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नए बिजली मीटरों पर गुस्सा फूटा, पंजाब में आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार

लुधियाना भारतीय किसान यूनियन पंजाब प्रधान दिलबाग सिंह गिल द्वारा अपनी यूनियन के नेताओं सहित राहों रोड स्थित गौतम नगर जीवन कॉलोनी और गौंसगढ़ गांव की दर्जनों कॉलोनी में घरों में लगे बिजली के चिप वाले मीटर उतारने के लिए आंदोलन छेड़ दिया गया है जिसकी शुरुआत यूनियन द्वारा बुधवार की सुबह को की जा रही है l मामले संबंधी जानकारी देते हुए प्रधान दिलबाग सिंह गिल ने बताया कि सरकार द्वारा पावर कॉम विभाग का निजीकरण किया जा रहा है जिससे आम जनता महंगाई की चक्की में पिस कर रह जाएगी क्योंकि बिजली आम जनता की मूलभूत सुविधाओं का मुख्य आधार है और निजीकरण होने पर प्राइवेट कंपनियां आम जनता विशेष कर गरीब और जरूरतमंद परिवारों से बिजली के मुंह मांगे दाम वसूलने पर उतार आएंगे जिसके कारण लोगों में हाहाकार मचेगी l जिसे ध्यान में रखते हुए भारतीय किसान मजदूर यूनियन द्वारा निजीकरण के विरोध में बिजली के चिप वाले मीटर उतारने संबंधी कदम उठाया गया है एक सवाल के जवाब में दिलबाग से गिल ने बताया कि बिजली के उतारे गए सभी मीटर यूनियन द्वारा पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन के फिरोजपुर रोड स्थित सेंट्रल जोन कार्यालय में जमा करवा दिया जाएंगे उन्होंने बताया कि बिजली के मीटर उतारे जाने के बाद जब तक पावर कॉम विभाग द्वारा पुराने सिस्टम वाले गरारी या फिर इलेक्ट्रॉनिक वाले मीटर लोगो के घरों में नहीं लगाए जाते जब तक  लोग डायरेक्ट कुंडली डालकर अपने घरों में बिजली जलाने के लिए आजाद है।  उन्होंने दावा किया है कि अगर पावर कॉम द्वारा संबंधित लोगों के खिलाफ खिलाफ जुर्माना या फिर पर्चा दर्ज करवाने संबंधी कार्रवाई की जाती है तो भारतीय किसान यूनियन ऐसे सभी लोगों का केस अदालत में लड़ने और उनके जुर्माने माफ करवाने के लिए वचनबद्ध है l  

