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मध्यप्रदेश: बिजली दरों में 10% से अधिक इजाफा, ग्राहकों पर खर्च का बोझ बढ़ेगा

भोपाल  मध्यप्रदेश में बिजली दरों में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि करने की तैयारी चल रही है। मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की टैरिफ पिटीशन मप्र विद्युत नियामक आयोग में लगाई है, जिसमें दावा किया गया है कि बिजली कंपनियां अपने घाटे की भरपाई के लिए यह वृद्धि करवाना चाहती हैं। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस बात की पुष्टि की है। सूत्रों के अनुसार, मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी ने तीनों डिस्काम की तरफ से 30 नवंबर से पहले यह पिटीशन आयोग को सौंप दी है। आयोग ने पिटीशन को स्वीकार भी कर लिया है। अब जल्द ही इस पर सार्वजनिक सूचना जारी कर जनसुनवाई की तारीख तय की जाएगी। तारीख कंपनी वार होगी। जनसुनवाई के बाद आयोग तय करेगा कि बिजली की दरों में कितनी वृद्धि या कमी की जाए। यदि बिजली दरों में वृद्धि तय होती है तो वित्तीय वर्ष 2026-27 में एक अप्रैल से इन्हें लागू किया जाएगा। मध्यप्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाला वित्तीय वर्ष महंगाई का नया झटका लेकर आ सकता है. राज्य में बिजली दरों में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की तैयारी शुरू हो गई है. मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विद्युत टैरिफ बढ़ाने की याचिका मप्र विद्युत नियामक आयोग में दाखिल कर दी है. टैरिफ पिटीशन स्वीकार, जल्द होगी जनसुनवाई सूत्रों के मुताबिक, तीनों डिस्कॉम की ओर से यह टैरिफ पिटीशन 30 नवंबर से पहले आयोग को सौंपी गई थी, जिसे नियामक आयोग ने स्वीकार कर लिया है. अब जल्द ही सार्वजनिक सूचना जारी कर कंपनीवार जनसुनवाई की तारीख तय की जाएगी. जनसुनवाई के बाद आयोग यह फैसला करेगा कि बिजली दरों में कितनी बढ़ोतरी या राहत दी जाए. यदि वृद्धि को मंजूरी मिलती है तो नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी. हजारों करोड़ के घाटे में बिजली कंपनियां राज्य की तीनों विद्युत वितरण कंपनियां भारी वित्तीय संकट से जूझ रही हैं. आंकड़ों के अनुसार— मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पर करीब 18,712 करोड़ रुपये का घाटा पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लगभग 16,378 करोड़ रुपये घाटे में पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पर 7,285 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान इसी घाटे की भरपाई को दर वृद्धि का मुख्य कारण बताया जा रहा है. पहले भी प्रस्ताव ज्यादा, मंजूरी कम पिछले पांच वर्षों में बिजली कंपनियों द्वारा प्रस्तावित दर वृद्धि और आयोग द्वारा स्वीकृत वृद्धि में बड़ा अंतर रहा है. 2021-22: प्रस्ताव 6.23%, मंजूरी 0.63% 2022-23: प्रस्ताव 8.71%, मंजूरी 2.64% 2023-24: प्रस्ताव 3.20%, मंजूरी 1.65% 2024-25: प्रस्ताव 3.86%, मंजूरी 0.07% 2025-26: प्रस्ताव 7.52%, मंजूरी 3.46% इस बार कंपनियों ने 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है, जिससे उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है. उपभोक्ताओं पर सीधा असर यदि प्रस्तावित बढ़ोतरी को मंजूरी मिलती है तो घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं की मासिक बिजली बिल राशि में उल्लेखनीय इजाफा हो सकता है. आने वाले दिनों में जनसुनवाई के दौरान उपभोक्ता संगठन और सामाजिक संस्थाएं अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगी. टैरिफ बढ़ोतरी से राहत उपभोक्ताओं को टैरिफ बढ़ोतरी से राहत मिलती रही है, लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग मानी जा रही हैं. 2023 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान आयोग ने बढ़ोतरी की मांग के मुकाबले बहुत कम वृद्धि स्वीकृत की थी. अब जबकि प्रदेश में सहकारिता चुनाव प्रस्तावित हैं, राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद बड़ी राहत की उम्मीद कम लग रही है. सूत्रों का अनुमान है कि इस बार दरें 4 से 6 प्रतिशत की सीमा में तय हो सकती हैं, जिससे नए साल में बिजली बिल बढ़ना लगभग निश्चित माना जा रहा है. 

