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UPSC की चुनौती और वजन की जंग: IAS परी ने कैसे 45 किलो कम कर खुद को बनाया फिट और फाइनली IAS अधिकारी

 जयपुर  परी बिश्नोई के लिए आईएएस अधिकारी बनने की राह बिल्कुल भी आसान नहीं थी. हाल ही में उन्होंने इंस्टाग्राम पर यूपीएससी की तैयारी के दौरान अपने भावनात्मक उतार-चढ़ाव के बारे में खुलकर बात की. 2017 में अपने पहले यूपीएससी अटेम्प्ट में असफलता का सामना करने से लेकर तनाव के कारण बढ़ते वजन से जूझने तक उनकी कहानी लाखों उम्मीदवारों के लिए प्रेरणादायक है. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी एक लंबी और थका देने वाली प्रक्रिया होती है, जिसमें अक्सर उम्मीदवारों को भावनात्मक और शारीरिक रूप से कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसी ही एक कहानी है एक महिला IAS अधिकारी की, जिन्होंने अपनी पहली असफलता के बाद न सिर्फ भारी वजन बढ़ने की समस्या से लड़ाई लड़ी, बल्कि उसे हराकर अपने IAS बनने के सपने को भी पूरा किया। हम बात कर रहे हैं आईएएस परी बिश्नोई की। पहली असफलता और वजन बढ़ने की चुनौती UPSC की तैयारी कर रहे हर उम्मीदवार की तरह, इस अधिकारी ने भी पूरी लगन से अपना पहला प्रयास दिया था। लेकिन, जब उन्हें इसमें सफलता नहीं मिली, तो यह उनके लिए एक बड़ा झटका था। इस भावनात्मक तनाव और अनिश्चितता के दौर में, उन्होंने अपना मानसिक संतुलन खो दिया और इसका सीधा असर उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ा। देखते ही देखते उनका वजन 45 किलोग्राम तक बढ़ गया। इस दौरान, वह अपनी पसंदीदा चीजें, जैसे बाहर जाना और लोगों से मिलना-जुलना भी बंद कर चुकी थीं। उन्हें लगा कि उनका सपना अधूरा रह गया है और शायद वह कभी IAS नहीं बन पाएंगी। असफलता के बाद सफलता का स्वाद  हालांकि निराशा का यह दौर हमेशा के लिए नहीं रहा. जब परी को दो साल बाद यूपीएससी के इंटरव्यू का कॉल आया तो उसके अंदर कुछ बदल गया. उन्होंने तय किया कि इस बार उनकी लड़ाई सिर्फ रैंक या पद के लिए नहीं बल्कि अपने आत्मविश्वास और पहचान को फिर से हासिल करने के लिए है. नए दृढ़ संकल्प के साथ उन्होंने अपनी लाइफस्टाइल बदलने पर फोकस किया. लगातार एक्सरसाइज, वजन उठाकर, पौष्टिक खाना और ताजा भरपूर स्वस्छ आहार के साथ उन्होंने कठोर अनुशालन का पालन किया. उनके शारीरिक परिवर्तन ने उसके मानसिक विकास को भी प्रभावित किया और वह एनर्जेटिक महसूस करने लगीं. गलतियों से सीखा सबक परी ने अपनी पिछली तैयारी के दौरान की गई गलतियों के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने पिछले टॉपर्स की अपनाई गई रणनीतियों का विश्लेषण किए बिना कोचिंग क्लासेस को आंख मूंदकर फॉलो किया. उनके पास कोई निर्धारित टाइम टेबल नहीं था और कोई सब्जेक्ट स्पेसिफिक लक्ष्य नहीं थे और दृष्टिकोण में स्पष्टता का अभाव था. परीक्षा पैटर्न या पिछले पेपरों पर ध्यान देने के बजाय उन्होंने केवल वही पढ़ा जिसमें उनकी रुचि थी. इन गलतियों को उन्होंने सुधारा.  2019 में परी बिश्नोई ने आखिरकार 30वीं रैंक के साथ यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली और अपने लंबे समय से देखे गए सपने को हकीकत में बदल लिया. उनकी शादी भाजपा नेता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल बिश्नोई के पोते भव्य बिश्नोई से हुई है. इस साल की शुरुआत में इस जोड़े ने अपनी बेटी वेदा का स्वागत किया. परी की कहानी हमें याद दिलाती है कि सच्ची जीत कभी न गिरने में नहीं, बल्कि हर बार जब ज़िंदगी आपको गिराए, तब उठ खड़े होने में है. आत्मविश्वास की वापसी और वजन घटाने का संकल्प हालांकि एक दिन उन्हें महसूस हुआ कि अगर उन्हें अपने सपने को पूरा करना है, तो उन्हें सबसे पहले खुद पर विश्वास करना होगा और अपने शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य को ठीक करना होगा। यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। उन्होंने सबसे पहले अपना बढ़ा हुआ वजन कम करने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने कुछ सरल लेकिन प्रभावी कदम उठाए: नियमित व्यायाम: उन्होंने हर दिन व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया। शुरू में यह मुश्किल था, लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी आदत बन गई। स्वस्थ आहार : उन्होंने अपने खान-पान पर विशेष ध्यान दिया। जंक फूड और अनहेल्दी भोजन से दूरी बनाकर संतुलित और पौष्टिक आहार लेना शुरू किया। सकारात्मक सोच : उन्होंने नकारात्मक विचारों को दूर कर सकारात्मक सोच अपनाई। हर छोटे बदलाव और सफलता के लिए खुद को सराहा। इन प्रयासों के दम पर उन्होंने न सिर्फ अपना 45 किलो वजन कम किया, बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से भी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत महसूस करने लगीं। IAS बनने का सपना हुआ साकार वजन कम करने के बाद, उन्होंने एक नए आत्मविश्वास के साथ UPSC परीक्षा की तैयारी में खुद को फिर से झोंक दिया। इस बार उनकी रणनीति ज्यादा फोकस और अनुशासन वाली थी। उन्होंने पिछली गलतियों से सीखा और अपनी कमियों पर काम किया। आखिरकार, उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और अथक प्रयासों से UPSC परीक्षा क्रैक कर IAS अधिकारी बनने का अपना सपना पूरा किया। यह कहानी उन सभी उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा है, जो असफलता और चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। यह दिखाती है कि अगर हौसला बुलंद हो, तो कोई भी मुश्किल आपको अपने लक्ष्य तक पहुंचने से नहीं रोक सकती, फिर चाहे वह वजन कम करना हो या देश की सबसे कठिन परीक्षा पास करना।

IFFCO का सफर: किसानों के लिए वरदान और भारत की सबसे बड़ी सहकारी समिति बनने की कहानी

