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परंपरा और सम्मान: आडवाणी के 98वें जन्मदिन पर प्रधानमंत्री मोदी की विशेष मुलाकात

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने आडवाणी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। पीएम मोदी पूर्व उप प्रधानमंत्री के दिल्ली स्थित आवास पर पहुंचे थे। इससे पहले दिन में नरेंद्र मोदी ने एक्स पर आडवाणी को एक महान दृष्टिकोण वाला राजनेता बताया। गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा को एक मजबूत ताकत के रूप में उभारने में अहम भूमिका निभाने वाले आडवाणी शनिवार को 98 साल के हो गए। उन्हें इस वर्ष भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। मोदी ने एक्स पर लिखा कि लालकृष्ण आडवाणी जी को उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं। महान दृष्टिकोण वाले और तीक्ष्ण बुद्धिमत्ता से संपन्न राजनेता आडवाणी जी का जीवन भारत की प्रगति को सुदृढ़ करने के लिए समर्पित रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्होंने निस्वार्थ कर्तव्य और दृढ़ सिद्धांतों की भावना को सदैव अपनाया। उनके योगदान ने भारत के लोकतांत्रिक और सांस्कृतिक परिदृश्य पर अमिट छाप छोड़ी है। ईश्वर उन्हें उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु प्रदान करें। देश के अनुभवी राजनीतिज्ञों में शुमार लाल कृष्ण आडवाणी का जन्म आठ नवंबर 1927 को हुआ था। सिंध प्रांत (अब पाकिस्तान) के कराची शहर में एक सिंधी हिंदू परिवार में पैदा हुए लाल कृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में देश के गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री रहे।  

‘आओ आतंकी बनो’… पाकिस्तान में खुलेआम चल रही नफरत की रैलियां

इस्लामाबाद   पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में आतंकवादी संगठनों द्वारा खुली रैलियां करके लोगों, खासकर युवाओं और महिलाओं, को सक्रिय भर्ती के लिए भड़काने की घटनाएँ बढ़ रही हैं। बहावलपुर में आयोजित एक हालिया रैली में जैश-ए-मोहम्मद का कट्टर कमांडर मुफ्ती अब्दुल रऊफ असगर ने भी हिंदुस्तान के खिलाफ भड़काऊ बयान दिए और जिहाद को महिमामंत्र के रूप में पेश किया जिसका ऑडियो मीडिया संस्थानों के पास मौजूद है। भर्ती और वैचारिक ब्रेनवॉश रैली में वक्ताओं ने खुले तौर पर जिहादी जीवन के फ़ायदों का बखान किया, गरीब और वंचित वर्ग के युवाओं को “इज्जत” और “मकसद” का वादा देकर भर्ती करने की कोशिश की गई। आयोजकों ने धार्मिक ग्रंथों के कुछ संदर्भों का संदिग्ध व्याख्यात्मक इस्तेमाल कर हिंसा और कट्टरता को धार्मिक आदेश के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की जबकि विद्वान और धार्मिक विशेषज्ञ इसे कुरान के सही सन्दर्भ के खिलाफ बताते हैं। धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग और ऑपरेशन सिंदूर का प्रभाव विश्लेषकों के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर जैसी सुरक्षा कार्रवाइयों के बाद कुछ आतंकवादी कमानें खुले प्रचार-प्रसार पर ही निर्भर हो गई हैं ताकि नए अनुयायी जुटाए जा सकें। हालांकि जनमानस में बढ़ती नाराज़गी और आतंकवाद के कारण होने वाली मौतों के बाद एक बड़ा वर्ग अब आतंकवाद के प्रति संदेह और विरोध प्रकट कर रहा है। कई नागरिक यह भी मानते हैं कि धर्म के नाम पर किए जा रहे भड़काऊ बयान वास्तविक धार्मिक शिक्षा का विकृत रूप हैं। कौन है मुफ्ती अब्दुल रऊफ असगर? मुफ्ती अब्दुल रऊफ असगर को जैश-ए-मोहम्मद के कुख्यात नेताओं में गिना जाता है; वह मसूद अजहर का भाई बताया जाता है और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की ‘मोस्ट वांटेड’ सूची में भी शामिल रहा है। इतिहास में वह हाई-प्रोफाइल मामलों से जोड़कर देखा जाता रहा है। उसकी सक्रियता और सार्वजनिक रैलियाँ क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई हैं। महिला ब्रिगेड और सतही ‘समाजिक काम’ का आवरण रैलियों और संगठनों का रिक्रूटमेंट सिर्फ पुरुषों तक सीमित नहीं है मसलन मसूद अजहर की बहन सईदा अजहर जैसी समर्थक-नेतृत्व महिलाओं को निशाना बनाकर गरीब महिलाओं और लड़कियों को भी भड़काने का काम चल रहा है। ये समूह अक्सर सामाजिक सहायता, शिक्षा या राहत कार्यों का आवरण देकर नई भर्ती करते हैं। स्थानीय समुदायों में भय और असुरक्षा का माहौल बढ़ रहा है। युवाओं का चरित्रहीनकरण और गलत रास्ते पर जाना समाज के लिए दीर्घकालिक सुरक्षा-चुनौती बन सकता है। धर्म और धार्मिक ग्रंथों के गलत उपयोग से साम्प्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका है। कार्रवाई की आवश्यकता विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि सरकार-सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ स्थानीय धार्मिक मौलवियों, नागरिक समाज और शिक्षा संस्थानों को मिलकर इस वैचारिक युद्ध का सामना करना होगा। वास्तविक धार्मिक शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार, आर्थिक अवसरों का सृजन और युवाओं के लिए वैकल्पिक रास्तों का निर्माण आवश्यक है।   

गेहूं बैन का साइड इफेक्ट: रावलपिंडी-इस्लामाबाद में आटे की किल्लत, जनता परेशान

इस्लामाबाद  पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और रावलपिंडी में आटे का भीषण संकट गहराता जा रहा है। पंजाब फूड डिपार्टमेंट द्वारा दोनों शहरों की मिलों को गेहूं सप्लाई पर अचानक प्रतिबंध लगाने के बाद हालात नियंत्रण से बाहर होने लगे हैं। फ्लोर मिल्स एसोसिएशन ने सोमवार से आटे की सप्लाई बंद करने की घोषणा कर दी है, जिससे देश की दो अहम आबादी वाले इलाकों में खाद्य आपात स्थिति की आशंका बढ़ गई है। बाजारों से गायब हुआ आटा मीडिया के अनुसार, पंजाब सरकार के आदेश के बाद शुक्रवार रात से ही सभी आटा मिलों, तंदूर मालिकों और किराना दुकानों के गेहूं और आटे के ऑर्डर रद्द कर दिए गए हैं। इसके चलते बाजारों में लाल आटा (रेड फ्लोर) और फाइन फ्लोर दोनों की भारी किल्लत हो गई है। रावलपिंडी फ्लोर मिल्स एसोसिएशन ने इस संकट पर आपात बैठक बुलाई, जिसकी अध्यक्षता पैट्रन-इन-चीफ शेख तारिक सादिक ने की। उन्होंने पंजाब सरकार के निर्णय की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि “रावलपिंडी और इस्लामाबाद पूरी तरह पंजाब की गेहूं सप्लाई पर निर्भर हैं। अगर परमिट तुरंत बहाल नहीं किए गए, तो उत्पादन और वितरण दोनों ठप हो जाएंगे। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह “अविवेकपूर्ण फैसला” वापस नहीं लिया, तो स्थिति मानवीय संकट में बदल सकती है। तंदूर मालिकों का गुस्सा: कीमतें दोगुनी, दुकानें सील पाकिस्तान नानबाई एसोसिएशन के अध्यक्ष शफीक कुरैशी ने बताया कि 79 किलो के लाल आटे की बोरी की कीमत 5,500 पाकिस्तानी रुपये से बढ़कर 11,000 रुपये हो गई है। वहीं फाइन फ्लोर की कीमत 6,200 से बढ़कर 12,600 रुपये पहुंच गई है।कुरैशी ने सरकार पर “राज्य उत्पीड़न” (State Oppression) का आरोप लगाते हुए कहा कि 1 अक्टूबर से अब तक दर्जनों तंदूर गिराए गए, 79 सील किए गए, और 100 से अधिक मालिकों पर 25,000–50,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि “अगर गेहूं आपूर्ति की गड़बड़ी दूर नहीं की गई, तो रोटी आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाएगी और जनता का सब्र टूट सकता है।” 

IPS डॉ. संतोष की पुस्तक का विमोचन: संयुक्त राष्ट्र के शांति प्रयासों पर आधारित रचना सीएम साय व डॉ. रमन सिंह को भेंट

रायपुर पुलिस मुख्यालय में डीआईजी सीसीटीएनएस/एससीआरबी के रूप में पदस्थ आईपीएस डॉ. संतोष सिंह के संयुक्त राष्ट्र के शांति सुदृढ़ीकरण से जुड़े शोध विषय पर लिखित किताब का प्रकाशन दिल्ली के प्रतिष्ठित मानक पब्लिकेशन ने किया। आईपीएस डॉ. संतोष ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और डीजीपी अरुण देव गौतम को किताब की प्रति भेंट की। शीत युद्ध के बाद इक्कीसवीं सदी में दुनिया में हिंसाग्रस्त राष्ट्रों में शांति को चिरस्थाई बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र के शांति-रक्षा (पीस कीपिंग) और शांति-स्थापना (पीस मेकिंग) प्रयासों से आगे बढ़कर अपेक्षाकृत नए कार्य जैसे शांति-निर्माण या सुदृढ़ीकरण (पीस बिल्डिंग) कार्यों पर जोर देने की आवश्यकता हो गई है। इस सदी में संयुक्त राष्ट्र के यूएन पीसबिल्डिंग कमीशन के पर्यवेक्षण में किए जा रहे गृह युद्ध से जूझ रहे देशों और युद्धग्रस्त क्षेत्रों में पीस-बिल्डिंग मिशन काम कर दुनिया में शांति प्रयासों को बहुत मजबूत कर रहे हैं। यह किताब दुनियाभर में चल रहे इन शांति प्रयासों के सिद्धांत और वास्तव में धरातल पर हो रहे कार्यों की समालोचना करती है। संतोष सिंह की यह किताब विदेश नीति के नीति-निर्धाताओं, प्रैक्टीसनर्स व छात्रों के लिए विशेष उपयोगी सिद्ध होगा। देश के अंदर के हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में भी स्थायी शांति स्थापित करने के लिए आवश्यक तत्वों की समझ बढ़ाने में मदद करेगा। उल्लेखनीय है कि भारत अंतर्राष्‍ट्रीय शांति व सुरक्षा बनाए रखने में संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ की सहायता करने में दृढ़ता के साथ प्रतिबद्ध है और विभिन्न देशों में कार्यरत शांति सेनाओं में दुनिया में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से तीसरे नंबर पर है। 1950 से अब तक हमारे देश ने 49 शांति मिशनों में भाग लिया है और लगभग 2 लाख शांति सैनिकों का योगदान किया है। वरिष्ठ भारतीय पुलिस और सैन्य अधिकारी शांति मिशनों में भाग लेते हैं। आईपीएस संतोष सिंह ने हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग से डॉक्टरेट की डिग्री और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) नई दिल्ली से अंतर्राष्ट्रीय संबंध विषय में एमफिल और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) वाराणसी से राजनीतिशास्त्र में एमए किया है। एम फिल के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में विकासशील देशों की भागीदारी पर उन्होंने शोध-प्रबंध लिखा था। उनके विभिन्न राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय शोध जर्नल में उनके अनेकों शोध-पत्र प्रकाशित हुए हैं।

यौन शोषण मामलों में ‘कैरेक्टर’ नहीं बनेगा बचाव का हथियार: हाईकोर्ट

नई दिल्ली  दिल्ली हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि बलात्कार के मामलों में पीड़िता के चरित्र (चाहे वह कितना भी दागदार क्यों न हो) को उसके खिलाफ हथियार नहीं बनाया जा सकता। जस्टिस अमित महाजन की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि यहां तक कि जो महिला या युवती कुछ पैसे के बदले किसी व्यक्ति के साथ जाती है वह भी दुष्कर्म की शिकार हो सकती है। पीठ ने यह टिप्पणी एक बलात्कार के आरोपी की याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने की मांग की थी। आरोपी एक विवाहित व्यक्ति है, जिस पर शादी का झूठा वादा करके बलात्कार व अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने उसकी ड्रिंक में कुछ मिलाकर उसे यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया। उसके बाद भी आरोपी ने उससे शादी का झूठा वादा कर के शारीरिक संबंध बनाना जारी रखा। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने उससे लगभग 8 लाख रुपये ले लिए और 10 लाख और मांगे। साथ ही धमकी दी कि यदि वह राशि नहीं देती है तो वह उसकी तस्वीरें और वीडियो वायरल कर देगा। वहीं आरोपी ने महिला के चरित्र पर सवाल उठाते हुए दलील दी कि वह खुद पहले भी इसी तरह के आरोपों पर मामला दर्ज करा चुकी है, जिसमें आरोपी बरी हो चुका है। आरोपी ने दलील दी कि शिकायतकर्ता महिला अनैतिक देहव्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 के तहत भी एक मामले में फंसी थी। आरोपी का दावा था कि महिला ने खुद कहा था कि वह शारीरिक संबंध के लिए पैसे की मांग करती है। हालांकि इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि महिला के चरित्र को ढाल बनाकर कोई उसके साथ अपराध को अंजाम नहीं दे सकता है। फिर चाहे उस महिला चरित्र पूर्व में कितना भी दागदार क्यों ना रहा हो। किसी आरोपी को यह अधिकार नहीं दिया जा सकता है कि वह किसी महिला के चरित्र का गलत लाभ उठाए या ऐसी कोशिश करे।  

पीके का राहुल गांधी पर वार: बिहार चुनाव को हाईजैक करने की कोशिश हो रही है

पटना जन सुराज संस्थापक प्रशांत किशोर ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 'वोट चारी' वाले बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बिहार में वोट चोरी का मुद्दा न कभी था, न है। राहुल गांधी विपक्ष के नेता के तौर पर भाजपा से लड़ रहे हैं। प्रशांत किशोर ने कहा, "बिहार में विधानसभा चुनाव हैं। बिहार की जनता जानना चाहती है कि उन्हें बेहतर शिक्षा और रोज़गार कब मिलेगा और राज्य की दुर्दशा कब सुधरेगी। इसका वोट चोरी से क्या लेना-देना?… अगर दिल्ली में वोट चोरी का मुद्दा है, तो चुनाव आयोग को घेरिए, सुप्रीम कोर्ट जाइए। इसके लिए बिहार चुनाव को क्यों हाईजैक कर रहे हैं?" जन सुराज के संस्थापक ने एनडीए पर निशाना साधते हुए कहा, "पहले प्रवासी मजदूर एनडीए को वोट देते थे… आज नहीं दे रहे। वे बिहार में कारखाने और रोज़गार चाहते हैं। गृह मंत्री अमित शाह कह रहे हैं कि बिहार में कारखानों के लिए जमीन नहीं है। आप लोगों को उनसे पूछना चाहिए कि अगर कारखानों के लिए जमीन नहीं है, तो पंजाब और बंगाल को गुजरात से जोड़ने वाली बड़ी सड़कें बनाने के लिए उन्हें बिहार में ज़मीन कहां से मिली? अगर आपको सड़कें, राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने हैं, तो बिहार में जमीन है, लेकिन अगर आप बिहार के बच्चों के लिए कारखाने बनाना चाहते हैं, तो यहां जमीन नहीं है।"

टेक्निकल फॉल्ट से Air India उड़ान लेट, यात्रियों की परेशानी बढ़ी

मुंबई मुंबई से लंदन जाने वाली एयर इंडिया की एक उड़ान शनिवार को उड़ान भरने से कुछ समय पहले तकनीकी खराबी के कारण लगभग सात घंटे देर से चली जिससे छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यात्री फंस गए और उन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। उड़ानएआई129 को पहले सुबह जल्दी रवाना होना था लेकिन उड़ान-पूर्व जांच के दौरान विमान में तकनीकी खामियां पाए जाने के बाद इसकी उड़ान स्थगित कर दी गई। यात्रियों के अनुसार पहली घोषणा में 30 मिनट की देरी का उल्लेख किया गया था। विमान में सवारियां सुबह लगभग छह बजे ही शुरू हुईं और यात्रियों के अपनी सीटों पर बैठने के बाद भी विमान एक घंटे से ज़्यादा समय तक रुका रहा। बाद में चालक दल ने यात्रियों को सूचित किया कि तकनीकी खराबी के कारण उड़ान आगे नहीं बढ़ सकती और सुरक्षा कारणों से सभी यात्रियों को उतरने के लिए कहा गया। लगभग 8:15 बजे, यात्रियों को सुरक्षा जांच के लिए विमान से उतरने का निर्देश दिया गया, जिसमें हैंड बैगेज की दोबारा जाँच भी शामिल थी, जिससे देरी और बढ़ गई। कई यात्रियों ने लंबी प्रतीक्षा अवधि, नींद की कमी और प्रस्थान की अनिश्चितता पर निराशा व्यक्त की। बाद में एयर इंडिया ने अपराह्न एक बजे के संशोधित प्रस्थान समय की घोषणा की और कहा कि मंजूरी से पहले विमान का गहन तकनीकी निरीक्षण किया जा रहा है। एयर इंडिया के अधिकारियों ने पुष्टि की कि संदिग्ध खराबी के कारण विमान को वापस बुलाने के तुरंत बाद बे में वापस कर दिया गया था। एयरलाइन के एक प्रवक्ता ने कहा, "यात्री सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उड़ान को फिर से र्निर्धारित करने से पहले व्यापक रखरखाव जांच की गई थी।" प्रवक्ता ने बताया कि चालक दल अपनी अनिवार्य उड़ान ड्यूटी समय सीमा तक पहुंच गया था, जिसके कारण वह अस्थायी रूप से विमान का संचालन नहीं कर पाए। एयरलाइन ने असुविधा पर खेद व्यक्त किया और कहा कि हवाई अड्डे के लाउंज में यात्रियों को जलपान और भोजन उपलब्ध कराया गया, जबकि ग्राउंड स्टाफ ने पूरी सहायता प्रदान की। प्रवक्ता ने सुरक्षा और यात्री सुविधा के प्रति एयर इंडिया की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए कहा,"यात्रियों को जल्द से जल्द उनके गंतव्य तक पहुँचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।"

धर्मांतरण विवाद: शव दफनाने को लेकर हंगामा, प्रशासन की हस्तक्षेप से सुलझा मामला, दूसरे जिले में किया गया अंतिम संस्कार

बालोद जिले के गुरूर विकासखंड के सनौद थाना क्षेत्र के जेवरतला गांव में शनिवार को धर्मांतरण से जुड़े विवाद के चलते एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गई। पिछले कुछ वर्षों से ईसाई धर्म का पालन कर रहे 50 वर्षीय रमनलाल साहू के शव को जब परिजन गांव में अंतिम संस्कार के लिए लाए, तो ग्रामीणों ने इसका विरोध कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि वे गांव की भूमि पर धर्मांतरित व्यक्ति का अंतिम संस्कार नहीं होने देंगे। बता दें कि मृतक रमनलाल साहू की मौत इलाज के दौरान हुई थी। परिजन उनका शव लेकर जेवरतला गांव पहुंचे और अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू की। लेकिन जैसे ही ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिली, उन्होंने विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते मौके पर भीड़ इकट्ठा हो गई और तीन घंटे तक हंगामे की स्थिति बनी रही। सूचना मिलने पर सनौद थाना पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की कि हर व्यक्ति को अपने धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार का अधिकार है, और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। हालांकि, ग्रामीण अपनी बात पर अड़े रहे और गांव की सीमा के भीतर दफनाने की अनुमति नहीं दी। लगातार समझाइश और बातचीत के बावजूद जब सहमति नहीं बन सकी, तो परिजनों ने शव को धमतरी के मसीही कब्रिस्तान ले जाकर वहां अंतिम संस्कार किया। इस दौरान गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे। प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी और शांति बनाए रखने की अपील की। गौरतलब है कि इससे पहले कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर क्षेत्र के कोड़ेकुर्सी गांव में भी इसी तरह का विवाद सामने आया था, जहां धर्मांतरित युवक मनीष निषाद के अंतिम संस्कार को लेकर ग्रामीणों ने विरोध जताया था। उस मामले में प्रशासन और पुलिस की मध्यस्थता के बाद परिजनों ने चारामा के मसीही कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार किया था। प्रशासन ने अपील की है कि नागरिक शांति और संवेदनशीलता बनाए रखें ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।

डिजिटल उपस्थिति में बड़ा उलटफेर: छोटे शहर ने इंदौर-भोपाल को पछाड़ा

जबलपुर नगरीय निकायों के अधिकारी-कर्मचारियों की उपस्थिति की निगरानी सुनिश्चित करने एवं कार्यप्रणाली में पारदर्शी लाने के उद्देश्य से लागू की गई ई-अटेंडेंस में जबलपुर नगर निगम आगे हैं। इंदौर-भोपाल जैसे शहरों के मुकाबले फेस रिकॉग्निशन (चेहरे की पहचान) के आधार पर जबलपुर नगर निगम के लगभग 62 प्रतिशत अधिकारी-कर्मचारी हाजिरी लगाने लगे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो जबलपुर नगर निगम में 8 हजार 782 नियमित, संविदा के अलावा चार हजार से ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारी पंजीकृत है, जिसमें लगभग 5 हजार 400 अधिकारी-कर्मचारी ई-अटेंडेंस लगा रहे हैं। हालांकि इनमें अब भी शत प्रतिशत ई-अटेंडेंस नही लग रही है, जबकि इंदौर नगर निगम में 25 हजार 445 में से लगभग 13 हजार 600 ही ई-अटेंडेंस लगा रहे हैं। हालांकि यहां भी आउटसोर्स कर्मियों का आंकड़ा ज्यादा है। वहीं भोपाल में 19 हजार 996 पंजीकृत अधिकारी, कर्मचारियों में से लगभग 12 हजार 500 ही ई-अटेंडेंस लगवा रहे हैं।   फिलहाल इन आंकड़ों पर यकीन करें तो संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास से जारी आदेश में जबलपुर नगर निगम ई-अटेंडेंस प्रक्रिया को अपनाने में आगे नजर आ रहा हैं। विदित हो कि नगरीय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों की उपस्थिति केवल फेस रिकॉग्निशन (चेहरे की पहचान) के आधार पर ही मान्य होगी। नवंबर माह का वेतन भी ई-अटेंडेंस के आधार पर देय होगा। प्रशिक्षण, समझाइश, लगातार निगरानी से बढ़े आंकड़े -शासन स्तर पर प्रदेश भर के नगरीय निकायों में अनिवार्य किए गए ई-अटेंडेंस लगवाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी है। – ई-अटेंडेंस फेस रिकग्निशन यानि चेहरा पहचान बायोमेट्रिक तकनीक से स्मार्ट फोन के माध्यम से अटेंडेंस लगाने से पहले कर्मचारियों की उपस्थिति को जियो स्पेशल लोकेशन से जोड़ा गया है ताकि उनकी उपस्थित कार्यालय पहुंचकर या संबंधित बीट के दायरे पर आने पर ही दर्ज हो। – निगम नगर निगम मुख्यालय सहित सभी 16 जोन कार्यालय के नियमित, संविदा अधिकारी-कर्मचारियों के साथ ही ठेकेदार व उनके कर्मचारियों को मोबाइल के माध्यम से ई-अटेंडेंस लगाने का प्रशिक्षण दिया गया। बताया गया कि ई-अटेंडेंस के लिए अपने कार्यालय के परिसर के दायरे से ही लगाना होगा। – स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और ठेकेदारों को सुबह-सुबह बीटवार सफाई कर्मचारियों को स्मार्ट फोन के माध्यम से अपनी-अपनी उपस्थिति सुनिश्चित कराने पर जोर दिया गया। निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार लगातार बैठकें कर समीक्षा कर रहें। ई अटेंडेंस के नोडल अधिकारी, सहायक नोडल भी ई-अटेंडेंस की निगरानी कर रहे। जिन कर्मचारियों की ई-अटेंडेंस आधार कार्ड या अन्य तकनीकी कारणों से नही लग रही उसका भी निदान करवाते हुए अटेंडेंस सुनिश्चित करवा रहे हैं। फर्जीवाड़ा भी आएगा सामने बहरहाल फेस रिकाग्निशन (चेहरे की पहचान) अाधारित ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता के बाद उन कर्मचारियों का पता चलेगा जो कागजाें में तो दर्ज हैं, परंतु कार्यालय नही आते। खासतौर से आउट सोर्स के नाम पर किए जा रहा फर्जी भुगतान पर रोक लगेगी। क्योंकि विभागीय अधिकारियों की सांठगाव से ये खेल हो रहा है। सफाई के नाम पर वार्डों में 40-40 सफाई कर्मचारी भेजने का दावा कर भुगतान तो ले लेते हैं परंतु वास्तव में आधे कर्मचारी भी वार्डों में नहीं भेज रहे हैं। निरीक्षण के दौरान इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। जिसमें वार्ड स्तर पर सुपरवाइजर के साथ मिलकर ऐसे दो उपस्थिति रजिस्टर बनाए गए थे जिनमें से एक में मौजूद सफाई कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति और दूसरे में फर्जी उपस्थिति दर्ज पाई गई। ठेकेदारों पर जुर्माना भी लगाया गया था।

मंगलाकाली मंदिर के पास 8090 वर्गमीटर भूमि पर करीब 6 माह में होगा निर्माण

औरैया उत्तर प्रदेश के औरैया में परिवहन विभाग अब सीज किए गए वाहनों को सुरक्षित रूप से खड़ा करने में परेशान नहीं होगा। इसके लिए विभाग ने मंगलाकाली मंदिर के पास करीब 8090 वर्गमीटर क्षेत्रफल में नया यार्ड बनाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। यह यार्ड तैयार होने के बाद थानों और कोतवाली परिसरों के बाहर खड़े वाहनों की अव्यवस्था खत्म हो जाएगी और वाहनों की चोरी की घटनाओं पर भी रोक लगेगी। अभी तक विभाग द्वारा कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए वाहनों को देवकली मंदिर के पास या थानों के बाहर खड़ा किया जाता था। ऐसे में सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी बड़ी चुनौती बनी रहती थी। देवकली मंदिर के पास खड़े वाहनों की निगरानी के लिए पुलिस लाइन से कर्मियों की ड्यूटी लगानी पड़ती थी। वर्ष 2023 में देवकली मंदिर के पास से और अजीतमल कोतवाली से दो ट्रक चोरी हो जाने की घटनाओं ने विभाग को झकझोर दिया था। पुलिस ने दोनों वाहनों को दूसरे जनपद से बरामद किया था। इसके बाद से ही एक सुरक्षित और स्थायी यार्ड की जरूरत महसूस की जा रही थी। विभाग ने करीब एक वर्ष पहले यार्ड निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा था, जिसे अब स्वीकृति मिल गई है। देवकली के बीहड़ क्षेत्र में जमीन चयनित कर निर्माण कार्य शुरू कराया गया है, लेकिन कुछ तकनीकी खामियों के कारण फिलहाल कार्य रुका हुआ है। एआरटीओ एन.सी. शर्मा ने बताया कि यार्ड का ले-आउट दोबारा शासन को भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य दोबारा शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद करीब छह माह में यार्ड का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। नए यार्ड के निर्माण से न केवल परिवहन विभाग को सुविधा मिलेगी बल्कि थानों के बाहर खड़े जब्त वाहनों से निजात मिलने के साथ-साथ चोरी की घटनाओं पर भी अंकुश लग सकेगा।