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देश के रक्षकों के सम्मान में आगे आएं: पीएम मोदी ने झंडा दिवस फंड में सहयोग की अपील की

नई दिल्ली उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सशस्त्र सेना झंडा दिवस के मौके पर सशस्त्र बलों के प्रति आभार व्यक्त किया और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण की सराहना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, "सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर, हम उन बहादुर पुरुषों और महिलाओं के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं जो अटूट साहस के साथ हमारे देश की रक्षा करते हैं। उनका अनुशासन, दृढ़ संकल्प और भावना हमारे लोगों की रक्षा करती है और हमारे देश को मजबूत बनाती है। उनकी प्रतिबद्धता हमारे देश के प्रति कर्तव्य, अनुशासन और समर्पण का एक शक्तिशाली उदाहरण है। आइए हम भी सशस्त्र सेना झंडा दिवस फंड में योगदान दें।" वहीं, सशस्त्र सेना झंडा दिवस के मौके पर रक्षा मंत्रालय के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को सशस्त्र सेना झंडा दिवस का लैपल पिन लगाया। जिसका नेतृत्व पूर्व सैनिक कल्याण विभाग की सचिव सुकृति लिखी ने किया। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अपनी पूरे एक महीने की सैलरी सशस्त्र सेना झंडा दिवस फंड में दान की। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने लोगों से अपील करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "सभी नागरिकों से भी अपील की कि वे स्वेच्छा से सशस्त्र सेना झंडा दिवस फंड में योगदान देकर हमारे शहीदों, विकलांग सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति अपना आभार व्यक्त करें।" जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर, मैं हमारे बहादुर सशस्त्र सेना के जवानों और शहीदों को देश के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान और सेवा के लिए दिल से धन्यवाद देता हूं। आइए, हम अपने बहादुर सैनिकों और उनके परिवारों की भलाई और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए सशस्त्र सेना झंडा दिवस फंड में दिल खोलकर दान करें।" चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल (सीडीएस) अनिल चौहान ने भी सभी भारतीय सशस्त्र बलों के सैनिकों, पूर्व सैनिकों और वीर नारियों को शुभकामनाएं दीं और भारत की रक्षा तैयारियों और राष्ट्रीय सुरक्षा में उनकी दृढ़ सेवा, अदम्य भावना और स्थायी योगदान को स्वीकार किया। केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने सोशल मीडिया पर भारतीय सशस्त्र बलों की सराहना की। उन्होंने देशवासियों से सशस्त्र सेना झंडा दिवस फंड में योगदान देने की भी अपील की।

पंजाब में CM रेस पर सिद्धू का बड़ा बयान, नवजोत कौर की गवर्नर से मुलाकात से अटकलें तेज

चंडीगढ़। कांग्रेस नेता नवजोत कौर सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रहे गहरे आंतरिक मतभेदों को खुलकर सामने ला दिया है। उन्होंने दावा किया है कि पार्टी के भीतर ही पांच नेता मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं और वे अपनी ही पार्टी के खिलाफ काम कर रहे हैं। नवजोत कौर सिद्धू ने नवजोत सिंह सिद्धू की पार्टी में वर्तमान स्थिति और भविष्य को लेकर चौंकाने वाले बयान दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया, "पांच नेता पहले से ही मुख्यमंत्री की दौड़ में हैं, जो अपनी ही पार्टी के खिलाफ काम कर रहे हैं।" उनकी यह टिप्पणी पंजाब कांग्रेस में प्रमुख नेताओं के बीच चल रहे सत्ता संघर्ष और गुटबाजी को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि नवजोत सिद्धू भावनात्मक रूप से कांग्रेस और प्रियंका गांधी से जुड़े हुए हैं, लेकिन भारी गुटबाजी के कारण उन्हें कोई भूमिका नहीं मिलेगी। उन्होंने सिद्धू के भविष्य पर टिप्पणी करते हुए कहा, "अगर कोई पार्टी हमें कोई भूमिका देती है, तो हम पंजाब को फिर से सोना बना सकते हैं। अगर कांग्रेस उन्हें मुख्यमंत्री बनाती है तो वह वापस लौट आएंगे। अन्यथा वह जीवन में खुश हैं।" नवजोत कौर सिद्धू ने चंडीगढ़ में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से अपनी मुलाकात के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तथाकथित VVIPs ने शिवालिक रेंज में बड़े पैमाने पर जमीन पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने कहा कि सुनने में आया है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान इसे वैध बनाने जा रहे हैं, जो वह नहीं कर सकते, क्योंकि यह जमीन सरकार की है। उनका दूसरा मुद्दा कानून व्यवस्था से संबंधित था, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। तीसरा मुद्दा पंजाब यूनिवर्सिटी से संबंधित था। उनका चौथा बिंदु यह था कि नए नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का नाम गुरु तेग बहादुर जी के नाम पर रखा जाना चाहिए।  

