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वित्त मंत्री ने कहा: कस्टम्स सिस्टम का ओवरहॉल जरूरी, व्यापार और आयात-निर्यात प्रक्रिया होगी सरल

नई दिल्ली  इनकम टैक्ससेशन में बदलाव के बाद अब सरकार का अगला फोकस कस्टम ड्यूटी सिस्टम में बदलाव का है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट (HTLS) 2025 में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बजट 2026 से पहले उनकी अगली बड़ी प्राथमिकता कस्टम्स विभाग में व्यापक सुधार करना है। उन्होंने इसे अपना नेक्स्ट बिग क्लीन-अप असाइनमेंट बताया। बातचीत के दौरान उन्होंने देश की आर्थिक चुनौतियों, सुधारों और आगामी लक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा की। क्या कहा वित्त मंत्री ने? आगामी बजट के संदर्भ में वित्त मंत्री ने कहा कि कस्टम्स सिस्टम का ओवरहॉल अब आवश्यक हो गया है। इससे न केवल व्यापार सुगमता बढ़ेगी बल्कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और आयात-निर्यात प्रक्रिया और पारदर्शी व सरल होगी। उन्होंने संकेत दिया कि इस दिशा में बड़े कदम जल्द ही दिखने वाले हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि कस्टम्स विभाग को भी उसी तरह पारदर्शी और आधुनिक बनाया जाए, जैसा बदलाव सरकार ने आयकर प्रशासन में फेसलेस सिस्टम के रूप में लागू किया था। उन्होंने कहा कि पहले आम धारणा थी कि आयकर की दरें समस्या नहीं हैं। असली परेशानी टैक्स प्रशासन के तरीके से होती है, जो कभी-कभी दर्दनाक और कष्टदायक बन जाता था। इसी वजह से टैक्स टेररिज्म जैसी नकारात्मक अभिव्यक्ति प्रचलन में आई। लेकिन अब ऑनलाइन और फेसलेस सिस्टम ने आयकर प्रक्रिया को काफी सहज बनाया है। वित्त मंत्री ने बताई सरकार की सफलताएं इसके साथ ही निर्मला सीतारमण ने समिट में उन प्रमुख बाधाओं का भी जिक्र किया जिन्हें सरकार ने पिछले वर्षों में पार किया है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी के बाद अर्थव्यवस्था को संभालना, वैश्विक युद्धों के कारण खाद्यान्नों पर पड़ा असर, सीमाई तनाव, चुनावी वर्ष में आवश्यक सरकारी खर्च और जम्मू-कश्मीर के बैंकिंग तंत्र व अर्थव्यवस्था को पुनर्स्थापित करना जैसी बड़ी चुनौतियों से सफलतापूर्वक निपटा गया। उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले के बाद जिस तरह से जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा किया गया, वह सरकार की प्रतिबद्धता का उदाहरण है। आपको बता दें कि समिट में राजनीति और मनोरंजन जगत की बड़ी हस्तियां शामिल होने वाली हैं।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने राज्यसभा में किया एलान, MSP पर किसानों को मिलेगी कानूनी गारंटी की दिशा में काम

भोपाल  राज्यसभा में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का मुद्दा छाया रहा। कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए कृषि उपज की एमएसपी पर कानूनी गारंटी की मांग उठाई, तो केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पलटवार करते हुए दावा किया कि “किसानों का कल्याण मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।” केंद्र का दावा, दालों की 100% खरीद होगी कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक ने पूछा कि जब किसान एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, तो सरकार की क्या योजना है? सवालों के जवाब में शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि सरकार पहले ही लागत पर 50% लाभ जोड़कर एमएसपी तय कर रही है और अब तुअर, मसूर और उड़द जैसी दलहन फसलों की शत-प्रतिशत खरीद सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि यूपीए सरकार ने तो 50% लाभांश देने के फार्मूले को ही “मंडी में विकृति पैदा करने वाला” बताया था, जबकि मोदी सरकार किसानों के हित में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू कर रही है। राज्य सरकारों पर ढिलाई का आरोप चौहान ने कई राज्यों पर एमएसपी पर खरीद में उदासीनता बरतने का आरोप लगाया। उन्होंने विशेष तौर पर कर्नाटक का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य की कांग्रेस सरकार ने 2024-25 के लिए जितनी तुअर खरीदने की अनुमति ली, उतनी खरीद भी नहीं की। कृषि मंत्री ने साफ कहा कि यदि कोई राज्य सरकार दालों की खरीद नहीं करती है, तो केंद्र सरकार नैफेड जैसी एजेंसियों के माध्यम से सीधे खरीद करेगी, ताकि किसानों को नुकसान न उठाना पड़े। कांग्रेस का पलटवार मुकुल वासनिक ने आरोप लगाया कि सरकार उनके सवालों का सीधा जवाब नहीं दे रही। उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में 1 लाख 12 हजार किसानों ने आत्महत्या की, जो ग्रामीण संकट का गंभीर संकेत है। जब खरीद प्रक्रिया के फार्मूले पर दोबारा प्रश्न पूछा गया, तो चौहान ने जवाब दिया कि “किसानों का कल्याण ही हमारा एकमात्र फार्मूला है।”  

मुरैना की कैलारस शुगर मिल जल्द होगी शुरू, जौरा विधायक ने विधानसभा में उठाया मुद्दा

मुरैना मुरैना की राजनीति  दिन फिर गरमा गई, जब जौरा से कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने विधानसभा में सरकार को उनके ही वादों की याद दिलाई. उन्होंने नारा लगाते हुए कहा, ''किसान तैयार, जमीन तैयार, गन्ना तैयार…तो फिर कैलारस शक्कर कारखाना कब तैयार होगा?'' मुख्यमंत्री से लेकर कृषि मंत्री तक कई बार भरोसा दिलाया गया कि यदि किसान गन्ना उगाएंगे तो कारखाना शुरू होगा. अब तो 10 हजार किसान 50 हजार हेक्टेयर में गन्ना उगाने को तैयार खड़े हैं. विधानसभा में उठाया शुगर मिल का मुद्दा पंकज उपाध्याय ने सरकार से सीधा सवाल किया है, ''जब किसान वादा निभा रहे हैं, तो सरकार कब निभाएगी? विधानसभा में उन्होंने कैलारस शक्कर कारखाना चालू करो, किसानों को उनका हक दो का नारा बुलंद किया.'' मुरैना जिले के किसानों की सालों पुरानी मांग कैलारस शुगर मिल को चालू कराने की, एक बार फिर पूरे जोर से उठ खड़ी हुई है. जौरा विधानसभा से कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने शुक्रवार को विधानसभा में इस मुद्दे को अत्यंत दबंग अंदाज में उठाते हुए सरकार को उसके ही वादों का आईना दिखा दिया. 10 हजार किसानों की जगी उम्मीद उनके सवाल ने पूरे जिले के 10 हजार किसानों के बीच फिर से नई उम्मीद जगा दी है, जो वर्षों से अपने हक और उद्योग के पुनर्जीवन का इंतज़ार कर रहे हैं. विधानसभा के प्रश्नकाल में विधायक उपाध्याय ने सरकार को स्पष्ट कहा कि, ''मुरैना के 10 हजार किसान 50 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन यदि सरकार समय पर अपना वादा नहीं निभाती तो यह तैयारियां व्यर्थ हो जाएंगी.'' उन्होंने बताया कि, ''किसान लंबे समय से आंदोलन कर चुके हैं, धरना दे चुके हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि सरकार सिर्फ आश्वासन न दे, बल्कि वास्तविक कदम उठाए.'' कैलारस शुगर मिल