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एक्ट्रेस प्रियंका चाहर चौधरी की नई नागिन भूमिका, 2016 की यादें ताजा

मुंबई  अभिनेत्री प्रियंका चाहर चौधरी टेलीविजन शो 'नागिन' के आगामी सीजन 7 में मुख्य भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। रियलिटी शो 'बिग बॉस 19' के सीजन फिनाले के दौरान सलमान खान के सामने उन्हें शो की मुख्य भूमिका के रूप में घोषित किया गया था। यह वही मंच है जिसने प्रियंका को सीजन 16 में शीर्ष तीन फाइनलिस्ट में से एक चुनकर राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि दिलाई थी। यह पल पुरानी यादों और जादू से भरा था, उस शो में वापसी जिसने उन्हें घर-घर में मशहूर बना दिया था, अब उन्हें भारतीय टेलीविजन की सबसे प्रतिष्ठित भूमिकाओं में से एक के लिए चुना गया है। प्रियंका चाहर चौधरी ने कहा कि मुझे आज भी 'बिग बॉस 16' का वह पल याद है, जब एकता मैम ने कहा था कि उन्हें अपनी अगली 'नागिन' मिल गई है और उनका यह वादा निभाना और मुझे इस विरासत के लिए चुनना वाकई एक सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि मेरा हमेशा से मानना ​​रहा है कि कुछ भूमिकाएं एक अभिनेता से एक चरित्र से अधिक होने की मांग करती हैं। वे आपकी ताकत, आपकी सीमा और आपकी भावना को चुनौती देती हैं और यह मेरे लिए बिल्कुल वैसा ही है। नागिन ब्रह्मांड का प्रभार लेना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है और मैं इसे बनाए रखने के लिए अपनी शक्ति में सब कुछ करूंगी। सलमान सर और लाखों दर्शकों के सामने नागिन के रूप में प्रकट होना भाग्य की योजना से कम नहीं लगता। मैं निर्माताओं की बहुत आभारी हूं। दर्शकों को लुभाते हुए दस साल पूरे करने के बाद, नागिन भारतीय टेलीविजन की सर्वश्रेष्ठ फैंटेसी फ्रैंचाइजी के रूप में अपनी बादशाहत बरकरार रखे हुए है। 2015 में अपनी शुरुआत के बाद से इस कल्ट शो ने मौनी रॉय और अदा खान से लेकर तेजस्वी प्रकाश तक, टेलीविजन की प्रमुख अभिनेत्रियों को अपनी पहचान दिलाई है। अब जैसे-जैसे यह विरासत आगे बढ़ रही है, प्रियंका नई नागिन रानी के रूप में सिंहासन पर आसीन हो रही हैं और नागिन जगत को उसके अब तक के सबसे रोमांचक अध्याय में ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। 'नागिन 7' का प्रीमियर जल्द ही कलर्स और जियो हॉटस्टार पर होने वाला है।