दिल्ली तक पैदल चलेंगे मेवात के 1000 बच्चे, आखिर क्या है उनकी बड़ी मांग?

 मेवात नूंह में दस दिनों तक चली वंदे सरदार एकता पदयात्रा का शनिवार को पिनगवां अनाज मंडी में समापन हो गया। यह यात्रा सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती, हसन खां मेवाती के 500वें बलिदान वर्ष पर निकाली गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मेवात बुलाने के लिए एक हजार बच्चे न्योता देने के लिए अब पैदल दिल्ली जाएंगे। समापन समारोह में उद्योग जगत और सामाजिक संगठनों से लोगों ने हिस्सा लिया। समारोह में पहुंचे मुख्यमंत्री के मीडिया कोऑर्डिनेटर मुकेश वशिष्ठ, उद्योगपति सुनील सिंगला, अजय शर्मा, स्वराज भाटी और तरुण आचार्य आदि ने कहा कि शहीद हसन खां मेवाती का संदेश केवल मेवात के लिए नहीं, पूरे भारत के लिए है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा एकता, सद्भाव और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने का प्रयास है और इसे हर स्तर पर आगे बढ़ाना होगा। समारोह में लोगों ने यात्रा के उद्देश्य की खुलकर सराहना की और कहा कि मेवात की आवाज अब दबने वाली नहीं है। हजारों लोगों ने बलिदान दिया इतिहासकार, शिक्षाविदों के मुताबिक स्वतंत्रता संग्राम में मेवात के लोगों का काफी योगदान रहा। मुगलकाल से ही मेवाती देश के लिए जंग लड़ते रहे। शहीद हसन खां मेवाती के बलिदान के बाद भी देश पर मर मिटने वालों का सिलसिला जारी रहा। इतिहासकारों का कहना है कि वर्ष 1857 और 1858 गजट नोटिफिकेशन में शहीदों में हजारों मेवातियों के नाम दर्ज हैं। रूपडाका, पिंगवा, नगली,घासेड़ा, पुन्हाना रायसीना, हरिहेड़ा, निहारिका, चितोड़ा, हरचंदपुर, अलीपुर आदि गांवों में भी लोग शहीद हुए थे। शिक्षाविद सिद्दीक अहमद का कहना है कि मेवात के लोगों का स्वतंत्रता संग्राम में काफी योगदान रहा। हजारों लोगों ने वतन के लिए बलिदान दिया। इस तरह की यात्रा जारी रहें ताकि लोगों को गुमनाम शहीदों के बारे में जानकारी मिलती रही। पारंपरिक वेशभूषा और लोकगीतों के साथ स्वागत समापन कार्यक्रम में मेवाती संस्कृति की झलक साफ नजर आई। लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा और लोकगीतों के साथ अतिथियों का स्वागत किया। प्रवक्ता नदीम खान ने बताया कि यह यात्रा नई सोच और नई दिशा का प्रतीक है और आगे भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री आजाद मोहम्मद, जान मोहम्मद, सुरेंद्र पिंटू, वसीम अकरम, यादराम गर्ग, इमरान सरपंच, जसवंत गोयल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। मेवात को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार की जरूरत यात्रा के अध्यक्ष जफरुद्दीन ने कहा कि मेवात को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार की विशेष जरूरत है। केंद्रीय यूनिवर्सिटी खुलने से शिक्षा का स्तर उठेगा। उद्योग आने से युवाओं को रोजगार मिलेगा। वक्ताओं ने कहा कि मेवात की मांगों को पूरा करवाने के लिए 2026 में 1000 युवाओं के साथ पैदल चलकर प्रधानमंत्री को मेवात आने का न्योता देंगे। उन्होंने कहा कि मेवात के हितों और विकास के लिए यह प्रयास लगातार जारी रहेगा। समाजसेवी फजरुद्दीन बेशर ने कहा कि मेवात के युवा आज एकजुट हैं और बड़े बदलाव की दिशा में आगे बढ़ने के लिए तैयार खड़े हैं। कार्यक्रम में आए लोगों ने यात्रा के उद्देश्य में अपना सहयोग देने का संकल्प भी लिया।  