भारत ने 5th जेन फाइटर जेट से किया अमेरिका को चौंका, DRDO ने तोड़ा अहम कारनामा

बेंगलुरु  यह बात सभी को पता है कि भारत लड़ाकू विमानों की कमी से जूझ रहा है. उसके पास मौजूदा समय में स्क्वाड्रन की संख्या 42 से घटकर 30 पर आ गई है. लेकिन, सबसे बड़ी चुनौती नए फाइटर जेट्स हासिल करने की है. दरअसल, फाइटर जेट्स कोई वाशिंग मशीन या रेफ्रिजरेटर नहीं होते हैं कि कोई व्यक्ति मार्केट गया और उसे खरीदकर लेते आया. बल्कि, ये बेहद जटिल तकनीक वाले विमान हैं और भारत की कोशिश है कि वह अब भविष्य में स्वदेशी फाइटर जेट्स का इस्तेमाल करे. इस दिशा में भारत अपने तेजस प्रोग्राम के साथ पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA यानी एम्का प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. अब इस एम्का प्रोजेक्ट में देसी वैज्ञानिकों को एक बड़ी सफलता मिली है. दरअसल, डीआरडीओ ने मॉर्फिंग विंग टेक्नोलॉजी का सफल परीक्षण किया है. यह एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जो दुनिया के कुछ चुनिंदा कंपनियों जैसे एयरबस और नासा के पास है. एक तरह से इस तकनीक पर अमेरिका और यूरोप का कब्जा है. चीन और रूस जैसे देश भी पांचवी पीढ़ी के फाइटर जेट्स बना चुके हैं लेकिन, उनके पास भी ऐसी सटीक तकनीक होने को लेकर सवाल किए जाते हैं. पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स के लिए क्यों जरूरी है ये तकनीक? फिफ्थ जेन फाइटर जेट के लिए यह एक बहुत बड़ी टेक्नोलॉजी है. इस टेक्नोलॉजी में फाइटर जेट अपने फंख पक्षियों की तरह समेट सकते है. उसको छोटा-बड़ा कर सकते हैं. जरूरत पड़ने पर उसे छिपा सकते हैं. वह आसमान में संतुलित स्थित पाने लेने के बाद अपने फंख को पूरी तरह छिपा सकते हैं. यह सब कुछ सेकेंडों के भीतर होता है. ऐसे में ये विमान आसानी से दुश्मन के राडार से बच जाएंगे. पंख समेटने के कारण उनका आकार भी काफी सिमट जाएगा. पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के लिए यह एक बहुत बड़ी तकनीकी जरूरत है. दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों की चुनिंदा कंपनियों के पास ही यह तकनीक उपलब्ध है. डीआरडी ने बनाया अपना तकनीक इस तकनीक को डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है. इसका सफल परीक्षण किया जा चुका है. आने वाले वक्त में इसे फाइटर जेट्स के साथ जोड़ा जाएगा. जानकारों का कहना है कि इस तकनीक का सीधा फायदा एम्का प्रोजेक्ट के साथ-साथ मानव रहित विमानों के विकास में मिलेगा. क्या है यह तकनीक दरअसल, यह एक बेहद खास तकनीक है. इसमें फंख एक खास धातु से बने होते है. जो एक विशेष तापमान पर गर्म होने के बाद फैल जाते हैं और ठंडा होने पर सिकुड़ जाते हैं. लेकिन, गर्म या ठंडा होने की यह पूरी प्रक्रिया सेकेंडों में पूरी होती है. यानी ये फंस फैलने के कुछ ही सेकेंड के भी अपने मूल आकार में आ जाते हैं. फाइटर जेट को जब उड़ान भरना होते हैं या उसको हवा के दबाव को मैनेज करना होता है तो वह हीट बढ़ाकर इन फंखों की साइज बढ़ा देते हैं. इस तकनीक को शेप मेमोरी अलॉय कहा जाता है. इस तकनीक की एक और बड़ी खासियत है कि इसमें पारंपरिक पंखों की तहत कोई कट या जोड़ नहीं होते. इस कारण इनके राडार की नजर में आना और मुश्किल हो जाता है. इस तकनीक में फंखे प्रति सेकेंड 35 डिग्री की रफ्तार से अपना आकार बदलते हैं. ये मात्र 0.17 सेकेंड में पूरे शेप चेंज कर लेते है. इसका मतलब यह है कि एक ही मिशन में विमान टेकऑफ पर ज्यादा वजन लिफ्ट करने के लिए कैंबर बढ़ा सकेगा. क्रूज में ड्रैग कम करने लिए रेंज बढ़ा सकेगा. डॉगफाइट यानी फाइटर जेट्स के बीच सीधी भिड़ंत के वक्त तेजी से अपना आकार बदलकर दुश्मन को चमका दे सकेगा. क्या थी सबसे बड़ी चिंता? इस तकनीक को लेकर सबसे बड़ी बात यह कही जाती है कि इसमें बहुत अधिक ऊर्जा की खपत होती है. ये ऊर्जा पंखों को गर्म या ठंडा करने में इस्तेमाल होती है. ऐसे में विमान पर बोझ बढ़ जाता था. इस समस्या के समाधान के लिए एक एडाप्टिव पावर अलोकेशन एल्गोरिदम तैयार किया गया है जो जरूरत के हिसाब से बिजली को इंटेलिजेंटली बांटता है. इसका नतीजा यह हुआ कि विमान के एक्टिव सेगमेंट को ही पावर मिलती है. बाकी सेगमेंट्स पर भार नहीं पड़ता है. इस तरह इस पूरे टेस्ट में महज 5.6 फीसदी अतिरिक्त ऊर्जा की खपत हुई.

भोपाल मेट्रो बस से सस्ती पड़ेगी! फ्री ट्रायल के बाद कम किराया, जानें कैसे बनेगा यह सबसे किफायती विकल्प

