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भागने की कोशिश में दुष्कर्म आरोपी घायल, पुलिस की जवाबी कार्रवाई में लगी गोली

 रायसेन रायसेन में एक 6 साल की बच्ची के साथ रेप का आरोपी सलमान पिछले 5 दिन से भागा-भागा फिर रहा था. उसके पीछे 300 पुलिसवाले लगे हुए थे. सलमान को पकड़ने के लिए लोग प्रदर्शन कर रहे थे. एक दिन पहले सलमान शहर के गौहरगंज इलाके में दिखा था. इसके बाद पुलिस पर दबाव और बढ़ गया था. लेकिन सलमान पुलिस से ज्यादा दिन तक बच नहीं पाया गौहरगंज के ही कीरत नगर में वो पुलिस के हत्थे चढ़ गया. भागने के दौरान उसका पुलिस के साथ मुठभेड़ भी हुई और उसके पैर में गोली लगी. घायल सलमान को भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस के मुताबिक, सलमान पर 30 हजार रुपये का इनाम घोषित था और वह पिछले पांच दिनों से फरार था. रायसेन एसपी आशुतोष गुप्ता ने बताया, 'कल रात हमारी विशेष टीमों ने आरोपी सलमान को गिरफ्तार कर लिया, जो पिछले पांच दिनों से फरार था और जिसकी सभी टीमें तलाश कर रही थीं. एक सटीक सूचना पर हमने कार्रवाई की और उसे हिरासत में ले लिया. ले जाते समय, उसने अचानक वाहन से कूदने की कोशिश की और हमारे सब-इंस्पेक्टर की पिस्तौल भी छीन ली और पुलिस पर गोली चला दी. आत्मरक्षा में, पुलिस ने भी जवाबी गोलीबारी की, जिसमें उसके पैर में गोली लग गई.' एसपी ने कहा- फायरिंग करते हुए भागने की कोशिश कर रहा था मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में मासूम बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी सलमान को पुलिस ने देर रात भोपाल से गिरफ्तार किया था। भोपाल से रायसेन लाने के दौरान बीच रास्ते में सलमान ने पुलिसकर्मी की बंदूक छीनकर फायरिंग करते हुए भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिसकर्मियों ने शॉर्ट एनकाउंटर में उसके पैर में गोली मारकर घायल कर दिया। उसे इलाज के लिए भोपाल के जय प्रकाश अस्पताल ले जाया गया। रायसेन (Raisen MP Crime News) के एसपी आशुतोष गुप्ता ने बताया, सलमान को भोपाल के गांधीनगर इलाके से गिरफ्तार किया गया और उसे रायसेन ले जाया जा रहा था। इसी बीच, भोजपुर के पास कीरतनगर गांव (MP News) इलाके में पुलिस की गाड़ी खराब हो गई। सलमान ने सब-इंस्पेक्टर की बंदूक छीनकर पुलिस पर फायरिंग करके भागने की कोशिश की। जवाबी फायरिंग में सलमान के पैर में गोली लग गई। उसे इलाज के लिए भोपाल के जय प्रकाश हॉस्पिटल ले जाया गया। इस मालमे में सब इंस्पेक्टर सुनील सिंह का कहना है, आरोपी सलमान को रायसेन ले जाया जा रहा था, तभी उसे ले जा रही गाड़ी पंक्चर हो गई। उसे दूसरी गाड़ी में शिफ्ट किया जा रहा था। इस दौरान, सलमान ने एक अधिकारी से पिस्टल छीन ली और पुलिस पर गोली चलाने की कोशिश की। क्रॉसफायरिंग में आरोपी के पैर में गोली लगी और एक पुलिस अधिकारी भी घायल हो गया। कैसे हुआ एनकाउंटर? पुलिस ने सलमान को भोपाल के वार्ड नंबर 11 स्थित एक चाय की दुकान से गिरफ्तार किया था. इसके बाद उसे गोहरगंज पुलिस के हवाले किया गया. जब पुलिस उसे रायसेन ले जा रही थी, भोजपुर के पास सलमान ने भागने की कोशिश की और पुलिस पर फायरिंग कर दी. जवाबी कार्रवाई में उसे पैर में गोली लगी. घायल सलमान को इलाज के लिए भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज जारी है.

