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SC में सुधारों का पहला चरण 1 दिसंबर से शुरू, केस मेंशनिंग प्रक्रिया में भी बदलाव की तैयारी

नई दिल्ली  देश के नए मुख्य न्यायाधीश (New CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि एक दिसंबर से कुछ नया होने वाला है। उन्होंने केस मेंशन करने आए एक वकील की दलील सुनने के बाद कहा कि एक दिसंबर तक रुकिए। उन्होंने कहा, "1 दिसंबर तक इंतजार करें, हम कुछ प्लान कर रहे हैं, हम आपके मुद्दे जानते हैं, आपको ज़िक्र करने की ज़रूरत नहीं है।" इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सुधारों का पहला सेट 1 दिसंबर से लागू होगा। जस्टिस कांत की यह टिप्पणी केस मेंशनिंग सिसटम में बड़े बदलाव का संकेत है। उन्होंने इसी संकेत को डिकोड करते हुए कहा, "मैं 1 दिसंबर से कुछ कर रहा हूँ। सुधार के पहले फेज़ में हम मेंशनिंग के लिए कुछ करेंगे। हम बार की चिंता समझते हैं और हम उस पर ध्यान देंगे। हम यह पक्का करेंगे कि आप यहाँ तक न आएँ और मेंशनिंग के लिए अपना कीमती समय बर्बाद न करें। पद संभालते ही जताई थी नाराजगी बता दें कि CJI का पदभार ग्रहण करने के दिन ही उन्होंने केस मेंशनिंग के तौर-तरीकों पर घोर ऐतराज जताया था और सख्त टिप्पणी की थी कि ये तरीका बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने वकील के केस मेंशन करने के तरीके पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि कुछ लोग मामलों को उसी दिन मेंशन करते हैं और उसे लिस्ट करने का अनुरोध करते हैं, जिसकी इजाजत नहीं दी जा सकती है। उन्होंने तब कहा था, “किसी केस को मेंशन करने और उसी दिन उसे लिस्ट करने का यह तरीका हमेशा के लिए स्वीकार नहीं किया जा सकता। मैंने पहले ही कहा है कि मौत की सजा या अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़े जरूरी मामलों को छोड़कर.. आपको मेंशनिंग के लिए सर्कुलेट करना होगा और प्रोसेस को फॉलो करना होगा।” बहुत खास हालात में ही अर्जेंट मेंशनिंग माना जा रहा है कि जस्टिस कांत की आज की टिप्पणी कि एक दिसंबर तक इंतजार करें, इसी समस्या को हल करने की दिशा में उठाया गया कदम है। जस्टिस कांत पहले ही साफ कर चुके हैं कि 'बहुत खास' हालात को छोड़कर, अर्जेंट लिस्टिंग के लिए रिक्वेस्ट मेंशनिंग स्लिप के ज़रिए लिखकर की जानी चाहिए, न कि बोलकर। उन्होंने कहा है कि रजिस्ट्री पहले स्लिप और अर्जेंट होने के कारणों का पता लगाएगी, और उसके बाद ही मामला लिस्ट किया जाएगा। संभवत: इसे वह अमली जामा पहना सकते हैं। बता दें कि जस्टिस सूर्यकांत ने 24 नवंबर को देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली है।

30 लोगों ने दिन-रात मेहनत कर 6 दिन में बनाया ब्रिज, पहले 5 घंटे अब 30 मिनट में पहुंचा जा सकेगा

पिथौरागढ़ उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में आदि कैलाश क्षेत्र में बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) की 65 आरसीसी ग्रेफ ने 14,500 फीट की ऊंचाई पर 100 फीट का वैली ब्रिज सिर्फ 6 दिनों में तैयार कर दिया। यह ब्रिज पार्वती कुंड से निकलने वाले विंचिती नाले पर बनाया गया है। 40 टन क्षमता वाले इस बैली ब्रिज को 30 मजदूरों ने लगातार काम करके पूरा किया। ऊंचाई, मौसम और सीमित संसाधनों के बावजूद इतनी कम समय-सीमा में निर्माण पूरा होना बीआरओ के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। ब्रिज बनने से अब आदि कैलाश क्षेत्र में स्थानीय लोगों, सीमा पर तैनात जवानों और पर्यटन से जुड़े वाहनों की आवाजाही पहले से अधिक सुरक्षित और सुगम हो गई है। कर्नल ने बताया क्यों जरूरी था यह ब्रिज 765 बीआरटीएफ के कमांडर कर्नल प्रशांत सिंह ने कहा कि विंचिती नाले में बारिश के मौसम में पानी बढ़ने और मिट्टी धंसने से आवाजाही रुक जाती थी। जवानों की मूवमेंट, लॉजिस्टिक सप्लाई और स्थानीय लोगों की यात्रा में बार-बार दिक्कतें आती थीं। उन्होंने बताया कि 1.2 करोड़ की लागत से बना यह ब्रिज अब पूरे रूट को स्थायी और सुरक्षित कनेक्टिविटी देता है, जिससे वाहनों का संचालन निर्बाध हो गया है। ज्योलिंगकांग तक सड़क पूरी तरह पक्की, 36 किमी सफर अब 1 घंटे से कम वहीं, ज्योलिंगकांग आदि कैलाश तक भी अब पक्की सड़क बन चुकी है। गुंजी से कुटी होते हुए ज्योलिंगकांग तक 36 किलोमीटर की दूरी तय करने में पहले ढाई घंटे का समय लगता था। डामरीकरण होने के बाद अब यह सफर एक घंटे से भी कम समय में तय हो रहा है। आदि कैलाश आने वाले पर्यटकों, सीमा सुरक्षा में तैनात जवानों के साथ ही स्थानीय लोगों का आवागमन सुगम हुआ है। कुटी के ग्राम प्रधान नगेंद्र सिंह कुटियाल ने बताया कि जब तक सड़क नहीं थी उन्हें कुटी से आदि कैलाश जाने में पांच घंटे लगते थे। अब केवल 30 मिनट में पहुंच रहे हैं। शिव का पुराना धाम है आदि कैलाश आदि कैलाश को भगवान शिव का प्राचीन धाम माना जाता है। इसे ‘छोटा कैलाश’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसका स्वरूप कैलाश पर्वत से मिलता-जुलता है। शिव–पार्वती मंदिर, पार्वती कुंड, गौरी कुंड और भीम की खेती यहां के प्रमुख तीर्थ स्थल हैं। रुंग समुदाय इसे अपनी विरासत और आस्था का केंद्र मानता है। 5 नवंबर को हो चुके कपाट बंद भगवान शिव-पार्वती मंदिर के कपाट इस साल 5 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर विधि-विधान से बंद किए गए। पुजारी गोपाल सिंह कुटियाल और वीरेंद्र सिंह कुटियाल ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ परंपरा निभाई। कपाट बंद होने से पहले 500 से अधिक श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन कर दर्शन किए। हल्की बर्फबारी के बीच कपाट बंदी की प्रक्रिया पूरी की गई। मंदिर के कपाट अब अगले साल मई में खोले जाएंगे। पुजारी भी बर्फबारी बढ़ने से पहले कुटी गांव लौट गए हैं। मौसम सामान्य होने और मार्ग साफ होने के बाद ही प्रशासन यात्रा की औपचारिक शुरुआत करता है। 35 हजार से ज्यादा भक्त पहुंचे इस साल 30 मई से शुरू हुई यात्रा में इस वर्ष 35 हजार से अधिक श्रद्धालु आदि कैलाश पहुंचे। श्रद्धालुओं ने आदि कैलाश पर्वत, ओम पर्वत, गौरी कुंड, पार्वती कुंड और भीम की खेती के दर्शन किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद सड़क सुधार और सुरक्षा प्रबंधन बेहतर हुआ है, जिससे पर्यटकों की संख्या में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

इंदौर में ग्रीन फील्ड कॉरिडोर के लिए 20 गांवों की जमीन अधिग्रहण का निर्णय

 इंदौर इंदौर और उज्जैन के बीच प्रस्तावित 48 किमी लंबे ग्रीन फील्ड कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज हो चुकी है। इसमें इंदौर जिले की दो तहसीलों सांवेर और हातोद के 20 गांवों की जमीनें आ रही हैं। अधिग्रहित होने वाली जमीनों के लिए धारा-19 का प्रकाशन कर दिया गया है, जिसके साथ ही किसानों का भूमि विवरण, स्वामित्व और रकबे की जानकारी सार्वजनिक कर दी गई है। इंदौर में 175 हेक्टेयर से अधिक भूमि अधिग्रहित होगी। इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर परियोजना में इंदौर जिले के 20 और उज्जैन जिले के आठ गांवों की भूमि आ रही है। इसमें इंदौर जिले में 650 किसानों की करीब 175.393 हेक्टेयर जमीन परियोजना के लिए अधिग्रहित होगी। हातोद तहसील के 255 किसानों की करीब 75.401 हेक्टेयर, जबकि सांवेर तहसील के 395 किसानों की 99.992 हेक्टेयर निजी एवं सिंचित भूमि शामिल है। धारा-19 के प्रकाशन के साथ ही प्रभावित किसानों के नाम और उनकी जमीन का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक कर दिया गया है। सांवेर एसडीएम धनश्याम धनगर का कहना है कि ग्रीन फील्ड कॉरिडोर योजना के लिए धारा-19 का प्रकाशन कर दिया गया है। इसमें किसानों के नाम और योजना में आ रही भूमि की जानकारी सार्वजनिक की गई है। मिलेगा बेहतर विकल्प ग्रीन फील्ड कॉरिडोर के निर्माण से इंदौर-उज्जैन के बीच यात्रा के लिए अतिरिक्त विकल्प मिलेगा। इससे उज्जैन की यात्रा आसानी से और कम समय में पूरी हो सकेगी। एयरपोर्ट आकर उज्जैन जाने वाले यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी।  

राष्ट्रीय फुटबॉल टूर्नामेंट की मेजबानी करेगा उमरिया, जानें मैचों का पूरा शेड्यूल

उमरिया  उमरिया जिले को पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर फुटबॉल टूर्नामेंट आयोजित करने का मौका मिला है। 69वीं राष्ट्रीय शालेय 14 वर्ष फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन 1 से 6 दिसंबर तक किया जाएगा। इस प्रतिष्ठित आयोजन में देश के 33 राज्यों से 693 खिलाड़ी, 40 ऑफिशियल्स और 60 स्थानीय अधिकारी हिस्सा लेंगे। आयोजन की तैयारियों को लेकर कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें प्रतियोगिता को सफल और भव्य बनाने पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में पूर्व विधायक अजय सिंह, राकेश शर्मा, धनुषधारी सिंह सहित जिला स्तरीय अधिकारी और विद्यालय प्राचार्य मौजूद रहे। व्यापक प्रचार की रणनीति तैयार कलेक्टर जैन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रतियोगिता का व्यापक प्रचार-प्रसार होर्डिंग्स, फ्लैक्स और पेम्फलेट्स के माध्यम से किया जाए। विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भी प्रतियोगिता का प्रमोशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि इसे राष्ट्रीय पहचान मिल सके। सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था चाक-चौबंध कलेक्टर ने बताया कि जिन चार मैदानों पर मैच होंगे वहां एंबुलेंस, स्ट्रेचर और चिकित्सकीय टीम की तैनाती रहेगी। पानी की शुद्धता की जांच लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा की जाएगी, जबकि भोजन की गुणवत्ता की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा विभाग को सौंपी गई है। साफ-सफाई की व्यवस्था पर भी विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए। इन मैदानों में होंगे मुकाबले प्रतियोगिता का आयोजन स्टेडियम, कृष्ण ताल उमरिया, पीटीएस ग्राउंड और शासकीय उमावि बालक चंदिया मैदान में होगा। खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था खेल परिसर भरौला, होटल सरई, कृष्णा गार्डन, सूर्या होटल और कृष्णा पैलेस में की गई है। परिवहन के लिए 10 बसें और 8 जीप तैनात की गई हैं। प्रत्येक आवास स्थल के लिए नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए जाएंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रम देंगे खास रंग आरसी स्कूल उमरिया और सेंट्रल एकेडमी के छात्र विभिन्न राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। 3 और 4 दिसंबर को कैंप फायर का आयोजन होगा, जिसमें बिजहरिया लोक नृत्य दल सहित अन्य कलाकार प्रदर्शन करेंगे। व्यापारियों से भी आयोजन में सहयोग का आग्रह किया गया है, ताकि यह अवसर जिले के लिए यादगार बन सके। पत्रकारवार्ता में साझा हुई रूपरेखा प्रतियोगिता की जानकारी साझा करने के लिए मंगलवार को कृष्णा गार्डन में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पत्रकारवार्ता आयोजित की गई। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभय सिंह ने इस दौरान कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उमरिया जिला पहली बार राष्ट्रीय स्तर की मेजबानी करने जा रहा है, जिससे स्थानीय खेल जगत में उत्साह का माहौल है।

2026 में सरकारी छुट्टियां कब हैं? केंद्र सरकार की पूरी हॉलिडे लिस्ट जारी

नईदिल्ली   केंद्र सरकार ने आगामी साल 2026 के लिए सभी केंद्रीय सरकारी कार्यालयों की आधिकारिक छुट्टियों की सूची जारी कर दी है. इस सर्कुलर के अनुसार, कर्मचारियों को अनिवार्य छुट्टियों के अलावा प्रतिबंधित (Restricted) छुट्टियों की सूची में से दो अवकाश चुनने की अनुमति है. हालांकि, दिल्ली/नई दिल्ली से बाहर तैनात कर्मचारियों के लिए छुट्टियों का इंफ्रास्ट्रक्चर कुछ अलग है. ऐसे कर्मचारियों के लिए 14 राष्ट्रीय स्तर की छुट्टियां अनिवार्य की गई हैं, जबकि 12 ऑप्शनल छुट्टी की सूची में से 3 छुट्टियां चुनना अनिवार्य होगा. क्या ईद, मुहर्रम जैसी तारीखें बदल सकती हैं? ये त्योहार चांद देखने पर निर्भर करते हैं, ऐसे में इनकी तारीख बदल सकती है। दिल्ली/नई दिल्ली में छुट्टी की तारीख में बदलाव हो सकता है, और यह बदलाव मंत्रालय की ओर से अलग से नोटिफाई किया जाएगा। दिल्ली के बाहर, छुट्टी की तारीख का फैसला वहां की राज्य सरकारें या केंद्र सरकार की स्थानीय कमेटियां करती हैं। अगर राज्य सरकार ईद की तारीख बदलती है, तो वहां के केंद्रीय दफ्तर भी उसी तारीख को छुट्टी दे सकते हैं। अगर दिवाली रविवार को पड़े तो क्या होगा? 2026 में दिवाली रविवार, 8 नवंबर को पड़ रही है। हालांकि, कुछ राज्य दिवाली एक दिन पहले नरक चतुर्दशी को मनाते हैं। यदि कोई राज्य नरक चतुर्दशी को आधिकारिक दिवाली की छुट्टी घोषित करता है, तो उस राज्य के केंद्रीय दफ्तर भी उसी दिन दिवाली की छुट्टी दे सकते हैं। पूरे भारत में अनिवार्य छुट्टियों की सूची (2026)     गणतंत्र दिवस     स्वतंत्रता दिवस     महात्मा गांधी जयंती     बुद्ध पूर्णिमा     क्रिसमस     दशहरा (विजयदशमी)     दिवाली (दीपावली)     गुड फ्राइडे     गुरु नानक जयंती     ईद-उल-फितर     ईद-उल-जुहा     महावीर जयंती     मोहर्रम     ईद-ए-मिलाद (प्रोफेट मोहम्मद का जन्मदिन) वैकल्पिक छुट्टियां (Optional Holidays) – 2026 दिल्ली स्थित केंद्रीय कार्यालयों के लिए DoPT तीन वैकल्पिक छुट्टियां तय करता है, जबकि दिल्ली के बाहर राज्य की राजधानी स्थित CGEWCC तीन छुट्टियां निम्न सूची में से चुनती है-     दशहरा का अतिरिक्त दिन     होली     जन्माष्टमी     राम नवमी     महा शिवरात्रि     गणेश चतुर्थी/ विनायक चतुर्थी     मकर संक्रांति     रथ यात्रा     ओणम     पोंगल     सरस्वती पूजा (वसंत पंचमी)     विशु, बैसाखी, बिहू, उगादी, चैती चांद, गुड़ी पड़वा, नवरात्र प्रारंभ, नवरोज, छठ पूजा, करवा चौथ आदि   S.No Holiday Date Day 1 Republic Day Jan 26 Monday 2 Holi Mar 4 Wednesday 3 Id-ul-Fitr Mar 29 Sunday 4 Ram Navami Mar 31 Tuesday 5 Mahavir Jayanti Apr 1 Wednesday 6 Good Friday Apr 3 Friday 7 Buddha Purnima May 31 Sunday 8 Id-ul-Zuha (Bakrid) June 26 Friday 9 Muharram June 26 Friday 10 Independence Day Aug 15 Saturday 11 Janmashtami Sep 4 Friday 12 Milad-un-Nabi / Id-e-Milad Sep 24 Thursday 13 Mahatma Gandhi’s Birthday Oct 2 Friday 14 Dussehra Oct 21 Wednesday 15 Diwali Nov 21 Saturday 16 Guru Nanak’s Birthday Nov 29 Sunday 17 Christmas Day Dec 25 Friday प्रतिबंधित छुट्टियां (Restricted Holidays) – 2026 (Delhi/नई दिल्ली) दिल्ली/नई दिल्ली में कर्मचारी इन सूची में से कोई भी दो अवकाश चुन सकते हैं. अन्य राज्यों में स्थानीय त्योहारों को ध्यान में रखते हुए संबंधित राज्य CGEWCC अपनी सूची तैयार करेगा. Holiday Date Day New Year’s Day Jan 1 (Thursday) Makar Sankranti Jan 14 (Wednesday) Basant Panchami Jan 16 (Friday) Guru Ravidas Jayanti Feb 12 (Thursday) Maha Shivratri Feb 26 (Thursday) Holika Dahan Mar 3 (Tuesday) Chaitra Sukladi / Gudi Padwa / Ugadi Mar 19 (Thursday) Easter Sunday Apr 5 (Sunday) Tagore Jayanti May 8 (Friday) Onam / Thiru Onam Aug 26 (Wednesday) Raksha Bandhan Aug 26 (Wednesday) Ganesh Chaturthi Sep 14 (Sunday) Dussehra (Saptami, Ashtami, Navami) Oct 18–20 – Karva Chauth Oct 30 (Thursday) Chhath Puja Nov 19 (Wednesday) Christmas Eve Dec 24 (Thursday) ईद और चांद देखने पर निर्भर त्योहारों में बदलाव संभव सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ईद-उल-फितर, ईद-उल-जुहा, मोहर्रम और ईद-ए-मिलाद जैसी चांद देखने पर आधारित छुट्टियों की अंतिम तिथियां बाद में अधिसूचित की जाएंगी.

भव्य तैयारियों के बीच ग्वालियर व्यापार मेला 25 दिसंबर से शुरू, दुकानों के आवंटन में देरी

ग्वालियर  ग्वालियर में हर वर्ष के प्रति इस वर्ष भी श्रीमंत माधवराव सिंधिया ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण द्वारा 25 दिसंबर से व्यापार मिलेगा आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष भी मेला 25 दिसंबर से लेकर 25 फरवरी तक चलेगा। संभागीय आयुक्त मनोज खत्री ने तैयारियों की समीक्षा बैठक बुलाई, जिसमें अधिकारियों को आनन-फानन में काम पूरा करने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक के दौरान संभागीय आयुक्त खत्री द्वारा दिए गए निर्देश से स्पष्ट है कि आवश्यक कार्य अभी भी अधूरे हैं। दुकान आवंटन की ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत अभी तक कुल 1921 दुकानों के लिए आवेदन किए जा चुके हैं। करीब 521 दुकानदार अब भी आवेदन करने से वंचित हैं। बैठक में संभाग आयुक्त खत्री ने उपायुक्त नगर निगम को मेला परिसर की साफ-सफाई शीघ्रता से पूर्ण करने के निर्देश दिए। वहीं मध्य प्रदेश लघु उद्योग निगम के कार्यपालन यंत्री को स्वच्छता परिसर के संधारण कार्य को अविलंब और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण करने का निर्देश मिला। नगर निगम के कार्यपालन यंत्री (पीएचई) को स्वच्छता परिसर में तत्काल बोरिंग का कार्य पूर्ण करने के लिए निर्देशित किया गया। एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड की रहेगी पूरी व्यवस्था संभागीय आयुक्त मनोज खत्री ने मेला आयोजन से पूर्व मेले की साफ-सफाई, विद्युत व्यवस्था एवं पेयजल की व्यवस्था चाक-चौबंद करने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही मेले में लगने वाले झूलों की सुरक्षा के संबंध में भी पुख्ता प्रबंध करने को कहा गया था। मेले के दौरान अस्थायी चिकित्सालय एवं एम्बुलेंस के साथ ही फायर ब्रिगेड की व्यवस्था करने को कहा गया था। संभागीय आयुक्त मनोज खत्री ने बैठक में कहा था कि मेला परिसर में अस्थायी अतिक्रमण को हटाने के लिये अभियान चलाकर कार्य किया जाए। इसके लिए एसडीएम, एडिशनल एसपी एवं अपर आयुक्त नगर निगम संयुक्त रूप से कार्रवाई सुनिश्चित करें। इस साल भी मेला सैलानियों के लिए 2 महीने लगेगा कानून व्यवस्था के संबंध में भी पुलिस अधीक्षक से समन्वय स्थापित कर मेले के दौरान सुरक्षा और पार्किंग के पुख्ता प्रबंध किए जाए। बैठक में यह भी तय किया गया था कि फायरब्रिगेड की उपलब्धता के एवज में नगर निगम को और सुरक्षा व्यवस्था के एवज में पुलिस वेलफेयर में मेला प्राधिकरण दो लाख रूपए की धनराशि उपलब्ध कराई जाए। बैठक में यह भी तय किया गया कि विभागीय प्रदर्शनियों के लिये सीईओ जिला पंचायत की अध्यक्षता में बैठक आयोजित कर संबंधित विभागों को समय रहते प्रदर्शनी लगाने के निर्देश दिए जाए। जिला प्रशासन की ओर से मेला अवधि में मजिस्ट्रियल अधिकारियों की तैनाती भी सुनिश्चित की जाए। भव्यता से आयोजित हों सांस्कृतिक कार्यक्रम ग्वालियर व्यापार मेले में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा भी समय रहते तय करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भव्यता से करने की बात भी कही गई। स्थानीय कलाकारों को भी मेले में अपनी प्रस्तुति प्रस्तुत करने हेतु मंच एवं सुविधाएं उपलब्ध कराए।

भविष्य की इंटरनेट स्पीड इस फैसले पर: जानिए 6GHz की अहमियत

नई दिल्ली    भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में इस वक्त एक जंग चल रही है. ये जंग 6GHz बैंड्स को लेकर है. जहां भारतीय टेलीकॉम ऑपरेटर्स और दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां 6-गीगाहर्ट्ज बैंड्स को लेकर एक दूसरे के खिलाफ खड़ी हैं. दोनों ही पक्ष सरकार से अलग-अलग तरीके से इन्हें जारी करने की मांग कर रहे हैं.  फैसला चाहे जो हो, इसका असर हमारे मोबाइल नेटवर्क और Wi-Fi स्पीड पर पड़ने वाला है. 6GHz बैंड्स का लाइसेंस कैसे जारी होगा इसी बात को लेकर तमाम कंपनियां आमने सामने हैं. इस वक्त दुनिया भर में 6GHz बैंड्स की चर्चा है. इंटरनेट और टेलीकॉम की दुनिया में 6GHz इस वक्त किसी रियल एस्टेट की तरह है.  दुनिया के कुछ देशों ने इसे अनलाइसेंस Wi-Fi के लिए ओपन कर दिया है, तो कुछ ने इसे फ्यूचर मोबाइल यूज के लिए रिजर्व रखा है. वहीं कुछ देश ऐसे भी हैं, जिन्होंने 6G बैंड्स पर कोई फैसला नहीं लिया है. इन देशों की लिस्ट में भारत भी है.  6GHz स्पेक्ट्रम बना नया जंग का मैदान Apple, Amazon, Meta, Cisco और Intel जैसी कंपनियां चाहती हैं को भारत 6GHz वाले 1200 MHz बैंड को अनलाइसेंस रखे और इसे Wi-Fi यूज के लिए अलाउ करे. उनका कहना है कि ये बैंड घर और ऑफिस में नेटवर्क की भीड़ को कम कर सकता है. खासकर Wi-Fi 7 डिवाइसेस की एंट्री के बाद.  उनका कहना है कि भारत को ग्लोबल पैटर्न को फॉलो करना चाहिए. वहीं Jio और Vi का मानना है कि भारत को 6GHz को IMT स्पेक्ट्रम के तहत मोबाइल नेटवर्क्स के लिए जारी करना चाहिए. दोनों ही ऑपरेटर्स का कहना है कि ये बैंड 5G और फ्यूचर 6G रोलआउट के लिए बहुत जरूरी है.  कैसे होगा यूजर्स का फायदा? खासकर उन शहरों में जहां खपत ज्यादा है. टेलीकॉम कंपनियों की चिंता जायज है. बिना मिड-बैंड स्पेक्ट्रम के भारतीय नेटवर्क्स पर फ्यूचर में वीडियो स्ट्रीमिंग, गेमिंग और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस के बढ़ने से दबाव पड़ेगा. वहीं भारती एयरटेल ने फिलहाल बीच का रास्ता चुना है. कंपनी का कहना है कि भारत को स्पेक्ट्रम जारी करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. हालांकि, फैसला किसी भी पक्ष का हो, आम यूजर्स के रोजमर्रा के काम पर इसका असर जरूर पड़ेगा.  ये बैंड Wi-Fi के लिए जारी होता है, तो घर और ऑफिस में नेटवर्क वाइड होगा, उन पर दबाव कम होगा और परफॉर्मेंस बेहतर होगी. खासकर उन जगहों पर जहां मल्टी डिवाइस का इस्तेमाल होता है.  वहीं मोबाइल नेटवर्क्स के लिए अगर ये बैंड जारी होता है, तो 5G और 6G का बड़ा बूस्ट मिलेगा. मोबाइल इंटरनेट की स्पीड बेहतर होगी. अगर भारत इस मामले में कोई फैसला नहीं लेता है और मामले को फ्यूचर के लिए टालता है, तो लोगों को इसका फायदा मिलने में देरी होगी.

उज्जैन महाकाल मंदिर: 25 दिसंबर से 5 जनवरी तक 10 लाख भक्त करेंगे दर्शन

उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में 25 दिसंबर से 5 जनवरी तक भस्म आरती की ऑनलाइन बुकिंग को ब्लाक कर दिया गया है। भीड़ भरे इन दिनों में आफलाइन अनुमति व्यवस्था भी स्थगित रहेगी। इस दौरान देशभर से आने वाले भक्त भगवान महाकाल की भस्म आरती के चलायमान दर्शन कर सकेंगे। महाकाल मंदिर में नए साल को लेकर तैयारी शुरू हो गई है। अनुमान है कि 25 दिसंबर से पांच जनवरी तक करीब 10 लाख भक्त भगवान महाकाल के दर्शन करने उज्जैन पहुंचेंगे। श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए दर्शन का नया प्लान तैयार किया जा रहा है। इसकी शुरुआत भस्म आरती की ऑनलाइन बुकिंग सुविधा को ब्लॉक करने के साथ हो गई है। सभी को अनुमति प्रदान करना संभव नहीं भस्म आरती दर्शन व्यवस्था प्रभारी व सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने बताया नए साल में भस्म आरती दर्शन को लेकर काफी दबाव रहता है। हर भक्त की अभिलाषा रहती है कि वह भगवान महाकाल की भस्म आरती के दर्शन करे, लेकिन मंदिर में स्थान समिति होने के कारण सभी को अनुमति प्रदान करना संभव नहीं है। इसलिए 25 दिसंबर से 5 जनवरी तक अत्यधिक भीड़ वाले दिनों के लिए भस्म आरती की ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था को बंद कर दिया गया है। मंदिर के भस्म आरती बुकिंग काउंटर से सामान्य श्रद्धालुओं को दी जाने वाली अनुमति व्यवस्था भी स्थगित रहेगी। उक्त सभी दर्शनार्थी बिना किसी परेशानी के कार्तिकेय मंडपम से सुविधा पूर्वक निश्शुल्क चलायमान दर्शन कर सकेंगे। चारधाम मंदिर से रहेगी दर्शन व्यवस्था पिछले कुछ सालों से वर्षांत में देश विदेश से हजारों भक्त भगवान महाकाल के दर्शन करने उज्जैन आते हैं। मंदिर प्रशासन द्वारा भक्तों की सुविधा के विशेष इंतजाम किए जाते हैं। इस बार भी नए साल में विशेष दर्शन व्यवस्था लागू रहेगी। दर्शनार्थियों को कर्कराज पार्किंग से चारधाम मंदिर, शक्तिपथ के रास्ते श्रीमहाकाल महालोक होते हुए मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा, इसके बाद श्रद्धालु गणेश व कार्तिकेय मंडप से भगवान महाकाल के दर्शन करेंगे। बंद रह सकती है शीघ्र दर्शन टिकट सुविधा 31 दिसंबर व 1 जनवरी को 250 रुपये की शीघ्र दर्शन टिकट सुविधा भी बंद रह सकती है। बताया जाता है नए दर्शन प्लान में इस विकल्प को खुला रखा जाएगा। गत वर्ष 2025 में भी अत्यधिक भीड़ वाले इन दिनों में शीघ्र दर्शन की सुविधा को स्थगित किया गया था। सभी श्रेणी के भक्तों को एक साथ एक व्यवस्था से भगवान महाकाल के दर्शन कराए गए थे। यहां रहेगी पार्किंग सुविधा     कर्कराज मंदिर, भील समाज धर्मशाला, नृसिंह घाट क्षेत्र में वाहन पार्किंग रहेगी।     हरिफाटक चौराहा के पास इम्पीरियल होटल के पीछे तथा मन्नत गार्डन में पार्किंग रहेगी।  

