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लाडली बहना योजना अपडेट: अब मिलेगा दोगुना फायदा, 3000 रुपए तक की सुविधा

भोपाल  मध्य प्रदेश की 1.26 करोड़ से ज़्यादा लाडली बहना योजना की लाभार्थियों को इस महीने से हर महीने 1,500 रुपये मिलेंगे, जो कि पहले के 1,250 रुपये से ज़्यादा हैं। हालांकि, यह बढ़ी हुई राशि दिवाली के बाद ही उनके खातों में आएगी। पहले जहां हर महीने की 15 तारीख के आसपास पैसे मिल जाते थे, वहीं अब लाभार्थियों को बढ़ी हुई रकम के लिए महीने के अंत तक इंतज़ार करना होगा। भाईदूज से मिलेंगे 1500 रुपए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की है कि 1,250 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये की यह मासिक सहायता राशि भाई दूज से मिलनी शुरू हो जाएगी। लेकिन, अभी यह साफ नहीं है कि सरकार इस महीने की 15 तारीख से पहले 1,250 रुपये देगी और फिर 250 रुपये अलग से, या फिर एक साथ पूरे 1,500 रुपये का भुगतान करेगी। अधिकारियों का कहना है कि दिवाली के बाद लाभार्थियों को एक साथ 1,500 रुपये मिलेंगे। अगले महीने से हर महीने इसी तरह 1,500 रुपये दिए जाएंगे, जैसा कि अभी पैसे देने का तरीका है। 3000 रुपए तक बढ़ेगी राशि मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि भाई दूज के बाद से हर महीने 1,500 रुपये मिलेंगे और धीरे-धीरे इस योजना के तहत मिलने वाली राशि को 3,000 रुपये तक बढ़ाया जाएगा। इस योजना का मासिक खर्च, जो अभी 1.26 करोड़ लाभार्थियों को 1,250 रुपये देने के लिए 1,541 करोड़ रुपये से ज़्यादा है, अब 1,800 करोड़ रुपये से ऊपर चला जाएगा। शुरुआत में मिलते थे 1000 रुपए शुरुआत में, मध्य प्रदेश सरकार ने इस योजना के तहत हर महीने 1,000 रुपये दिए थे। 27 अगस्त 2023 को पिछली बीजेपी सरकार ने अक्टूबर 2023 से इसे बढ़ाकर 1,250 रुपये प्रति माह करने की घोषणा की थी। सरकार ने धीरे-धीरे राशि बढ़ाने का वादा किया था: 1,000 रुपये से 1,250 रुपये, फिर 1,500 रुपये, 1,750 रुपये, 2,000 रुपये, 2,250 रुपये, 2,500 रुपये, 2,750 रुपये और आखिर में 3,000 रुपये प्रति माह तक। मंत्री ने की पुष्टि महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने पुष्टि की है कि लाभार्थियों को अक्टूबर से हर महीने 1,500 रुपये मिलेंगे। दिवाली के बाद एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जहां लाभार्थियों के खातों में पैसे ट्रांसफर किए जाएंगे। कार्यक्रम का शहर अभी तय नहीं हुआ है। क्या है लाडली बहना योजना लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश सरकार की महिलाओं के लिए सबसे बड़ी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजना है। 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले शुरू की गई इस योजना को एक ऐसा कदम माना गया जिसने बीजेपी को भारी बहुमत से सत्ता में वापस लाने में मदद की। कई दूसरे राज्यों ने भी अलग-अलग नामों और तरीकों से इस योजना की नकल की है। 12 सितंबर को सीएम यादव ने 1.26 करोड़ लाड़ली बहना लाभार्थियों के बैंक खातों में 1,541 करोड़ रुपये से ज़्यादा की 28वीं किस्त ट्रांसफर की थी। योजना शुरू होने के बाद से अब तक 41,000 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं।

मध्य प्रदेश में मंत्री-कार्यशैली पर समीक्षा, मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी तेज

