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कुराकाओ बना फीफा विश्व कप के लिए क्वालिफाई करने वाला सबसे छोटा देश

किंग्सटन कैरेबियाई क्षेत्र का छोटा सा द्वीप राष्ट्र कुराकाओ ने इतिहास रच दिया है। मंगलवार को जमैका के खिलाफ 0-0 से ड्रॉ खेलकर कुराकाओ ने पहली बार फीफा विश्व कप के लिए क्वालिफाई कर लिया। यह उपलब्धि हासिल करने वाला यह दुनिया का सबसे छोटा देश बन गया है। कुराकाओ, जिसकी आबादी सिर्फ 1.56 लाख है, ने किंग्सटन में खेले गए मुकाबले में जमैका की ओर से हुए जोरदार दूसरे हाफ के दबाव को झेलते हुए जरूरी ड्रॉ हासिल किया, जिससे उसे संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में होने वाले आगामी विश्व कप का टिकट मिल गया। ‘ब्लू वेव’ के नाम से मशहूर टीम का यह सफर किसी परीकथा से कम नहीं रहा। छह मैचों में 12 अंकों के साथ कुराकाओ ने ग्रुप-B में शीर्ष स्थान हासिल किया और जमैका पर एक अंक की बढ़त के साथ क्वालिफिकेशन पक्का किया। अगले साल पहली बार विश्व कप में टीमों की संख्या बढ़कर 48 होने जा रही है, और इसी के साथ कुराकाओ ने सबसे छोटे देश के तौर पर क्वालिफाई करने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड आइसलैंड (2018) के नाम था, जिसकी आबादी करीब 3.5 लाख है।  

MSP के तहत ज्वार और बाजरा का उपार्जन शुरू 24 नवंबर से, धान 1 दिसंबर से, कलेक्टर्स को निर्देश

भोपाल  ज्वार, बाजरा और धान की फसल की पैदावार करने वाले किसानों के लिए ये जरूरी खबर है सरकार MSP पर उनकी  उपज का उपार्जन शुरू करने वाली है, इसके लिए राज्य सरकार ने उपार्जन नीति घोषित कर दी है, शासन ने उपार्जन से जुड़े महत्वपूर्ण दिशा निर्देश प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टर्स, नागरिक आपूर्ति निगम तथा वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन के अफसरों को दिए हैं, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देश हैं कि उपार्जन केंद्रों पर ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे किसान को कोई परेशानी ना हो। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार द्वारा समय – समय पर घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर औसत अच्छी गुणवत्ता की धान, ज्वार एवं बाजरा का उपार्जन किसानों से किया जाएगा। राज्य शासन ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा की उपार्जन नीति घोषित कर दी है। समर्थन मूल्य पर ज्वार एवं बाजरा की 24 नवम्बर से 24 दिसम्बर तक और धान की खरीदी एक दिसम्बर से 20 जनवरी, 2026 तक की जायेगी। खरीदी सोमवार से शुक्रवार तक की जायेगी। सख्त निर्देश, किसानों को ना हो कोई परेशानी  खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टर्स, नागरिक आपूर्ति निगम तथा वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन के अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि उपार्जन नीति का अक्षरशः पालन सुनिश्चित कराएं, जिससे किसानों को लाभ पहुंचाने की सरकार की मंशा पूरी हो सके। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही मिलने पर उपार्जन कार्य से जुड़े अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी। एमपी स्टेट सिविल सप्लाईज़ कार्पोरेशन नोडल एजेंसी खाद्य मंत्री ने बताया कि निर्धारित अवधि में उपार्जन किया जाएगा। समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा के उपार्जन के लिए मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज़ कार्पोरेशन नोडल एजेंसी होगी। इसके अलावा विभाग द्वारा केन्द्र एवं राज्य सरकार की अन्य एजेन्सी अथवा उनके द्वारा अधिकृत संस्था को भी उपार्जन एजेन्सी घोषित किया जा सकेगा। ये है फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य धान कॉमन MSP 2369 रुपये प्रति क्विंटल। धान ग्रेड-ए MSP 2389 रुपये  प्रति क्विंटल। ज्वार मालदण्डी MSP 3749 हजार रुपये प्रति क्विंटल। ज्वार हाइब्रिड MSP 3699 रुपये प्रति क्विंटल। बाजरा MSP 2775 रुपये प्रति क्विंटल । किसानों की सुविधा अनुसार होंगे उपार्जन केन्द्र मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि उपार्जन केन्द्र के स्थान का निर्धारण किसानों की सुविधा अनुसार किया जाएगा। उपार्जन केन्द्र प्राथमिकता से गोदाम/केप परिसर में स्थापित किए जाएंगे। गोदाम/केप उपलब्ध न होने पर समिति एवं अन्य स्तर पर उपार्जन केन्द्र स्थापित किए जा सकेंगे। जिले में उपार्जन केन्द्रों की संख्या का निर्धारण किसान पंजीयन, पंजीयन में दर्ज बोया गया रकबा एवं विगत वर्ष निर्धारित उपार्जन केन्द्रों के आधार पर राज्य उपार्जन समिति द्वारा किया जाएगा। ऐसी रहेगी बारदाना व्यवस्था खाद्य मंत्री ने बताया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिये 46 प्रतिशत पुराने और 54 प्रतिशत नवीन जूट बारदाने उपयोग किये जायेंगे। बारदानों की व्यवस्था उपार्जन एजेंसी द्वारा की जायेगी। ज्वार एवं बाजरे का उपार्जन नवीन जूट बारदानों में किया जायेगा। इन निर्देशों का पालन करना जरूरी      केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा धान, ज्वार एवं बाजरा के समर्थन मूल्य पर उपार्जन के लिये निर्धारित यूनिफार्म स्पेसिफिकेशन्स के अनुसार एवं समय-समय पर इसमें दी गई शिथिलता के अनुसार उपार्जन किया जायेगा।     गुणवत्ता परीक्षण का दायित्व उपार्जन केन्द्र में उपार्जन करने वाली संस्था और भण्डारण स्थल पर उपार्जन एजेंसी का होगा।     कृषि उपज मण्डियों में एफएक्यू मानक की धान, ज्वार एवं बाजरा की खरीदी समर्थन मूल्य से कम पर क्रय नहीं किया जायेगा। नॉन एफएक्यू उपज का सैम्पल कृषि उपज मण्डी द्वारा संधारित किया जायेगा।     किसान पंजीयन में दर्ज फसल के रकबे एवं राजस्व विभाग द्वारा तहसीलवार निर्धारित उत्पादकता के आधार पर कृषक द्वारा खाद्यान्न की विक्रय योग्य अधिकतम मात्रा का निर्धारण किया जायेगा।     कृषक द्वारा उपज बेचने के लिये उपार्जन केन्द्र एवं विक्रय दिनांक के चयन के लिये स्लॉट बुकिंग करानी होगी।     उपार्जित खाद्यान्न का उपार्जन केन्द्र से गोदाम तक परिवहन का दायित्व उपार्जन एजेंसी का और धान को उपार्जन केन्द्र/गोदाम से सीधे मिलर्स तक परिवहन का दायित्व मिलर्स का होगा।  

छतरपुर में बागेश्वर धाम पहुंचे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, पदयात्रा के अनुभव भक्तों के साथ साझा किए

छतरपुर   दिल्ली से वृंदावन तक सनातन हिंदू एकता पदयात्रा निकालने के बाद पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बागेश्वर धाम पहुंच गए. उन्होंने धाम में बालाजी के दर्शन करते हुए पूजा अर्चना की. पुरानी पेशी का दरबार लगाते हुए सबको आशीर्वाद दिया. इस दौरान बाबा बागेश्वर ने कहा "हनुमान जी के प्रभाव से यात्रा निर्विघ्न संपन्न हुई. सभी लोग हनुमान जी पर भरोसा रखें, सब संकट दूर हो जाएंगे.इतनी बड़ी यात्रा के बीच कई झंझट आए, आतंकवादी पीछे लगे, फरीदाबाद में भारी विस्फोटक मिला, हथियार मिले, इन सबका मकसद यात्रा को रोकना था लेकिन बालाजी ने यात्रा नहीं रुकने दी. आतंकियों की तो ठठरी बर गई." पदयात्रा में हिंदुओं का चलता समुद्र दिखा बाबा बागेश्वर ने कहा "यात्रा के दौरान सड़कों पर हिंदुओं का चलता समुद्र दिखाई दिया. दुनिया ने देखा हिंदुओं का ज्वार भाटा, अंगूर की कीमत गुच्छे में है अलग होने में नहीं. जिस तरह से सिर्फ कठपुतली दिखाई देती है लेकिन कठपुतली को चलाने वाला कोई और होता है, ठीक उसी तरह से हम सब पदयात्री के रूप में दिखाई देते रहे लेकिन चलाते बालाजी रहे." 7 नवंबर से दिल्ली के कात्यायनी शक्तिपीठ से शुरू हुई सनातन हिंदू एकता पदयात्रा के 16 नवंबर को वृंदावन में संपन्न हुई. पूरे देश में समरसता का संदेश गया बाबा बागेश्वर ने कहा "हनुमान जी की पूंछ पर आग लगाने की कोशिश वालों के घर जल गए, पूंछ सुरक्षित है. पदयात्रा से 03 सफलताएं मिली. पदयात्रा का संदेश दूर-दूर तक गया. पहली सफलता यह कि हिंदू एकता को इससे ताकत मिली है. दूसरी सफलता समरसता का संदेश सबको मिला. रास्ते में संत समाज ने उन लोगों के साथ बैठकर भोजन पाया, जिन्हें लोग अछूत कहते हैं. वहां उन गांवों में समरसता की चर्चा हुई. सभी ने छुआछूत मिटाकर सबके साथ एक भाव रखने का काम शुरू किया. तीसरी सफलता वृंदावन में मदिरा की खुली दुकानें बंद करने की कार्रवाई शुरू हुई." यात्रा में विघ्न डालने वाले हुए नाकाम धीरेंद्र शास्त्री ने कहा "पदयात्रा में विघ्न डालने के मंसूबे पाले बैठे आतंकियों की ठठरी बर गई. इतनी बड़ी यात्रा में इतने झंझट आये, विरोध हुआ, आतंकवादी पीछे लग गए, बम विस्फोट हुआ, फरीदाबाद में जहां हम रुके थे वही पास में कट्टा, बंदूक, AK 47, RDX पकड़ा गया. खूब तैयारी में थी डराने की लेकिन देशविरोधी ताकतों को नाकामी मिली." 

रांची बिरसा मुंडा कारागार: HC ने सरकार को 48 घंटे में जेल अधीक्षक बहाल करने का आदेश दिया

रांची झारखंड उच्च न्यायालय ने बीते मंगलवार को राज्य सरकार को होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार के प्रबंधन के लिए तत्काल एक नियमित अधीक्षक की नियुक्ति करने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ मीडिया के एक वर्ग में हाल ही में प्रकाशित खबरों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए शुरू की गई एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इन खबरों में जेल परिसर में दो विचाराधीन कैदियों के “एक हॉल के अंदर नाचने” का जिक्र था, जिसका वीडियो व्यापक रूप से प्रसारित हुआ था। अदालत ने सरकार को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि मोबाइल फोन, चार्जर, मादक पदार्थ आदि जेल परिसर में नहीं पहुंच सकें। पीठ ने जिला प्रशासन के साथ-साथ झारखंड विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) के अधिकारियों को जेल के अंदर नियमित अंतराल पर औचक निरीक्षण करने को कहा। इस मामले में अगली सुनवाई पांच जनवरी 2026 को होगी। ये विचाराधीन कैदी शराब घोटाले में कथित संलिप्तता को लेकर हिरासत में हैं। आईजी (जेल) सुदर्शन मंडल ने 12 नवंबर को खबर प्रकाशित होने के तुरंत बाद बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार के सहायक जेलर देवनाथ राम और वार्डर बिनोद यादव को कर्तव्य में लापरवाही के लिए निलंबित कर दिया था।

बालोद जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी सुचारु रूप से जारी

आज तीसरे दिन धान खरीदी केन्द्र कोचेरा में 411 क्विंटल एवं कोबा में 360 क्विंटल से अधिक की धान खरीदी की गई रायपुर, राज्य शासन के विशेष प्राथमिकता वाले समर्थन मूल्य पर धान खरीदी योजना के अंतर्गत बालोद जिले में धान खरीदी केन्द्रों में धान खरीदी का कार्य सफलतापूर्वक जारी है। जिले के कृषक उन्हें जारी किए गए टोकन के अनुसार प्रतिदिन धान खरीदी केन्द्रों में सुबह से पहुँचकर अपने धान की बिक्री की प्रक्रिया को पूरा करने के उपरांत अपनी धान की बिक्री कर रहे हैं। धान खरीदी के तीसरे दिन भी आज 18 नवंबर को सुबह से ही जिले के धान खरीदी केन्द्रों में कृषकों की चहल कदमी शुरू हो गयी थी। इसके अंतर्गत जिले के डौण्डीलोहारा विकासखण्ड के कोचेरा में आज तीसरे दिन 411 क्विंटल से अधिक की धान खरीदी की गई। जिसमें 272.80 क्विंटल पतला एवं 138.4 क्विंटल मोटा धान शामिल है। धान खरीदी केन्द्र कोचेरा में आज ग्राम दुपेचरा के कृषक श्री चोवाराम ने 18 क्विंटल मोटा धान, ग्राम कोचेरा के कृषक श्री दौलतराम ने 254 क्विंटल पतला, श्री दिलीप कुमार 110 क्विंटल पतला, जाम बाई ने 58 क्विंटल पतला, मुरली राम ने 125 विक्ंटल पतला, तानुराम ने 135 विक्ंटल पतला एवं नरोत्तम कुमार ने 30 क्विंटल मोटा, कुमेश्वर कुमार ने 100 क्विंटल पतला धान की बिक्री की। इसी तरह धान खरीदी केन्द्र कोबा में 360 क्विंटल से अधिक की धान की खरीदी की गई। जिसमें से 316 क्विंटल मोटा एवं 44 क्विंटल पतला धान शामिल है। धान खरीदी कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न कराने हेतु आज सुबह से ही नोडल अधिकारियों द्वारा अपने-अपने प्रभार वाले धान खरीदी केन्द्रों में पहुँचकर धान खरीदी कार्य की सतत मॉनिटरिंग की गई है। उल्लेखनीय है कि कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार जिले में धान खरीदी कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न करने हेतु पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित की गई है। इसके अंतर्गत धान खरीदी केन्द्रों में अपने धान की बिक्री हेतु पहुँचने वाले किसानों की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए उनके लिए शुद्ध पेजयल, छांव, बैठक इत्यादि के अलावा शौचालय आदि की भी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा के निर्देंशानुसार जिला प्रशासन के आला अधिकारियों के अलावा जिले के सभी राजस्व अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार तथा खाद्य, सहकारिता एवं संबंधित विभाग के अधिकारी धान खरीदी केन्द्रों में पहुँचकर धान खरीदी कार्य की सतत मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

स्कॉटलैंड ने 26 साल बाद फीफा विश्व कप के लिए क्वालिफाई किया, मैक्टोमिने ने दागा करिश्माई गोल

ग्लास्गो स्कॉटलैंड ने 10 खिलाड़ियों के साथ खेल रही डेनमार्क पर 4-2 की रोमांचक जीत दर्ज कर फीफा विश्व कप 2026 के लिए क्वालिफाई कर लिया। यह स्कॉटलैंड का 1998 के बाद पहला विश्व कप टिकट है। मैच में इंजरी टाइम में आए दो गोलों ने मुकाबले को यादगार बना दिया। शुरुआती तीसरे मिनट में स्कॉट मैक्टोमिने ने गेंद पर शानदार ओवरहेड किक मारकर स्कॉटलैंड को बढ़त दिलाई। नेपोली मिडफील्डर का यह गोल पूरे स्टेडियम को झूमने पर मजबूर कर गया। हालांकि डेनमार्क ने जल्द ही खुद को संभाला और पहले हाफ में गेंद पर कब्जा बनाए रखा, लेकिन गोल नहीं कर सके। दूसरे हाफ में 57वें मिनट पर रासमुस होइलुंड ने पेनल्टी को गोल में बदलकर स्कोर 1-1 कर दिया। इसके चार मिनट बाद डेनमार्क को झटका लगा जब रासमुस क्रिस्टेनसन को दूसरा पीला कार्ड मिलने पर मैदान छोड़ना पड़ा और टीम 10 खिलाड़ियों की रह गई। 78वें मिनट में लॉरेंस शेंकलैंड ने कॉर्नर पर शानदार फिनिश करते हुए स्कॉटलैंड को 2-1 की बढ़त दिलाई, लेकिन कुछ ही देर में पैट्रिक डॉर्गु ने स्कोर 2-2 कर दिया। इसके बाद स्कॉटलैंड ने दमदार वापसी करते हुए इंजरी टाइम में दो गोल दागे। 93वें मिनट में कीरन टियरनी ने बाहर से जोरदार शॉट लगाकर गोल किया और टीम को 3-2 से आगे कर दिया। मैच के खत्म होने से ठीक पहले केनी मैकलीन ने आधे मैदान से गेंद को गोल में डालकर स्कॉटलैंड की ऐतिहासिक जीत पक्की कर दी। स्कॉटलैंड ग्रुप सी का विजेता बनकर 13 अंकों के साथ विश्व कप के लिए सीधे क्वालिफाई हुआ, जबकि डेनमार्क को प्लेऑफ का रास्ता अपनाना पड़ेगा। स्कॉटलैंड मैनेजर स्टीव क्लार्क ने खिलाड़ियों की तारीफ करते हुए कहा, “आखिरी कदम हमेशा मुश्किल होता है, और लड़कों ने इसे बखूबी संभाला। मैक्ट्रोमिने का ओवरहेड किक मेरी जिंदगी का सबसे बेहतरीन गोल था।” कप्तान एंड्रयू रॉबर्टसन ने भावुक होकर कहा, “हम कभी हार नहीं मानते। यह स्क्वॉड की पहचान है। हमने देश को रोमांच में डाल दिया, लेकिन इसका हर पल वाजिब था। हम विश्व कप में जा रहे हैं।”  