कड़ाके की ठंड से कांपा राजस्थान, फसलों पर जमी बर्फ से किसान चिंतित

जयपुर राजस्थान में उत्तरी हवाओं के असर से सर्दी लगातार तेज होती जा रही है। बीकानेर, जयपुर और भरतपुर संभाग में तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जबकि शेखावाटी क्षेत्र में पारा लुढ़ककर 3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। सीकर और फतेहपुर में न्यूनतम तापमान 2.9 डिग्री सेल्सियस रहा, जो पहाड़ी क्षेत्र माउंट आबू (5°C) से भी कम है। मौसम केंद्र जयपुर ने गुरुवार को पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उदयपुर, जोधपुर और अजमेर संभाग में बादल छाने की संभावना जताई है। बुधवार सुबह उदयपुर में हल्का कोहरा रहा। पिछले 24 घंटों में प्रदेश का न्यूनतम तापमान फतेहपुर में 2.9°C रिकॉर्ड हुआ। सीकर में 4°C, नागौर 5.2°C, चूरू 5.6°C, करौली 7.1°C, झुंझुनूं 7.5°C, लूणकरणसर 4.5°C और अलवर 6.5°C दर्ज किया गया। माउंट आबू में न्यूनतम तापमान 5°C रहा। बर्फीली हवाओं के चलते दिन में भी शीतलहर का असर जारी है। धूप निकलने के बावजूद ठंड से राहत नहीं मिल रही। सभी शहरों में अधिकतम तापमान 30°C से नीचे रहा। बाड़मेर में सबसे अधिक तापमान 29.4°C दर्ज हुआ। मौसम में बदलाव की संभावना 27 नवंबर को जालोर, सिरोही, पाली, उदयपुर, राजसमंद, भीलवाड़ा और अजमेर में बादल छा सकते हैं तथा हल्की बारिश/बूंदाबांदी की आशंका है। 28 नवंबर को दौसा, जयपुर, टोंक, अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमंद और उदयपुर जिलों में भी हल्की वर्षा की संभावना जताई गई है। शहर — अधिकतम / न्यूनतम     अजमेर — 24.4 / 11.4     भीलवाड़ा — 24 / 13.2     वनस्थली (टोंक) — 25.6 / 9.3     अलवर — 25.8 / 6.5     जयपुर — 25 / 11.6     पिलानी — 25.7 / 7     सीकर — 26.5 / 4     कोटा — 24.3 / 14.2     चित्तौड़गढ़ — 26.3 / 13.4     उदयपुर — 24.4 / 13.8     बाड़मेर — 29.4 / 14.9     जैसलमेर — 27.6 / 12.9     जोधपुर — 27.4 / 13.6     बीकानेर — 26.4 / 13.2     चूरू — 25.8 / 5.6     श्रीगंगानगर — 26.6 / 8.7     नागौर — 26.4 / 5.2     बारां — 25.4 / 13.2     हनुमानगढ़ — 25.2 / 10.8     जालौर — 28.1 / 13     फतेहपुर — 26.4 / 2.9     करौली — 24.2 / 7.1     दौसा — 25.7 / 6.5     प्रतापगढ़ — 26.1 / 16.8     झुंझुनूं — 25.5 / 7.2  

भगवंत मान का जापान को आमंत्रण: पंजाब में बड़े निवेश की संभावनाएँ खुलीं

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज जापान के साथ उन्नत निर्माण, गतिशीलता, इलेक्ट्रॉनिक्स, फूड प्रोसेसिंग, नवीकरणीय ऊर्जा और वैश्विक सेवाओं जैसे प्रमुख क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी की वकालत की. मुख्यमंत्री ने कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के साथ जापान के एक हाई लेवल डेलिगेशन के साथ वर्चुअल विचार-विमर्श किया, जिसमें जापानी दूतावास, जेट्रो, जे.सी.सी.आई.आई. और भारत भर में कार्यरत 25 से ज्यादा प्रमुख जापानी कंपनियां जैसे पैनासोनिक, सुमितोमो, निप्पॉन, एनईसी, टोयोटा आदि शामिल थी. यह विचार-विमर्श 13 से 15 मार्च 2026 को इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आई.एस.बी.), मोहाली में आयोजित होने वाले 6वें प्रोग्रेसिव पंजाब इन्वेस्टर समिट से पहले पंजाब की अंतरराष्ट्रीय पहुंच का महत्वपूर्ण हिस्सा था. 'इन्वेस्ट पंजाब' ने राज्य के इकोनॉमिक सेक्टर के साथ-साथ एक ही प्राधिकरण के तहत कई विभागों की क्षमताओं को एकीकृत करने वाले अनूठे इन्वेस्ट पंजाब यूनिफाइड रेगुलेटरी मॉडल को प्रदर्शित किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब वह भूमि है, जो साहस, लचीलापन, कड़ी मेहनत, उद्यमशीलता, रचनात्मकता और सामुदायिक साझेदारी के लिए जानी जाती है. उन्होंने कहा कि पंजाब ने हमेशा भारत के विकास में, विशेष रूप से देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाई है. भगवंत सिंह मान ने कहा कि आज पंजाब आधुनिक उद्योग, प्रौद्योगिकी और वैश्विक सहयोग के मोर्चे पर अग्रणी केंद्र बनने के लिए नए दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है.   'जापानी कंपनियों ने पंजाब में…' मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने मुख्य संबोधन में जापानी उद्योग के साथ पंजाब के मजबूत और बढ़ते संबंधों पर जोर दिया और जापानी कंपनियों को पंजाब के औद्योगिक परिवर्तन के अगले चरण का हिस्सा बनने के लिए निमंत्रण दिया. उन्होंने कहा कि पंजाब और जापान विश्वास, अनुशासन और दीर्घकालिक साझेदारी की मूल्यों को साझा करते हैं, जो राज्य के लिए बहुत अहम हैं. जापानी कंपनियों ने पंजाब में पहले से ही मजबूत पकड़ बना ली है. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का मकसद हमारे युवाओं के लिए नए मौके पैदा करने के साथ-साथ निवेशकों के लिए स्थिर और विश्वसनीय वातावरण सुनिश्चित करना है. जापानी इंडस्ट्री के साथ पंजाब की साझेदारी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये संबंध पहले से ही मजबूत हैं और नई दिशाओं की ओर बढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि जापान की कई मशहूर कंपनियों ने पंजाब में अपना भरोसा दिखाया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पैकेजिंग और औद्योगिक उत्पादों में टोपन और ओजी होल्डिंग्स ने मजबूत पकड़ बनाई है, जबकि रसायन और पेंट में कंसाई नेरोलैक और निसान केमिकल ने सफलतापूर्वक कदम बढ़ाए हैं. उन्होंने आगे कहा कि कृषि और मशीनरी में यानमार एग्रीकल्चर मशीनरी और क्लास इंडिया ने पंजाब में अपना भरोसा दिखाया है. रिटेल और उपभोक्ता उत्पादों में यूनिक्लो ने जापानी गुणवत्ता हमारे लोगों तक पहुंचाई है.    भगवंत मान ने कहा, "नवीकरणीय ऊर्जा में मित्सुई एंड कंपनी हमारे हरित नजरिए में योगदान दे रही है और यह साझेदारी स्थिरता, कौशल और विकास के प्रति पंजाब की प्रतिबद्धता में जापानी निवेशकों द्वारा दिखाए गए भरोसे को दर्शाती है." राज्य में उभरती नई संभावनाओं की खोज के लिए जापानी कंपनियों को आमंत्रित करते हुए सीएम मान ने कहा, "पंजाब का भविष्य उन्नत विनिर्माण, गतिशीलता, इलेक्ट्रॉनिक्स, फूड प्रोसेसिंग, नवीकरणीय ऊर्जा और वैश्विक सेवाओं पर केंद्रित है. ये वे प्रमुख सेक्टर हैं, जहां जापान की क्षमताएं और पंजाब की संभावनाएं स्वाभाविक रूप से मेल खाती हैं."  उन्होंने निवेशकों को 6वें प्रोग्रेसिव पंजाब इन्वेस्टर समिट में शामिल होने का न्योता दिया और कहा कि यह सम्मेलन पंजाब की प्रगति पर प्रकाश डालेगा, प्रमुख औद्योगिक दिग्गजों को एक मंच पर लाएगा और साझेदारी व सहयोग के नए अवसर पैदा करेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब और जापान विश्वास, गुणवत्ता और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता के मूल्यों को साझा करते हैं और राज्य सरकार इस रिश्ते को और गहरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मजबूत आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों के जरिए समृद्ध भविष्य सृजन के लिए हमेशा तैयार है.