भोपाल मध्यप्रदेश का दूसरा शहर जहां मेट्रो शुरू, एक दिन में 17 ट्रिप, तेज रफ्तार में यात्रा

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल आज  20 दिसंबर से मेट्रो सिटी बन जाएगी। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्‌टर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मेट्रो का उद्घाटन करेंगे। 6.22 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर मेट्रो में सवार होकर शहर को देखेंगे। पहले ही दिन से चुकाना होगा किराया आज 20 दिसंबर को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल मेट्रो को हरी झंडी दिखाएंगे. जबकि 21 दिसंबर से आम लोग इसमें यात्रा कर सकेंगे. भोपाल मेट्रो में यात्रा करने के लिए शहरवासियों को पहले दिन से ही किराया चुकाना होगा. इसके लिए भोपाल मध्य प्रदेश मेट्रो कॉर्पोरेशन भोपाल ने भोपाल मेट्रो का शेड्यूल भी जारी कर दिया है. खास बात यह है कि एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन पहुंचने में मेट्रो को महज 3 से 4 मिनट ही लगेंगे. सुबह 9 से शाम 7 बजे तक 17 राइड मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन के प्रबंध संचालक एस कृष्णा चैतन्य ने बताया, '' भोपाल मेट्रो का संचालन सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक किया जाएगा. इस दौरान सुभाष नगर से एम्स साकेत नगर तक मेट्रो की 17 राइड रहेगी. तय शेड्यूल के अनुसार सुभाष नगर स्टेशन से एम्स अस्पताल तक 9 राइड जबकि एम्स से सुभाष नगर तक 8 राइड रहेंगी. शुरुआत में एक ही मेट्रो का संचालन किया जाएगा. लेकिन यदि ट्रैफिक का दबाव बढ़ता है, तो और मेट्रो भी चलाई जा सकती हैं.'' भोपाल में पहले चरण में 27 मेट्रो ट्रेन चलनी है, इनमें से 8 मेट्रो ट्रेन भोपाल डिपो में पहुंच चुकी हैं. 6.22Km में 8 स्टेशन…शुरुआत सुबह 9 बजे से भोपाल में मेट्रो के दो प्रोजेक्ट चल रहे हैं। पहला ऑरेंज लाइन करोंद से एम्स के बीच 16.74 किलोमीटर लंबा है। वहीं दूसरा प्रोजेक्ट ब्लू लाइन 14.16 किलोमीटर भदभदा से रत्नागिरि तक है। दोनों के लिए डिपो सुभाष नगर में बना है। वहीं पुल बोगदा में जंक्शन बनेगा, यानी ट्रेनें यहां से क्रॉस होंगी। सबसे पहले ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर सुभाष नगर से एम्स तक 6.22 किमी की शुरुआत हो रही है। इसमें 8 स्टेशन (सुभाष नगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर, रानी कमलापति, डीआरएम ऑफिस, अलकापुरी और एम्स) शामिल हैं। एक रूट पर 75 मिनट के अंदर मेट्रो ट्रिप पूरी करेगी। एक दिन में कुल 17 ट्रिप होंगी, जिसमें एम्स से सुभाष नगर के बीच 9 और सुभाष नगर से एम्स के बीच 8 ट्रिप शामिल हैं। पहली ट्रेन सुबह 9 बजे से एम्स स्टेशन से चलेगी और आखिरी स्टेशन सुभाष नगर तक 40 मिनट में पहुंचेगी। वहीं आखिरी ट्रेन भी एम्स से ही शाम 5 बजे चलेगी, जो शाम 6.25 बजे सुभाष नगर पहुंच जाएगी। 3 जोन में बांटा किराया, अधिकतम 40 रुपए रहेगा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने भोपाल मेट्रो का किराया 3 जोन में बांटा है। इसमें कुल 8 स्टेशन हैं। पहले दो स्टेशन का किराया 20 रुपए है। 