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अनिल अंबानी पर फिर संकट के बादल, सरकारी एजेंसियां हरकत में

मुंबई  अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप के लिए मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पहले से ही ईडी, सीबीआई और सेबी की जांचों का सामना कर रहे समूह पर अब कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) ने भी शिकंजा कस दिया है। मंत्रालय ने समूह की कई प्रमुख कंपनियों में कथित फंड के दुरुपयोग और कंपनी कानून के गंभीर उल्लंघनों की जांच गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) को सौंप दी है। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि मंत्रालय की शुरुआती जांच में बड़े पैमाने पर फंड डाइवर्जन और कंपनी एक्ट के उल्लंघन के संकेत मिले हैं। इसके बाद मामला SFIO को सौंपा गया है ताकि फंड के फ्लो और जिम्मेदारी तय करने के लिए विस्तृत जांच की जा सके। किन कंपनियों पर कार्रवाई जिन कंपनियों पर जांच का दायरा बढ़ाया गया है, उनमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस और CLE प्राइवेट लिमिटेड जैसी फर्में शामिल हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि समूह की कई कंपनियों के बीच पैसों का कृत्रिम लेन-देन किया गया, जिससे फंड को एक से दूसरे खाते में ट्रांसफर कर उसकी असली स्थिति छिपाई जा सके। ईडी ने जब्त की ₹7,500 करोड़ की संपत्तियां SFIO की जांच से पहले ही ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रिलायंस ग्रुप से जुड़ी ₹7,500 करोड़ से अधिक की संपत्तियां जब्त की थीं। इनमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की करीब 30 संपत्तियां और कई रियल एस्टेट कंपनियों जैसे आधार प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी, मोहनबीर हाईटेक बिल्ड, विहान43 रियल्टी और कैंपियन प्रॉपर्टीज से जुड़ी संपत्तियां शामिल हैं। ईडी का दावा है कि यह कार्रवाई कई हजार करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले से जुड़ी है, जिसमें समूह की कंपनियों ने बैंकों से लिए गए लोन का दुरुपयोग किया। कर्ज में डूबा समूह ईडी की रिपोर्ट के अनुसार, 2010 से 2012 के बीच रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) और उसकी सहयोगी कंपनियों ने भारतीय बैंकों से ₹40,000 करोड़ से अधिक के लोन लिए थे, जिनमें से ₹19,694 करोड़ अभी भी बकाया हैं। पांच बैंकों ने इन खातों को 'फ्रॉड' घोषित कर दिया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस दौरान जुटाई गई रकम को बिज़नेस विस्तार में लगाने के बजाय पुराने कर्ज चुकाने और समूह की अन्य कंपनियों को ट्रांसफर करने में इस्तेमाल किया गया। ईडी का यह भी कहना है कि लगभग ₹13,600 करोड़ रुपये की राशि को कई लेयर्ड ट्रांजेक्शनों के ज़रिए समूह की अलग-अलग कंपनियों में घुमाया गया और कुछ धनराशि विदेश भेजी गई। यह पूरी गतिविधि बैंक लोन की शर्तों के उल्लंघन में की गई बताई जा रही है। SFIO की जांच से बढ़ी उम्मीदें अब जब मामला SFIO को सौंपा गया है, तो जांच का दायरा और गहराई दोनों बढ़ गए हैं। SFIO यह पता लगाएगा कि फंड डाइवर्जन का असली जिम्मेदार कौन था और समूह के शीर्ष प्रबंधन की इसमें क्या भूमिका रही। सरकारी सूत्रों का कहना है कि अगर आरोप साबित होते हैं, तो कंपनी एक्ट की धारा 447 (कॉर्पोरेट धोखाधड़ी) के तहत कड़ी सज़ा और आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।  