रात की ठिठुरन के साथ कड़ाके की ठंड, मध्य प्रदेश में मौसम में फिर बदलाव

मध्य प्रदेश में बारिश के बाद ठंड लौट आई, अगले 48 घंटे में मौसम फिर बदलेगा रात की ठिठुरन के साथ कड़ाके की ठंड, मध्य प्रदेश में मौसम में फिर बदलाव बारिश के बाद ठंड का असर, अगले दो दिन में तापमान में आएगा फेरबदल भोपाल . मध्य प्रदेश में बारिश का दौर खत्म होने के बाद अब एक बार फिर ठंड का असर दिखेगा. ऐसे में दिन के समय अधिकतम तापमान में हल्का उछाल देखा जाएगा. हालांकि तापमान में 3 से 5 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है. खास तौर पर मैदानी इलाकों में तापमान तेजी से गिरने की संभावना है. मौसम विभाग का कहना है कि अगले 48 घंटे के बाद ठंड का दौर मैं एक बार फिर से शुरू हो सकता है. रविवार को राजधानी भोपाल सहित कई छोटे बड़े शहरों की अधिकतम तापमान में उछाल देखा गया. सबसे अधिक तापमान नर्मदा पुरम जिले में 33.2 डिग्री रिकॉर्ड हुआ. वहीं न्यूनतम तापमान की बात करें तो खरगोन, खंडवा, राजगढ़ और शिवपुरी जैसे जिलों का तापमान सबसे कम रिकॉर्ड किया जा रहा है. धीरे-धीरे न्यूनतम तापमान में और गिरावट देखने को मिलेगी. मौसम वैज्ञानिक दिव्या सुरेंद्रन के अनुसार, वर्तमान समय में लो प्रेशर सिस्टम अरब सागर की ओर बढ़ रहा है, जिससे प्रदेश में इसका असर खत्म हो गया है. हालांकि एक अन्य को प्रेशर सिस्टम बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हो रहा है. इसके अलावा एक आर्डर वेस्टर्न डिस्टरबेंस 4 नवंबर से हिमालय संभाग में चकरी होने की संभावना है. 48 घंटे बाद मौसम साफ होने के साथ ही न्यूनतम तापमान में गिरावट देखी जाएगी. इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने रविवार के लिए प्रदेश के अलग-अलग संभागों के 19 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है. इसमें नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, उज्जैन, इंदौर, देवास, शाजापुर, सीहोर, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल धार, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर और बैतूल जैसे जिलों में हल्की बारिश का दौर देखा जा सकता है. तापमान का ताजा हाल अधिकतम तापमान: नर्मदापुरम – 33.2°C (सबसे ज्यादा), खजुराहो (छतरपुर) – 32°C, दतिया – 31.4°C, भोपाल – 31.1°C, नौगांव (छतरपुर) – 31°C न्यूनतम तापमान: खरगोन – 17°C (सबसे कम), रीवा – 17.1°C, राजगढ़/खंडवा – 17.4°C, अमरकंटक (अनूपपुर) – 17.5°C, नौगांव (छतरपुर) – 17.8°C कैसा रहा बड़े शहरों का पारा भोपाल – 31.1°C ग्वालियर – 31°C इंदौर – 30.1°C उज्जैन – 30°C जबलपुर – 29.8°C  