भोपाल मध्य प्रदेश में सत्ता और संगठन में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है. निगम, मंडल और प्राधिकरणों में नियुक्तियों को लेकर जोर-शोर से चर्चा चल रही है. इसके साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार की खबरें भी सुर्खियों में हैं. पिछले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश से लेकर दिल्ली तक बड़े नेताओं की मुलाकातों का सिलसिला लगातार जारी है. पिछले दो दिनों में ही 10 से अधिक बड़े नेताओं ने एक-दूसरे से मुलाकात की है, जिसने इन बदलावों की अटकलों को और हवा दी है. नेताओं की मुलाकातों का सिलसिला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की. वहीं, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से चर्चा की. इसके अलावा, संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा और हेमंत खंडेलवाल ने भी दिल्ली में कई बड़े नेताओं से मुलाकात की. इन मुलाकातों में संगठन और सरकार के बीच तालमेल, नियुक्तियों और मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल जैसे मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है.  मध्य प्रदेश के कमिश्नर और कलेक्टरों की भोपाल में दो दिन चली कांफ्रेंस के बाद अब मुख्यमंत्री डा मोहन यादव अपनी सरकार के मंत्री व विधायकों के कामकाज की समीक्षा करेंगे। वह मंत्रियों के साथ वन-टू-वन बैठक करके विभागवार उनके कामकाज की समीक्षा करेंगे। विभागवार मंत्रियों के प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा और इसके आधार पर मंत्रियों के कामकाज की ग्रेडिंग तय होगी। जल्द ही मंत्रियों के साथ बैठक का दौर शुरू करने की तैयारी है। यही वजह रही कमिश्नर कलेक्टरों की कांफ्रेंस में किसी भी मंत्री से शामिल नहीं किया गया। विधायकों को चार साल का रोडमैन बनाने के लिए कहा कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री ने मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों की स्थिति का आकलन किया है। इस आधार पर अब वह मंत्रियों से जानेंगे कि उन्होंने 20 माह में अपने प्रभार के जिलों में क्या-क्या कार्य किए। इसी तरह मुख्यमंत्री डॉ. यादव पार्टी के विधायकों के कामकाज को भी देखेंगे। उल्लेखनीय है कि विधायकों को चार साल का रोडमैप बनाने के लिए कहा गया था। उन्होंने अपने विधायक निधि का जनकल्याण में कितना उपयोग किया, इसकी रिपोर्ट भी तैयार कराई गई है। यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। इधर, मुख्यमंत्री ने पहले ही मंत्रियों के परफारमेंस की एक रिपोर्ट तैयार कराई है, जो केंद्रीय नेतृत्व को भेजी गई थी। सिंहस्थ -2028 से कार्यों से जुड़े से 12 विभागों की मुख्यमंत्री अलग से बैठक लेंगे। मंत्रिमंडल विस्तार के संकेत मुख्यमंत्री जिस तरह से मंत्रियों के कामकाज पर नजर बनाए हुए हैं उससे मंत्रिमंडल विस्तार के संकेत मिल रहे हैं। पूर्व में मुख्यमंत्री द्वारा अपने मंत्रियों के कामकाज की रिपोर्ट तैयार कराने के बाद इसकी प्रबल संभावना देखी जा रही है। मंत्रिमंडल विस्तार होता है तो क्षेत्रीय संतुलन साधने के हिसाब कुछ पूर्व मंत्रियों को फिर मौका दिया जा सकता है। वर्तमान में मुख्यमंत्री सहित 31 मंत्री हैं। नियम के अनुसार 35 मंत्री हो सकते हैं। इन बिंदुओं पर होगी चर्चा     कितने मंत्रियों ने गांव में रात्रि विश्राम किया और गांव में चौपाल लगाई।     प्रभार के जिलों में प्रतिमाह दौरा कर रहे हैं या नहीं।     मंत्रियों की अपने प्रभार के जिलों में अधिकारियों के साथ कैसा तालमेल हैं।     पार्टी संगठन के कामकाज में सहभागिता कैसी है।     केंद्र से मिले अभियानों को सफल बनाने में कितने मंत्रियों का प्रदर्शन अच्छा रहा।     कितने मंत्रियों से आमजन व पार्टी कार्यकर्ता संतुष्ट है या नहीं।  

डिजिटल इंडिया की दिशा में बड़ा कदम: 9 जिलों के 10 शहरों में नक्शा प्रोजेक्ट का शुभारंभ

उज्जैन  प्रदेश में शहर की जमीनों का रिकॉर्ड अब डिजिटल किया जाएगा। इसके लिए केंद्रीय भूमि संसाधन विभाग द्वारा 'नक्शा' (National Geospatial Knowledge based Land Survey of Urban Habitation) कार्यक्रम की शुरुआत की गई है।  प्रोजेक्ट की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री शिवराजसिंह चौहान ने रायसेन जिले से की थी। इसमें प्रदेश के 9 जिलों के 10 शहरों को पायलट प्रोजेक्ट में शामिल किया है। इनमें उज्जैन जिले से उन्हेल शामिल हैं। वहीं शाहगंज, छनेरा, आलीराजपुर, देपालपुर, धारकोठी, मेघनगर, माखननगर (बाबई), विदिशा और सांची कस्बा है। उन्हेल कस्बे के लिए आयुक्त, भू-अभिलेख द्वारा जारी अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित की गई है। इसमें वर्णित क्षेत्र भू-सर्वेक्षण के अधीन अधिसूचित किए गए हैं। इस आधार पर कलेक्टर द्वारा प्रारूप (नियम 14) में सर्वेक्षण संक्रियाओं के प्रारंभ होने की घोषणा की गई है। इसके बाद कस्बा उन्हेल में नक्शा प्रोजेक्ट के तहत कार्य प्रचलित है। भू-सर्वेक्षण के दौरान नवीन अधिकार अभिलेख तैयार किया जाएगा। इसमें सभी खातेदारों के नाम, उनके अंश, दायित्व तथा सुखाचार अधिकार अभिलिखित किए जाएंगे। ग्रामों के लिए निस्तार पत्रक तथा वाजिब-उल-अर्ज भी तैयार किया जाएगा। 413 शहरों में नक्शे और संपत्तियों की झंझटें खत्म जमीनों, मकानों के नक्शे, संपत्तियों में आनेवाली झंझटें खत्म कर दी गई हैं। प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनी रिकॉर्ड, संपत्तियों का प्रबंधन और विकास योजनाओं को बेहतर बनाने के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली यानि GIS सर्वे और मानचित्रण का उपयोग किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि प्रदेश के 413 शहरों में यह काम पूरा कर लिया गया है। जीआइएस सर्वे के तहत ड्रोन सहित विभिन्न तकनीकों के इस्तेमाल से जमीनी सर्वेक्षण किया गया और डिजिटल मानचित्र बनाए गए हैं। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि नगरीय निकायों की कार्य दक्षता में भी वृद्धि होगी। GIS सर्वे से संपत्ति के मालिक, कर प्रणाली और भूमि उपयोग की जानकारी एक क्लिक से मिल सकेगी। इससे जहां पारदर्शिता में वृद्धि होगी वहीं जमीन से संबंधित लेनदेन भी सरल हो गया है। GIS डेटा के इस्तेमाल से शहरी नियोजन और विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।  

भारतीय-रूसी साझेदारी में बनी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, अगले सप्ताह होगा लॉन्च

नई दिल्ली भारतीय रेल यात्रियों के लिए एक और अच्छी खबर आने वाली है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का सपना अब हकीकत बनने जा रहा है। इंडो-रशियन जॉइंट वेंचर काइनेट रेलवे सॉल्यूशंस अगले सप्ताह अपने पहले एसी कोच के डिजाइन का अनावरण करेगी। यह डिजाइन इंटरनेशनल रेलवे इक्विपमेंट एग्जीबिशन (IREE) 2025 में प्रदर्शित किया जाएगा, जो अगले सप्ताह दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाला है। भारत-रूस की साझेदारी से बनेंगे 120 स्लीपर वंदे भारत ट्रेनें काइनेट रेलवे सॉल्यूशंस एक संयुक्त उद्यम है, जिसे भारतीय रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) और रूस की प्रमुख रोलिंग स्टॉक कंपनियों द्वारा स्थापित किया गया है। इस साझेदारी के तहत कंपनी को 120 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों (यानी 1,920 कोच) के निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई है। कंपनी जून 2026 तक पहले प्रोटोटाइप ट्रेन को तैयार करने की योजना पर काम कर रही है। तीन कंपनियों को मिला वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का ठेका भारतीय रेल ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के निर्माण का ठेका तीन कंपनियों को दिया है। इनमें बीईएमएल (BEML), काइनेट रेलवे सॉल्यूशंस (रूस की TMH और भारतीय RVNL का संयुक्त उपक्रम) और टिटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड और बीएचईएल (BHEL) का कंसोर्टियम शामिल है। इन कंपनियों को आधुनिक तकनीक के साथ ऊर्जा-कुशल और यात्रियों की आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करने वाले कोच तैयार करने का कार्य सौंपा गया है। लंबी दूरी की यात्रा के लिए स्लीपर वंदे भारत वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को लंबी और मध्यम दूरी की यात्राओं के लिए डिजाइन किया जा रहा है। अब तक वंदे भारत एक्सप्रेस केवल चेयर कार के रूप में संचालित होती है, लेकिन स्लीपर वर्जन आने से रात की यात्रा करने वाले यात्रियों को वंदे भारत जैसी हाई-स्पीड, आरामदायक और प्रीमियम सुविधा मिलेगी। एक साथ दो वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की लॉन्चिंग रेल मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को एक साथ दो रेक के रूप में लॉन्च किया जाएगा। रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि लॉन्चिंग तभी की जाएगी जब दूसरी ट्रेन पूरी तरह तैयार हो जाएगी ताकि सेवा की निरंतरता बनी रहे। उन्होंने कहा, “दूसरी ट्रेन का निर्माण कार्य चल रहा है और यह संभवतः 15 अक्टूबर 2025 तक तैयार हो जाएगी। दोनों ट्रेनें साथ में लॉन्च की जाएंगी। दूसरी ट्रेन नियमित सेवा की निरंतरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। जैसे ही दूसरा रेक मिल जाएगा, किसी भी उपयुक्त रूट पर संचालन शुरू किया जाएगा।” यह दोनों ट्रेनें बीईएमएल द्वारा इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) तकनीक का उपयोग करते हुए बनाई जा रही हैं। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन से रेल यात्रा में नया अध्याय वंदे भारत स्लीपर ट्रेन भारतीय रेल के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होने वाली है। यह ट्रेनें न केवल तेज और ऊर्जा-कुशल होंगी, बल्कि यात्रियों को बेहतर साउंड इंसुलेशन, आरामदायक बर्थ, अत्याधुनिक सुरक्षा फीचर्स और लग्ज़री स्तर की सुविधाएं भी प्रदान करेंगी। रेल मंत्रालय का मानना है कि यह प्रोजेक्ट भारतीय रेल को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने की दिशा में एक और मील का पत्थर साबित होगा।