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खरीफ फसल खरीद अपडेट: हरियाणा में अब तक 4214.85 करोड़ का भुगतान, किसानों की राहत

चंडीगढ़ हरियाणा में खरीफ खरीद सीजन 2025-26 के दौरान किसानों के खातों में अब तक 4214.85 करोड़ की अदायगी उनके बैंक खातों में सीधे स्थानांतरित की जा चुकी है। इस तरह सरकार ने किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का भुगतान सुनिश्चित किया है। हरियाणा के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा किसानों के हितों को देखते हुए जिला की सभी अनाज मंडियों में धान पर की खरीद का कार्य सुचारु रूप से जारी है। उन्होंने कहा कि जिले में हैफेड, वेयर हाऊस और फूड एंड सप्लाई एजेंसियों द्वारा धान की खरीद की जा रही है। 'मेरी फसल मेरा ब्यौरा' पोर्टल पर पंजीकृत किसानों से धान की खरीद की जा रही है। राज्य में अब तक 'मेरी फसल मेरा ब्यौरा' पोर्टल पर पंजीकृत 1,67,404 किसानों से धान की खरीद की गई है। अब तक राज्य भर की मंडियों में कुल 30, 19,844 लाख मीट्रिक टन धान की आवक हुई है। उन्होंने बताया कि विभिन्न जिलों की मंडियों से अब तक 20,49,941 लाख मीट्रिक टन धान का उठान हो चुका है। अब तक मंडियों से 27,10,580 लाख की खरीद की जा चुकी है। मीट्रिक टन धान उल्लेखनीय है कि राज्य में धान की खरीद भारत सरकार द्वारा धान की खरीद न्यूनतम समर्थन में करती हुए फसल का भुगतान किसानों के बैंक खातों में सीधे तौर पर स्थानांतरित किया जाता है। सरकार द्वारा किसान भाइयों से बार-बार अपील की जा रही है कि वे अपनी फसल की मंडी में अच्छी तरह सुखाकर भारत सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों (जैसे कि नमी 17 प्रतिशत) की सीमा अनुसार लेकर आएं।

नए मोड़ पर आंदोलन: कार्रवाई के बाद न्याय संघर्ष मोर्चा ने जताई संतुष्टि

हरियाणा  हरियाणा के वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या के मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। मोर्चा ने कहा कि हरियाणा सरकार की कार्रवाई से न्याय संघर्ष मोर्चा संतुष्ट हैं और अब चंडीगढ़ प्रशासन पर दबाव बनाएगा। हरियाणा सरकार ने अपना काम कर दिया है। हरियाणा सरकार ने सकारात्मक काम किया है। डीजीपी और एसपी को हटाने की मांग थी। वह पूरी हो गई है। अब चंडीगढ़ पुलिस कार्रवाई करें। इससे पहले वाई पूरन कुमार न्याय संघर्ष मोर्चा ने बुधवार को दोपहर तीन बजे मटका चौक से पंजाब राजभवन तक कूच करने का एलान किया है। संघर्ष मोर्चा के कानूनी सेल के उपाध्यक्ष एडवोकेट रवि गौतम ने बताया कि यह निर्णय सोमवार को दिए गए अल्टीमेटम के 48 घंटे पूरे होने के बाद लिया गया है। रविवार को सेक्टर-20 के गुरु रविदास मंदिर में महापंचायत आयोजित की गई थी, जिसमें प्रशासन को कार्रवाई के लिए अल्टीमेटम दिया गया था। हालांकि, अब तक प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

