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किसानों और नागरिकों के हित में साय सरकार ने गाइडलाइन दरों की समीक्षा की

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने पूरे राज्य के लिए गाइडलाइन दरों का व्यापक, वैज्ञानिक और तर्कसंगत पुनरीक्षण करते हुए ऐतिहासिक कदम उठाया है। यह निर्णय जनता के हित, पारदर्शिता, उचित बाजार मूल्यांकन और नागरिकों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। गाइडलाइन नियम 2000 के अनुसार दरों का प्रतिवर्ष पुनरीक्षण आवश्यक है, परंतु वर्ष 2017-18 के बाद से दरों में किसी प्रकार का संशोधन नहीं हुआ था। इस कारण वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों में भारी अंतर पैदा हो गया था—जिसका प्रतिकूल प्रभाव किसानों, भूमिस्वामियों, संपत्ति धारकों और आम नागरिकों पर पड़ रहा था। राज्य में गाइडलाइन दरों के पिछले ढांचे नगरीय क्षेत्रों में दरों में भारी विसंगतियाँ थीं। एक ही सड़क, वार्ड या आसपास के क्षेत्रों में अनुपातहीन अंतर दिखाई देता था। एक ही सड़क पर स्थित संपत्तियों की दरें अलग-अलग थीं, जिससे नागरिकों को वास्तविक मूल्यांकन में कठिनाई होती थी। ग्रामीण क्षेत्रों में भी एक ही मार्ग पर स्थित गाँवों की दरों में अतार्किक भिन्नता थी, जिससे किसानों को मुआवज़ा और बैंक लोन में नुकसान होता था। पिछले सात वर्षों में बने नए हाईवे, कॉलोनी, औद्योगिक क्षेत्र आदि की दरें निर्धारित नहीं थीं, जिससे नागरिकों को संपत्ति मूल्य जानने में कठिनाई हो रही थी। वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री ओपी चौधरी के दिशानिर्देश पर गाइडलाइन दरों को पुर्ननिर्धारित करते हुए पूरी प्रक्रिया को वैज्ञानिक, पारदर्शी और जनसुलभ बनाया गया है। नगरीय क्षेत्रों में गाइडलाइन को रोड-वाइज तैयार किया गया है, ताकि एक सड़क और समान परिस्थितियों वाले क्षेत्रों की दरें समान हों। अत्यधिक कंडिकाओं को समायोजित कर संख्या कम की गई, ताकि नागरिकों को मूल्य समझने में सरलता हो। ग्रामीण क्षेत्रों में सभी गाँवों की दरों को नक्शे में प्रविष्ट कर, समान मार्ग और समान परिस्थितियों वाले गाँवों की दरें यथासंभव समान और तर्कसंगत की गईं।वर्तमान दरों की वैज्ञानिक मैपिंग कर रैशनलाइज़्ड बेस रेट तैयार किए गए और इन्हीं के आधार पर नई दरें प्रस्तावित की गईं है। नवीन दरें – जनता को सीधा लाभ नगरीय क्षेत्रों में लगभग 20% की तर्कसंगत वृद्धि की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के हित में दरों में 50% से 300% तक वृद्धि की गई है—जिससे किसानों को भूमि अधिग्रहण आदि में 3 गुना तक अधिक मुआवज़ा मिलेगा। नवीन दरों से किसानों/भूमिस्वामियों को उनकी भूमि का अधिक एवं न्यायसंगत मुआवज़ा प्राप्त होगा। संपत्ति के विरुद्ध बैंक से अधिक राशि का लोन