भोपाल  भोपाल में बनने जा रही मेट्रो सिर्फ शहर की रफ्तार ही नहीं बढ़ाने वाली, बल्कि जेब पर भी हल्की पड़ने वाली है. ऐसा पहली बार हो सकता है कि एयर-कंडीशन्ड मेट्रो, शहर की बसों से भी सस्ती साबित हो जाए वो भी सिर्फ शुरुआती ऑफर में नहीं, बल्कि आने वाले महीनों तक. 21 दिसंबर से मेट्रो की यात्री सेवा शुरू होने जा रही है, और शुरुआत होगी एक हफ्ते के फ्री ट्रायल राइड्स के साथ. उसके बाद किराया धीरे-धीरे तीन हफ्तों में 25%, 50% और 75% तक बढ़ेगा. यानी शुरुआत में बेहद कम दाम और आगे भी जेब पर ज्यादा दबाव नहीं. अब बात बसों की BCLL का बस नेटवर्क पिछले दो साल से लगभग आधा ही चल रहा है. 220 बसें स्वीकृत हैं, लेकिन सड़क पर सिर्फ 50 से 90 के बीच ही दौड़ पा रही हैं. नतीजा ये है कि पूरे शहर का फीडर नेटवर्क कमजोर पड़ गया है और कई रूट सीधे-सीधे मेट्रो को सपोर्ट भी नहीं कर पा रहे हैं. सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई रूट पर डायरेक्ट बस ही नहीं मिलती जैसे सुभाष नगर से AIIMS भोपाल तक. TR-4B रूट तो सुभाष नगर डिपो से होकर जाता था, लेकिन करोंड रूट पर मेट्रो निर्माण की वजह से अब उसे डायवर्ट कर दिया गया है. बसें अब डिपो से गुजरती ही नहीं, बल्कि सीधे RoB पार करके बोर्ड ऑफिस/ISBT की तरफ चली जाती हैं. ऐसे में यात्रियों को बीच रास्ते में बस बदलनी पड़ती है, जिसका मतलब है दूसरा टिकट. अगर कोई यात्री AIIMS तक बस से जाना चाहे, तो लगभग 9 किमी की यात्रा में पहले 12 रुपये और फिर 9 रुपये देने पड़ते हैं यानी कुल 21 रुपये. इतना देकर भी पूरा सफर धीमा, भीड़भाड़ वाला और मौसम की मार झेलने वाला होगा. वहीं मेट्रो वही दूरी तेज़, स्मूथ और AC आराम में लगभग इतने ही या इससे कम किराये में तय करवा सकती है. यही वजह है कि मेट्रो लांच होते ही बस की तुलना में ज्यादा किफायती और प्रैक्टिकल विकल्प बनकर सामने आएगी. मेट्रो में अभी टोकन, बाद में कॉमन मोबिलिटी कार्ड शुरुआत में यात्रियों को फिजिकल टोकन लेने होंगे. स्टेशन में प्रवेश, कंकर्स पर टोकन लेना, सिक्योरिटी, रेल लेवल पर चढ़ना ये बेसिक प्रोसेस रहेगा. अभी स्मार्ट कार्ड या पास सिस्टम शुरू नहीं होगा. लेकिन जैसे ही मेट्रो का पूरा 16 किमी का करोंड AIIMS कॉरिडोर चालू होगा, कॉमन मोबिलिटी कार्ड लाया जाएगा. इससे मेट्रो और शहर की बस दोनों का किराया एक ही कार्ड से, कैशलेस तरीके से UPI से भी दे सकेंगे. MPMRCL जल्द ही किराया संरचना की आधिकारिक घोषणा करेगा, लेकिन फिलहाल संकेत हैं कि इंदौर मेट्रो की तरह 10 से 20 रुपये तक का किराया रखा जा सकता है. यात्रियों के लिए खास इंतज़ाम हर कोच में 4 सीटें महिलाओं के लिए और 2 सीटें दिव्यांग यात्रियों के लिए आरक्षित होंगी. यानी शुरुआत भले ही साधारण टोकन सिस्टम से हो, लेकिन आने वाले महीनों में भोपाल की मेट्रो यात्रा और भी स्मार्ट, तेज़ और सस्ती होने वाली है.

महाकालेश्वर मंदिर में ड्रेस कोड लागू, सुरक्षा और गरिमा को ध्यान में रखते हुए नया नियम प्रभावी

उज्जैन  उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में नए साल 2026 से एक बड़ा और व्यवस्था बदलने वाला नियम लागू हो गया है। मंदिर समिति ने निर्णय लिया है कि सभी पुजारी, पुरोहित और उनके प्रतिनिधियों को ड्रेस कोड का पालन करना होगा। उन्हें अपना आईडी प्रदर्शित करना होगा। यह नियम सुरक्षा, अनुशासन और उनकी स्पष्ट पहचान सुनिश्चित करने के लिए लागू किया जा रहा है। जानें क्यों उठाया ये कदम? बता दें कि पिछले कुछ समय से महाकाल मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या लगातार बढ़ी है। खासतौर पर त्यौहारों, विशेष अवसरों और सामान्य दिनों में भी उमड़ने वाली भक्तों की भीड़ की वजह से कई बार सुरक्षा एजेंसी कर्मचारियों को पहचानना मुश्किल हो जाता था। कई बार गैर रजिस्टर्ड लोग भी खुद को मंदिर का सेवक या प्रतिनिधि बताकर मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश कर चुके हैं। ऐसे मामलों से निपटने के लिए मंदिर समिति अब सख्त व्यवस्था लागू कर रही है। किस पर लागू होगा ये नया नियम ड्रेस कोड का ये नया नियम केवल मंदिर के पुजारियों और पुरोहितों समेत उनके प्रतिनिधियों और मंदिर सेवकों के लिए ही लागू किया जा रहा है। -16 रजिस्टर्ड पुजारी – 22 पुरोहित – 45 प्रतिनिधि (इनमें एजेंट/सहयोगी भी शामिल) कैसी होगी ड्रेस मंदिर प्रशासन एक मानक पोशाक तय कर रहा है। जिसमें रंग, डिजाइन और पहनने का तरीका एकदम समान होगा। ताकि भीड़ में भी इन्हें तुरंत पहचाना जा सके। ये ड्रेस इनकी परम्परा से मेल खाती हो, इसका विशेष ध्यान रखते हुए ड्रेस कोड लागू किया जा रहा है। ID कार्ड भी अनिवार्य -आईडी कार्ड मंदिर प्रशासन की ओर से जारी किए जाएंगे -ताकि अधिकृत व्यक्तियों की पहचान आसान हो सके -फर्जी प्रतिनिधियों पर लगेगी रोक – सुरक्षा व्यवस्था के लिए जरूरी कदम यहां करें महाकाल भस्म आरती के दर्शन जानें क्या कहती है मंदिर समिति? मामले में महाकालेश्वर उज्जैन मंदिर समिति सदस्यों का कहना है कि महाकाल मंदिर की गरिमा, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह कदम उठाने की तैयारी की है। नए साल में हर पुजारी, पुरोहित तय नियम में ही सेवा दे पाएगा। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बुंदेलखंड की तस्वीर बदलेगी, 76 किमी लंबा फोरलेन और 42 जंक्शन से होगा विकास का नया युग