अर्थव्यवस्था की कुंजी विधायक पंकज उपाध्याय ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने 27 नवंबर को मुरैना दौरे के दौरान घोषणा की थी कि यदि किसान गन्ना उगाएंगे तो शुगर मिल चालू की जाएगी. इसके साथ ही कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर भी कई बार वही भरोसा दिला चुके हैं. उपाध्याय ने कहा कि, ''जब प्रदेश के शीर्ष नेता खुद किसानों को आश्वासन दे चुके हैं, तो अब देरी का सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने जोर देकर कहा कि कैलारस शुगर मिल का ताला खुलना सिर्फ किसानों की जरूरत नहीं, बल्कि पूरे जिले की अर्थव्यवस्था के पुनर्जीवन की कुंजी है. लाइनों में लगे धक्के खा रहे किसान जौरा विधायक पंकज उपाध्याय ने विधानसभा में कैलारस शुगर मिल के मुद्दे के साथ-साथ मुरैना जिले में खाद की भारी किल्लत का मामला भी जोरदार तरीके से उठाया. उन्होंने कहा कि, ''जिले का किसान खाद के लिए लाइन में खड़ा होकर लाठी–डंडे तक खा रहा है, फिर भी उसे पर्याप्त खाद नहीं मिल पा रही. वहीं कृषि मंत्री बार-बार खाद उपलब्ध होने का दावा करते हैं, जो जमीन की हकीकत से बिल्कुल उलट है.'' उपाध्याय ने कहा कि, ''किसान गन्ना उगाने को तैयार बैठा है, लेकिन सरकार न तो शुगर मिल शुरू कर रही है और न ही खाद की समस्या दूर कर रही है.'' उन्होंने विधानसभा में साफ शब्दों में मांग की कि मुरैना जिले के किसानों को तत्काल खाद उपलब्ध कराई जाए और उनकी परेशानियों का समाधान किया जाए. विधानसभा में उठे इस प्रखर मुद्दे ने किसानों को एक बार फिर आंदोलन की ऊर्जा और उम्मीद दोनों दे दी हैं. अब मुरैना की जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार आखिर कब वह ऐतिहासिक फैसला लेगी, जिसका इंतज़ार वर्षों से किया जा रहा है. अशोक तिवारी किसान नेता मध्य प्रदेश किसान सभा के अध्यक्ष एवं शक्कर कारखाना चलाओ संघर्ष समिति के सदस्य अशोक तिवारी ने बताया कि, ''जौरा विधायक की मांग बिलकुल सही है, क्योंकि इस शक्कर कारखाने से 20 हजार किसान और 1500 श्रमिक जुड़े हुए थे. हम तो कई वर्षो से इस शक्कर कारखाना चालू कराने को लेकर संघर्ष कर रहे हैं. चालू होने पर इस क्षेत्र का विकास होगा और कई बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिलेगा. इसके साथ ही इस क्षेत्र के किसानों को भी खुशी होगी.'' शक्कर कारखाना चालू कराने को लेकर बीते दिनों विधानसभा सत्र के दौरान शक्कर कारखाना चलाओ संघर्ष समिति जिला मुरैना का एक वृहद डेलीगेशन विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, कृषि मंत्री ऐंदल सिंह कंसाना से मिला था. उन्होंने तसल्ली से प्रतिनिधि मंडल को सुना और शक्कर कारखाना चलाने के लिए हर तरह का सहयोग करने का आश्वासन दिया.

भोपाल मेट्रो का शुभारंभ 13 दिसंबर को, पीएम मोदी देंगे हरी झंडी, पहला कॉमर्शियल रन भी दिसंबर में

भोपाल.  मेट्रो के सबसे अहम प्रायोरिटी कॉरिडोर को आखिरकार कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) से हरी झंडी मिल गई है. मंजूरी के बाद राजधानी में मेट्रो के परिचालन की उम्मीदों ने रफ्तार पकड़ ली है. 