3 से 5 स्टेशन का 30 रुपए और 6 से 8 स्टेशन का किराया 40 रुपए लगेगा। उदाहरण के तौर पर यदि आप डीबी मॉल स्टेशन से रानी कमलापति स्टेशन जाते हैं तो आपको 20 रुपए चुकाने होंगे, लेकिन यदि आप एम्स तक की यात्रा कर रहे हैं तो आपको 40 रुपए किराया देना पड़ेगा। भोपाल मेट्रो का किराया कितना है? मेट्रो कॉर्पोरेशन के अधिकारियों ने बताया कि भोपाल मेट्रो का किराया भी अन्य शहरों के बराबर ही रहेगा. पहले दो मेट्रो स्टेशनों के लिए 20 रुपये का किराया तय किया गया है. जबकि 3 से 5 स्टेशन तक सफर करने के लिए 30 रुपये का किराया चुकाना होगा. वहीं 6 से 8 स्टेशनों तक यात्रा करने के लिए 40 रुपये भुगतान करना होगा. कॉर्पोरेशन के एमडी कृष्णा चैतन्य ने बताया कि ये किराया करीब 7.5 किलोमीटर की दूरी के लिए है. बाद में एम्स से करोंद तक जब मेट्रो का संचालन होगा, तब इसका अधिकतम किराया 70 रुपए रहेगा. भोपाल मेट्रो में फ्री राइड क्यों नहीं? अधिकारियों ने बताया कि इंदौर प्रदेश का पहला शहर था, जहां मेट्रो का संचालन सबसे पहले शुरु किया गया था. इसलिए वहां जाय राइड यानी एक सप्ताह तक बिना किराए के यात्रा करने की छूट थी. जबकि इसके बाद तीन महीने तक किराए में छूट दी गई थी. लेकिन भोपाल मेट्रो को लेकर सरकार की कोई प्रमोशनल पॉलिसी नहीं है, इसलिए भोपाल मेट्रो में यात्रियों को पहले दिन से ही किराया चुकाना होगा.

स्वास्थ्य तंत्र की मजबूत प्रतिबद्धता का परिणाम: एनीमिया मुक्त भारत में एमपी दो तिमाही से नंबर-1

एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम में लगातार 2 तिमाही से मध्यप्रदेश प्रथम यह उपलब्धि प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र की प्रतिबद्धता, समर्पण और टीमवर्क का प्रतिफल: उप मुख्यमंत्री शुक्ल वर्ष 2025-26 में 70 लाख से अधिक बच्चों और 9 लाख 42 हज़ार गर्भवती महिलाओं की जाँच 45 लाख महिलाओं एवं बच्चों को चिकित्सकीय उपचार भोपाल  मध्य प्रदेश में एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों एवं महिलाओं में रक्त की कमी को दूर करने के लिए निरंतर और समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं। एनीमिया मुक्त होने का अर्थ है कि बच्चों और महिलाओं के शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य हो, जिससे उनका शारीरिक एवं मानसिक विकास बेहतर तरीके से हो सके। यह कार्यक्रम मातृ एवं बाल स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में स्थापित हुआ है। प्रदेश में किए गए सतत और प्रभावी प्रयासों का सकारात्मक परिणाम यह रहा कि एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के अंतर्गत भारत सरकार की एचएमआईएस रैंकिंग में मध्य प्रदेश ने लगातार पिछली दो तिमाही में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र की प्रतिबद्धता, समर्पण और टीमवर्क का प्रतिफल है। उन्होंने अभियान से जुड़े समस्त चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं मैदानी अमले की सराहना करते हुए कहा कि इन सभी के अथक परिश्रम, संवेदनशीलता और सेवा भाव के कारण ही इतने व्यापक स्तर पर जांच, उपचार और जागरूकता संभव हो पाई है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सभी स्वास्थ्यकर्मियों को बधाई देते हुए अपेक्षा व्यक्त की कि वे इसी समर्पण के साथ कार्य करते हुए प्रदेश को पूर्ण रूप से एनीमिया मुक्त बनाने के लक्ष्य की ओर निरंतर अग्रसर रहेंगे। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान प्रदेश में दस्तक अभियान के प्रथम चरण का संचालन 22 जुलाई से 16 सितम्बर 2025 तक किया गया। इस अवधि में 6 माह से 59 माह तक के कुल 70.62 लाख बच्चों में डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर के माध्यम से हीमोग्लोबिन की जांच सुनिश्चित की गई। जांच के पश्चात लगभग 35.21 लाख अल्प एवं मध्यम एनीमिक बच्चों को आवश्यक चिकित्सकीय उपचार प्रदान किया गया, जबकि 3,575 गंभीर एनीमिया से ग्रस्त बच्चों को चिन्हांकित कर जिला स्तर पर रक्ताधान अथवा यथोचित प्रबंधन सुनिश्चित किया गया। अभियान के अंतर्गत प्रदेश की 9.42 लाख गर्भवती महिलाओं की एनीमिया जांच की गई। जांच के दौरान 3.02 लाख मध्यम से गंभीर तथा 10,660 अतिगंभीर एनीमिक महिलाओं को चिन्हांकित किया गया, जिन्हें आयरन एवं फोलिक एसिड (आई.एफ.ए.), आयरन सुक्रोश, एफ.सी.एम. तथा आवश्यकता अनुसार रक्ताधान के माध्यम से उपचारित किया गया। इन प्रयासों से गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ सुरक्षित मातृत्व को भी बढ़ावा मिला है। एनीमिया की रोकथाम एवं उपचार के लिए प्रदेश में अपनाई गई बहुआयामी रणनीति एनीमिया की रोकथाम एवं उपचार के लिए प्रदेश में बहुआयामी रणनीति अपनाई गई है, जिसमें आयरन और फोलिक एसिड की गोलियों एवं सिरप का नियमित वितरण, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, बच्चों में कृमि नियंत्रण (डिवॉर्मिंग) अभियान, पोषण युक्त आहार को बढ़ावा, किशोरियों के लिए साप्ताहिक आयरन सप्लीमेंटेशन, स्कूलों एवं आंगनवाड़ी केंद्रों में स्क्रीनिंग तथा पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता अभियानों का संचालन शामिल है। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य विभाग द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से सूचना एवं व्यापक प्रचार-प्रसार कर नागरिकों को जागरूक भी किया गया है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा एनीमिया मुक्त भारत अभियान की शुरुआत वर्ष 2018 में राष्ट्रीय पोषण मिशन (पोषण अभियान) के अंतर्गत की गई थी। इस अभियान का वर्तमान लक्ष्य मातृ एवं बाल स्वास्थ्य में सुधार लाना तथा बच्चों और महिलाओं को एनीमिया मुक्त बनाना है। मध्य प्रदेश में किए जा रहे समर्पित प्रयास इस लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं और एक स्वस्थ, सशक्त एवं सक्षम समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।  

भारत ने विकसित किया ब्रह्मास्त्र, 5th जेन जेट और हाई-टेक डिवाइस बनाने की तैयारी तेज

