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कर्मचारियों को बड़ी राहत: अब हरियाणा के बोर्ड, निगम व सहकारी संस्थाओं में भी लागू होगी DCRG सुविधा

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने एक जनवरी, 2006 के बाद सेवा में आए और न्यू डिफाइंड कॉन्ट्रिब्यूटरी पेंशन स्कीम (एनपीएस) के अंतर्गत आने वाले बोर्डों, निगमों, कम्पनियों और सहकारी संस्थाओं के कर्मचारियों को भी मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति उपादान (डैथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्यूटी) का लाभ देने का निर्णय लिया है। मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी, जिनके पास वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव का दायित्व भी है, द्वारा राज्य के सभी बोर्डों, निगमों, कम्पनियों और सहकारी संस्थाओं के प्रबंध निदेशकों, मुख्य प्रशासकों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को एक पत्र जारी किया गया है। पत्र में वित्त विभाग के 19 जनवरी, 2017 का हवाला देते हुए बताया गया है कि एनपीएस के अंतर्गत आने वाले राज्य सरकार के कर्मचारी उसी तरह रिटायरमेंट ग्रेच्यूटी तथा डैथ ग्रेच्यूटी प्राप्त करने के पात्र होंगे, जो सीएसआर वॉल्यूम-2 के अंतर्गत कर्मचारियों को प्रदान किए जाते हैं। सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मामलों की पूरी जांच और सत्यापन के बाद ही रिटायरमेंट/डैथ ग्रेच्यूटी प्रदान की जाए। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन उपादानों के कारण बढ़ने वाले वित्तीय दायित्वों को सम्बन्धित बोर्ड या निगम द्वारा स्वयं के संसाधनों से पूरा किया जाएगा।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मप्र ने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ की बैठक

प्रदेश में चल रहे एसआईआर कार्य के बारे में कराया अवगत भोपाल  मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मप्र श्री संजीव कुमार झा ने मंगलवार को निर्वाचन सदन भोपाल में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर को लेकर बढ़ाई गई समय सीमा और प्रगति के बारे में जानकारी दी। साथ ही प्रदेश की उपलब्धि पर राजनीतिक दलों का आभार व्यक्त किया। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री झा ने कहा कि राजनीतिक दलों द्वारा बताई हुई समस्याओं के त्वरित समाधान और सुझावों के क्रियान्वयन से ही प्रदेश में एसआईआर का कार्य लगभग पूरा होने को है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 5 करोड़ 46 लाख से अधिक गणना पत्रकों का डिजीटाइजेशन किया जा चुका है। 10 जिलों ने 100 फीसदी काम पूरा कर लिया है। साथ ही 10 अन्य जिलों ने 99% से अधिक कार्य पूर्ण कर लिया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश कि 230 विधानसभाओं में से 58 में शत् प्रतिशत,146 में 90% से अधिक, 12 में 80 से 90% तथा 14 विधान सभाओं में 80% से कम कार्य हुआ है। साथ ही प्रदेश के 65 हजार 14 मतदान केंद्रों में से 40 हजार 8 सौ 30 पर100%, 16 हजार178 पर 90% से अधिक, 3655 पर 80 से90% तक काम पूरा हो चुका है। बैठक के दौरान मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री झा ने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के सुझाव प्राप्त किए। साथ ही उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। बैठक में आम आदमी पार्टी से श्रीमती रीना सक्सेना, श्री सज्जन सिंह परमार, श्री सीपी सिंह, बहुजन समाज पार्टी से श्री पूर्णेन्द्र अहिरवार, भारतीय जनता पार्टी से श्री भगवान दास सबनानी, श्री रजनीश अग्रवाल, श्री एसएस उप्पल और कांग्रेस पार्टी से श्री जेपी धनोपिया उपस्थित रहे।  