बिजली बिल जमा करना हुआ आसान, पोस्ट ऑफिस और IPPB में मिलेगी सुविधा बिना अतिरिक्त चार्ज

भोपाल  मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड अपने उपभोक्ताओं के लिए कई तरह की फायदेमंद स्कीम और सुविधाएँ उपलब्ध कराती है, इसी क्रम में अब बिजली बिल भुगतान को लेकर कंपनी ने एक नई सुविधा उपलब्ध कराई है, विशेष बात ये है कि इसमें कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र के बिजली उपभोक्ताओं को डाकघरों और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के अधिकृत प्रतिनिधि (डाकिये) के माध्‍यम से बिना किसी अतिरिक्‍त शुल्‍क के बिजली बिल भुगतान की सुविधा उपलब्‍ध कराई गयी है। पोस्ट ऑफिस में भी होगा बिजली बिल भुगतान  कंपनी ने कहा अब बिजली उपभोक्‍ताओं को यह सरल और सुलभ भुगतान की सुविधा बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के नजदीकी डाकघर में मिलना शुरू हो गई है। डिजिटल और सुरक्षित तरीके से डाकघर के माध्‍यम से बिल भुगतान की सुविधा शहरी क्षेत्रों के साथ ही ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी उपलब्‍ध है। गौरतलब है कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा बिजली उपभोक्ताओं को दी जा रही सेवाओं का विस्तार करते हुए बिल भुगतान की व्यवस्था को और अधिक सरल एवं सुलभ बनाते हुए इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के माध्‍यम से बिजली बिल भुगतान की विशेष सुविधा उपलब्‍ध कराने के लिए एक समझौता ज्ञापन हस्‍ताक्षरित किया गया है। नहीं लगेगा कोई अतिरिक्त चार्ज  इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के सहायता प्राप्त चैनलों के माध्यम से बिजली बिल संग्रहण को सक्षम बनाते हुए बिजली उपभोक्‍ताओं को बिना अतिरिक्‍त प्‍लेटफॉर्म चार्ज के बिल भुगतान की सुविधा उपलब्‍ध कराना है। अब बिजली उपभोक्ता इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के विस्तृत नेटवर्क और डाकिया/ग्रामीण डाक सेवक की सहायता से भी अपने घर के पास या घर बैठे ही आसानी से बिजली बिल का भुगतान कर सकेंगे।

सिर्फ दो मिनट में जानिए स्मार्ट फोन की स्पीड बढ़ाने के ये 4 रामबाण टिप्स

  स्मार्ट फोन की धीमी गति के कारण यदि आप भी परेशान हैं तो आप ये आसान टिप्स अपनाकर उसकी गति तेज कर सकते हैं। -फोन में अगर ढेरों एप्लीकेशन हैं तो पहला काम यह करें कि जिन एप्लीकेशंस का प्रयोग आप नहीं करते हैं उन्हें तुरंत हटा दें। इससे आपके स्मार्ट फोन की स्पीड तेज हो जाएगी। -जिस भी ऐप का आप सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं उसके कैश को नियमित रूप से डिलीट करते रहें। कैश को हटाने के लिए सबसे पहले सेटिंग्स-एप्स में जाएं। यहां उस ऐप पर क्लिक करें जिसके कैश को क्लियर करना है। क्लिक करने के बाद आपको ‘क्लियर कैश’ विकल्प पर क्लिक करना है। -कैश क्लीन करने के अतिरिक्त स्मार्टफोन में केवल उन्हीं ऐप्स को जगह दें जो आपके काम की हैं। यदि आपके फोन की भी इनबिल्ट स्टोरेज कम है तो सबसे अच्छा विकल्प है कि इंटरनल स्टोरेज में मौजूद तस्वीरें, म्यूजिक और वीडियो फाइल को माइक्रोएसडी कार्ड में मूव कर दें। -आपको सेटिंग्स को देखना चाहिए कि कंपनी द्वारा आपके फोन को सॉफ्टवेयर अपडेट तो नहीं मिला है। जांच के लिए सेटिंग्स-सिस्टम-अबाउट-सॉफ्टवेर अपडेटस में जाएं। यदि कोई सॉफ्टवेयर अपडेट मिलता है तो फोन को अपडेट करने से पहले बैकअप जरूर लें।  

जल संरक्षण में छत्तीसगढ़ का उत्कृष्ट प्रदर्शन, राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में राज्य के 12 जिलों को किया सम्मानित प्रदेश का जल भविष्य सुरक्षित करने में यह पुरस्कार होगा प्रेरणादायी: मुख्यमंत्री साय   रायपुर, जल संरक्षण एवं सामुदायिक भागीदारी के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित कर छत्तीसगढ़ के 12 जिलों रायपुर, गरियाबंद, महासमुंद, राजनांदगांव, बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी, बालोद, बलरामपुर, बिलासपुर, रायगढ़, दुर्ग और सूरजपुर ने राष्ट्रीय स्तर पर नया इतिहास रच दिया है। विज्ञान भवन, नई दिल्ली में कल आयोजित 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार एवं जल संचय जनभागीदारी 1.0 अवार्ड समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने इन जिलों को सम्मानित किया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और संवेदनशील प्रशासनिक प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण की दिशा में देशभर में विशेष पहचान बनाई है। पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार के अभिनव प्रयासों और जनभागीदारी ने जल संचयन की दिशा में नए आयाम हासिल किए हैं। मुख्यमंत्री ने इन जिलों के नागरिकों और जिला प्रशासन को अपनी शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि जल संचयन के प्रति लोगों में आई यह चेतना जल के समुचित उपयोग को बढ़ावा देगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का जल भविष्य सुरक्षित करने में यह पुरस्कार प्रेरणादायी होगा। रायपुर जिले को जल संचय जनभागीदारी अभियान में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया है। देशभर के नगर निगमों में रायपुर नगर निगम प्रथम स्थान पर रहा, जबकि पूर्वी जोन कैटेगरी 01 में रायपुर जिला तीसरे स्थान पर रहा। रायपुर जिले और नगर निगम ने मिलकर सामुदायिक सहभागिता को जल संचय का व्यापक अभियान बनाया। रायपुर नगर निगम द्वारा 33,082 कार्य और जिला प्रशासन द्वारा 36,282 कार्य किए गए हैं। राजनांदगांव जिले को ईस्ट जोन के अंतर्गत राष्ट्रीय जल अवार्ड में प्रथम स्थान तथा जनभागीदारी केटेगरी 01 में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है तथा प्रोत्साहन स्वरूप 2 करोड़ रूपए की राशि प्रदान की गई है। यहां 58,967 जल संचय के कार्य जनभागीदारी से पूर्ण किए गए हैं। बालोद जिले को केटेगरी 01 में बेस्ट परफॉर्मिंग के लिए पहला स्थान प्राप्त हुआ है, साथ ही 2 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। यहां 92,742 नई जल संरचनाएँ निर्मित की गई। महासमुंद जिले को कैटेगरी 2 अंतर्गत प्रथम स्थान के लिए सम्मानित किया है। यहां 35,182 जल संरचनाओं का निर्माण किया गया है। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले को कैटेगरी 2 के तहत दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है तथा प्रोत्साहन स्वरूप 01 करोड़ रूपए की पुरस्कार राशि दी गई है। यहां 30,927 संरचनाओं का निर्माण किया गया है। गरियाबंद जिला को केटेगरी-2 में देश में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है तथा प्रोत्साहन स्वरूप एक करोड़ रूपए की राशि मिली है। यहां 26,025 सतही जल के बेहतर रख-रखाव के कार्य किए गए हैं।   बिलासपुर को केटेगेरी 03 में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है तथा प्रोत्साहन स्वरूप 25 लाख रूपए की पुरस्कार राशि मिली है। यहां 21,058 जल संरचनाओं का निर्माण कार्य किया गया है। दुर्ग जिले को केटेगरी-03 में 16वां स्थान प्राप्त हुआ है तथा 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है। यहां 5010 जल संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है। बलरामपुर जिले को केटेगरी-03 में 6वें स्थान के लिए सम्मानित किया गया है तथा 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है। यहां 8644 जल संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है। धमतरी जिले को केटेगरी 3 में 8वां स्थान के लिए सम्मानित कर 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है। यहां 7674 जन संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है। रायगढ़ जिले को केटेगरी 3 में द्वितीय स्थान के लिए सम्मानित कर 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है। यहां 19088 जल संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है। सूरजपुर जिले को केटेगरी 3 में 12वां स्थान के लिए सम्मानित कर 25 लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है तथा यहां 5797 जल संरक्षण परियोजनाओं का निर्माण किया गया है।

