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वंदे मातरम् में भारत की आत्मा, सिर्फ़ गीत नहीं — CM विष्णु देव साय

रायपुर   “वंदे मातरम्” की 150वीं वर्षगांठ पूरे देश के लिए गर्व और राष्ट्रभक्ति का अद्वितीय अवसर है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के मार्गदर्शन में इस ऐतिहासिक पर्व को वर्षभर चलने वाले महाअभियान के रूप में मनाया जा रहा है। देश के साथ छत्तीसगढ़ में भी यह आयोजन जनभागीदारी के साथ चार चरणों में ग्राम पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक भव्य रूप में संपन्न किया जाएगा। पहला चरण 7 नवम्बर से होगा प्रारंभ वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर कार्यक्रम का शुभारंभ 7 नवम्बर 2025 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया जाएगा। यह राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रातः 10 से 11 बजे तक दूरदर्शन पर प्रसारित होगा। प्रधानमंत्री के उद्बोधन के पश्चात पूरे देश में एक साथ वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया जाएगा। गीत के बोल और धुन पोर्टल vandemataram150.in पर उपलब्ध हैं। चार चरणों में होगा वर्षभर आयोजन कार्यक्रम चार चरणों में आयोजित होगा- प्रथम चरण 7 से 14 नवम्बर 2025, द्वितीय चरण 19 से 26 जनवरी 2026, तृतीय चरण 7 से 15 अगस्त 2026 (हर घर तिरंगा अभियान के साथ), और चतुर्थ चरण 1 से 7 नवम्बर 2026 तक चलेगा। इस दौरान राज्य के सभी जिलों, जनपदों, ग्राम पंचायतों, शैक्षणिक संस्थानों, कार्यालयों एवं सामाजिक संगठनों में राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन के साथ विविध कार्यक्रम आयोजित होंगे। जिलों में मंत्रीगण और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता राज्य के सभी जिलों में मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे।प्रत्येक जिले में स्थानीय कलाकारों, छात्रों, सामाजिक संस्थाओं और नागरिक समूहों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि यह अभियान एक जनआंदोलन का रूप ले सके। विद्यालयों में विशेष गतिविधियां और रचनात्मक आयोजन प्रदेश के सभी विद्यालयों, महाविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में “वंदे मातरम्” विषय पर विशेष सभाएं, निबंध, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, पोस्टर निर्माण, एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ होंगी। एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड और स्कूल बैंड के माध्यम से वंदे मातरम से संबंधित संगीतमय प्रस्तुतियां दी जाएँगी। राज्य पुलिस बैंड भी सार्वजनिक स्थलों पर वंदे मातरम और देशभक्ति गीतों पर आधारित कार्यक्रमों से वातावरण को देशभक्ति के रंग में रंगेगा। ‘वंदे मातरम् ऑडियो-वीडियो बूथ’ एक अभिनव पहल राज्यभर में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत “वंदे मातरम् ऑडियो-वीडियो बूथ” स्थापित किए जाएंगे। इनमें नागरिक अपनी आवाज़ में वंदे मातरम् गाकर उसे पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे। पोर्टल पर गीत की मूल धुन और बोल की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। यह पहल लोगों को अपने तरीके से राष्ट्रप्रेम व्यक्त करने का अवसर देगी और आंदोलन को अधिक व्यक्तिगत और भावनात्मक बनाएगी। “वंदे मातरम्” की 150वीं वर्षगांठ केवल एक स्मरणीय अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र की एकता, आत्मगौरव और मातृभूमि के प्रति समर्पण का जीवंत संदेश है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी को भारत की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए उनमें देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रीय चेतना की भावना को और गहराई देगा। वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का स्वर है, जिसकी गूंज हर नागरिक के हृदय में नई ऊर्जा और गर्व का संचार करेगी। – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

सोमनाथ भारती यूपी पुलिस की नजर में फरार, जानिए इसके पीछे की कहानी

रायबरेली  दिल्ली के पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता सोमनाथ भारती के लिए यूपी से झटका देने वाली खबर है. यहां सोमनाथ भारती फरार घोषित कर दिए गए हैं. रायबरेली की एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहे एक पुराने मामले में पेश न होने पर अदालत ने उनके खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने पहले ही गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया था, लेकिन इसके बावजूद वे अदालत में हाजिर नहीं हुए. इसके बाद न्यायालय ने उन्हें फरार घोषित कर दिया है. क्‍या है मामला? दरअसल, यह मामला 11 जनवरी 2021 का है, जब रायबरेली शहर कोतवाली में सोमनाथ भारती के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था. उन पर आरोप था कि उन्होंने उस समय के कोतवाल अतुल सिंह को धमकाया था और अमर्यादित बयानबाजी की थी. भारती पर पुलिस के साथ दुर्व्यवहार और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे. मामले की सुनवाई रायबरेली के एमपी-एमएलए विशेष न्यायालय में चल रही है. अदालत के जज विवेक कुमार ने मामले में कई बार समन जारी किया, लेकिन सोमनाथ भारती की ओर से अदालत में कोई पेशी नहीं हुई. इसके बाद कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट जारी किया. फिर भी उनकी हाजिरी न होने पर कोर्ट ने अब उन्हें फरार घोषित कर दिया है. रायबरेली पुलिस को अब अदालत के आदेश के अनुसार सोमनाथ भारती को जल्‍द से जल्‍द कोर्ट के सामने पेश करना होगा.  

महिला क्रिकेट की सफलता के बाद, अब महिला कुश्ती पर भी ध्यान: प्रो रेसलिंग लीग भविष्य को नए सिरे से परिभाषित करने के लिए तैयार

“पिच से लेकर मैट तक – भारत की महिलाएं खेल सशक्तिकरण के एक नए युग की पटकथा लिख रही हैं।” नई दिल्ली जब पूरा देश भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक वर्ल्ड कप जीत का जश्न मना रहा है, उसी समय एक और खेल चर्चा में आने को तैयार है- महिला कुश्ती। क्रिकेट की इस बड़ी जीत से कुछ दिन पहले ही, प्रो रेसलिंग लीग (PWL) की वापसी की आधिकारिक घोषणा नई दिल्ली में एक शानदार प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई। यह लीग जनवरी 2026 से शुरू होगी। इन दोनों उपलब्धियों ने मिलकर भारतीय खेलों में एक नया दौर शुरू किया है, जहाँ महिला खिलाड़ी अब हर मैदान पर देश की शान बढ़ा रही हैं और सफलता की नई कहानियाँ लिख रही हैं। प्रो रेसलिंग लीग 2026: एक नई शुरुआत फिर से शुरू हो रही प्रो रेसलिंग लीग (PWL) एक बार फिर कुश्ती को चर्चा के केंद्र में लाने जा रही है। यह लीग अब और भी आधुनिक, पेशेवर और महिला-पुरुष दोनों खिलाड़ियों के लिए समान अवसरों वाली होगी। भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के सहयोग से यह लीग आईपीएल जैसी फ्रेंचाइज़ी प्रणाली पर आधारित होगी, जिसमें भारत के साथ-साथ विदेशी पहलवान भी मुकाबला करेंगे। लॉन्च के दौरान डब्ल्यूएफआई के प्रवक्ता ने कहा, “पीडब्ल्यूएल की वापसी सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं है, बल्कि यह भारत की महिला पहलवानों को दुनिया के मंच पर अपनी पहचान बनाने का मौका देगी। हमारी महिला क्रिकेट टीम की शानदार सफलता के बाद, अब कुश्ती भारत की खेल क्रांति का अगला अध्याय लिखने के लिए तैयार है।” महिलाओं की भागीदारी पर विशेष ध्यान PWL 2026 की सबसे खास बात यह है कि यह लीग महिला खिलाड़ियों की भागीदारी और नेतृत्व को बढ़ावा देने पर खास ध्यान देगी। यह पहल महिलाओं को न सिर्फ पहलवानी के अखाड़े में, बल्कि खेल के हर स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर देगी। लीग आयोजकों ने यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्धता जताई है: हर टीम में महिला खिलाड़ियों को बराबर प्रतिनिधित्व मिलेगा। महिला मुकाबलों का प्रसारण प्राइम टाइम में किया जाएगा, ताकि उनकी लोकप्रियता और दर्शक संख्या बढ़े। उभरती हुई पहलवानों को अनुभवी चैंपियनों से जोड़ा जाएगा, ताकि वे उनसे सीख सकें और आगे बढ़ें। महिला खिलाड़ियों को बराबर इनामी राशि और स्पॉन्सरशिप के अवसर दिए जाएंगे। यह पहल भारत में खेलों में लैंगिक समानता (gender parity) की बढ़ती भावना को मजबूती देती है और देशभर की युवा लड़कियों के लिए कुश्ती को एक प्रेरणादायक करियर विकल्प के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखती है। पीडब्ल्यूएल के सीईओ अखिल गुप्ता ने कहा, “प्रो रेसलिंग लीग की वापसी सिर्फ एक खेल को फिर से शुरू करने की बात नहीं है, यह एक सपने को दोबारा जगाने की कोशिश है। हमारी महिला पहलवानों में वो काबिलियत, हौसला और जुनून है कि वे दुनिया के किसी भी मंच पर डटकर खड़ी हो सकती हैं। बराबर के अवसर और बेहतर पहचान के साथ, हम ऐसा भविष्य बना रहे हैं जहाँ कुश्ती हर लड़की को यह विश्वास दिलाए कि वह भी कर सकती है। यह सिर्फ एक लीग नहीं, बल्कि भारत में ताकत और बहनचारे का आंदोलन है।” क्रिकेट की प्रेरणा, कुश्ती का अवसर भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विश्व कप जीत ने प्रशंसकों और प्रायोजकों की नज़र में महिला खिलाड़ियों की छवि को एक नई पहचान दी है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह जोश अब महिला कुश्ती तक भी पहुँचेगा, जिससे प्रो रेसलिंग लीग (PWL) में कॉरपोरेट निवेश, विज्ञापन और दर्शकों की बढ़ती दिलचस्पी के नए अवसर खुलेंगे। पहले से ही भारत के पास साक्षी मलिक, अंतिम पंघाल और विनेश फोगाट जैसी विश्वस्तरीय पहलवान हैं। ऐसे में PWL देश में कुश्ती के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है — जो इस पारंपरिक ग्रामीण खेल को बदलकर राष्ट्रीय स्तर का प्राइम-टाइम खेल बना देगी। जमीनी स्तर पर सशक्तिकरण और व्यापक दृष्टिकोण पीडब्ल्यूएल के पुनरुद्धार का मकसद सिर्फ खेल को दोबारा लोकप्रिय बनाना नहीं, बल्कि उसका विकासात्मक लक्ष्य भी है। हरियाणा, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की ट्रेनिंग अकादमियाँ अब युवा महिला पहलवानों को खोजने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए विशेष कार्यक्रम शुरू कर रही हैं। इसी के साथ, सरकारी योजनाएँ और सीएसआर समर्थित खेल संस्थान मिलकर कोचिंग, पोषण और अंतरराष्ट्रीय अनुभव के लिए संसाधनों का विस्तार कर रहे हैं। यह दोहरा प्रयास – पेशेवर मंच और जमीनी विकास, भारत में कुश्ती को पेरिस 2028 ओलंपिक और आने वाले वर्षों में पदक की सबसे बड़ी उम्मीदों में बदलने की दिशा में एक मजबूत कदम है। निष्कर्ष: एक नए खेल समुदाय का उदय जब भारत अपनी महिला क्रिकेट टीम की जीत की खुशी मना रहा है, उसी समय प्रो रेसलिंग लीग 2026 की वापसी एक और प्रेरणादायक शुरुआत लेकर आई है। यह सिर्फ एक लीग नहीं, बल्कि एक आंदोलन है, जो भारत की महिला खिलाड़ियों की ताकत, समानता और नए अवसरों का प्रतीक है। मैदान से लेकर अखाड़े तक, भारत की बेटियाँ अब सिर्फ खेल नहीं रही हैं, बल्कि भारतीय खेलों की तस्वीर हमेशा के लिए बदल रही हैं।  

चिकन नेक क्षेत्र में भारत का नया गढ़, पड़ोसी देशों की रणनीति पर टिकी निगाह

नईदिल्ली  भारत ने बांग्लादेश के साथ अपनी संवेदनशील और लंबी सीमा पर सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। भारत ने शुक्रवार को तीन नई सैन्य छावनियों (गैरीसन) का उद्घाटन किया है। ये छावनियां असम के धुबरी के पास बामुनी, बिहार के किशनगंज, और पश्चिम बंगाल के चोपड़ा में स्थित हैं। ये तीनों गढ़ अब पूरी तरह से ऑपरेशनल हैं। इन्हें भारतीय सेना व सीमा सुरक्षा बल (BSF) के लिए फोर्स मल्टीप्लायर यानी शक्ति में बढ़ोत्तरी माना जा रहा है। इन नई छावनियों का उद्देश्य 4096 किलोमीटर लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा में मौजूद रणनीतिक कमजोरियों को दूर करना और किसी भी संभावित घुसपैठ या आपात स्थिति में तेजी से जवाब देने की क्षमता बढ़ाना है। चिकन नेक पर नजर इस कदम का एक अहम भू-राजनीतिक पहलू भी है। उत्तर बंगाल का सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत की पूर्वोत्तर दिशा में एकमात्र जमीनी कड़ी है। इसे सामरिक हलकों में चिकन नेक कहा जाता है। मात्र 22 किलोमीटर चौड़ी यह पट्टी देश के आठ पूर्वोत्तर राज्यों को मुख्य भूमि भारत से जोड़ती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कभी यह कॉरिडोर दुश्मन के निशाने पर आया, तो भारत के 4.5 करोड़ से अधिक नागरिकों वाले पूरे उत्तर-पूर्वी क्षेत्र पर संकट मंडरा सकता है। इसीलिए नई छावनियों का निर्माण भारतीय सैन्य लॉजिस्टिक और आर्थिक संपर्क को सुरक्षित रखने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। नई दिल्ली की रणनीतिक तैयारी रक्षा सूत्रों के अनुसार, इन छावनियों के साथ भारत ने सीमा पर आधुनिक उपकरणों, सड़क नेटवर्क और निगरानी प्रणालियों की तैनाती भी बढ़ा दी है। यह सब भारत की बॉर्डर मॉडर्नाइजेशन ड्राइव के तहत किया जा रहा है। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा कि नई छावनियां न केवल हमारी तैनाती को मजबूत करेंगी बल्कि घुसपैठ या बाहरी गतिविधियों पर तुरंत प्रतिक्रिया देने में भी मददगार होंगी। ढाका-रावलपिंडी समीकरण पर नजर इस सामरिक सुदृढ़ीकरण की टाइमिंग भी बेहद अहम मानी जा रही है। कुछ ही हफ्ते पहले, बांग्लादेश के अंतरिम मुख्य सलाहकार प्रो. मोहम्मद यूनुस ने पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य अधिकारियों की मेजबानी की थी। पाकिस्तान के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष जनरल साहिर शामशाद मिर्जा ने ढाका पहुंचकर यूनुस से उनके जमुना निवास पर मुलाकात की। दोनों के बीच क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा हुई। हालांकि, भारतीय सुरक्षा हलकों में इस मुलाकात को सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता से कहीं अधिक माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, ढाका और रावलपिंडी के बीच ऐसे और संवाद आने वाले हफ्तों में जारी रह सकते हैं, जिससे दिल्ली की सतर्कता और बढ़ गई है। भविष्य की तैयारी भारत की ओर से सीमा पर नए गढ़ों का निर्माण न केवल सुरक्षा दृष्टिकोण से बल्कि राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम स्पष्ट करता है कि भारत अपने पूर्वी मोर्चे पर किसी भी भू-राजनीतिक अस्थिरता या पड़ोसी देशों के बदलते समीकरणों को लेकर चुपचाप लेकिन सख्त तैयारी में जुटा हुआ है।

देशभर के 10 संभागों में वंदे मातरम्@150 के कार्यक्रम, भोपाल में समारोह हुआ भव्य

भोपाल   वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी ने आज से पूरे देश में ‘वंदे मातरम्@150’ अभियान की शुरुआत की। मध्यप्रदेश में इस अभियान का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के शौर्य स्मारक में किया। इस मौके पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष, मंत्रीगण, सांसद, विधायक, अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने शौर्य स्मारक और भाजपा प्रदेश कार्यालय दोनों स्थानों पर ‘वंदे मातरम्’ के मूल स्वरूप में सामूहिक गायन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि “वंदे मातरम्” केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा और स्वतंत्रता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब किसी देश में आजादी की भावना जागृत होती है, तो इस गीत के शब्द लोगों के मन में नई ऊर्जा का संचार करते हैं। भोपाल के शौर्य स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मंत्री कृष्णा गौर, विश्वास सारंग, सांसद आलोक शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी, रामेश्वर शर्मा, महापौर माली श्री राय, ACS अशोक वर्णवाल, प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह, DGP कैलाश मकवाना, भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल और भोपाल की पुलिस कमिश्नर हरि नारायण चारी मिश्रा मौजूद रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि वंदे मातरम का मूल मंत्र हमेशा से हमें प्रेरित करता रहा है। हर देश में जब स्वतंत्रता की भावना बढ़ती है, तब इन शब्दों से एक नए प्रकार का स्पंदन उत्पन्न होता है, जिसे हम गीतों के रूप में अनुभव कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि "कदम कदम बढ़ाए जा" पुलिस बैंड द्वारा प्रस्तुत किया गया है और यह गीत आजादी के संघर्ष के दौरान रचित गीतों में से एक है। इस गीत की रचना में त्रिदेवियों दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती को जोड़ने की विशेष संरचना है और इसके माध्यम से उनकी पूजा का संदेश भी निहित है। हमारी त्रिदेवियों की कल्पना हजारों वर्षों से चली आ रही है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अतीत के अप्रतिम गीतों ने आजादी की अलख जगाई। 19वीं शताब्दी से शुरू हुई यह यात्रा हमें आज भी प्रेरित करती है। आजादी के हर संघर्ष में, चाहे वह अमेरिका हो या इंग्लैंड, जब आजादी की अलख जगती है, तब शब्दों से नए संकल्प उत्पन्न होते हैं। राष्ट्रभक्ति गीतों के माध्यम से देश अपनी पहचान बनाता है। 10 संभागों में एक साथ हुआ आयोजन भाजपा के इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत भोपाल सहित राज्य के 10 संभागों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। हर संभाग में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और प्रदेश सरकार के मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। शौर्य स्मारक पर हुए आयोजन में मंत्री कृष्णा गौर, विश्वास सारंग, सांसद आलोक शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी, महापौर माली श्री राय, DGP कैलाश मकवाना, ACS अशोक वर्णवाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। ‘स्वदेशी संकल्प’ भी लिया गया ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन के बाद कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने ‘स्वदेशी का संकल्प’ भी लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि “वंदे मातरम्” की रचना में भारत की त्रिदेवियों—दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का आह्वान है, जो हमारी संस्कृति और मातृशक्ति की प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि यह अभियान राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक जागृति का प्रतीक बनेगा। 10 संभागों में हो रहे कार्यक्रम वंदे मातरम गायन के बाद स्वदेशी का संकल्प भी सामूहिक रूप से लिया जाएगा। इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत मध्यप्रदेश के भोपाल सहित 10 संभागों और 10 विशेष स्थानों पर विशेष आयोजन हो रहे है। इन आयोजनों में प्रदेश मंत्री, बीजेपी के प्रदेश पदाधिकारी, सांसद, विधायक सहित जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ नेता शामिल हो रहे है। 26 नवंबर तक चलेगा अभियान 07 नवंबर से शुरू होने वाला यह उत्सव 26 नवम्बर (संविधान दिवस) तक देशभर के साथ प्रदेशभर में मनाया जाएगा, जिसमें हर जिले और हर शैक्षणिक संस्थान की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। पूरे प्रदेश में होंगे आयोजन भाजपा ने राज्यभर के 10 प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों पर भी इस अभियान के तहत विशेष आयोजन किए हैं। इनमें महाकाल लोक (उज्जैन), देवी अहिल्याबाई स्मारक (इंदौर), शहीद रामप्रसाद बिस्मिल स्मारक (मुरैना), रानी लक्ष्मीबाई बलिदान स्थल (ग्वालियर), शहीद रघुनाथ शाह–शंकर शाह स्थल (जबलपुर) और सेठानी घाट (नर्मदापुरम) शामिल हैं। 26 नवंबर तक चलेगा राष्ट्रव्यापी उत्सव यह अभियान 7 नवंबर से 26 नवंबर (संविधान दिवस) तक चलेगा। इस दौरान राज्य के प्रत्येक जिले, स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थानों में वंदे मातरम् गायन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जनसंपर्क अभियान आयोजित किए जाएंगे। भाजपा नेताओं ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य देशभर में राष्ट्रगीत के प्रति भावनात्मक जुड़ाव को और सशक्त बनाना है। मुख्यमंत्री बोले — "वंदे मातरम् हमारी पहचान" मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा—     “वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, यह हमारी पहचान है। इसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों भारतीयों को प्रेरित किया। अब समय है कि नई पीढ़ी इस गीत के संदेश को समझे और भारत की सांस्कृतिक एकता को सहेजे।” अब जानिए कौन से मंत्री कहां है मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव- शौर्य स्मारक (भोपाल) उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल- कलेक्टर कार्यालय (रीवा) मंत्री कैलाश विजयवर्गीय- कलेक्टर कार्यालय (इंदौर) मंत्री राकेश सिंह – कलेक्टर कार्यालय (जबलपुर) मंत्री राव उदय प्रताप सिंह- कलेक्टर कार्यालय (नर्मदापुरम) मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर -कलेक्टर कार्यालय (ग्वालियर) मंत्री गोविंद सिंह राजपूत- कलेक्टर कार्यालय (सागर) मंत्री एंदल सिंह कंसाना -कलेक्टर कार्यालय (मुरैना) मंत्री दिलीप जायसवाल -कलेक्टर कार्यालय (शहडोल) मंत्री गौतम टेटवाल -कलेक्टर कार्यालय (उज्जैन) भाजपा आज इन दस स्थानों पर कर रही आयोजन     भाजपा प्रदेश कार्यालय भोपाल     मॉ नर्मदा तट सेठानी घाट नर्मदापुरम     शहीद रामप्रसाद बिस्मिल स्मारक मुरैना     रानी लक्ष्मीबाई बलिदान स्थल ग्वालियर     रानी लक्ष्मीबाई स्मारक स्थल सागर     शहीद पदम्धर स्मारक रीवा     शहीद स्मारक शहडोल     शहीद रघुनाथ शाह, शंकर शाह बलिदान स्थल जबलपुर     देवी अहिल्या बाई स्मारक स्थल इंदौर     महाकाल लोक उज्जैन

दिल्ली के इंद्रप्रस्थ से शुरू हुई सनातन हिंदू एकता पदयात्रा 2.0, बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री करेंगे नेतृत्व

छतरपुर  बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के नेतृत्व में 'सनातन हिंदू एकता पदयात्रा 2.0' का शुभारंभ दिल्ली के इंद्रप्रस्थ से हुआ। यह यात्रा वृंदावन तक जाएगी। शुक्रवार सुबह 9 बजे कात्यायनी मंदिर परिसर में संत-महात्माओं की उपस्थिति में मंचीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के बाद संतों की ओर से सौंपे गए धर्म ध्वज को लेकर बागेश्वर बाबा के नेतृत्व में यात्रा वृंदावन के लिए रवाना होगी। धीरेंद्र शास्त्री बोले- यह केवल यात्रा नहीं, बल्कि एक वैचारिक क्रांति गुरुवार को दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए बागेश्वर महाराज ने कहा कि यह केवल यात्रा नहीं, बल्कि एक वैचारिक क्रांति है, जिसका उद्देश्य विचारों को जगाना और समाज को जोड़ना है। उन्होंने कहा, हम विवाद नहीं, संवाद के माध्यम से आगे बढ़ना चाहते हैं। यह यात्रा सनातन एकता का संदेश लेकर चलेगी। महाराज श्री ने बताया कि मंचीय कार्यक्रम में राष्ट्रगान, हनुमान चालीसा, श्रीराम नाम संकीर्तन और हिंदू एकता की शपथ ली जाएगी। उन्होंने देश-विदेश के हिंदुओं से 7 से 16 नवंबर के बीच चलने वाली इस यात्रा में कम से कम एक दिन शामिल होने का आग्रह किया। इस पदयात्रा में देश के कई संत, आचार्य शामिल होंगे इस पदयात्रा में जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज, राजेंद्र दास महाराज, दीदी मां ऋतंभरा, चिदानंद मुनि जी, स्वामी ज्ञानानंद महाराज, सुधांशु जी महाराज, राजू दास महाराज, मृदुल कांत शास्त्री, दाती महाराज, पंडित संजीव कृष्ण ठाकुर और महामंडलेश्वर नवल किशोर दास सहित देशभर के अनेक संत, आचार्य और महामंडलेश्वर भाग ले रहे हैं। राजनीतिक क्षेत्र से दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, सांसद मनोज तिवारी और मंत्री कपिल मिश्रा भी उपस्थित रहेंगे। बागेश्वर महाराज ने बताया कि यात्रा दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की 422 ग्राम पंचायतों से होकर गुजरेगी, जिससे करीब 5 करोड़ लोगों तक इसका संदेश पहुंचेगा। इस साल 300 से अधिक मुस्लिम सदस्य भी होंगे शामिल इस बार यात्रा को मुस्लिम समाज से भी समर्थन मिला है। फैज खान के नेतृत्व में 300 से अधिक मुस्लिम सदस्य पदयात्रा में शामिल होंगे। हाल ही में दिल्ली में हुई बैठक में मुस्लिम समुदाय ने कहा कि यह यात्रा 'लोगों को जोड़ने का कार्य कर रही है', इसलिए वे भी इसमें साथ चलेंगे।     महाराज का संदेश – यात्रा में मर्यादा व शांति बनाए रखें     बागेश्वर महाराज ने सभी पदयात्रियों से कहा है कि वे मर्यादित होकर चलें।     किसी जाति, पंथ या संप्रदाय पर टिप्पणी न करें, और अस्त्र-शस्त्र का प्रयोग न करें।     प्रशासन से अनुरोध किया गया है कि सभी संवेदनशील स्थलों पर विशेष सुरक्षा की जाए। पदयात्रा के सात संकल्प 1. यमुना माता का शुद्धिकरण। 2. भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए। 3. गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा मिले। 4. श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर भव्य रूप में निर्मित हो। 5. ब्रज परिक्षेत्र से मांस-मदिरा पर प्रतिबंध। 6. अवैध धर्मांतरण और लव जिहाद पर रोक। 7. जात-पात और ऊंच-नीच का भेद समाप्त कर सामाजिक समरसता स्थापित हो।

7 साल बड़े विजय देवरकोंडा की दुल्हन रश्मिका मंदाना, उदयपुर बनेगा शादी का भव्य स्थल

उदयपुर  साउथ फिल्म इंडस्ट्री के सबसे चर्चित कपल्स में से एक, विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना आखिरकार अपने रिश्ते को नया मुकाम देने जा रहे हैं। फैन्स के लंबे इंतजार के बाद अब खबर है कि दोनों अगले साल फरवरी 2026 में शादी के बंधन में बंधेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह रॉयल वेडिंग राजस्थान के उदयपुर के एक शानदार पैलेस में होगी। सगाई हुई थी हैदराबाद में सूत्रों की मानें तो पिछले महीने दोनों ने विजय के हैदराबाद स्थित घर पर सगाई की थी। यह एक बेहद प्राइवेट सेरेमनी थी, जिसमें सिर्फ परिवार और कुछ करीबी दोस्त शामिल हुए थे। रश्मिका ने हाल ही में अपनी फिल्म ‘थामा’ के प्रमोशन के दौरान इस बात के संकेत भी दिए थे कि उनकी सगाई हो चुकी है और वह काफी खुश हैं। वहीं, विजय की टीम ने भी पुष्टि की थी कि कपल जल्द शादी करने की प्लानिंग कर रहा है। फरवरी में बजेंगी शहनाइयां हालांकि अभी तक रश्मिका या विजय ने शादी की तारीख को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन सोशल मीडिया पर 26 फरवरी 2026 की तारीख तेजी से वायरल हो रही है। फैन्स इस खबर से बेहद उत्साहित हैं और सोशल मीडिया पर ‘#VijayRashmikaWedding’ ट्रेंड करने लगा है। वायरल रिंग ने बढ़ाई थी चर्चा अक्टूबर के पहले हफ्ते में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें रश्मिका अपने पालतू कुत्ते के साथ नजर आई थीं। इस वीडियो में उनकी उंगली में एक खूबसूरत डायमंड रिंग दिखी थी, जिसे देखकर फैन्स ने अंदाजा लगाया कि यह उनकी सगाई की अंगूठी है। वहीं, कुछ दिनों बाद विजय को भी एक मंदिर में अपने परिवार के साथ देखा गया था, और उनकी उंगली में भी वैसी ही रिंग नजर आई थी। सगाई कर चुके कपल बता दें अभी कुछ दिनों पहले खबरें आई थी कि रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने अपने रिश्ते को आगे बढ़ाते हुए एक-दूसरे से शादी कर ली है. इसके बाद कई बार रश्मिका को एंगेजेंट रिंग पहने भी देखा गया है. हालांकि दोनों ने अभी तक अपने रिश्ते को लेकर चुप्पी साधी हुई है. रश्मिका और विजय दोनों में से ही किसी ने भी सगाई और शादी को लेकर कोई बात नहीं की है. लेकिन आउटिंग और ट्रिप्स पर दोनों कई बार साथ में दिख चुके हैं. कब हुई थी पहली मुलाकात? रश्मिका मंदाना और विजय देवराकोंडा की पहली मुलाकात साल 2018 में ‘गीता गोविंदम’ फिल्म के सेट पर हुई थी. इसके बाद दोनों ‘डियर कॉमरेड’ फिल्म में भी साथ नजर आए थे. दोनों ही फिल्मों में ऑडियंस ने उनकी जोड़ी को खूब पसंद किया था. ऑन-स्क्रीन हिट केमिस्ट्री के बाद दोनों की ऑफ-स्क्रीन केमिस्ट्री भी धीरे-धीरे दिखने लगी. बता दें रश्मिका ने साल 2017 में कन्नड़ एक्टर रक्षित शेट्टी के साथ सगाई कर ली थी. लेकिन साल 2018 में दोनों की सगाई टूट गई थी और दोनों अलग भी हो गए थे. ऐसे हुई थी दोनों की लव स्टोरी की शुरुआत रश्मिका और विजय की पहली मुलाकात 2018 में फिल्म Geetha Govindam के सेट पर हुई थी। दोनों की ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री को दर्शकों ने बेहद पसंद किया। इसके बाद 2019 में दोनों फिल्म Dear Comrade में नजर आए, जहां से इनकी दोस्ती प्यार में बदल गई।

देश की बेटी हरमन ने बलिदान दिया, 1 करोड़ छोड़कर मुंबई इंडियंस में बनी दूसरी रिटेन खिलाड़ी

नई दिल्ली महिला क्रिकेट में इस वक्त सबसे ज्यादा डिमांडिंग प्लेयर हरमनप्रीत कौर हैं. दुनिया भर में उनके नाम का डंका बज रहा है. भारत को अपनी कप्तानी में महिला वर्ल्ड कप जिताते ही उनकी गितनी महान कपिल देव और एमएस धोनी के साथ हो रही है. नाम-मान-सम्मान और दौलत शोहरत सामने से चलकर आ रही है, इसके बावजूद 36 साल की इस दिग्गज को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है. हरमन नहीं मुंबई इंडियंस की टॉप प्लेयर दरअसल, वीमेंस प्रीमियर लीग (WPL 2026) के अगले सीजन से पहले होने वाले ऑक्शन की तैयारियां तेज हो चुकी है. नीलामी के लिए सारी छह फ्रैंचाइजी ने अपनी रिटेंशन लिस्ट जारी कर दी है. बड़े नाम अपनी टीम के साथ बरकरार हैं तो कई प्लेयर्स को रीलिज कर दिया गया है. हरमनप्रीत कौर जो मुंबई इंडियंस की कप्तान भी हैं, उन्होंने बड़ा त्याग करते हुए नंबर वन पोजिशन पर नहीं बल्कि दूसरे नंबर पर रिटेन होने पर हामी भर दी है. एक करोड़ कम लेने को तैयार हुईं हरमन इसका मतलब ये है कि विश्व विजेता भारतीय कप्तान अगले साइकिल में मुंबई इंडियंस की सबसे महंगी प्लेयर नहीं होंगी. दो बार की चैंपियन टीम MI हरमन की जगह इंग्लैंड की कप्तान नैट साइवर-ब्रंट को सबसे ज्यादा पैसे देगी. नेट को जहां मुंबई इंडियंस से 3.5 करोड़ रुपये मिलेंगे, जबकि हरमनप्रीत को 2.5 करोड़ रुपये मिलेंगे. यह हरमनप्रीत की सैलरी में लगभग 40% (38.8%) का इजाफा है. हरमन को 2023 में पहली नीलामी के बाद पिछले तीन सीजन में 1.8 करोड़ रुपये मिले थे. WPL में सबसे ज्यादा रन नैट साइवर-ब्रंट के नाम नैट साइवर-ब्रंट की बात करें तो हरमनप्रीत की कप्तानी वाली टीम की अविश्वसनीय सफलता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं. तीन WPL में से दो जीत चुकी मुंबई इंडियंस के लिए इंग्लिश कप्तान ने अहम भूमिका निभाई है. इंग्लैंड की यह स्टार खिलाड़ी 1072 रन के साथ टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी हैं. वह 32 विकेट लेकर पांचवीं सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली बॉलर भी हैं. समलैंगिक हैं नताली साइवर-ब्रंट इंग्लैंड विश्व कप विजेता महिला क्रिकेटर नताली साइवर समलैंगिक हैं. उनकी शादी कैथरीन ब्रंट से हुई है. कैथरीन भी दिग्गज क्रिकेटर रहीं हैं. इस जोड़ी ने मिलकर इंग्लैंड को 2017 का महिला विश्व कप जिताया. 2022 को दोनों ने अपने रिश्ते को ऑफिशियली किया. पांच साल रिलेशनशिप में रहने के बाद शादी का फैसला किया. कैथरीन ने एक बच्चे को भी जन्म दिया है.

19 दिन से लापता अलवर के छात्र की रूस में मिली लाश, डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह गया

अलवर राजस्थान में अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र से एक दर्दनाक खबर सामने आई है. कफनवाड़ा गांव में रहने वाला 22 साल का अजीत चौधरी रूस के उफ़ा शहर में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था, अब अजीत का शव व्हाइट रिवर के पास बने एक बांध में मिला है. अजीत बीते 19 अक्टूबर से लापता था. उसके शव मिलने की खबर से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई. परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है.  परिजनों ने तीन बीघा जमीन बेचकर बेटे को डॉक्टरी की पढ़ाई करने के लिए भेजा था. अजीत साल 2023 से रूस के उफा में स्थित बश्किर स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा था. वहां वह बीते 19 अक्टूबर को करीब 11 बजे हॉस्टल से निकला था. दोस्तों ने बताया था कि वो दूध लेकर वापस आधा घंटे में लौटने की कहकर निकला था. उसके बाद वापस नहीं लौटा. रुस में स्थित भारतीय दूतावास से परिजनों को इस मामले को देख रहे सरस डेयरी चेयरमैन नितिन सागवान को सूचना मिली कि लापता छात्र अजीत चौधरी का शव व्हाइट रिवर से लगते एक बांध में मिला है. शव की सूचना मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई. सरस डेयरी चेयरमैन नितिन सागवान और जिला प्रमुख बलवीर छिल्लर, भाजपा नेता बन्नाराम मीना ने बताया कि दूतावास से सूचना मिली है कि छात्र अजीत चौधरी का शव मिल गया है. शव की पहचान अजीत के साथ पढ़ने वाले अन्य छात्रों ने की है. अब विदेश मंत्रालय और रूस में स्थित भारतीय दूतावास व रूसी सरकार से वार्ता कर शव का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करने के बाद शव को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. शव को भारत लाने में दो-तीन दिन का समय लग सकता है. इस मामले को लेकर अलवर के जाट छात्रावास में एक बैठक हुई, जिसमें समाज के लोगों ने रूस में लापता छात्र अजीत चौधरी की तलाश करने में लापरवाही बरतने की बात कही. साथ ही शव को जल्द से जल्द भारत लाने की मांग रखी गई. सरस डेयरी चेयरमैन नितिन सागवान व जिला प्रमुख बलवीर छिल्लर ने दूतावास से मिली सूचना के बारे में बताया कि अजीत चौधरी का शव मिल गया है. मृतक अजीत के पिता व दादा का रो-रोकर बुरा हाल है, जिन्हें लोगों ने सांत्वना दी.

रायपुर में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने विभागीय योजनाओं की समीक्षा बैठक ली

रायपुर : स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने की विभागीय योजनाओं की समीक्षा मंत्रालय में विभाग के सचिव तथा कार्यालय प्रमुखों के साथ बैठक में दिए आवश्यक निर्देश रायपुर स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने आज मंत्रालय में स्वास्थ्य विभाग के सभी  कार्यों की समीक्षा की है। समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने विभाग के सचिव, आयुक्त, संचालक स्तर के सभी अधिकारियों को और बेहतर कार्य करने तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में चिकित्सा शिक्षा , स्वास्थ्य सेवाएं, आयुष, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, सीजीएमएससी एवं खाद्य एवं औषधि विभाग से जुड़े मुद्दों, योजनाओं, दवाइयों, उपकरणों और निर्माण कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में  जायसवाल ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य जनहित से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा है और इसमें कोई चूक नहीं होनी चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री ने प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं पर चर्चा करते हुए अधिकारियों को स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार और मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करने के लिए कहा।  बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव  अमित कटारिया,  आयुक्त चिकित्सा शिक्षा तथा आयुक्त आयुष विभाग मती शिखा राजपूत तिवारी, आयुक्त सह संचालक स्वास्थ्य सेवाएं तथा एमडी एनएचएम डॉ. प्रियंका शुक्ला, नियंत्रक खाद्य एवं औषधि विभाग  दीपक अग्रवाल, सीजीएमएससी के अधिकारी समेत अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।