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सरगुजा ओलंपिक में आदिवासी अंचल की खेल प्रतिभाओं को 12 खेल प्रतियोगिताओं में मिलेगा नया मंच

रायपुर. सरगुजा संभाग अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है, यह क्षेत्र खेल प्रतिभाओं से परिपूर्ण माना जाता है। यहां के युवाओं में खेलों के प्रति स्वाभाविक रुचि और अपार क्षमता को पहचानकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सरगुजा ओलंपिक 2025-26 का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप तथा खेल मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री (खेल एवं युवा कल्याण विभाग) अरुण साव के मार्गदर्शन में आयोजित यह प्रतियोगिता आदिवासी अंचल के युवाओं को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सुनहरा अवसर प्रदान करेगी। सरगुजा ओलंपिक 2025-26 निश्चित रूप से क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा। इस आयोजन का उद्देश्य शासन और जनता के बीच मजबूत एवं प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करते हुए युवाओं की रचनात्मक और खेल प्रतिभा को निखारना है। सरगुजा ओलंपिक में कुल 12 खेलों की प्रतियोगिताएं विकासखण्ड, जिला एवं संभाग स्तर पर आयोजित की जाएंगी। आयोजन की प्रमुख तिथियां – सरगुजा ओलंपिक में खेल के 12 विधाओं में पंजीयन अवधिः 28 दिसम्बर 2025 से 12 जनवरी 2026 तक किया जा सकता है l विकासखण्ड स्तरीय आयोजनः 15 जनवरी 2026 से 18 जनवरी 2026 जिला स्तरीय आयोजनः 22 जनवरी 2026 से 25 जनवरी 2026 संभाग स्तरीय आयोजनः 28 जनवरी से 31 जनवरी 2026 (उक्त तिथियां खेल एवं युवा कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ की अनुमति के पश्चात परिवर्तनीय हो सकती हैं।) सरगुजा ओलंपिक हेतु ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पंजीयन की सुविधा प्रदान की गई है। ऑनलाइन पंजीयन लिंक https://rymc.cg.gov.in/sargujaOlympic2025/ के माध्यम से तथा ऑफलाइन पंजीयन कार्यालयों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। कलेक्टरों ने विकासखण्ड, जिला एवं प्रत्येक गांव से अधिक से अधिक युवाओं का पंजीयन सुनिश्चित करने, समुचित आयोजन संचालन तथा जिला स्तर पर कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं। सरगुजा ओलंपिक में कुल 12 खेल प्रतियोगिताओं में व्यक्तिगत खेल अंतर्गत एथलेटिक्स (100 मी., 200 मी., 400 मी., लंबी कूद, ऊंची कूद, शॉटपुट, डिस्कस थ्रो, जैवेलिन थ्रो, 400 मी. रिले) तीरंदाजी (इंडियन राउंड), बैडमिंटन, कुश्ती एवं कराते शामिल हैं। इसके अलावा दलीय खेल में फुटबॉल, हॉकी, कबड्डी, खो-खो, बॉलीबॉल, रस्साकसी और बास्केटबॉल शामिल हैं। इस ओलंपिक में सरगुजा संभाग के सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर एवं जशपुर जिले के खेल में रुचि रखने वाले प्रतिभागी भाग ले सकेंगे l

5142 करोड़ की अमृत 2.0 योजना फेल? MP के बड़े शहरों में आज भी दूषित पानी पीने को मजबूर लोग