बचपन से 32 साल तक दिमाग कैसे बदलता है? जीवनभर में आते हैं 4 अहम मानसिक परिवर्तन

हमारा दिमाग जीवन भर एक जैसा नहीं रहता। यह लगातार विकसित और बदलता रहता है। जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है हमारे दिमाग में भी उसी के हिसाब से बदलाव आते हैं। इसी से जुड़ी एक रिसर्च में पता चला है कि व्यक्ति का दिमाग चार मुख्य स्टेजेस से गुजरता है। आपको बता दें कि ये चार स्टेज हैं, 9, 32, 66 और 83 वर्ष की उम्र। इस दौरान व्यक्ति के दिमाग में अहम बदलाव आते हैं, जो उसकी सोचने, समझने और दुनिया के देखने के तरीके को नया आकार देते हैं। आइए इन चारों स्टेजेस के बारे में समझते हैं। कैसे किया गया यह रिसर्च? यह रिसर्च कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया। उन्होंने शून्य से लेकर नब्बे साल तक की उम्र के 3,802 लोगों के दिमाग का विस्तार से स्टडी किया। इसके लिए एमआरआई स्कैन जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। दिमाग के जीवनभर के चार स्टेज-     बचपन से किशोरावस्था का स्टेज (9 साल की उम्र)- यह वह उम्र है जब बच्चे का दिमाग बचपने की सीमा से निकलकर किशोरावस्था में प्रवेश करता है। इस दौरान दिमाग के अलग-अलग हिस्सों के बीच तेजी से संचार बढ़ता है और सीखने की गति बहुत तेज होती है।     मेच्योरिटी और स्थिरता का दौर (32 साल की उम्र)- यह उम्र एक बहुत बड़ा मोड़ मानी जाती है। इसके बाद दिमाग "एडल्ट मोड" में प्रवेश कर जाता है। यह सबसे लंबा स्टेज होता है, जो लगभग तीन दशकों तक चलता है। इस दौरान दिमाग की संरचना काफी स्थिर और मेच्योर हो जाती है। व्यक्ति की सोच, फैसले लेने की क्षमता और भावनात्मक समझ इस उम्र में पूरी तरह से विकसित हो जाती है। इसलिए कहा जाता है कि 32 साल की उम्र तक आते-आते व्यक्ति का दिमाग पूरी तरह मेच्योर हो जाता है।     वृद्धावस्था की शुरुआत (66 साल की उम्र)- इस उम्र के आसपास दिमाग ‘अर्ली एजिंग’ यानी शुरुआती वृद्धावस्था के स्टेज में प्रवेश करता है। रिटायरमेंट का समय आने के साथ-साथ दिमाग के काम करने की गति थोड़ी धीमी होने लगती है, लेकिन एक्सपीरिएंस और नॉलेज अपने चरम पर होता है।     लेट एजिंग (83 साल की उम्र)- यह "लेट एजिंग" के स्टेज की शुरुआत है। इस उम्र में दिमाग की संरचना में गिरावट के लक्षण नजर आ सकते हैं और डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। क्यों हैं ये चार स्टेज महत्वपूर्ण? इस अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता एलेक्सा मौसले के अनुसार, इन चरणों को समझने से हमें यह जानने में मदद मिलती है कि कुछ लोगों का दिमाग जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर अलग तरह से क्यों विकसित होता है। चाहे वह बचपन में सीखने की समस्या हो या बुढ़ापे में याददाश्त कमजोर होना। इससे भविष्य में दिमाग से जुड़ी बीमारियों के इलाज और बचाव में मदद मिल सकती है।  