भारत को मिली बड़ी जिम्मेदारी: अहमदाबाद बनेगा कॉमनवेल्थ गेम्स 2020 का मेजबान शहर

नई दिल्ली एग्जीक्यूटिव बोर्ड ऑफ कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स ने भारत के अहमदाबाद को 2030 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी देने की सिफारिश की है। मेजबानी का यह प्रस्ताव अब फुल कॉमनवेल्थ गेम्स मेंबरशिप के सामने रखा जाएगा। अगर ग्लासगो में फैसला भारत के पक्ष में आता है, भारत दूसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा। दरअसल, 26 नवंबर 2025 को ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स महासभा आयोजित है। इसी महासभा में मेजबानी का अंतिम फैसला लिया जाएगा। अगर ऐसा होता है तो भारत दूसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा। भारत ने इससे पहले 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की थी। वहीं, गृहमंत्री अमित शाह ने एक्स हैंडल पर लिखकर देशवासियों को बधाई दी है।       कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स की एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स के कार्यकारी बोर्ड ने आज पुष्टि की है कि वह 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारत के अहमदाबाद को प्रस्तावित मेजबानी शहर के रूप में अनुशंसित करेगा।     इसमें आगे कहा गया है, अहमदाबाद (जिसे भारतीय राज्य गुजरात में अहमदाबाद के नाम से भी जाना जाता है) को अब पूर्ण राष्ट्रमंडल खेल सदस्यता के लिए प्रस्तावित किया जाएगा, जिसका अंतिम निर्णय 26 नवंबर को ग्लासगो में राष्ट्रमंडल खेल महासभा में लिया जाएगा। नियमों का किया गया पालन राष्ट्रमंडल खेल मूल्यांकन समिति ने एक विस्तृत प्रक्रिया का पालन करने के बाद अहमदाबाद की सिफारिश की है। इस समिति ने तकनीकी पहलूओं, एथलीट के अनुभव, बुनियादी ढांचे, शासन और राष्ट्रमंडल खेलों के मूल्यों के आधार पर यह फैसला लिया है।  नाइजीरिया को छोड़ा पीछे गौरतलब हो कि आयोजकों की रेस में भारत ने नाइजीरिया को पीछे छोड़ा है। बता दें कि साल 1930 में कनाडा के हैमिल्टन शहर में राष्ट्रमंडल खेलों की शुरुआत हुई थी। ऐसे में 2030 में होने वाला राष्ट्रमंडल खेल एक ऐतिहासिक पल होगा। भारत का राष्ट्रमंडल खेलों का इतिहास गौरवपूर्ण रहा है। बर्मिंघम 2022 में मेडल टैली में भारत चौथे स्थान पर रहा था।

सुल्तानपुर लोधी में सुरक्षा अलर्ट, पुलिस तैनात, हालात काबू में

चंडीगढ़  सुल्तानपुर लोधी में स्थित निहंगों के गुरुद्वारा अकाल बुंगा साहिब को लेकर चल रहे कब्जे के विवाद पर अदालत का अहम फैसला सामने आया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने बुढ़ा दल के प्रमुख बाबा बलबीर सिंह 96 करोड़ी के गुट को गुरुद्वारे का कब्जा सौंप दिया है। इस फैसले के बाद पूरा शहर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। शहर के हर कोने पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे। हालांकि, राहत की बात रही कि पूरा मामला शांतिपूर्वक निपटा लिया गया और कोई झड़प नहीं हुई। गौरतलब है कि इस गुरुद्वारे को लेकर निहंग सिंहों के दो समूहों में पिछले 3-4 सालों से विवाद चल रहा था। पहले इस विवाद ने फायरिंग का रूप ले लिया था, जिसमें एक होमगार्ड जवान की मौत हो गई थी और चार पुलिस कर्मी व तीन निहंग सिंह घायल हुए थे। बुढ़ा दल के सदस्य सुखदेव सिंह ने बताया कि इस स्थान की सेवा पहले से जथेदार बाबा बलबीर सिंह 96 करोड़ी के पास थी। करीब डेढ़-दो साल मुकदमा चलने के बाद अदालत ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया, जिसके बाद प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर उन्हें कब्जा सौंप दिया। तहसीलदार परमिंदर सिंह ने बताया कि अदालत ने धारा 145 को रद्द करते हुए आदेश दिया कि गुरुद्वारा का नियंत्रण बाबा बलबीर सिंह के गुट को दिया जाए। प्रशासन ने यह कार्य शांतिपूर्वक और कानूनी प्रक्रिया के तहत पूरा किया। 