भारत की पहली डिजिटल जनगणना 2027: मध्यप्रदेश में तैयारियों का दौर तेज

भोपाल  भारत सरकार द्वारा देश की पहली डिजिटल जनगणना 2027 को लेकर बैतूल जिला प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी हैं। जनगणना संबंधी अधिसूचना भारत सरकार के राजपत्र में 16 जून को प्रकाशित होने के बाद बैतूल जिला सांख्यिकी विभाग ने शासन से मिले दिशा-निर्देशों के आधार पर प्रारंभिक कदम उठाना शुरु कर दिए हैं। बैतूल जिले में जनगणना शुरु होने से लगभग 18 महीने पहले प्रशासनिक इकाइयों जिले, तहसीलों, कस्बों और गांवों की सीमाओं को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेजी से संचालित की जा रही है। सांख्यिकी कार्यालय ने इसके लिए विभिन्न विभागों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। दो चरणों में जनगणना पूरी इस बार होने वाली जनगणना (Census India 2027) पूरी तरह डिजिटल तकनीक आधारित होगी, जिसमें आंकड़ों के संग्रहण से लेकर प्रकाशन तक हर चरण में आधुनिक उपकरणों और सॉटवेयर का उपयोग होगा। विशेष बात यह है कि इस बार जातिगत डेटा भी संग्रहित किया जाएगा, जिसके लिए सभी जातियों से संबंधित सूचनाएं प्रगणकों द्वारा दर्ज की जाएंगी। जनगणना दो चरणों में होगी।     पहला चरण मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का होगा, जो मध्यप्रदेश शासन से परामर्श लेकर अप्रेल से सितंबर 2026 के बीच 30 दिन में पूरा होगा।     दूसरा चरण जनसंया गणना का होगा, जिसे फरवरी 2027 में करवाया जाएगा। इस दौरान जनगणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027, रात 12 बजे निर्धारित की गई है, यानी उस पल मौजूद जनसंया ही रिकॉर्ड मानी जाएगी। निवासियों के लिए स्व-गणना पोर्टल तैयार जनगणना को अधिक सरल, पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए एक स्व-गणना वेब पोर्टल भी विकसित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से जिले के नागरिक अपने घरों और परिवार का डेटा स्वयं भर सकेंगे। इससे न केवल आंकड़ों की सटीकता बढ़ेगी, बल्कि प्रगणकों का कार्यभार भी काफी कम होगा। डिजिटल जनगणना 2027 के लिए बैतूल जिला प्रशासन की यह तैयारियां बताती हैं कि प्रदेश और जिले के लिए यह प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव लेकर आएगी। ऐप, जीपीएस और रियल टाइम मॉनिटरिंग का उपयोग जनगणना 2027 पारंपरिक जनगणना से इसलिए भिन्न है क्योंकि इसमें मोबाइल ऐप आधारित डिजिटल डेटा संग्रह प्रणाली अपनाई जाएगी। प्रगणक मोबाइल ऐप से घरों की सूची और गणना से जुड़े आंकड़े दर्ज करेंगे। हर गणना ब्लॉक की सीमा जीपीएस तकनीक से कैप्चर की जाएगी, जिससे सटीकता बढ़ेगी। समस्त जनगणना कार्य की रियल टाइम मॉनिटरिंग सीएमएमएस पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। नवंबर 2025 तक जिले में जनगणना प्रशिक्षण के लिए चार मास्टर ट्रेनर चिन्हित किए जा चुके हैं, जो आगे प्रगणकों को प्रशिक्षित करेंगे। सीमाओं की फ्रीजिंग से पहले सत्यापन जनगणना 2027 के लिए राज्य की प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं की फ्रीजिंग 31 दिसंबर 2025 से लागू हो जाएगी। इसके बाद 1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक किसी भी जिलों, तहसीलों या ग्राम सीमाओं में परिवर्तन नहीं किया जा सकेगा। इसी कारण बैतूल जिले में सीमाओं के सत्यापन का कार्य प्राथमिकता से करवाया जा रहा है। निर्देशालय द्वारा भेजे गए आदेशों के अनुसार अक्टूबर-नवंबर 2025 के बीच तक सभी राजस्व व वन ग्रामों की तहसीलवार सूची, नगरीय निकायों के मानचित्र और ग्राम सीमाओं के सत्यापन पूरा कर भेजना अनिवार्य होगा। जिला प्रशासन ने संबंधित विभागों को समय सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश जारी किए हैं।  जनगणना 2027: पहले चरण में घर-घर पहुंचेगी टीम नए साल में जनगणना वाले कई सवाल लेकर आपके घर पर दस्तक देंगे। वे घर के निर्माण से लेकर उसके उपयोग के बाबत तमाम जानकारी एकत्र करेंगे। मसलन सौर ऊर्जा से लेकर इंटरनेट के इस्तेमाल तक की जानकारी मांगी जाएगी। घर के फर्श, छत व दीवारें किस चीज से बनीं हैं। मकान का उपयोग आवास के रूप में होता या उसमें कार्यालय, गेस्ट हाउस या पूजा स्थल भी है। पीने का पानी नहर, नदी, कुएं हैंडपंप व नल से मिलता है या सीलबंद पैकेट या बोतल का पानी उपयोग में आता है। यह सब जानकारियां भी हासिल की जाएंगी। टेलीफोन या स्मार्टफोन तक की जानकारी भी साझा करनी है। इस कवायद का मकसद देश के लोगों के रहन सहन के स्तर को जानना है। इससे निकले आंकड़े विकसित भारत की मुहिम में नई नीतियां बनाने व मौजूदा नीतियों में कमियों को दूर करने में सहायक होंगे। भारत सरकार ने जनगणना 2027 के प्रथम चरण के लिए मकान सूचीकरण व मकान गणना अनुसूची सूची तैयार करने का अभियान तेज कर दिया है। इसके लिए प्रगणक घर घर दस्तक देंगे। इसके लिए 30 से ज्यादा सवालों की सूची तैयार कर ली गई है। इससे संबंधित अधिसूचना जल्द जारी होगी। मोटर कार से लेकर मोपेड तक जानकारी दर्ज होगी मकान मलिक से घर में कार, मोटर साइकिल, साइकिल व मोपेड के बारे में जानकारी ली जाएगी। यह पता किया जाएगा घर में खाना बनाने में लकड़ी, फसल अपशिष्ट , उपले कोयला, गोबर गैस, मिट्टी का तेल, एलपीजी, पीएनजी, बिजली व सौर ऊर्जा में किसका इस्तेमाल होता है। फर्श कच्चा है या पत्थर, टाइल, ईंट या सीमेंट का है। टीवी में डिश व डीटीएच की सुविधा, लैपटॉप, लैंडलाइन व मोबाइल फोन की जानकारी भी देनी है। गेहूं , ज्वार , चावल , बाजरा, मक्के के उपयोग के बाबत भी सवाल होंगे। ऑनलाइन गणना से जल्द आएंगे आंकड़े जनगणना 2027 का पहला चरण अगले साल अप्रैल से शुरू होगा। इसमें मकानों व उसमें रहने वालो के रहन सहन के स्तर का ब्यौरा एकत्र होगा। वर्तमान में लद्दाख व पश्चिम बंगाल को छोड़कर पूरे देश में पहले चरण के मकान सूचीकरण के काम का पूर्वाभ्यास चल रहा है। प्रगणकों को इसमें प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। यह प्रगणक ऑनलाइन व घर घर जाकर दोनों तरह से आंकड़ों को एकत्र करेंगे। पहली बार डिजिटल माध्यम का भी उपयोग होने से जनगणना के आंकड़े भी जल्द सामने आ सकेंगे। पहले की जनगणनाओं में मुख्य आंकड़े तो आ जाते थे लेकिन विस्तृत आंकड़े आने में कई साल लगते थे। दूसरे चरण के तहत 2027 में पूरे देश की जनगणना कराई जाएगी। इसमें जातिगत जनगणना भी शामिल है। आजादी के बाद पहली बार जातिगत जनगणना होनी है इसलिए इस काम को बहुत ही चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। जनगणना में पहली बार मोबाइल ऐप व पोर्टल का उपयोग होगा। उसके लिए सवाल अलग से … Read more

गांजा पीने वालों की बढ़ती संख्या से शराब की बिक्री घटी? रिपोर्ट में सामने आए संकेत

 नई दिल्ली 2025 में कई ऐसी रिपोर्ट आई हैं, जिसमें पता चला है कि लोगों का शराब से मोहभंग हो रहा है. ऐसे ही एक रिपोर्ट हाल ही में कर्नाटक से आई है, जिसमें बताया गया है कि कुछ महीनों से शराब की बिक्री लगातार कम होती जा रही है. इस रिपोर्ट में साल 2024 से तुलना की गई है और बताया गया है कि शराब की बिक्री कम हो गई है. खास बात ये है कि शराब की बिक्री कम होने पर शराब व्यापारियों का कहना है कि गांजे, चरस ज्यादा बिकने से शराब की बिक्री कम हो गई है. ऐसे में जानते हैं कि क्या सही में ऐसा हो सकता है और ऐसा क्यों कहा जा रहा है… क्या लोग कम पी रहे हैं शराब? सितंबर आखिरी में एक रिपोर्ट में बताया था कि केरल में शराब की बिक्री दस सालों में काफी कम हो गई है. वहां के मंत्री एमबी राजेश ने विधानसभा में बताया था कि 2011-12 में शराब बिक्री 241.78 लाख केस (शराब की बोतलें) थीं जो 2024-25 में घटकर 228.6 लाख रह गई. ऐसे ही कर्नाटक से जुड़ी रिपोर्ट आई जिसमें बताया जा रहा है कि कर्नाटक में पिछले 7 महीनों में शराब की बिक्री काफी कम हुई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2024 में अप्रैल से अक्टूबर में जो बिक्री 407 लाख थी, वो इस साल 403 लाख है. वहीं पूरे भारत के हिसाब से देखें तो रिपोर्ट के अनुसार, भारत की आबादी का पांचवा हिस्सा शराब पीता है यानी करीब 22.4 फीसदी लोग शराब पीते हैं. लेकिन, ये डेटा पहले के मुताबिक काफी कम हो गया है. साल 2025-16 में करीब 29.2 प्रतिशत लोग शराब पीया करते थे, जो अब काफी कम हो गया है. ये डेटाकेंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से दिया गया था. कुछ राज्यों में पीने वालों की संख्या औसत से काफी ज्यादा है. जैसे गोवो में 59.1 फीसदी पुरुष, अरुणाचल प्रदेश में 56.6 फीसदी, तेलंगाना में 50 फीसदी, झारखंड में 40.4 फीसदी, ओडिशा में 38.4 फीसदी, सिक्किम में 36.3 फीसदी, छत्तीसगढ़ में 35.9 फीसदी, तमिलनाडु में 32.8 फीसदी, उत्तराखंड में 32.1 फीसदी, आंध्र प्रदेश में 31.2 फीसदी, पंजाब में 27.5 फीसदी, असम में 26.5 फीसदी, केरल में 26 फीसदी और पश्चिम बंगाल में 25.7 फीसदी लोग शराब पीते हैं. 2015-16 में किए गए NFHS-4 के अनुसार, भारत में 15-49 साल की उम्र की महिलाओं और पुरुषों में शराब पीने वालों का प्रतिशत 1.2 प्रतिशत और 29.2 प्रतिशत था. 2019-21 में किए गए NFHS-5 के अनुसार, यह प्रतिशत घटकर महिलाओं के लिए 0.7 प्रतिशत और पुरुषों के लिए 22.4 प्रतिशत हो गया. क्या कह रहे हैं व्यापारी? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, व्यापारियों को कहना है कि शराब की बिक्री में कमी इसलिए हो रही है, क्योंकि अब गांजे आदि की बिक्री बढ़ गई है. गांजा, चरस की बिक्री बढ़ जाने से शराब की बिक्री पर असर पड़ा है.  इस बारे में बेंगलुरु अर्बन डिस्ट्रिक्ट लिकर मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेश ने बताया, 'कर्नाटक में हर साल ड्यूटी बढ़ा दी जाती है. अगर हर तिमाही में 15-20 बढ़ते हैं, तो कंज्यूमर कम हो जाते हैं. बीयर पर ड्यूटी बढ़ा दी गई है. ऐसे में लोग ड्रग्स की तरफ जा रहे हैं. पहले यहां से आंध्र को शराब एक्सपोर्ट होती थी, हम एक्सपोर्ट करते थे. लेकिन अब यह कम हो रही है. पुलिस काफी मारिजुआना जब्त करती रहती है. इतना सेवन होता है कि रोज काफी पकड़ा जाता है जितना हो सके ड्रग्स जब्त किए जाने चाहिए ताकि हमारा बिजनेस बढ़े.जरूरी चीजों की कीमतें भी बढ़ गई हैं, इन सब वजहों से कंज्यूमर शराब नहीं खरीद पा रहे हैं.' क्या गांजे से कम शराब पीते हैं लोग? ब्राउन यूनिवर्सिटी के एक नए अध्ययन से पता चलता है कि गांजा के सेवन से शराब की खपत में कमी हो सकती है. अमेरिकन जर्नल ऑफ साइकियाट्री में प्रकाशित हुए रिजल्ट के हिसाब से कुछ वक्त के लिए शराब की बिक्री पर असर पड़ता है. ब्राउन यूनिवर्सिटी में हुई रिसर्च में ये भी सामने आया है कि गांजा से शराब की इच्छा बढ़ने की जगह कम हो रही है. कई टेस्ट में सामने आया कि गांजा से उस समय शराब की तलब कम हुई और शराब की खपत कम हो गई. इसके बाद जब शराब मिलती है तो भी वो देरी से पीना शुरू करते हैं. गांजा से कैसे शराब की खपत कम होती है, इसे लेकर 21 से 44 साल के लोगों के 157 वयस्क पर शोध किया गया, जो काफी शराब पीते थे और सप्ताह में कम से कम दो बार गांजा का सेवन करते थे. जब मारिजुआना की सिगरेट पी तो कुछ घंटों तक उन्होंने अपनी पसंदीदा शराब नहीं पी. उन्होंने बाद में भी काफी कम शराब पी और नॉर्मल के मुकाबले 27 फीसदी तक कम शराब पी. इसके अलावा शराब बिक्री कम होने के पीछे कई कारण हैं, जिसमें ड्राई स्टेट में बढ़ोतरी, हाइवे पर शराब दुकानें ना होने के नियम, टैक्स में बढ़ोतरी आदि भी शामिल हो सकते हैं.