गंभीर पर निशाना: पूर्व क्रिकेटर बोले— टेस्ट टीम को चाहिए नया हेड कोच

नई दिल्‍ली भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने हेड कोच गौतम गंभीर पर निशाना साधते हुए कहा कि टेस्‍ट टीम को नए कोच की जरुरत है। गंभीर की कोचिंग में भारत को हाल ही में साउथ अफ्रीका के हाथों घरेलू टेस्‍ट सीरीज में क्‍लीन स्‍वीप झेलना पड़ा। गौतम गंभीर ने सीरीज हार के बाद प्रेस कांफ्रेंस में जिस तरह जवाब दिए, उससे मनोज तिवारी नाखुश दिखे। गंभीर ने टेस्‍ट टीम की मौजूदा स्थिति पर अलग-अलग जवाब दिए। तिवारी को आपत्ति है क‍ि टीम में स्थिरता की कमी दिखी और टीम में लगातार बदलाव हुए।   मनोज तिवारी ने क्‍या कहा बंगाल के पूर्व क्रिकेटर ने कहा, 'ईमानदारी से कहूं तो यह दीवार पर लिख सकता था। ऐसा होना ही था। मुझे पता था कि चीजें सही नहीं जा रही हैं। जिस प्रक्रिया का वो पालन करने जा रहे थे, वो सही रणनीति या योजना नहीं थी। टीम में काफी बदलाव हुए और कई बाहर हुए, जो कि सबूत हैं। यही वजह है कि बॉर्डर-गावस्‍कर ट्रॉफी, न्‍यूजीलैंड और साउथ अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज में ऐसा प्रदर्शन दिखा।' टेस्‍ट में नए हेड कोच की जरुरत तिवारी का मानना है कि भारतीय टीम को टेस्‍ट प्रारूप के लिए अलग कोच की जरुरत है। उन्‍होंने कहा, 'निश्चित ही भारत को लाल गेंद क्रिकेट के लिए नए कोच की जरुरत है। यह जरूरी है कि फैसला लिया जाए ताकि भारतीय क्रिकेट को बचाया जा सके। बहुत खराब स्‍तर पर पहुंच गए हैं।' गंभीर की कड़ी आलोचना गंभीर ने अपना बचाव करने के लिए एशिया कप, चैंपियंस ट्रॉफी खिताब और इंग्‍लैंड दौरे का श्रेय लिया, जो मनोज तिवारी को बिलकुल रास नहीं आया। तिवारी ने कहा कि इंग्‍लैंड दौरे के नतीजे अपेक्षित नहीं थे। पूर्व क्रिकेटर ने कहा, 'गंभीर दावा कर रहे हैं कि युवा टीम के साथ इंग्‍लैंड में सीरीज ड्रॉ कराई। मेरे विचार में इंग्‍लैंड सीरीज ड्रॉ हमारे लिए बेहतर नतीजा नहीं था। वो अच्‍छा नतीजा नहीं था। हमारे पास जैसे खिलाड़ी थे, वो इंग्‍लैंड ने आखिरी दिन कई खराब शॉट खेले। वो आसानी से 3-1 से सीरीज जीत जाते। गंभीर के कार्यकाल में कोई बड़ी उपलब्धि नहीं मिली है।'  

स्कूल में हैरान करने वाली घटना: शिक्षक ने छात्रों का गला दबाया, की मारपीट

बालाघाट सांदीपनि विद्यालय बालाघाट के एक शिक्षक पर कक्षा छठवीं के सात छात्रों के साथ मारपीट करने का मामला सामने आया है। पालकों का आरोप है कि शिक्षक रामप्रसाद राहंगडाले ने कक्षा में शोर मचाने की बात पर बच्चों की न सिर्फ पिटाई की बल्कि बेंच पर लिटाकर उन्हें मारा और गला तक दबा दिया। मामले की जानकारी लगते ही बालाघाट विधायक अनुभा मुंजारे गुरुवार को सांदीपनि विद्यालय पहुंचीं और शिक्षक रामप्रसाद को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने इस घटना को अमानवीय बताया और प्रभारी मंत्री उदय प्रताप सिंह से शिकायत करने की बात कही। स्कूली बच्चों के साथ मारपीट की घटना बुधवार की बताई जा रही है। महज शोर मचाने की बात पर गुस्से में आए शिक्षक द्वारा मारपीट करने के बाद से सभी पीड़ित बच्चे दहशत में हैं। पालकों ने बताया कि गुरुवार सुबह जब स्कूल जाने के लिए उनके बच्चे ने मना किया, तब पूछने पर उसने शिक्षक द्वारा मारपीट करने की घटना की जानकारी दी गई। वह बुरी तरह डरा हुआ है। उसे बुखार भी है। पालकों ने आरोप लगाया कि शिक्षक ने बच्चों के साथ मारपीट की और उनका गला भी दबाया। गुरुवार को सांदीपनि विद्यालय पहुंची विधायक के साथ बच्चों के पालक भी स्कूल पहुंचे। विधायक ने शिक्षक रामप्रसाद की क्लास ली और बच्चों से बारी-बारी से घटना के बारे में जानकारी ली। शिक्षक ने कक्षा छठवीं के पुनीत लिल्हारे, ओजवी मिश्रा, विहान नैनवानी, शौर्य दमाहे, हिमांश सोनवाने, अनवर पाटिल और जारेश बेग के साथ मारपीट की है।  