पुलिस कर्मियों के लिए कल्याण की नई मिसाल

कठिन समय में सुरक्षा और सम्मान की गारंटी पुलिस मुख्यालय और भारतीय स्टेट बैंक की संयुक्त पहल भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय की कल्याण शाखा द्वारा पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों के आर्थिक कल्याण के उद्देश्य से लागू की गई पुलिस वेतन पैकेज योजना का लाभ अब प्रदेश के अनेक परिवारों तक पहुंच रहा है। इसी क्रम में धार जिले की स्व. रूपचंद पाटिल की नामिनी श्रीमती सजन बाई को 1 करोड़ रुपये की आकस्मिक मृत्यु लाभ राशि प्रदान की गई है। धार में आयोजित कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक श्री मयंक अवस्थी ने श्रीमती सजन बाई को यह राशि प्रदान की। उन्होंने कहा कि यह योजना प्रत्येक पुलिसकर्मी के परिवार के लिए कठिन समय में संबल और सुरक्षा का आधार है। पुलिस मुख्यालय भोपाल के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सेवा के दौरान हर पुलिसकर्मी को सुरक्षा और सम्मान दोनों की गारंटी मिले। भारतीय स्टेट बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक श्री मनीष दास ने बताया कि 24 दिसंबर 2024 को मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय और एसबीआई के बीच संपन्न हुए एमओयू के तहत सभी पुलिस कर्मियों को पुलिस वेतन पैकेज खाता के जरिए अनेक वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें शामिल हैं: 1. एक करोड़ रुपये का आकस्मिक मृत्यु बीमा 2. होम लोन पर विशेष ब्याज दरें 3. मुफ्त डेबिट कार्ड 4. बीमा परिवार के लिए अतिरिक्त आर्थिक सुरक्षा कवच मध्यप्रदेश पुलिस की कल्याण शाखा का उद्देश्य इस योजना के माध्यम से प्रदेश के समस्त पुलिसकर्मियों और उनके परिजनों को आर्थिक सुरक्षा, स्थिरता और आत्मविश्वास प्रदान करना है। इस तरह की पहलें पुलिस बल के मनोबल को मजबूत करने के साथ-साथ एक संवेदनशील और कल्याणकारी पुलिस व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।  

धमादाहा में नीतीश कुमार का रोडशो, बोले- संतोष कुशवाहा को जनता सबक सिखाएगी

पटना  बिहार की सियासत में अब टक्कर दिलचस्प हो गई है। एक तरफ जेडीयू की वरिष्ठ मंत्री लेशी सिंह के लिए प्रचार करने खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार धमदाहा (पूर्णिया) के मैदान में उतरे, तो दूसरी तरफ उनके पुराने साथी और अब विरोधी बने संतोष कुशवाहा आरजेडी के टिकट पर उसी सीट से चुनावी मैदान में हैं। सीमांचल की ये जंग अब सिर्फ सीट की नहीं, सियासी प्रतिष्ठा की भी हो गई है। धमदाहा में बुधवार दोपहर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ठाकुरबाड़ी मैदान में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले वक्त में बिहार देश के विकसित राज्यों में शुमार होगा। उन्होंने दावा किया कि राज्य को केंद्र सरकार से भरपूर सहयोग मिल रहा है और अब बिहार के हर इलाके में विकास की गूंज सुनाई दे रही है।   नीतीश कुमार ने कहा, “पहले बिहार में शाम होते ही लोग घरों में बंद हो जाते थे, डर और झगड़े का माहौल था। अब शांति, भाईचारा और प्रेम है। हमने महिलाओं को 35% आरक्षण दिया, नौकरियां दीं, पेंशन बढ़ाई और हर वर्ग के विकास के लिए काम किया।” मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि “2030 तक एक करोड़ युवाओं को नौकरी देने का लक्ष्य है। पूर्णिया एयरपोर्ट शुरू हो चुका है, मखाना बोर्ड बन चुका है, और धमदाहा से फोर लेन रोड बनने जा रहा है।” संतोश कुशवाहा के खिलाफ प्रचार कर रहे नीतीश कुमार उन्होंने मंच से जेडीयू प्रत्याशी लेशी सिंह के पक्ष में वोट मांगते हुए कहा, “लेशी सिंह ने धमदाहा में जो काम किया है, वो किसी से छिपा नहीं। इन्हें जीताना विकास की रफ्तार को बनाए रखना है।” मंच पर जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल, पूर्व मंत्री शहनवाज हुसैन और साबिर अली जैसे दिग्गज नेता मौजूद थे। गौरतलब है कि धमदाहा सीट पर मुकाबला अब जेडीयू की लेशी सिंह बनाम आरजेडी के संतोष कुशवाहा के बीच है। लेशी सिंह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिनी जाती हैं, जबकि संतोष कुशवाहा सीमांचल में अपनी जातीय पकड़ और पुराने सियासी रसूख के कारण एक मजबूत चुनौती पेश कर रहे हैं।  