भोपाल मध्य प्रदेश के चार बड़े शहरों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए केंद्र सरकार ने पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक धनराशि उपलब्ध कराई लेकिन यहां के नगरीय निकाय लोगों को शुद्ध पानी नहीं दे सके। अमृत 2.0 (अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन 2.0) योजना के तहत पेयजल आपूर्ति पर 5,142 करोड़ रुपये खर्च कर दिए, फिर भी दूषित जल से इंदौर में 17 लोगों की मौत अलग ही कहानी कह रही है। पेयजल की पाइपलाइन और सीवरेज लाइन का क्रॉस कनेक्शन इन शहरों में जमीन के नीचे बिछी वर्षों पुरानी पेयजल की पाइपलाइन और सीवरेज लाइन का क्रॉस कनेक्शन है। कहीं-कहीं तो पेयजल की लाइन नाले-नालियों से होकर गुजर रही है। चार साल पहले शुरू हुई अमृत 2.0 योजना के तहत न तो जलप्रदाय का काम पूरा हुआ और न ही सीवरेज परियोजनाएं पूरी हो पाई हैं। इस वर्ष अमृत 2.0 की समयावधि समाप्त हो जाएगी लेकिन काम की गति को देखकर नहीं लगता कि इस वर्ष लक्ष्य पूरा किया जा सकेगा।   अमृत 2.0 योजनाः एक नजर में एक अक्टूबर, 2021 से प्रारंभ, अवधि पांच वर्ष प्रदेश के समस्त 413 नगरीय निकाय एवं पांच छावनी परिषद सम्मिलित ये कार्य लंबित 4585.91 करोड़ रुपये के 253 जलप्रदाय के कार्य 205.88 करोड़ रुपये के 273 वॉटर बॉडी रिजुविनेशन के कार्य 52.11 करोड़ रुपये के हरित क्षेत्र विकास के कार्य 1941.72 करोड़ रुपये के सीवरेज के कार्य ये कार्य पूर्ण 29.88 करोड़ रुपये के जलप्रदाय के आठ कार्य 66.69 करोड़ रुपये के वाटर बाडी रिजुविनेशन के 118 कार्य 39.07 करोड रुपये के हरित क्षेत्र विकास के 182 कार्य बड़े शहरों का यह है हाल इंदौर: नगर निगम ने 550 किमी पुरानी पेयजल लाइन को चिह्नित कर बदलने की योजना अमृत 2.0 प्रोजेक्ट के तहत बनाई लेकिन अभी तक इस कार्य के लिए कोई एजेंसी निर्धारित नहीं की गई है। इसी तरह पाइप लाइन और टंकी निर्माण के तीन पैकेज के लिए टेंडर जारी किए गए हैं, लेकिन इसमें भी एजेंसी का चयन नहीं किया जा सका है। जबलपुर: शहर में 80 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति लाइन नाले-नालियों के नीचे से होकर गुजर रही है। पानी की डिस्ट्रीब्यूशन लाइन की उम्र 40 से 50 वर्ष तक हो चुकी है। सालों से लगातार नाली-नालियों के क्षारीय पानी, धूल, मिट्टी के संपर्क में रहने से पाइपलाइनों में क्षरण चुका है। जिससे जल वितरण पाइपलाइन में लीकेज के कारण गंदगी घुल रही है। ग्वालियर: जिले के ग्रामीण अंचल में करीब 410 नल-जल योजनाओं में से 115 ही चालू हैं। पानी के ट्रीटमेंट के लिए क्लोरीन डालने का प्रावधान है, लेकिन पंचायत स्तर पर इसके लिए कोई व्यवस्था नहीं है। उज्जैन: जिले में जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत 569 नल-जल योजनाओं में से 561 योजनाएं पूर्ण बताई जा रही हैं, जबकि 489 योजनाओं का पंचायतों को हस्तांतरण हो चुका है। इसके बावजूद कई गांवों में नियमित जल सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है। नर्मदा-गंभीर समूह जल प्रदाय परियोजना की देरी से जिले के 914 गांवों को नर्मदा जल मिलने में कम से कम एक साल और लगेगा। तकनीकी बाधाएं और अधूरा टी-कनेक्शन कार्य मिशन की गति पर भारी पड़ रहा है। देवास: जिले में जल जीवन मिशन के तहत 645 एकल ग्राम योजना में से 418 योजनाएं ग्राम पंचायतों को सौंपी जा चुकी हैं। इन कार्यों में भी ठेकेदारों द्वारा लेटलतीफी की गई। गुणवत्ताहीन कार्य की शिकायतें आई। अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। इस कारण योजना अब तक पूर्ण नहीं हो सकी।  

छत्तीसगढ़ को नई रफ्तार: मुख्यमंत्री साय का 15 वर्षीय विज़न, बिलासपुर को बनाया जाएगा ग्रोथ हब

