाओं की निजी जमीन पर 30 लाख से अधिक फलदार पौधे लगाएं जाएंगे, जो समूह की महिलाओं की आर्थिक उन्नति का आधार बनेंगे। प्रथम 3 जिले, 10 जनपद और 25 ग्राम पंचायत को मिलेगा पुरस्कार एक बगिया मां के नाम परियोजना अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रथम 3 जिले, 10 जनपद पंचायत और 25 ग्राम पंचायत को पुरस्कृत किया जाएगा। इसके साथ ही पर्यवेक्षण के लिए अलग से एक डैशबोर्ड बनाया गया है। इसके माध्यम से प्रतिदिन किस जिले में कितना कार्य हो रहा है, इसकी निगरानी की जा रही है। एक बगिया मां के नाम परियोजना का लाभ लेने के लिए चयनित हुई समूह की महिला के पास बगिया लगाने के लिए भूमि भी निर्धारित की गई है। चयनित महिला के पास न्यूनतम 0.5 डिसमिल या अधिकतम एक एकड़ जमीन होना अनिवार्य है। क्रियान्वयन में टॉप-10 जिले व ब्लॉक एक बगिया मां के नाम परियोजना के क्रियान्वयन में 10 सितंबर की स्थिति में 10 जिले आगे हैं। इसमें सिंगरौली, खंडवा, रायसेन, देवास, छिंदवाड़ा, आगर मालवा, बैतूल, खरगोन, सागर और बड़वानी जिला शामिल है। वहीं टॉप 10 ब्लॉक में चितरंगी, खंडवा, पंधाना, खालवा, बैढ़न, छैगांव माखन, पुनासा, देवसर, हरसूद और मुलताई शामिल है।  

ईंधन पर GST लाना अभी संभव नहीं, सरकार ने साफ किए संकेत

नई दिल्ली पेट्रोल और डीजल को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने पर केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल इन्हें जीएसटी के अंतर्गत लाना संभव नहीं है। मिडिया की ओर से सवाल पूछे जाने पर कि क्या पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाना चाहिए, अग्रवाल ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर फिलहाल केंद्रीय उत्पाद शुल्क और मूल्य वर्धित कर (वैट) लगता है और इन दोनों पेट्रोलियम पदार्थों से राज्यों को वैट के रूप में और केंद्र सरकार को केंद्रीय उत्पाद शुल्क के रूप में अच्छा-खासा राजस्व प्राप्त होता है। उन्होंने आगे कहा, "राजस्व संबंधी प्रभावों को देखते हुए, इन वस्तुओं को फिलहाल जीएसटी के दायरे में लाना संभव नहीं है।" सीबीआईसी चेयरमैन ने यह बयान ऐसे समय पर दिया है जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले हफ्ते कहा था कि केंद्र सरकार ने जानबूझकर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी परिषद के प्रस्ताव में शामिल नहीं किया है। उस दौरान वित्त मंत्री ने कहा था कि कानूनी तौर पर हम तैयार हैं, लेकिन यह फैसला राज्यों को लेना होगा। वित्त मंत्री ने अपने बयान में कहा था कि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी लागू होने के समय ही शामिल किया जाना तय था, "मुझे याद है कि मेरे दिवंगत पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस बारे में बात की थी।" वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, "राज्यों की सहमति के बाद, उन्हें परिषद में कराधान की दर तय करनी होगी। एक बार यह फैसला हो जाने के बाद, इसे कानून में शामिल कर लिया जाएगा।" जुलाई 2017 में लागू हुए जीएसटी में पेट्रोल, डीजल और मादक पेय पदार्थों जैसे उत्पादों को तब से इसके दायरे से बाहर रखा गया था। ये वस्तुएं केंद्र और राज्य सरकारों, दोनों के लिए उत्पाद शुल्क और वैट के माध्यम से राजस्व का प्रमुख स्रोत हैं। कई राज्यों के लिए, ये उनके कर राजस्व में 25-30 प्रतिशत से अधिक का योगदान करते हैं।

राष्ट्र को आगे बढ़ाने के लिए बच्चों का शिक्षित होना जरूरी : राज्यमंत्री कृष्णा गौर

84 लाख की लागत से निर्मित प्राथमिक शाला का लोकार्पण भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने बुधवार को गोविंदपुरा विधानसभा के बागसेवनिया में 84 लाख की लागत से निर्मित शासकीय प्राथमिक शाला का लोकार्पण किया। इस अवसर पर राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और राष्ट्र की प्रगति के लिए शिक्षा सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने बताया कि यह स्कूल जनसेवकों की अथक मेहनत का परिणाम है। कभी जहां कचरे का ढेर हुआ करता था, वहीं अब 10 कमरों का एक सुंदर और आधुनिक विद्यालय खड़ा है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि बागसेवनिया स्थित वार्ड-54 की इस प्राथमिक शाला को जल्द ही उन्नयन कर माध्यमिक विद्यालय तक विस्तारित किया जाएगा। फिलहाल यह शाला पाँचवीं कक्षा तक संचालित है, जिसे भविष्य में आठवीं कक्षा तक बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि गोविंदपुरा विधानसभा में विकास की गंगा बह रही है और शिक्षा के क्षेत्र में यह स्कूल एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। कार्यक्रम में श्रीमती मोनिका ठाकुर, पार्षद श्री जितेन्द्र शुक्ला, श्री प्रताप वारे, श्री प्रताप सिंह बेस, श्रीमती अर्चना परमार, श्रीमती शीला ठाकुर, प्राचार्य श्रीमती राधा ईवने सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, महिलाएँ और बच्चे उपस्थित थे।  

पड़ोसी देश में हिंसा पर सम्राट चौधरी का बड़ा बयान – कांग्रेस की भूल बताई वजह

पटना पड़ोसी देश नेपाल में युवा आबादी के हिंसक प्रदर्शन के बाद उपजे तनाव और राजनीतिक संकट पर बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने बड़ा बयान दिया है। भारतीय जनता पार्टी के नेता सम्राट ने इसे कांग्रेस की भूल बताया है। उन्होंने कहा कि नेपाल अगर आज भारत का हिस्सा होता तो वहां शांति और खुशहाली होती। कांग्रेस की भूल रही कि नेपाल और पाकिस्तान जैसे देश भारत का हिस्सा नहीं हैं। डिप्टी सीएम के इस बयान से सियासी पारा गर्मा गया है। सम्राट चौधरी ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में कहा, “नेपाल में अराजकता इसलिए हो रही है क्योंकि कांग्रेस ने हमेशा इन देशों को अलग रखा। अगर नेपाल आज भारत का अंग होता तो वो समृद्ध होता। इसी तरह पाकिस्तान भी भारत का हिस्सा होता तो वह भी समृद्ध होता। यह कांग्रेस की भूल है जिसके चलते हमें यह झेलना पड़ा है।” उन्होंने नेपाल में हो रहे हिंसक प्रदर्शनों को गलत बताया और कहा कि लोगों में असंतोष हो सकता है लेकिन अराजकता नहीं होनी चाहिए। बता दें कि नेपाल में पिछले दिनों सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद Gen-Z (युवा) आबादी सड़कों पर उतर गई। युवाओं का नेपाली सरकार पर गुस्सा फूट पड़ा। सोमवार को हिंसा के बाद पुलिस गोलीबारी में कई प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। इसके बाद मंगलवार को भीड़ ने संसद भवन समेत कई सरकारी इमारतों को आग के हवाले कर दिया। बवाल बढ़ने के बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रदर्शनकारियों ने कई मंत्रियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा और अन्य राजनेताओं पर भी हमले किए गए। पड़ोसी देश में राजनीतिक अस्थिरता का असर भारत पर भी पड़ा है। नेपाल घूमने गए कई पर्यटक हिंसक प्रदर्शनों के चलते वहां फंसे हुए हैं। भारत और नेपाल के बीच विमान, रेल और बस सेवाओं को बंद कर दिया गया है। बिहार में बॉर्डर के पास स्थित लोगों को भी परेशानी हो रही है। भारत नेपाल सीमा पर हाई अलर्ट है।

सेवा पखवाड़ा अभियान के अंतर्गत विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में होंगी विविध गतिविधियां

उच्च शिक्षा विभाग ने 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक आयोजन के लिए जारी की कार्यसूची भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देशों के अनुपालन में, उच्च शिक्षा विभाग ने 17 सितम्बर से आरम्भ होने वाले "सेवा पखवाड़ा अभियान" के अंतर्गत, प्रदेश के समस्त शासकीय एवं अशासकीय विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में विभिन्न गतिविधियों के आयोजन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, समस्त विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक विविध गतिविधियां आयोजित होंगी। इसके अनुसार 17 सितम्बर को स्वच्छता रैली तथा शैक्षणिक संस्थानों में स्वच्छता अभियान, 18 सितम्बर को पौध-रोपण एवं पर्यावरण जागरूकता के लिए व्याख्यान, 19 सितम्बर को जैविक खेती के संबंध में जागरूकता रैली / किसानों के साथ चर्चा, 20 सितम्बर को सामाजिक कुरूतियों के प्रति जागरूकता व्याख्यान / संवाद / नुक्कड नाटक का प्रदर्शन किया जायेगा। जारी आदेश में 21 सितम्बर को राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के स्वयं सेवकों द्वारा श्रमदान एवं रैली, 22 सितम्बर को सामाजिक कुरूतियों के प्रति जागरूकता व्याख्यान / संवाद / नुक्कड नाटक का प्रदर्शन, 23 सितम्बर को ऊर्जा संरक्षण पर संवाद, 24 सितम्बर को स्थानीय लघु एवं कटीर उद्योगों के प्रति जागरूकता व्याख्यान, 25 सितम्बर को रक्तदान एवं रक्त परीक्षण शिविर, 26 सितम्बर को रक्त परीक्षण शिविर, 27 सितम्बर को सिकल सेल एनीमिया स्किनिंग शिविर में विद्यार्थियों की सहभागिता, 28 सितम्बर को राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेटस द्वारा श्रमदान एवं रैली, 29 सितम्बर को "स्वस्थ नारी सशक्त परिवार" अभियान के अन्तर्गत स्वास्थ्य विभाग के साथ विद्यार्थियों की सहभागिता, 30 सितम्बर को "स्वस्थ नारी सशक्त परिवार" अभियान के अन्तर्गत स्वास्थ्य विभाग के साथ विद्यार्थियों की सहभागिता, 1 अक्टूबर को पौध-रोपण एवं पर्यावरण जागरूकता के लिए व्याख्यान एवं 2 अक्टूबर को सत्य एवं अहिंसा की शपथ / स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग / उत्पाद पर व्याख्यान एवं जनजागरण रैली का आयोजन किया जाएगा।  

सेवा पर्व पखवाड़ा के अंतर्गत प्रदेश में होगी सांस्कृतिक गतिविधियां:राज्य मंत्री लोधी

भोपाल संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि प्रदेश में "सेवा पर्व पखवाड़ा" का आयोजन 17 सितंबर से 02 अक्टूबर 2025 तक किया जाएगा। इसके अंतर्गत पूरे प्रदेश में सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। राज्य मंत्री श्री लोधी ने मंत्रालय में पखवाड़ा के तहत की जाने वाली गतिविधियों के आयोजन को समीक्षा की।  सेवा पर्व पखवाड़ा में मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा प्रदेश में विकसित भारत संकल्पना पर केंद्रित गतिविधियां की जाएंगी। राज्य मंत्री श्री लोधी ने बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया कि संभाग व जिला मुख्यालयों पर विभाग द्वारा होने वाले आयोजन की विस्तृत कार्य योजना तैयार करें। गतिविधियों में अधिक से अधिक संख्या में लोगों को भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें। गतिविधियों में प्रमुख रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत कार्यशाला/प्रस्तुति, पेंटिंग कार्यशाला/प्रतियोगिता, चित्र प्रदर्शनी एवं रचनापाठ किया जाना शामिल है। बैठक में संस्कृति विभाग के उपसचिव श्री जगदीश गोमे, संचालक संस्कृति श्री एन. पी. नामदेव, आयुक्त पुरातत्व अभिलेखागार और संग्रहालय श्रीमती उर्मिला शुक्ला, उपनिदेशक स्वराज संस्थान संचालनालय श्री संतोष कुमार वर्मा, राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय ग्वालियर की कुलगुरु, सांची बौद्ध विश्वविद्यालय के कुलसचिव एवं विभिन्न अकादमियों के निदेशक उपस्थित रहे।  

श्रमणा सहकारी समितियों के गठन के लिये श्रमिकों से प्रस्ताव आमंत्रित

भोपाल  श्रम विभाग द्वारा ‘’श्रमणा’’ श्रम सहकारी समितियों के गठन के लिये श्रमिकों से प्रस्ताव आमंत्रित किये गये हैं। नयी पहल के तहत प्रदेश के कुशल श्रमिकों को नवीनतम तकनीक का उपयोग करते हुए श्रमिक सहकारी समितियाँ बनाने का अवसर प्रदान किया जा रहा है, जिससे सहयोग और आय के न्यायपूर्ण वितरण को सुनिश्चित किया जा सके और प्रशिक्षित प्रमाणित श्रमिकों को रोजगार एवं स्व-रोजगार के अवसर उपलब्धर कराये जा सकें। मुख्यमंत्री द्वारा श्रम विभाग की समीक्षा बैठक में ‘’श्रमणा’’ श्रमिक सहकारी समिति की अवधारणा के लिये आधिकारिक लोगो जारी किया गया है, जिससे इस महत्त्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई है। कार्यक्रम के अंतर्गत, श्रम विभाग अपने विभिन्न मंडलों के माध्यम से ऐसे श्रमिक सहकारी समितियों के गठन और संचालन में आवश्यक सहायता देगा। "श्रमणा'' सहकारी का उद्देश्य कुशल श्रमिकों को संस्थागत शक्ति प्रदान करना तथा लाभ के न्यायसंगत वितरण को सुनिश्चित करना एवं डिजिटल उपकरणों और नवाचार से युक्त प्रबंधन पद्धतियों के माध्यम से साझा विकास को प्रोत्साहित करना है। विभिन्न व्यवसायों, कारीगरों और सेवाओं से जुड़े कुशल श्रमिक, जो इस पहल के तहत सहकारी समितियाँ बनाना चाहते हैं, उनसे अपनी अभिरुचि व्यक्त करने के लिये सुझाव आमंत्रित हैं। इस संबंध में भागीदारी के लिये इच्छुक व्यक्ति या समूह ई-मेल आई.डी. sramana-labcoop@mp.gov.in पर अपने नाम अथवा सुझाव प्रेषित कर सकते है।  

तेज रफ्तार का कहर! नेशनल हाइवे 44 पर भीषण टक्कर, एक ही परिवार के 4 सदस्यों ने गंवाई जान

सागर नेशनल हाइवे 44 सागर-झांसी मार्ग पर थाना मालथौन के सुखालीपुरा के पास बुधवार दोपहर 1 बजे अज्ञात वाहन ने जैन श्रद्धालुओं को लेकर जा रही कार को जोरदार टक्कर मार दी। वाहन को ओवरटेक करने के दौरान यह भीषण सड़क हादसा हो गया। इसमें दो लोगों की मौके पर दर्दनाक मौत हो गई एवं दो ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। वहीं पांच अन्य लोग घायल हो गए। घटना की सूचना पर थाना पुलिस सहित अधिवक्ता एवं स्थानीय लोगों ने पहुंचकर घायलों को एम्बुलेंस की मदद से स्वास्थ्य केंद्र भेजा जहां से घायलों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जानकारी अनुसार दमोह जिले के जबेरा निवासी सचिन जैन अपनी पत्नी ऋतु और अपने चार बच्चों और रिश्तेदारों के साथ हैं तीर्थ क्षेत्र गोलाकोट जा रहे थे। तभी मालथौन के पास यह भीषण हादसा हो गया।   इसमें सचिन जैन, पत्नी ऋतु जैन और साले सुखेन्द्र जैन और उनके बेटे अक्ष निवासी गढ़ाकोटा की मौत हो गई। पांच अन्य लोग घायल हो गए हैं। घायलों में चेतना जैन पति सुखेन्द्र 25 साल निवासी गढ़ाकोटा, अनोखी पिता सचिन जैन 05 साल , आराध्या पिता सचिन जैन 4 साल ,अरबी पिता सचिन जैन 8 साल का उपचार निजी अस्पताल में चल रहा हैं। घटना में मृतक सचिन जैन की तीन बेटियां ही बची हैं। बाकी पूरा परिवार उजड़ गया हैं। घटना स्थल से सिविल कोर्ट नजदीक है। इसके चलते गुरुदीप सिंह सिसोदिया एवं अन्य अधिवक्ताओं ने मौके पर पहुंचकर पुलिस और स्थानीय लोगों ने घायलों को अस्पताल भेजा। वहीं पुलिस ने शवों को परिजनों को सौंप घटना की जांच में जुट गई हैं। घटना के कारणों का पता अभी नहीं चल सका हैं ,साथ ही वाहन की भी तलाश की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नेपाल में छतरपुर के नागरिकों के फंसे होने की सूचना पर लिया संज्ञान

अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छतरपुर के कुछ परिवारों के सदस्यों के नेपाल में फंसे होने के समाचार पर संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि नेपाल में इन दिनों सामान्य स्थिति नहीं है और वहां छतरपुर जिले के कुछ नागरिकों का फंसा होना चिंता का विषय है। उनकी सकुशल वापसी के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत सरकार के अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर उनकी सकुशल भारत वापसी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। संकट की इस घड़ी में मध्यप्रदेश सरकार सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ नेपाल में फंसे प्रदेश के नागरिकों की हरसंभव मदद के लिए तत्पर है।