 खजुराहो बुंदेलखंड विश्व प्रसिद्ध खजुराहो की वास्तुकला, मंदिरों और मूर्तियों की नक्काशी के लिए वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध है। दूसरी ओर सिंचाई सुविधाओं, उद्योगों की कमी से रोजगार के अवसरों का भी अभाव है। अब बुंदेलखंड का वैभव और बढ़ेगा। युवाओं को रोजगार देने वाला बनेगा। बुंदेलखंड के विकास से जुड़े कई प्रस्तावों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में खजुराहो में हुई कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी गई। सागर के मसवासी ग्रंट में औद्योगिक क्षेत्र को विशेष औद्योगिक पैकेज के तहत विकसित किया जाएगा। 24,240 करोड़ का संभावित निवेश आएगा। नौरादेही टाइगर रिजर्व में चीतों को बसाया जाएगा। बुंदेलखंड वीरों-हीरों की धरती: सीएम छतरपुर. सीएम डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की 1.26 करोड़ से ज्यादा लाड़ली बहनों को 1857 करोड़ की 31वीं किस्त जारी की। योजना के तहत अब तक 46500 करोड़ रुपए बहनों के खातों में भेजे जा चुके हैं। लाड़ली बहना सम्मेलन राजनगर में हुआ। संबोधन में सीएम ने कहा, बुंदेलखंड हीरों और महावीरों की पवित्र धरती है। क्षेत्र की गरिमा और गौरव को नई ऊंचाइयों पर ले जाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। ऐसे बदलेगी बुंदेलखंड की तस्वीर – मसवासी ग्रंट में उद्योगों की स्थापना से 29 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा। एक रुपए प्रति वर्गमीटर की दर पर निवेशकों को जमीन दी जाएगी। विकास शुल्क चुकाने के लिए 20 समान वार्षिक किस्तों की सुविधा मिलेगी। – सागर से दमोह के बीच फोरलेन पर 13 अंडरपास, तीन बड़े पुल, 9 मध्यम पुल, एक आरओबी, 13 बड़े जंक्शन और 42 मध्यम जंक्शन बनाए जाएंगे। -भू-अर्जन एवं अन्य कार्यों के लिए 323.41 करोड़ का भुगतान राज्य बजट से होगा। – एमपी के दमोह, छतरपुर और बुधनी मेडिकल कॉलेज के लिए 990 नियमित और 615 आउटसोर्स कर्मी मिलेंगे। प्रत्येक चिकित्सा महाविद्यालय में 330 नियमित और 205 व्यक्तियों को आउटसोर्स पर रखा जाएगा। – दमोह जिले की तेंदूखेड़ा तहसील की झापन नाला मध्यम सिंचाई परियोजना 165 करोड़ 6 लाख की होगी। 17 गांवों का 3600 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा।

Rahu Budh Yuti 2026: 2026 से इन राशियों के लिए आएगा शानदार समय, सबसे दुर्लभ संयोग बनेगा

ज्योतिषियों के नजरिए से साल 2026 बहुत ही खास रहने वाला है, जिसमें कई बड़े ग्रहों का गोचर और संयोग बनने वाला है. द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 की शुरुआत में ही राहु-बुध का दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है. ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि और शिक्षा का कारकग्रह माना जाता है और बुध सभी ग्रहों का राजकुमार भी कहा जाता है. राहु को उल्टी चाल चलने वाला माना जाता है और कठोर वाणी, भ्रमित करने वाला माना जाता है.  ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, यह संयोग 18 साल बाद कुंभ राशि में बनेगा. इस संयोग से नौकरी, धन और प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों में तरक्की मिलेगी. चलिए अब जानते हैं कि साल 2026 की शुरुआत में राहु-बुध की युति से किन राशियों को फायदा होगा.  मेष मेष राशि वालों के राहु-बुध की युति बहुत ही लाभकारी सिद्ध हो सकती है. ये युति मेष राशि वालों के 11वें भाव में बनेगी, जो कि लाभ भाव कहलाता है. आय में तगड़ा मुनाफा पाएंगे. निवेश के क्षेत्र से अच्छा परिणाम पा सकते हैं. शेयर मार्केट या किसी कंपनी में इन्वेस्टमेंट करने से भी लाभ के योग बनेंगे. पति-पत्नी का रिश्ता मजबूत होगा. परिवार के साथ अच्छा वक्त बिताएंगे.   वृषभ राहु-बुध की युति वृषभ राशि वालों के लिए भी बहुत ही सकारात्मक साबित होगी. यह युति वृषभ राशि वालों के कर्मस्थान में बनेगी. करियर और शिक्षा में अच्छे अवसर देखने को मिलेंगे. आर्थिक स्थिति में सुधार होगा. सैलरी बढ़ने का योग बन रहा है. नौकरी में पदोन्नति प्राप्त होगी. बिजनेस तरक्की पर पहुंचेगा.  मकर राहु-बुध की युति मकर राशि वालों के लिए भी बहुत ही फायदेमंद मानी जा रही है. रुका हुआ धन प्राप्त होगा. आर्थिक स्थिति अच्छी हो जाएगी. परिवार में सामंजस्य बैठेगा. धन कमाने के योग बन रहे हैं और आकस्मिक लाभ प्राप्त करने का भी योग बन रहा है.

इंदौर में रियल एस्टेट में आया बड़ा उछाल, नवंबर में 43% अधिक रजिस्ट्री, पिछले साल से बेहतर प्रदर्शन

इंदौर  मध्य प्रदेश का आर्थिक शहर इंदौर अब रियल एस्टेट के क्षेत्र में भी रिकॉर्ड तोड़ रहा है। नवंबर 2025 में इंदौर जिले में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन पिछले साल की तुलना में 43 प्रतिशत तक बढ़ गया। शहर के चारों उप पंजीयन कार्यालयों में यह तेजी साफ नजर आई, जिनमें सबसे ज्यादा उछाल इंदौर-4 में दर्ज किया गया। कुल मिलाकर अप्रेल से नवंबर 2025 तक जिले में पिछले साल की तुलना में 1091 रजिस्ट्रियां ज्यादा हुई हैं। नवंबर महीने में जिले में कुल 14,140 संपत्तियों का पंजीयन हुआ, जबकि नवंबर 2024 में यह संख्या 9905 थीं। इसमें इंदौर-1 में पिछले साल की तुलना में 1262 अधिक रजिस्ट्रियां हुईं। इंदौर-2 में 822, इंदौर-3 में 934 और इंदौर-4 में रिकॉर्ड 1225 रजिस्ट्रियों का उछाल देखने को मिला। यह रुझान बताता है कि खरीदारों का भरोसा अब भी मजबूत है और बाजार की गति तेज होती जा रही है। इंदौर 2, 3 और 4 में खरीद-बिक्री बढ़ी अप्रेल से नवंबर की अवधि में जिले में कुल 1,12,588 दस्तावेज पंजीकृत हुए, जबकि पिछले साल यह संख्या 1,11,497 थी। इंदौर-2, इंदौर-3 और इंदौर-4 क्षेत्रों में खरीद-बिक्री बढ़ी है, वहीं इंदौर-1 में कुछ गिरावट दर्ज की गई। बावजूद पूरे जिले में प्रॉपर्टी बाजार ने पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। विशेषज्ञों ने बताई प्रॉपर्टी खरीद में तेजी की वजह इंदौर में प्रॉपर्टी खरीद में आई इस तेजी के कई कारण माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में लगातार होती इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, नए मार्गों और रिंग रोड के विस्तार, मेट्रो प्रोजेक्ट की प्रगति और सुदृढ़ होती कनेक्टिविटी ने रियल एस्टेट को मजबूती दी है। प्रॉपर्टी बाजार बढ़ने के कई और भी कारण 1- रोजगार, स्टार्टअप और आइटी कंपनियों में तेजी शहर में आइटी पार्क, स्टार्टअप इकॉनमी और मल्टीनेशनल कंपनियों की मौजूदगी ने युवाओं और प्रोफेशनल्स का आवागमन बढ़ाया है। इससे मकान, फ्लैट और कमर्शियल स्पेस की मांग लगातार बढ़ रही है। 2- लगातार विकसित होता इंफ्रास्ट्रक्चर सुपर कॉरिडोर, रिंग रोड, बीआरटीएस, मेट्रो प्रोजेक्ट, नए फ्लाइओवर और कनेक्टिविटी में सुधार ने शहर को निवेशकों के लिए और आकर्षक बना दिया है। 3- सेफ और ग्रोथ-ओरिएंटेड सिटी की छवि स्वच्छता में लगातार देश का नंबर-1 शहर रहने से लोगों का विश्वास बढ़ा है। बाहर से आने वाले परिवार इंदौर में बसना पसंद कर रहे हैं, जिससे मकान और प्लॉट की खरीद बढ़ी है। 4- निवेशकों का भरोसा, रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट ज्यादा शहर में प्रॉपर्टी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन फिर भी मेट्रो शहरों की तुलना में सस्ती दरें मिलती हैं। यही कारण है कि लोग इसे लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट के रूप में सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं। 5- नई टाउनशिप, हाई-राइज और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स की भरमार सुपर कॉरिडोर, पीथमपुर रोड, स्कीम नंबर 94, 114 और बायपास क्षेत्रों में बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट तेजी से विकसित हो रहे हैं। नई टाउनशिप्स की बढ़ती संख्या से लोगों को सुविधाजनक और प्रीमियम आवास विकल्प मिल रहे हैं।

मध्यप्रदेश में नए साल में बिजली की दरें बढ़ सकती हैं, पावर जनरेशन कंपनी ने प्रस्तावित की 10% वृद्धि

भोपाल  मध्यप्रदेश में नए साल की शुरुआत बिजली उपभोक्ताओं को बिजली का करंट लग सकता है। राज्य की पावर जनरेशन कंपनी ने मप्र विद्युत नियामक आयोग के समक्ष बिजली दरों में 10 प्रतिशत तक इजाफे का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। आयोग इस प्रस्ताव पर सुझाव और आपत्तियां लेने के लिए जन सुनवाई आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। नियामक आयोग जन सुनवाई के दौरान आम जनता और हितधारकों की आपत्तियाँ सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय देगा। फिलहाल प्रस्ताव ने उपभोक्ताओं में नए साल के बिलों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कंपनी ने बढ़ोतरी को बताया अनिवार्य नियामक आयोग मुख्यालय में दायर याचिका में कंपनी ने दावा किया कि लगातार बढ़ रहे लाइन लॉस और वित्तीय दबाव के कारण दरों में संशोधन आवश्यक हो गया है। सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्तावित बढ़ोतरी की सीमा 10% तक हो सकती है, हालांकि अंतिम निर्णय जन सुनवाई के बाद ही होगा। 15 दिसंबर से हो सकती है सुनवाई  आयोग के सूत्रों का कहना है कि कंपनी के प्रस्ताव पर प्रारंभिक अध्ययन के बाद आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। पहली सुनवाई 15 दिसंबर को होने की संभावना है, हालांकि आयोग की ओर से इसका औपचारिक कार्यक्रम अभी जारी नहीं हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। आठ महीने पहले ही बढ़े थे बिजली के दाम इस साल अप्रैल से ही उपभोक्ता पहले से बढ़े हुए टैरिफ का भुगतान कर रहे हैं। बीते वित्तीय वर्ष में कंपनियों ने 7.52% बढ़ोतरी की मांग की थी, लेकिन आयोग ने केवल 3.46% वृद्धि की मंजूरी दी थी। यही कारण है कि घरेलू, गैर-घरेलू और कृषि श्रेणियों में प्रति यूनिट दरें कुछ पैसों की वृद्धि के साथ लागू हुईं और फिक्स चार्ज भी बढ़ाए गए। चुनावी वर्षों में मिली थी राहत पिछले दो वर्ष 2024 में लोकसभा और 2023 में विधानसभा चुनाव हुए, जिसके चलते आयोग ने दर बढ़ोतरी पर सख्ती दिखाई थी। 2024 में 3.86% बढ़ोतरी की मांग के मुकाबले मात्र 0.7% और 2023 में 3.20% की तुलना में केवल 1.65% बढ़ोतरी को मंजूरी मिली थी।  प्रदेश में सहकारिता चुनाव भी प्रस्तावित हैं, ऐसे में राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए आयोग बड़ी राहत देने की संभावना कम लग रही है। सूत्रों का अनुमान है कि नई दरें 4 से 6% की सीमा में तय की जा सकती हैं। इसके बाद भी उपभोक्ताओं के लिए नए साल में बिजली बिल बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है। 

जम्मू में ‘बर्मा कॉलोनी’ की स्थापना और रोहिंग्याओं का असर, CJI की चेतावनी हुई सच

श्रीनगर  सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कड़ी टिप्‍पणी करते हुए कहा था कि भारत में घुसपैठियों के लिए किसी तरह का ‘रेड कार्पेट वेलकम’ नहीं होना चाहिए.” यह टिप्पणी भारत की सुरक्षा और अवैध घुसपैठ के प्रति उसके सख्त रुख को दर्शाती है. लेकिन, जम्मू की जमीन पर तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है. म्यांमार से आए रोहिंग्या मुस्लिम समुदाय के लोग न सिर्फ यहा आकर बसे हैं बल्कि अब कई इलाकों में उनकी स्थायी बसावट, कारोबार और यहां तक कि समानांतर ढांचे तक बनते दिखाई दे रहे हैं. यह स्थिति सुप्रीम कोर्ट के संदेश और जमीनी हकीकत के बीच एक बड़ी खाई पैदा करती है.  कासिम नगर बना बर्मा बस्ती पहले रोहिंग्या समुदाय के लोग जम्मू शहर और आसपास के इलाकों में अस्थायी कैम्पों तक सीमित थे. लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है. कई क्षेत्रों में इनकी परमानेंट बस्तियां बस गई हैं. झुग्गियों का विस्तार हुआ है और यहां तक कि छोटी-छोटी दुकानें व बाजार भी खड़े हो चुके हैं. ये अब सिर्फ अस्थायी रूप से रहने के मकसद से नहीं आए हैं बल्कि उनका इरादा यहीं बस जाने का लगता है. सरकारी और सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, जम्मू के नरवाल, सुंजवां, भठिंडी और अन्य इलाकों में रोहिंग्या परिवारों ने ढांचों का स्थायी रूप लेती बस्तियां खड़ी कर ली हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1994 में दो बच्चों समेत एक रोहिंग्या परिवार जम्मू पहुंचा था. इसके बाद 2009 के बाद इनकी उपस्थिति में तेज उछाल आया. 2007 से 2015 के बीच बड़ी संख्या में रोहिंग्या भारत आए और जम्मू में बसने लगे. पहले इस जगह का नाम कासिम नगर हुआ करता था. 2007 में इसे रोहिंग्या बस्ती के नाम से जाना जाने लगा. 2020 के बाद रोहिंग्या मुस्लिम समुदाय ने अपने संगठन को इतना मजबूत कर लिया कि स्थायी रूप से बसने की चाह में इस जगह को ‘बर्मा बस्ती’ का नाम भी दे दिया गया है. यह नामकरण अपने आप में उनकी बढ़ती पकड़ और स्थायी पहचान की तलाश को दर्शाता है. टीचर तक बन गए रोहिंग्या घुसपैठी रोहिंग्या समुदाय अब सिर्फ़ रहने तक सीमित नहीं है. आधिकारिक रिपोर्टों के मुताबिक, रोहिंग्या परिवारों के बच्चे स्थानीय स्कूलों में दाख़िल हैं. कुछ संस्थानों में रोहिंग्या मूल का शिक्षक सादिक बच्चों को पढ़ाने तक पहुंचाहुआ है. यही नहीं, रोहिंग्या बच्चों के लिए अलग से मदरसे भी चल रहे हैं. इन मदरसों के संचालन पर सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर निगरानी बढ़ाती रही हैं. यह उनके समुदाय के भीतर एक समानांतर ढाँचा विकसित होने का संकेत है. आर्थिक मोर्चे पर भी ये सक्रिय हो रहे हैं. कुछ लोग कबाड़ इकट्ठा करने, मजदूरी और रेहड़ी-फड़ी का काम करते हैं. वहीं, कुछ छोटी-बड़ी कपड़ों की दुकानों से कमाई करते नज़र आ रहे हैं. यह सब उनकी अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी रूप से यहीं बसने की मंशा को दर्शाता है. जनसांख्यिकीय बदलाव की चिंता पिछले कुछ सालों में इनकी आबादी में लगातार वृद्धि देखी गई है. इसने क्षेत्रीय सुरक्षा और जनसांख्यिकीय बदलावों पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. सुरक्षा एजेंसियों ने कई बार पहचान सत्यापन अभियान चलाए हैं. इन अभियानों में दस्तावेजों की कमी, संदेहास्पद पहचान और अवैध बसावट के मामले सामने आए. 2021 में महिलाएं और बच्चे सहित कई रोहिंग्या हिरासत में लिए गए थे. जम्मू में रोहिंग्या की बढ़ती और अब लगभग स्थायी होती मौजूदगी, सुरक्षा, कानून और स्थानीय प्रशासन के सामने एक गंभीर चुनौती बन चुकी है. संवेदनशील बॉर्डर जोन में ऐसी बिना अनुमति और बिना दस्तावेज वाली बसावट को जारी रहने दिया जा सकता है या नहीं, यह सबसे बड़ा सवाल है. सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश और जमीनी हालात के बीच का यह विरोधाभास राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी चिंता का विषय है.

रणजीत लोक का निर्माण इंदौर में, महाकाल लोक जैसी भव्यता, 6 करोड़ से ज्यादा खर्च, सिंहस्थ से पहले होगा पूरा