रायपुर  छत्तीसगढ़ की डबल इंजन सरकार ने आज यह स्पष्ट संदेश दे दिया कि आने वाले दशक में बिलासपुर राज्य का अगला ग्रोथ इंजन बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक ने बिलासपुर के समग्र विकास के लिए एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक अभियान का स्वरूप ग्रहण कर लिया है। बैठक में जिस प्रकार केंद्र और राज्य के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी दर्ज हुई, उसने यह साबित कर दिया कि बिलासपुर का विकास केवल स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में प्राथमिकता का विषय बन चुका है। बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, विधायक अमर अग्रवाल , विधायक सुशांत शुक्ला, विधायक धरमलाल कौशिक, महापौर पूजा विधानी, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह तथा विभिन्न विभागों के सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारीगण सभी एक ही मंच पर उपस्थित थे। इस संयुक्त उपस्थिति ने यह शक्तिशाली संदेश दिया कि बिलासपुर का विकास दिल्ली और रायपुर दोनों स्तरों के बीच प्रत्यक्ष समन्वय से आगे बढ़ेगा और योजनाओं की स्वीकृति, वित्तीय प्रावधान और क्रियान्वयन में गति लाने के लिए राजनीतिक तथा प्रशासनिक इच्छा-शक्ति पूरी तरह सक्रिय है। मुख्यमंत्री साय ने बैठक में स्वयं बिलासपुर के अगले 10–15 वर्षों के शहरी विकास का विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने केवल वर्तमान समस्याओं पर नहीं, बल्कि भविष्य की जनसंख्या वृद्धि, शहरी विस्तार, ट्रैफिक प्रबंधन, आवास, जल आपूर्ति, सीवरेज, ड्रेनेज और समग्र नगर नियोजन पर व्यापक चर्चा की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि “नाली से लेकर नगर नियोजन तक” कोई भी विषय चर्चा से बाहर नहीं छोड़ा गया। यही संदेश यह स्थापित करता है कि सरकार केवल घोषणाएँ नहीं कर रही, बल्कि बारीकी से जमीन पर लागू होने योग्य योजना बना रही है। इस दृष्टिकोण ने मुख्यमंत्री की छवि एक दूरदर्शी शहरी विकास नेता के रूप में और सुदृढ़ की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यह भी संकेत दिया कि बिलासपुर को सिर्फ एक बड़े शहर के रूप में नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के नए आर्थिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य हब विकसित किया जाएगा। लॉजिस्टिक सपोर्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और निवेश के नए अवसरों के साथ बिलासपुर को मध्य भारत का प्रमुख शहरी केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है।आने वाले वर्षों में बिलासपुर को मॉडल सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ आधुनिक नगरीय सुविधाएं, स्वच्छता व्यवस्था, सस्टेनेबल शहरी ढांचा और रोजगार सृजन के नए अवसर साथ-साथ आगे बढ़ेंगे। इससे न केवल बिलासपुर, बल्कि पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ क्षेत्र को नई आर्थिक दिशा मिलेगी। बैठक में जनप्रतिनिधियों की व्यापक भागीदारी ने समावेशी राजनीति का स्पष्ट संदेश दिया। विधायक, महापौर और अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने यह स्थापित किया कि बिलासपुर का विकास किसी एक दल का मुद्दा नहीं, बल्कि शहर के भविष्य का सामूहिक संकल्प है। सरकार ने यह भी संकेत दिया कि विकास के प्रश्न पर दलगत राजनीति को पीछे छोड़ दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। इससे यह संदेश गया कि बिलासपुर विकास रोडमैप केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। सरकार ने आवश्यक बजट प्रावधान और दीर्घकालिक निवेश योजना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। केंद्र और राज्य समन्वय के इस मॉडल ने यह सिद्ध कर दिया कि छत्तीसगढ़ की शहरी विकास योजनाएं अब सीधे राष्ट्रीय मिशनों से जुड़ चुकी हैं। स्मार्ट सिटी, अमृत मिशन, हाउसिंग, नगरीय परिवहन और आधारभूत संरचना से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आएगी, जिससे बिलासपुर को विशेष लाभ मिलेगा। बैठक के बाद मीडिया में प्रमुखता से यह संदेश उभरा कि बिलासपुर आने वाले समय में छत्तीसगढ़ का अगला ग्रोथ इंजन बनेगा। औद्योगिक निवेश, शहरी रोजगार, रियल एस्टेट, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से यहाँ विकास की नई लहर उत्पन्न होने जा रही है। बिलासपुर के विकास का यह अभियान प्रदेश की समग्र राजनीति में भी महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा। शहरी विकास, रोजगार सृजन और आधारभूत संरचना पर केंद्रित यह एजेंडा डबल इंजन सरकार की विकासोन्मुखी राजनीति की पहचान बनेगा। आज की बैठक ने यह स्थापित कर दिया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बिलासपुर का विकास केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संकल्प है। डबल इंजन सरकार की ताकत के साथ बिलासपुर अब राष्ट्रीय शहरी विकास मानचित्र पर अपनी निर्णायक उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

‘बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़’ अभियान की टीम ने नदी-नाले पार कर बचाया भविष्य

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़” अभियान जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से साकार होता नजर आ रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग एवं जिला प्रशासन की सतर्कता और संवेदनशीलता के चलते दुर्गम एवं पहुँचविहीन क्षेत्र में नदी-नाले पार कर 12 वर्षीय बालिका का बाल विवाह समय रहते रोका गया। इस त्वरित कार्रवाई से न केवल एक मासूम का भविष्य सुरक्षित हुआ, बल्कि समाज में बाल विवाह जैसी कुप्रथा के विरुद्ध सशक्त संदेश भी गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार 02 जनवरी 2026 को प्रशासन को सूचना मिली कि सुकमा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रामाराम के सुदूर गांव नाड़ीगुफा में एक नाबालिक बालिका का विवाह किया जा रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर के मार्गदर्शन में तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके पश्चात जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी के नेतृत्व में जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन तथा विभागीय अमले की संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने उफनते नदी-नालों और अत्यंत दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद पैदल यात्रा कर गांव तक पहुँच बनाई और समय रहते विवाह प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया। मौके पर यह पाया गया कि पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह की सभी तैयारियां पूर्ण हो चुकी थीं। अधिकारियों द्वारा संवेदनशीलता के साथ परिजनों एवं ग्रामीणों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों, कानूनी दायित्वों तथा इसके गंभीर सामाजिक दुष्परिणामों की जानकारी दी गई। प्रशासन की समझाइश का सकारात्मक प्रभाव पड़ा और परिजनों ने स्वेच्छा से बाल विवाह रोकने का निर्णय लिया। ग्रामीणों की उपस्थिति में विधिवत पंचनामा तैयार कर कार्रवाई को औपचारिक रूप दिया गया। कार्रवाई के दौरान बालिका को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने तथा उसके सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य के लिए परिजनों को प्रेरित किया गया। साथ ही शासन की विभिन्न बाल संरक्षण एवं शिक्षा से संबंधित योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा 10 मार्च 2024 को “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़” अभियान का शुभारंभ किया गया था। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की धारा 16 के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा 13,823 बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों को अधिसूचित किया गया है। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप नवंबर 2025 तक प्रदेश में 189 बाल विवाह रोके जा चुके हैं। राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों एवं जनसहभागिता के चलते बालोद जिला पूर्णतः बाल विवाह मुक्त जिला घोषित किया जा चुका है, जो पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत है। वर्ष 2025-26 के लिए राज्य शासन ने 31 मार्च 2026 तक राज्य की 50 प्रतिशत ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने तथा 31 मार्च 2029 तक छत्तीसगढ़ को पूर्णतः बाल विवाह मुक्त राज्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने स्पष्ट किया है कि बच्चों का सुरक्षित, शिक्षित एवं गरिमामय भविष्य सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथाओं के उन्मूलन हेतु प्रशासनिक सतर्कता, जनजागरूकता एवं त्वरित कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

ग्लूकोमा: बिना दर्द के आंखों को बना सकता है अंधा, जानिए किन लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा

ग्लूकोमा, जिसे आम भाषा में 'काला मोतिया' कहा जाता है, आंखों की एक गंभीर स्थिति है जो ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाती है। इसे अक्सर साइलेंट थीफ कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती स्टेज में इसके कोई साफ लक्षण नहीं दिखाई देते। इसलिए अगर समय पर इसका पता न चले, तो यह स्थायी अंधापन का कारण बन सकता है। इसलिए इस बारे में लोगों को जानकार बनाने के लिए हर साल जनवरी को Glaucoma Awareness Month की तरह मनाया जाता है। इसलिए हमने डॉ. पवन गुप्ता (सीनियर कैटेरेक्ट एंड रेटिना सर्जन, आई 7 हॉस्पिटल लाजपत नगर एंड विजन आई क्लीनिक नई दिल्ली) से ग्लूकोमा के लक्षण और रिस्क फैक्टर्स के बारे में जानने की कोशिश की। आइए जानें उन्होंने क्या बताया। ग्लूकोमा के लक्षण कैसे होते हैं? ग्लूकोमा की सबसे खतरनाक बात यह है कि ज्यादातर मरीजों को तब तक पता नहीं चलता जब तक कि उनकी दृष्टि काफी हद तक कम न हो जाए। इसके लक्षणों को स्टेज के अनुसार समझा जा सकता है- शुरुआती और मीडियम स्टेज     कोई लक्षण नहीं- शुरुआत में आंखों में न तो दर्द होता है और न ही दृष्टि में कोई अचानक बदलाव आता है।     पेरिफेरल विजन का कम होना- इसमें सबसे पहले पेरिफेरल विजन यानी साइड का दिखना कम होने लगता है। मरीज को सामने की चीजें तो साफ दिखती हैं, लेकिन अगल-बगल का हिस्सा धुंधला या काला दिखाई देने लगता है।     कंट्रास्ट में कमी- रंगों और परछाइयों के बीच अंतर कर पाना मुश्किल होने लगता है।     अंधेरा महसूस होना- मरीज को ऐसा लग सकता है कि उनके आसपास रोशनी कम हो गई है। एक्यूट स्टेज जब आंखों का दबाव बहुत तेजी से बढ़ता है, तो ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं-     आंखों में तेज दर्द और रेडनेस।     सिर में तेज दर्द और जी मिचलाना।     रोशनी के चारों ओर इंद्रधनुष जैसे घेरे दिखाई देना।     दृष्टि का अचानक धुंधला हो जाना। एडवांस्ड स्टेज     अगर इलाज न मिले, तो टनल विजन (सिर्फ सामने का थोड़ा सा हिस्सा दिखना) की स्थिति बन जाती है और फिर आंखों की रोशनी पूरी तरह जा सकती है। ग्लूकोमा के रिस्क फैक्टर्स क्या हैं? हालांकि, ग्लूकोमा किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है।     पारिवारिक इतिहास- अगर आपके परिवार में किसी को ग्लूकोमा है, तो आपको इसका खतरा काफी बढ़ जाता है।     उम्र- 40 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों में इसका रिस्क ज्यादा होता है।     आंखों की बीमारियां- हाई मायोपिया वाले लोगों को इसका खतरा रहता है।     मेडिकल कंडीशन- डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों को नियमित जांच करानी चाहिए।     स्टेरॉयड का इस्तेमाल- लंबे समय तक स्टेरॉयड आई ड्रॉप्स या दवाओं के इस्तेमाल से आंखों का दबाव बढ़ा सकता है।     चोट या सर्जरी- आंखों में पुरानी चोट या आंखों की बार-बार हुई सर्जरी भी ग्लूकोमा का कारण बन सकती है। बचाव के लिए क्या करें?     ग्लूकोमा से होने वाला नुकसान ठीक नहीं किए जा सकते, यानी जो दृष्टि चली गई उसे वापस नहीं लाया जा सकता। इसलिए, जल्दी पहचान ही एकमात्र बचाव है।     40 की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार आंखों के डॉक्टर से 'प्रेशर चेक' और 'फंडस जांच' जरूर करवाएं।  

बिलियर्ड्स को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले दिग्गज खिलाड़ी मनोज कोठारी का निधन

नई दिल्ली पूर्व वर्ल्ड बिलियर्ड्स चैंपियन मनोज कोठारी का सोमवार को तिरुनेलवेली के तिरुनेलवेली स्थित एक अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। मनोज 67 साल के थे। मूल रूप से कोलकाता के रहने वाले मनोज कोठारी इलाज के लिए तिरुनेलवेली आए थे, जहां एक निजी अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। इलाज के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। 10 दिन पहले मनोज कोठारी का लिवर प्रत्यारोपरण हुआ था। यह सर्जरी सफल रही थी, जिसके बाद तीसरे दिन वह स्वस्थ नजर आ रहे थे, लेकिन इसके बाद उन्हें फेफड़ों में संक्रमण हो गया। सोमवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। अस्पताल में मनोज कोठारी के बेटे सौरभ कोठारी ने पिता के पार्थिव शरीर पर राष्ट्रीय ध्वज लपेटकर उन्हें श्रद्धांजलि दी, जिसके बाद तिरुनेलवेली के वीएम चत्रम स्थित श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। साल 1990 में वर्ल्ड बिलियर्ड्स चैंपियनशिप जीतने वाले मनोज कोठारी को 2005 में प्रतिष्ठित मेजर ध्यानचंद पुरस्कार मिला था। वह भारतीय राष्ट्रीय टीम के हेड कोच भी रहे। भारतीय क्यू स्पोर्ट्स के विकास में मनोज कोठारी का योगदान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया। कोठारी अपनी सटीक तकनीक, धैर्य और रणनीतिक खेल के लिए पहचाने गिए। लंबे समय तक भारतीय बिलियर्ड्स में शीर्ष स्तर पर बने रहना उनकी निरंतरता और मेहनत को दर्शाता है। उन्होंने न सिर्फ खिताब जीते, बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा भी बने। मनोज कोठारी के बेटे सौरभ कोठारी ने भी पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए इस खेल को चुना और वर्ल्ड बिलियर्ड्स चैंपियनशिप जीती। सौरव को उनके पिता ने ही प्रशिक्षित किया था। सौरव कोठारी ने अप्रैल 2025 में पंकज आडवाणी को शिकस्त देकर आईबीएसएफ वर्ल्ड बिलियर्ड्स 2025 का खिताब अपने नाम किया था। 40 वर्षीय सौरव ने 725 अंक हासिल किए थे, जबकि आडवामी 480 अंक ही हासिल कर सके।

इंदौर की घटनाओं का असर दिल्ली तक: BJP नेता बोले—आम जनता को मुफ्त बोतल वाला पानी दिया जाए

नई दिल्ली इंदौर में दूषित जल पीने से कई लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के बीमार होने की घटना के बीच दिल्ली सरकार से भी लोगों को बोतलबंद पानी आपूर्ति की मांग की गई है। यह मांग किसी और ने नहीं खुद भारतीय जनता पार्टी के नेता और पूर्व विधायक सरदार आरपी सिंह की है। उन्होंने दिल्ली सरकार को शहरवासियों को बोतलबंद पानी उपलब्ध कराने की सलाह दी है। उनका कहना है कि सीवर का पानी पाइपलाइन में मिल जाने की आशंका बनी रहती है। आरपी सिंह ने कहा कि उन्होंने दिल्ली सरकार के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह को पत्र लिखकर उनसे इस सलाह पर विचार करने का आग्रह किया है। भाजपा के प्रवक्ता और राष्ट्रीय राजधानी में राजेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक सिंह ने मुफ्त पानी देने का तरीका भी सुझाया है। उन्होंने कहा कि मुफ्त बोतलबंद पानी की आपूर्ति बोतलों पर विज्ञापनों और सुरक्षित पेयजल बुक करने संबंधी ऐप के जरिए प्रायोजित की जा सकती है। आरपी सिंह ने कहा- हमेशा रहती है आशंका उन्होंने कहा, ‘पानी की पाइपलाइन की मरम्मत पर चाहे जितना भी ध्यान दिया जाए, मलजल लाइन और अन्य स्रोतों से इसके दूषित होने की आशंका हमेशा बनी रहती है। बोतलबंद पानी से यह सुनिश्चित होगा कि लोगों को पीने के लिए स्वच्छ पानी मिले।’ सिंह ने यह भी तर्क दिया कि राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) की आपूर्ति को भी घरों में आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) मशीनों के जरिए और शुद्ध किया जाता है। उन्होंने कहा, ‘हालांकि, गरीब लोगों का स्वास्थ्य दांव पर है क्योंकि वे महंगी आरओ मशीन नहीं लगवा सकते और असुरक्षित पेयजल पर निर्भर रहते हैं या निजी निर्माताओं का वह बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं जिसकी गुणवत्ता संदिग्ध होती है।’  

जन्मदिन पर अनोखा उपहार! बृजभूषण शरण सिंह ने ऋतेश्वर महाराज को भेंट की करोड़ों की दुर्लभ गाय

गोंडा यूपी के गोंडा जिले में नंदिनी नगर में चल रहे राष्ट्रकथा महोत्सव के दौरान सदगुरु ऋतेश्वर महाराज के जन्मदिन पर पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने उन्हें दुर्लभ 20 लाख रुपए कीमत वाली श्यामा गाय भेंट की। हरियाणा से लाई गई काले रंग की इस दुर्लभ गाय को देखते ही महाराज उसे दुलार करने लगे। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि ये उपहार उनके एक मित्र ने भेजा है। इस मौके पर ऋतेश्वर महाराज ने श्रोताओं से आह्वान किया कि हमें राष्ट्र, धर्म और अपनी आत्मा की पुकार को सुनना चाहिए। आज हमें अपने महापुरुषों द्वारा बताए गए कर्तव्यों पर गंभीरता से विचार करना होगा। परिवार, समाज और राष्ट्र के सशक्त निर्माण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को आगे आना चाहिए।   भोजपुरी स्टार पवन सिंह, बृजभूषण ने भी साधा सुर राष्ट्रकथा में रविवार की शाम भोजपुरी गानों के पावर स्टार पवन सिंह भी पहुंचे। दो भजन भी गाए। बृजभूषण ने स्टेज से खुद ही आज नंदिनी नगरिया निहार सखियां… गीत गाया। इस दौरान राष्ट्र कथा के भंडारे में परोसे जा रहे बथुए के सगपहिते पर कहा बथुआ अब राष्ट्रीय ब्रांड हो गया है। अब इसे नेशनल फूड घोषित किया जाना चाहिए। स्टेडियम में पहलवानों से मिले सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज सदगुरु रविवार के देर शाम पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह, ऋतेश्वर महाराज को लेकर नंदिनी नगर कुश्ती स्टेडियम पहुंचे। कुश्ती सीखने आए खिलाड़ियों से मुलाकात कराई। दांव-पेंच बताए। इस दौरान तलवार बाजी का प्रदर्शन भी किया गया। पूर्व सांसद ने अपने मालिश करने वाले नेशनल पदक विजेता खिलाड़ी और अपने नाई से मुलाकात कराकर कहा जब नाऊ इतने तगड़े हैं नेताजी का तो दबदबा तो रहेगा ही भैया। यह सुनकर सद्‌गुरु ऋतेश्वर महाराज जोर से हंसे और दोनों को आशीर्वाद दिया।

विजय हजारे ट्रॉफी में रिकॉर्ड पारी: अमेरिका में जन्मे बल्लेबाज़ ने डबल सेंचुरी के साथ किया मैच फिनिश

हैदराबाद हैदराबाद के युवा ओपनर अमन राव ने मंगलवार को विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 के ग्रुप बी मैच में तूफानी बल्लेबाजी की। उन्होंने राजकोट के मैदान पर बंगाल के खिालफ डबल सेंचुरी ठोकी। उन्होंने 154 गेंदों का सामना करने के बाद नाबाद 200 रन बनाए, जिसमें 12 चौके और 13 सिक्स शामिल हैं। उन्होंने बंगाल टीम का हिस्सा मोहम्मद शमी, आकाशदीप और मुकेश कुमार जैसे गेदबाजों को आड़े हाथ लिया। उन्होंने तीनों पेसर के खिलाफ कुल 120 रन बटोरे। यह अमन के लिस्ट ए करियर का पहला 100 प्लस स्कोर है। अमेरिका में जन्मे क्रिकेटर ने अभी तक सिर्फ तीन लिस्ट ए मैच खेले हैं।   अमन ने की अहम साझेदारियां अमन ने बंगाल के खिलाफ टॉस गंवाकर बैटिंग करने उतरी हैदराबाद टीम को अच्छी शुरुआत दिलाई। हालांकि, वह शुरू में थोड़े धीमे नजर आए। उन्होंने गहलोत राहुल सिंह (65) के साथ पहले विकेट के लिए 104 रन जोड़े। उन्होंने कप्तान तिलक वर्मा (34) के संग दूसरे विकेट के लिए 87 रनों की साझेदारी की। उन्होंने 65 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया। अभिरथ रेड्डी (5) का बल्ला नहीं चला। अमन ने विकेटकीपर प्रग्नय रेड्डी के साथ चौथे विकेट के लिए 76 रनों की पार्टनरशिप की। उन्होंने रोहित दास द्वारा डाले गए 38वें ओवर में सिंगल लेकर अपना पहला शतक कंप्लीट किया। सलामी बल्लेबाज ने 108 गेंदों में ऐसा किया। आखिरी गेंद पर किया ये कमाल शतक पूरा करने के बाद अमन ने आक्रामक मॉड ऑन किया। उन्होंने अगले 100 रन महज 46 गेंदों में जोड़े। एक समय लग रहा था कि अमन को शायद डबल सेंचुरी के बगैर ही लौटना पड़े मगर ओपनर ने हैदराबाद की पारी की आखिरी गेंद पर कमाल कर दिया। उन्होंने आकाशदीप द्वारा फेंके गए 50वें ओवर की चौथी और छठी गेंद पर छक्का लगाकर 200 रनों को आंकड़ा छुआ। आकाशदीप ने अंतिम ओवर में 17 रन खर्च किए। अमन के दोहरे शतक के दम पर हैदराबाद ने 352/5 का विशाल स्कोर खड़ा किया। यह टूर्नामेंट के मौजूदा सीजन का दूसरा दोहरा शतक है। इससे पहले दिसंबर में ओडिशा के स्वास्तिक सामल ने सौराष्ट्र के खिलाफ 212 रन बनाए थे। अमन को आईपीएल ऑक्शन में राजस्थान रॉयल्स (आरआर) ने 30 लाख रुपये में खरीदा था।  

नेहरू कॉलोनी में आपसी विवाद ने लिया हिंसक रूप, दो परिवार आमने-सामने, पुलिस बल तैनात

फरीदाबाद फरीदाबाद के डबुआ थाना क्षेत्र स्थित नेहरू कॉलोनी में मंगलवार सुबह दो परिवारों के बीच नशा बेचने को लेकर विवाद हो गया। देखते ही देखते दोनों तरफ से पत्थरबाजी शुरू हो गई, जिसमें कई लोग घायल हो गए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें लोग एक-दूसरे पर पत्थर फेंकते नजर आ रहे हैं। वीडियो में दोनों परिवार एक-दूसरे पर पथराव कर रहे हैं। इसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। इलाके में पथराव होने से वहां हड़कंप मच गया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गई। फिलहाल इलाके में तनाव का माहौल है। मंगलवार सुबह करीब 10 बजे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। दोनों तरफ से लोग घरों की छतों से पत्थर फेंकने लगे और सड़कों पर इधर-उधर भागने लगे। मिली जानकारी के अनुसार विवाद नशा तस्करी से जुड़ा बताया जा रहा है। एक पक्ष का आरोप है कि नशा तस्कर मतीन और उसके साथियों ने लतीफ के परिवार पर हमला किया। नशा बेचने से रोकने को लेकर पहले कहासुनी हुई, जो बाद में पत्थरबाजी में बदल गई। दोनों पक्षों से अब तक कोई औपचारिक शिकायत नहीं दर्ज कराई गई है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो की जांच की जा रही है। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। नेहरू कॉलोनी घनी आबादी वाला इलाका है, जहां छोटे-मोटे विवाद अक्सर होते रहते हैं। पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंची और इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया है। इसके साथ ही पुलिस की टीम इलाके में गश्त कर रही है। वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है, जांच जारी है और जल्द से जल्द सभी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।