नई दिल्ली चीन जिसके दम पर दुनिया पर राज करना चाहता है और जिसपर उसकी सुपरमेसी है, अब उसका अंत होने वाला है. भारत के हाथ ऐसा ‘ब्रह्मास्‍त्र’ लगा है, जिससे ड्रैगन की मनमानी पर नकेल कसना आसान हो जाएगा. आंध्र प्रदेश की 974 किलोमीटर लंबी कोस्‍ट लाइन में रेयर अर्थ मैटिरियल्‍स का विशाल रिजर्व मिला है. एक्‍सपर्ट का कहना है कि आंध्र प्रदेश के समुद्री तटों पर जो रेयर अर्थ मैटिरियल्‍स मिले हैं, वे हाई-क्‍वालिटी के हैं. रेयर अर्थ मैटिरियल्‍स के बिना फाइटर जेट, स्‍मार्टफोन, मिसाइल, इलेक्ट्रिक व्‍हीकल आदि को बना पाना असंभव है. चीन का मौजूदा रेयर अर्थ मैटिरियल्‍स के 85 फीसद पर कब्‍जा है. अमेरिका के साथ टैरिफ वॉर को लेकर चीन ने इसके एक्‍सपोर्ट पर नकेल कस दी थी. ऐसे में भारत जैसे देशों में हाई क्‍वालिटी प्रोडक्‍ट्स के डेवलपमेंट पर बुरा असर पड़ा. मौजूदा हालात को देखते हुए भारत ने इस सेक्‍टर में आत्‍मनिर्भर बनने का फैसला किया है. इसके बाद से ही रेयर अर्थ मैटिरियल्‍स का पता लगाने के साथ ही उसके प्रोसेसिंग पर फोकस बढ़ गया है. आंध्र तट पर मिले भंडार का इस्‍तेमाल करने पर भारत 5th जेनरेशन फाइटर जेट के साथ ही iPhone जैसे कटिंग एज डिवाइस अपने दम पर बना सकेगा. साथ ही एक्‍सपोर्ट से बड़ी मात्रा में राजस्‍व भी अर्जित किया जा सकता है. आंध्र प्रदेश की 974 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा सिर्फ खूबसूरत समुद्र तटों और मछली पकड़ने के बंदरगाहों के लिए ही नहीं जानी जाती, बल्कि इसके नीचे छिपी रेत भारत के भविष्य के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है. श्रीकाकुलम से लेकर नेल्लोर तक फैले समुद्री किनारों की भारी और गहरी रेत में रेयर अर्थ मिनरल्स (दुर्लभ खनिज) का विशाल भंडार मौजूद है, जो ग्रीन एनर्जी, डिफेंस और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भारत की जरूरतें पूरी कर सकता है. समुद्री रेत में मोनाजाइट नामक खनिज बड़ी मात्रा में पाया जाता है. मोनाजाइट रेयर अर्थ एलिमेंट्स और थोरियम का प्रमुख स्रोत है. इसके अलावा इल्मेनाइट, रूटाइल, जिरकॉन, गार्नेट और सिलिमेनाइट जैसे मूल्यवान खनिज भी यहां मौजूद हैं. खास बात यह है कि आंध्र प्रदेश के तट से निकलने वाले मोनाजाइट में 55 से 60 प्रतिशत तक रेयर अर्थ ऑक्साइड पाया जाता है, जो वैश्विक स्तर पर हाई क्‍वालिटी का माना जाता है. इसमें 8 से 10 प्रतिशत थोरियम भी होता है, जिसे भारत के भविष्य के परमाणु रिएक्टरों के लिए संभावित ईंधन माना जा रहा है. रेयर अर्थ मिनरल्‍स का कहां-कहां इस्‍तेमाल?     फाइटर जेट     इलेक्ट्रिक व्‍हीकल     मिसाइल     स्‍मार्टफोन     टेलीविजन     पेंट     मेडिकल इक्विपमेंट्स कहां-कहां मिले हैं रेयर अर्थ मिनरल्‍स? इन खनिजों में लैंथेनम, सेरियम, नियोडिमियम, प्रसीओडिमियम, समेरियम और यूरोपियम जैसे हल्के रेयर अर्थ एलिमेंट्स शामिल हैं. ये तत्व इलेक्ट्रिक वाहनों के स्थायी मैग्नेट, पवन ऊर्जा टरबाइन, मिसाइल गाइडेंस सिस्टम, उपग्रह तकनीक, फाइबर ऑप्टिक्स और मॉडर्न मेडिकल इक्विपमेंट में अहम भूमिका निभाते हैं. जीयोलॉजिकल सर्वेक्षणों के अनुसार, आंध्र प्रदेश के तट पर भीमुनिपट्टनम, कलिंगपट्टनम, काकीनाडा, नरसापुर, मछलीपट्टनम, चिराला, वोडारेवु, रामयापट्टनम और दुगराजपट्टनम जैसे क्षेत्रों में लगातार खनिज बेल्ट फैली हुई है.  