देश को दहलाने की प्लानिंग! शाहीन गैंग ने कानपुर से ली दो कारें, पांच शहरों में ब्लास्ट की साजिश

कानपुर फरीदाबाद विस्फोटक बरामदगी और दिल्ली ब्लास्ट में गिरफ्तार डॉक्टर शाहीन के दस्ते ने कानपुर से भी दो कारें खरीदी थीं। कानपुर, लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज में धमाके की साजिश रची गई थी। कार का इस्तेमाल इन धमाकों में होना था या नहीं, अभी यह रहस्य नहीं खुला है। पुलिस और एजेंसियों को कानपुर से कारें खरीदने की भनक लग गई तो गाड़ियां गायब कर दी गईं। सुरक्षा एजेंसियों ने कानपुर के पुरानी कारों के बाजार से दो लोगों को उठाया गया है। उनसे पूछताछ की जा रही है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक डॉ. शाहीन और डॉ. आरिफ के साथ तीन अन्य डॉक्टर यूपी में बड़ी वारदात को अंजाम देने की साजिश रच चुके थे। इसके लिए ही अलग-अलग शहरों से पुरानी कारें खरीदने की योजना बनी। सूत्रों का कहना है कि कानपुर से दो कारें खरीदी गईं। इन्हें अलग-अलग स्थानों पर देखा गया। इनमें से एक कार से डॉ. आरिफ भी एयरपोर्ट के पास दिखाई दिया था। वह एयरपोर्ट के असपास क्यों गया, यह अभी साफ नहीं है। अब तक की जांच में पता चला है कि दोनों कारें एक ही एजेंट से खरीदी गई हैं। छानबीन के सिलसिले में पुरानी कारों के एक व्यापारी और एक ड्राइवर को हिरासत में लेने के बाद दिल्ली में ले जाकर पूछताछ की जा रही है। केन्द्रीय खुफिया एजेंसी इससे जुड़े सुरागों की कड़ियां जोड़ रही है। अब तक पकड़े गए लोगों ने कार खरीदारों के पहचान पत्र समेत कई कागजात दिए हैं। साथ ही खरीदार बन कर आए तीन लोगों के हुलिए भी बताए हैं। इनमें से दो की शक्ल-सूरत, रंग, पहनावे और बोली से उनके कश्मीरी होने का संदेह है। एजेंसियों को कुछ ऐसी फुटेज भी मिली हैं जिनमें इन कारों पर सवार होकर आते-जाते लोग दिखे हैं। यह कारें प्रयागराज, लखनऊ नंबरों की हैं। कहा जा रहा है कि ऐसी ही एक फुटेज में डॉ. शाहीन भी डिफेंस एरिया में दिखाई दी है। एजेंसियां इन सभी बिंदुओं पर गहनता से जांच कर रही हैं। टेरर की लाइफलाइन को वाहन कबाड़ों से मिल रही ऑक्सीजन दिल्ली बम धमाके में इस्तेमाल हुई कार ने खरीद-फरोख्त के इस कारोबार में टेरर की लाइफलाइन पनपने का खुलासा किया है। कंडम वाहनों को खरीदने वाले कबाड़ों से आतंकवाद और अपराध को ऑक्सीजन दी जा रही है। कबाड़ मालिकों और निजी बीमा कंपनियों की मजबूत सांठगांठ और परिवहन व पुलिस विभाग के कमजोर निगरानी तंत्र से यह धंधा फल फूल रहा है। कंडम वाहनों का पंजीकरण निरस्त कराए बिना ऐसे वाहनों की चेसिस नंबर और कागजात के जरिये देश के अलग-अलग हिस्सों में वाहन चल रहे हैं, जो पंजीकृत तो मूल स्वामियों के नाम से हैं लेकिन उनका इस्तेमाल अपराधी और आतंकवादी भी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा जांच एजेंसियां अगर भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के सर्वेक्षकों और बीमा कंपनियों की मदद लें तो टेरर की लाइफलाइन को काटा जा सकता है। टोटल लॉस क्लेम मिलने से खत्म नहीं होती जिम्मेदारी कार वाहनों के बीमा के क्षेत्र में 80 प्रतिशत हिस्सेदारी निजी बीमा कंपनियों की है। इन कंपनियों में तैनात इनहाउस सर्वेयरों की भूमिका पर शतप्रतिशत भरोसा करना महंगा पड़ सकता है। किसी दुर्घटना में वाहन के अधिक क्षतिग्रस्त होने पर वाहन के बीमा की राशि लेने के लिए वाहन स्वामी जब बीमा कंपनी से संपर्क करता है तो कंपनी का सर्वेयर निरीक्षण करने पहुंचता है। जबकि आईआरडीएआई की गाइडलाइंस के मुताबिक वाहन में 50 हजार से अधिक के नुकसान पर आंकलन कंपनी का सर्वेयर नहीं बल्कि आईआरडीएआई के सर्वेयर करेगा। कंपनियों के सर्वेयर बीमा ग्राहक पर वास्तविक नुकसान का आकलन न कर दबाव बनाकर उस पर ‘कैशलॉस’ कराने का झांसा देते हैं। इसके बाद पंजीकरण समेत उस वाहन को कबाड़ी को बेच देते हैं। दुर्घटना विषय विशेषज्ञ निर्मल त्रिपाठी के मुताबिक वाहन स्वामी गाड़ी का क्लेम लेकर आरटीओ के फॉर्म 29 और 30 पर ब्लैंक सिग्नेचर के बाद भूल जाते हैं। इसके बाद वाहनों की चेसिस और पंजीकरण का इस्तेमाल चोरी और दूसरी गाड़ियों में हो जाता है। इंडियन मोटर टैरिफ के जीआर-8 के मुताबिक टोटल लॉस वाहनों पर कुल बीमित राशि लेना ग्राहक का अधिकार है। अगर बीमा कंपनियां उसे पूर्ण भुगतान करने से मना करती हैं या उसे कम ज्यादा राशि देने के लिए अनुचित दबाव बनाती हैं तो इसकी शिकायत आईआरडीएआई से कर सकते हैं। शिकायत पर बीमा कंपनियों पर करोड़ों का जुर्माना हो सकता है और लाइसेंस भी निरस्त हो कसता है। 75 प्रतिशत से अधिक क्षतिग्रस्त वाहन टोटल लॉस की श्रेणी में आते हैं। इसमें खाई में गिरकर पूरी तरह से बर्बाद गाड़ी, जली हुई और चोरी हुई गाड़ियां आती हैं। बीमा कंपनियां आईआरडीएआई के एक सर्कुलर में टोटल लॉस के साथ कंस्ट्रक्टिव टोटल लॉस का जिक्र न होने की खामी का फायदा उठा रही हैं। कंडम वाहन के क्षतिग्रस्त होने के बाद बीमा की रकम लेने के बाद कबाड़ी को बेचे गए वाहन की चेसिस को निकलवार आरटीओ ऑफिस में जमा कराएं और आरसी निरस्त कराएं। दुर्घटना विषय विशेषज्ञ निर्मल त्रिपाठी के अनुसार सुरक्षा एजेंसियां आईआरडीएआई के सर्वेक्षकों और बीमा कंपनियों की मदद से आतंक और अपराध में यूज होने वाले ऐसे वाहनों का खेल बंद करा सकती हैं। बीमा कंपनियां भी नियमों का पालन करें।