भारत के गद्दार कौन? बाबर महिमामंडन पर रामदेव का बड़ा हमला

नई दिल्ली  पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूँ कबीर ने बाबरी मस्जिद का शिलान्यास करके विवाद खड़ा कर दिया है। देश भर से इस मामले को लेकर कई तरह की प्रतिक्रिया आ रही हैं। योग गुरु बाबा रामदेव ने भी इस पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि बाबर इस देश का नहीं था, जो लोग भी उसका गुणगान करते हैं वह भारत के गद्दार हैं। गौरतलब है कि यह शिलान्यास ठीक 6 दिसंबर को किया गया, इसी तारीख को 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद को कारसेवकों ने ढहा दिया था। बाबा रामदेव ने कहा कि 6 दिसंबर का दिन गुलामी के प्रतीकों को हटाने का दिन है। भारत की जनता जाग चुकी है, यह किसी भी विदेशी हमलावर का महिमामंडन नहीं होने देगी। उन्होंने कहा, "भारत बाबर का देश नहीं है। यह महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज, चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु, भगत सिंह, सनातन और भगवान शिव का देश है। बाबर एक विदेशी आक्रमणकारी था, जो भी लोग उसके नाम को महान बताना चाहते हैं, वह भारत के गद्दार हैं। ऐसे लोगों के मनसूबे कभी पूरे नहीं होंगे।" बाबा रामदेव ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, "हम इस्लाम या मुसलमानों के खिलाफ नहीं है। क्योंकि बाबर न तो इस्लाम का अनुयायी था और न ही मुसलमान था। वह सिर्फ एक क्रूर हमलावर था। उसका महिमामंडन नहीं होना चाहिए।" गौरतलब है कि यह पूरा घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूँ कबीर की वजह से शुरु हुआ। कबीर ने शनिवार 6 दिसंबर के दिन मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद का शिलान्यास किया। इसके विरोध का जवाब देते हुए कबीर ने कहा कि देश में धार्मिक स्थल बनाने का अधिकार संविधान देता है, ऐसे में वह कोई भी असंवैधानिक काम नहीं कर रहे हैं। शिलान्यास के बाद सभा को संबोधित करते हुए कबीर ने कहा, "मैं कुछ भी असंवैधानिक काम नहीं कर रहा हूँ। कोई मंदिर बना सकता है, कोई चर्च बना सकता है, तो मैं मस्जिद क्यों नहीं बना सकता? कहा जा रहा है कि हम बाबरी मस्जिद नहीं बना सकते। यह कहीं लिखा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया कि हिंदुओं ने बाबरी मस्जिद को ढहाया था। हिंदुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए वहाँ मंदिर बनाने का निर्णय हुआ। अब हम देखते हैं कि सागरदिघी में राम मंदिर का शिलान्यास हो रहा है। लेकिन संविधान हमें मस्जिद बनाने की अनुमति देता है। इस मुद्दे को लेकर उनके ऊपर हुई कानूनी कार्रवाई का जिक्र करते हुए कबीर ने कहा कि ऐसी चुनौतियां मस्जिद निर्माण को रोक नहीं पाएंगी। उन्होंने कहा, "मेरे खिलाफ पांच मामले दर्ज हुए हैं, लेकिन जिसे अल्लाह का साथ हो, उसे कोई रोक नहीं सकता। अदालत ने भी साफ कहा है कि भारत के संविधान में मस्जिद बनाने का अधिकार है। कबीर ने कहा कि इस मस्जिद के लिए 300 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। यह तय किया गया है कि इस मस्जिद में एक अस्पताल, अथिति गृह और एक सभा भवन का निर्माण किया जाएगा।  