उपभोक्‍ताओं के लिए स्‍मार्ट मीटर बना वरदान, दिन के टैरिफ में 20 प्रतिशत की छूट

नवम्‍बर माह में 4,06,507 उपभोक्ताओं को उनके मासिक विद्युत बिल में दी 06 करोड, 34 लाख से अधिक की रियायत भोपाल मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं को दिन के टैरिफ में 20 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रही है। स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं के लिए यह सभी छूट अथवा प्रोत्साहन की गणना सरकारी सब्सिडी (यदि कोई हो) को छोड़कर की जा रही है। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटरिंग पहल के अंतर्गत, माह नवम्‍बर 2025 के दौरान कुल 4,06,507 उपभोक्ताओं को उनके मासिक विद्युत बिल में टाइम ऑफ डे (ToD) छूट का लाभ प्रदान किया है, जिसकी कुल राशि 06 करोड़, 34 लाख रूपए है। स्‍मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को उनकी खपत के आधार पर उपरोक्त छूट दी गई है। कंपनी ने बताया कि स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं के लिए जिसमें घरेलू, गैर घरेलू, सार्वजनिक जल कार्य और स्ट्रीट लाइट और निम्‍न दाब औद्योगिक उपभोक्‍ताओं के लिए सोलर ऑवर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक की अवधि के दौरान उपभोग की गई ऊर्जा के लिए ऊर्जा प्रभार की सामान्य दर पर 20 प्रतिशत की छूट 10 किलोवाट तक स्वीकृत लोड / अनुबंध मांग वाले उपभोक्‍ताओं को ही दी जा रही है। स्मार्ट मीटर के फायदे • ऊर्जा की खपत को ट्रैक करने और ऊर्जा की बचत करने में सहायक।  • बिजली की खपत को सटीक रूप से मापता है, जिससे बिल में कोई गलती नहीं होती।  • ऐप के जरिए मोबाइल पर रियल-टाइम डेटा देखकर ऊर्जा की खपत को नियंत्रित करना संभव।  • ऊर्जा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिलती है। इससे ऊर्जा की खपत को बेहतर बना सकते हैं।  • ऊर्जा की खपत को ऑनलाइन ट्रैक करने और नियंत्रित करने की सुविधा।  • ऊर्जा की खपत को कम करने से पर्यावरण पर पड़ने वाला प्रभाव कम होता है।  • ऊर्जा की खपत को नियंत्रित करने और ऊर्जा की बचत करने में सहायक। 

रोज़गार का सुनहरा मौका: पंजाब सरकार ने की नई भर्ती प्रक्रिया की घोषणा

संगरूर होम्योपैथिक विभाग में लंबे समय से विभिन्न कैडरों में खाली पड़े कुल 115 पदों के पुनर्जीवन और भर्ती को वित्त विभाग द्वारा मंजूरी दिए जाने का एसोसिएशन फॉर साइंटिफिक रिसर्च इन होमियोपैथी ने जोरदार स्वागत किया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का धन्यवाद करते हुए डॉ. अमरजीत सिंह मान, डॉ. अवतार सिंह (अध्यक्ष), डॉ. भूपिंदर सिंह (उपाध्यक्ष), और डॉ. विनोद सिंगला (उपाध्यक्ष) ने कहा कि राज्य में मानक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने और होम्योपैथिक विभाग की क्षमता को बढ़ाने के लिए होम्योपैथिक मेडिकल ऑफिसर के 42 पद, डिस्पैंसर के 72 पद और क्लर्क का एक पद भरे जाने से विभाग में नई जान आएगी। इससे होम्योपैथिक विभाग में स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू तरीके से चलाने में सहायता मिलेगी। 

संविधान सदन में आज ‘वंदे मातरम’ पर मंथन—10 घंटे की चर्चा में पीएम मोदी की मौजूदगी