छत्तीसगढ़ में माओवादी शक्ति कमजोर, 100+ आतंकियों ने आत्मसमर्पण किया

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के माओवादी हिंसा प्रभावित बस्तर अंचल में माओवाद विरोधी अभियानों को अभूतपूर्व सफलता मिली है। राज्य सरकार की प्रभावी 'माओवादी समर्पण नीति' की बदौलत कांकेर और सुकमा जिलों में एक साथ 100 से अधिक माओवादियों ने हथियार डाल दिए हैं। इस सामूहिक आत्मसमर्पण को बस्तर में शांति की वापसी की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है। कांकेर में शीर्ष कैडरों का समर्पण कांकेर जिले के पखांजुर थाना क्षेत्र में सक्रिय 60 से अधिक माओवादियों ने पुलिस अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण करने वालों में राजू सलाम, कमांडर प्रसाद और मीना सहित कई बड़े माओवादी भी शामिल हैं। अधिकारियों ने इस घटना को सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटने का परिणाम बताया। सभी समर्पित माओवादियों को सरकारी नीति के तहत नकद प्रोत्साहन, आवास और व्यावसायिक प्रशिक्षण पैकेज प्रदान किए जाएंगे।   सुकमा- 27 माओवादियों का आत्मसमर्पण, माओवादी मोर्चे पर बड़ी कामयाबी सुकमा जिले में माओवादी विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है। कुल 27 सक्रिय माओवादियों ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें दो हार्डकोर माओवादी शामिल हैं, जो पीएलजीए बटालियन-01 में सक्रिय थे। आत्मसमर्पित माओवादियों पर कुल 50 लाख रुपये का इनाम था, जिसमें एक पर 10 लाख, तीन पर 8-8 लाख, एक पर 3 लाख, दो पर 2-2 लाख और नौ पर 1-1 लाख रुपये का इनाम घोषित था। समर्पण करने वालों में 10 महिलाएं और 17 पुरुष शामिल हैं। इनमें एक सीवायसीएम, 15 पार्टी सदस्य और 11 अग्र संगठन से जुड़े सदस्य हैं। यह आत्मसमर्पण सुकमा पुलिस मुख्यालय में बुधवार को आयोजित एक समारोह में हुआ। सुकमा एसपी सुनील शर्मा ने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन की “आत्मसमर्पण पुनर्वास नीति” और “नियद नेल्ला नार योजना” के साथ-साथ अंदरूनी इलाकों में बढ़ते सुरक्षा कैंपों के दबाव ने माओवादियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया। इस सफलता में जिला बल, डीआरजी, विआशा, एसटीएफ, सीआरपीएफ की 02, 74, 131, 151, 216, 217 वाहिनी और कोबरा 203 बटालियन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आत्मसमर्पित माओवादियों ने संगठन में जबरन भर्ती, हिंसा और संसाधनों की कमी को समर्पण का कारण बताया। शांति प्रक्रिया को मिली गति यह सामूहिक आत्मसमर्पण इस बात का प्रमाण है कि माओवादियों की विचारधारा खोखली साबित हो रही है। अब तक 500 से अधिक माओवादियों का पुनर्वास किया जा चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बड़े समर्पणों से बस्तर में विकास कार्य और शांति प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी। यह न केवल सुरक्षा बलों की बड़ी जीत है, बल्कि उन स्थानीय समुदायों की भी जीत है, जो अब हिंसा मुक्त भविष्य की ओर देख रहे हैं। बस्तर अब 'बंदूक' नहीं, बल्कि 'विकास' की बात कर रहा है।

दिल्ली के LG का बड़ा फैसला: जनप्रतिनिधियों पर पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई का रास्ता साफ

नई दिल्ली सीपीसीआर अधिनियम, 2005 और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 के तहत सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालतें अब पूर्व विधायकों और पूर्व सांसदों के खिलाफ भी मामलों की सुनवाई कर सकेंगी। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार द्वारा पूर्व विधायकों और पूर्व सांसदों को इसके दायरे में शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इससे राउज एवेन्यू स्थित इन विशेष अदालतों का दायरा बढ़ गया है।   इससे पहले, जुलाई 2023 में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग (सीपीसीआर) अधिनियम, 2005 और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 के तहत सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों से निपटने के लिए राजधानी के राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर में तीन नामित/विशेष अदालतों की स्थापना को मंजूरी दी थी। गौरतलब है कि यह अधिसूचना दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद 2020 में जारी की गई थी। हालाँकि, केजरीवाल सरकार ने बिना किसी कारण के इस अधिसूचना को तीन साल से ज़्यादा समय तक लंबित रखा। सीपीसीआर अधिनियम की धारा 25 और पॉक्सो अधिनियम की धारा 28 के तहत इन नामित/विशेष अदालतों के गठन के लिए उपराज्यपाल की मंज़ूरी हेतु प्रस्ताव दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रस्तुत किया गया था और विधि विभाग द्वारा इसकी जाँच की गई थी। ये तीन अदालतें बच्चों के विरुद्ध अपराधों, बाल अधिकारों के उल्लंघन और पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए पहले से अधिसूचित आठ अदालतों के अतिरिक्त हैं। पॉक्सो अधिनियम की धारा 28(1) में कहा गया है कि त्वरित सुनवाई के लिए, राज्य सरकार, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से, आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अधिनियम के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए प्रत्येक ज़िले के लिए एक सत्र न्यायालय को विशेष न्यायालय के रूप में नामित करेगी। सीपीसीआर अधिनियम की धारा 25 में कहा गया है कि बच्चों के खिलाफ अपराध या बाल अधिकारों के उल्लंघन के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए, राज्य सरकार, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से, अधिसूचना द्वारा, राज्य में कम से कम एक न्यायालय या प्रत्येक जिले के लिए, उक्त अपराधों की सुनवाई के लिए एक सत्र न्यायालय को बाल न्यायालय के रूप में निर्दिष्ट कर सकती है। बशर्ते कि इस धारा की कोई भी बात लागू नहीं होगी यदि – (क) सत्र न्यायालय को पहले से ही एक विशेष न्यायालय के रूप में नामित किया गया है या (ख) किसी अन्य कानून के तहत ऐसे अपराधों के लिए पहले से ही एक विशेष न्यायालय का गठन किया गया है। इस उद्देश्य के लिए विशेष रूप से नामित न्यायालय 1. विशेष न्यायाधीश (पीसी अधिनियम) (सीबीआई) का न्यायालय – 09, राउज एवेन्यू, न्यायालय परिसर 2. विशेष न्यायाधीश (पीसी अधिनियम) (सीबीआई) का न्यायालय – 23, राउज एवेन्यू, न्यायालय परिसर 3. विशेष न्यायाधीश (पीसी अधिनियम) (सीबीआई) का न्यायालय – 24, राउज एवेन्यू, न्यायालय परिसर

US का बड़ा कदम: क्यों चीन की एयरलाइंस पर लग सकता है उड़ान बैन?

वाशिंगटन  चीन और अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद जारी है। टैरिफ युद्ध के बीच एक नया मुद्दा सामने आ गया है। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक प्रस्ताव रखा, जिसमें चीन की एयरलाइंस कंपनियों को रूस के ऊपर से होकर अमेरिका आने-जाने वाली फ्लाइट्स पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई। इस पर चीन की प्रमुख सरकारी एयरलाइंस ने कड़ी आपत्ति जताई है। अमेरिका का कहना है कि ऐसी उड़ानें चीनी एयरलाइंस को अमेरिकी कंपनियों से अधिक लाभ देती हैं, क्योंकि अमेरिकी फ्लाइट्स रूसी एयरस्पेस का उपयोग नहीं कर सकतीं। अमेरिका ने स्पष्ट किया कि रूस के हवाई क्षेत्र से गुजरने पर चीनी विमानों को समय के साथ-साथ ईंधन की भी बचत होती हैं। बता दें कि 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद, पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के जवाब में मॉस्को ने अमेरिकी और अधिकांश यूरोपीय एयरलाइंस के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। लेकिन चीनी एयरलाइंस पर कोई ऐसी पाबंदी नहीं लगी। दूसरी ओर एयर चाइना, चाइना ईस्टर्न और चाइना सदर्न समेत छह प्रमुख चीनी एयरलाइंस ने पिछले हफ्ते इस अमेरिकी प्रस्ताव के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। चाइना ईस्टर्न ने इस सप्ताह अमेरिकी परिवहन विभाग को सौंपी रिपोर्ट में कहा कि यह प्रस्ताव सार्वजनिक हित को नुकसान पहुंचाएगा और अमेरिका-चीन के यात्रियों को परेशानी देगा। इससे यात्रा समय बढ़ेगा, जिससे खर्च और टिकट की कीमतें महंगी होंगी, जो सभी यात्रियों पर बोझ बनेगा। चाइना सदर्न ने चेतावनी दी कि रूसी एयरस्पेस पर रोक से हजारों यात्री प्रभावित होंगे। एयर चाइना का अनुमान है कि अगर यह प्रतिबंध थैंक्सगिविंग और क्रिसमस के दौरान लागू हुआ तो कम से कम 4400 यात्री प्रभावित होंगे। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने भी इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की और कहा कि यह कदम वैश्विक यात्रियों के लिए 'सजा' जैसा साबित होगा।  