‘शांत, लेकिन घातक’ अवतार में यशस्वी जायसवाल, वनडे तरकश में फिट बैठा नया तीर

नई दिल्ली  सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ यहां तीसरे और अंतिम वनडे मैच में संयम और आक्रमण की नई मिसाल पेश करके भारत की वनडे टीम के तरकश में एक और तीर जोड़ दिया। जायसवाल ने पहले ओवर में ही मार्को यानसन की ऑफ स्टंप के बाहर की गेंद को छोड़कर दिखाया कि वह किसी तरह का बेमतलब का जोखिम उठाना नहीं चाह रहे हैं। जायसवाल ने इस गेंद पर कट करने की कोशिश नहीं की और उसे क्विंटन डिकॉक के पास जाने दिया।   दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीसरे वनडे में यह एक महत्वपूर्ण क्षण था, जिसमें भारत ने नौ विकेट से जीत हासिल की। यह जायसवाल की बदली हुई मानसिकता का पहला संकेत था। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि वह अपने आक्रामक तेवरों पर लगाम लगाए रखेंगे मुख्य सलामी बल्लेबाज तथा टीम के नियमित कप्तान शुभमन गिल के चोटिल होने के कारण उन्हें जो मौका मिला है, उसका पूरा फायदा उठाएंगे। जायसवाल ने रांची और रायपुर में खेले गए पहले दो वनडे में शुरू से ही गेंदबाजों पर हावी होने की कोशिश की, लेकिन इसमें नाकाम रहे और जल्दी आउट हो गए। हालांकि, वाइजैग में उन्होंने गेंदबाजों पर हावी होने के लिए किसी तरह की जल्दबाजी नहीं दिखाई और धैर्य से काम लिया। ऐसा लग रहा था कि अब उन्हें वनडे क्रिकेट की लय बेहतर समझ आ गई है। भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने भी इस पर बात की। गंभीर ने मैच के बाद कहा, ‘‘जब आप लाल गेंद वाले क्रिकेट से सफेद गेंद वाले क्रिकेट में आते हैं तो आपको लगता है कि आपको आक्रामक बल्लेबाजी करनी होगी, लेकिन आपको आक्रामक होकर खेलने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अगर आप वनडे प्रारूप को 30 ओवर और 20 ओवर में बांट दें, तो काम बहुत आसान हो जाएगा।’’ उन्होंने आगे कहा, ‘‘अगर आप वनडे में पहले 30 ओवर धैर्य के साथ खेलते हैं और जायसवाल में जो क्षमता है उसे देखते हुए अगर वह 30 ओवर तक बल्लेबाजी करता है तो वह शतक लगा सकता है। इसके बाद भी आपके पास 20 ओवर बचे होते हैं जिन्हें आप टी20 मैच की तरह खेल सकते हैं। जायसवाल का वनडे में यह केवल चौथा मैच था और जैसे ही उन्हें समझ आ जाएगा कि वनडे क्रिकेट में उन्हें किस गति से बल्लेबाजी करनी है तो वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने में सफल रहेंगे।’’ जायसवाल के पहले वनडे शतक ने गंभीर के विचार को पुष्ट किया। इस 23 वर्षीय खिलाड़ी ने अपने पहले 50 रन 75 गेंद में बनाए, लेकिन अगले 50 रन उन्होंने केवल 35 गेंद में ठोक दिए थे। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने इस दौरान अपना स्वाभाविक खेल खेला। अगले कुछ महीनों में जायसवाल के लिए धैर्य सबसे बड़ा सहयोगी होगा, क्योंकि उन्हें नहीं पता होगा कि वनडे में अगला मैच कब खेलेंगे। कप्तान गिल जनवरी में न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली सीरीज के लिए फिट हैं। उसके बाद भारत जुलाई 2026 में इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली सीरीज के दौरान वनडे मैच खेलेगा। गिल और केएल राहुल के चोटिल होने की स्थिति में ही जायसवाल इन मैच में खेल पाएंगे। कब खेलेंगे यशस्वी? गिल और संभवतः श्रेयस अय्यर भी अगले महीने न्यूजीलैंड के खिलाफ एकदिवसीय सीरीज के लिए वापसी करेंगे, जबकि जायसवाल वर्तमान में राष्ट्रीय टीम की टी20 से जुड़ी योजना में शामिल नहीं हैं। इसलिए उन्हें शायद इंतजार ही करना होगा, लेकिन गंभीर भविष्य में बड़े टूर्नामेंटों के लिए खिलाड़ियों का एक मजबूत पूल बनाने की व्यापक योजना पर विचार कर रहे हैं। गंभीर ने कहा, ‘‘हम जब भी संभव होगा हम उन्हें मौका देने की कोशिश करेंगे। हमें अब भी खिलाड़ियों का एक पूल तैयार करना है। हम 2027 में होने वाले विश्व कप से पहले लगभग 20 से 25 खिलाड़ियों को तैयार करना चाहते हैं। निश्चित तौर पर जब कप्तान और उप कप्तान की वापसी होगी तो उनको प्राथमिकता दी जाएगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जायसवाल ने अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें खुद को प्रेरित रखना होगा क्योंकि जब भी उन्हें मौका मिले, उसके लिए तैयार रहना होगा और उसका पूरा फायदा उठाना होगा। हम जानते हैं कि वह कितने बेजोड़ खिलाड़ी हैं और टेस्ट क्रिकेट में उनका प्रदर्शन शानदार रहा है।’’  