13 दिसंबर को मेट्रो शुरू होने की संभावित तारीख बताई जा रही है, हालांकि प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियां अभी पूरी नहीं हैं. माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दिन मेट्रो को हरी झंडी दिखा सकते हैं. शहर में महीनों से इस फैसले का इंतजार था, लेकिन क्लियरेंस के साथ एक नई चुनौती भी सामने आई है. पूरे कॉरिडोर के किसी भी स्टेशन पर लंबी अवधि की पार्किंग उपलब्ध नहीं होगी, जिससे नियमित यात्रियों को परेशानी हो सकती है. स्टेशनों पर केवल पिक एंड ड्रॉप की व्यवस्था रहेगी. ऐसे में वाहन लेकर आने वाले यात्रियों को निजी या सार्वजनिक पार्किंग स्थानों पर निर्भर होना पड़ेगा. उद्घाटन की तैयारियां तेज हैं, लेकिन पार्किंग का अभाव इस कॉरिडोर के शुरुआती संचालन के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है-और यही इस पूरी कहानी का मुख्य बिंदु है. टिकटिंग सिस्टम भी शुरुआती चरण में एडवांस्ड नहीं होगा. तुर्की कंपनी के साथ अनुबंध रद्द होने के बाद भोपाल में भी इंदौर की तरह मैनुअल टिकटिंग से शुरुआत करनी पड़ेगी. CMRS टीम ने 12 से 15 नवंबर के बीच तीन चरणों में ट्रैक, डिपो, ट्रेनों और स्टेशनों का विस्तृत निरीक्षण किया था. जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है और अंतिम आदेश के बाद राजधानी का पहला मेट्रो कॉरिडोर जनता के लिए खोला जा सकता है. पहले कॉरिडोर में 8 स्‍टेशन, 6.2 किमी लंबाई 6.22 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर आठ स्टेशनों को जोड़ता है. सबसे अधिक भीड़-भाड़ वाले रूट को प्राथमिकता देते हुए यह पहला सेक्शन बनाया गया. 2018 में शुरू हुए काम का अधिकांश हिस्सा पूरा हो चुका है. रानी कमलापति और अलकापुरी स्टेशनों पर अंतिम कार्य जारी है. फिलहाल स्टेशन के 1 गेट से ही एंट्री-एग्जिट होगी। यानी, जो भी यात्री स्टेशन पर पहुंचेंगे, वे स्टेशन के एक तरफ से ही अंदर-बाहर आ-जा सकेंगे। जिन स्टेशनों पर अभी फिनिशिंग या अन्य काम बचे हैं, उन्हें अगले 3 दिन में पूरा करने का टारगेट है। 10 दिसंबर से सभी स्टेशन बंद कर दिए जाएंगे। ये वीआईपी-वीवीआईपी की सिक्योरिटी के चलते होगा। यदि पीएम भोपाल आएं तो पहले यात्री भी बनेंगे मेट्रो सूत्रों के अनुसार, यदि प्रधानमंत्री मोदी भोपाल आकर मेट्रो का लोकार्पण करते हैं तो वे भोपाल मेट्रो के पहले यात्री भी बन सकते हैं। इसलिए स्टेशनों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। सुभाषनगर मेट्रो स्टेशन पर कार्यक्रम होगा, क्योंकि यही पर डिपो और सबसे ज्यादा स्पेस है। ऐसे में कार्यक्रम को लेकर किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। अक्टूबर 2023 में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और तीन महीने पहले वर्तमान मंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी सुभाषनगर स्टेशन से ही मेट्रो में सफर व निरीक्षण किया था। लोकार्पण के दौरान बंद रहेंगे स्टेशन जानकारी के अनुसार, मेट्रो का जब भी कमर्शियल रन होगा, तब सुभाषनगर को छोड़ बाकी सभी स्टेशन बंद रखे जाएंगे। यह सब सुरक्षा के मद्देनजर होगा। वीआईपी-वीवीआईपी के जाने के बाद आम लोगों के लिए स्टेशन खोल दिए जाएंगे। ताकि, वे मेट्रो का सफर कर सके। प्रायोरिटी कॉरिडोर 6.22 किमी लंबा, 8 स्टेशन आएंगे ऑरेंज लाइन का प्रायोरिटी कॉरिडोर 6.22 किलोमीटर लंबा है। इनमें कुल 8 स्टेशन- सुभाषनगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर, रानी कमलापति, डीआरएम तिराहा, अलकापुरी और एम्स शामिल हैं। इंदौर में वर्चुअली तरीके से किया था लोकार्पण प्रधानमंत्री मोदी ने 31 मई को भोपाल में हुए कार्यक्रम से ही इंदौर मेट्रो का वर्चुअली तरीके से लोकार्पण किया था। तब उन्होंने भोपाल मेट्रो के