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Russia–India Oil Trade: प्रतिबंधों से बाहर सप्लायरों से रूस का तेल खरीद रही रिलायंस

मुंबई  रूस से भारत को सस्ता तेल मिलता है, और भारत वर्षों से खरीदते आया है. लेकिन बीच में अमेरिकी विरोध के बाद भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना थोड़ा कम कर दिया था. लेकिन अब खबर है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने रूस से कच्चा तेल खरीदना फिर से शुरू कर दिया है. कुछ समय पहले मुकेश अंबानी की कंपनी ने रूसी तेल का आयात रोक दिया था, लेकिन अब दोबारा इसे मंगाया जा रहा है. यह तेल गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस की रिफाइनरी में इस्तेमाल किया जाएगा, जहां से पेट्रोल, डीजल और दूसरे ईंधन बनाए जाते हैं. दरअसल, अमेरिका ने रूस की कुछ बड़ी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे. इन प्रतिबंधों के बाद कई भारतीय कंपनियां रूसी तेल खरीदने में सावधानी बरतने लगी थीं. इसी वजह से रिलायंस ने भी कुछ समय के लिए रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया था. लेकिन अब कंपनी ऐसे सप्लायरों से तेल खरीद रही है, जो इन प्रतिबंधों के दायरे में नहीं आते.  अमेरिकी बैन का अब क्या होगा? बता दें,अमेरिकी प्रशासन ने 22 अक्टूबर को रूस के दो बड़े तेल उत्पादक Rosneft और Lukoil पर बैन लगाए थे और रिफाइनरी कंपनियों को इन आपूर्तिकर्ताओं के साथ अपने सौदों को पूरा करने के लिए महीनेभर का वक्त दिया था. उस आदेश के बाद Reliance ने कुछ समय के लिए रूसी तेल की खरीद रोक दी थी.  आयात फिर से शुरू होने से पहले Reliance को अमेरिकी प्रशासन से एक अतिरिक्त महीने की छूट भी प्राप्त हुई थी, ताकि वह पहले से किए गए करार के तहत प्राप्त जहाजों को रिसीव कर सके. इस एक महीने की अनुमति ने कंपनी को समयसीमा के भीतर पुराने सौदों को पूरा करने में मदद की है.  सौदे पूरा करने के लिए मिला था महीनेभर का वक्त रिलायंस रूसी तेल इसलिए भी खरीदता है, कि ये दूसरे देशों के मुकाबले सस्ता मिलता है. सस्ता तेल मिलने से कंपनी को ईंधन बनाने में लागत कम पड़ती है और देश को भी फायदा होता है. रिलायंस का यह कदम ऐसे समय आया है, जब भारत में रूसी तेल का आयात घटने लगा था. अगर रिलायंस जैसी बड़ी कंपनी खरीदारी दोबारा शुरू करती है, तो इससे भारत में रूसी तेल की हिस्सेदारी बनी रह सकती है. इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलती है. गौरतलब है कि भारत दुनिया का बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से खरीदता है. ऐसे में सस्ते तेल का विकल्प बहुत अहम होता है.   खबर के मुताबिक, यह तेल बड़े समुद्री जहाजों (टैंकरों) के जरिये भारत लाया जा रहा है. जामनगर रिफाइनरी दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक है और यहां हर रोज लाखों बैरल तेल रिफाइन किया जाता है. यहां बना ईंधन भारत के अलग-अलग हिस्सों में सप्लाई होता है.