कौन हैं प्रदीप शर्मा? पूर्व IAS अधिकारी को ED केस में 5 साल की जेल

नई दिल्ली एक विशेष अदालत ने रिटायर आईएएस अधिकारी प्रदीप शर्मा को मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) के एक मामले में शनिवार को पांच साल कैद की सजा सुनाई है। उन पर 50,000 का जुर्माना भी लगाया गया है। यह मामला 2003 से 2006 के दौरान कच्छ के जिला कलेक्टर के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान रियायती दरों पर सरकारी भूमि के आवंटन से जुड़ा है। विशेष PMLA जज केएम सोजित्रा ने प्रदीप शर्मा को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 3 और 4 के तहत दोषी ठहराया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जांच के दौरान जब्त की गई संपत्तियां केंद्र सरकार द्वारा जब्त रहेंगी। ईडी ने आरोप लगाया था कि प्रदीप शर्मा ने मानदंडों का उल्लंघन करते हुए वेल्सपन इंडिया लिमिटेड (Welspun India Limited) को रियायती दरों पर सरकारी भूमि का एक बड़ा हिस्सा स्वीकृत किया था। अभियोजन पक्ष ने कहा कि शर्मा को कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए अवैध परितोषण मिला, जिसमें उनकी पत्नी के खाते में 29.5 लाख जमा किए गए थे, जो कि एक अमेरिकी नागरिक हैं। ईडी के आरोप के अनुसार, प्रदीप शर्मा ने वेल्सपन इंडिया और उसकी समूह कंपनियों से प्राप्त अपराध की आय को लॉन्डर करने के लिए अपनी पत्नी के बैंक खाते का इस्तेमाल किया। इन फंडों का उपयोग कथित तौर पर एक आवास ऋण चुकाने और कृषि भूमि खरीदने के लिए किया गया था। ईडी के अनुसार, रिश्वत की राशि को चैनल करने के लिए 2004 से 2007 के बीच शर्मा की पत्नी को वैल्यू पैकेजिंग प्राइवेट लिमिटेड में 30% भागीदार बनाया गया था। प्रदीप शर्मा के खिलाफ बीते कुछ वर्षों में विभिन्न एजेंसियों द्वारा कई मामले दर्ज किए गए हैं। मार्च 2010 में सीआईडी राजकोट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज की। उन पर सरकारी खजाने को 1.20 करोड़ का नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा। सितंबर 2010 में सीआईडी ने IPC के तहत एक और मामला दर्ज किया। इसके बाद मार्च 2012 में ईडी के अहमदाबाद जोनल कार्यालय ने 2010 की FIR के आधार पर PMLA के तहत एक आपराधिक मामला दर्ज किया। सितंबर 2014 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। आरोप लगाया कि उन्होंने वेलस्पन समूह के लिए कृषि भूमि को गैर-कृषि दर्जा देने के लिए अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया, यह जानते हुए कि उनकी पत्नी एक संबंधित कंपनी में भागीदार थीं। जुलाई 2016 में प्रदीप शर्मा को ED ने गिरफ्तार किया। मार्च 2018 में उन्हें जमानत मिल गई। प्रदीप शर्मा को अप्रैल 2025 में एक अन्य मामले में भी दोषी ठहराया गया था। भुज कोर्ट ने 2004 में एक निजी कंपनी (सॉ पाइप्स प्राइवेट लिमिटेड) को सरकारी भूमि के आवंटन में अनियमितताओं से जुड़े 2011 के एक मामले में शर्मा को पांच साल के कठोर कारावास और 10,000 जुर्माने की सजा सुनाई थी। शर्मा वर्तमान में जेल में हैं।  