नई दिल्ली अमूल और आईएफएफसीओ को वर्ल्ड कोऑपरेटिव मॉनिटर की ग्लोबल लिस्ट में पहला और दूसरा स्थान मिला है. ये पल भारत के लिए बेहद खास है. आपको बता दें कि आईएफएफसीओ (Indian Farmers Fertilizer Cooperative Limited) भारत में स्थित दुनिया का सबसे बड़ा फर्टिलाइजर कॉपरेटिव फेडरेशन है. ये भारत की सबसे बड़ी मल्टी-स्टेट सहकारी समिति है, जो देशभर के किसानों को फर्टिलाइजर और कृषि सेवाएं उपलब्ध कराती है. 1967 में स्थापित IFFCO के साथ आज 35,000 से अधिक सहकारी समितियां जुड़ी हुई हैं. यह संस्था सिर्फ खाद बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के जीवन के कई पहलुओं को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा रही है. कब हुई आईएफएफको की शुरुआत? आईएफएफको का ऑपरेटिंग स्ट्रचर काफी खास है. साल 1960 के दशक में भारत के सहकारी क्षेत्र की भूमिका बहुत बड़ी थी. उस समय देश में इस्तेमाल होने वाले लगभग 70 प्रतिशत खाद का वितरण सहकारी संस्थाओं के जरिए होता था. इन संस्थाओं के पास खाद बांटने की अच्छी व्यवस्था तो थी, लेकिन खुद उत्पादन की कोई सुविधा नहीं थी. इसलिए उन्हें खाद की आपूर्ति के लिए सरकारी या निजी कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ता था. इस समस्या को दूर करने और देश में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर एक नई सहकारी संस्था बनाने का विचार आया. यह एक अनोखी पहल थी, जिसमें देश के किसानों ने अपनी सहकारी समितियों के माध्यम से एक ऐसी संस्था बनाई जो उनके हितों की रक्षा कर सके. भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (IFFCO) इसी सोच का नतीजा है. जब 1967 में इसकी शुरुआत हुई थी, तब सिर्फ 57 सहकारी समितियां इससे जुड़ी थीं. आज यह संख्या बढ़कर 39,800 से भी ज्यादा हो गई है. आईएफएफको को 3 नवंबर 1967 को एक मल्टी-यूनिट कोऑपरेटिव सोसाइटी के रूप में रजिस्टर किया गया था. आईएफएफको का मुख्य काम बाद में 1984 और 2002 में आए मल्टीस्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी एक्ट के तहत इसे एक बहुराज्यीय सहकारी संस्था के रूप में मान्यता मिली. आईएफएफको का मुख्य काम किसानों के लिए उर्वरक (खाद) का उत्पादन और वितरण करना है. इसके उपविधानों में संस्था की गतिविधियों का एक सही स्ट्रचर तय किया गया है, जिससे यह अपने सहकारी सिद्धांतों के साथ काम करती है. किसानों की भलाई को दी प्राथमिकता आईएफएफको को एक खाद कंपनी के बजाय एक ऐसी संस्था के रूप में देखा जाता है जो ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था और समाज दोनों को गहराई से प्रभावित करती है. इसकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह किसानों की भलाई को अपनी प्राथमिकता में रखती है. आईएफएफको ने कई ऐसे काम किए जो उस समय नए और जोखिम भरे माने जाते थे, लेकिन बाद में उन्होंने किसानों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया. उदाहरण के तौर पर, आईएफएफको देश की पहली ऐसी संस्था थी जिसे ग्रामीण इलाकों में सामान्य बीमा का लाइसेंस मिला. इस बीमा योजना के तहत किसानों को खाद की खरीद के साथ बीमा कवरेज भी दिया गया, जिससे उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा मिली. मोबाइल कनेक्टिविटी से लेकर बीमा का दिया फायदा बीमा के अलावा, आईएफएफको ने ग्रामीण विकास के कई दूसरे क्षेत्रों में भी कदम बढ़ाए. इसने गांव-स्तर पर कृषि केंद्र बनाए, जहां से किसानों को बीज, खाद, कीटनाशक और खेती के उपकरण आसानी से मिल सकें. इससे किसानों को दूर शहरों में जाकर सामान लेने की जरूरत नहीं रही और उनकी लागत भी कम हुई. आईएफएफको ने समय के साथ तकनीक को भी अपनाया. उसने एयरटेल के साथ मिलकर किसानों के लिए मोबाइल कनेक्टिविटी बढ़ाने की पहल की, ताकि वे बाजार की जानकारी, मौसम की रिपोर्ट और कृषि सलाह सीधे अपने फोन पर पा सकें. पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी आईएफएफको ने बड़ा काम किया है. इसके सामाजिक वनीकरण कार्यक्रम के तहत करीब 36,000 हेक्टेयर जमीन पर जंगल तैयार किए गए, जिससे पर्यावरण संतुलन बना और ग्रामीण इलाकों में हरियाली बढ़ी. आईएफएफको ने किसानों कीो आर्थिक और सामाजिक जरूरतों को भी नजरअंदाज नहीं किया. इसने पाकिस्तान फाइनेंस जैसी संस्थाओं से सीख लेकर किसानों को वित्तीय सहयोग देने की शुरुआत की. प्राकृतिक आपदाओं के समय, जैसे गुजरात भूकंप में, आईएफएफको ने राहत सामग्री, मेडिकल सहायता और जरूरतमंद परिवारों को छात्रवृत्तियां देकर मदद की. किसानों की भलाई के लिए इसने एनसीडीएक्स जैसे कमोडिटी एक्सचेंज से भी जुड़कर उनके लिए नए अवसर तैयार किए. आईएफएफको सिर्फ एक सहकारी संस्था नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की रीढ़ है. इसकी सोच किसानों की भलाई, आत्मनिर्भरता और सतत विकास पर टिकी है. किसानों के हित में की गई लगातार मेहनत ने आईएफएफको को आज भारत की सहकारी आंदोलन की मिसाल बना दिया है.