Bajaj ने पेश की अपडेटेड Pulsar 150, जानें नए फीचर्स और कीमत

मुंबई   स्वदेशी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Bajaj Auto ने भारत में अपनी अपडेटेड Bajaj Pulsar 150 को लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इस मोटरसाइकिल को 1.09 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की शुरुआती कीमत पर उतारा गया है. कंपनी ने इस मोटरसाइकिल को तीन वेरिएंट में उतारा है. इनमें पहला Pulsar 150 SD, जिसकी कीमत 1.09 लाख रुपये है, Pulsar 150 SD UG, जिसकी कीमत 1.12 लाख रुपये है, और तीसरा Pulsar 150 TD UG है, जिसकी कीमत 1.15 लाख रुपये है. पिछले वर्जन की तुलना में, इसके बेस मॉडल की कीमत में 3,600 रुपये की मामूली बढ़ोतरी हुई है. यहां हम बताने जा रहे हैं कि इसमें पुराने मॉडल के मुकाबले क्या बदलाव हुए हैं. 2026 Bajaj Pulsar 150 का डिजाइन Classic Pulsar के लेटेस्ट अपडेट में कॉस्मेटिक और लाइटिंग में बदलाव किए गए हैं. Bajaj Pulsar 150 में अब नए ग्राफिक्स के साथ LED हेडलाइट और LED टर्न इंडिकेटर्स दिए गए हैं. इसके अलावा, इसमें नए पेंट स्कीम के साथ नए ग्राफिक्स भी मिलते हैं, जिसमें ऑरेंज हाइलाइट्स वाला ग्रीन कलर शामिल है. इसी कलर को अपडेटेड Bajaj Pulsar 220F में देखा गया था, और ब्लू, ग्रे और रेड ऑप्शन भी हैं, जिनमें से हर एक के साथ ब्लैक कलर दिया गया है. 2026 Bajaj Pulsar 150 का इंजन इसके स्पेसिफिकेशन्स के बारे में बात करें तो, Bajaj Pulsar 150 में पहले वाला इंजन ही मिलता है, जोकि एक 149cc, सिंगल-सिलेंडर एयर-कूल्ड इंजन है. यह इंजन 8,500 rpm पर 13.8 bhp की मैक्सिमम पावर और 6,500 rpm पर 13.4 Nm का अधिकतम टॉर्क प्रदान करता है. इस इंजन के साथ 5-स्पीड गियरबॉक्स मिलता है. इसके अलावा, मोटरसाइकिल में कोई बदलाव नहीं किया गया है. Bajaj Pulsar 150 लंबे समय से पल्सर ब्रांड के मुख्य पिलर्स में से एक रही है और बाइक ने कम्यूटर और स्पोर्टी कम्यूटर सेगमेंट में Bajaj Auto की मौजूदगी को बनाने में अहम भूमिका निभाई है. बदलते ट्रेंड और लाइनअप में नए मॉडल आने के बावजूद, Pulsar 150 काफी समय से काफी हद तक उसी रूप में बनी हुई है, जिसमें रास्ते में सिर्फ़ मामूली अपडेट किए गए हैं.

ग्रीन कैंपस की ओर कदम: बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी में IIT मॉडल पर शुरू हुए ई-रिक्शे

भोपाल  बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) परिसर को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। ग्रीन कैंपस अभियान के तहत विश्वविद्यालय को 5 ई-रिक्शे मिले हैं, जिनसे अब कैंपस के भीतर आवाजाही आसान, सस्ती और प्रदूषण मुक्त होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य बीयू परिसर को आईआईटी की तर्ज पर विकसित करना है, जहां हरित परिवहन को प्राथमिकता दी जाए। अब तक छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को परिसर के भीतर लंबी दूरी तय करने के लिए निजी वाहनों या ऑटो पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे न सिर्फ ईंधन की खपत बढ़ती थी, बल्कि प्रदूषण भी। ई-रिक्शा संचालन शुरू होने से कार्बन उत्सर्जन घटेगा और कैंपस में सुरक्षित व सुविधाजनक परिवहन विकल्प उपलब्ध होगा। एसबीआई का सहयोग, सीएसआर से मिली सौगात कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) के तहत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने बीयू को 5 ई-रिक्शे उपलब्ध कराए।  एसबीआई के महाप्रबंधक कुंदन ज्योति ने कुलगुरु प्रोफेसर एस.के. जैन को ई-रिक्शों की चाबियां सौंपीं। इस मौके पर कुल सचिव डॉ. अनिल शर्मा, डीजीएम साई कृष्णश्रीधर, फाइनेंस कंट्रोलर सगीरा सिद्दीकी और एसबीआई शाखा प्रबंधक पूजा गोयल भी मौजूद रहीं। साइकिल संस्कृति को भी मिलेगा बढ़ावा यह भी घोषणा की गई कि परिसर को और हरित बनाने के लिए विश्वविद्यालय को 15 साइकिलें दी जाएंगी। कुलगुरु प्रोफेसर एस.के. जैन ने बताया कि आने वाले समय में अलग–अलग विभागों में साइकिल उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि छात्र और कर्मचारी छोटी दूरी के लिए साइकिल का उपयोग कर सकें। ग्रीन कैंपस की ओर मजबूत कदम ई-रिक्शा और साइकिल के जरिए बीयू प्रशासन न केवल परिवहन व्यवस्था सुधार रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली को भी बढ़ावा दे रहा है। यह पहल विश्वविद्यालय को आईआईटी जैसे आधुनिक, स्वच्छ और हरित शैक्षणिक परिसरों की कतार में खड़ा करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।  