गंभीर की कड़ी चेतावनी: स्प्लिट कोचिंग की चर्चा करने वालों पर कसा तंज

 नई दिल्ली टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर ने शनिवार को सोशल मीडिया पर चल रही स्पिलिट कोचिंग की थ्योरीज पर कड़ी आपत्ति जताई। कोच गंभीर ने उन बातों को 'हैरान करने वाला' बताया। यहां तक कि इस तरह की राय देने वालों से गौतम गंभीर ने 'अपने दायरे में रहने' को कहा। साउथ अफ्रीका के खिलाफ भारत की हालिया 0-2 टेस्ट सीरीज हार के बाद एक IPL टीम के मालिक सहित कुछ प्रभावशाली क्रिकेट हस्तियों ने BCCI से रेड-बॉल और व्हाइट-बॉल फॉर्मेट के लिए अलग-अलग कोच नियुक्त करने पर विचार करने को कहा था। तमाम लोगों द्वारा साझा किए गए स्पिलट कैप्टेंसी के विचार से गौतम गंभीर खफा दिखे। गौतम गंभीर ने तीन मैचों की वनडे सीरीज को 2-1 से जीतने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "देखिए, बहुत सारी बातें हुईं, क्योंकि नतीजे हमारे फेवर में नहीं रहे (टेस्ट सीरीज में), लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि किसी भी मीडिया या जर्नलिस्ट ने एक बार भी यह नहीं लिखा कि हमारा पहला टेस्ट मैच (कोलकाता में) कप्तान (शुभमन गिल) के बिना खेला गया था, जिसने दोनों पारियों में बैटिंग नहीं की (गर्दन की चोट की वजह से)।" गंभीर ने आगे कहा कि ऐसे ओपिनियन मेकर्स को ऐसी बातें कहने से बचना चाहिए जिनका ऑन-फील्ड क्रिकेट मामलों से कोई सीधा कनेक्शन न हो। गंभीर ने कहा, "कुछ लोगों ने ऐसी बातें भी कहीं, जिनका क्रिकेट से कोई लेना-देना नहीं था। एक IPL टीम के मालिक (दिल्ली कैपिटल्स के पार्थ जिंदल ने X पर) ने भी स्प्लिट कोचिंग के बारे में लिखा। तो यह हैरानी की बात है। लोगों का अपने दायरे में रहना बहुत जरूरी है, क्योंकि अगर हम किसी के दायरे में नहीं जाते, तो उन्हें भी हमारे दायरे में आने का कोई हक नहीं है।" गौतम गंभीर ने आगे पत्रकारों को भी नहीं बख्शा और कहा, "मैं प्रेस कॉन्फ्रेंस में बहाने नहीं बनाता। इसका मतलब यह नहीं है कि आप दुनिया या देश के सामने फैक्ट्स न दिखाएं। जब आप एक ट्रांजिशन से गुजरते हैं और जब आप अपने कप्तान को खो देते हैं, जो ऐसी टीम (SA) के खिलाफ रेड-बॉल क्रिकेट में आपका मेन बैट्समैन भी है।"  

जिंदल की बेटी की शादी बनी पॉलिटिकल-ग्लैम पार्टी, सांसदों और कंगना ने जमकर लगाए ठुमके

हिसार उद्योगपति से राजनेता बने नवीन जिंदल की बेटी के विवाह समारोह के जश्न के दौरान भाजपा सांसद कंगना रनौत, तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा और NCP (SP) सांसद सुप्रिया सुले को एक साथ डांस करते हुए देखा गया। इस तिकड़ी ने फिल्म 'ओम शांति ओम' के लोकप्रिय बॉलीवुड गाने पर प्रस्तुति दी। वायरल हुए वीडियो क्लिप में कंगना रनौत, महुआ मोइत्रा और सुप्रिया सुले के साथ 'दीवानगी दीवानगी' गाने पर डांस करती दिख रही हैं, जबकि नवीन जिंदल भी मंच पर हैं। अभिनेता से राजनेता बनीं कंगना रनौत ने इस सप्ताह की शुरुआत में अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के साथ डांस अभ्यास सत्र की पर्दे के पीछे की तस्वीरें भी पोस्ट की थीं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें उन्हें नवीन जिंदल, महुआ मोइत्रा और सुप्रिया सुले के साथ संगीत कार्यक्रम के लिए रिहर्सल करते हुए देखा गया था। उन्होंने पोस्ट को कैप्शन दिया था, "साथी सांसदों के साथ फिल्मी पल हा हा। नवीन जिंदल जी की बेटी की शादी के संगीत के लिए रिहर्सल कर रही हूं।" नवीन जिंदल की बेटी यशस्विनी जिंदल की 5 दिसंबर को शादी संपन्न हुई है। तीनों सांसदों ने जिस संगीत समारोह के लिए रिहर्सल की थी, वह 4 दिसंबर को आयोजित किया गया था। यशस्विनी ने शाश्वत सोमानी से शादी की, जो जाने-माने उद्योगपति संदीप सोमानी और सुमिता के बेटे हैं। यह विवाह एक भव्य समारोह में आयोजित हुआ, जहां विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की उपस्थिति और उनकी प्रस्तुतियों ने इस आयोजन को हाई-प्रोफाइल बना दिया।  