मैन्युफैक्चरिंग का नया केंद्र: इंदौर को ग्लोबल हब बनाने की तैयारी तेज

इंदौर होगा 'ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब', केंद्र सरकार ने योजना पर किया काम शुरू मैन्युफैक्चरिंग का नया केंद्र: इंदौर को ग्लोबल हब बनाने की तैयारी तेज इंदौर में उद्योग क्रांति: केंद्र सरकार का मेगा प्लान लागू होने लगा इंदौर  भारत सरकार ने देश के लॉजिस्टिक बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर का बनाने के लिए अपने महत्वाकांक्षी 'स्माइल' प्रोग्राम (SMILE – Strengthening Multimodal and Integrated Logistic Ecosystem) की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम के तहत पहले चरण में देश के 8 शहरों में इंटीग्रेटेड स्टेट और सिटी लॉजिस्टिक प्लान बनाए जाने हैं, जिसमें मध्यप्रदेश से इंदौर का चयन किया गया है। यह योजना एशियाई डेवलपमेंट बैंक (ADB) के साथ मिलकर पूरी की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना, लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी लाना और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को अधिक लचीला और मजबूत बनाना है। क्या है यह योजना और कैसे काम करेगी? इस इंटीग्रेटेड प्लान के तहत सबसे पहले इंदौर में मौजूदा लॉजिस्टिक संसाधनों की पहचान की जाएगी। इसके बाद, विशेषज्ञों द्वारा इन संसाधनों में मौजूद कमियों (Gaps) का विश्लेषण किया जाएगा और उन्हें दूर करने के लिए बेहतर सुविधाओं का खाका तैयार होगा। यह पहल राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (NLP) और पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का समर्थन करती है, जिससे मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग के मानकीकरण को बढ़ावा मिलेगा। ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से मिलेगी राहत इस योजना का एक बड़ा लाभ यह भी है कि यह सिर्फ माल परिवहन तक सीमित नहीं है। इसके तहत इंदौर के ट्रैफिक की समस्या का समाधान भी खोजा जाएगा। शहरों को किस तरह डी-कंजेस्ट (भीड़-भाड़ मुक्त) किया जा सकता है, इसे लेकर बेहतर दिशा-निर्देश मिलेंगे। साथ ही, इंदौर में प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और अन्य स्वच्छ ईंधन विकल्पों को अपनाने पर भी जोर दिया जाएगा। पीथमपुर MMLP को मिलेगी दोगुनी ताकत इंदौर के पास पीथमपुर में पहले से ही मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क (MMLP) का प्रोजेक्ट चल रहा है। इसका उद्देश्य आसपास के उद्योगों के लिए एक केंद्रीय हब बनाना है, जहां से देश-विदेश में माल भेजना और मंगाना आसान हो।  सांसद ने कहा हर वर्ग को मिलेगा फायदा सांसद शंकर लालवानी ने इन दोनों प्रोजेक्ट्स पर कहा कि MMLP प्रोजेक्ट इंदौर क्षेत्र में लॉजिस्टिक सेक्टर को बड़ा बूस्ट देगा। वहीं, यह नया इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक प्लान MMLP से होने वाले फायदों को शहर के आम व्यापारियों और उद्योगपतियों तक सीधे पहुंचाने में मदद करेगा। इससे निवेश बढ़ेगा और रोजगार बढ़ेंगे, हर वर्ग को इससे फायदा मिलेगा।  देश के लिए 'मॉडल' बनेगा इंदौर इंदौर का यह प्लान देश के अन्य लैंड-लॉक्ड इलाकों (ऐसे क्षेत्र जहाँ न कोई समुद्र तट है और न ही कोई अंतरराष्ट्रीय सीमा) के लिए एक उदाहरण (Model) के रूप में काम करेगा। इस प्लान के लागू होने के बाद न सिर्फ शहरों में ट्रैफिक जैम कम होंगे, बल्कि माल परिवहन भी सुचारु रूप से हो सकेगा। योजना लागू होने पर ये होंगे मुख्य बदलाव: * सड़क, रेल, हवाई और जलमार्गों को एकीकृत कर मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब बनेंगे। * वेयरहाउसिंग सुविधाओं के मानक तय किए जाएंगे, जिससे सप्लाई चेन प्रभावी बनेगी। * निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देकर नए लॉजिस्टिक्स पार्क में निवेश आकर्षित किया जाएगा। * इलेक्ट्रिक वाहनों और वैकल्पिक ईंधन से कार्बन उत्सर्जन कम किया जाएगा। * महिला उद्यमियों और श्रमिकों के लिए कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इंदौर को होने वाले प्रमुख फायदे: * लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक (LPI) में सुधार से इंदौर वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा। * शहर में नए निजी निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। * आपूर्ति श्रृंखला में देरी कम होगी, जिससे निर्यातकों और निर्माताओं को सीधा लाभ मिलेगा। * इंदौर को 'ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब' के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी। * लॉजिस्टिक्स और परिवहन क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित होगा।  

भारत की नई रक्षा डील ने पाकिस्तान में मचाया हड़कंप, राफेल-सुखोई-तेजस से अलग हथियार

30,000 करोड़ की बड़ी डील: राफेल-सुखोई-तेजस नहीं, भारत खरीद रहा नया बवाल, पाकिस्तान हुआ दहला भारत की नई रक्षा डील ने पाकिस्तान में मचाया हड़कंप, राफेल-सुखोई-तेजस से अलग हथियार 30,000 करोड़ की डील में भारत का नया हथियार, पाकिस्तान में डर और चिंता बढ़ी नईदिल्ली  30,000 Crore Drone Deal: ऑपरेशन सिंदूर के बाद सरकार देश की सेनाओं को रॉकेट की रफ्तार से मॉर्डर बनाने में जुटी है. इस कारण करीब-करीब हर हफ्ते हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी जा रही है. मोटे तौर पर देखें तो देश में एयर फोर्स के पास फाइटर जेट की कमी ही सबसे बड़ी समस्या दिखती है. इस समय एयरफोर्स के पास केवल 31 स्क्वाड्रन बचे हैं जबकि जरूरत कम से कम 42 स्क्वाड्रन की है. इस कमी को पूरा करने के लिए कई मोर्चे पर काम चल रहा है. लेकिन, इस बीच भारत ने आसमान में अपनी बादशाहत कायम रखने के लिए अन्य कई सौदों को अंतिम रूप दिया है. दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर के बाद जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान बौखलाया हुआ है. इस ऑपरेशन में उसको ऐसी मार पड़ी है जिसकी उसने सपने में भी कल्पना नहीं की होगी. ऐसे में माना जा रहा है कि वह इस चोट का बदला लेने के लिए चीन के साथ मिलकर भारत के खिलाफ कभी भी कोई बड़ी साजिश रच सकता है. इस तरह भारत अपनी सुरक्षा तैयारियों में तनिक भी चूक या कमी बर्दाश्त नहीं कर सकता है. एयरफोर्स के फाइटर जेट की कमी को पूरा करने के लिए भारत राफेल, सुखोई और देसी फाइटर जेट तेजस को लेकर कई स्तरों पर काम कर रहा है. लेकिन, आसमान में बादशाहत कायम करने के लिए केवल फाइटर जेट्स ही जरूरी नहीं है. इसके अलावा भी कई तरह के जहाज और मिसाइलें चाहिए. तभी जाकर कोई एयरफोर्स मुकम्मल तौर पर ताकतवर बन पाती है. ऐसे में भारत मिसाइलों, एयर डिफेंस, जासूसी जहाजों, राडार सिस्टम और ड्रोन्स पर खूब खर्च कर रही है. क्योंकि आधुनिक जंग में ये चीजें पहले की तुलना में काफी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई हैं. 87 मेल ड्रोन्स दरअसल, भारतीय सेना ने 87 मेडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंडुरेंस यानी MALE ड्रोन्स खरीदने की योजना बनाई है. ये एक तरह से बेबी फाइटर जेट्स हैं. इस पर करीब 30 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे. ये इतने पैसे हैं कि इसमें कई छोटे देश पूरा रक्षा बजट तैयार करते हैं. यानी इस एक मेल ड्रोन की कीमत करीब 350 करोड़ आएगी. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस डील के लिए भारतीय कंपनियों को तैयार किया जा रहा है. हालांकि फिलहाल वे पूरी तरह सक्षम नहीं हो पाई हैं. बावजूद इसके सरकार ने इस डील के लिए देसी कंपनियों की शर्त जोड़ दी है. अब मंगलवार को भारतीय कंपनियों को इसका टेंडर जारी किया जा सकता है. सरकार की योजना इस सौदे के साथ देश में ड्रोन निर्माण के लिए एक इकोसिस्टम बनाने की है, जिससे आने वाले वक्त में भारत किसी पर निर्भर न रहे. अब इस सौदे में शामिल होने के लिए विदेशी कंपनियां भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी को दौड़ रही हैं ताकि वे उनको ड्रोन्स के लिए जरूरी उपकरणों की सप्लाई कर सकें. इन कंपनियों में इजरायली कंपनी एल्बिट और अमेरिकी जनरल एटॉमिक्स के नाम सबसे आगे हैं. अभी सरकार ने देसी में ड्रोन निर्माण में 50 फीसदी स्वदेशी कंटेंट की शर्त रखी है. ऐसे में इन विदेशी कंपनियों को काफी स्कोप दिख रहा है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस करीब 30 हजार करोड़ रुपये का सौदा सबसे कम बोली लगाने वाली दो कंपनियों को दिया जाएगा, ताकि कम से कम दो ड्रोन निर्माण प्लेयर तैयार किया जा सके.  

नर्मदा घाटों का एकीकरण: MP सरकार का 300 करोड़ का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट, बढ़ेगी पर्यटन और जल यात्रा

मध्यप्रदेश में 300 करोड़ के बड़े प्रोजेक्ट से जुड़ेगा नर्मदा के छह घाट, विकास को मिलेगा नई दिशा नर्मदा घाटों का एकीकरण: MP सरकार का 300 करोड़ का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट, बढ़ेगी पर्यटन और जल यात्रा एमपी में नर्मदा के छह घाट होंगे आपस में जुड़े, सरकार ने किया 300 करोड़ का निवेश जबलपुर  मध्यप्रदेश में नर्मदा घाटों की कायापलट की बड़ी योजना तैयार की गई है। इसके अंतर्गत नर्मदा के आधा दर्जन घाट को आपस में जोड़ा जाएगा। राज्य के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जबलपुर में नर्मदा के छह घाट संवारे जाएंगे। इन्हें अयोध्या में सरयू की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। राज्य सरकार ने जबलपुर के नर्मदा घाटों को संवारने के लिए बड़ा प्रोजेक्ट तैयार किया है। सीएम मोहन यादव इसका भूमिपूजन करेंगे। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने रविवार को पत्रकार वार्ता बुलाई। यहां उन्होंने जबलपुर के आधा दर्जन नर्मदा घाटों को संवारने का अहम ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अभी नर्मदा के घाट अत्यधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में हैं जिससे दिक्कत होती है। नर्मदा भक्तों की सुविधा के लिए 6 घाटों को आपस में जोड़ेंगे। जबलपुर में नर्मदा घाटों को अयोध्या की सरयू की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। प्रोजेक्ट के पहले चरण में जबलपुर के खारीघाट, दरोगा घाट, ग्वारीघाट, उमा घाट, सिद्धघाट और जिलहरी घाट को आपस में जोड़ा जाएगा। इन्हें अयोध्या के सरयू घाटों की तर्ज पर एक समान कर आकर्षक रूप दिया जाएगा। पीडब्लूडी मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि खारीघाट पर खारी विसर्जन के लिए अलग से जलकुंड बनाया जाएगा। घाट पर उतरने के व्यवस्थित सीढ़ियां बनेंगी, नीचे चेंजिंग रूम बनाया जाएगा और पुरोहितों के बैठने की व्यवस्था के साथ ही विशेष मुंडन स्थल भी बनाया जाएगा। श्रद्धालुओं और नर्मदा भक्तों के लिए छोटा नाव घाट भी बनाया जाएगा। ग्वारीघाट का विशेष रूप से जिक्र किया मंत्री राकेश सिंह ने जबलपुर के ग्वारीघाट का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मां नर्मदा की गोद में स्थित यह स्थान स्नान, पूजा और ध्यान की गहरी पवित्रता के लिए बेहद आदर्श जगह है। घाट पर मां नर्मदा की शांत लहरें श्रद्धालुओं को शांति और शक्ति दोनों प्रदान करती हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इस विख्यात नर्मदा तट को सुंदर और सुसज्जित रूप दिया जाएगा। जबलपुर का नर्मदा घाट इलाका अत्यधिक भीड़भाड़ वाला क्षेत्र है। रास्ते की चौड़ाई बहुत कम होने के कारण श्रद्धालुओं को आने-जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि नए प्रोजेक्ट में ये परेशानियां समाप्त हो जाएंगी। प्रोजेक्ट का भूमिपूजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे।