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ऑपरेशन सिंदूर का क्या फायदा?’ भारत-पाक मैच से भड़के पहलगाम हमले के पीड़ित

 नई दिल्ली भारत-पाकिस्तान के बीच एशिया कप का मैच आज रात खेला जाएगा। हालांकि इस मैच को लेकर पहलगाम हमले के पीड़ित परिवारों में गुस्सा और नाराजगी है। पहलगाम हमले के एक पीड़ित परिवार के सदस्यों ने भारत और पाकिस्तान के बीच आगामी क्रिकेट मैच को लेकर सरकार की आलोचना की और कहा कि जब से उन्हें यह खबर मिली तो परिवार बहुत परेशान हुआ। पहलगाम हमले में अपने पिता और भाई को खोने वाले सावन परमार ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अब बेकार लगता है। 'ऑपरेशन सिंदूर अब बेकार लगता है' सावन ने कहा कि 'जब हमें पता चला कि भारत बनाम पाकिस्तान मैच आयोजित किया जा रहा है, तो हम बहुत परेशान हो गए। पाकिस्तान से किसी भी तरह का संबंध नहीं रहना चाहिए। अगर आप मैच खेलना चाहते हैं, तो मेरे 16 साल के भाई को वापस लाएं, जिसे कई गोलियां मारी गईं। ऑपरेशन सिंदूर अब बेकार लगता है।' 'हमारे जख्म अभी भरे नहीं हैं' किरन ने कहा कि 'यह मैच नहीं होना चाहिए। मैं प्रधानमंत्री मोदी से पूछना चाहती हूं कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है, तो फिर भारत बनाम पाकिस्तान मैच क्यों हो रहा है? मैं देश के सभी लोगों से कहना चाहती हूं कि वे पहलगाम आतंकी हमले में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों से मिलें और देखें कि वे कितने दुखी हैं। हमारे जख्म अभी भरे नहीं हैं। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी। इस मुकाबले को लेकर मिली-जुली भावनाएं हैं और पाकिस्तान के खिलाफ इस मैच का बहिष्कार करने की मांग की जा रही है। पूर्व ऑलराउंडर और भाजपा नेता केदार जाधव ने भी भारत-पाकिस्तान मैच को रद्द करने की मांग की थी। जाधव ने अपनी राय व्यक्त की कि भारत को इस मैच में हिस्सा नहीं लेना चाहिए। ओवैसी बोले- क्या मैच के करोड़ों रुपये 26 जानों से ज्यादा कीमती हैं? एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर नाराजगी जाहिर की। ओवैसी ने कहा कि 'क्या एक क्रिकेट मैच के करोड़ों रुपये की कमाई उन 26 जानों से ज्यादा कीमती है? उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी सवाल पूछा कि क्या उनके पास ये ताकत नहीं है कि वे पाकिस्तान के साथ होने वाले मैच को लेकर विरोध जताएं और इस मैच से इनकार कर सकें?' उन्होंने पीएम मोदी को उनकी पुरानी बात याद दिलाते हुए कहा कि 'पीएम मोदी ने कहा था कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते', 'संवाद और आतंक साथ नहीं चल सकते', तो अब क्या बदला?

ओवैसी ने सरकार पर साधा निशाना, पूछा – ‘जान की कीमत कम, पैसा ज्यादा?’

नई दिल्ली एशिया कप में रविवार रात होने वाले भारत बनाम पाकिस्तान मुकाबले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद गहराता जा रहा है। पाहलगाम आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत और उसके बाद हुए ऑपरेशन सिंदूर के बीच इस मैच पर सवाल उठाते हुए विपक्ष और पीड़ित परिवारों ने बहिष्कार की मांग की है। वहीं एआईएमआईएम चीफ और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी और उनकी पार्टी ने भी सवाल उठाए हैं। AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “क्या हमारे 26 नागरिकों की जान की कीमत कुछ हजार करोड़ रुपये से कम है? प्रधानमंत्री ने कहा था कि खून और पानी साथ नहीं बह सकते, बातचीत और आतंकवाद साथ नहीं चल सकते। फिर एक क्रिकेट मैच से बीसीसीआई को कितनी कमाई होगी, 2000 करोड़, 3000 करोड़? क्या पैसों की कीमत जान से ज्यादा है?” ओवैसी ने असम और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से भी सवाल किया कि क्या उनके पास यह ताकत नहीं है कि पाकिस्तान के खिलाफ मैच खेलने से इनकार कर सकें? कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने मैच रद्द करने की मांग की और कहा कि सरकार के "नो टॉक्स विद टेरर" वाले रुख से यह निर्णय मेल नहीं खाता। AAP नेताओं ने शनिवार को पाकिस्तान का पुतला जलाया। पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने क्लबों और रेस्टोरेंट्स का बहिष्कार करने की अपील की, जो मैच का लाइव प्रसारण करेंगे। शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने नागरिकों से मैच न देखने की अपील की। उन्होंने कहा, “क्रिकेट पर आतंक को तरजीह न दें, पाहलगाम के 26 परिवारों के साथ खड़े हों।” शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करते हुए कहा, “युद्ध और क्रिकेट साथ-साथ कैसे हो सकते हैं? इन्होंने देशभक्ति को भी धंधा बना दिया है।” भाजपा का पलटवार बीजेपी नेता दिलीप घोष ने कहा, “कांग्रेस के शासन में भी मैच खेले जाते थे। हमने पाकिस्तान को जंग में हराया है, क्रिकेट में भी हराएंगे। मैदान छोड़ना सही नहीं।” केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि मैच और तनाव को अलग-अलग मुद्दे समझना चाहिए। उन्होंने कहा, “खेल का भी महत्व है। खिलाड़ियों ने मेहनत की है। जो फैसला लिया गया है, सोच-समझकर लिया गया है।” आपको बता दें कि यह मैच पहले भारत में होना था, लेकिन भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव को देखते हुए टूर्नामेंट को UAE स्थानांतरित किया गया। मैच रविवार रात 8 बजे दुबई में शुरू होगा।

तेजस्वी के बयान पर NDA का वार, कहा—महागठबंधन टूट की कगार पर, RJD-कांग्रेस ने दी सफाई

मुजफ्फरपुर बिहार के नेता प्रतिपक्ष और महागठबंधन को-ऑर्डिनेशन कमेटी के अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने मुजफ्फरपुर में कहा कि हम सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। नेता प्रतिपक्ष के इस बयान पर खलबली मच गया है। एनडीए के घटक बीजेपी और जदयू के नेताओं ने इसे ने आरोप लगाया है कि महागठबंधन में सीएम फेस पर फूट का नतीजा है। वहीं राजद और कांग्रेस के प्रवक्ता सफाई दे रहे है। मुजफ्फरपुर के कांटी प्रखंड मुख्यालय में बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण करने आए तेजस्वी यादव ने खुले मंच से एक ऐसा बयान दिया कि बिहार की राजनीति में खलबली मच गई। उन्होंने कहा कि सभी 243 सीटो पर तेजस्वी चुनाव लड़ेगा। आप लोग तेजस्वी यादव का बीजेपी के नेता नीरज कुमार ने कहा है कि तेजस्वी यादव दिन में सपने देखना छोड़ दें। कितनी भी सीटों पर लड़ लें लेकिन कोई फायदा नहीं है। सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का दम आपमें नहीं है। अपने साथी कांग्रेस पर दबाव बनाने की राजनीति कर रहे हैं कि सीएम फेस घोषित कर दिया जाए। लेकिन बिहार की जनता को उनके चेहरे पर भरोसा नहीं है। उनके चेहरे पर चारा घोटा, अलकतरा घोटाला और लैंड फॉर जॉब घोटाला का दाग लगा है। जदयू प्रवक्ता अंजुम आरा का कहना है कि यह तेजस्वी यादव का बड़बोलापन है। उनकी राजनीतिक विरासत में सिर्फ घपला घोटाला है। उनका बयान अहंकार भरा है। उनके साथी दलों को सोचना चाहिए कि ऐसा बयानों से क्या जताना चाहते है। राजद और कांग्रेस अपने नेता के बचाव में उतर गई है। राजद प्रवक्ता एजाज अहमद का कहना है कि तेजस्वी यादव ठीक कह रहे हैं। गठबंधन के सभी दल 243 सीटों पर चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। वे महागठबंधन के नेता हैं। उनके चेहरे पर जनता वोट करेगी और महागठबंधन की सरकार बनाएगी। कांग्रेस प्रवक्ता ज्ञान रंजन ने भी एजाज अहमद का समर्थन किया है। इंडिया गठबंधन एकजुट है। अब वोट चोर की सरकार नहीं चलेगी। दरअसल तेजस्वी के ताजा बयान को प्रेशर पॉलिटिक्स के तौर पर देखा जा रहा है। राजद उन्हें सीएम फेस घोषित कर चुकी है पर कांग्रेस की ओर से इस पर मुहर नहीं लगाई जा रही है। लेकिन तेजस्वी यादव इशारों में खुद को सीएम कैंडिडेट दिखाते रहते हैं।

सुशीला कार्की ने संभाली पीएम की कमान, नई कैबिनेट के गठन पर जारी मंथन

काठमांडू नेपाल की नवनियुक्त अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की रविवार सुबह 11 बजे सिंह दरबार में आधिकारिक रूप से कार्यभार संभाल लिया। पूर्व मुख्य न्यायाधीश कार्की को शुक्रवार रात को अंतरिम सरकार की प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था। इसके साथ ही प्रधानमंत्री सुशीला कार्की रविवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकती हैं। वह मंत्रियों के नामों को अंतिम रूप देने में अपने सहयोगियों के साथ विचार-विमर्श कर रही हैं। बताया जा रहा है कि मंत्रिमंडल का विस्तार छोटा होगा। वहीं दूसरी ओर पीएम कार्की गृह, विदेश और रक्षा समेत लगभग दो दर्जन मंत्रालय अपने पास रख सकती हैं। मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं के बीच शनिवार को समय निकालकर वह सरकार विरोधी प्रदर्शन में घायलों से मिलने सिविल अस्पताल भी गईं थीं। शुक्रवार को शपथ लेने के तुरंत बाद भी वह अस्पताल जाकर घायलों का हाल जाना था। मंत्रिमंडल में शामिल किए जा सकते हैं 15 मंत्री काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, कार्की ने अपने मंत्रिमंडल को अंतिम रूप देने की तैयारी के लिए जेन जी आंदोलन के करीबी सलाहकारों और प्रमुख हस्तियों के साथ परामर्श शुरू कर दिया है। उनके एक सहयोगी ने दावा किया है कि कार्की रविवार सुबह अपने मंत्रिमंडल के गठन के लिए गहन चर्चा शुरू करेंगी। सभी 25 मंत्रालयों पर अधिकार रखने के बावजूद वह कथित तौर पर 15 से अधिक मंत्रियों के साथ एक सुव्यवस्थित मंत्रिमंडल बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इन नामों पर चल रहा है विचार काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार मंत्री पदों के लिए जिन नामों पर विचार किया जा रहा है उनमें कानूनी विशेषज्ञ ओम प्रकाश आर्यल, पूर्व सेना अधिकारी बालानंद शर्मा, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति आनंद मोहन भट्टाराई, माधव सुंदर खड़का, अशीम मान सिंह बसन्यात और ऊर्जा विशेषज्ञ कुलमन घीसिंग शामिल हैं। चिकित्सा क्षेत्र से डॉ. भगवान कोइराला, डॉ. संदुक रुइत, डॉ. जगदीश अग्रवाल और डॉ. पुकार चंद्र श्रेष्ठ जैसे प्रमुख लोगों के नामों पर विचार चल रहा है। नामों को लेकर हो रही है ऑनलाइन वोटिंग काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, जेनरेशन जेड के सदस्य भी समानांतर परामर्श कर रहे हैं। इसके लिए वह ऑनलाइन वोटिंग का भी सहारा ले रहे हैं। अगर इन नामों पर आम सहमति बन जाती है, तो मंत्रिमंडल रविवार शाम तक शपथ ले सकता है, हालांकि चर्चा के नतीजों के आधार पर इसे सोमवार तक के लिए भी टाला जा सकता है। 5 मार्च 2026 को होंगे संसदीय चुनाव नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शुक्रवार को नव नियुक्त अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की सिफारिश पर देश की संसद (प्रतिनिधि सभा) को भंग कर दिया था। राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी सूचना के अनुसार सदन का विघटन 12 सितंबर 2025 की रात 11 बजे से प्रभावी हुआ। अंतरिम सरकार बनने के साथ ही अधिकारियों ने देश में नए सिरे से संसदीय चुनाव कराने का भी एलान कर दिया। नेपाल में अब 5 मार्च 2026 को आम चुनाव कराए जाएंगे। सोमवार से खुलेंगे स्कूल काठमांडू महानगरपालिका क्षेत्र के स्कूलों में सोमवार से कक्षाएं शुरू होंगी। शनिवार को जारी सूचना में महानगर ने कहा कि शिक्षक और कर्मचारी रविवार को ही स्कूल में उपस्थित होंगे, लेकिन पढ़ाई सोमवार से शुरू होगी। रविवार को स्कूलों में प्रशासनिक काम, क्षति का मूल्यांकन और विवरण संकलन किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, जो स्कूल संचालन योग्य स्थिति में होंगे वहां कक्षाएं होंगी। युवाओं के आंदोलन के कारण 8 सितंबर से स्कूल बंद थे। नेपाल में धीरे-धीरे सामान्य हो रहा जनजीवन कई दिनों की अशांति के बाद नेपाल में अब धीरे-धीरे जनजीवन सामान्य हो रहा है। काठमांडो घाटी समेत देश के अन्य हिस्सों से शनिवार को कर्फ्यू और प्रतिबंधात्मक आदेश हटा लिया गया। दुकानें, किराना स्टोर, सब्जी बाजार और शॉपिंग मॉल दोबारा खुल गए हैं। सड़कों पर भी वाहनों की चहल-पहल बढ़ गई है। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि सेना ने प्रतिबंधात्मक आदेश या कर्फ्यू को शनिवार से आगे नहीं बढ़ाया है। प्रतिबंध हटने के साथ ही सार्वजनिक परिवहन सेवा पुनः शुरू हो गई। काठमांडू से देश के कई भागों के लिए लंबी दूरी की बसों का संचालन भी शुरू हो गया है। हालांकि, काठमांडू के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिश्वो अधिकारी के अनुसार, हालांकि काठमांडू घाटी के अधिकांश क्षेत्र अब प्रतिबंधों से मुक्त हैं, लेकिन संभावित विरोध प्रदर्शनों को रोकने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में प्रतिबंध जारी रहेंगे। प्रमुख सरकारी भवनों समेत कई स्थानों पर सफाई अभियान चलाया गया, जिन्हें हाल ही में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों की तरफ से तोड़फोड़ कर आग के हवाले कर दिया गया था। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ केपी शर्मा ओली सरकार के खिलाफ शुरू हुए जेन-जी के आंदोलन के दौरान कम से कम 51 लोग मारे गए थे। पीएम ओली समेत उनके मंत्रियों को पद छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। इसके बाद नेपाल की सेना ने सुरक्षा व्यवस्था को अपने हाथों में ले लिया था।

लंदन की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब: दक्षिणपंथी गुटों ने उठाई ये मांगें

लंदन ब्रिटेन की राजधानी लंदन में शनिवार को एक लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतर आए। हालिया इतिहास का यह सबसे बड़ा दक्षिणपंथी संगठनों का प्रदर्शन है। एंटी इमिग्रेशन कार्यकर्ता टॉमी रॉबिन्सन के नेतृत्व में करीब 1.10 लाख प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। इस दौरान पुलिस अधिकारियों पर हमले की भी खबरें सामने आईं। यह रैली यूनाइट द किंगडम मार्च के नाम से आयोजित की गई थी। इसके जवाब में स्टैंड अप टू रेसिज्म नामक काउंटर-प्रदर्शन भी हुआ, जिसमें लगभग 5,000 लोगों ने भाग लिया। मेट्रोपॉलिटन पुलिस को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा ताकि दोनों गुट आमने-सामने न आ जाएं। पुलिस ने बताया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरों को तोड़ने और प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुसने की कोशिश की। इस दौरान कई पुलिस अधिकारी घायल हो गए। हालात काबू में लाने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया और घुड़सवार दस्ते भी उतारे गए। शनिवार को लंदन में प्रदर्शन के अलावा कई बड़े फुटबॉल मैच और कॉन्सर्ट भी थे, जिसके चलते पुलिस ने 1,600 से अधिक अधिकारियों को तैनात किया। 500 अन्य शहरों से बुलाए गए थे। प्रदर्शनकारियों ने यूनियन फ्लैग और सेंट जॉर्ज क्रॉस के झंडे लहराए। कुछ ने अमेरिकी और इजरायली झंडे भी थामे हुए थे। “मेक अमेरिका ग्रेट अगेन” कैप पहने कई लोग प्रधानमंत्री कियर स्टार्मर के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। कई पोस्टरों पर लिखा था – “उन्हें घर भेजो”। टॉमी रॉबिन्सन का असली नाम स्टीफन याक्सली-लेनन है। उन्होंने मार्च को अभिव्यक्ति की आजादी का जश्न बताया। उन्होंने हाल ही में मारे गए अमेरिकी दक्षिणपंथी नेता चार्ली किर्क को भी श्रद्धांजलि दी। रॉबिन्सन ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “हजारों लाखों लोग आज लंदन की सड़कों पर एकजुट होकर अपनी आजादियों के लिए खड़े हैं।” रॉबिन्सन अपने समर्थकों के बीच खुद को पत्रकार और व्हिसलब्लोअर बताते हैं और कहते हैं कि वे सरकार की गलतियों को उजागर करते हैं। उनके समर्थकों में टेस्ला और एक्स के मालिक एलन मस्क जैसे प्रभावशाली नाम भी शामिल हैं। हालांकि, रीफॉर्म यूके जैसी बड़ी एंटी-इमिग्रेंट पार्टी उनसे दूरी बनाए रखती है, क्योंकि रॉबिन्सन के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। रैली में शामिल एक समर्थक सैंड्रा मिशेल ने कहा – “हम अपना देश वापस चाहते हैं। हम अपनी आजादी और अभिव्यक्ति का अधिकार वापस चाहते हैं। अवैध प्रवासियों को रोका जाना चाहिए। हम टॉमी पर भरोसा करते हैं।” पुलिस कमांडर क्लेयर हेन्स ने कहा, “हम इस प्रदर्शन को वैसे ही संभालेंगे जैसे किसी और प्रदर्शन को। बिना किसी पक्षपात के। लोगों को कानूनसम्मत अधिकार दिए जाएंगे, लेकिन अव्यवस्था फैलाने वालों के खिलाफ सख्ती बरती जाएगी।” उन्होंने माना कि पहले भी कुछ प्रदर्शनों में एंटी-मुस्लिम नारेबाजी और भड़काऊ घटनाएं सामने आई थीं, लेकिन उन्होंने आश्वासन दिया कि लंदन की विविध समुदायों को भयभीत होकर घरों में रहने की जरूरत नहीं है। यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब ब्रिटेन में प्रवासियों के मुद्दे ने राजनीतिक बहस पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है। इस साल अब तक 28,000 से अधिक प्रवासी छोटे नावों से इंग्लिश चैनल पार करके ब्रिटेन पहुंचे हैं। देशभर में सड़कों और मोहल्लों में लाल-सफेद झंडों की मौजूदगी बढ़ी है। समर्थकों का कहना है कि यह राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक है, लेकिन एंटी-रेसिज्म कैंपेनरों का मानना है कि यह विदेशियों के प्रति नफरत का संदेश है।  

भरूच: फैक्ट्री में लगी आग से मचा हड़कंप, आसमान में उठे धुएं के गुबार

भरूच भरुच जिले के जीआईडीसी (GIDC) पानोली में स्थित संघवी ऑर्गेनिक्स प्राइवेट लिमिटेड (Sanghvi Organics Pvt Ltd) में शनिवार को एक बड़ी आग लग गई। दूर से ही धुएं के मोटे गुबार और आग की लपटें दिखाई दे रही थीं, जिससे औद्योगिक क्षेत्र में दहशत फैल गई। अधिकारियों ने बताया कि दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंच गई हैं और आग बुझाने का काम फिलहाल जारी है। हालांकि, आग लगने की वजह और नुकसान का अभी तक पता नहीं चल पाया है। आग पर काबू पाने के लिए मौके पर 15 से अधिक दमकल गाड़ियां मौजूद हैं। किसी के हताहत या घायल होने की खबर नहीं है। इस नई घटना से कुछ महीने पहले 2 अप्रैल को गुजरात में बनासकांठा जिले के डीसा में भी एक और भयानक आग लगी थी। वह आग एक गोदाम में चल रही अवैध पटाखा फैक्ट्री में एक बड़े धमाके से लगी थी, जिसमें कम से कम 21 लोग मारे गए थे, जिनमें से कई मध्य प्रदेश के प्रवासी मजदूर थे। उस समय के चश्मदीदों ने बताया था कि धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि आस-पास के घरों तक हिल गए और धुएं का गुबार आसमान में छा गया। गोदाम के कुछ हिस्से गिर गए, जिससे मजदूर मलबे में फंस गए। बाद में, पुलिस ने पुष्टि की कि यह यूनिट बिना किसी वैध लाइसेंस और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करते हुए चलाई जा रही थी। इस त्रासदी के बाद फैक्ट्री के मालिक खूबचंद ठक्कर और उनके बेटे को गिरफ्तार कर लिया गया था।

मौसम विभाग का अलर्ट: कई जिलों में झमाझम बारिश के आसार

रायपुर प्रदेश में पिछले 24 घंटों में अनेक स्थानों पर मध्यम वर्षा हुई. सबसे ज्यादा बारिश बीजापुर जिले के भोपालपटनम में दर्ज की गई. इस दौरान सबसे अधिक तापमान रायपुर में 35 डिग्री सेलसियस रिकॉर्ड किया गया. मौसम विभाग ने प्रदेश के अधिकांश इलाकों में आज हल्की से मध्यम बारिश होने की की संभावना है. मौसम विभाग ने कई स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा के साथ गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना जताई है. वहीं कुछ स्थानों पर अगले 3 दिनों तक भारी वर्षा जारी रह सकता है. यहां हुई बारिश मौसम विभाग की ओर से जारी आंकड़े के मुताबिक, भोपालपटनम-5 सेमी, तखतपुर, कोटा, सन्ना, दंतेवाड़ा, नया बाराद्वार, राजनांदगांव -4 सेमी, लोरमी 3 सेमी, कुंडा, लालपुर थाना, सकरी, रतनपुर, पेंड्रा, पंढरिया, गंडई, मोहला, बेलरगांव, नवागढ़, पत्थलगांव-3 सेमी, प्रेमनगर, बोराई, दाढ़ी, मनोरा, मालखरौदा, पिपरिया, हसौद, बेलगहना, कापू, रेंगाखार कला, कुकदुर, नगरी, छाल, कवर्धा, कांसाबेल, बिलाईगढ़, सरिया, बेलतरा, केशकाल -2 सेमी. इसके अलावा कुछ और स्थानों पर इससे कम वर्ष दर्ज की गई. राजधानी में आज कैसा रहेगा मौसम राजधानी रायपुर में आज बादल छाए रहने की संभावना बनी हुई है. साथ ही बादल गरजने-चमकने के साथ बारिश हो सकती है. अधिकतम तापमान  34 और न्यूनतम तापमान के आसपास बने रहने की आशंका जताई गई है.

बिलासपुर-जबलपुर हाईवे ठप: हजारों यात्रियों की आवाजाही में मुश्किलें

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही बिलासपुर-जबलपुर नेशनल हाइवे पर फिर से जाम लग गया. बीती रात जिले के आखिरी छोर पर स्थित करिआम आरटीओ बेरियर के पास रोड के बीचों-बीच ट्रक और ट्रेलर के फंसने से आगे-पीछे गाड़ियों की लंबी कतार लग गई. दरअसल, बिलासपुर-जबलपुर नेशनल हाइवे का निर्माण कार्य चल रहा है. ऐसे में बारिश की वजह से सड़क के दोनों ओर कीचड़ होने की वजह से सड़क पर गाड़ियों किसी वजह से फंस जाने से गाहे-बगाहे वाहनों की आवाजाही रुक जा रही है. इसी तरह बीती रात से लगे जाम की वजह से बिलासपुर से अमरकंटक, जबलपुर, अनूपपुर, मनेंद्रगढ़ के अलावा उत्तरप्रदेश से आना-जाना करने वाले हजारों यात्री फंसे हुए हैं. जाम खुलवाने के लिए स्थानीय पुलिस और यातायात विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचकर प्रयास कर रहे हैं.