ममता बनर्जी का हमला: ‘नफरत की राजनीति को बंगाल में जगह नहीं’—बाबरी मस्जिद मुद्दे पर प्रतिक्रिया

मुर्शिदाबाद पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के शिलान्यास ने प्रदेश की राजनीति को तेज कर दिया है। यह काम सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूँ कबीर द्वारा किया गया है, ऐसे में भले ही टीएमसी ने उन्हें निलंबित कर दिया है लेकिन भाजपा का निशाना सीधा ममता बनर्जी पर ही है। इसी खींचतान के बीच शनिवार 6 दिसंबर को संहति दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बंगाल की सदियों पुरानी सह-अस्तित्व की परंपरा को रेखांकित किया और एकता और सद्भाव की आवश्यकता पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया साइट 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए याद दिलाया कि बंगाल की पहचान अनेकतावाद में निहित है। बनर्जी ने लिखा, "मैं संहति दिवस/संप्रीति दिवस पर सभी को हार्दिक बधाई देती हूँ। बंगाल एकता की धरती है, टैगोर, नज़रुल, रामकृष्ण और विवेकानंद की धरती है। यह मिट्टी कभी भी विभाजनकारी ताकतों के सामने नहीं झुकी है और न कभी झुकेगी।" गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस छह दिसंबर को बाबरी मस्जीद गिराए जाने की याद में संहति दिवस मनाती है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि राज्य में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन और बौद्ध हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम अपनी खुशियाँ साझा करते हैं क्योंकि हमारा मानना है कि धर्म व्यक्तिगत है, लेकिन त्योहार सभी के लिए हैं। सांप्रदायिक नफरत की आग भड़काने और देश को नष्ट करने वालों के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी। आइए, हम सब शांति और सद्भाव बनाए रखें।" गौरतलब है कि मुख्यमंत्री का यह संदेश ऐसे समय में आया जब पार्टी के निष्कासित विधायक हुमायूँ कबीर मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की शैली में एक मस्जिद की आधारशिला रख रहे थे। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम का उद्देश्य मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे अल्पसंख्यक-बहुल जिलों में अल्पसंख्यक वोट बैंक को मजबूत करना है। इस घटनाक्रम से राज्य में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थक और तृणमूल कांग्रेस के समर्थक एक दूसरे के आमने सामने आकर खड़े हो गये हैं। दोनों पक्षों के इस रूख से राज्य के पहले से तनावपूर्ण सांप्रदायिक परिस्थितियों में तनाव और गहरा हो गया है। भाजपा समर्थक संगठन भी अपनी शक्ति प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। रविवार को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में एक विशाल धार्मिक समागम आयोजित किया जा रहा है, जहाँ लगभग पाँच लाख लोगों के एकजुट होकर भगवद्गीता का पाठ करने की उम्मीद है। विशेषज्ञ इस कार्यक्रम को आगामी विधानसभा चुनावों के पहले हिंदू मतदाताओं को मजबूत करने के लिए एक बड़े प्रयास के रूप में देख रहे हैं। 'पंच लक्ष कंठे गीतापाठ' (पाँच लाख कंठों से गीता पाठ) नामक यह कार्यक्रम विभिन्न धार्मिक संगठनों की एक छत्र संस्था सनातन संस्कृति संसद द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इस सामूहिक पाठ को बंगाल में अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक पाठ बताया जा रहा है। आयोजकों ने बताया कि योग गुरु बाबा रामदेव, बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री और पद्म भूषण से सम्मानित साध्वी ऋतंभरा मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेने वाले हैं। बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने भी इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति की पुष्टि की है। आयोजकों ने हालांकि इस कार्यक्रम को विशुद्ध रूप से धार्मिक पहल बताया है, लेकिन भाजपा की प्रमुख हस्तियों की भागीदारी ने इसके राजनीतिक उद्देश्य के बारे में अटकलों को जन्म दिया है। सूत्रों ने पुष्टि की कि भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी जैसे वरिष्ठ नेताओं के इस आयोजन में शामिल होने की संभावना है। बाबरी मस्जिद की आधारशिला रखे जाने और भाजपा के व्यापक गीता पाठ कार्यक्रम दोनों के लगभग साथ-साथ होने से बंगाल का राजनीतिक संघर्ष तीव्र हो गया है और प्रत्येक खेमा अपने मूल मतदाताओं को सक्रिय करने के लिए धार्मिक प्रतीकों का उपयोग कर रहा है, क्योंकि जल्द ही राज्य में चुनाव होने वाले हैं। तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर यूनीवार्ता को बताया, "शांति, एकता और साझा सांस्कृतिक जुड़ाव के लिए मुख्यमंत्री का आह्वान बढ़ते ध्रुवीकरण को शांत करने और राज्य के उस दीर्घकालिक विश्वास को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से है कि सामाजिक सामंजस्य ही बंगाल की पहचान को परिभाषित करता है, न कि धार्मिक टकराव।"  