2026 Holiday List: जानें किस-किस तारीख को रहेंगे स्कूल, काॅलेज और ऑफिस बंद

रांची वर्ष 2026 के लिए सरकारी छुट्टियों का कैलेंडर जारी हो गया है। इस बार कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि साल भर में 11 ऐसे मौके आने वाले हैं जब उन्हें तीन दिन का लगातार अवकाश मिलने वाला है। यानी 2026 सरकारी कर्मचारियों के लिए ‘लंबे वीकेंड्स का साल’ कहा जा सकता है। हालांकि सूची में शामिल कई छुट्टियां शनिवार और रविवार को पड़ रही हैं, फिर भी कुल 26 राजपत्रित अवकाश कर्मचारियों को पूरे साल राहत देने वाले हैं। 2026 में मिलने वाली छुट्टियां 26 जनवरी (सोमवार) – गणतंत्र दिवस, 1 फ़रवरी (रविवार) – गुरु रविदास जयंती, 14 फ़रवरी (रविवार) – महाशिवरात्रि, 4 मार्च (बुधवार) – होली, 21 मार्च (शनिवार) – ईद-उल-फितर, 23 मार्च (सोमवार) – भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव शहीदी दिवस, 26 मार्च (वीरवार) – राम नवमी, 31 मार्च (वीरवार) – महावीर जयंती, 3 अप्रैल (शुक्रवार) – गुड फ्राइडे, 8 अप्रैल (बुधवार) – गुरु नाभा दास जी, 14 अप्रैल (वीरवार) – वैसाखी, 14 अप्रैल (वीरवार) – डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती, 19 अप्रैल (रविवार) – भगवान परशुराम जयंती, 1 मई (शुक्रवार) – मई दिवस, 27 मई (बुधवार) – ईद-उल-जुहा, 18 जून (वीरवार) – गुरु अर्जन देव जी शहीदी दिवस, 29 जून (सोमवार) – कबीर जयंती, 31 जुलाई (शुक्रवार) – शहीद उधम सिंह बलिदान दिवस, 15 अगस्त (शनिवार) – स्वतंत्रता दिवस, 4 सितंबर (शुक्रवार) – जन्माष्टमी, 2 अक्टूबर (शुक्रवार) – गांधी जयंती, 11 अक्टूबर (रविवार) – महाराजा अग्रसेन जयंती, 20 अक्टूबर (वीरवार) – दशहरा, 26 अक्टूबर (सोमवार) – भगवान वाल्मीकि जयंती, 8 नवंबर (रविवार) – दीपावली, 9 नवंबर (सोमवार) – विश्वकर्मा दिवस, 25 दिसम्बर (क्रिसमस ) कर्मचारियों को सबसे बड़ा फायदा कहां? जारी सूची के अनुसार कई छुट्टियां शुक्रवार या सोमवार को पड़ रही हैं, जिससे सरकारी कर्मचारियों को लगातार तीन दिन का अवकाश मिलेगा। इससे कर्मचारियों को यात्रा, परिवार के साथ समय और मानसिक आराम—तीनों का बेहतरीन अवसर मिलने वाला है।  

दुनियाभर में 100+ उम्र के बुजुर्ग: जापान नंबर-1, भारत की क्या स्थिति? जानें टॉप 5 देश

नई दिल्ली वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू के नए डेटा से पता चला है कि दुनिया भर में 100 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या बढ़ रही है। सौ साल से ज़्यादा जीने वालों की ग्लोबल लिस्ट में जापान अभी भी टॉप पर है, जहां 123,330 लोग ऐसे हैं, जिनकी उम्र एक शतक को पूरा कर चुकी है। इस लिस्ट में जापान के बाद अमेरिका का नंबर आता है, जहां ऐसे बुजुर्गों की संख्या 73,629 है। तीसरे नंबर चीन और चौथे पर भारत का स्थान है। आंकड़े बताते हैं कि चीन में 100 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या 48,566 है, जबकि भारत में ये संख्या 37,988 है। टॉप पांच देशों की लिस्ट में पांचवे पायदान पर फ्रांस है, जहां 33,220 बुजुर्ग सौ साल से ऊपर के हैं। ये आंकड़े बदलते लाइफस्टाइल, बेहतर हेल्थकेयर और अत्याधुनिक और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाओं की मौजूदगी दिखाते हैं जो लोगों को पिछली पीढ़ियों की तुलना में लंबी उम्र तक जीने में मदद कर रही हैं। टॉप 5 देशों के अलावा कहां-कहां ऐसे बुजुर्ग? एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 100 साल से ज्यादा बुजुर्गों वाले देशों के सूची में इन पांच देशों के अलावा और भी कई देश हैं, जहां 100 साल से ऊपर लोगों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे देशों में इटली, रूस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, स्पेन, थाईलैंड, कनाडा और दक्षिण कोरिया शामिल है। इन देशों में औसतन ऐसे बुजुर्गों की तादाद 11,000 से 23,000 के बीच है। पिछले 15 सालों में दोगुने हुए 100 से ऊपर के बुजुर्ग वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनिया में अब पहले से कहीं ज़्यादा सौ साल से ज़्यादा जीने वाले लोग हैं। पिछले 15 सालों में दुनिया भर में इनकी संख्या करीब दोगुनी हो गई है। 2009 में ऐसे लोगों की संख्या 455,000 थी जो 2024 में बढ़कर लगभग 935,000 हो गई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह ट्रेंड पब्लिक हेल्थ, वैक्सीन, बीमारी कंट्रोल और फिटनेस और न्यूट्रिशन के बारे में आम जागरूकता में सुधार दिखाता है। और जहाँ बढ़ती आबादी हेल्थकेयर और पेंशन सिस्टम पर दबाव जैसी चुनौतियाँ लाती है, वहीं वे बेहतर सर्वाइवल रेट और ज़्यादा सेहतमंद बुज़ुर्गों का भी संकेत देती हैं। अनुशासित जीवनशैली और स्वास्थ्य सुविधाएं अहम कई देश जहां हर व्यक्ति की उम्र ज़्यादा होती है, वे अनुशासित जीवनशैली और बुज़ुर्गों के लिए मज़बूत और सुलभ सहायता तंत्र के लिए भी जाने जाते हैं। उदाहरण के लिए, जापानी समाज प्रिवेंटिव हेल्थकेयर और शुरुआती स्क्रीनिंग पर ध्यान देता है। रिसर्चर उन कल्चरल तरीकों की ओर भी इशारा करते हैं जो पैदल चलने, सोशल गैदरिंग और हेल्दी खाने को बढ़ावा देते हैं। ये वजहें, मेडिकल केयर के साथ मिलकर, ज़िंदगी की उम्मीद बढ़ाने और सौ साल जीने वालों की संख्या बढ़ाने में मदद करती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सौ साल जीने वालों की संख्या में बढ़ोतरी यह दिखाती है कि दुनिया कितनी तेज़ी से बदल रही है। अब ज़्यादा लोग लंबी और हेल्दी ज़िंदगी जी रहे हैं, और देश बढ़ती उम्र वाली आबादी के हिसाब से ढलना सीख रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दशक में 100 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों की संख्या और भी बढ़ने की संभावना है।  

शहर में अनियंत्रित अवैध PG संचालित, प्रशासन के आदेश भी बेअसर

अमृतसर  शहर में अवैध रूप से पी.जी. चलाने के मामले थम नहीं रहे हैं। गुरु नगरी के पॉश एरिया ग्रीन एवेन्यू, जनता कालोनी, रणजीत एवेन्यू-ए, बी, सी, डी, रानी का बाग, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के सामने कबीर पार्क के इलाके के अलावा व इसके आस-पास सटे क्षत्रों में अवैध ढंग से काफी धड़ल्ले से पी.जी का धंधा चलाया जा रहा है। इन पी.जी में रहते लोग किन-किन क्षेत्रों संबंधित है और उनकी पहचान क्या है? ये एक बहुत बड़ी जांच का विषय है। पुलिस के पास उपलब्ध नहीं है पूरी जानकारी सूत्र बताते है कि इस संबंधी पूरी जानकारी क्षेत्रों से संबंधित पुलिस के पास भी उपलब्ध नहीं है। बता दें कि अभी कुछ दिन पहले ही पुलिस उच्च अधिकारी ने एक विज्ञप्ति जारी कर पी.जी व रहने वाले लोगों व किराए के मकानों में रह रहे लोगों को पूरी जानकारी देने की अपील की थी, वहीं सबंधित पुलिस चौकी या थाने के अधिकारी का भी फर्ज बनता है कि उसके अधीन आते इलाकों में किराएदार व पीजी में रहने वालों का पूरा विवरण अपने रिकार्ड में रखे। हाला कि पाया गया है कि अधिकांश पुलिस अधिकारी इन आदेशों को गंभीरता से नहीं लेते और उनके पास इलाकों में चल रहे वैध या अवैध पी.जी की पूरी जानकारी ही नहीं है। निरंतर बढ़ रही है अवैध पी.जी की संख्या पंजाब केसरी ने इस सबंध में पहले भी इस सारे मामले प्रति अवगत करवाया था, परंतु सबंधित प्रशासान के सिर से जूं तक नहीं सरकी और नतीजा वहीं एक ढाक के तीन पात वाला ही है। लिहाजा अब समय रहते इन क्षेत्रों में इन अवैध पी.जी की संख्या देखते ही देखते समय रहते काफी बढ़ गई है। अगर शहर में केवल कुछ ही इलाकों जैसे कि सिर्फ जनता कालोनी, ग्रीन एवेन्यू सी-बलाक, रणजीत एवेन्यू के सभी ब्लाकों के अलावा गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के सामने कबीर पार्क, खासला कालेज के सामने मोहिनी पार्क, खंडवाला, न्यू माडल टाऊन आदि के इलाकों की ही बात की जाए, तो उक्त इलाकों में ही ऐसे कई अवैध पी.जी खुल चुके है, जिसमें कई अज्ञात युवक-युवतियों के अलावा अधेड़ आयु तक के लोग रह रहे है।  सबसे खास व हैरानीजनक पहलू यह है कि इन पी.जी में रह रहे लोगों की पहचान क्या है? और वो किन गावों व कस्बों से आए है, इस प्रति पी.जी के अधिकांश मालिकों व संबंधित पुलिस प्रशासन को भी पूरी तरह से पता नहीं है। विशेष बात यह है कि ये युवक-युवतियां व लोग यहां पर क्या करते है, इस बारे में भी शायद पी.जी के मालिकों को पता नहीं? इन मालिकों को तो बस प्रतिमाह इनसे पैसे (किराया) चाहिए और उक्त क्षेत्र से संबंधित पुलिस भी इस प्रति पूरी तनदेही से कार्रवाई नहीं करती दिखती।   पी.जी व किराए पर रहते लोगों की वैरीफेशन होती है अनिवार्य कानूनन पी.जी में रहते किसी भी व्यक्ति की पुलिस वैरीफीकेशन अनिवार्य होती है। इसकी खास तौर से जिम्मेदारी पी.जी मालिक की भी बनती है, लेकिन ग्रीन एवेन्यू व जनता कालोनी में पुलिस अधिकारी व पी.जी मालिक इस कानून को खुद ही ठेगा दिखाते हुए इसकी धज्जियां उड़ा रहे है। इससे साफ है कि उक्त कानून को सख्ती से लागू करवाने को लेकर सरकारी मशीनरी खासी सुस्त पड़ी है। हैरानीजनक पहलू यह है किर इन्ही क्षत्रों में विगत कुछ समय से चोरी व लूट-पाट की वारदातों में खासी वृद्धि आंकी गई है। इसके बावजूद भी पुलिस इस प्रति चेती नहीं है। इसके बावजूद पुलिस भी इन पी.जी मालिकों पर कोई भी शिकंजा नहीं कसती, या फिर बात कुछ और है? ये ऐसा तब है जब राज्य में विगत दिनों पी.जी मे रह रहे अज्ञात लोगों द्वारा अपराध जगत में कई संगीन वारदातों को अंजाम दिया जाता रहा है, परंतु इसके बावजूद उक्त अंकित क्षेत्रों के पुलिस प्रशासन द्वारा इस प्रति उदासीनता रवैया अपनाना कई प्रकार के सवालों को जन्म दे रहा है। विशेष बात यह है कि जब इस प्रति सबंधित पुलिस या प्रशासन से पूछा जाता है, तो उनका एकमात्र एक ही रटा-रटाया यहीं दावा होता है कि वे ऐसे लोगों की जानकारियां एकत्र करवा रहे है और ये कार्रवाई जल्द ही पूरी कर ली जाएगी, परंतु इसकी पूरी जानकारी कब तक पुलिस रिकार्ड में सल्पित होगी? ये शायद बताने की जरूरत नहीं है। रणजीत एवेन्यू में ही चल रहे है कई अवैध पी.जी सूत्र बताते हैं कि ग्रीन एवेन्यू सी ब्लाक व इसके पास स्थित जनता कालोनी तथा रणजीत एवेन्यू के अलावा मोहिनी पार्क में ही कई ऐसे अवैध पी.जी चल रहे है, जिनका पूरा डेटा संबंधित पुलिस चौकी के पास भी उपलब्ध नहीं है। पता चला है कि पुलिस प्रशासन इस प्रति सख्ती से कार्रवाई नहीं कर रहा है, इससे साफ है कि अधिकारी खुद ही कानून को ठेगा दिखा रहे है। वहीं दूसरा पहलू यह है कि जब कोई बड़ी दुर्घटना घटती है तो ही पुलिस प्रशासन इस प्रति चेतता है। प्रश्न यहां यह है कि इस खुलासे के बावजूद पुलिस इस खुलासे पर कार्रवाई कब शुरू करेगी।  

केंद्र सरकार का मेगा बैंक मर्जर प्लान, जानें कौन-कौन से 6 बैंक हो सकते हैं विलय में शामिल

नई दिल्ली   केंद्र सरकार पॉलिसी रिफॉर्म को लेकर फिर से सक्रिय हो गई है। इसी कड़ी में सरकार, पीएसयू बैंकों के मर्जर (PSU Banks Merger) की दिशा में आगे बढ़ रही है। दरअसल, प्रधानमंत्री कार्यालय आम बजट से पहले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) में पॉलिसी रिफॉर्म को लेकर बड़े प्रस्तावों की समीक्षा करने वाला है। वित्तीय सेवा विभाग द्वारा तैयार किए गए इन सुधारों में नए सिरे से बैंकों का मर्जर, बोर्ड की स्वायत्तता में बढ़ोतरी और FDI लिमिट में सिस्टेमेटिक तरीके से वृद्धि के प्रस्ताव शामिल हैं। इसके अलावा, चुनिंदा सरकारी बैंकों के निजीकरण की घोषणा को लेकर भी बड़े ऐलान हो सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र सरकार, पीएसयू बैंक में 20 फीसदी की वर्तमान FDI लिमिट को बढ़ाकर 49% करने की योजना पर विचार कर रही है। इसके साथ ही सरकार 6 साल के लंबे अंतराल के बाद पीएसयू बैंकों में सुधार के अपने प्रयासों को फिर से शुरू कर सकती है, जिसका मकसद दुनिया के टॉप 20 बैंकों में 2 भारतीय बैंकों को शामिल करना है। इस मामले को लेकर इंटर-मिनिस्ट्रियल कंस्लटेशन पूरा होने वाला है, और प्राइम मिनिस्टर ऑफिस की आगामी समीक्षा के बाद, बजट से पहले इस पर फैसला लिए जाने की उम्मीद है। समझदारी भरा फैसला एसबीआई के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी (Challa Sreenivasulu Setty) ने ब्लूमबर्ग न्यूज को मुंबई में दिए एक इंटरव्यू में कहा, "कुछ और बैंकों का एकीकरण समझदारी भरा हो सकता है। अभी भी कुछ छोटे बैंक हैं जो बड़े पैमाने पर काम नहीं कर पा रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा, "अगर विलय का एक और दौर होता है, तो यह कोई बुरी बात नहीं होगी।" एसबीआई की क्या है स्थिति पिछले दशक में हुए विलय की एक लहर के बाद अब 12 सरकारी बैंक बचे हैं। ये एचडीएफसी बैंक लिमिटेड और एचएसबीसी होल्डिंग्स पीएलसी जैसे निजी और विदेशी बैंकों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। 787 अरब डॉलर के बैलेंस शीट के साथ, एसबीआई उद्योग में सबसे आगे है। इसके पास 22,500 से अधिक शाखाएं और 500 मिलियन से अधिक ग्राहक हैं। इस समय केंद्र सरकार बड़े सरकारी बैंकों को बनाने के विकल्पों पर विचार कर रही है। यह सरकार की एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे और औद्योगिक परियोजनाओं को वित्तपोषित करने की आवश्यकता के अनुरूप है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को एक विकसित अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, बैंक वित्तपोषण को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के वर्तमान 56% से बढ़ाकर लगभग 130% करना होगा। इससे जीडीपी में अपेक्षित दस गुना वृद्धि होकर लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने में मदद मिलेगी। टॉप 100 बैंक में भारत के 2 बैंक इस समय कुल संपत्ति के हिसाब से केवल एसबीआई और एचडीएफसी बैंक ही शीर्ष 100 वैश्विक बैंकिंग सूची में शामिल हैं। ब्लूमबर्ग द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, चीन और अमेरिका के बैंक शीर्ष 10 में अपने प्रतिद्वंद्वियों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं। हालांकि चीन और भारत दोनों को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में कुछ सबसे कठोर अमेरिकी टैरिफ का सामना करना पड़ा है, लेकिन भारत सरकार विदेशी निवेश को आकर्षित करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव का लाभ उठाने के लिए करों में कटौती सहित सुधार कर रही है। बैंकों के मर्जर से क्या फायदे इससे पहले सरकार 2017 और 2019-20 में कुछ सरकारी बैंकों का मर्जर कर चुकी है, जिसके बाद PSU बैंकों की संख्या 27 से घटकर 12 रह गई है। मार्केट एनालिस्ट का मानना है कि बैंकों का मर्जर होने से बैंकों की बैलेंस सीट मजबूत होगी और बैंक भारत की बढ़ती लोन डिमांड को पूरा करने में ज्यादा सक्षम होंगे। बैंकों के मर्जर और विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाए जाने से जुड़ी खबरें पिछले कुछ महीनों से लगातार सामने आ रही है, जिसके चलते सरकारी बैंक शेयरों में काफी हलचल देखने को मिल रही है। 3 महीने के अंदर एसबीआई, पीएनबी और बैंक ऑफ बड़ौदा समेत अन्य सरकारी बैंक शेयर 20 फीसदी से ज्यादा चढ़ गए हैं। निर्यातकों को समर्थन जारी एसबीआई के चेयरमैन सेट्टी, जिन्होंने 2024 के अंत में यह पद संभाला, ने कहा कि हालांकि अमेरिकी टैरिफ के कारण निर्यात प्रभावित हुआ है, लेकिन एसबीआई को अभी तक किसी भी क्षेत्र में बड़ी समस्याएं नहीं दिखी हैं। उन्होंने कहा, "हम अपना एक्सपोजर कम नहीं कर रहे हैं, हम निर्यातकों का समर्थन करना जारी रख रहे हैं। यदि किसी अस्थायी समायोजन या सुविधा विस्तार की आवश्यकता होती है, तो हम उन्हें संबोधित कर रहे हैं।" एसबीआई में सरकार की कितनी हिस्सेदारी एसबीआई, जिसमें सरकार की 55% हिस्सेदारी है, कॉर्पोरेट द्वारा पूंजीगत व्यय में उद्योग-व्यापी पुनरुद्धार के संकेत देख रहा है, लेकिन ऋणों की कीमत कड़ी होती जा रही है। सेट्टी ने कहा, "कई बैंक कॉर्पोरेट पोर्टफोलियो बनाना चाहते हैं, लेकिन बड़े कॉर्पोरेट्स की संख्या सीमित है – इसलिए यह खंड अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बना रहेगा।" पिछले महीने, बैंक ने अपने चालू वर्ष के लिए क्रेडिट ग्रोथ के अपने पूर्वानुमान को 11% से 12% से बढ़ाकर 12% से 14% कर दिया था। अभी कितने सरकारी बैंक आप जान ही चुके हैं कि इस समय देश में सरकारी बैंकों की संख्या 12 है। इनमें भारतीय स्टेट बैंक (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक (PNB), केनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, यूको बैंक, इंडियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब एंड सिंध बैंक शामिल हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार का लंबी अवधि का लक्ष्य है कि सरकारी बैंकों की संख्या 12 से घटाकर 6-7 मजबूत और प्रतिस्पर्धी संस्थानों तक लाई जाए. इससे बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत होगी, लोन देने की क्षमता बढ़ेगी, कामकाज बेहतर होगा और खासतौर पर भारत के तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को सपोर्ट करने के लिए बड़ी क्षमता वाले बैंक तैयार होंगे.