लाड़ली बहनों के लिए खुशखबरी: 1500 रुपये की 30वीं किस्त कब आएगी, देखें अपडेट

भोपाल   मध्य प्रदेश की लाड़ली बहनों के लिए नवंबर का महीना बेहद खास होने वाला है, क्योंकि इसी महीने से उन्हें बढ़ी हुई किस्त का फायदा मिलने जा रहा है. राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा साल 2023 में शुरू की गई इस योजना के तहत अब महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की राशि मिलेगी. यह दूसरी बार होगा जब लाड़ली बहनों को बढ़ी हुई किस्त का लाभ नवंबर 2025 और भविष्य में जारी रहेगी जबकि मध्य प्रदेश सरकार तीसरी बार किस्त की राशि बढ़ाने का फैसला नहीं कर देती. शुरुआत में लाड़ली बहनों को योजना के तहत हर महीने 1000 रुपये दिए जा रहे थे. योजना की पहली किस्त 10 जून 2023 को जारी की गई थी. इसके बाद अक्टूबर 2023 से राशि बढ़ाकर 1250 रुपये कर दी गई थी, जो लगातार अक्टूबर 2025 तक महिलाओं के खातों में भेजी गई. अब नवंबर 2025 से फिर एक बार किस्त में 250 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, यानी अब हर लाभार्थी महिला को मंथली 1500 रुपये मिलेंगे. लाड़ली बहनों के खाते में आएंगे 1500 रुपये नवंबर महीने में प्रदेश की मोहन सरकार लाड़ली बहनों के खाते में 1500 रुपये ट्रांसफर करेगी। बता दें कि, लाड़ली बहना योजना की शुरुआत में महिलाओं के खाते में हर महीने 1000 रुपये भेजे जाते थें। इस राशि को धीरे-धीरे बढ़ाया गया। प्रदेश सरकार ने 1000 से बढ़ाकर 1250 और फिर 1500 रुपये कर दिए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार योजना की 30वीं किस्त(Ladli Behna Yojana 30th installment) 5 नवंबर से 10 नवंबर 2025 के बीच महिलाओं के खातों में भेज सकती है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं की गई है। 12 अक्टूबर को मिली थी 29वीं किस्त जानकारी के मुताबिक, लाड़ली बहना योजना की 29वीं किस्त 12 अक्टूबर को जारी की गई थी। मोहन सरकार ने 1.26 लाख लाड़ली बहनों के खाते में 1,541 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थें। इसी महीने भाई दूज पर और 250 रुपये सरकार ने ट्रांसफर किए। अब जल्द ही योजना की 30वीं किस्त लाड़ली बहनों को मिलेगी। लाड़ली बहनों को मिलेंगे 3 हजार रुपये? सरकार की घोषणा के मुताबिक, लाड़ली बहनों को 2028 तक 3000 हजार रुपये मिलेंगे। योजना की राशि में साल-दर-साल बढ़ोत्तरी की जाएगी। जिस तरह सरकार ने राशि 1000 से बढ़ाकर 1250 और फिर 1500 रुपये कर दिए। उसी तरह साल 2028 तक ये राशि 3 हजार कर दी जाएगी। लाड़ली बहना योजना में ये अपात्र     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।जिनके या उनके परिवार के कोई सदस्य इनकम टैक्स देते हैं।     जिनके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में है (स्थायी, संविदा या पेंशन पाने वाला)।     अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।जो खुद किसी और सरकारी योजना से हर महीने     1250 रुपये या उससे ज्यादा की राशि पा रही हैं जिनके परिवार में कोई वर्तमान या पूर्व सांसद या विधायक हो।     जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी बोर्ड, निगम, मण्डल आदि का अध्यक्ष, संचालक या सदस्य हो।जिनके परिवार में कोई स्थानीय निकाय का चुना हुआ जनप्रतिनिधि हो (पंच और उपसरपंच को छोड़कर)।जिनके परिवार के पास कुल 5 एकड़ से ज्यादा खेती की जमीन हो।जिनके परिवार के नाम पर कोई चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) रजिस्टर्ड हो। लाभार्थी सूची में ऐसे चेक करें अपना नाम     लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।     वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर     क्लिक करें।     दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें।     कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।     मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें।     ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी।