लोकार्पण के लिए अक्टूबर में आने की बात कही थी। हालांकि, बिहार में विधानसभा चुनाव के चलते मेट्रो का कमर्शियल रन अक्टूबर में नहीं हो सका। नवंबर में सीएमआरएस की टीम ने निरीक्षण किया और हाल ही में एनओसी दी। इसलिए कमर्शियल रन अब दिसंबर में किया जा रहा है। टिकट मैन्युवली सिस्टम से ही मिलेगी खास बात ये है कि मेट्रो के कमर्शियल रन के दौरान टिकट सिस्टम ऑनलाइन न होते हुए मैन्युवली रहेगा। टिकट कलेक्शन करने वाली तुर्किए की कंपनी का ठेका मेट्रो कॉरपोरेशन कैंसिल कर चुका है। नई एजेंसी आने तक मैन्युवली टिकट कलेक्शन सिस्टम रहेगा। इंदौर में भी यही सिस्टम लागू है। साल 2018 से शुरू हुआ था मेट्रो का काम भोपाल में पहला मेट्रो रूट एम्स से करोंद तक 16.05 किलोमीटर लंबा है। इसमें से एम्स से सुभाष नगर के बीच 6.22 किलोमीटर पर प्राथमिकता कॉरिडोर के तौर पर 2018 में काम शुरू किया गया था। सबसे पहले सुभाषनगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर और रानी कमलापति स्टेशन के काम पूरे हुए। इसके बाद रेलवे ट्रैक के ऊपर दो स्टील ब्रिज बनाए गए। वहीं, आगे के 3- डीआरएम तिराहा, अलकापुरी और एम्स स्टेशनों का काम शुरू हुआ। कुछ महीने पहले ही इनका काम भी पूरा हो गया और अब ये यात्रियों के आने का इंतजार कर रहे हैं। दो साल पहले हुआ था पहला ट्रायल राजधानी में पहली बार मेट्रो 3 अक्टूबर 2023 को पटरी पर दौड़ी थी। तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुभाष नगर से रानी कमलापति स्टेशन तक मेट्रो में सफर किया था।  

मध्य प्रदेश में प्रॉपर्टी की कीमतें अब AI और संपदा टू सर्वे से होंगी निर्धारित

 भोपाल  मध्य प्रदेश में नई कलेक्टर गाइडलाइन बनाने की तैयारी शुरू हो गई है, इसके लिए एआई व संपदा टू सॉफ्टवेयर की मदद से सर्वे किया जा रहा है। इस सर्वे में पता लगाया जा रहा है कि किस जिले में कहां पर अधिक दाम पर रजिस्ट्रियां हुई हैं। इसी डाटा के आधार पर ही प्रापर्टी के दाम तय किए जाएंगे। बता दें कि अभी ऑनलाइन माध्यम से सर्वे किया जा रहा है, इसके बाद राजस्व व पंजीयन अधिकारी जमीनी स्तर पर भी उन क्षेत्रों का सर्वे करेंगे, जहां पर तेजी से प्रापर्टी की खरीद-फरोख्त की जा रही है। बता दें कि वित्तीय वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन बनाने के महानिरीक्षक पंजीयन ने आदेश जारी कर दिए हैं, जिसके तहत फरवरी तक जिला मूल्यांकन समितियों को गाइडलाइन का प्रस्ताव तैयार कर केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजना है। सैटेलाइट इमेज निकाली जा रही अधिकारी खंगाल रहे डाटा सभी जिलों में कलेक्टर गाइडलाइन तय करने के लिए राजस्व अधिकारी और सब रजिस्ट्रार पिछले पांच वर्ष का डाटा खंगाल रहे हैं। इसमें यह पता लगाया जा रहा है कि किन क्षेत्रों में बढ़ी हुई दरों पर रजिस्ट्रियां हुई हैं। उन क्षेत्रों की सैटेलाइट इमेज निकाली जा रही है, जिससे यह पता लग सके कि वहां सिर्फ जमीन की खरीद-फरोख्त हुई है या फिर वहां पर निर्माण कार्य भी हुआ है। बता दें कि अभी तक दरें तय करने के लिए रजिस्ट्रियों को ही आधार बनाया जाता था, लेकिन अब इसके साथ सेटेलाइट इमेज, एआइ और फील्ड रिपोर्ट का विश्लेषण किया जा रहा है। अत्यधिक दरों पर हुईं चार लाख रजिस्ट्रियां मध्य प्रदेश में पिछले वित्तीय वर्ष में लगभग चार लाख रजिस्ट्रियां कलेक्टर गाइडलाइन की तय दरों से अधिक पर हुईं। खरीदारों ने एक से 30 प्रतिशत दाम बढ़ाकर अत्यधिक दरों पर रजिस्ट्रियां कराईं थीं। रजिस्ट्रेशन और स्टाम्प विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार मध्य प्रदेश में डेढ़ लाख जगह ऐसी हैं, जहां सरकार द्वारा निर्धारित दाम से अधिक पर रजिस्ट्री की संख्या बढ़ी है। सर्वे करने में इन तकनीकों की ली जा रही है मदद     कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) – इसकी मदद से यह पता लगाने में आसानी होगी कि एक प्रमुख स्थान या क्षेत्र में पिछले एक वर्ष में कितना विकास कार्य हुआ है। उसी को दरें बढ़ाने के लिए आधार बनाया जाएगा।     सैटेलाइट इमेज – इसकी मदद से क्षेत्र का वास्तविक चित्र सामने आ जाएगा कि वहां पर खाली जमीन है या फिर बड़ी मात्रा में भवन निर्माण हुआ है। कितनी सड़कें बनाई गई हैं और किन क्षेत्रों से जुड़ रहीं हैं।     फील्ड रिपोर्ट – सभी जिलों के पंजीयकों द्वारा तैयार की गई फील्ड रिपोर्ट गाइडलाइन तय करने के लिए प्रमुख आधार रहती है। इससे स्पष्ट होगा कि उक्त क्षेत्रों में तय दरों से कितनी अधिक दरों पर रजिस्ट्रियां हुई हैं। सर्वे कर प्रस्ताव तैयार किया जाना है     मध्य प्रदेश के सभी जिला पंजीयकों को नई कलेक्टर गाइडलाइन की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इसके लिए प्राथमिक तौर पर सर्वे कर प्रस्ताव तैयार किया जाना है, जिसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। – अमित तोमर, महानिरीक्षक, पंजीयन मप्र  

लाखों की सैलरी पर EMI का बोझ, भारतीय परिवारों की जेब रह रही खाली

नई दिल्ली आज के समय में देश का युवा वर्ग तेज़ी से तरक्की कर रहा है, लेकिन इसके साथ ही एक चिंता भी गहराती जा रही है-युवाओं की आय का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में खर्च हो रहा है। कार-बाइक के आसान कर्ज, ऑनलाइन शॉपिंग की इएमआई, क्रेडिट कार्ड, सामाजिक कार्यक्रमों पर खर्च और लाइफस्टाइल को लेकर बढ़ती अपेक्षाओं ने युवाओं को आर्थिक दबाव में धकेल रही हैं। युवाओं ने बताया कि उनकी आधी से अधिक सैलरी ईएमआई में चली जा रही है। जिस वजह से उनकी जेब खाली रह जा रही है। इस पर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते वित्तीय अनुशासन अपनाने की आदत डाल ली जाए, तो युवाओं की यह समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।  आज के समय हर चीज ईएमआई पर आसानी से मौजूद है। घर से लेकर, स्मार्टफोन, टीवी, बाइक, कार आदि सब ईएमआई पर आसानी से मिल जाते हैं। यही नहीं, जिनके पास क्रेडिट कार्ड है, वे विदेश यात्रा भी ईएमआई पर कर आते हैं। इनमें युवा प्रोफेशनल की संख्या काफी ज्यादा है। उन्हें लगता है कि ईएमआई पर यह सब खरीदना और कर्ज पर लग्जरी लाइफ जीना तरक्की और यह सफलता है। लेकिन कभी-कभी इस चमक के पीछे पैसों का एक बड़ा लीकेज छिपा होता है। Zactor के फाउंडर और सीए अभिषेक वालिया ने ऐसी आदतों को लेकर युवाओं को चेतावनी दी है। सीए अभिषेक वालिया ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट लिखी है। इसमें उन्होंने एक क्लाइंट के बारे में बताया है। उन्होंने बताया कि एक क्लाइंट ने उन्हें बड़े गर्व के साथ लग्जरी ट्रैवल और प्रीमियम गैजेट्स की कहानियां सुनाईं। लेकिन जब नंबर्स देखे गए, तो कहानी बिल्कुल अलग थी। उन्होंने कहा कि वह आदमी बहुत कॉन्फिडेंट और खुश था। वह बिजनेस क्लास में सफर करने की बात कर रहा था क्योंकि जिंदगी छोटी है और वह आराम का हकदार है। लेकिन जैसे ही उसके खर्चों का हिसाब-किताब सामने