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विधायक मनजिंदर सिंह लालपुरा को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

तरनतारन विधायक मनजिंदर सिंह लालपुरा को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से अभी तक कोई राहत नहीं मिली है। 22 सितंबर को उन्होंने हाईकोर्ट में जमानत के लिए अपील दायर की थी। गौरतलब है कि जिला सेशल कोर्ट प्रेम कुमार की अदालत ने 2013 के उम्सा कांड मामले में विधायक लालपुरा और अन्य को एससी/एसटी एक्ट के तहत 4 साल कैद की सजा सुनाई थी। माननीय हाईकोर्ट ने पहले इस मामले की सुनवाई के लिए 13 अक्टूबर की तारीख तय की थी, लेकिन आज कोर्ट नंबर 13 में हुई सुनवाई के दौरान अगली तारीख 28 अक्टूबर तय की गई है। इस फैसले के बाद विधायक मनजिंदर सिंह लालपुरा ने अपनी सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। 

इजरायल में बंधक संकट खत्म, पीएम मोदी बोले – ट्रंप के प्रयासों से मिली बड़ी राहत

नई दिल्ली इजरायल और हमास के बीच सीजफायर की घोषणा के बाद सोमवार को हमास ने सभी 20 बंधकों को रिहा कर दिया। इसके एलान करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को धन्यवाद कहा और इसे मिडिल ईस्ट के लिए एक नया सवेरा बताया। इजरायल और हमास के बीच शांति समझौता और फिर बंधकों की रिहाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र इसका स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि करीब दो साल बाद बंधकों को रिहा करने का कदम स्वागत योग्य है। पीएम मोदी ने ट्रंप का इस मामले पर समर्थन भी जताया है।  

जंग खत्म करो वरना… ट्रंप की पुतिन को खुली धमकी — यूक्रेन को मिल सकती हैं लंबी‑रेंज मिसाइलें

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को रूस को चेतावनी दी कि यदि वह यूक्रेन के साथ लंबे समय से जारी युद्ध को समाप्त नहीं करता है तो अमेरिका यूक्रेन को लंबी दूरी की टॉमहॉक मिसाइल दे सकता है। ट्रंप ने इजराइल जाते समय एयर फोर्स वन विमान में पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा, ‘‘मैं कहूंगा कि अगर यह युद्ध नहीं समाप्त होता तो मैं उन्हें टॉमहॉक भेजूंगा। टॉमहॉक बेहतरीन हथियार है, बेहद आक्रामक हथियार…।'' ट्रंप ने पत्रकारों से कहा,‘‘ मैं उनसे कहूंगा कि अगर युद्ध समाप्त नहीं हुआ तो हम ऐसा कर सकते हैं।'' ट्रंप ने हालांकि कहा, ‘‘हो सकता है कि हम ऐसा न करें और ये भी हो सकता है कि हम ऐसा करें। मुझे लगता है कि यह बात रखनी चाहिए।'' ट्रंप की यह टिप्पणी रविवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से फोन पर हुई बातचीत के बाद आई है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने उस बातचीत में टॉमहॉक मिसाइल भेजने की संभावना का जिक्र किया था। उन्होंने कहा, ‘‘टॉमहॉक्स बेहद आक्रामकता भरा कदम है।'' ट्रंप ने ये बयान ऐसे वक्त दिए हैं जब रूस ने यूक्रेन के बिजली संयंत्रों पर रातों रात हमला किया और यह सर्दियों से पहले यूक्रेन की ऊर्जा संरचनाओं को ठप करने संबंधी उसके अभियान का ही हिस्सा है। रूस ने अमेरिका द्वारा यूक्रेन को टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दिए जाने की संभावना पर ‘‘बेहद चिंता'' व्यक्त की है। पुतिन पूर्व में कह चुके हैं कि अमेरिका द्वारा यूक्रेन को लंबी दूरी की मिसाइलें दिए जाने से मॉस्को और वाशिंगटन के संबंधों को गंभीर नुकसान पहुंचेगा। ट्रंप ने युद्ध के संबंध में कहा, ‘‘मुझे सचमुच लगता है कि अगर पुतिन इस मामले को सुलझा लेते हैं तो अच्छा है और अगर ऐसा नहीं हुआ तो यह उनके लिए ही अच्छा नहीं होगा।''    