वीडियो विवाद के बाद बवाल: आसिम मुनीर के गुस्से का शिकार बना इमरान खान का पूर्व सलाहकार, लंदन में जानलेवा हमला

लंदन  पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी सहयोगी और पूर्व जवाबदेही सलाहकार मिर्जा शहजाद अकबर पर ब्रिटेन के कैम्ब्रिज में उनके घर के पास नकाबपोश हमलावरों ने जानलेवा हमला किया। हमले में अकबर के चेहरे पर कई मुक्के मारे गए, जिससे उनकी नाक दो जगहों से टूट गई और जबड़े में हेयरलाइन फ्रैक्चर हो गया। वे गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनका इलाज चल रहा है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे सुनियोजित हमला करार दिया। पार्टी के अनुसार, हमलावर मास्क, दस्ताने और ओवरकोट पहने हुए था जो पहले से प्लानिंग का संकेत देता है। पीटीआई का दावा है कि हमला पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के इशारे पर किया गया, क्योंकि अकबर उनकी कट्टर आलोचना करते रहे हैं। वायरल भाषण के बाद हमला हमला ऐसे समय हुआ जब अकबर का एक हालिया भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था। लंदन में पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर एक प्रदर्शन में अकबर ने मुनीर पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि मुनिर पिछले साढ़े तीन वर्षों से पाकिस्तान को डर और आतंक से चला रहे हैं। अकबर ने अपने भाषण में कहा- उन्होंने हमारे घरों पर हमला किया, हमारे प्रियजनों को अगवा किया, हमें और हमारे नेताओं को अगवा किया। हर तरह की ज्यादतियां कीं ताकि हममें डर पैदा हो। अगर वे सफल होते तो आज हम यहां बड़ी संख्या में न होते। अगर उनका डर फैल जाता तो अदियाला जेल के बाहर इमरान खान की तीन बहनें न बैठी होतीं। इसका मतलब है कि वे असफल हो चुके हैं। उन्होंने मुनीर पर व्यंग्य करते हुए कहा- डर और आतंक उस व्यक्ति में फैल गया है जो अभी भी अपनी यूनिफॉर्म के नीचे बुलेटप्रूफ जैकेट पहनता है। पीटीआई का कहना है कि यह हमला इसी भाषण का बदला है और इसे सिलसिलेवार दमन का मामला बताया जा रहा है। पार्टी ने ब्रिटिश पुलिस से पूरी जांच की मांग की है। प्रत्यर्पण की कोशिशें और पुराना हमला अकबर 2022 में इमरान खान की सरकार गिरने के बाद से ब्रिटेन में स्व-निर्वासन में रह रहे हैं। पाकिस्तान सरकार उन्हें विभिन्न मामलों में आरोपी मानती है और हाल ही में उनका प्रत्यर्पण मांग रही है। दिसंबर में पाकिस्तानी गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने ब्रिटिश अधिकारियों को प्रत्यर्पण दस्तावेज सौंपे थे, जिसमें नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (एनएबी), फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एफआईए) और अन्य जांचों के केस शामिल हैं। पाकिस्तानी अदालत ने अकबर को भगोड़ा घोषित किया है। यह अकबर पर ब्रिटेन में दूसरा हमला है। 2023 में हर्टफोर्डशायर में उनके घर पर एसिड अटैक हुआ था, जिसमें उनके चेहरे, सिर और बांह पर जलन के निशान पड़ गए थे। उस हमले के बाद उन्होंने पाकिस्तानी सरकार पर आरोप लगाए थे, लेकिन ब्रिटिश पुलिस जांच बंद कर चुकी है। अकबर के समर्थकों और पीटीआई ने इसे पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व द्वारा विदेशों में आलोचकों को निशाना बनाने का उदाहरण बताया है। मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है कि राजनीतिक असहमति को दबाने के लिए ट्रांसनेशनल दमन बढ़ रहा है। ब्रिटिश पुलिस ने हमले की जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज आदि सुरक्षित कर लिए हैं। अकबर ने हमले के बाद कहा कि वे घायल हैं लेकिन हतोत्साहित नहीं। वे पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।