रिपोर्ट के अनुसार, अनुमान है कि भारत में कुल 30 करोड़ टन से अधिक भारी खनिज रेत भंडार है, जिसमें 1.2 से 1.5 करोड़ टन मोनाजाइट शामिल है. इसमें से 30 से 35 प्रतिशत हिस्सा अकेले आंध्र प्रदेश में होने का अनुमान है. लंबे समय तक ये समुद्री तट परमाणु नियमों, सीमित प्रोसेसिंग क्षमता और नीतिगत अड़चनों के कारण पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पाए. लेकिन अब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में तनाव बढ़ने और चीन पर निर्भरता कम करने की जरूरत के चलते आंध्र प्रदेश रणनीतिक रूप से केंद्र में आ गया है. फिलहाल चीन दुनिया की लगभग 85 प्रतिशत रेयर अर्थ प्रोसेसिंग क्षमता को नियंत्रित करता है. रेयर अर्थ मिनरल्‍स क्‍या होते हैं? रेयर अर्थ मिनरल्‍स कुल 17 तत्‍वों का समूह है, जिनमें नियोडिमियम, लैंथेनम, सेरियम, डिस्‍प्रोसियम और यट्रियम जैसे तत्‍व शामिल हैं. ये नाम से भले ही रेयर लगते हों, लेकिन ये धरती पर मिलते तो हैं, पर बहुत कम मात्रा में और अलग-अलग जगह बिखरे होते हैं. इन्‍हें निकालना और शुद्ध करना मुश्किल और महंगा होता है. रेयर अर्थ मिनरल्‍स को इतना अहम क्‍यों माना जा रहा है? क्‍योंकि आधुनिक तकनीक इन पर टिकी है. मोबाइल फोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक वाहन, पवन चक्‍की, सोलर पैनल, मिसाइल, रडार और सेमीकंडक्‍टर चिप्‍स तक में रेयर अर्थ मिनरल्‍स का इस्‍तेमाल होता है. बिना इनके आज की हाई-टेक दुनिया की कल्‍पना करना मुश्किल है. क्‍या आम आदमी की जिंदगी में भी इनका असर है? बिलकुल…आपके हाथ में मौजूद स्‍मार्टफोन का स्‍पीकर, हेडफोन के मैग्‍नेट, टीवी की स्‍क्रीन, एसी और फ्रिज जैसे घरेलू उपकरण- इन सबमें रेयर अर्थ मिनरल्‍स इस्‍तेमाल होते हैं. यानी ये सीधे-सीधे आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक वाहनों में इनकी क्‍या भूमिका है? हरित ऊर्जा के लक्ष्‍य पूरे करने में रेयर अर्थ मिनरल्‍स बेहद जरूरी हैं. पवन चक्‍कियों में लगने वाले ताकतवर मैग्‍नेट और इलेक्ट्रिक कारों की मोटर में नियोडिमियम और डिस्‍प्रोसियम जैसे तत्‍व लगते हैं. अगर इनकी सप्‍लाई बाधित होती है, तो ग्रीन एनर्जी और ईवी सेक्‍टर पर सीधा असर पड़ता है. रक्षा और राष्‍ट्रीय सुरक्षा के लिए ये कितने अहम हैं? रक्षा उपकरणों में रेयर अर्थ मिनरल्‍स की अहम भूमिका है. मिसाइल गाइडेंस सिस्‍टम, जेट इंजन, रडार और कम्‍युनिकेशन उपकरणों में इनका उपयोग होता है. यही वजह है कि कई देश इन्‍हें रणनीतिक खनिज मानते हैं और इनकी सप्‍लाई को राष्‍ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखते हैं. दुनिया में इनका सबसे बड़ा उत्‍पादक कौन है? फिलहाल चीन रेयर अर्थ मिनरल्‍स का सबसे बड़ा उत्‍पादक और प्रोसेसर है. वैश्विक सप्‍लाई का बड़ा हिस्‍सा चीन के हाथ में है. इसी कारण अमेरिका, यूरोप, जापान और भारत जैसे देश वैकल्पिक स्रोत खोजने और घरेलू उत्‍पादन बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं. भारत के लिए रेयर अर्थ मिनरल्‍स क्‍यों अहम हैं? भारत साफ ऊर्जा, सेमीकंडक्‍टर और रक्षा उत्‍पादन में आत्‍मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहा है. इसके लिए रेयर अर्थ मिनरल्‍स जरूरी हैं. देश की लंबी समुद्री तटरेखा और कुछ राज्‍यों में इनके भंडार मौजूद हैं, जिनका सही उपयोग भारत को रणनीतिक रूप से मजबूत बना सकता है. आंध्र प्रदेश ने क्‍या उठाया कदम? इस अवसर … Read more

मध्यप्रदेश से महाराष्ट्र तक इंदौर-मनमाड़ रेल, रेल मंत्रालय ने अधिसूचना जारी, मुआवजे पर विवाद

इंदौर  मध्यप्रदेश से महाराष्ट्र तक प्रस्तावित इंदौर-मनमाड़ रेलवे लाइन के लिए रेल मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर दी है। अगले 30 दिन में रेलवे लाइन के लिए होने वाले भूमि अधिग्रहण पर दावे और आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। परियोजना में इंदौर जिले की तहसीलों के 19 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी। किसान नेता हंसराज मंडलोई ने बताया कि इंदौर-मनमाड़ रेल परियोजना में जहां महाराष्ट्र सरकार चार गुना मुआवजा दे रही है, वहीं प्रदेश सरकार आदिवासी किसानों को केवल दोगुना मुआवजा दे रही है, जो असमानता को दर्शाता है। रेलवे प्रशासन इस परियोजना को अत्यंत महत्वपूर्ण बता रहा है। विभाग का दावा है कि इस लाइन के बनने से इंदौर-मुंबई की दूरी करीब 250 किलोमीटर कम हो जाएगी। वहीं तमिलनाडु से दिल्ली की दूरी लगभग 680 किलोमीटर घटेगी। महू से जम्मू-कश्मीर तक सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलने और गुजरात के यात्रियों को भी आवागमन में सुविधा बढ़ने का दावा किया जा रहा है। महू क्षेत्र के 18 गांव होंगे प्रभावित महू (डॉ. आंबेडकर नगर) से शुरू होकर महाराष्ट्र के मनमाड़ तक जाने वाली रेलवे लाइन में महू विधानसभा क्षेत्र के 18 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी। इन गांवों के करीब 243 आदिवासी किसानों की 131.49 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है। इंदौर-मनमाड़ रेल प्रोजेक्ट की कवायद वर्षों से चल रही है। वर्ष 2023 में टोकन राशि के रूप में दो करोड़ रुपये मिले थे। मप्र के हिस्से में डीपीआर-सर्वे का काम किया गया। काम जारी रखने के लिए 2024 के बजट में एक हजार रुपये की टोकन राशि दी गई थी। अब इस परियोजना के लिए 18 हजार 36 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है। वर्तमान में इंदौर से देवास, उज्जैन, रतलाम, थांदला, दाहोद, गोधरा और वडोदरा होते हुए मुंबई जाना पड़ता है, जिसकी दूरी 828 किलोमीटर है। नई रेल लाइन बनने से 188 किलोमीटर की दूरी कम होगी और करीब पांच घंटे का समय बचेगा। प्रदेश में 905 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण रेलवे लाइन से सबसे ज्यादा फायदा मध्यप्रदेश को मिलेगा। कुल 309 किलोमीटर में से 170.56 किलोमीटर का हिस्सा मप्र में है। इसमें प्रदेश की कुल 905 हेक्टेयर निजी जमीन शामिल है। मप्र में बनने वाले 18 स्टेशनों में महू, कैलोद, कमदपुर, झाड़ी बरोदा, सराय तालाब, नीमगढ़, चिक्तायाबड़, ग्यासपुरखेड़ी, कोठड़ा, जरवाह, अजंटी, बघाड़ी, कुसमारी, जुलवानिया, सलीकलां, वनिहार, बवादड़ और मालवा स्टेशन शामिल हैं।