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उज्जैन महाकाल महोत्सव 2026: श्री महाकालेश्वर मंदिर में देशभर के कलाकारों की 5 दिन लंबी भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति

उज्जैन  दुनिया के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में इस वर्ष एक अनोखी सांस्कृतिक शुरुआत होने जा रही है। मंदिर परिसर के शक्ति पथ पर 14 से 18 जनवरी 2026 तक भव्य महाकाल महोत्सव आयोजित किया जाएगा। पाँच दिनों का यह आयोजन पूरी तरह भगवान शिव और शैव परंपरा को समर्पित होगा, जिसमें देशभर से चुनिंदा कलाकार अपनी कला के माध्यम से शिव दर्शन का अलौकिक अनुभव कराएंगे। महोत्सव को लेकर मंगलवार को हुई तैयारी बैठक में कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, महाकाल महोत्सव समिति सदस्य पद्मश्री भगवतीलाल राजपुरोहित तथा श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक मौजूद रहे। बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा और सुरक्षा व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई। महोत्सव के दौरान नृत्य, संगीत, नाट्य और विभिन्न कला विधाओं की प्रस्तुतियाँ होंगी, जो भगवान शिव की महिमा, शैव इतिहास और आध्यात्मिक परंपरा को दर्शाएंगी। साथ ही एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी जिसमें शिव के विविध स्वरूप, प्रमुख शैव तीर्थों और शैव संतों के जीवन से जुड़ी झलकियाँ प्रस्तुत की जाएंगी। आयोजन समिति के अनुसार, देश के बड़े कलाकारों के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को भी मंच प्रदान किया जाएगा, ताकि उज्जैन की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया जा सके। महाकाल महोत्सव 2026 को शहर की सांस्कृतिक पहचान को नई दिशा देने वाला आयोजन माना जा रहा है।

दिल्ली-NCR में तैयार हुआ देसी ‘आयरन डोम’, इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम से दुश्मन को मिलेगी कड़ी चुनौती

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली को दुश्मन के हवाई खतरों से बचाने के लिए एक अभेद्य सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है. दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) को मिसाइलों, ड्रोनों और तेज गति वाले विमानों से सुरक्षित करने के लिए स्वदेशी इंटीग्रेटिड एयर डिफेंस वेपन सिस्‍टम (IADWS) की तैनाती की जा रही है. IADWS एक मल्‍टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्‍टम है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO ने इसके तहत कुल तीन प्रमुख सिस्‍टम विकसित किए हैं। पहला- क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल (QRSAM), दूसरा- एडवांस्ड वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) और तीसरा- डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW)। यह कदम तब उठाया जा रहा है जब पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025) के दौरान देश को कथित तौर पर निशाना बनाने की कोशिश की थी. एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार पहले भारत अमेरिकी NASAMS-II खरीदने की योजना बना रहा था, लेकिन कीमत काफी ज्‍यादा होने के कारण स्वदेशी प्रणाली को प्राथमिकता दी गई. 1. क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल (QRSAM) • खासियत: यह एक कैनिस्टर-आधारित मिसाइल प्रणाली है. यह एक मोबाइल सिस्‍टम है, जिसका मतलब है कि इसे तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है. यह प्रणाली पहला निशाना दागने में बहुत कम समय लेती है. • रेंज: QRSAM की मारक क्षमता लगभग 25 से 30 किलोमीटर तक है. यह कम दूरी पर मौजूद विमानों और ड्रोनों के लिए एक घातक हथियार है. • फायदे: यह दुश्मन के कम-ऊंचाई वाले विमानों और क्रूज मिसाइलों को तुरंत नष्ट कर सकती है. इसकी त्वरित प्रतिक्रिया इसे अचानक हमले से बचाव के लिए आदर्श बनाती है. 2. एडवांस्ड वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) • खासियत: VSHORADS एक पोर्टेबल (Portable) मिसाइल प्रणाली है. इसे एक व्यक्ति या छोटे समूह द्वारा कंधे पर रखकर भी संचालित किया जा सकता है. यह पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में सैन्य टुकड़ियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई है. • रेंज: इसकी मारक क्षमता बहुत कम दूरी की होती है, आमतौर पर 6 से 8 किलोमीटर तक. यह कम ऊंचाई पर उड़ने वाले खतरों के लिए सटीक है. इसे रिसर्च सेंटर इमारात (RCI) द्वारा विकसित किया गया है. • फायदे: यह दुश्मन के हेलिकॉप्टरों और छोटे यूएवी (ड्रोन) को नजदीक आने से पहले ही मार गिराती है. इसकी स्वदेशी इन्फ्रारेड होमिंग तकनीक इसे अत्यधिक प्रभावी बनाती है. 3. डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (DEW) – लेजर तकनीक • खासियत: यह हाई-पावर वाली लेजर-आधारित प्रणाली है. इसे सेंटर फॉर हाई एनर्जी सिस्टम्स एंड साइंसेज (CHESS) द्वारा विकसित किया गया है. यह प्रणाली परंपरागत मिसाइलों के विपरीत, किरणों का उपयोग करके लक्ष्य को नष्ट करती है. • रेंज: DEW की रेंज लक्ष्य और लेजर की शक्ति पर निर्भर करती है, लेकिन यह ड्रोन जैसे खतरों को करीबी से मध्यम दूरी पर निष्क्रिय कर सकती है. • फायदे और कीमत: यह प्रणाली गोला-बारूद पर निर्भर नहीं करती. इसका मुख्य लाभ यह है कि प्रति-शॉट लागत बहुत कम होती है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह बिजली का उपयोग करती है. यह सैकड़ों ड्रोनों को तेजी से बेअसर कर सकती है, जिससे पारंपरिक मिसाइलों की हाई-कॉस्‍ट बचती है. IADWS की शक्ति और सफल परीक्षण IADWS का नियंत्रण एक केंद्रीय कमांड और नियंत्रण केंद्र द्वारा किया जाता है. 23 अगस्त 2025 को ओडिशा के तट पर इसका सफल परीक्षण किया गया था. परीक्षण के दौरान, QRSAM, VSHORADS और हाई एनर्जी लेजर ने एक साथ तीन अलग-अलग लक्ष्यों (दो तेज गति वाले यूएवी और एक मल्टी-कॉप्टर ड्रोन) को अलग-अलग रेंज और ऊंचाई पर नष्ट कर दिया था. भारतीय वायु सेना (IAF) को इस महत्वपूर्ण परियोजना की जिम्‍मेदारी दी गई है. यह प्रणाली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की रक्षा करेगी. DRDO उत्पादन एजेंसियों के साथ मिलकर नेटवर्किंग और कमांड एवं नियंत्रण प्रणालियों पर काम कर रहा है.