कोरिया जिले में अवैध रेत परिवहन पर प्रशासन की सख्ती

खनिज विभाग ने तीन मिनी ट्रक जब्त किए, शासन के निर्देश पर लगातार चल रहा अभियान कोरिया शासन के निर्देश पर जिले में अवैध खनिज परिवहन के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत खनिज विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन मिनी ट्रक वाहनों को जप्त किया है। यह कार्रवाई तहसील सोनहत और बैकुंठपुर क्षेत्र में की गई, जहां गश्त के दौरान ये वाहन अवैध रूप से गौण खनिज रेत का परिवहन करते पाए गए। जब्ती के बाद इन वाहनों को चरचा थाना में अभिरक्षा में रखा गया है और संबंधित वाहन मालिकों के विरुद्ध नियमानुसार प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। जप्त किए गए वाहन सीजी 16 सीएल 7672    मिनी ट्रक     वाहन मालिक संत कुमार साहू, सीजी 16 सीजे 1135    मिनी ट्रक    वाहन मालिक राजकुमार साहू और सीजी 16 सी क्यू 5979    मिनी ट्रक     कमलेश यादव है। इन वाहन स्वामियों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम 2015 की धारा 71 तथा खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम 1957 की धारा 21 से 23 (ख) के तहत प्रकरण दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है। जिला खनिज अधिकारी ने कहा कि शासन के निर्देश और कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के खिलाफ निरंतर अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी इस प्रकार की गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी और संबंधित दोषियों पर कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

सफेद चादर में लिपटा बद्रीनाथ: तापमान गिरा, भक्तों की आस्था चरम पर

बद्रीनाथ  उत्तराखंड के प्रसिद्ध चार धामों में से एक बद्रीनाथ धाम में अचानक से मौसम ने करवट बदल ली है। बुधवार सुबह से लगातार तेज बर्फबारी हो रही है और चारों तरफ बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है। बर्फबारी होने की वजह से तापमान काफी गिर गया है, लेकिन श्रद्धालुओं की भक्ति में कमी नहीं है, बर्फबारी के बीच भी भक्त दर्शनों के लिए पहुंच रहे हैं। पर्यटक भी बर्फबारी का मजा ले रहे हैं। उत्तराखंड में बर्फबारी के साथ-साथ बारिश की संभावना भी जताई गई है। मौसम विभाग की मानें तो आने वाले कई दिनों में बर्फबारी के साथ-साथ बारिश भी हो सकती है और मौसम ज्यादा बिगड़ सकता है। वहीं प्रशासन ने ठंड से बचने के लिए जगह-जगह पर अलाव की व्यवस्था की है, जिससे पर्यटक और भक्त दोनों ही बर्फबारी का मजा ले सकें। 7 से लेकर 10 नवंबर तक मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। उत्तराखंड के कुछ जिलों में भारी बारिश और घना कोहरा छाया रहेगा। चमोली, टिहरी, पिथौरागढ़, देहरादून, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में बारिश होने की संभावना है, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन पर्यटकों को पर्वतीय क्षेत्रों में नहीं जाने की सलाह दे रहा है। बर्फबारी के बीच बद्रीनाथ की यात्रा चल रही है और भक्त दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर के कपाट 4 मई 2025 को खुले थे, जो नवंबर के महीने में बंद होंगे, जिसके बाद बाबा की पूजा-अर्चना के साथ उनकी विग्रह डोली को पांडुकेश्वर स्थित योग बदरी में विराजमान किया जाएगा। इसे बाबा का शीतकालीन दूसरा घर भी कहा जाता है, जहां बाबा मंदिर के कपाट बंद होने तक विराजेंगे। शीतकाल के कुछ महीनों तक बाबा बद्रीनाथ की पूजा यहीं होगी। बद्रीनाथ में मौसम बहुत ठंडा हो चुका है और बीते दिन का अधिकतम तापमान -1° सेल्सियस और न्यूनतम तापमान -12° सेल्सियस तक रहा था। आने वाले कुछ दिनों में रुक-रुक कर बारिश हो सकती है।

श्रद्धा और सौंदर्य का संगम – सिरौली मेला की गाथा

दक्षिणामुखी हनुमान मंदिर से जुड़ी शताब्दी पुरानी कथा, कार्तिक पूर्णिमा पर उमड़ता जनसमूह एमसीबी मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले का सिरौली ग्राम हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रद्धा, संस्कृति और सौंदर्य का अद्भुत संगम बन जाता है। यहां स्थित दक्षिणामुखी संकट मोचन हनुमान मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि एक ऐसा स्थान भी है जहां इतिहास, किवदंती और लोकविश्वास एक सूत्र में गुंथे हैं। तीन दिवसीय सिरौली मेला का आरंभ होते ही पूरे क्षेत्र में भक्ति का वातावरण व्याप्त हो जाता है। जंगल की गोद से निकली आस्था की ज्योति इतिहासकार एवं जिला पर्यटन नोडल अधिकारी डॉ. विनोद पांडेय बताते हैं कि सिरौली मंदिर का उद्भव किसी स्थापत्य योजना से नहीं, बल्कि एक अनोखी दैवी प्रेरणा से हुआ। कहा जाता है कि लगभग सन 1924-25 से पूर्व यह इलाका घने जंगलों से घिरा था। स्थानीय गोवाहिकों को एक दिन जंगल के भीतर एक दिव्य प्रतिमा के दर्शन हुए। यह बात तत्कालीन कोरिया नरेश श्री रामानुज प्रताप सिंहदेव तक पहुंची। नरेश स्वयं अपने सेवकों के साथ इस रहस्यमयी स्थल पर आए। उन्होंने वृक्षों की सफाई कर प्रतिमा को खुदवाने का आदेश दिया, किंतु प्रतिमा का दाहिना पैर अनंत गहराई में धंसा हुआ था। रात में नरेश को स्वप्न में आदेश प्राप्त हुआ – “हनुमान जी की प्रतिमा को यहां पूजो, इसे कहीं और न ले जाओ।” इस दैवी संकेत के बाद विक्रम संवत 2016 (1924-25 ई.) में दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर की स्थापना की गई। मंदिर के प्रथम महंत स्वर्गीय नीलकंठ शुक्ल महाराज रहे। तभी से कार्तिक पूर्णिमा पर मेले की परंपरा प्रारंभ हुई, जो आज तक निरंतर जारी है। मेले में उमड़ती श्रद्धा और उल्लास की लहर हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के दिन सिरौली का यह पावन स्थल श्रद्धालुओं से भर उठता है। दूर-दराज़ के गांवों से लोग पैदल, वाहन या बैलगाड़ी से यहां पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में हनुमान जी के दर्शन, पूजा-अर्चना और मन्नतें मांगने वालों की भीड़ उमड़ती है। स्थानीय श्रद्धालु परंपरा के अनुसार भंडारे का आयोजन करते हैं। मेला प्रांगण में झूले, खिलौनों की दुकानें, पूजा सामग्री, हस्तशिल्प, और खानपान के ठेले पूरे वातावरण को रंगीन बना देते हैं। बच्चों की हंसी और शंख-घंटियों की ध्वनि के बीच आस्था की यह महक सिरौली को एक जीवंत लोक उत्सव में बदल देती है। प्रकृति की गोद में बसा यह तीर्थ मंदिर से मात्र 50-60 मीटर दूरी पर हसदो नदी कलकल बहती है, जो स्थल को और अधिक पवित्र बनाती है। वहीं लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित उदलकछार जलप्रपात अपनी श्वेतधारा से पर्यटकों को मोह लेता है। श्रद्धा के साथ-साथ प्रकृति की यह सुषमा सिरौली को आध्यात्मिक और पर्यटन – दोनों दृष्टियों से विशिष्ट बनाती है। लोक परंपरा की जीवंत धरोहर सिरौली मेला केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह हमारी लोक संस्कृति, सामाजिक एकता और ऐतिहासिक चेतना का प्रतीक है। एक सदी से अधिक समय से यह मेला निरंतर लोगों को जोड़ता आया है – पीढ़ी दर पीढ़ी भक्ति और परंपरा की यह ज्योति आज भी समान तेज से प्रज्वलित है। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर सिरौली की यह पवित्र भूमि आज भी यही संदेश देती है। “जहां आस्था है, वहीं संस्कृति जीवित है।”

सीएम गायब क्यों? प्रियंका गांधी का सवाल – ‘मोदी-नीतीश की केमिस्ट्री में दरार?’

पटना  बिहार चुनाव के दूसरे चरण के लिए प्रचार जोरों पर है। बुधवार को बाल्मीकि नगर विधानसभा क्षेत्र के हरनाटांड़ में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम नीतीश कुमार की केमिस्ट्री पर निशाना साधा। प्रियंका ने कहा कि बिहार की सरकार केंद्र से संचालित हो रही है बावजूद इसके पीएम मोदी की सभा में सीएम नीतीश नहीं दिख रहे हैं। उन्होने कहा कि पीएम को महागठबंधन के पोस्टरों में तेजस्वी नहीं है, इसकी चिंता नहीं, लेकिन नीतीश कुमार की कोई परवाह नहीं है। कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि बिहार की रिमोट सरकार दिल्ली से चल रही है। यहां की जनता के लिए योजनाएं दिल्ली से बन रही हैं। प्रधानमंत्री को किसानों की चिंता नहीं है, उन्हें पूंजीपतियों की चिंता है। आज देश में सरकारी नौकरियां कम हुई है और हर जगह ठेकेदारी व्यवस्था लागू हुई है। नौजवानों को रोजगार नहीं मिल रहा है। रोजगार के लिए लोग पलायन कर रहे हैं। लेकिन मोदी सरकार को इसकी चिंता नहीं है। अंग्रेजी साम्राज्य से कम नहीं है मोदी जी की सरकार। मोदी जी के शासन में आम लोगों के अधिकार छीने गये हैं। वोट चोरी की गई है। बिहार से 65 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से कटकर जनता के हाथों को कमजोर किया। पीएम की सभा से नीतीश गायब हैं- प्रियंका गांधी इस दौरान उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि बिहार की सरकार केंद्र से संचालित हो रही है बावजूद इसके पीएम के सभा में सीएम नहीं दिख रहे हैं। बिहार की एनडीए सरकार पर प्रहार करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि 20 सालों के उनके शासनकाल में राज्य में बेरोगारी बढ़ी है, पलायन बढ़ा है। शिक्षा व्यवस्था चौपट हुई है। किसानों को उनके फसल का मूल्य नहीं मिला है और अस्पतालों की स्थिति बदहाल हुई है। उन्होंने लोगों से शिक्षा,रोजगार, महिला सशक्तिकरण पर इंडिया गठबंधन के पक्ष में मतदान करने की अपील की।

पड़ोसी देश में रोजगार संकट गहरा: पाकिस्तान की युवा पीढ़ी और महिलाओं के लिए हालात बदतर

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में पहली बार डिजिटल जनगणना हुई और इसी आधार पर पता चल पाया कि यहां बेरोजगारी दर चरम पर है। 7.8 फीसदी युवाओं के पास नौकरी नहीं है यानि 24 करोड़ 15 लाख की आबादी वाले देश के करीब 1 करोड़ 87 लाख युवा बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं। पाकिस्तान ऑब्जर्वर नाम के अखबार ने देश की इस दुखती नब्ज को टटोला है। ये रिपोर्ट बेबस पाकिस्तानियों और बेपरवाह हुक्मरानों की पोल खोलती है। सिस्टम को लचर बताते हुए कहती है कि ये बेरोजगारी दर उन पाकिस्तानियों की फिक्र नहीं करती जो नीट (एनईईटी) हैं। नीट से मतलब पढ़ाई (एजुकेशन), रोजगार (एम्पलाईमेंट), और प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) से महरूम करना है। इस आर्टिकल में बताया गया है कि बेरोजगारी का संकट जितना दिखता है उससे कहीं अधिक गहरा है। 15 से 35 साल की उम्र के एक-तिहाई पाकिस्तानी इस समय बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। प्रकाशित रिपोर्ट की माने तो 'वर्किंग एज पापुलेशन' यानी काम करने की उम्र वाली आबादी की संख्या भी कुछ कम नहीं है। 17.17 करोड़ लोग जो काम करने में सक्षम हैं उनमें से 11 फीसदी के पास कोई नौकरी नहीं है। आर्टिकल में कहा गया है कि 'नीट' ग्रुप में वे लोग शामिल हैं जिन्होंने पूरी तरह से काम ढूंढना बंद कर दिया है, जो बिना वेतन वाले या असंगठित उपक्रमों से जुड़े हैं, या ऐसे फैमिली बिजनेस में फंसे हैं जिसकी उत्पादन क्षमता कुछ खास नहीं है। लेख में पाकिस्तानी महिलाओं की दयनीय स्थिति का भी विवरण है। रिपोर्ट के अनुसार महिला श्रम बल भागीदारी दर भी काफी कम है। 'नीट' की समस्या तो है ही, इसके साथ ही देश की आधी आबादी की कम भागीदारी दर ने परिस्थिति को और भी सोचनीय बना दिया है। ये घटती दरें साफ इशारा करती हैं कि लेबर फोर्स का कौशल अर्थव्यवस्था से कदम ताल नहीं कर पा रहा और इसी वजह से स्ट्रक्चरल बेरोजगारी (संरचनात्मक बेरोजगारी जिसमें नियोक्ता और रोजगार की तलाश कर रहे शख्स का कौशल मेल नहीं खा पाता) बढ़ रही है। इसका जिम्मेदार भी पाकिस्तानी शैक्षिक व्यवस्था को बताया गया है जो पुराने ढर्रे पर चल रहा है। छात्रों को मांग के हिसाब से कुशल नहीं बना पा रहा। व्यावसायिक प्रशिक्षण भी सीमित है, तो दूसरी ओर पढ़े-लिखे युवाओं का झुकाव सरकारी नौकरियों की ओर ज्यादा है। सरकारी नौकरी आबादी के लिहाज से बहुत कम हैं और इसमें कम्पटीशन भी तगड़ा है। कुछ को नौकरी मिलती है तो कइयों के हाथ खाली रह जाते हैं और इस तरह पढ़े-लिखे बेरोजगारों की तादाद में भी इजाफा हो रहा है। 2025 में बेरोजगारी दर बढ़कर करीब 8 प्रतिशत हो गई है, जिसमें कुल लेबर फोर्स 8 करोड़ 51 लाख 80 हजार और बेरोजगारों की संख्या 68 लाख 10 हजार है। रिपोर्ट कहती है कि रोजगार दर लगभग 52.2 प्रतिशत है, जो बताता है कि काम करने की उम्र वाली लगभग आधी आबादी या तो बेरोजगार है या अल्प-रोजगार (योग्यता के मुताबिक नौकरी न मिलना) की समस्या झेल रही है। महंगाई, विदेशी मुद्रा संकट, 2022 और हाल ही में 2025 की बाढ़ के असर ने छोटे बिजनेस और लोकल जॉब मार्केट को तबाह कर दिया है। विश्व बैंक के आपदा-पश्चात आवश्यकता आकलन (पोस्ट-डिजास्टर नीड्स असेस्मेंट) में अरबों डॉलर के नुकसान और लाखों लोगों के दोबारा गरीबी में चले जाने की बात सामने आई। रिपोर्ट सोच समझ कर नीति बनाने की सलाह देती है और आगाह करती है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो ये युवाओं और मुल्क को लंबे समय तक आर्थिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। आर्टिकल बेरोजगारी से सिर्फ आर्थिक तौर पर नुकसान की बात नहीं करता बल्कि इससे उभरने वाली बड़ी समस्याओं की ओर भी इशारा करता है। बेरोजगारी की मार और पैसों की कमी के चक्कर में हाशिये पर पड़े युवा जबरन पलायन को मजबूर होते हैं, फिर अपराधी बन जाते हैं या चरमपंथी नेटवर्क का हिस्सा बन देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। निराशा और हताशा के रूप में दिखने वाला मनोवैज्ञानिक असर बहुत गहरा और नुकसानदायक होता है। देश के कुछ पिछड़े इलाकों से युवाओं की तस्करी बंधुआ मजदूरी के लिए की जाती है। इतना ही नहीं, उन्हें भीख मांगने के लिए मजबूर किया जाता है या सेक्स ट्रेड में धकेल दिया जाता है। बलूचिस्तान की कोयला खदानें इस शोषण का भयानक प्रतीक बन गई हैं, जहां बुनियादी सुरक्षा उपकरणों की कमी के कारण मजदूर मर जाते हैं। ये दुखद घटनाएं कभी-कभार ही मीडिया में रिपोर्ट की जाती हैं और ये युवाओं को बचाने में सिस्टम की पूर्ण विफलता को दर्शाती हैं। अंत में ये खबर पाकिस्तान के हुक्मरानों की वजह से फेल होते समाज की बात करती है। कहती है कुछ मदरसे और सोशल मीडिया पर दीन-हीन जीवन जीने को मजबूर युवाओं को इज्जत और रूतबा देने का करार किया जाता है और फिर इनके हाथों में हथियार थमा दिए जाते हैं। हथियार लहराते युवा समाज में खौफ का प्रतीक बनते हैं और यही एक समाज के तौर पर हमें फेल करता है क्योंकि पाकिस्तानी सिस्टम इन्हें वो मकसद नहीं दे पा रहा जो देश की तरक्की के लिए जरूरी है।

राजनीति में गरमाहट: योगी बोले- हिंदुओं को नजरअंदाज करने वालों को सत्ता से दूर रखें

गया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2005 के पहले बिहार में अपराध, जातीय संघर्ष, माओवाद, नक्सलवाद था। यूपी-बिहार के नाम पर देश-दुनिया में सम्मान नहीं मिलता था। बिहार में लालू प्रसाद यादव के शासन में 60 से अधिक जातीय नरसंहार, 30 हजार से अधिक अपहरण हुए। व्यापारी, डॉक्टर, इंजीनियर, संभ्रांत व्यक्ति सुरक्षित नहीं थे। बिहार के 30-40 फीसदी लोगों की आबादी गोरखपुर व वाराणसी में है, क्योंकि उस समय जंगलराज था, लेकिन नीतीश बाबू के नेतृत्व में 20 वर्ष में सुशासन की सुदृढ़ नींव रखी गई। उत्तर प्रदेश में तमाम व्यस्तताओं के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को भी बिहार विधानसभा चुनाव में प्रचार करने पहुंचे। उन्होंने पहली रैली वजीरगंज विधानसभा क्षेत्र से विधायक व भाजपा प्रत्याशी बीरेंद्र सिंह के पक्ष में की। सीएम ने यहां भाजपा के विकास कार्यों को गिनाया तो राजद-कांग्रेस गठबंधन पर करारा प्रहार भी किया। मुख्यमंत्री ने गया को ज्ञान, मुक्ति व अध्यात्म की धरा बताते हुए यहां की ऐतिहासिकता पर प्रकाश डाला। बोले कि गया की धरती बहुत पवित्र है, सनातन धर्म की परंपरा है कि स्वर्ग लोक के पितर भी इसी धरती पर आकर तृप्त होते हैं। सीएम योगी ने कहा कि हर सच्चा भारतीय राम को पूर्वज मानता है। कांग्रेस, सपा व राजद जब राम मंदिर का विरोध कर रही थी तब भी रामभक्त नारा लगाते थे कि रामलला हम आएंगे, लाठी-गोली खाएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस ने कहा था कि राम हुए ही नहीं, जैसे लगता है कि कांग्रेस का ही खानदान पैदा हुआ है, बाकी हुए ही नहीं। उन्होंने कहा, "यह लोग राम-कृष्ण, विष्णु को नकारने लगते हैं। यह हिंदुओं को नकार देंगे, इसलिए हमें भी इन्हें नकार देना चाहिए। राजद ने राम मंदिर के रथ रोक दिया था। सपा ने रामभक्तों पर गोली चलाकर अयोध्या को लहुलूहान कर दिया। यूपी में भाजपा सरकार बनने के बाद हमने संकल्प पूरा किया। अयोध्या में भव्य राम मंदिर और काशी में काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण का निर्माण हो गया। मथुरा-वृंदावन में कार्य कर रहे हैं। हर तीर्थ को सजा रहे हैं, जबकि सपा के लोग हमारे पैसे को कब्रिस्तान की बाउंड्री के लिए देते थे। हमने कहा कि यह पैसा मंदिरों-तीर्थों के सुंदरीकरण, हिंदू श्रद्धालुओं की सुविधा और गरीब हित में खर्च होगा।" सीएम योगी ने कहा कि बिहार में आज एनआईटी, आईआईएम, एम्स, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज आदि की लंबी श्रृंखला है। बिहार का नौजवान दुनिया में फिर से अपनी मेधा की छाप छोड़ रहा है और बिहार के विकास में भी योगदान दे रहा है। 11 वर्ष में मोदी जी ने विकास व विरासत का सम्मान किया है। सीएम ने केंद्र सरकार की विकास योजनाओं को भी गिनाया। बोले कि कांग्रेस व राजद झूठे वायदे कर रहे हैं। पहले यह पशुओं का चारा खाए, अब अवसर दिया तो गरीबों का राशन खा जाएंगे। उन्होंने अपील की कि कांग्रेस-राजद की घोषणा पर विश्वास न करना, क्योंकि जो राम का नहीं, वह हमारे किसी काम का नहीं। जो 'रामद्रोही' है, वह हमारा भी विरोधी है। 'रामद्रोही' रामराज्य नहीं ला सकता, वह जंगलराज ही लाएगा। सीएम योगी ने कहा कि जिस बिहार ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, जननायक कर्पूरी ठाकुर को दिया, वह बिहार पहचान के लिए क्यों मोहताज हुआ। पहले कांग्रेस, फिर राजद ने बिहार को लूटा, नौजवानों के रोजगार को छीना, किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर किया। गरीबों को योजनाओं का लाभ नहीं दिया। पैसा परिवार के विकास में लगा दिया, जिससे सब कुछ चौपट हो गया और नक्सलवाद, माओवाद, माफियावाद फैलता गया। बेटी-बहन पर सुरक्षा का संकट खड़ा हो गया। सत्ता के समानांतर माफिया की सरकार चलने लग गई। कांग्रेस व राजद ने बिहार के नागरिकों के सामने पहचान का संकट खड़ा किया। जब भी कानून व्यवस्था खराब होती है तो युवा रोजगार, बेटी सुरक्षा के लिए परेशान होती है। कोई निवेशक नहीं आता है, जिससे विकास बाधित हो जाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राजद व कांग्रेस की पार्टनर यूपी में समाजवादी पार्टी है। लखनऊ में सपा सरकार के समय एक माफिया ने गरीबों और सरकारी जमीन पर चार किलेनुमे मकान बना डाले थे। हमारी सरकार बनते ही मैंने पूछा कि यह किसने बनवाए हैं। लोगों ने जब नाम बताया तो मैंने कहा कि यह तो कुख्यात माफिया है। फिर हमारी सरकार ने बुलडोजर की कार्रवाई की। हमने उस जमीन को प्लेन किया, फिर हाईराइज बिल्डिंग बनाकर गरीबों के आवास बनाए। कार्तिक पूर्णिमा पर आज सुबह मैं लखनऊ में गरीबों को आवास उपलब्ध करा रहा था। यूपी में जो काम सपा करती थी, वही काम बिहार में राजद व कांग्रेस करती थी। इनका उपचार केवल एनडीए है। यह लोग जाति सेना खड़ी करके लड़ाते थे। सीएम ने फिर चेताया- 'जब भी बंटेंगे तो कटेंगे'। सीएम ने कहा कि सपा, राजद व कांग्रेस को परेशानी होती है कि भाजपा की डबल इंजन सरकार नाम क्यों बदल देती है। हम इसलिए नाम बदलते हैं क्योंकि नाम के अनुरूप काम किया जा सके। हमने फैजाबाद का नाम अयोध्या किया, क्योंकि अयोध्या ही पौराणिक नाम था। भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था। फैजाबाद विदेशी आक्रांताओं का प्रतीक था। गंगा-यमुना का संगम जहां होता है, उसका नाम प्रयागराज था। मुगलकाल में इलाहाबाद कर दिया गया था, हमने फिर से प्रयागराज कर दिया। परेशान सपा वाले कहते हैं कि इसका नाम अयोध्या व प्रयागराज क्यों कर दिया। यहां भी कांग्रेस को परेशानी होगी कि कहीं वजीरगंज का नाम न बदल दिया जाए। हमें आगे बढ़ने के लिए विरासत का सम्मान और पूर्वजों पर गौरव की अनुभूति करनी होगी।