दंतैल का कहर: लोगों को दौड़ाया, जान बचाने छतों पर चढ़े ग्रामीण

कोरबा  छत्तीसगढ़ में हाथियों का कहर जारी है. कोरबा जिले के पसान ग्राम पंचायत में दंतैल ने जमकर उत्पात मचाया. बस्ती में घुसकर मकान-दुकान, कार-बाइक को तोड़ने के साथ ग्रामीणों को भी दौड़ाया. यह भी पढ़ें : पॉवर सेंटर : जब कलेक्टर ने मांगा ‘फेवर’…थिरकती पुलिस…न्यूडिटी…सरकारी नौकर…अर्जियां…चीफ सेक्रेटरी कौन?…. जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत पसान बस्ती में दंतैल ने तीन घंटे तक बस्ती में विचरण किया. दंतैल की चिंघाड़ से दहशतजदा ग्रामीण डर कर अपने घरों की छतों पर चढ़कर अपनी जान बचाई. लेकिन ऐसे मौके पर भी कई लोग वीडियो बनाने और सेल्फी लेने से बाज नहीं आए. गमीमत रही कोई अप्रिय घटना नहीं हुई. पसान के डिप्टी रेंजर ईश्वर दास मानिकपुरी ने बताया कि पसान बस्ती विचरण कर रहे दंतैल हाथी को जंगल की ओर खदेड़ा गया. उन्होंने ग्रामीणों से ऐसे मौके पर सतर्कता बरतने की सलाह दी, अन्यथा खतरा हो सकता है.

मेरे दिमाग की कीमत 200 करोड़ – नितिन गडकरी का बयान बना सुर्ख़ियों में

नई दिल्ली इथेनॉल को लेकर विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने विरोधियों को करारा जवाब दिया है। उन्होंने कहा, मेरा दिमाग की ही कीमत हर महीने 200 करोड़ की है। मेरे पास पैसे की कोई कमी नहीं है और मैं कभी नीचे नहीं गिर सकता हूं। उन्होंने कहा कि वह जो कुछ भी करना चाहते हैं वह किसानों के हित के लिए है। इसका कमाई से कोई लेना-देना नहीं है। नागपुर में एग्रीकोज वेलफेयर सोसाइटी के एक कार्यक्रम में संबोधन के दौरान उन्होंने कहा, आपको क्या लगता है कि ये सब मैं पैसे के लिए कर रहा हूं? मैं कोई दलाल नहीं हूं, ईमानदारी से कमाना जानता हूं। उन्होंने कहा, बहुत सारे राजनेता लोगों को लड़ाकर खुद फायदा उठाना जानते हैं, लेकिन हम उनमें नहीं हैं। गडकरी ने कहा, मेरा भी घर-परिवार है। मैं कोई संत नहीं हूं। मुझे हमेशा लगता है कि विदर्भ में 10 हजार किसानों की आत्महत्या शर्म की बात है। जब तक कि हमारे किसान समृद्ध नहीं हो जाते, हम अपने प्रयास कम नहीं करेंगे। गडकरी ने अपने बेटे की कंपनी को लेकर कहा कि वह केवल आइडिया देने का काम करते हैं। उन्होंने कहा, मेरा बेटा इंपोर्ट-एक्सपोर्ट का बिजनेस करता है। उसने हाल ही में ईरान से 800 कंटेनर सेब ऑर्डर किए और यहां से 100 कंटेनर केले भेज दिए। गडकरी ने कहा, मेरे बेट ने गोवा से 300 कंटेनर मछलियां सर्बिया को सप्लाई कीं। उन्होंने कहा, बेटे ने ऑस्ट्रेलिया में दूध के प्रोडक्ट की फैक्ट्री लगाई है। वह अब अबू धाबी और अन्य जगहों पर भी कंटेनर भेजता है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा आईटीसी के साथ मिलकर 26 चावल मिलें चलाता है। गडकरी ने कहा, मुझे पांच लाख टन चावल के आटे की जरूरत पड़ती है। इसलिए वह मिल चलाता है और मैं उससे आटा खरीद लेता हूं। उन्होंने कहा कि ये कुछ उदाहरण है जिससे पता चलता है कि बिजनेस में इंटरेस्ट रखने वाले लोग कृषि क्षेत्र में कैसे अवसर पैदा कर सकते हैं।