अदृश्य ‘अभिमन्यु’ से बढ़ेगी भारत की शक्ति, S-400 और THAAD को झेलना होगा झटका

नई दिल्ली भारतीय नौसेना अपनी कैरियर एयर विंग्स में अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स को इंटीग्रेट करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. बेंगलुरु स्थित न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज (एनआरटी) द्वारा विकसित ‘अभिमन्यु’ ड्रोन इस पहल की अगुवाई कर रहा है. यह ड्रोन नेवल कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयर व्हिकल (एन-सीसीएवी) प्रोग्राम का आधार बन रहा है, जो भारत को वैश्विक ‘लॉयल विंगमैन’ ड्रोन्स की तर्ज पर क्रूड फाइटर एयरक्राफ्ट के साथ तैनाती करने वाला देश बनाने की दिशा में ले जा रहा है. साल 2026 तक उड़ान भरने की योजना वाले इस जेट-पावर्ड स्टील्थ ड्रोन में एआई-ड्रिवन क्षमताएं, मैन्‍ड-अनमैन्ड टीमिंग (एमयूएम-टी) और एयर-टू-एयर किल क्षमता शामिल होगी, जो नौसेना की स्ट्राइक ग्रुप्स को नई ताकत प्रदान करेगी. स्‍टील्‍थ होने की वजह से रडार और एयर डिफेंस सिस्‍टम के लिए इसे कैच कर पाना काफी मुश्किल होगा. दिलचस्‍प बात यह है कि ‘अर्जुन’ नाम से टैंक पहले से ही इंडियन आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहा है. अब अभिमन्‍यु की बारी की बारी है. अभिमन्यु एक जेट-पावर्ड, लो रडार क्रॉस-सेक्शन (आरसीएस) ड्रोन है, जो विशेष रूप से भारतीय नौसेना के मौजूदा और भविष्य के कैरियर-बेस्ड फाइटर्स जैसे मिग-29K और आने वाले राफेल-M के साथ लॉयल विंगमैन के रूप में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसका डिजाइन स्वेप्ट विंग्स, हॉरिजॉन्टल स्टेबलाइजर्स, सिंगल वर्टिकल टेल और रियर फ्यूजलाज के दोनों तरफ ट्विन नैरो एयर इंटेक्स से युक्त है. एक खास फीचर है फ्यूजलाज के चारों ओर लपेटी गई कंटीन्यूअस चाइन-लाइन, जो रडार रिफ्लेक्शन्स को कम करके कंटेस्टेड एनवायरनमेंट्स में सर्वाइवेबिलिटी बढ़ाती है. हालांकि, अभिमन्यु में कई स्टील्थ-इंस्पायर्ड फीचर्स हैं, लेकिन यह पूरी तरह लो-ऑब्जर्वेबल प्लेटफॉर्म नहीं है. इसका कॉन्फिगरेशन रडार सिग्नेचर को कम करने और कॉस्ट-इफेक्टिवनेस के बीच संतुलन बनाता है. महंगे इंटरनेशनल समकक्षों की तुलना में यह रैपिड प्रोडक्शन और एक्सपेंडेबिलिटी पर फोकस करता है. एआई-ड्रिवन सिस्टम्स इसे ऑटोनॉमस ऑपरेशन्स के लिए सक्षम बनाते हैं, जबकि एयर-टू-एयर किल क्षमता इसे दुश्मन एयरक्राफ्ट को न्यूट्रलाइज करने में सक्षम बनाएगी. एमयूएम-टी कॉन्फिगरेशन में यह क्रूड पायलट्स के साथ टीम बनाकर काम करेगा, सेंसर रीच बढ़ाएगा और सिचुएशनल अवेयरनेस प्रदान करेगा. ऑपरेशनल रोल और स्ट्रैटेजिक विजन एन-सीसीएवी कार्यक्रम के तहत अभिमन्यु ड्रोन्स भारतीय नौसेना के फाइटर्स के साथ एमयूएम-टी में उड़ान भरेंगे. ये ड्रोन्स कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स की सेंसर रीच बढ़ाएंगे, सिचुएशनल अवेयरनेस को मजबूत करेंगे और कैरियर-बेस्ड तथा ऑनशोर ऑपरेशन्स में टैक्टिकल फ्लेक्सिबिलिटी प्रदान करेंगे. हाई-रिस्क या कॉम्प्लेक्स मिशन्स को संभालकर ये ह्यूमन पायलट्स के एक्सपोजर को कम करेंगे और कैरियर एयर विंग्स की ऑफेंसिव-डिफेंसिव क्षमताओं को बढ़ाएंगे. नौसेना एक फ्लीट ऑफ अभिमन्यु ड्रोन्स को विभिन्न क्षमताओं के साथ तैनात करने की योजना बना रही है, जो इटरेटिव डेवलपमेंट साइकिल्स से हासिल होगी. ‘इंडिया डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, इससे सर्विलांस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, स्ट्राइक और स्वार्मिंग मिशन्स के लिए स्पेशलाइज्ड वैरिएंट्स उभर सकते हैं. यह वर्तमान और भविष्य की नौसेना ऑपरेशन्स को सपोर्ट करेगा, खासकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के मद्देनजर. अभिमन्यु न केवल फोर्स मल्टीप्लायर बनेगा, बल्कि स्वदेशी ड्रोन टेक्नोलॉजी में आगे की नींव रखेगा. इंडियन नेवी को और मजबूत बनाने की तैयारी है.  डेवलपमेंट स्टेटस और फंडिंग अभिमन्यु प्रोजेक्ट को रक्षा मंत्रालय की इनोवेशन्स फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडीईएक्स) पहल से आंशिक फंडिंग मिल रही है. साथ ही एनआरटी से इंटरनल फंडिंग भी की जा रही है. आईडीईएक्स के तहत वर्तमान फंडिंग सीलिंग करीब 2.85 मिलियन डॉलर है, लेकिन ऑपरेशनल स्टेटस और फ्यूचर वैरिएंट्स के लिए काफी अधिक निवेश की जरूरत होगी. भारतीय नौसेना ने एन-सीसीएवी के ऑपरेशनल रेडीनेस पर पहुंचने पर मिनिमम परचेज क्वांटिटी की प्रतिबद्धता जताई है, जो प्रोडक्शन और डिप्लॉयमेंट के लिए बेसलाइन सुनिश्चित करेगी. 2026 तक पहली उड़ान का लक्ष्य रखा गया है, जो प्रोजेक्ट की तेज गति को दर्शाता है. अभिमन्यु भारतीय वायुसेना के कॉम्बैट एयर टीमिंग सिस्टम (सीएटीएस) प्रोग्राम के लिए विकसित एचएएल वॉरियर से काफी छोटा और हल्का है. वॉरियर जहां हाई परफॉर्मेंस और ग्रेटर पेलोड कैपेसिटी पर जोर देता है, वहीं अभिमन्यु की ताकत मॉड्यूलैरिटी, कॉस्ट-इफेक्टिवनेस और लार्ज-स्केल डिप्लॉयमेंट में है. इंटरनेशनल स्तर पर यह चीन के जीजे-11 शार्प स्वॉर्ड या यूएस नेवी के एक्सपेंडेबल कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (सीसीए) ड्रोन्स की तुलना में लोअर-एंड सॉल्यूशन है. फिर भी, यह भारत की जरूरतों के अनुरूप प्रैग्मैटिक अप्रोच अपनाता है, जहां अफोर्डेबिलिटी और रैपिड इटरेशन प्राथमिकता हैं. चुनौतियां भी कम नहीं मोमेंटम के बावजूद प्रोग्राम कई चुनौतियों का सामना कर रहा है. कैरियर एविएशन के डिमांडिंग एनवायरनमेंट में रिलायबल ऑटोनॉमस ऑपरेशन हासिल करना प्रमुख है. हाई-स्पीड, हाई-ऑल्टीट्यूड क्रूड फाइटर्स और अभिमन्यु के बीच परफॉर्मेंस गैप को ब्रिज करना भी जरूरी. इसके अलावा, सस्टेन्ड फंडिंग सुनिश्चित करना और भारत की ऐतिहासिक डिफेंस प्रोक्योरमेंट डिले को पार करना चुनौतीपूर्ण रहेगा. फिर भी अभिमन्यु प्रोजेक्ट भारतीय नौसेना एविएशन के लिए पिवोटल स्टेप है. यह अनमैन्ड सिस्टम्स को फ्यूचर कॉम्बैट ऑपरेशन्स में इंटीग्रेट करने की नौसेना की कमिटमेंट को सिग्नल करता है. सफल होने पर एन-सीसीएवी प्रोग्राम नौसेना की ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी, सर्वाइवेबिलिटी और स्ट्राइक कैपेबिलिटी को काफी बढ़ाएगा. साथ ही, यह स्वदेशी ड्रोन टेक्नोलॉजी में आगे की एडवांसमेंट्स की नींव बनेगा.

1 जनवरी से पैन कार्ड रहेगा गैरमान्य, आयकर विभाग ने दी अहम चेतावनी

नई दिल्ली अगर आपने बार-बार की डेडलाइन के बाद भी अभी तक अपने पैन कार्ड (PAN Card) को आधार कार्ड (Aadhaar Card) से ल‍िंक नहीं कराया है तो यह खबर आपके ल‍िए है. जी हां, ऐसा नहीं करने वालों का पैन (PAN) 1 जनवरी 2026 से काम नहीं करेगा. इनकम टैक्‍स व‍िभाग की तरफ से इसको लेकर बड़ा ऐलान क‍िया गया है. जी हां, आयकर व‍िभाग की तरफ से साफ शब्‍दों में कहा गया है क‍ि यद‍ि आपका पैन कार्ड (PAN Card) आधार कार्ड से नहीं जुड़ा तो 1 जनवरी 2026 से वह काम नहीं करेगा. 31 दिसंबर आधार से ल‍िंक करा लें पैन पैन कार्ड के काम नहीं करने के बाद आपके ल‍िए इनकम टैक्‍स भरने से लेकर रिफंड लेने तक सब मुश्किल हो जाएगा. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) की तरफ से कहा गया क‍ि 1 अक्टूबर 2025 से पहले बने पैन को 31 दिसंबर 2025 तक आधार से ल‍िंक कराया जाना जरूरी है. नहीं तो आपका पैन (PAN) बंद हो जाएगा. आपको बता दें पैन (PAN) 10 ड‍िज‍िट का एक नंबर है. इसे आयकर विभाग की तरफ से जारी क‍िया जाता है. PAN से जुड़ी रहती है सभी टैक्स संबंधी जानकारी पैन (PAN) से आपकी सभी टैक्स संबंधी जानकारी जुड़ी रहती है. इसके जर‍िये आप टैक्स भरना, टीडीएस कटौती और रिटर्न भरने आद‍ि के काम करते हैं. आयकर विभाग की तरफ से फ्रॉड को रोकने के लिए पैन (PAN) को आधार से जोड़ना जरूरी क‍िया गया है. पहले इसको लेकर आयकर व‍िभाग की तरफ से कई बार तारीख बढ़ाने का ऐलान क‍िया गया ताकि लोगों को ज्‍यादा टाइम म‍िल सके. इसमें देरी पर 1000 रुपये का जुर्माना भी है. पैन कार्ड बंद होने से क्‍या नुकसान होगा? > आप टैक्स रिटर्न नहीं भर सकेंगे. > पुराने रिटर्न प्रोसेस नहीं होंगे. > रिफंड नहीं मिलेगा. > गलत रिटर्न के मामले रुक जाएंगे. > ज्यादा टीडीएस कटेगा. ऑनलाइन पैन को आधार से कैसे ल‍िंक करें? > सबसे पहले आयकर व‍िभाग की वेबसाइट www.incometax.gov.in पर जाएं. > इसके बाद क्‍व‍िक लिंक में जाकर 'लिंक आधार' क्लिक करें. > अब पैन (10 अंक) और आधार (12 अंक) दर्ज करें. > यह ध्‍यान रखें क‍ि आप अपना आधार वाला नाम ही लिखें. > 'मैं आधार डिटेल वैलिडेट करने को सहमत हूं' पर टिक करें. > अब वैलिडेट क्लिक करें. 31 दिसंबर के बाद जोड़ने पर 1000 रुपये जुर्माना यद‍ि आप 31 दिसंबर 2025 के बाद पैन और आधार को ल‍िंक कर रहे हैं तो आपको 1000 रुपये जुर्माना देना होगा. ल‍िंक करने का प्रोसेस करने के बाद आपको पॉप-अप आएगा 'पेमेंट डिटेल नहीं मिली'. यहां आप 'ई-पे टैक्स' (E-Pay Tax) पर क्लिक करें. अब अपना पैन नंबर डालकर, मोबाइल नंबर डालें, उसके ऊपर ओटीपी आएगा. अब असेसमेंट ईयर स‍िलेक्‍ट करें. नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड आदि से पेमेंट करें. आपको चालाना म‍िल जाएगा.  

जानिए पेट्रोल पंप मालिक कितना कमा सकते हैं, एक लीटर पर 4.30 रुपये का कमीशन जोड़कर

मुंबई  एक बार लागत और फिर जिंदगी भर कमाई. एक ऐसा बिजनेस जो गांव से लेकर अब बड़े शहर तक में धड़ल्ले से चलता है.आगे भी कमाई गुलजार रहने वाला ये बिजनेस. उस बिजनेस का नाम है- फ्यूल पंप (Fuel Pump), जिसे आम बोलचाल में पेट्रोल पंप (Petrol Pump) कहते हैं. वैसे तो पेट्रोल पंप खोलना आसान बात नहीं है और हर कोई खोल भी नहीं सकता. लेकिन जो खोल लेता है, वो फिर कमाई में कभी पीछे नहीं रहता. आज हम आपको पूरा गणित बताएंगे कि कैसे एक-एक लीटर पेट्रोल-डीजल पर पंप मालिक को मोटी कमाई होती है.  दरअसल, देशों में वाहनों की संख्या हर दिन बढ़ती जा रही है. ये वो दौर है जब हर घर कार की कल्पना की जा रही है. अभी भी देश में 90 फीसदी से ज्यादा पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियां बिकती हैं. फिर पेट्रोल पंप मालिकों की कमाई में उसी हिसाब से बढ़ रही है. फिलहाल पेट्रोल पंप बिजनेस एक आकर्षक और स्थिर व्यवसाय के रूप में उभरा है.  आप कैसे खोल हो सकते हैं पेट्रोल पंप ये सच है कि पेट्रोल पंप खोलने के लिए मोटा पैसा लगाना होता है. साथ ही जटिल लाइसेंसिंग प्रक्रिया, मोटा निवेश और फिर कंपीटिशन इस फील्ड में आम बात है. अगर आप इन चुनौतियों का सामना कर लेते हैं तो फिर बेहतरीन दैनिक आय एक जरिया है ये बिजनेस.    – ग्रामीण इलाकों में पेट्रोल पंप खोलने के लिए कम से कम 20 लाख रुपये की जरूरत होती है, जबकि शहरी इलाकों में 40 से 50 लाख रुपये तक निवेश आम बात है. इसमें टैंक, डिस्पेंसर और बुनियादी ढांचों की लागत शामिल है. – जमीन की कीमत शहर के हिसाब ज्यादा-कम हो सकती है, इससे लागत बढ़ भी सकती है. बड़े शहरों में एक करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश भी संभव है. पेट्रोल पंप ओपन के लिए आप बैंकों से 2 करोड़ रुपये तक लोन ले सकते हैं.  अब आइए कमाई की बात करते हैं, सबसे पहले आपको बताते हैं कि पेट्रोल-डीजल पर पंप ऑनर को कैसे कमाई होती है. दरअसल, सरकार ने हर लीटर पेट्रोल-डीजल पर पंप ऑनर के लिए कमीशन तय किया हुआ है. पेट्रोल पंप उतना ही वसूलता है, पेट्रोल पंप ऑनर अपने मन से एक पैसा भी ज्यादा नहीं वसूल सकता.   दिल्ली में 1 लीटर पेट्रोल पर कितना कमीशन?  फिलहाल दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये है, पेट्रोल पंप ऑनर को इसमें से 4.39 रुपये मिलता है, यानी दिल्ली में 1 लीटर पेट्रोल पर पंप ऑनर को 4.39 रुपये की कमाई होती है. बता दें, दिल्ली में पेट्रोल का बेस प्राइस एवरेज 52.84 रुपये प्रति लीटर है, जिसपर एक्‍साइज ड्यूटी 21.90 रुपये है, जो कि केंद्र सरकार वसूलती है. एक लीटर पेट्रोल पर 15.40 रुपये का VAT वसूला जाता है, जो राज्‍य सरकार लेती है. इसके अलावा कुछ और छोटे-मोटे एवरेज चार्ज 0.26 रुपये लगाकर 1 लीटर पेट्रोल के दाम तय किए जाते हैं.  यानी दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल पर पंप मालिक को 4.39 रुपये मिलता है. हालांकि इसमें पेट्रोल पंप मालिक को सारा खर्च निकालना होता है. एक पेट्रोल पंप पर दर्जनभर से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं, उनकी सैलरी से लेकर पेट्रोल पंप के रख-रखाव पर मोटा खर्च होता है. फिर भी ये फायदे का सौदा है.  मान लीजिए, एक पेट्रोल पंप पर दिनभर में 5000 लीटर पेट्रोल बिकता है, नियम के मुताबिक उसे कमीशन के तौर पर 21,950 रुपये मिलेंगे. इसमें 50 फीसदी रकम खर्च निकाल देने पर भी कम से कम 10 हजार रुपये हर दिन कमाई संभव है.  एक लीटर डीजल पर पंप मालिक को कितनी कमाई अगर डीजल की बात करें तो दिल्‍ली में 1 लीटर पर 12.83 रुपये प्रति लीटर वैट (VAT) वसूला जाता है. जबकि केंद्र सरकार एक्‍साइज ड्यूटी (Excise Duty) 17.80 रुपये प्रति लीटर चार्ज कर रही है. एवरेज डीलर कमीशन 3.02 रुपये प्रति लीटर है, यानी हर एक लीटर डीजल बेचने पर पंप ऑनर के खाते में 3.02 रुपये जाता है, जो कम नहीं है. दिल्ली में डीजल का बेस प्राइस 53.76 रुपये प्रति लीटर है. इसके अलावा कुछ अन्‍य छोटे-मोटे चार्ज 0.26 रुपये वसूले जाते हैं. इसके बाद 1 लीटर डीजल के दाम तय होते हैं. 18 जुलाई 2025 को दिल्‍ली में 1 लीटर डीजल की कीमत (Diesel Price in Delhi) 87.67 रुपये प्रति लीटर थी.  बता दें, बड़े वाहनों में खासकर कमर्शियल वाहनों में डीजल की खपत ज्यादा है, और हर लीटर पर पंप ऑनर को 3.02 रुपये मिलता है. एक अनुमान के मुताबिक अगर पंप 24 घंटे में 5000 लीटर डीजल बेचता है तो कमीशन के तौर पर उसे करीब 15,100 रुपये मिलेंगे, इसमें से आधा खर्च काट दें तो 7500 रुपये बचत संभव है, यानी पेट्रोल और डीजल दोनों के बिक्री के आंकड़ों को मिला दें तो एक घनी आबादी वाले इलाके में पेट्रोल पंप ऑनर आसानी से 15000 रुपये प्रति दिन कमाई कर सकता है. कमीशन एक निश्चित राशि है, इसलिए पूरी कमाई बिक्री की मात्रा और लोकेशन पर निर्भर करती है. कैसे शुरू करें पेट्रोल पंप    पेट्रोल पंप शुरू करने के लिए आवेदक की आयु 21-60 साल होनी चाहिए. भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है. पेट्रोल पंप खुद की या किराये की जमीन पर खोल सकते हैं, शहरी इलाके में पेट्रोल पंप खोलने के लिए 800-1200 वर्ग मीटर और ग्रामीण इलाकों में 1200-1600 वर्ग मीटर जमीन होनी चाहिए. देश की तमाम बड़ी तेल कंपनियां (जैसे IOCL, BPCL, HPCL, रिलायंस) समय-समय पर डीलरशिप के लिए विज्ञापन जारी करती हैं. आवेदन ऑनलाइन जमा करना होता है. जिसमें आधार, पैन, जमीन के दस्तावेज और एनओसी जैसे दस्तावेज जरूरी हैं. अधिक जानकारी: www.iocl.com, www.reliancepetroleum.com पर जाकर जुटा सकते हैं.

दुनिया पर मंडरा रहा है तापमान संकट, UNEP रिपोर्ट में खुलासा – 2100 तक 2.5°C तक बढ़ेगा पारा

नई दिल्ली अगर सभी देश अपनी जलवायु सुधारने की प्रतिज्ञाओं को पूरी तरह लागू करें, तो भी इस सदी में वैश्विक तापमान 2.3 से 2.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है. यह आंकड़ा पिछले साल की भविष्यवाणी 2.6-2.8 डिग्री से थोड़ा कम है. लेकिन वर्तमान नीतियां अब भी धरती को 2.8 डिग्री के रास्ते पर ले जा रही हैं, जो पिछले साल के 3.1 डिग्री से कम है. यह बात संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की 'एमिशन गैप रिपोर्ट 2025' में कही गई है. रिपोर्ट कहती है कि दुनिया अभी भी पेरिस समझौते के 1.5 डिग्री के लक्ष्य से बहुत दूर है. अगले दशक में तापमान अस्थायी रूप से 1.5 डिग्री से ऊपर चला जाएगा, जब तक देश जल्दी कदम न उठाएं. यूएनईपी की कार्यकारी निदेशक इंगर एंडरसन ने कहा कि देशों को पेरिस समझौते के तहत तीन मौके मिले हैं वादे निभाने के लिए, लेकिन हर बार वे लक्ष्य से चूक गए. राष्ट्रीय योजनाओं से कुछ प्रगति हुई है, लेकिन यह काफी तेज नहीं है. इसलिए हमें बिना रुके उत्सर्जन कम करने की जरूरत है, खासकर मुश्किल भू-राजनीतिक स्थिति में. यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन से ठीक पहले आई है, जहां विश्व नेता इकट्ठा होंगे. आइए रिपोर्ट की मुख्य बातें समझते हैं. पेरिस लक्ष्य से कितना दूर हैं हम? पेरिस समझौता 2015 का है, जिसमें दुनिया ने तय किया कि तापमान बढ़त को 1.5 डिग्री तक सीमित रखना है. लेकिन रिपोर्ट कहती है कि अगर देश अपनी वर्तमान प्रतिज्ञाओं (एनडीसी) पूरी करें, तो तापमान 2.3-2.5 डिग्री बढ़ेगा. यह थोड़ा बेहतर है, लेकिन अभी भी खतरनाक. वर्तमान नीतियां 2.8 डिग्री का रास्ता दिखा रही हैं. रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अगले 10 सालों में तापमान अस्थायी रूप से 1.5 डिग्री पार कर जाएगा. इसे रोकने के लिए बढ़त को सिर्फ 0.3 डिग्री तक सीमित रखना होगा. 2100 तक तापमान को नीचे लाना होगा. अगर ऐसा न हुआ, तो बाढ़, सूखा और चरम मौसम जैसी आपदाएं बढ़ेंगी. देशों की प्रतिज्ञाएं: कितनी पूरी हुईं? पेरिस समझौते के 195 देशों में से सिर्फ एक तिहाई (यानी 65 देश) ने इस साल नई या अपडेटेड राष्ट्रीय प्रतिज्ञाएं (एनडीसी) जमा कीं. ये देश वैश्विक उत्सर्जन का 63 प्रतिशत कवर करते हैं. बाकी देशों ने पुरानी योजनाओं को ही जारी रखा. जी20 देश, जो वैश्विक उत्सर्जन का 77 प्रतिशत हिस्सा हैं. ये भी 2030 के अपने लक्ष्यों को पूरा करने के रास्ते पर नहीं हैं. 2035 तक और गहरी कटौती की जरूरत है, लेकिन वे भी पीछे हैं. रिपोर्ट कहती है कि अमीर देशों ने गरीब देशों को मदद देने का वादा किया था, लेकिन वह भी पूरा नहीं हो रहा. 2024 में उत्सर्जन: रिकॉर्ड स्तर पर 2024 में वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 57.7 गीगाटन कार्बन डाइऑक्साइड समकक्ष (जीटीसीओ2ई) पहुंच गया. यह पिछले साल से 2.3 प्रतिशत ज्यादा है. इस बढ़ोतरी का आधा से ज्यादा हिस्सा जंगलों की कटाई और भूमि उपयोग में बदलाव से आया. जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल, गैस) से उत्सर्जन भी बढ़ता रहा. शीर्ष उत्सर्जक देशों में भारत और चीन ने सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की. यूरोपीय संघ अकेला बड़ा अर्थव्यवस्था वाला क्षेत्र था, जहां उत्सर्जन कम हुआ. रिपोर्ट कहती है कि अगर 2019 के स्तर से तुलना करें, तो 2030 तक उत्सर्जन 26 प्रतिशत कम और 2035 तक 46 प्रतिशत कम होना चाहिए. तभी 1.5 डिग्री का लक्ष्य संभव है. विशेषज्ञों की राय: जागने का समय जलवायु विशेषज्ञों ने रिपोर्ट को चेतावनी का संकेत बताया है. यूनियन ऑफ कंसर्न्ड साइंटिस्ट्स की रेचल क्लीटस ने कहा कि ये आंकड़े चिंताजनक, गुस्सा दिलाने वाले और दिल तोड़ने वाले हैं. अमीर देशों की कमजोर कार्रवाई और जीवाश्म ईंधन हितों की बाधा इसके लिए जिम्मेदार हैं. एम्बर के रिचर्ड ब्लैक ने कहा कि राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा योजनाएं साफ ऊर्जा संक्रमण की सकारात्मक तस्वीर दिखाती हैं. इंटरनेशनल क्लाइमेट पॉलिसी हब की कैथरीन अब्रेऊ ने जोर दिया कि पेरिस समझौता विफल नहीं हो रहा, बल्कि कुछ शक्तिशाली जी20 देश वादे निभाने में असफल हो रहे हैं. तत्काल कार्रवाई की जरूरत रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि बिना तेज और बड़े उत्सर्जन कटौती के, दुनिया आपदा वाली गर्मी में फंस जाएगी. यह गरीब और कमजोर देशों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाएगी. नवीकरणीय ऊर्जा, जंगलों की रक्षा और जीवाश्म ईंधन छोड़ना जरूरी है.  यह रिपोर्ट हमें याद दिलाती है कि समय तेजी से निकल रहा है. अगर हम अब नहीं चेते, तो आने वाली पीढ़ियां भुगतेंगी. जलवायु परिवर्तन सबकी जिम्मेदारी है, लेकिन अमीर देशों को नेतृत्व करना होगा.  

121 सीटों के लिए आज वोटिंग, 45,000+ बूथों पर EVM में बंद होगी 1314 उम्मीदवारों की किस्मत

पटना बिहार में पहले चरण मतदान आज यानी छह नवंबर को हुआ शुरू।  115 विधानसभा क्षेत्र के 45341  मतदान केंद्रों पर सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक वोटिंग होगी। छह विधानसभा क्षेत्रों के 2135 मतदान केंद्रों पर सुबह सात बजे से पांच बजे तक ही वोटिंग होगी।  बुधवार सुबह से ही डिस्पैच सेंटरों से मतदान कर्मी ईवीएम-वीवीपैट और अन्य सामग्री लेने में जुट गए थे ।  शाम तक सभी मतदान केंद्र पर सुरक्षा बल पहुंचें  । आज गुरुवार सुबह पांच बजे ही बूथ लेवल एजेंटों की मौजूदगी में मॉक पोल किया । इसके दो घंटे बाद यानी सात बजे मतदान शुरू हुआ । पहले चरण में इन जिलों में मतदान पहले चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर मतदान जारी । यह जिले हैं- मधेपुरा, सहरसा, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, सिवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा, नालंदा, पटना, भोजपुर और बक्सर। इन 121 सीटों पर कुल 2496 नामांकन दाखिल हुए थे। जांच के क्रम में 1939 को वैध पाया गया। उनमें से 70 प्रत्याशियों ने नामांकन बाद में वापस ले लिया। इसके बाद, कई सेट में नामांकन की छंटनी करते हरेक प्रत्याशी के एक नामांकन को लिया गया तो प्रत्याशियों की कुल वास्तविक संख्या 1314 रह गई। इनमें 1192 पुरुष और 122 महिलाएं शामिल हैं। इस चरण में 102 सामान्य और 19 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों पर मतदान होगा। 10 वीआईपी सीटों का हाल तारापुर: इस सीट पर बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मैदान में हैं. उनकी आरजेडी के अरुण कुमार साह से सीधी टक्कर मानी जा रही है. जन सुराज के संतोष कुमार सिंह और तेज प्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल के सुखदेव यादव भी चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं. राघोपुर: यह आरजेडी की पारिवारिक सीट मानी जाती है. इस बार यहां से राजद नेता तेजस्वी यादव तीसरी बार मैदान में हैं. तेजस्वी ने यहां 2015 और 2020 में भाजपा के सतीश कुमार को हराया था. एनडीए की तरफ से सतीश यादव उन्हें चुनौती दे रहे हैं तो जनसुराज के चंचल कुमार भी सामने हैं. मोकामा: यह सीट इस वक्त जन सुराज समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या और जदयू उम्मीदवार अनंत सिंह की गिरफ्तारी को लेकर काफी चर्चा में है. यहां दो बाहुबलियों की टक्कर है. एक तरफ अनंत सिंह तो दूसरी तरफ  आरजेडी के टिकट पर सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी हैं.  अलीनगर: इस सीट पर बीजेपी ने लोकगायिका मैथिली ठाकुर को मैदान में उतारा है. ठाकुर का यह पहला चुनाव है. उनका मुकाबला आरजेडी के विनोद मिश्रा से माना जा रहा है. बीजेपी उनकी लोकप्रियता को वोट में बदलने की कोशिश में है. छपराः छपरा सीट से मशहूर भोजपुरी गायक खेसारी लाल यादव आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. यहां उनका मुकाबला बीजेपी की छोटी कुमारी के साथ माना जा रहा है. लेकिन निर्दलीय राखी गुप्ता भी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की पूरी कोशिश कर रही हैं.  लखीसराय: बिहार के दूसरे उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा लखीसराय से 2010 से लगातार विधायक हैं. 2020 में उन्होंने कांग्रेस के अमरेश कुमार को हराया था. इस बार भी विजय सिन्हा के सामने अमरेश कुमार मैदान में हैं.  महुआ: लालू यादव द्वारा पार्टी और परिवार से निकाले जाने के बाद तेज प्रताप यादव महुआ से चुनाव लड़ रहे हैं. उनकी टक्कर आरजेडी विधायक मुकेश रोशन से मानी जा रही है. एनडीए की तरफ से एलजेपी के संजय कुमार सिंह ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है.  बेगूसराय: कभी वामपंथ का गढ़ माने जाने वाली इस सीट पर 2020 में बीजेपी ने जीत दर्ज की थी. इस बार बीजेपी के कुंदन कुमार का मुकाबला कांग्रेस की अमिता भूषण से है. मंडल युग के बाद यहां की राजनीतिक गणित बदल चुकी है. बांकीपुर: यह पटना की शहरी सीट है, जहां बीजेपी के नितिन नवीन लगातार जीतते आ रहे है. इस बार भी पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है. उन्हें चुनौती देने के लिए आरजेडी ने रेखा गुप्ता को उतारा है.  दरभंगा शहरी: मिथिलांचल की इस प्रमुख सीट से बीजेपी के राजस्व मंत्री संजय सरावगी मैदान में हैं. उन्हें चुनौती देने के लिए जन सुराज ने पूर्व आईपीएस आरके मिश्रा और मुकेश सहनी की पार्टी ने उमेश सहनी को उम्मीदवार बनाया है.  पहले चरण में किस दल से कितने उम्मीदवार पहले चरण में एनडीए की ओर से जदयू के 57 उम्मीदवार, बीजेपी के 48, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 13 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के 2 उम्मीदवार मैदान में हैं. वहीं महागठबंधन की तरफ से आरजेडी के 71, कांग्रेस के 24 और वाम दलों के 14 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं. इनके अलावा विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) छह-छह सीट पर, सीपीएम तीन सीटों पर और इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (आईआईपी) दो सीटों पर चुनाव लड़ रही है. इस चरण में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के 118 उम्मीदवार भी किस्मत आजमा रहे हैं. पहले चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर वोटिंग पटना- मोकामा, बाढ़, बख्तियारपुर, दीघा, बांकीपुर, कुम्हरार, पटना सिटी, फतुहा, दानापुर, मनेर, फुलवारी शरीफ (SC), मसौढ़ी (SC), पालीगंज, बिक्रम भोजपुर– आरा, अगिआंव, शाहपुर, बड़हरा, जगदीशपुर, तरारी, संदेश बक्सर– बक्सर, डुमरांव, राजपुर, ब्रह्मपुर गोपालगंज- बैकुंठपुर, बरौली, गोपालगंज, कुचायकोट, भोरे (SC), हथुआ सीवान- जिरादेई, दरौली (SC), रघुनाथपुर, दरौंधा, बड़हरिया, गोरेयाकोठी, महारागंज, सीवान सारण- एकमा, मांझी, बनियापुर, तरैंया, मढौरा, छपरा, गड़खा (SC), अमनौर, परसा, सोनपुर मुजफ्फरपुर- गायघाट, औराई, मीनापुर, बोचहां (SC), सकरा (SC), कुढ़नी, मुजफ्फरपुर, कांटी, बरूराज, पारू, साहेबगंज वैशाली– राजापाकर, महुआ, महनार, राघोपुर, वैशाली, लालगंज, हाजीपुर, पातेपुर (SC) दरभंगा– कुशेश्वर स्थान (SC), गौरा बौराम, बेनीपुर, अलीनगर, दरभंगा ग्रामीण, दरभंगा, हायाघाट, बहादुरपुर, केवटी, जाले समस्तीपुर– कल्याणपुर(SC), वारिसनगर, समस्तीपुर, उजियारपुर, मोरवा, सरायरंजन, मोहिउद्दीननगर, विभूतिपुर, रोसड़ा (SC), हसनपुर मधेपुरा-आलमनगर (SC), बिहारीगंज, मधेपुरा, सिंहेश्वर (SC) सहरसा- सिमरी बख्तियारपुर, सोनबरसा (SC), महिषी, सहरसा खगड़िया- परबत्ता, बेलदौर, अलौली (SC), खगड़िया बेगूसराय– चेरिया बरियारपुर, बछवाड़ा, तेघरा, मटिहानी, साहबपुर कमाल, बेगूसराय, बखरी (SC) मुंगेर– जमालपुर, मुंगेर, तारापुर लखीसराय– सूर्यगढ़ा, लखीसराय शेखपुरा- बरबीघा, शेखपुरा नालंदा- हरनौत, अस्थावां, इस्लामपुर, हिलसा, नालंदा, राजगीर, बिहारशरीफ चुनाव आयोग की जानकारी के मुताबिक पांच विधानसभा क्षेत्रों में सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर एवं महिषी और मुंगेर के तारापुर, मुंगेर और जमालपुर विधानसभा क्षेत्रों में सभी बूथों तथा सूर्यगढ़ा विधानसभा क्षेत्र के 56 बूथों पर सुबह सात से … Read more