हरियाणा में बड़ा बदलाव: मामूली अपराधों पर अब जेल जाने की जरूरत नहीं

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने छोटे तकनीकी और प्रक्रियागत चूकों को अपराध की श्रेणी से बाहर करते हुए जुर्माना और प्रशासनिक कार्रवाई के विकल्प को मंजूरी दे दी है। रविवार को हुई कैबिनेट बैठक में हरियाणा जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अध्यादेश-2025 को लागू करने का प्रस्ताव मंजूर किया गया।  इस अध्यादेश के तहत 17 विभागों के 42 राज्य अधिनियमों के 164 प्रावधानों को अपराधमुक्त किया जाएगा। छोटे अपराधों के लिए अब जेल की बजाय चेतावनी और सुधार का मौका मिलेगा, जिससे राज्य में कारोबार करना और नियमों का पालन करना आसान होगा। यह अध्यादेश केंद्र सरकार द्वारा अगस्त 2025 में पारित बिल पर आधारित है, जिसका उद्देश्य नियामक बाधाओं को कम कर जनता और उद्यमियों के लिए जीवन और कारोबार को सरल बनाना है। कैबिनेट ने हरियाणा मानव इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस एवं एक्वायर्ड इम्यूनोडिफिशिएंसी सिंड्रोम (रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम के तहत राज्य नियम बनाने को मंजूरी दी है। इसके अंतर्गत छह प्रशासनिक प्रभागों के आयुक्त लोकपाल के रूप में नियुक्त होंगे, जो एचआईवी और एड्स पीड़ितों की शिकायतों का निपटारा करेंगे। रोहतक, हिसार, करनाल, गुरुग्राम, फरीदाबाद और अंबाला में नियुक्त लोकपाल संबंधित जिले के सिविल सर्जनों के समन्वय से काम करेंगे। साथ ही, सभी स्वास्थ्य केंद्रों एवं एआरटी केंद्रों में रेट्रोवायरल थैरेपी (ART) दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। 

महिलाओं में विटामिन-डी की कमी के ये लक्षण पहचानें, देर होने से बढ़ सकता है खतरा

विटामिन-डी एक ऐसा विटामिन है, जिसे हमारा शरीर नेचुरली धूप की मदद से बनाता है। लेकिन फिर भी ज्यादातर लोगों में इसकी कमी देखने को मिलती है। विटामिन-डी की कमी महिलाओं में भी काफी आम है। हालांकि, हमारा शरीर कुछ संकेतों से इसकी कमी का इशार करता है। विटामिन-डी की कमी के लक्षण इतने सामान्य और धीरे-धीरे दिखाई देते हैं कि महिलाएं अक्सर उन्हें थकान या तनाव का नाम देकर नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन चिंता की बात यह है कि इन लक्षणों की अनदेखी आगे चलकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। इसलिए इनकी पहचान करना जरूरी है। आइए जानें महिलाओं में विटामिन-डी की कमी के लक्षण कैसे होते हैं। पीठ के निचले हिस्से में लगातार दर्द अगर आपकी पीठ के निचले हिस्से में, खासतौर से रीढ़ की हड्डी में, लगातार दर्द या अकड़न बनी रहती है, तो यह विटामिन-डी की कमी का एक अहम संकेत हो सकता है। विटामिन-डी शरीर में कैल्शियम के अब्जॉर्प्शन में मदद करता है। इसकी कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे दर्द की शिकायत हो सकती है। हर समय थकान और कमजोरी महसूस होना अगर पूरी नींद लेने के बाद भी थकान या कमजोरी महसूस होती है, तो इसका कारण विटामिन-डी कम होना भी हो सकता है। विटामिन-डी सेरोटोनिन यऔर डोपामिन जैसे न्यूरोट्रांसमिटर्स का फ्लो रेगुलेट करता है। इसलिए शरीर में इसकी कमी होने पर थकान महसूस होने लगती है। बालों का झड़ना बाल झड़ने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन विटामिन-डी की कमी भी इनमें से एक है। विटामिन-डी हेयर फॉलिकल्स के स्वास्थ्य और नए बालों के विकास के लिए जरूरी है। अगर बाल सामान्य से ज्यादा मात्रा में झड़ रहे हैं, तो यह विटामिन-डी की कमी की चेतावनी हो सकती है। मांसपेशियों में दर्द और क्रैम्प्स विटामिन-डी सिर्फ हड्डियों ही नहीं, बल्कि मांसपेशियों के स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है। इसकी कमी से मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और अचानक ऐंठन, खासकर रात के समय, हो सकती है। पैरों और जांघों की मांसपेशियों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। मूड स्विंग्स और उदासी महसूस होना क्या आपने कभी गौर किया है कि धूप में बैठने से मूड फ्रेश हो जाता है? इसका सीधा संबंध विटामिन-डी से है। यह विटामिन दिमाग में सेरोटोनिन नाम के 'फील-गुड' हार्मोन के प्रोडक्शन को प्रभावित करता है। इसकी कमी से चिड़चिड़ापन, मूड में उतार-चढ़ाव और यहां तक कि डिप्रेशन की भावना पैदा हो सकती है।  

वेस्टइंडीज के 2 बल्लेबाज ने भारत में आकर कर दिया बवाल, छा गए कैंपबेल और शाई होप, बदल दिया 51 साल का इतिहास

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाफ वेस्टइंडीज की टीम ने दूसरे मैच की दूसरी पारी में ऐसा खेल दिखाया जिसने सबको हैरान कर दिया. फॉलोऑन खेलने के बाद टीम ने ना सिर्फ पारी की हार को टाला बल्कि भारत के सामने सम्मानजनक लक्ष्य भी रखा. टीम की इस कामयाबी में ओपनर जॉन कैंपबेल और नंबर 4 बल्लेबाज शाई होप का बड़ा हाथ था. दोनों ने मिलकर ऐसा कारनामा अंजाम दिया जो पिछले 50 साल में नहीं हुआ था. कैंपबेल और शाई होप ने दिल्ली टेस्ट के दूसरे इनिंग्स में वेस्टइंडीज के लिए शतक बनाए. अरुण जेटली स्टेडियम में खेले जा रहे इस मैच में कैंपबेल ने 199 गेंदों का सामना करते हुए 12 चौकों और 3 छक्कों की मदद से 115 रन बनाए, जबकि होप ने 214 गेंदों पर 103 रन जोड़े. कैंपबेल और होप के शतकों ने 51 साल पुरानी सूखी पारी को समाप्त किया. 1974 में बेंगलुरु में हुए भारत-वेस्टइंडीज टेस्ट के बाद यह पहली बार है जब वेस्टइंडीज के दो बल्लेबाजों ने भारत में टेस्ट की दूसरी पारी में शतक बनाए हैं.   1974 में ओपनर गॉर्डन ग्रीनिज ने 208 गेंदों पर 107 रन बनाए थे और कप्तान क्लाइव लॉयड ने दूसरी पारी में नंबर 5 पर बल्लेबाजी करते हुए 149 गेंदों पर 163 रन बनाए थे. कैंपबेल ने अपने पहले टेस्ट शतक को 175वीं गेंद पर रविंद्र जडेजा की गेंद पर छक्का मारकर पूरा किया, जबकि होप ने अपनी तीसरी टेस्ट सेंचुरी को चौका मारकर पूरा किया. उन्होंने तीसरे विकेट के लिए दो सेशन में 177 रन जोड़े और मेहमान टीम को पारी की हार से बचाया. कैंपबेल, रिवर्स स्वीप खेलने के प्रयास में 64वें ओवर की तीसरी गेंद पर जडेजा की गेंद पर एलबीडब्ल्यू हो गए. मोहम्मद सिराज ने 84वें ओवर की पांचवीं गेंद पर होप की रक्षा को भेद दिया. होप का विकेट लेने से सिराज ने इस साल टेस्ट में अपने विकेटों की संख्या 37 कर ली. वह अब 2025 में सबसे अधिक टेस्ट विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में शीर्ष पर हैं. जिम्बाब्वे के ब्लेसिंग मुजारबानी 9 मैचों में 36 विकेट के साथ दूसरे स्थान पर हैं, जबकि सिराज ने आठवें टेस्ट की 15वीं पारी में अपना 37वां विकेट लिया.  

Namo Bharat Train हरियाणा में दौड़ेगी: दिल्ली से बावल तक, जानें कौन-कौन बनेगा स्टेशन

हरियाणा  हरियाणा सरकार ने नमो भारत ट्रेन के पहले फेज में दिल्ली से रेवाड़ी के बावल तक रूट को मंजूरी दे दी है। पहले केवल दिल्ली से धारूहेड़ा तक ही इस ट्रेन के संचालन की अनुमति थी, लेकिन अब बावल तक विस्तार से यात्रियों को काफी लाभ होगा। योजना के तहत दिल्ली से गुरुग्राम होते हुए राजस्थान के शाहजहांपुर तक नमो भारत ट्रेन चलाने की योजना बनाई गई है। हरियाणा रैपिड मेट्रो ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (HMRTC) ने इस बदलाव के संदर्भ में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) को पत्र भेजा है। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने बताया कि पहले यह योजना धारूहेड़ा तक सीमित थी, लेकिन 18 सितंबर को हुई बैठक में इस पर असहमति जताई गई और ट्रेन के संचालन को बावल तक बढ़ाने का सुझाव दिया गया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल को भी पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि ट्रेन का संचालन हरियाणा-राजस्थान सीमा पर स्थित बावल तक किया जाना चाहिए। डॉक्टर चंद्रशेखर खरे ने NCRTC को पत्र लिखा राव इंद्रजीत सिंह की आपत्ति के बाद 26 सितंबर को HMRTC के प्रबंध निदेशक डॉक्टर चंद्रशेखर खरे ने NCRTC को पत्र लिखकर नमो भारत ट्रेन के संचालन को धारूहेड़ा की बजाय बावल तक बढ़ाने की मंजूरी दी है। पत्र में बताया गया है कि इस निर्णय पर विचार-विमर्श के बाद सरकार ने सहमति व्यक्त की है। डॉक्टर चंद्रशेखर खरे ने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल ट्रेन का संचालन केवल बावल तक होगा और अगर भविष्य में बावल से आगे विस्तार किया जाता है, तो उसका खर्च हरियाणा सरकार वहन नहीं करेगी। बावल हरियाणा का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र है, इसलिए यहां यात्रियों की संख्या अधिक रहती है।   नमो भारत ट्रेन के स्टेशन नमो भारत ट्रेन के लिए दिल्ली में सराय काले खां, INA, मुनिरका और एरो सिटी में स्टेशन बनाए जाएंगे। गुरुग्राम में साइबर सिटी, इफको चौक, राजीव चौक, हीरो होंडा चौक, खेड़की दौला, मानेसर, पचगांव, बिलासपुर चौक, धारूहेड़ा, रेवाड़ी और बावल में भी स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। गुरुग्राम के चार स्टेशन अंडरग्राउंड होंगे।  

डिप्रेशन से सुरक्षा कवच: कॉल और ई-मेल नहीं, ‘सामने की मुलाकात’ है ज़रूरी

डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य की चुनौती आज का समय पूरी तरह से डिजिटल हो चुका है। हम एक कॉल या ई-मेल पर दुनिया के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति से तुरंत जुड़ सकते हैं। लेकिन क्या यह सुविधा वास्तव में हमारे मन को हल्का कर रही है? हालिया शोध और पुराने अनुभवों से पता चलता है कि जब बात डिप्रेशन (अवसाद) से बचाव की आती है, तो डिजिटल संवाद, चाहे वह फोन कॉल हो या ई-मेल, आमने-सामने की मुलाकात का स्थान नहीं ले सकता। शोध की ताज़ा पुष्टि: आमने-सामने की मुलाकात का महत्व ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन ने इस बात पर मुहर लगाई है कि डिप्रेशन से बचने के लिए दोस्तों और परिवार के साथ प्रत्यक्ष (Face-to-Face) मुलाकात करना, फोन या ई-मेल के मुकाबले कहीं अधिक प्रभावी है। इस शोध के मुख्य लेखक, मनोविज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर एलन टिओ (Alan Teo), ने बताया कि यह पहली बार मिली ऐसी जानकारी है जो लोगों को अवसाद से बचाने के लिए 'संवाद के तौर-तरीके' के महत्व को उजागर करती है। अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष: अवसाद का कम जोखिम: अध्ययन में पाया गया कि जो लोग नियमित रूप से अपने परिवार और दोस्तों से आमने-सामने मिलते थे, उनमें उन लोगों की तुलना में अवसाद के लक्षण कम पाए गए, जो केवल फोन या ई-मेल के जरिए संपर्क में रहते थे। दीर्घकालिक लाभ: लोगों से प्रत्यक्ष मिलने से होने वाले मानसिक स्वास्थ्य लाभ काफी समय बाद तक अपना असर दिखाते हैं, जो डिजिटल संवाद में नहीं मिलता। प्रभावी नहीं डिजिटल संवाद: टिओ के अनुसार, "परिवार या दोस्तों के साथ फोन कॉल या डिजिटल संवाद का अवसाद से बचाने में उतना असर नहीं है जितना प्रत्यक्ष मिलने-जुलने में है।" सामाजिक रूप से मिलने-जुलने के सभी तरीके एक समान असर नहीं छोड़ते हैं। जोखिम में दोगुनी वृद्धि: 50 और उससे अधिक उम्र के 11,000 से अधिक वयस्कों पर किए गए इस अध्ययन में यह सामने आया कि जो लोग लोगों से आमने-सामने नहीं मिलते थे, उनके दो साल बाद अवसादग्रस्त होने की संभावना दोगुनी हो गई थी। सुरक्षा की आवृत्ति: शोध में यह भी पता चला कि हफ्ते में कम से कम तीन बार परिवार और दोस्तों से प्रत्यक्ष मिलने वालों में दो साल बाद अवसाद का शिकार होने की संभावना न्यूनतम स्तर पर थी। जिन लोगों की प्रत्यक्ष मुलाकातें कम थीं, उनमें यह संभावना बढ़ जाती है। मनोवैज्ञानिक कारण: क्यूं प्रत्यक्ष मुलाकात है बेहतर? मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि प्रत्यक्ष संवाद, डिजिटल माध्यमों से कहीं अधिक भावनात्मक रूप से समृद्ध होता है। आमने-सामने की बातचीत में हम न केवल शब्दों को सुनते हैं, बल्कि शारीरिक भाषा (Body Language), चेहरे के हाव-भाव और आवाज़ के लहजे को भी महसूस करते हैं। ये गैर-मौखिक संकेत (Non-Verbal Cues) विश्वास, सहानुभूति और गहरे भावनात्मक जुड़ाव को बढ़ावा देते हैं, जो तनाव को कम करने और मूड को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं। डिजिटल माध्यमों में अक्सर ये महत्वपूर्ण भावनात्मक परतें गायब हो जाती हैं, जिससे संचार सतही, गलतफहमी वाला और अलगाव की भावना को जन्म देने वाला बन सकता है, जिसे 'डिजिटल अकेलापन' (Digital Loneliness) भी कहा जाता है। नवीनतम शोध का समर्थन हाल के अन्य शोध भी इस बात का समर्थन करते हैं कि सामाजिक अलगाव और अकेलापन डिप्रेशन, चिंता (Anxiety) और अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को बढ़ाते हैं। महामारी के दौरान किए गए अध्ययनों में भी पाया गया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा होने के बावजूद, लोगों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक प्रत्यक्ष सामाजिक संवाद ही रहा। डिप्रेशन से बचने का सीधा रास्ता निष्कर्ष स्पष्ट है: अगर आप अपने मानसिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखना चाहते हैं और डिप्रेशन के खतरे को कम करना चाहते हैं, तो स्क्रीन और इयरफ़ोन को छोड़कर, अपने प्रियजनों के साथ आमने-सामने समय बिताने को प्राथमिकता दें। एक गर्मजोशी भरी मुलाकात, एक कप चाय पर खुलकर की गई बातचीत, या दोस्तों के साथ कुछ पल बिताना—ये सरल, पुराने ज़माने के तरीके, किसी भी कॉल या ई-मेल से कहीं ज़्यादा शक्तिशाली 'अवसाद रोधी' सुरक्षा कवच (Anti-Depression Shield) हैं। तो अगली बार, कॉल या टेक्स्ट करने से पहले, दरवाज़े पर दस्तक देने के बारे में सोचें!  

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने जताया शोक, DGP पर कार्रवाई की उठी आवाज

हरियाणा  हरियाणा के सीनियर आईपीएस अफसर वाई पूरन कुमार के सुसाइड का मामला सुलझ नहीं रहा है। लगातार 6 दिन से आईपीएस के परिवार और सरकार के बीच गतिरोध बना हुआ है। आज यानी सोमवार को सातवां दिन है। परिवार की सहमति न मिलने की वजह से शव का पोस्टमॉर्टम नहीं हो पाया। वहीं उनके घर सांत्वना जताने के लिए नेताओं का तांता लगा हुआ है।  केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले आईपीएस अफसर वाई पूरन कुमार के घर आए हैं। इस दौरान केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने IPS Y पूरन कुमार के मामले में कहा कि पुरन कुमार हैदराबाद से थे और हरियाणा केडर के आईपीस थे उनके परिवार के साथ मुलाकात की है उनकी पत्नी IAS अधिकारी है। परिवार ने कहा है कि हमे हमेशा परेशान किया गया और गलत काम करने वाले दूसरे थे और आरोप IPS पर लगाया गया। वह बेहद अच्छे अधिकारी थे। इतना बड़ा अधिकारी आत्महत्या करता है तो इसका मतलब परेशान था। यहां के सीएम ने उनकी पत्नी से मुलाकात की है और कहा है कि जो आरोपी है उन पर कार्यवाही होगी। पार्टी के नेता मैने यहां भेजे डीजीपी पर सबसे बड़े आरोप है और एसपी पर आरोप है वही जिस तरह से पोस्टमार्टम नहीं हुआ है तो उसमे जल्द करवाई करने की कोशिश है, जिसमें की एसपी रोहतक को गिरफ्तार करने की जरूरत है वहीं डीजीपी पर भी कार्यवाही होनी चाहिए। मैं मोदी जी के मंत्रिमंडल के जिस तरह शामिल हु तो वहीं दलित नेता होने के जाते मै यहां पर आया हूं और हम दुख व्यक्त करते है वही महाराष्ट्र में भी इस घटना पर रोष जताया है। नायब सैनी से मैने समय मांगा है और उनसे मुलाकात करूंगा, जिसमें कि डीजीपी पर एक्शन होना चाहिए और उन्होंने कहा है कि फिर हम अंतिम संस्कार करेंगे। आठवले ने कहा कि इनके परिवार के लोग भी मिले है। इस घटना से पता चलता है कि इतने साल होने के बाद भी भेदभाव दिखाई देता है। आठवले ने कहा कि मैं मुलाकात करूंगा और कहूंगा कि जब तक मांग पूरी नहीं होगी, तब तक अंतिम संस्कार नहीं होगा। आठवले ने कहा कि IPS वह हरियाणा से थे तो मामला। यही चंडीगढ़ का है और राज्य सरकार का यह मामला है जिसमे की वह उनका ही मामला बनता है जिसमें कि कार्यवाही के आदेश देने चाहिए। इनके अलावा तेलंगाना के डिप्टी CM मल्लू भट्टी विक्रमार्का, कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा, हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष उदयभान और सतपाल ब्रह्मचारी दिवंगत आईपीएस वाई पूरण के घर पहुंचे। इसके अलावा दोपहर 12.20 बजे उद्योग मंत्री राव नरवीर अमनीत पी कुमार से मिलने पहुंचे और तकरीबन 40 मिनट रूके। अनुराग रस्तोगी 10.30 बजे पहुंचे और 12 बजे बाहर आए। इसके अलावा मुख्यमंत्री के राजनैतिक सचिव तरुण भंडारी भी एक बजे अमनीत पी कुमार के आवास पर पहुंचे। इस दौरान आज तेलंगाना के डिप्टी CM मल्लू भट्टी विक्रमार्का पूरन कुमार की पत्नी से शोक जताने के लिए उनके चंडीगढ़ स्थित घर पर पहुंच गए हैं। पूरन कुमार मूलरूप से आंध्र प्रदेश के रहने वाले थे। आंध्र प्रदेश से अलग होकर ही तेलंगाना राज्य बना है। इसके बाद तेलंगना के डिप्टी CM ने कहा कि DGP और SP को सस्पेंड कर तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। तेलंगाना सीएम रेड्डी ने भी परिवार से फोन पर बात की है। हम चुप बैठने वाले नहीं हैं। एक दलित अधिकारी के साथ ऐसा हो रहा है तो दूसरे दलित कैसे सेफ हो सकते हैं। वाई पूरन कुमार को DGP लंबे समय से परेशान कर रहे थे। इसके अलावा चौधरी अभय सिंह चौटाला ने आज दिवंगत आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार के असामयिक निधन के पश्चात उनके आवास पर जाकर शोक प्रकट किया। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करें एवं परिजनों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। बता दें रविवार को चंडीगढ़ पुलिस ने IPS वाई पूरन कुमार की IAS पत्नी अमनीत पी. कुमार को नोटिस भेजकर शव की पहचान की प्रक्रिया पूरी करने को कहा था। चंडीगढ़ प्रशासन पोस्टमॉर्टम PGI के डॉक्टरों से कराएगी। इस बोर्ड में बैलिस्टिक एक्सपर्ट और मजिस्ट्रेट भी शामिल होगा। हालांकि IAS अफसर अमनीत, उनके पंजाब के बठिंडा से MLA भाई अमित रतन कोटफत्ता पुलिस महानिदेशक (DGP) शत्रुजीत कपूर को हटाने पर अड़े हुए हैं। सरकार रोहतक के SP नरेंद्र बिजारनियां को हटाकर उन्हें मनाने की कोशिश कर चुकी है।  

सरल, सहज और आत्मीय है,’यादों का सिलसिला’ : डीजीपी मकवाना

जीवन लौटकर नहीं आता, इसलिए संस्मरण मधुर होते हैं : एन के त्रिपाठी भोपाल  गत दिवस ,पुलिस ऑफ़िसर्स मेस में , पूर्व डीजीपी नरेंद्र कुमार ( एन के ) त्रिपाठी,  की पुस्तक ‘यादों का सिलसिला’ का विमोचन करते हुए पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना ने कहा कि यादों का सिलसिला किताब सरल सहज और आत्मीय है। इसमें कई संस्मरण में संवेदनाएं भी समाहित हैं। न्याय और प्रक्रिया का द्वंद भी देखने को मिलता है। पुलिस अधिकारियों को इसे जरूर पढ़ना चाहिए।  कार्यक्रम की अध्यक्षता माखन लाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के कुलगुरु श्री विजय मनोहर तिवारी ने की एवं विशिष्ट अतिथि श्री मनोज श्रीवास्तव थे। इस अवसर पर अनेक पूर्व एवं वर्तमान पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम में चीफ इलेक्शन कमिश्नर एवं  वरिष्ठ चिंतक श्री मनोज श्रीवास्तव ने पुस्तक पर  टिप्प्णी करते हुए कहा कि यादों का सिलसिला पुस्तक यादों के प्रभाव को कम नहीं करती, इसमें जीवन भर की यादें ऑटो बायोग्राफी के रूप में हैं। इसमें प्रदेश का बदलता परिदृश्य भी समाहित किया गया है। माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के कुलगुरु श्री विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि यादों का सिलसिला पुस्तक बड़े रोचक विवरण से भरी हुई है। इतनी अच्छी प्रस्तुति करना हर किसी के बस की बात नहीं। त्रिपाठी जी की तरह सभी अधिकारियों को अपने अनुभव को पुस्तक के रूप में संग्रहित करना चाहिए जो आने वाले लोगों को नसीहत बने।  मीडियावाला के प्रधान संपादक सुरेश तिवारी ने इस अवसर पर यादों का सिलसिला पुस्तक में समाहित साहित्य के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन रामजी श्रीवास्तव ,आभार प्रदर्शन महेंद्र जोशी एवं स्वागत अजय श्रीवास्तव नीलू ने किया l