नई दिल्ली  भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संसद के शीतकालीन सत्र में इस ऐतिहासिक गीत पर विशेष चर्चा आयोजित की जाएगी। लोकसभा में यह चर्चा सोमवार को होगी, जिसके लिए 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस विशेष बहस में हिस्सा लेंगे। चर्चा का उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम के इस प्रेरक गीत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व को रेखांकित करना है। इस निर्णय पर सहमति 30 नवंबर को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा बुलाई गई ऑल-पार्टी मीटिंग और लोकसभा व राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठकों में बनी। राज्यसभा में भी एनडीए सदस्यों ने वंदे मातरम पर विशेष चर्चा की जोरदार वकालत की। सरकार ने इसे राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए सभी राजनीतिक दलों को इसमें सहभागी बनने का आग्रह किया है। ‘वंदे मातरम’ का इतिहास भारत ने 1950 में ‘वंदे मातरम’ को अपने राष्ट्रगीत के रूप में अपनाया था। इसे बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1870 के दशक में संस्कृतनिष्ठ बंगाली में लिखा था। यह उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ का हिस्सा है, जिसका प्रकाशन 1882 में किया गया था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम’ जनमानस में जोश भरने वाला प्रमुख गीत बना। इसके 150 वर्ष पूरे होने पर केंद्र सरकार ने पिछले दिनों स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे स्वतंत्रता संग्राम की अमर धरोहर बताते हुए युवाओं से इसका अधिकाधिक गान करने की अपील की थी। संसद में सत्र की तैयारी और राजनीतिक हलचल लोकसभा BAC की बैठक में कांग्रेस ने विशेष गहन संशोधन (SIR) और चुनावी सुधारों पर बहस की मांग की, पर सरकार ने ‘वंदे मातरम’ की चर्चा को प्राथमिकता दी। तृणमूल कांग्रेस ने भी लोकसभा में इस विशेष चर्चा का समर्थन किया। विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक सोमवार सुबह मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यालय में अपनी रणनीति तय करेगा।   शीतकालीन सत्र का एजेंडा शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें 15 बैठकें होंगी। इस सत्र में 10 नए विधेयक पेश किए जाएंगे, जिनमें परमाणु ऊर्जा, उच्च शिक्षा, राष्ट्रीय राजमार्ग और बीमा क्षेत्र सुधार से जुड़े बिल शामिल हैं। इसके अलावा, 2025–26 के प्रथम अनुपूरक अनुदान मांगों पर भी विस्तृत चर्चा होगी।  

सावधान! 1 जनवरी से आपका PAN Card भी हो सकता है बंद, जानिए किन पर लागू होगा नियम

पंजाब  1 जनवरी से कई लोगों के PAN Card निष्क्रिय (Invalid) होने की खबर सामने आई है। अगर आपने अभी तक अपना आधार कार्ड PAN कार्ड से लिंक नहीं किया है, तो आपके लिए यह खबर बेहद महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार ने PAN Card-आधार लिंकिंग की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 तय की है। यह नियम उन सभी लोगों पर लागू होता है जिन्होंने 1 अक्टूबर 2025 या उससे पहले PAN कार्ड बनवाया था। CBDT के अनुसार, टैक्स फाइलिंग सिस्टम को पारदर्शी और सरल बनाने, साथ ही फर्जी PAN कार्डों पर रोक लगाने के लिए आधार–PAN लिंक करना आवश्यक है। ITR फाइल करने के लिए यह एक कानूनी अनिवार्यता है। यदि कोई व्यक्ति निर्धारित समय सीमा तक PAN को आधार से लिंक नहीं करता है, तो उसका PAN 1 जनवरी 2026 से निष्क्रिय (Invalid) माना जाएगा। इसके कई गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।      निष्क्रिय PAN के साथ न तो आप इनकम टैक्स रिटर्न भर पाएंगे और न ही आपका कोई लंबित रिटर्न प्रोसेस होगा।     PAN निष्क्रिय होने पर आपका रिफंड जारी नहीं किया जाएगा और आपका भुगतान रुका रह सकता है।     बैंकिंग से जुड़ी कई सेवाएं प्रभावित होंगी, जैस कि SIP और अन्य निवेशों में फेलियर, उच्च दर पर TDS/TCS कटौती।     आपके फॉर्म 26AS में TDS/TCS का क्रेडिट नहीं दिखाई देगा और टैक्स अधिक दर पर काटा जा सकता है। लेट लिंक करने पर क्या होगा? अगर PAN निष्क्रिय हो जाता है और आप बाद में लेट फीस जमा कर इसे लिंक करते हैं, तो आमतौर पर PAN 30 दिनों के भीतर पुनः सक्रिय कर दिया जाता है। वहीं अगर किसी ने अपने आधार कार्ड की नामांकन आईडी के इस्तेमाल से PAN Card बनाया है तो उसे दोबारा लिंक करने की जरूरत है। घर बैठे कैसे करें लिंक?     इस प्रक्रिया के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं-आप इसे ऑनलाइन पूरा कर सकते हैं।     आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।     होमपेज पर दिखाई देने वाले ‘Link Aadhaar’ विकल्प पर क्लिक करें।     अपना PAN नंबर, Aadhaar नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज करें।     मोबाइल पर आए OTP से वेरिफिकेशन करें।     अगर PAN पहले से निष्क्रिय है, तो 1000 रुपए लेट फीस जमा करें। प्रक्रिया पूरी होने के बाद ‘Link Aadhaar Status’ में जाकर अपनी स्थिति चेक करें।

अयोध्या में 52 एकड़ में बनेगा वर्ल्ड-क्लास मंदिर संग्रहालय

योगी सरकार अयोध्या के समावेशी विकास के लिए दृढ़संकल्पित लखनऊ अयोध्या में योगी सरकार द्वारा विश्वस्तरीय मंदिर संग्रहालय को अतिरिक्त जमीन देने के फैसले से रामनगरी में खुशी की लहर है। संत समाज और व्यापारी वर्ग ने अयोध्या के विकास के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद दिया है। अयोध्यावासियों ने कहा कि शहर को वैश्विक सांस्कृतिक राजधानी के रूप में स्थापित करने की दिशा में ये एक बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्रस्तावित विश्वस्तरीय मंदिर संग्रहालय अब पहले से लगभग दोगुने क्षेत्र 52.102 एकड़ में विकसित किया जाएगा। संग्रहालय परियोजना का निर्माण और संचालन टाटा सन्स अपने सीएसआर फंड से करेगा। विश्वस्तरीय संग्रहालय बनाने की दिशा में बड़ा कदम वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि टाटा सन्स ने इस अत्याधुनिक मंदिर संग्रहालय को एक गैर-लाभकारी मॉडल पर विकसित करने की इच्छा जताई है। इसके लिए कम्पनी एक्ट 2013 की धारा 8 के तहत एक गैर लाभकारी एसपीवी बनाया जाएगा, जिसमें केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। संग्रहालय संबंधी त्रिपक्षीय एमओयू भारत सरकार, यूपी सरकार और टाटा सन्स के बीच 3 सितंबर 2024 को ही हस्ताक्षरित हो चुका है। 52 एकड़ में बनेगा भव्य और विशाल संग्रहालय राज्य सरकार ने पहले अयोध्या के मांझा जमथरा गांव में 25 एकड़ नजूल भूमि उपलब्ध कराने की अनुमति दी थी, लेकिन टाटा सन्स ने संग्रहालय की भव्यता और भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए अधिक भूमि की मांग की थी। इसी आधार पर अब अतिरिक्त 27.102 एकड़ भूमि आवास एवं शहरी नियोजन विभाग से पर्यटन विभाग को हस्तांतरित की जाएगी। इस प्रकार कुल 52.102 एकड़ जमीन पर यह अद्वितीय सांस्कृतिक परिसर आकार लेगा। अयोध्या में विश्वस्तरीय संग्रहालय के लिए अतिरिक्त जमीन मिलने पर संत समाज भी उत्साहित है। संत दिवाकराचार्य ने योगी सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि अयोध्या के गौरव को पुनर्स्थापित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जो कर रहे हैं वो अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में पर्यटक बढ़ने से लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। इससे अयोध्यावासियों का आर्थिक उन्नयन हो रहा है।   अयोध्या को मिलेगी नई सांस्कृतिक पहचान चिन्ह योगी सरकार का मानना है कि मंदिर संग्रहालय के तैयार होने से अयोध्या को नया सांस्कृतिक पहचान चिन्ह मिलेगा, साथ ही हजारों प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनेंगे। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा और ध्वजारोहण समारोह के बाद अयोध्या में पर्यटकों की संख्या में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। अब रोजाना 2 से 4 लाख श्रद्धालु और पर्यटक अयोध्याधाम पहुंच रहे हैं। युवा पीढ़ी, विदेशी पर्यटकों और भारतीय विरासत में रुचि रखने वालों को आकर्षित करने के लिए यह संग्रहालय एक नया केंद्रीय आकर्षण साबित होगा और शहर की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।  अयोध्यावासी योगी सरकार के फैसले से उत्साहित  अयोध्या व्यापार मंडल के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने विश्वस्तरीय मंदिर संग्रहालय को अतिरिक्त जमीन मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए योगी सरकार की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि अयोध्या का बहुत बड़ा सौभाग्य है कि अब 52 एकड़ में एक विश्वस्तरीय संग्रहालय बनेगा। पंकज गुप्ता के अनुसार इससे अयोध्यावासी बहुत प्रसन्न हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर संग्रहालय में प्रभु श्रीराम के जीवन चरित्र का दर्शन होगा जो बड़ी संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर खींचेंगा। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि अयोध्यावासी योगी सरकार के इस फैसले से अत्यंत उत्साहित हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार धान खरीद से किसानों की आय में बढ़ोतरी कर रही सुनिश्चित

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण तथा औद्योगिक दोनों क्षेत्रों में तेजी से सुधार लागू किए हैं। प्रदेश में धान खरीद, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भुगतान और समूह आधारित उद्यमिता से जहां गांवों में नकदी प्रवाह बढ़ा है, वहीं औद्योगिक पार्कों, लॉजिस्टिक केंद्रों और विनिर्माण क्लस्टरों के विकास ने नगरीय क्षेत्रों से लगे ग्रामीण अंचलों में गैर-कृषि रोजगार के अवसरों को नया आयाम दिया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप राज्य में एकीकृत कृषि और औद्योगिक अर्थव्यवस्था आकार ले रही है, जो अन्य राज्यों के लिए भी रोल मॉडल साबित हो रही है। धान खरीद से किसानों की आय में वृद्धि योगी सरकार ने इस वर्ष धान खरीद व्यवस्था को पहले की तुलना में अधिक व्यापक बनाया है। किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए खरीद केंद्रों की संख्या 4,227 से बढ़ाकर 5,000 करने का लक्ष्य रखा गया है। यह विस्तार दूरस्थ गांवों और सीमांत किसानों तक सरकारी खरीद की सुनिश्चित पहुंच प्रदान करेगा। अब तक 1.51 लाख से अधिक किसानों से 9.02 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है, जिससे किसानों को स्थिर आय का मजबूत आधार मिला है। साधारण धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,369 रुपये प्रति क्विंटल तथा ग्रेड ए धान का मूल्य 2,389 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 69 रुपये अधिक है। किसानों के बैंक खातों में समय पर भुगतान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा 1,984 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा चुकी है। समय पर हुए इस भुगतान से ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी प्रवाह बढ़ा है। आर्थिक विश्लेषण बताते हैं कि किसानों को हुए इस प्रत्यक्ष भुगतान से ग्रामीण बाजारों में आर्थिक सक्रियता 8 से 12 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। स्वयं सहायता समूहों ने भी ग्रामीण आय को नई दिशा दी है। बीसी सखी और कृषि सखी जैसे मॉडलों ने लाखों महिलाओं को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ा है। स्वयं सहायता समूहों की वार्षिक आय 2017 में लगभग 4,000 करोड़ रुपये थी, जो 2025 में बढ़कर 18,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ा है और युवाओं के पलायन में कमी आई है। ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश का दायरा बढ़ा राज्य सरकार की औद्योगिक निवेश और रोजगार प्रोत्साहन नीति 2022 ने निवेश और रोजगार सृजन की नई संभावनाएं खोली हैं। बुंदेलखंड और पूर्वांचल जैसे क्षेत्रों में स्थायी पूंजी निवेश पर 25 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी (अधिकतम 45 करोड़ रुपये तक) दी जा रही है। इस नीति से औद्योगिक पार्कों और लॉजिस्टिक केंद्रों के विकास को नई गति मिली है। अनुमान है कि औद्योगिक विस्तार के कारण गैर-कृषि रोजगार में 22 से 27 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। खाद्य प्रसंस्करण और कृषि मूल्य श्रृंखला से संबंधित इकाइयों को भी गैर-शहरी क्षेत्रों में स्थापित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इससे ग्रामीण अंचलों वाले जिलों में उद्योग स्थापित करने में निवेशकों की रुचि बढ़ी है। विनिर्माण क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति उत्तर प्रदेश के विनिर्माण क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की जा रही है। आगरा में विकसित किए जा रहे एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर से 40,000 से अधिक रोजगार सृजित होने और लगभग 3,400 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। वार्षिक औद्योगिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार, औद्योगिक विकास के मामले में उत्तर प्रदेश देश के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है और राज्य में रोजगार में 5.92 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। ये सभी तथ्य स्पष्ट करते हैं कि धान खरीद से लेकर औद्योगिक निवेश तक योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों ने ग्रामीण और औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दी है। इसके परिणामस्वरूप, प्रदेश में विकास का एक संतुलित और प्रभावी मॉडल स्थापित हुआ है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बजरंग, विनेश की याचिका खारिज की

नई दिल्ली दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय कुश्ती महासंघ के दिसंबर 2023 में हुए चुनाव को चुनौती देने वाली बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और सत्यव्रत कादियान की याचिका खारिज कर दी क्योंकि अलग अलग तारीखों पर भी वे अदालत के समक्ष पेश नहीं हुए। इन तीनों ओलंपियनों की उम्मीदवार अनिता श्योराण को हराकर संजय सिंह उस समय अध्यक्ष बने थे। न्यायाधीश मिनी पुष्करना ने 27 नवंबर को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सुनवाई के दौरान एक भी याचिकाकर्ता मौजूद नहीं था और पिछली दो सुनवाई में भी वे नहीं आये। ⁠ अदालत ने अपने फैसले में कहा,‘‘ लगता है कि इस मामले को आगे ले जाने में याचिकाकर्ताओं की कोई रूचि नहीं है।’’ पहलवानों ने आरोप लगाया था कि डब्ल्यूएफआई चुनाव अच्छे और पारदर्शी माहौल में नहीं हुए थे। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में कमियों और अनियमितताओं के आरोप लगाये थे। याचिकाकर्ताओं के बार बार सुनवाई के दौरान पेश नहीं होने के कारण अदालत ने याचिका रद्द कर दी।   

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर हो रही माघ मेले की भव्य व्यवस्था, विस्तार में नए रिकॉर्ड बनाने की तैयारी

लखनऊ कुंभ नगरी प्रयागराज में गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी के तट पर हर साल माघ के महीने में लगने वाले देश के सबसे बड़े सालाना धार्मिक मेले माघ मेले का काउंट डाउन शुरू हो गया है। संगम किनारे इसकी शुरुआत गंगा पूजन के साथ हुई है। इस बार के माघ मेले में देश दुनिया से करीब 15 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है । इस बार के माघ मेले की थीम होगी सुगम, सुरक्षित, स्वच्छ और सुलभ।  प्रयागराज में माघ मेले के सकुशल संपन्न होने के लिए प्रशासन व तीर्थ पुरोहितों ने संगम की धारा के बीच वेद पाठ कर माँ गंगा की आरती व पूजा-अर्चना की और मेले की सफलता के लिए गंगा पूजा कर माँ गंगा का आशीर्वाद माँगा है। इस बार का माघ मेला महाकुंभ 2025 के बाद का पहला माघ मेला है इसलिए इस बार इसमें कई अभिनव प्रयोग किए जा रहे हैं।   मंडलायुक्त प्रयागराज सौम्या अग्रवाल का कहना है कि सरकार की मंशा के अनुरूप स्वच्छ, सुगम, सुलभ, सुरक्षित एवं भव्य रूप से माघ मेले का आयोजन सम्पन्न कराया जायेगा।  मेले का आयोजन 7 सेक्टरों में 800 हेक्टेयर में भूमि का आवंटन किया जायेगा। इस बार माघ मेले में लगभग 15 करोड़ लोगो के आने का अनुमान है। उन्होंने कहा की पुराने अनुभवों से सीख लेकर इस बार कुछ नए प्रयोग भी किए जा रहे है। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के सुगमता के दृष्टिगत श्रद्धालुओं को कम से कम चलना पड़े, पार्किंग व्यवस्था अच्छी हो, भीड़ प्रबंधन को और बेहतर बनाने, टैªफिक व्यवस्था को बेहतर ढंग से लागू करने, नेटवर्किंग की अच्छी व्यवस्था सहित अन्य सभी कार्य किए जा रहे है। मंगलवार को पतित पावनी गंगा-यमुना-सरस्वती के त्रिवेणी संगम के पावन तट पर  माघ मेला 2026 के सकुशल सम्पन्न होने की मंगल कामना हेतु  वैदिक मंत्रोचार के साथ गंगा पूजन किया गया तथा मां गंगा से माघ मेला को सकुशल एवं निर्विघ्न रूप से सम्पन्न कराने की कामना की गयी। इस अवसर पर मण्डलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस आयुक्त जोगेन्द्र कुमार, जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा, मेलाधिकारी/प्रयागराज विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ऋषिराज, नगर आयुक्त सीलम साईं तेजा व अन्य अधिकारी और संत मौजूद रहे।