इंदौर इंदौर में रणजीत हनुमान मंदिर का कायापलट होने जा रहा है। यहां रणजीत लोक बनाकर मंदिर का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण किया जाएगा। इस पर कुल 6  करोड़ रुपए खर्च होंगे। प्लान तैयार हो चुका है, टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी हो गई है। मंदिर के पुजारी पं. दीपेश व्यास ने कहा- रणजीत हनुमान मंदिर 135 साल से भी ज्यादा पुराना है। यहां इंदौर ही नहीं, आस-पास के जिलों से भी श्रद्धालु आते हैं। मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की संख्या हजारों में पहुंच जाती है। मंदिर प्रशासक एनएस राजपूत ने बताया कि रणजीत लोक तैयार होने के बाद श्रद्धालु मंदिर के पास बने बड़े मैदान से प्रवेश करेंगे। वहां से एक पाथ-वे के माध्यम से छोटी पार्किंग तक पहुंचेंगे। पाथ-वे में जिग-जैग पैटर्न पर रेलिंग लगाई जाएंगी। इनकी संख्या भीड़ के अनुसार घटाई या बढ़ाई जा सकेगी।इसके बाद श्रद्धालु दत्त मंदिर से होते हुए दर्शन की मुख्य लाइन में पहुंचेंगे। भगवान के दर्शन कर वहीं से वापस बाहर निकलेंगे। पाथ-वे की दीवारों पर रामायण और सुंदरकांड की झलक मंदिर प्रशासक राजपूत ने बताया- यहां सभी तरह के मौसम के मुताबिक व्यवस्थाएं जुटाई जाएंगी ताकि सर्दी, गर्मी और बारिश में भक्तों को परेशानी न हो। बैठने के लिए नई बेंच लगेंगी। बाउंड्रीवाल भी बनाई जाएगी।25 फीट का पाथ-वे बनेगा, इसकी दीवारों पर पत्थरों से भगवान हनुमान से जुड़े दृश्य उकेरे जाएंगे। रामायण और सुंदरकांड को तस्वीरों में दर्शाया जाएगा। छत पर कशीदाकारी, बाउंड्रीवॉल पर रंगबिरंगी रोशनी रणजीत लोक की छत पर भी कशीदाकारी की जाएगी। बाउंड्रीवॉल पर रंगबिरंगी लाइटिंग लगेगी। यहां भी सुंदरकांड का चित्रण होगा। मंदिर का एक्सटेंशन 40 फीट आगे तक होगा। नया मुख्य द्वार बनेगा। शेड तैयार किए जाएंगे।मंदिर परिसर में ही पुलिस चौकी बनाई जाएगी। नया जूता स्टैंड, पेय जल की व्यवस्था की जाएगी। बेबी फीडिंग रूम और बुजुर्गों के लिए अन्य सुविधाएं जुटाई जाएंगी। भक्त पाथ-वे के जरिए दर्शन करने जाएंगे। यहां एलईडी पर भगवान के लाइव दर्शन होंगे।स्मार्ट सिटी संभाल रहा निर्माण की जिम्मेदारी मंदिर प्रशासक राजपूत ने बताया- रणजीत लोक निर्माण की जिम्मेदारी नोडल एजेंसी इंदौर स्मार्ट सिटी को दी गई है। इसके लिए मंदिर के फंड और दान की राशि का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगले हफ्ते इसका काम शुरू किया जा चुका है। पांचवीं पीढ़ी संभाल रही पूजा-अर्चना का काम वर्तमान पुजारी पं. दीपेश व्यास के परदादा स्व. पं. भोलाराम व्यास इस मंदिर के संस्थापक पुजारी थे। उनकी पांचवीं पीढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना कर रही है। व्यास ने कहा- शुरुआत में बाबा रणजीत टीन से बने शेड में विराजमान थे। 1960 में गार्डर-फर्शी से पक्का निर्माण किया गया। 1992 में आरसीसी छत डाली गई। इंदौर स्मार्ट सिटी के पास जिम्मेदारी मंदिर प्रशासक एनएस राजपूत ने बताया- रणजीत लोक निर्माण की जिम्मेदारी नोडल एजेंसी इंदौर स्मार्ट सिटी को दी गई है। इसके लिए मंदिर के फंड और दान की राशि का उपयोग किया जाएगा। परिसर में पुलिस चौकी, बेबी फीडिंग रूम बनेगा रणजीत लोक की छत पर भी कशीदाकारी की जाएगी। बाउंड्रीवॉल पर रंगबिरंगी लाइटिंग लगेगी। यहां भी सुंदरकांड का चित्रण होगा। मंदिर का एक्सटेंशन 40 फीट आगे तक होगा। नया मुख्य द्वार बनेगा। शेड तैयार किए जाएंगे।मंदिर परिसर में ही पुलिस चौकी बनाई जाएगी। नया जूता स्टैंड, पेय जल की व्यवस्था की जाएगी। बेबी फीडिंग रूम और बुजुर्गों के लिए अन्य सुविधाएं जुटाई जाएंगी। 1960 में गर्डर-फर्शी से पक्का बनाया, 1992 में छत डाली मंदिर के पुजारी पं. दीपेश व्यास के परदादा पं. भोलाराम व्यास इस मंदिर के संस्थापक पुजारी थे। उनकी पांचवीं पीढ़ी मंदिर में पूजा-अर्चना कर रही है। पं. व्यास ने कहा- शुरुआत में बाबा रणजीत टीन से बने शेड में विराजमान थे। 1960 में गार्डर-फर्शी से पक्का निर्माण किया गया। 1992 में आरसीसी छत डाली गई। व्यास के अनुसार, होलकर राजा जब भी युद्ध के लिए जाते थे तो यहां पूजा-हवन करते थे। विजय की कामना के साथ यहां आते और फिर युद्ध के लिए जाते थे इसलिए मंदिर का नाम रणजीत हनुमान पड़ा। उन्होंने कहा- पौष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर यहां रणजीत अष्टमी मनाई जाती है। सुबह 5 बजे प्रभात फेरी निकाली जाती है। दिनभर पूजा-अर्चना और विशेष आरती की जाती है। 21 लाख रुपए के रथ पर सवार होकर रणजीत हनुमान नगर भ्रमण करते हैं। महाकाल लोक के बाद अब मध्यप्रदेश में हनुमान लोक नजर आएगा। इसका निर्माण सौंसर के जाम सांवली में होगा। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड 314 करोड़ की लागत से करीब 30 एकड़ में इसका निर्माण करवा रहा है। उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर 6 फेज में हनुमान लोक कॉरिडोर का काम होगा। फर्स्ट फेज में 35 करोड़ की लागत से एंट्रेंस प्लाजा से हनुमान लोक तक का काम किया जाएगा। हर साल इसलिए निकलती है प्रभात फेरी पुजारी पं. दीपेश व्यास का कहना है कि सीताजी के हरण के बाद वानर राज सुग्रीव के आदेश पर वानर सेना उनका पता लगाने गई थी। हनुमान जी उनका पता लगाकर लौटे थे। यह खबर जब भगवान राम ने सुनी तो उन्होंने कहा कि हनुमान तुम रण को जीतकर आए हो। लंका को जलाकर आए हो इसलिए आज से मैं तुम्हें रणजीत नाम प्रदान करता हूं। इसके बाद वहां लाखों वानरों ने हनुमान जी को कंधे पर बैठाकर पूरे जंगल में परिभ्रमण कराया था। इसी के प्रतीकात्मक स्वरूप पौष अष्टमी पर यह यात्रा निकलती है।