आतंकी साजिश की आशंका से पंजाब में हड़कंप, इनपुट मिलते ही एजेंसियां सतर्क

गुरदासपुर  एक वरिष्ठ राज्य पुलिस अधिकारी ने कहा कि मिलिट्री इंटैलिजैंस (एम.आई) से एक अलर्ट मिला है कि पाकिस्तान की गुप्तचर एजैंसी समर्थित दुश्मन तत्व पाकिस्तान से भारतीय पंजाब में घुसने और सैन्य ठिकानों पर आतंकवादी हमला करने की कोशिश कर सकते हैं। जानकारी के अनुसार पाकिस्तान के साथ अंतरर्राष्ट्रीय सीमा से पठानकोट और आसपास के इलाकों की ओर जाने वाली सड़कों पर विशेष चैक पॉइंट बनाए गए हैं और इलाके में अतिरिक्त बल भी भेजा गया है। खुफिया एजैंसियों ने मंगलवार को पंजाब में पाकिस्तान की आई.एस.आई. द्वारा अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से संभावित घुसपैठ की कोशिश को लेकर अलर्ट जारी किया, जिसके बाद पंजाब पुलिस ने सुरक्षा तैयारियों को बढ़ा दिया है। अधिकारी ने कहा, तदनुसार हमने अपनी अलर्ट की स्थिति बढ़ा दी है और इन इनपुट को गंभीरता से ले रहे हैं। अधिकारी ने कहा, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बी.एस.एफ.) और पंजाब पुलिस पंजाब में किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोशिश को नाकाम करने के इन प्रयासों में समन्वय कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि 27 जुलाई, 2015 को भारतीय सेना की वर्दी पहने 3 भारी हथियारों से लैस आतंकवादी पाकिस्तान से गुरदासपुर जिले में घुस आए थे। कहा जाता है कि वह रावी नदी सीमा के पास से घुसे थे। उन्होंने सुबह करीब 5.30 बजे एक कार को हाईजैक करके, सडक़ किनारे एक विक्रेता पर गोलीबारी करके, चलती पंजाब रोडवेज बस पर हमला कर यात्रियों को घायल किया। फिर दीनानगर पुलिस स्टेशन पर धावा बोलकर अपना हमला शुरू किया। उन्होंने अमृतसर-पठानकोट लाइन पर पास के एक रेलवे ट्रैक पर पांच बम भी लगाए थे, जिन्हें बाद में डिफ्यूज कर दिया गया। इस हमले में तीन आम नागरिकों और चार पुलिस कर्मियों समेत सात लोग मारे गए। पंजाब पुलिस ने तब सेना की मदद से करीब 120 घंटे तक चले गनफाइट के बाद तीनों आतंकवादियों को मार गिराया। इसी तरह 2 जनवरी, 2016 को, जैश-ए-मोहम्मद के भारी हथियारों से लैस आतंकवादी, जो आर्मी की वर्दी पहने हुए थे, पठानकोट में इंडियन एयर फोर्स बेस की बाउंड्री में घुस गए। उन्होंने रास्ते में एक पंजाब पुलिस के एस.पी. रैंक के अधिकारी की गाड़ी अगवा कर ली। गनफाइट कई दिनों तक चली, और सर्च ऑपरेशन 5 जनवरी तक जारी रहा। सफाई अभियान के दौरान एक हुए ब्लास्ट में एक सैनिक अधिकारी सहित सात भारतीय सुरक्षाकर्मी मारे गए। तक सभी आतंकवादियों को मार गिराया गया।

नशे के कारोबार पर करारा प्रहार, पुलिस ने बरामद की चरस, लाखों की नकदी और हथियार

मनेर पटना जिले के मनेर थाना क्षेत्र में ड्रग्स कारोबार के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ड्रग्स माफियाओं के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है। गुप्त सूचना के आधार पर दानापुर डीएसपी-2 अमरेंद्र कुमार झा के नेतृत्व में मनेर पुलिस ने मनेर सरकारी अस्पताल मोड़ के पास ड्रग्स माफियाओं के तीन से चार घरों में छापा मारकर भारी मात्रा में मादक पदार्थ, नकदी और हथियार बरामद किए हैं। पुलिस की इस कार्रवाई में करीब 500 ग्राम ड्रग्स, 500 ग्राम चरस, एक देसी कट्टा, कुछ मैगजीन, लगभग 12 लाख रुपये नकद, इसके अलावा सोने-चांदी के गहने बरामद किए गए हैं। छापेमारी के दौरान एक महिला समेत कुल पांच लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है और उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। जानकारी के अनुसार, मनेर नगर परिषद क्षेत्र के मनेर सरकारी अस्पताल मोड़ के पास स्थित एक चाय दुकान में ड्रग्स कारोबार की सूचना मिलने पर पुलिस ने विशेष रूप से कार्रवाई की। चाय दुकानदार से जुड़े कई घरों में पुलिस टीम ने घंटों तक तलाशी अभियान चलाया और घर के सामानों को बारीकी से खंगाला। इस दौरान अलग-अलग घरों से मादक पदार्थों के साथ कुछ शराब, हथियार और कीमती सामान भी बरामद किए गए। पुलिस ने जिन लोगों को हिरासत में लिया है, उनमें बस्ती रोड निवासी पवन कुमार का पुत्र वीरू कुमार, अस्पताल मोड़ निवासी शुभभ गुप्ता, एक महिला ड्रग्स कारोबारी समेत कुल पांच लोग शामिल हैं। सभी से पूछताछ के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मामले की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे पश्चिमी सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह ने ड्रग्स माफियाओं से खुद भी मामले को लेकर विस्तृत पूछताछ की। सिटी एसपी पश्चिम भानु प्रताप सिंह ने बताया कि छापेमारी में मादक पदार्थों के साथ बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई है। पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के लिए एक विशेष टीम गठित कर आगे भी छापेमारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि फिलहाल महिला समेत करीब पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है और मामले की गहन जांच जारी है।  

भारतीय सेना की सोशल मीडिया पॉलिसी में बड़ा बदलाव, जवानों की इंस्टाग्राम पोस्टिंग पर रोक

नई दिल्ली  भारतीय सेना ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर अपनी नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब सेना के जवान और अधिकारी इंस्टाग्राम का उपयोग केवल देखने और निगरानी के उद्देश्य से कर सकेंगे। वे किसी भी प्रकार की पोस्ट नहीं कर पाएंगे और न ही किसी पोस्ट को लाइक या उस पर टिप्पणी कर सकेंगे। सूत्रों के मुताबिक, डिजिटल गतिविधियों को लेकर सेना के लिए पहले से लागू सभी अन्य नियम यथावत रहेंगे। सूत्रों ने बताया कि ये निर्देश सेना की सभी यूनिटों और विभागों को जारी कर दिए गए हैं। इसका उद्देश्य सैनिकों को सोशल मीडिया पर मौजूद सामग्री को देखने, उससे अवगत रहने और सूचनाएं जुटाने की सीमित अनुमति देना है, ताकि वे फर्जी या भ्रामक कंटेंट को पहचान सकें। नई व्यवस्था के तहत, सैनिक यदि सोशल मीडिया पर किसी फर्जी, भ्रामक या संदिग्ध पोस्ट को देखते हैं तो वे उसकी जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दे सकेंगे। इससे सूचना युद्ध और दुष्प्रचार के खिलाफ सेना की आंतरिक सतर्कता को मजबूत करने में मदद मिलेगी। भारतीय सेना समय-समय पर फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के इस्तेमाल को लेकर दिशा-निर्देश जारी करती रही है। सुरक्षा कारणों से पहले इन पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे। हनी ट्रैप और सूचना लीक के चलते सख्ती इन सख्त नियमों की पृष्ठभूमि में ऐसे कई मामले सामने आए थे, जिनमें विदेशी एजेंसियों द्वारा बिछाए गए ‘हनी ट्रैप’ में फंसकर कुछ सैनिकों से अनजाने में संवेदनशील जानकारियां लीक हो गई थीं। इसी को देखते हुए सोशल मीडिया पर नियंत्रण को आवश्यक माना गया। हाल ही में भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने चाणक्य डिफेंस डायलॉग के दौरान सेना कर्मियों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर अपने विचार साझा किए थे। कार्यक्रम के दौरान उनसे पूछा गया कि जेनरेशन-Z के युवा सेना में आना चाहते हैं, लेकिन सेना और सोशल मीडिया के बीच एक विरोधाभास दिखाई देता है। इस पर जनरल द्विवेदी ने कहा, “यह वास्तव में एक चुनौती है। जब युवा कैडेट NDA आते हैं, तो सबसे पहले अपने कमरों में छिपे फोन ढूंढते हैं। उन्हें यह समझाने में तीन से छह महीने लगते हैं कि फोन के बिना भी जीवन है।” हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आज के दौर में स्मार्टफोन एक अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा, “मैं सैनिकों को स्मार्टफोन से कभी मना नहीं करता। हम अक्सर फील्ड में रहते हैं। बच्चे की स्कूल फीस भरनी हो, माता-पिता की तबीयत जाननी हो या पत्नी से बात करनी हो, ये सब फोन के जरिए ही संभव है।” सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देने को लेकर सेना प्रमुख ने कहा कि ‘रिएक्ट करना’ और ‘रिस्पॉन्ड करना’ दो अलग बातें हैं। उन्होंने बताया, “रिएक्ट करना मतलब तुरंत जवाब देना, जबकि रिस्पॉन्ड करना मतलब सोच-समझकर जवाब देना। हम नहीं चाहते कि हमारे सैनिक जल्दबाजी में किसी बहस में उलझें। इसलिए उन्हें एक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर सिर्फ देखने की अनुमति दी गई है, जवाब देने की नहीं।” पहले भी लग चुके हैं कड़े प्रतिबंध 2017 में तत्कालीन रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने संसद को बताया था कि ये दिशा-निर्देश सूचनाओं की सुरक्षा और उनके दुरुपयोग को रोकने के लिए बनाए गए हैं। 2019 तक सेना के जवान किसी भी सोशल मीडिया ग्रुप का हिस्सा नहीं बन सकते थे। 2020 में नियम और सख्त किए गए और सैनिकों को फेसबुक व इंस्टाग्राम समेत 89 मोबाइल ऐप्स हटाने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, इसके बावजूद सेना ने कुछ प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, यूट्यूब, एक्स, लिंक्डइन, क्वोरा, टेलीग्राम और व्हाट्सऐ के सीमित इस्तेमाल की अनुमति दी, वह भी कड़े निगरानी तंत्र के तहत।  

पेसा एक्ट को दी हरी झंडी, रांची में आदिवासी समुदाय में उल्लास का माहौल

रांची झारखंड में पेसा नियमावली लागू होने की खुशी में रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर आदिवासी-मूलवासी समाज की ओर से भव्य जश्न मनाया गया। सैकड़ों की संख्या में जुटे लोगों ने राज्य सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हुए उत्साहपूर्वक खुशी जाहिर की। केंद्रीय सरना समिति के नेतृत्व में कार्यक्रम के दौरान पटाखे फोड़े गए, एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाइयां दी गईं और नारेबाजी के साथ उत्सव मनाया गया। मौके पर मौजूद लोगों ने इस फैसले को आदिवासी समाज के अधिकारों की दिशा में मील का पत्थर बताया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अजय तिर्की ने कहा कि पेसा नियमावली आदिवासी स्वशासन, आत्मनिर्भरता और अधिकारों की मजबूत रीढ़ है। उन्होंने कहा कि इस नियमावली के तहत ग्रामसभा को सर्वोच्च निर्णयकारी संस्था का दर्जा दिया गया है, जिससे अब गांव से जुड़े विकास कार्य, योजनाएं और नियम ग्रामसभा की सहमति से ही लागू होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जल, जंगल, जमीन, खनिज एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और उपयोग का अधिकार ग्रामसभा को मिलना आदिवासी समाज के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे आदिवासी समुदाय को अपने संसाधनों और भविष्य पर अधिकार मिलेगा लक्ष्मी नारायण मुंडा ने राज्य सरकार के इस फैसले को सराहनीय बताते हुए कहा कि इससे आदिवासी समुदाय को अपने संसाधनों और भविष्य पर अधिकार मिलेगा। इस अवसर पर विजय कच्छप, प्रकाश हंस, अनिल पुरती, कृष्णा लोहरा, संजय लोहरा, श्यामलाल, गौतम उरांव, अजय कच्छप, बाहा उरांव, कृष्णा मुंडा, डब्लू कच्छप, माना, अशोक कच्छप, पुष्पा कुमारी सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।  

बिना भेदभाव विकास ही असली सेकुलरिज्म, योजनाओं को लेकर पीएम का बड़ा संदेश

लखनऊ  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रेरणा स्थल का लोकार्पण करने के बाद कहा कि बिना भेदभाव सभी को योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। यही असली सेकुलरिज्म है। राजधानी लखनऊ में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के मौके पर पीएम मोदी ने यहां बनी तीन विभूतियों पूर्व पीएम भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पं. दीन दयाल उपाध्याय की कांस्य की भव्य प्रतिमाओं का अनावरण किया। प्रतिमाओं पर पुष्प डालकर श्रद्धांजलि अर्पित की। मूर्तियों का अनावरण करने के बाद पीएम मोदी भारत माता की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। इसके बाद म्यूजियम पहुंचे। यहां तीनों महापुरुषों के जीवन पर केंद्रित चलचित्र को देखा। मंच पर पीएम मोदी के पहुंचते ही वंदेमातरम से स्वागत किया गया। सीएम योगी ने अटल जी की मूर्ति देकर पीएम मोदी का अभिनंदन किया। पीएम मोदी के साथ राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, यूपी भाजपा के अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी के साथ ही दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे। यहां से मंच पर पहुंचे और प्रेरणा स्थल का उद्घाटन किया। पीएम मोदी ने कहा कि यूपी में सुहेलदेव का स्मारक तब बना जब भाजपा की सरकार बनीं। राजा महेंद्र प्रताप सिंह से लेकर चौरीचौरा के शहीदों को भाजपा की सरकार ने ही पूरी श्रद्धा से याद किया। परिवारवादियों की सरकार की विशेष पहचान होती है। दूसरो की लकीर छोटी करने की सोच ने ही भारत में राजनीति को दूषित किया है। कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने भाजपा को अछूत बनाए रखा लेकिन हमने सभी का सम्मान करना सिखाते हैं। पिछले 11 वर्षों में नरसिंहराव और प्रणव बाबू को भारत रत्न दिया गया। यह हमारी सरकार है जिसने मुलायम सिंह और तरुण गोगोई जैसे नेताओं को सम्मान दिया है। यहां सपा से कोई ऐसा उम्मीद भी नही कर सकता है। इनके राज में भाजपा नेताओं को केवल अपमान ही मिलता था। पीएम मोदी ने कहा कि हमें नहीं भूलना चाहिए कि आजादी के बाद कैसे एक ही परिवार के गुणगान की परंपरा चली है। एक ही परिवार की मूर्तियां, एक ही परिवार की किताब बनाई गई। आज हमारी सरकार हर किसी को सम्मान दे रही है। आज नेताजी की प्रतिमा दिल्ली में है। दिल्ली में कांग्रेस के शाही परिवार ने अपमान किया। यही काम सपा ने यहां किया। भाजपा ने आंबेडकर की विरासत को मिटने नहीं दिया। आजादी के बाद से ही सरदार पटेल के कद को छोटा करने का काम किया। भाजपा ने सरदार पटेल की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाई। पीएम मोदी ने कहा कि यूपी एक्सप्रेसवे के रूप में पहचान बना रहा है। अटल जी ने ही दिल्ली में मेट्रो की शुरुआत की थी। आज मेट्रो देशभर में फैल रहा है। अटल जी, दीनदयाल, श्यामा प्रसाद की प्रेरणा विकसित भारत का बहुत बड़ा आधार है। इन्ही प्रतिमाएं हमें उर्जा दे रही हैं। पीएम मोदी ने कहा कि बिना भेदभाव सभी को पक्का घाट, बिजली, शौचालय, गैस मिल रहा है। यही असली सेकुलरिज्म है। करोड़ों भारतीयों ने गरीबी को हराया है। यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि भाजपा सरकार ने जो पीछे छूट गया था, उसे प्राथमिकता दी है। जो अंतिम पंक्ति में था, उसे प्राथमिकता दी है। पहले 25 करोड़ समाजिक सुरक्षा में थे और 85 करोड़ को लाभ मिल रहा है। पहले बैंक खाते कुछ ही लोगों के होते थे। उसी तरह बीमा भी कुछ ही लोगों को मिलता था। हमारी सरकार ने अंतिम व्यक्ति तक बीमा पहुंचाया गया है। आज इस स्कीम से 25 करोड़ से ज्यादा गरीब जुड़े हैं। पीएम मोदी ने कहा कि डॉक्टर मुखर्जी ने ही दो विधान… को खारिज किया था। जम्मू कश्मीर में यह व्यवस्था भारत की अखंडता के लिए चुनौती थी। हमारी सरकार को धारा 370 की दीवार को गिराने का सौभाग्य मिला। स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग मंत्री के रूप मे भारत को औद्योगिक नीति दी। उसी नीति को हम नई बुलंदी दे रहे हैं। मेड इन इंडिया का सामान पूरी दुनिया में पहुंच रहा है। एक तरफ एक जनपद एक उत्पाद का अभियान चल रहा है। छोटी-छोटी इकाइयों का सामार्थ्य बढ़ रहा है। दूसरी तरफ डिफेंस कॉरिडोर के द्वारा आत्मसम्मान बढ़ रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि यहां पर पहले कूड़े का ढेर जमा था। उसे खत्म करने वालों को बहुत बहुत बधाई देता हूं। पीएम मोदी ने कहा कि यह राष्ट्र प्रेरणा स्थल संदेश देता है कि हमारा हर प्रयास राष्ट्र निर्माण के लिए सम्मिलित है। सभी का प्रयास ही विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करेगा। पीएम मोदी ने कहा कि यह राष्ट्र प्रेरणा स्थल उस सोच का प्रतीक है जिसने भारत को आत्म सम्मान, एकता और सेवा का मार्ग दिखाया है। डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय जी और अटल जी की प्रतिमाएं जितनी ऊंची हैं, उससे मिलने वाली प्रेरणा उससे भी ऊंची हैं। पीएम मोदी ने कहा कि आज का दिन अटल बिहारी वाजपेयी और महामना मदन मोहन मालवीय की जयंती का अद्भुत संयोग लेकर आता है। दोनों ने राष्ट्र सेवा में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। आज ही महाराजा बिजली पासी की भी जन्म जयंती है। लखनऊ का प्रसिद्ध बिजली पासी ने वीरता और सुशासन की जो विरासत छोड़ी उसे हमारे पासी समाज ने गौरव केसाथ आगे बढ़ाया। यह भी संयोग है कि अटल जी ने ही महाराजा बिजली पासी के सम्मान में डाक टिकट जारी किया था। पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरूआत तीन बात भारत माता की जय के साथ की। उन्होंने कहा कि यह लखनऊ की धरती नई प्रेरणा की साक्षी बन रही है। इसके साथ ही पीएम मोदी ने लोगों को क्रिसमस की बधाई भी दी। कहा कि क्रिसमस का उत्सव सभी के जीवन में खुशियां लाए, यह सभी की कामना है।

क्रिसमस से पहले मैग्नेटो मॉल में हंगामा, भीड़ ने सजावट को पहुंचाया नुकसान

रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मैग्नेटो मॉल में बुधवार को एक चौंकाने वाली घटना हुई। लाठी-डंडों से लैस करीब 80-90 लोगों की भीड़ मॉल में घुस आई और क्रिसमस की सजावट को तहस-नहस कर दिया। यह घटना उस दिन हुई जब राज्य में धार्मिक रूपांतरण के आरोपों के खिलाफ बंद का आह्वान किया गया था। भीड़ ने नहीं मानी सुरक्षा गार्ड्स की रोक खबर के मुताबिक, भीड़ ने क्रिसमस ट्री, लाइट्स और अन्य सजावट को तोड़ दिया। सुरक्षा गार्ड्स ने रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन वे असफल रहे। मॉल के एक कर्मचारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, 'हम पिछले 16 साल से हर बंद का समर्थन करते आए हैं, लेकिन ऐसा व्यवहार कभी नहीं देखा। भीड़ ने हमें धमकाया और हिंसा की।' एक अन्य कर्मचारी ने बताया, 'कई महिलाएं रोने लगीं। जो भी रोकने की कोशिश करता, भीड़ उस पर टूट पड़ती। लोग बार-बार चिल्ला रहे थे कि वे सांता नहीं देखना चाहते। फिल्म देखने आए दर्शक डरकर भागने लगे।' बंद की वजह सरवा हिंदू समाज ने कथित धार्मिक रूपांतरण के खिलाफ राज्यव्यापी बंद बुलाया था। इसका मुख्य कारण कांकेर जिले के बड़ेतेवड़ा गांव में हुआ विवाद था। 16 दिसंबर को गांव के सरपंच राजमन सलाम ने अपने पिता का शव ईसाई रीति से अपनी निजी जमीन पर दफनाया। इससे नाराज भीड़ ने प्रेयर हॉल में तोड़फोड़ की और सामान जला दिया। 18 दिसंबर को दो समुदायों में झड़प हुई। पत्थरबाजी में 20 से ज्यादा पुलिसकर्मी सहित कई लोग घायल हो गए। बाद में कानूनी प्रक्रिया से शव निकालकर कब्रिस्तान में दफनाया गया। इस घटना ने पूरे राज्य में तनाव बढ़ा दिया। राज्य में बंद का मिला-जुला असर बंद को शहरों में अच्छा समर्थन मिला। रायपुर सहित कई शहरी इलाकों में दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका असर कम रहा। कुछ जगहों पर तोड़फोड़ की छिटपुट घटनाएं हुईं, लेकिन ज्यादातर इलाकों में शांति बनी रही।