आया, तो तस्वीर पूरी तरह बदल गई। ईएमआई पर ऐश-ओ-आराम वालिया ने पोस्ट में बताया कि वह शख्स ईएमआई के बोझ से दबा था। दुबई की बिजनेस-क्लास टिकट की कीमत ईएमआई पर 78,500 रुपये थी। उसका लेटेस्ट आईफोन 18 महीने की जीरो-कॉस्ट ईएमआई पर 1,28,000 रुपये का था। हर महीने 22,000 रुपये के प्रीमियम कपड़ों के लिए उसने 'पे-लेटर' प्लान लिया हुआ था। मालदीव की 1.6 लाख रुपये की ट्रिप के लिए भी 94,000 रुपये अभी बाकी थे। करीब आधी सैलरी जितनी ईएमआई उसकी सैलरी 1,15,000 रुपये थी। सिर्फ ईएमआई ही 54,200 रुपये की थी। वह अमीर नहीं जी रहा था। वह अपने भविष्य से एक लाइफस्टाइल उधार ले रहा था। सीए अभिषेक वालिया ने समझाया कि जब हर ऐश-ओ-आराम किश्तों में आता है, तो वह लग्जरी नहीं रह जाती, बल्कि एक लंबा बोझ बन जाती है। असली दिक्कत उस आदमी की पसंद में नहीं थी। दिक्कत उसकी टाइमिंग में थी। वह सब कुछ अभी चाहता था, भले ही उसके फाइनेंस इसके लिए तैयार न हों। जाल से बाहर निकलने के बताए टिप्स इस जाल से बाहर निकलने के लिए सीए अभिषेक वालिया ने उसकी सोच को 'पहले खरीदो' से बदलकर 'पहले बनाओ' कर दिया। नया प्लान सीधा और व्यवस्थित था। हर महीने 20,000 रुपये इमरजेंसी फंड के लिए, 15,000 रुपये एसआईपी में और ट्रैवल सिर्फ बोनस या निवेश से मिले रिटर्न से करना था। धीरे-धीरे, दबाव कम होने लगा। सिर्फ सात महीनों में उसकी ईएमआई 54,200 रुपये से घटकर 18,900 रुपये रह गई। उसकी पहली इंटरनेशनल ट्रिप का पेमेंट उसने पहले ही कर दिया था। उसका सेविंग रेट 8 प्रतिशत से बढ़कर 29 प्रतिशत हो गया। उसने अपनी लाइफस्टाइल कम नहीं की। उसने बस उसे जीने का तरीका बदल दिया। सीए अभिषेक वालिया ने कहा कि बहुत से लोग इसलिए नहीं जूझते क्योंकि वे अच्छी चीजें चाहते हैं। वे इसलिए जूझते हैं क्योंकि वे उन्हें बहुत जल्दी चाहते हैं। दिक्कत लग्जरी में नहीं है। दिक्कत जल्दबाजी में है। क्या है 50-30-20 नियम? आर्थिक विशेषज्ञ ने बताया कि युवाओं को अपनी आय का उचित प्रबंधन करने के लिए 50-30-20 नियम अपनाने की सलाह देते हैं। यह नियम सरल है और हर वर्ग के लोगों के लिए उपयोगी साबित हुआ है। – 50% – आवश्यक खर्च घर का किराया, खाना, सफर, बिजली-पानी, मोबाइल-इंटरनेट, बीमा और अनिवार्य चीज़ें। – 30% – इच्छाएँ घूमना-फिरना, बाहर खाना, शॉपिंग, मनोरंजन और लाइफस्टाइल से जुड़े खर्च। – 20% – बचत एवं निवेश पीएफ एसआईपी, आरडी, इमरजेंसी फंड, रिटायरमेंट प्लानिंग आदि। इसी के साथ उन्होंने बताया कि यदि युवा इस नियम को अनुशासन के साथ अपनाएँ, तो न केवल कर्ज कम होगा बल्कि भविष्य सुरक्षित भी होगा। मुश्किल नहीं है, बस अनदेखी की आदत है युवा अक्सर मानते हैं कि वित्त प्रबंधन एक कठिन प्रक्रिया है और केवल बड़े लोगों या विशेषज्ञों का काम है, जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। अगर सही दृष्टिकोण और थोड़ी योजना अपनाई जाए, तो पैसा संभालना मुश्किल नहीं है। – महीने की शुरुआत में बजट बनाएँ – खर्च लिखने की आदत डालें – क्रेडिट कार्ड का उपयोग सीमित रखें – अनावश्यक सब्सक्रिप्शन खत्म करें – आपातकालीन फंड बनाएँ – डिजिटल ऐप से खर्च नियंत्रित करें कर्ज कम करने के स्मार्ट उपाय – सबसे महंगी ब्याज दर वाले कर्ज पहले चुकाएँ – इएमआई की संख्या न बढ़ाएँ, ब्याज घटाने पर ध्यान दें – क्रेडिट कार्ड के न्यूनतम भुगतान की भूल न करें – बचत में से थोड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में लगाएँ – नई खरीदारी तब तक रोकें, जब तक पुराना कर्ज समाप्त न हो जाए आर्थिक समझ ही असली ताकत है आज के समय में जिस तरह बदलती अर्थव्यवस्था, महँगाई और प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, उसमें वित्तीय ज्ञान हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य हो गया है। अच्छा वित्त प्रबंधन करियर की सफलता जितना ही महत्वपूर्ण है। युवा यदि अपनी आदतों में थोड़ा-सा बदलाव लाते हैं, तो भविष्य सुरक्षित, तनावमुक्त और आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है। कर्ज, खर्च और दिखावे की संस्कृति मिलकर युवाओं को वित्तीय दबाव में ढकेल रहे हैं। लेकिन यदि 50-30-20 नियम को अपनाया जाए, खर्चों का आकलन किया जाए और बचत को प्राथमिकता दी जाए, तो यह समस्या धीरे-धीरे खत्म हो सकती है।  

2026 में अमावस्या की तिथियां: पितरों के तर्पण के लिए कब-कब आएगी अमावस्या

हिंदू धर्म में अमावस्या की तिथि बहुत ही खास मानी जाती है. पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को अमावस्या आती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्नान, दान, नाम-जप और पितरों का तर्पण करना बहुत ही शुभ माना जाता है, ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद भी प्राप्त होता है.  ज्योतिषियों के अनुसार, जब सोमवार और शनिवार के दिन अमावस्या तिथि आती है तो इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है. सोमवार के दिन आने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है और शनिवार के दिन आने वाली अमावस्या को शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है. चलिए अब जानते हैं कि आने वाले नए साल 2026 में जनवरी से दिसंबर तक अमावस्या की क्या डेट रहेंगी. 2026 अमावस्या तिथि माघ अमावस्या (मौनी अमावस्या) – 18 जनवरी 2026 फाल्गुन अमावस्या – 17 फरवरी 2026 चैत्र अमावस्या – 19 मार्च 2026 वैशाख अमावस्या – 17 अप्रैल 2026 ज्येष्ठ अमावस्या – 16 मई 2026 ज्येष्ठ अमावस्या (अधिक) – 15 जून 2026 आषाढ़ अमावस्या – 14 जुलाई 2026 श्रावण अमावस्या – 12 अगस्त 2026 भाद्रपद अमावस्या – 17 सितंबर 2026 अश्विन अमावस्या (सर्व पितृ अमावस्या) – 10 अक्टूबर 2026 कार्तिक अमावस्या (दिवाली) – 9 नवंबर 2026 मार्गशीर्ष अमावस्या – 8 दिसंबर 2026 अमावस्या के दिन क्यों किया जाता है गंगा स्नान? अमावस्या के दिन गंगा स्नान इसलिए किया जाता है क्योंकि इस तिथि पर चंद्रमा का प्रभाव सबसे कम होता है और नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है. मान्यता है कि गंगा जल में स्नान करने से इन नकारात्मक प्रभावों का नाश होता है और मन, शरीर और विचार शुद्ध होते हैं. अमावस्या पितरों की तिथि भी मानी जाती है, इसलिए इस दिन गंगा स्नान करके तर्पण और जल अर्पित करने से पितरों की कृपा मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है.  साल 2026 की शुरुआत एक पवित्र अवसर के साथ होने जा रही है, क्योंकि नए वर्ष में माघ मेले का शुभारंभ ही सबसे पहले होगा. इसी के साथ जनवरी 2026 में पड़ने वाली पहली अमावस्या बेहद विशेष मानी जा रही है. इस अवधि में प्रयागराज में भव्य शाही स्नान का आयोजन रहेगा. आगामी अमावस्या को माघ अमावस्या या मौनी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है और यह वर्ष 2026 में 18 जनवरी को पड़ रही है. यह तिथि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी मानी जाएगी.