करीब 150 से अधिक कम्पनियों ने यूपी में बड़े निवेश के लिए जताई इच्छा

– योगी सरकार की पहल से यूपी बन रहा ग्लोबल इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन – 15 लाख करोड़ निवेश के बाद सरकार का फोकस अब विदेशी कंपनियों पर – MoU साइनिंग की तैयारी में इन्वेस्ट यूपी, दक्षिण कोरिया की शीर्ष कंपनियों से भी जुड़ रहा उत्तर प्रदेश – जर्मनी, फ्रांस और रूस में वन-टू-वन मीटिंग्स जारी, इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में ताइवान का निवेश बढ़ने की संभावना – गल्फ और सिंगापुर की कंपनियां दिखा रहीं गहरी दिलचस्पी, यूपी की अर्थव्यवस्था को मिलेगी वैश्विक रफ्तार लखनऊ उत्तर प्रदेश को उद्योग प्रदेश और 2030 तक वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार तेज़ी से काम कर रही है। प्रदेश में अब तक 15 लाख करोड़ से अधिक का निवेश धरातल पर उतारा जा चुका है, और अब सरकार बड़े पैमाने पर विदेशी निवेशकों को भी प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए आकर्षित कर रही है। इन्वेस्ट यूपी की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दी गई रिपोर्ट के अनुसार, जापान, सिंगापुर, कोरिया, जर्मनी, फ्रांस, रूस, ताइवान और खाड़ी देशों की करीब 150 से अधिक कंपनियों ने उत्तर प्रदेश में बड़े निवेश की इच्छा जताई है। सरकार की पहल पर उद्यमियों के साथ ‘वन-टू-वन’ बैठकें जारी हैं और कई MoU (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर की तैयारी चल रही है। फोकस कंट्री डेस्क और प्रगति जापान : विश्व एक्सपो, ओसाका के दौरान इन्वेस्ट यूपी की टीम ने कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं। भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास के साथ नियमित संपर्क में रहते हुए, JETRO के साथ समय-समय पर वार्ताएं हो रही हैं। अब तक जापान की 30 से अधिक कंपनियों के साथ वन-टू-वन बैठकें की जा चुकी हैं और कुछ निवेश परियोजनाएं ग्राउंड ब्रेकिंग के चरण में हैं। दक्षिण कोरिया : यहां इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स को साझेदार के रूप में जोड़ा गया है और जल्द ही MoU पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। कोरिया में स्थापित शीर्ष 25 कंपनियों के साथ संपर्क स्थापित किया गया है, जबकि भारतीय मिशनों और दूतावासों के साथ नीतिगत संवाद और प्रचार सामग्री का आदान-प्रदान जारी है। जर्मनी, फ्रांस और रूस : इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स से संपर्क स्थापित किया गया है। भारत और रूस में बीटूजी (बिजनेस टू गवर्नमेंट) बैठकों और गोलमेज वार्ताओं के माध्यम से निवेश पर चर्चा हुई है। साथ ही, जर्मनी और फ्रांस में भारतीय मिशनों के साथ वर्चुअल मीटिंग्स भी आयोजित की गई हैं। 13 से अधिक यूरोपीय कंपनियों ने यूपी में निवेश में रुचि दिखाई है। ताइवान : ताइवान की कई प्रमुख कंपनियों के साथ इन्वेस्ट यूपी ने बैठकें की हैं। सितंबर 2025 में बैंगलुरु में आयोजित इलेक्ट्रोनिका इंडिया एक्सपो के दौरान 40 से अधिक ताइवानी कंपनियों के साथ समर्पित बैठकें हुईं। इससे इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण में निवेश की दिशा में बड़ी संभावनाएं खुली हैं। सिंगापुर और गल्फ देश : सिंगापुर और खाड़ी देशों (UAE, सऊदी अरब, क़तर, कुवैत, ओमान, बहरीन) में भारतीय राजनयिक मिशनों के साथ वर्चुअल सम्मेलन आयोजित किए गए। गल्फ की 20 से अधिक और सिंगापुर की 25 से अधिक कंपनियों के साथ संपर्क स्थापित किया गया है। कई कंपनियां आईटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश की इच्छा जता चुकी हैं। निवेश से मिलेगा रोजगार और अर्थव्यवस्था को मजबूती  योगी सरकार की यह पहल न केवल प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाएगी, बल्कि यूपी को राष्ट्रीय औद्योगिक हब बनाने की दिशा में भी निर्णायक साबित होगी। विदेशी निवेश से तकनीकी सहयोग और उत्पादन क्षमता में भी इजाफा होगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 01 नवंबर को पांच कार्यक्रमों में होंगे शामिल

अपर मुख्य सचिव श्री पिंगुआ ने तैयारियों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए रायपुर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के छत्तीसगढ़ प्रवास को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है। 01 नवंबर को प्रधानमंत्री श्री मोदी नया रायपुर अटल नगर में राज्योत्सव स्थल में छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। इसके अलावा वे शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय, छत्तीसगढ़ विधानसभा के नवनिर्मित भवन और प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के ट्रेनिंग सेंटर एकेडमी फार ए पीसफुल वर्ल्ड “शांति शिखर” का शुभारंभ और सत्य सांई हॉस्पिटल में हृदय का ऑपरेशन कराने वाले बच्चों से चर्चा करेंगे।  अपर मुख्य सचिव श्री मनोज पिंगुआ ने आज नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव स्थल में प्रधानमंत्री के प्रवास को लेकर तैयारियों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। श्री पिंगुआ ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी 31 अक्टूबर की रात्रि राजधानी रायपुर पहुंचेंगे और अगले दिन कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इस दौरान नए विधानसभा भवन के लोकार्पण और राज्योत्सव के शुभारंभ अवसर पर सभाएं होंगी। इन आयोजनों के लिए सभी तैयारियां शुरू कर दी जाए। बैठक में कलेक्टर श्री गौरव सिंह ने प्रधानमंत्री के प्रवास को लेकर की जा रही तैयारियों की विस्तार से जानकारी दी। बैठक में लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, परिवहन विभाग के सचिव श्री एस. प्रकाश, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के सचिव डॉ. एस. भारती दासन, कमिश्नर रायपुर श्री महादेव कावरे, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रायपुर डॉ. लाल उमेंद सिंह सहित जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।   अपर मुख्य सचिव श्री पिंगुआ ने कहा कि प्रधानमंत्री के प्रवास के मद्देनजर ट्रैफिक प्लान और पार्किंग की व्यवस्था कर ली जाए। इसी प्रकार राज्योत्सव मेला स्थल और अन्य कार्यक्रमों के स्थल पर पार्किंग, पेयजल, शौचालय की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि नया रायपुर के चौक-चौराहों को व्यवस्थित और सौंदर्यीकरण कर ली जाए। राज्योत्सव मेला स्थल में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए को सेक्टरों में बांटकर कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाए। कार्यक्रम के दौरान सतत् रूप से बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए तथा वैकल्पिक व्यवस्था भी रखी जाए। इसी प्रकार साउंड सिस्टम उच्च गुणवत्तायुक्त हो। साथ ही दूर संचार विभाग के अधिकारियों को संचार व्यवस्था दुरूस्त करने के निर्देश दिए।  राज्योत्सव मेला स्थल पर मुख्य मंच के सामने तीन विशाल डोम बनाएं जा रहे हैं। जिनमें 60 एलईडी स्क्रीनिंग लगाए जाएंगे। मेला स्थल पर लोगों बैठने के लिए कुर्सियों की व्यवस्था की जा रही है। लोगों के प्रवेश के लिए दो द्वार होंगे। एक द्वार विभागीय प्रदर्शनी के लिए होगा। विभागीय प्रदर्शनी में राज्य शासन के विभिन्न विभागों के साथ ही सार्वजनिक उपक्रमों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। मुख्य मंच के नजदीक ही डिजिटल प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। मेला स्थल पर प्रधानमंत्री आवास का मॉडल भी बनाया जाएगा। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राज्योत्सव मेला स्थल के दोनों तरफ 20-20 हजार वाहनों के पार्किंग की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा अन्य शहरों से रायपुर पहुंचने वाले मार्गों पर भी पार्किंग, पेयजल आदि की व्यवस्था की जा रही है। राज्योत्सव मेला स्थल पर 300 शौचालय बनाए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 20 बैड का हॉस्पिटल तथा आईसीयू बनाया जा रहा है। इसके अलावा 25 एम्बुलेंस और पर्याप्त संख्या में फायर ब्रिगेड वाहन की व्यवस्था की जा रही है।

आज से लागू! CJI गवई ने ग्रीन पटाखों पर रिपोर्ट के साथ दो महत्वपूर्ण काम दिए

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार के संयुक्त अनुरोध को स्वीकार करते दिल्ली और NCR में ग्रीन पटाखे फोड़ने की इजाजत दे दी है। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने इस इजाजत के साथ ही कुछ शर्तें भी रखी है। पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि हरित पटाखों का उपयोग दिवाली और उससे एक दिन पहले कुछ घंटों तक ही किया जा सकेगा। कोर्ट ने 18 से 21 अक्टूबर तक हरित पटाखों की बिक्री की अनुमति दी है। दिवाली से पहले यह अहम छूट देते हुए CJI गवई ने कहा, ‘‘हमें एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा, पर्यावरण के साथ समझौता न करते हुए इसे संयमित करना होगा।’’ जस्टिस गवई ने आदेश पढ़ते हुए कहा, ‘‘18 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक हरित पटाखों की बिक्री की अनुमति होगी। पुलिस प्राधिकरण इस बात पर नजर रखने के लिए गश्ती टीमों का गठन करेगा कि केवल क्यूआर कोड वाले पटाखे ही बेचे जाएं। नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के लिए उल्लंघन नोटिस संलग्न किया जाएगा। पटाखों का उपयोग दिवाली से एक दिन पहले और दिवाली के दिन सुबह छह बजे से सुबह सात बजे तक और रात आठ बजे से रात 10 बजे तक सीमित रहेगा।’’ पटाखा तस्करी से पर्यावरण को हुआ बड़ा नुकसान पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि ई-कॉमर्स मंचों के माध्यम से पटाखों की बिक्री की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही पीठ ने कहा कि अतीत में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के कारण उच्च उत्सर्जन वाले पटाखों की तस्करी हुई और इससे पर्यावरण को और भी अधिक नुकसान हुआ। इसके साथ ही पीठ ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और एनसीआर के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) को दिवाली के दौरान प्रदूषण स्तर की निगरानी करने और उसके समक्ष रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। 18 अक्टूबर से NCR में AQI की निगरानी CJI गवई ने आदेश में कहा कि CPCB और राज्य PCB 18 अक्टूबर से NCR में AQI की निगरानी करेंगे और इस अदालत को रिपोर्ट दाखिल करेंगे। कोर्ट ने कहा कि वायु गुणवत्ता के साथ-साथ पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए उसका नमूना भी लिया जाएगा। CJI गवई ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को इस काम पर आज से ही लगा दिया और कहा कि 14 तारीख के आंकड़ों के साथ ही इस पर काम शुरू कर दीजिए और दिवाली तक के डेटा अदालत में पेश कीजिए। हालांकि राज्यों को 18 अक्टूबर से AQI की निगरानी और उसकी रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।