जनशक्ति, संस्कृति और विकास का संगम: रजत जयंती राज्योत्सव का भव्य समापन

मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने 2047 तक पूर्ण विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प दोहराया एमसीबी मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2025 का रजत जयंती समापन अद्भुत उत्साह, सांस्कृतिक भव्यता और जनभागीदारी के साथ सम्पन्न हुआ। पूरे आयोजन स्थल में लोककला, परंपरा, विकास और गौरव का जीवंत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भरतपुर-सोनहत विधायक श्रीमती रेणुका सिंह तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल उपस्थित रहे। इनके साथ जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती यशवंती सिंह, जनपद अध्यक्ष, नगर निकाय प्रमुख एवं जिले के अन्य जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए। सभी अतिथियों ने छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन कर राज्य गीत के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। कार्यक्रम में मुख्य आकर्षण के रूप में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को विशेष रूप से बढ़ाया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि— “रजत जयंती केवल उत्सव नहीं, यह छत्तीसगढ़ की विकास-गाथा और जनता के परिश्रम का उत्सव है। हमारा लक्ष्य 2047 तक छत्तीसगढ़ को पूर्ण विकसित और आत्मनिर्भर राज्य के रूप में स्थापित करना है।” मंत्री श्री जायसवाल ने आगे कहा कि सरकार आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सहायता योजना के माध्यम से निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को हर नागरिक तक पहुँचा रही है। उन्होंने जिले में शीघ्र ही स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत करने की भी घोषणा की।                                 इससे पूर्व कलेक्टर डी. राहुल वेंकट ने रखी जिले की विकास गाथा, कलेक्टर डी. राहुल वेंकट ने स्वागत भाषण में कहा कि एमसीबी जिला वर्ष 2022 में गठन के बाद से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सड़क, पर्यटन और आजीविका मिशन में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्योत्सव आत्ममंथन का अवसर है कृ यह सोचने का समय है कि अगले 25 वर्षों में “नवा छत्तीसगढ़” को किस ऊँचाई तक ले जाना है। उन्होंने कहा कि यह उत्सव “जनसेवा, जनभागीदारी और जनविश्वास” का प्रतीक बन चुका है।      विभागीय प्रदर्शनी और योजनाओं का लाभ वितरण    राज्योत्सव स्थल पर लगाए गए 20 से अधिक विभागीय स्टॉल आकर्षण का केंद्र बने। शासन की योजनाओं, नवाचारों और उपलब्धियों की जानकारी देने के साथ ही विभिन्न योजनाओं के लाभ भी वितरण किए गए। श्रमिक पंजीयन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, मोटराइज्ड साइकिल, व्हीलचेयर, वनाधिकार पट्टा, स्वच्छता किट, आइस बॉक्स और मछली पकड़ने के जाल जैसी सुविधाएँ लाभार्थियों को प्रदान की गईं। विधायक रेणुका सिंह और मंत्री जायसवाल ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर लाभार्थियों से संवाद भी किया।                     समारोह में भरतपुर-सोनहत विधायक श्रीमती रेणुका सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती यशवंती सिंह सहित जनप्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ की 25 वर्ष की विकास यात्रा को जनशक्ति, मातृत्व शक्ति और युवाशक्ति की उपलब्धि बताया। सांस्कृतिक मंच पर पंथी, राउत नाचा, करमा नृत्य और पारंपरिक लोकगीतों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित स्थानीय उत्पाद और वनोपज आत्मनिर्भरता के संदेश का केंद्र बने। समापन के अवसर पर पूरे पंडाल में एक स्वर में उद्घोष गूँजा—“जय जोहार, जय छत्तीसगढ़, हमर गौरव हमर पहचान”।