स्वीकृत होगा। आम नागरिकों के लिए अपनी संपत्ति की गाइडलाइन दर स्पष्ट और समझने में आसान होगी। वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि गाइडलाइन दरों का यह व्यापक और वैज्ञानिक पुनरीक्षण जनता के हितों को सर्वोपरि रखते हुए पूरी पारदर्शिता के साथ किया गया है। उन्होंने कहा कि 2017-18 के बाद दरों में संशोधन न होने से राज्य में वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों में गंभीर असंतुलन पैदा हो गया था, जिससे किसान, भूमिस्वामी और सामान्य नागरिक प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो रहे थे। नई गाइडलाइन दरें रोड-वाइज और वैज्ञानिक मैपिंग के आधार पर तैयार की गई हैं, ताकि हर क्षेत्र में दरें तर्कसंगत, समान और समझने में सरल हों। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में 50% से 300% तक की वृद्धि किसानों को उचित मुआवज़ा और अधिक बैंक लोन प्राप्त करने में बड़ा लाभ देगी, नगरीय क्षेत्रों में 20% की तार्किक वृद्धि मूल्य-विसंगतियाँ दूर करेगी। चौधरी ने कहा कि विभाग भविष्य में भी विकास, नई बसाहटों, बाजार प्रवृत्तियों और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के आधार पर नियमित समीक्षा करता रहेगा, ताकि किसी भी नागरिक को उनकी संपत्ति के वास्तविक मूल्य से वंचित न होना पड़े। उल्लेखनीय है कि लंबे अंतराल के बाद गाइडलाइन दरों का यह व्यापक और महत्त्वपूर्ण संशोधन किया गया है। भविष्य में भी विभाग द्वारा जिले स्तर पर उस क्षेत्र में हो रहे विकास, नए निर्माण, क्षेत्रीय परिस्थितियों, बाजार प्रवृत्तियों तथा नई बसाहटों/कॉलोनियों के विस्तार का नियमित आकलन किया जाता रहेगा। इसी आधार पर गाइडलाइन दरों में समय-समय पर आवश्यक, तर्कसंगत और जनहितकारी संशोधन किए जाते रहेंगे, ताकि नागरिकों को उनकी संपत्ति के वास्तविक मूल्य का लाभ निर्बाध रूप से मिलता रहे और किसी भी प्रकार की मूल्य-विसंगतियाँ उत्पन्न न हों। "गाइडलाइन दरों का वैज्ञानिक और तर्कसंगत पुनरीक्षण राज्य के किसानों, भूमिस्वामियों और आम नागरिकों के हित में उठाया गया अत्यंत महत्त्वपूर्ण कदम है। पिछले कई वर्षों से दरों में संशोधन न होने के कारण वास्तविक बाजार मूल्य और गाइडलाइन दरों में बड़ा अंतर पैदा हो गया था। नई दरें न केवल न्यायसंगत मूल्यांकन सुनिश्चित करेंगी, बल्कि किसानों को भूमि अधिग्रहण में अधिक मुआवज़ा, नागरिकों को संपत्ति का सही मूल्य और बैंक से अधिक ऋण प्राप्त करने में भी सहायता प्रदान करेंगी। शासन की मंशा स्पष्ट है—हर नागरिक को उसकी संपत्ति का उचित मूल्य मिले और किसी भी प्रकार की विसंगतियाँ या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। यह निर्णय प्रदेश के आर्थिक परिवेश को अधिक पारदर्शी, संतुलित और जनहितकारी बनाएगा।" – CM विष्णु देव साय  

स्पेन में जन्म दर 1.10 तक गिर गई, यूरोप में आबादी तेजी से घट रही

वारसा यूरोप अब 'बूढ़ा' हो रहा है. इटली, पोलैंड और स्पेन जैसे देशों में लोग इतनी तेजी से कम हो रहे हैं कि साल 2100 से पहले ही पूरी आबादी आधी रह जाएगी. यह कोई दूर की बात नहीं है – अभी से गांव खाली हो रहे हैं. घर बिक नहीं रहे और युवा दूसरे देशों में नौकरी ढूंढने भाग रहे हैं. जन्म दर बहुत कम हो गई है.  बुजुर्ग ज्यादा हैं और माइग्रेशन से भी मदद नहीं मिल रही. अगर पेंशन देने के पैसे खत्म हो गए तो अर्थव्यवस्था बर्बाद हो सकती है. स्पेन में तो 2024 में जन्म का आंकड़ा सबसे कम हो गया – सिर्फ 3 लाख 18 हजार 5 बच्चे पैदा हुए, जो 1941 से अब तक का सबसे निचला स्तर है. स्पेन में क्या संकट है? स्पेन में 2024 का जन्म आंकड़ा चौंकाने वाला है…     कुल बच्चे: 3,18,005 – सबसे कम का रिकॉर्ड.     देशी स्पेनियों के बच्चे बहुत कम हो गए, जबकि हर 3 में से 1 बच्चा विदेशी मां से पैदा हुआ.     प्राकृतिक रूप से आबादी घटी: 1.16 लाख से ज्यादा लोग कम हुए (जन्म से ज्यादा मौतें).     पिछले 10 साल में देशी जन्म दर 25.6% गिर गई.     मां बनने की औसत उम्र: 33.2 साल. हर औरत औसतन सिर्फ 1.10 बच्चे पैदा कर रही है, जबकि आबादी स्थिर रखने के लिए कम से कम 2.1 बच्चे जरूरी हैं.  स्पेन में कोई ठोस नीति नहीं है जो जन्म दर बढ़ाए. सरकार ने कुछ मदद दी है जैसे बच्चे पैदा करने पर छुट्टी या पैसे, लेकिन यह काफी नहीं है. नतीजा यह है कि स्पेन बूढ़ा हो रहा है. गांव खाली हैं. अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ रहा है. पूरे यूरोप में यह समस्या क्यों फैल रही है? इटली में भी जन्म दर 1.2 है. पोलैंड में 1.3 – सभी जगह एक जैसी हालत. दक्षिणी और पूर्वी यूरोप में शहरों से लोग भाग रहे हैं. युवा जर्मनी या अमेरिका जैसे देशों में जा रहे हैं जहां नौकरियां बेहतर हैं. अब वैज्ञानिक कारण समझते हैं कि जन्म दर क्यों इतनी कम हो गई है. यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि जनसांख्यिकीय संक्रमण (Demographic Transition) नाम की वैज्ञानिक प्रक्रिया का नतीजा है. वैज्ञानिक कारण  आर्थिक दबाव (Economic Pressure): यूरोप में जीवन बहुत महंगा है. घर खरीदना, बच्चे पालना, स्कूल की फीस – सब कुछ बहुत खर्चीला. महिलाएं अब पढ़ाई और नौकरी पर ध्यान देती हैं, इसलिए शादी और बच्चे देर से होते हैं. वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि जब GDP (देश की कमाई) बढ़ती है, तो लोग छोटा परिवार पसंद करते हैं क्योंकि बच्चे महंगे हो जाते हैं. स्पेन में बेरोजगारी ज्यादा है, इसलिए युवा बच्चे पैदा करने से डरते हैं. सामाजिक बदलाव (Social Changes): महिलाएं अब पुरुषों की तरह काम कर रही हैं. शिक्षा और करियर पहले आता है. औसतन शादी 30 साल की उम्र के बाद होती है. विज्ञान कहता है कि महिलाओं की उम्र बढ़ने से प्रजनन क्षमता (Fertility) कम होती है. 35 साल बाद गर्भधारण मुश्किल हो जाता है क्योंकि अंडों की गुणवत्ता घटती है. यूरोप में तलाक ज्यादा हैं. सिंगल पैरेंट्स बढ़ रहे हैं, जो बच्चे पैदा करने को और मुश्किल बनाता है. बुजुर्ग आबादी (Aging Population): पहले जन्म दर ज्यादा थी, इसलिए अब बुजुर्ग ज्यादा हैं. लेकिन युवा कम हैं जो उन्हें पेंशन दें या देखभाल करें. यह जनसांख्यिकीय पिरामिड (Population Pyramid) को उलटा कर देता है – नीचे कम युवा, ऊपर ज्यादा बुजुर्ग. वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगर जन्म दर 2.1 से कम रहती है, तो आबादी खुद-ब-खुद घटती जाती है. यूरोप में यह 1.5 के आसपास है. सांस्कृतिक और पर्यावरणीय कारण (Cultural and Environmental Factors): लोग अब पर्यावरण बचाने के लिए कम बच्चे चाहते हैं. जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से डर है कि ज्यादा आबादी संसाधन खत्म कर देगी. साथ ही, मोबाइल और सोशल मीडिया से जीवन व्यस्त हो गया, रिश्ते कम मजबूत हैं. अध्ययन दिखाते हैं कि यूरोप में शून्य बच्चा (Childfree) जीवनशैली रही है. प्रवास की कमी (Lack of Migration): पहले अफ्रीका या एशिया से लोग आते थे, लेकिन अब सख्त कानून हैं. स्पेन में विदेशी मां से बच्चे बढ़ रहे हैं, लेकिन कुल मिलाकर यह कमी पूरी नहीं कर पा रहा. वैज्ञानिक कहते हैं कि बिना माइग्रेशन के आबादी घटना तय है. क्या असर होंगे? यह सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं – अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा. कम युवा मतलब कम काम करने वाले, कम टैक्स और पेंशन के लिए पैसे की कमी. स्कूल बंद हो जाएंगे. अस्पतालों में स्टाफ कम होगा. इटली में पहले से गांव बिक रहे हैं क्योंकि कोई रहने वाला नहीं. पोलैंड में युवा जर्मनी भाग रहे हैं. अगर अब नीतियां नहीं बनीं – जैसे बच्चे पैदा करने पर ज्यादा मदद, सस्ता घर, मुफ्त चाइल्डकेयर – तो उलटा करना मुश्किल होगा. विशेषज्ञ कहते हैं कि रोबोट या AI मदद कर सकते हैं, लेकिन इंसान की जगह नहीं ले सकते. यूरोप को अब सोचना होगा कि कैसे युवा रखें और जन्म दर बढ़ाएं. स्पेन की सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन वे कमजोर हैं. दुनिया के अन्य देश जैसे भारत या अफ्रीका में आबादी बढ़ रही है, लेकिन यूरोप का संकट अलग है.

सिक्सलेन प्रोजेक्ट में पर्यावरण पर ध्यान, राजधानी तक सड़क के निर्माण में पेड़ों की सुरक्षा की तैयारी

भोपाल   रत्नागिरी तिराहा से आशाराम तिराहा तक अयोध्या बायपास सिक्सलेन प्रोजेक्ट में 8000 पेड़ों की बली को कोकता बायपास से बचाया जा सकता है। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से इसकी संभावनाओं को तलाशा जा रहा है। एक दूसरे के समानांतर गुजर रहे दोनों बायपास के बीच चार किमी का अंतर है। भोपाल बायपास को कोकता बायपास भी कहा जाता है और अब भी अपेक्षाकृत ट्रैफिक नहीं है। नेशनल हाइवे के अफसरों का भी मानना है कि यदि कोकता बायपास पर ट्रैफिक बढ़ाया जाए तो अयोध्या बायपास किनारे पेड़ों को बचाया जा सकता है। दरअसल कोकता के पास से गुजरने वाले बायपास को भोपाल के बाहर भारी वाहनों के लिए बनाया गया था, उसे ही मजबूत करके शुरू किया जाए तो अयोध्या बायपास के पेड़ कटने से बच सकते हैं। ठेका एजेंसी को देना होगा हर्जाना यहां ठेका एजेंसी तय कर दी गई है। एजेंसी ने अपने प्लांट भी स्थापित कर दिए। एनएच को सिर्फ जगह खाली करना है, जिसके लिए पेड़ों की कटाई की जाएगी। एनजीटी के निर्देश के बाद केंद्रीय स्तर पर ही इसकी अनुमति हो सकती है। बीते सप्ताह इसे लेकर शासन की बैठक थी, लेकिन यहां भी मामला बना नहीं। ठेका एजेंसी का इसमें बड़ा खर्च हो रहा है। हर्जाना लेकर ठेका छोड़ने की चेतावनी दे दी गई है। ऐसेे में अब नए विकल्प की तलाश की जा रही है। बायपास के प्रोजेक्ट महत्वूपर्ण बायपास के प्रोजेक्ट महत्वूपर्ण है। जमीन निकालने के लिए प्रशासनिक अफसरों से कहा गया है। एनएच और एमपीआरडीसी से चर्चा की जा रही है। शासन स्तर से ही इसे लेकर निर्णय होगा। कौशलेंद्र विक्रमसिंह, कलेक्टर

राजा भोज एयरपोर्ट पर उड़ानों की बढ़त, नए वर्ष में यात्री संख्या डेढ़ लाख के पार जाने की संभावना

भोपाल  वर्ष 2026 की शुरूआत के साथ ही भोपाल से एयर कनेक्टिविटी बढ़ने की संभावना है। जल्द ही नवीं मुंबई एवं नोएडा के जेवर एयरपोर्ट से भी भोपाल का कनेक्शन जुड़ जाएगा। नए साल की पहली तिमाही में एयर इंडिया की सहयोगी कंपनी एआई एक्सप्रेस की उड़ानें भी शुरू हो जाएंगी। यदि ऐसा हुआ भोपाल का राजा भोज एयरपोर्ट देश के उन चुनिंदा एयपोर्ट में शामिल हो जाएगा जहां से मासिक यात्री संख्या का आंकड़ा डेढ़ से दो लाख के बीच है। पिछले छह माह से भोपाल से यात्रियों की मासिक संख्या एक से सवा लाख के बीच रही है। एयरपार्ट अथॉरिटी लंबे समय से पैसेंजर ग्रोथ प्लान पर काम कर रही है। अथॉरिटी के प्रयास से ही हाल ही में लंबे समय से बंद गोवा उड़ान पुन: शुरू हुई है। बेंगलुरू एवं दिल्ली तक एयर कनेक्टिविटी भी बढ़ी है। अब अथॉरिटी का फोकस ऐसे शहरों की उड़ान शुरू कराने पर जहां से भोपाल का कनेक्शन कभी नहीं जुड़ा। धार्मिक पर्यटन नगरों पर भी फोकस एयरपोर्ट अथॉरिटी का प्रयास है कि भोपाल से ऐसे शहरों की उड़ानें भी शुरू हो जाएं जो धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूण हैं। भोपाल से अमृतसर, शिर्डी, जम्मू एवं तिरूपति तक बड़ी संख्या में यात्री जाते हैं। इनमें से किसी भी शहर तक सीधी उड़ान नहीं है। वर्ष 2026 में कुछ शहर जुड़ने की उम्मीद की जा रही है। इंडिगो की हैदराबाद उड़ान को तिरूपति तक बढ़ाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। यदि दो में से एक उड़ान को तिरूपति से जो़ड़ दिया जाए तो तिरूपति बालाजी दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा हो जाएगी। हैदराबाद से तिरूपति का हवाई सफर मात्र 45 मिनट में पूरा हो जाता है। भोपाल से ट्रेन से तिरूपति जाने में 24 घंटे से अधिक समय लगता है। एआई एक्सप्रेस ने स्लाट लिया आई एक्सप्रेस ने भोपाल से दिल्ली, मुंबई के अलावा बेंगलुरू एवं हैदराबाद तक उड़ानें शुरू कराने का भरोसा एयरपोर्ट अथॉरिटी को दिलाया है। फरवरी माह में कम से कम दो उड़ानों के साथ कंपनी भोपाल में दस्तक दे सकती है। इन उड़ानों की शुरुआत से यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी होना तय है। इंटरनेशनल रूट पर दुबई उड़ान भी नए साल में प्रारंभ होने की उम्मीद है। ऐसे में भोपाल डेढ़ से दो लाख मासिक यात्री संख्या वाले क्लब में आसानी से शामिल हो सकता है। ऐतिहासिक होगा वर्ष 2026     एयरपोर्ट अथारिटी और भोपाल के लिए वर्ष 2026 ऐतिहासिक होगा। हम लगातार नए रूट जोड़ने के प्रयास कर रहे हैं। इंटरनेशनल उड़ान भी शुरू होने की उम्मीद है। ऐसे में यात्री संख्या बढ़ना तय है। – रामजी अवस्थी, एयरपोर्ट डायरेक्टर  

भाग्य बदलने के लिए हाथी की मूर्ति रखें सही जगह, जानें फेंगशुई के महत्वपूर्ण नियम

फेंगशुई एक ऐसी विद्या है जो हमें हमारे आसपास मौजूद चीजों के जरिए जीवन में सकारात्मक लाने के उपाय बताती है। दरअसल हम सभी के घर और कार्यस्थल पर कुछ ऐसी चीज मौजूद होती है जिनके इस्तेमाल का हमारे जीवन पर बहुत गहरा असर होता है। हम इन चीजों को समझ तो नहीं पाते लेकिन कभी हमें उनसे अच्छे तो कभी बुरे परिणाम मिलने लगते हैं। फेंगशुई चीनी वास्तु शास्त्र है जिसमें विंड चाइम, चीनी सिक्के और तरह-तरह की चीजों को लेकर उपाय बताए गए हैं। इसमें हाथी का भी जिक्र मिलता है जिसे समृद्धि और उन्नति का सूचक कहा गया है। इसे घर के मुख्य द्वार लिविंग रूम ऑफिस या फिर बच्चों के कमरे में रखना शुभ माना गया है। चलिए जान लेते हैं कि आपको इसे घर के किस हिस्से में किस दिशा में और कितनी संख्या में रखना होगा। इससे जीवन में नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होगी और सौभाग्य के द्वार खुलेंगे। किस दिशा में रखें हाथी की मूर्ति     अगर आप मुख्य द्वार पर इस मूर्ति को रखना चाहते हैं तो इसे हमेशा अंदर की ओर रखें। इससे सकारात्मक ऊर्जा और सुरक्षा बनी रहती है।     अगर करियर में तरक्की प्राप्त करना चाहते हैं तो इसे हमेशा उत्तर दिशा में स्थापित करें।     धन और समृद्धि की प्राप्ति के लिए इसे दक्षिण पूर्व दिशा में रखना शुभ माना गया है।     बच्चों की पढ़ाई और प्रगति के लिए इसे पश्चिम दिशा में स्थापित करें। कैसी होनी चाहिए सूंड जो हाथी आप अपने घर में रख रहे हैं उसकी सूंड दो तरह की हो सकती है। अगर यह ऊपर की तरफ है यानी कि यह धन, सौभाग्य और खुशियों का प्रतीक है। अगर यह सूंड नीचे की तरफ है तो यह शांति, स्थिरता और पारिवारिक मजबूती को बढ़ाती है। कैसे रखें हाथी     मुख्य द्वार पर हाथी रखने के लिए आपको दोनों तरफ एक हाथी रखना होगा। उनके मुख्य अंदर की तरफ होने चाहिए। नेगेटिव एनर्जी को रोकते हैं और घर की रक्षा करते हैं।     ऑफिस में इस टेबल पर रखना शुभ माना गया है। आप छोटा सा हाथी अपने पास रख सकते हैं। यह स्थिरता, नेतृत्व क्षमता और तरक्की को आकर्षित करने का काम करता है।     बेडरूम में भी हाथी रखा जा सकता है। इससे दांपत्य जीवन में प्रेम और समझ बढ़ जाती है।

स्मृति मंधाना और पलाश मुछाल की शादी की तैयारियां पूरी, इंदौर में 23 नवंबर को रस्में

 इंदौर  भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार प्लेयर स्मृति मंधाना तीन दिन बाद ‘इंदौर की बहू’ बनने वाली हैं। वो मशहूर सिंगर और म्यूजिक कम्पोजर पलाश मुछाल से शादी करने जा रही हैं। बताया जा रहा है कि 23 नवंबर को सांगली (महाराष्ट्र) में शादी की रस्में संपन्न होगी। शादी की तैयारियां जोरों पर हैं। उधर, पूरी टीम इंडिया भी स्मृति की शादी का बेसब्री से इंतजार कर रही है। यहां जानें कहां हो रही है शादी स्मृति के होमटाउन सांगली(महाराष्ट्र) में शादी की रस्में शुरू हो चुकी हैं। पलाश की सिंगर बहन पलक मुछाल ने बताया कि पूरा परिवार बेहद उत्साहित है। स्मृति (Smriti Mandhana Wedding) और पलाश की शादी में बॉलीवुड और क्रिकेट दोनों दुनिया के बड़े सितारे शामिल हो सकते हैं। टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने कहा कि स्मृति (Smriti Mandhana Wedding) की शादी में हम सब मिलेंगे और बहुत मजे करेंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मुछाल परिवार पूरी तरह से मुंबई में बस चुका है, इसलिए इंदौर में कोई भी रस्म नहीं की जाएगी। हालांकि शहर से पलाश के पारिवारिक सदस्य उनके मामा शादी समारोह में शामिल होंगे। दोनों परिवारों की एक ही कुलदेवी मिली जानकारी के अनुसार पलाश और स्मृति दोनों ही माहेश्वरी समाज से हैं। दोनों ही परिवार मूलत: राजस्थान के डीडवाना के हैं, इसलिए एक ही कुलदेवी को इन परिवारों से निमंत्रण भेजा गया है।इंदौरसे शादी में पुराने मित्र और नजदीकी रिश्तेदार शामिल हो सकते हैं।