नाइटक्लब में लगी आग ने छीनी 14 कर्मचारियों की जान, गोवा हादसे का भयावह वीडियो वायरल

गोवा गोवा के नाइटक्लब में भीषण आग लगने की वजह से कम से कम 25 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो गई है। इनमें से 14 नाइटक्लब में काम करने वाले लोग थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घटना पर दुख व्यक्त किया है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘गोवा के अरपोरा में आग लगने की घटना बहुत दुखद है। मेरी संवेदनाएं उन सभी लोगों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजन को खो दिया है। घायल लोगों के जल्द से जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं।’ उन्होंने कहा, ‘‘गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत जी से स्थिति के बारे में बात की। राज्य सरकार प्रभावित लोगों की हर संभव मदद कर रही है।’’ प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा, ‘‘गोवा के अरपोरा में हुए हादसे में मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के परिजन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) से दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे।’ ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ नामक नाइट क्लब में शनिवार आधी रात के बाद आग लग गई। यह नाइट क्लब राज्य की राजधानी पणजी से लगभग 25 किलोमीटर दूर अरपोरा में स्थित है। सावंत ने बताया कि मारे गए अधिकतर लोग क्लब की रसोई में काम करते थे। उन्होंने बताया कि मृतकों में तीन महिलाएं और ‘‘तीन से चार पर्यटक’’ भी शामिल हैं। उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि 25 लोगों में से तीन की मौत जलने जबकि अन्य की मौत दम घुटने से हुई। मुख्यमंत्री सावंत ने कहा, ‘‘हम क्लब प्रबंधन और उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे जिन्होंने सुरक्षा मानदंडों के उल्लंघन की अनदेखी की।’’ सावंत ने कहा, ‘‘तटीय राज्य में यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना ऐसे समय में हुई है जब बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं।’’ मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हम घटना की गहन जांच करेंगे और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।’’ गोवा पुलिस प्रमुख आलोक कुमार ने बताया कि आग सिलेंडर फटने के कारण लगी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थानीय विधायक माइकल लोबो ने कहा, ‘‘परिसर से सभी 25 शव बरामद कर लिए गए हैं और उन्हें बम्बोलिम में स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया है।’’ लोबो ने संवाददाताओं को बताया कि अग्निशमन विभाग और पुलिस की टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंचीं और रात भर बचाव कार्य में लगी रहीं। उन्होंने कहा कि अधिकारी सभी क्लब का अग्नि सुरक्षा ऑडिट करेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। विधायक ने कहा कि कलंगुटे पंचायत सोमवार को सभी नाइट क्लब को नोटिस जारी कर अग्नि सुरक्षा अनुमतियां दिखाने करने के लिए कहेगी। उन्होंने कहा कि जिन क्लब के पास आवश्यक अनुमतियां नहीं हैं, उनके लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे।