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भारत में पोल्ट्री फीड की कीमतें ऊंची, लेकिन अंडा दुनिया में सबसे सस्ता, ब्राजील-अमेरिका के रेट का फर्क जानें

 नई दिल्ली केंद्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में भारत में करीब 25 हजार करोड़ अंडों का उत्पादन हुआ था. बाजार में एक अंडे की वर्तमान कीमत 8 से 9 रुपये है. पोल्ट्री एक्सपर्ट का दावा है कि ये पहला मौका है जब अंडा 8 रुपये का बिक रहा है और पोल्ट्री फार्मर को लागत के हिसाब से ठीक-ठाक मुनाफा हो रहा है. लेकिन हैरत की बात ये है कि देश में जिस अंडे को महंगा बताया जा रहा है वो दुनिया का सबसे सस्ता अंडा है. दूसरे कई देशों में भारत के मुकाबले कई गुना महंगा अंडा बिक रहा है.  और ये तब है जब महंगा अंडा बेचने वालों के मुकाबले भारत में सबसे महंगा पोल्ट्री फीड बिक रहा है. अगर दो-चार देशों को छोड़ दें तो विश्व का सबसे महंगा पोल्ट्री फीड भारत में बिक रहा है. ऐसा नहीं है कि पोल्ट्री फीड में शामिल मक्का और सोयाबीन का उत्पादन भारत में नहीं होता है. लेकिन वहां भी किसानों की लागत इतनी ज्यादा है कि मक्का और सोयाबीन की वजह से ही पोल्ट्री फीड महंगा हो जाता है.   देश-विदेश में क्या हैं फीड के रेट      यूएसए में एक टन मक्का के दाम- 174.8 डॉलर (15760 भारतीय रुपये में)     ब्राजील में एक टन मक्का के दाम- 184 डॉलर (16588 भारतीय रुपये में)      यूक्रेन में एक टन मक्का के दाम- 213 डॉलर (19385 भारतीय रुपये में)      भारत में एक टन मक्का के दाम- 24 हजार से 24250 रुपये तक.      नोट- मक्का मूल्य तुलना जनवरी 2026. अंडे और विश्व में उसके दाम        साल 2026 में भारत में औसत 70 से 100 रुपये के 12 अंडे बिक रहे हैं.      ब्राजील में 12 अंडों के दाम करीब 250 रुपये हैं.      संयुक्त राज्य अमेरिका 12 अंडों के दाम करीब 258 रुपये हैं.  किस देश के फार्मर को कितना हो रहा मुनाफा      भारत में अभी पोल्ट्री फार्मर 72 से 78 रुपये के 12 अंडे बेच रहे हैं.      ब्राजील में पोल्ट्री फार्मर 129 रुपये के 12 अंडे बेच रहे हैं.     संयुक्त राज्य अमेरिका में पोल्ट्री फार्मर 132 रुपये के 12 अंडे बेच रहे हैं.  भारतीय पोल्ट्री फार्मर अमेरिका और ब्राजील के किसानों मुकाबले मक्का के लिए 35 से 50 फीसद ज्यादा दाम चुका रहे हैं. सोयाबीन मील के मामले में भी हालात कोई अलग नहीं हैं. साल 2021-22 के संकट के बाद भारत में कीमतें 84000 रुपये मीट्रिक टन तक बढ़ गईं थी. जिसके बाद GM सोयाबीन मील इंपोर्ट करनी पड़ी थी.  भारत में क्यों महंगा है पोल्ट्री फीड? प्रेसिडेंट सुरेश चित्तुरी का कहना है कि देश में फीड लागत की परेशानी अचानक से सामने नहीं आई है. ये सब पॉलिसी की वजह से हो रहा है. इसे इस तरह से भी समझा जा सकता है.  मक्के पर ज़्यादा इंपोर्ट टैरिफ-     50 फीसद बेसिक कस्टम ड्यूटी, साथ ही 5 फीसद IGST और 10 फीसद सरचार्ज.      4.5 करोड़ टन से ज़्यादा पोल्ट्री फीड अनाज की जरूरत के मुकाबले, 15 फीसद ड्यूटी पर 5 लाख टन का एक छोटा सा टैरिफ रेट कोटा (TRQ), सोया-सोयामील पर टैरिफ और प्रतिबंध, सोयाबीन पर 45 से 56.5 फीसद टैरिफ.      GM सोयाबीन, मील का इंपोर्ट सिर्फ खास संकट के समय दी गई छूट के जरिए ही होता है.  जीएम फसल पर बैन- भारत में अभी भी फीड के लिए जीएम मक्का और जीएम सोया पर बैन लगा हुआ है. अमेरिका और ब्राजील 90 फीसद जीएम क्षेत्र में खेती करते हैं, जिससे 20 से 30 फीसद ज़्यादा पैदावार होती है जो लागत को कम कर देती है.  इथेनॉल ब्लेंडिंग पर जोर-  देश में 80 लाख से एक करोड़ टन मक्का इथेनॉल में जा रहा है. जिसके चलते फीड में सप्लाई कम हो रही है. जबकि 2024 से मक्के की कीमत 14 फीसद तक बढ़ गई हैं. इन्हीं सब चीजों का नतीजा है कि भारतीय पोल्ट्री फार्मर अपना मुख्य कच्चा माल विश्व की ऊंची कीमतों पर खरीदते हैं, जबकि बाजार में प्रोडक्ट बेचने पर उन्हें कोई खास फायदा नहीं मिलता है.  क्या कहते हैं पोल्ट्री एक्सपर्ट इंटरनेशन ऐग कमीशन के प्रेसिडेंट और श्रीनिवास ग्रुप के एमडी सुरेश चित्तुरी का कहना है कि अगर सरकार पोल्ट्री फार्मर को राहत दे तो पोल्ट्री प्रोडक्शन अंडे-चिकन का उत्पादन और बढ़ सकता है. और सस्ता अंडा उत्पादन करने का फायदा हम इंटरनेशनल मार्केट में उठा सकते हैं. अभी नाम मात्र के आंकड़े के साथ अंडा एक्सपोर्ट हो रहा है.   पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के ज्वाइंट सेक्रेटरी रिकी थापर का कहना है कि भारत में लेबर सस्ती है तो इसके चलते भी अंडे के दाम कम रहते हैं. जबकि दूसरे देशों में पोल्ट्री फार्म में काम करने वाली और फार्म का शेड तैयार करन वाली हर तरह की लेबर महंगी है.

इंदौर में ई-रिक्शा सेवा सात सेक्टर में शुरू होगी, व्यवस्था के बाद एक महीने का ट्रायल

इंदौर यातायात व्यवस्था बिगाड़ने वाले ई-रिक्शा पर अब लगाम कसी जा रही है। शहर को सात सेक्टरों में बांटकर हर ई-रिक्शा के लिए सीमित क्षेत्र, तय मार्ग और रंग आधारित पहचान लागू की जाएगी। ई-रिक्शा के व्यवस्थित, सुरक्षित एवं सुगम संचालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बुधवार को पलासिया स्थित पुलिस कंट्रोल रूम में बैठक हुई। पुलिस उपायुक्त यातायात आनंद कलादगी ने चालकों से कहा कि आप नए प्रयोग में सहयोग करें। कोई समस्या या आर्थिक नुकसान होता है तो हम बदलाव के लिए तैयार हैं। सेक्टरों को बढ़ा दिया जाएगा। इस व्यवस्था में करीब 30 दिन लगेंगे। फिर एक महीने तक ट्रायल होगा। भविष्य में जरूरत पड़ने पर सेक्टर व्यवस्था में जरूरी सुधार या बदलाव किया जा सकेगा। विशेष शिविर भी लगाए जाएंगे, ‘पहले आएं, पहले पाएं’ नीति के तहत पंजीयन आगामी दो दिनों में ई-रिक्शा सेक्टर वितरण के लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इसमें यातायात थाना पूर्व (एमटीएच कंपाउंड), यातायात नियंत्रण कक्ष पश्चिम, महू नाका, एसीपी ट्रैफिक जोन-1 कार्यालय मल्हारगंज, डीसीपी ट्रैफिक कार्यालय, पलासिया और एसीपी ट्रैफिक जोन-2 आफिस पिपलियाहाना में ई-रिक्शा चालक अपने वाहन से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत कर सेक्टर पंजीयन करवा सकेंगे। पंजीयन के बाद चालकों को सेक्टर अनुसार सीरियल नंबर स्टीकर प्रदान किए जाएंगे। शिविर में चालकों को ‘पहले आएं, पहले पाएं’ नीति के तहत पंजीयन किया जाएगा। सेक्टर तय करने के लिए चार से पांच विकल्प होंगे, जिसमें से एक तय करना होगा। चालकों को उनके घर के पास के मार्ग को प्राथमिकता दी जाएगी। आगामी 15 दिन तक रजिस्ट्रेशन होगा। अगले 10 दिन स्टीकर व सेक्टर वितरण होगा। बैठक में एडिशनल डीसीपी नरेश कुमार अन्नोटिया, एडिशनल डीसीपी संतोष कुमार कौल, एसीपी हिंदूसिंह मुवेल, एसीपी सुप्रिया चौधरी सहित अन्य मौजूद थे। वहीं, इंदौर बैटरी रिक्शा चालक महासंघ पदाधिकारी व संस्थापक राजेश बिड़कर ने कहा कि कुछ कार्यकर्ता निर्णय से संतुष्ट नहीं दिखे। उन्होंने 12 जनवरी को ई-रिक्शा बंद की घोषणा की। सुबह 11 बजे सभी गांधी हाल परिसर में एकत्र होकर विरोध करेंगे। इस तरह रहेगी व्यवस्था     ई-रिक्शा के लिए सात कलर कोड रहेंगे।     हर ई-रिक्शा के आगे-पीछे विशेष स्टीकर लगाए जाएंगे, जिन पर सेक्टर का नाम, ई-रिक्शा का सीरियल नंबर, वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित रहेगा।     सवारियों के लिए ई-रिक्शा की पहचान व निगरानी सरल हो सकेगी।     हर सेक्टर में 20 से 25 किमी का रूट मिल रहा है। स्टैंड भी तय होंगे। (जैसा कि बैठक में पुलिस उपायुक्त यातायात आनंद कलादगी ने बताया) 

अंतरिक्ष स्टेशन पर खोजा गया कैंसर का नया इलाज, पेम्ब्रोलिजुमाब का इंजेक्शन बनेगा क्रांतिकारी

 नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर की गई वैज्ञानिक रिसर्च ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. नासा और दवा कंपनी मर्क की टीम ने मिलकर स्पेस में प्रोटीन क्रिस्टल ग्रोथ की स्टडी की, जिससे कैंसर की एक प्रमुख दवा का नया रूप विकसित हुआ. अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने सितंबर 2025 में इस नए इंजेक्शन को मंजूरी दे दी है. अब मरीजों को 2 घंटे लंबी इन्फ्यूजन की जगह सिर्फ 1-2 मिनट का इंजेक्शन लगेगा. यह खबर कैंसर मरीजों के लिए राहत भरी है, क्योंकि इलाज आसान, तेज और सस्ता हो गया है. क्या है यह नया इलाज? यह नया इलाज कंपनी मर्क की दवा पेम्ब्रोलिजुमाब (Pembrolizumab) का सबक्यूटेनियस इंजेक्शन रूप है. यह दवा इम्यूनोथेरेपी की श्रेणी में आती है. कुछ खास तरह के कैंसर (जैसे मेलानोमा, लंग कैंसर आदि) के इलाज में इस्तेमाल होती है. पहले यह दवा कैसे दी जाती थी?     मरीज को अस्पताल या क्लिनिक जाना पड़ता था.     नस में इन्फ्यूजन (IV ड्रिप) से दवा दी जाती थी.     इसमें 1-2 घंटे लगते थे.     बाद में इसे 30 मिनट तक कम किया गया था. अब नया तरीका     त्वचा के नीचे (सबक्यूटेनियस) सिर्फ एक इंजेक्शन.     लगाने में 1 से 2 मिनट लगते हैं.     हर तीन हफ्ते में एक बार.     मरीज का समय बचता है. अस्पताल का खर्च कम होता है. जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है. स्पेस स्टेशन की रिसर्च ने कैसे मदद की? अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी) बहुत कम होता है – इसे माइक्रोग्रेविटी कहते हैं. पृथ्वी पर ग्रेविटी की वजह से क्रिस्टल बनाते समय कई समस्याएं आती हैं, जैसे क्रिस्टल छोटे, असमान या कम गुणवत्ता वाले बनते हैं. लेकिन स्पेस में…     क्रिस्टल बड़े, एकसमान और ज्यादा परफेक्ट बनते हैं.     इससे वैज्ञानिक दवा के अणुओं की संरचना को बेहतर समझ पाते हैं. मर्क कंपनी 2014 से ISS पर प्रयोग कर रही है. उन्होंने मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (लैब में बनी प्रोटीन जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है) के क्रिस्टल स्पेस में उगाए. इन क्रिस्टल से पता चला कि दवा के कणों का सबसे अच्छा आकार और संरचना क्या होनी चाहिए, ताकि वे आसानी से घुलकर इंजेक्शन के रूप में दिए जा सकें. यह रिसर्च ISS नेशनल लेबोरेटरी के सपोर्ट से हुई. नासा स्पेस स्टेशन को निजी कंपनियों और वैज्ञानिकों के लिए खुला रखता है, ताकि माइक्रोग्रेविटी का फायदा उठाकर नई खोजें हों. स्पेस रिसर्च के फायदे क्या हैं?     पृथ्वी पर दवाओं का विकास तेज और बेहतर होता है.     कैंसर जैसे जटिल रोगों का इलाज आसान बनता है.     अंतरिक्ष यात्री के लिए लंबी स्पेस मिशन (चंद्रमा और मंगल) की तैयारी भी होती है.     कॉमर्शियल स्पेस इकोनॉमी बढ़ती है – निजी कंपनियां स्पेस में निवेश करती हैं. नासा का कहना है कि स्पेस स्टेशन पर किया गया काम न सिर्फ अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत सुधारता है, बल्कि पृथ्वी पर लाखों लोगों की जिंदगी बेहतर बनाता है. यह उदाहरण दिखाता है कि अंतरिक्ष की खोजें कैसे आम लोगों तक पहुंच रही हैं. भविष्य में स्पेस रिसर्च से और भी कई नई दवाएं और इलाज सामने आ सकते हैं. कैंसर मरीजों के लिए यह नया इंजेक्शन एक बड़ी उम्मीद है.  

प्रॉपर्टी रेट में 50-100% की वृद्धि, अब ‘सेक्टर’ तय करेंगे दाम, वार्ड नहीं

ग्वालियर ग्वालियर शहर के प्रॉपर्टी बाजार में अब कम या ज्यादा रेट दिखाकर स्टांप ड्यूटी बचाने का खेल बंद होने वाला है। पंजीयन विभाग वित्त वर्ष 2026-27 की नई गाइडलाइन के लिए 'सेक्टर फॉर्मूला' तैयार कर रहा है। इस नई व्यवस्था में शहर को अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर कीमतें तय की जाएंगी। इसके लिए एआइ आधारित 'पॉलिगॉन' का दायरा बढ़ाया जा रहा है, ताकि एक ही इलाके की सटी हुई जमीनों के दामों में जो बड़ा अंतर था, उसे खत्म किया जा सके। अभी स्थिति यह है कि दो सटकर लगी हुई लोकेशनों के सरकारी दाम में जमीन-आसमान का फर्क होता है। शातिर लोग इसी विसंगति का फायदा कर उठाकर ऊंचे रेट वाली जमीन को कम ने रेट वाली लोकेशन का हिस्सा बताकर रजिस्ट्री करा लेते थे। नए मॉडल में के एक सेक्टर या पॉलिगॉन के भीतर एक आने वाली सभी लोकेशनों पर समान रेट लागू होगा। नियम यह होगा कि उस इलाके की जिस लोकेशन की कीमत सबसे ज्यादा होगी, वही पूरे सेक्टर की दर मान ली जाएगी। इसका सीधा असर यह होगा कि जहां अब तक गाइडलाइन कम थी, वहां कीमतें रातों-रात 50 से 100 फीसदी तक बढ़ जाएंगी। संपदा-2: फेसलेस और पारदर्शी होगी रजिस्ट्री पंजीयन विभाग अब 'संपदा-2' सॉफ्टवेयर के जरिए पूरी प्रक्रिया को फेसलेस बनाने की दिशा में बढ़ रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित इस सिस्टम में पक्षकार घर बैठे ही रजिस्ट्री से जुड़े काम निपटा सकेंगे। 9 जनवरी को भोपाल में होने वाली उच्च स्तरीय बैठक में इस नए स्वरूप पर मुहर लग सकती है। अब तक गाइडलाइन वार्डवार बनती थी, जिसमें हर गली-मोहल्ले की अलग दर होती थी, जो स्टांप चोरी का सबसे बड़ा कारण था। अब एक पॉलिगॉन में 40 से 50 लोकेशन शामिल हो सकेंगी। वर्तमान में जिले में करीब 2400 पॉलिगॉन सक्रिय हैं। मुरार का उदाहरणः ऐसे बढ़ेंगे दाम नई व्यवस्था को इस तरह समझा जा सकता है- यदि मुरार गांव की गाइडलाइन 19 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर है और उससे सटी हुई 10 अन्य कॉलोनियों में रेट 8 से 15 हजार के बीच है, तो अब नया पॉलिगॉन बनते ही उन सभी 10 लोकेशनों का रेट भी बढ़कर सीधे 19 हजार रुपए हो जाएगा। इससे विसंगति खत्म होगी और विभाग का राजस्व बढ़ेगा। भविष्य का सेक्टर प्लान वार्ड सिस्टम आउटः विभाग धीरे-धीरे वार्डों के आधार पर रेट तय करने की परंपरा खत्म करेगा। 20 सेक्टरों में शहर: ग्वालियर के 66 वार्डों को लगभग 20 बड़े सेक्टरों में विभाजित किया जाएगा। समान गतिविधिः रिहायशी, व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों को अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर एक समान दरें तय होंगी। चोरी पर अंकुशः पॉलिगॉन बदलकर कम स्टांप देने के पुराने केसों के बाद अब यह तकनीकी 'लूपहोल' पूरी तरह बंद होगा। सेक्टरों में विभाजित कर रहे हैं… गाइडलाइन को अब वार्डों के बजाय सेक्टरों में विभाजित किया जा रहा है। एक पॉलिगॉन में कई लोकेशनों को शामिल करने से स्टांप ड्यूटी चोरी की संभावना खत्म होगी। इससे पूरे क्षेत्र में एक समान दर लागू हो सकेगी और पारदर्शिता आएगी।- अशोक शर्मा, जिला पंजीयक, ग्वालियर

गुलाब प्रदर्शनी में “गमलों में गुलाब” प्रतियोगिता का द्वितीय चरण, 9 जनवरी को होगा आयोजन

गुलाब प्रदर्शनी में द्वितीय चरण की प्रतियोगिता "गमलों में गुलाब" 9 जनवरी को भोपाल  गुलाब उद्यान में आयोजित होने वाली 45वीं गुलाब प्रदर्शनी के द्वितीय इवेंट "गमलों में गुलाब" की प्रविष्टियाँ 9 जनवरी को प्रात: 8 से 10 बजे तक गुलाब उद्यान परिसर में ली जाएगी। आयुक्त उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण श्री अरविन्द दुबे ने बताया कि प्रतिवर्ष की भाँति गुलाब उद्यान परिसर में गुलाब प्रदर्शनी का आयोजन 9 से 11 जनवरी तक किया जा रहा है। गुलाब के प्रति आम लोगों के रूझान को देखते हुए गुलाब उत्पादकों के बीच स्वस्थ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है। इसमें गमले से लेकर बगिया तक गुलाब के फूलों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया जाना है। यह प्रतियोगिता प्रारंभ हो चुकी है। प्रतियोगिता का प्रथम चरण "बगिया में गुलाब" पूर्ण हो चुका है। द्वितीय चरण 9 जनवरी को घरों में गमलों में लगाये गये गुलाबों का प्रदर्शन गुलाब उद्यान में किया जायेगा। इसके लिये गुलाब उत्पादक सुबह 8 से 12 बजे तक गुलाब उद्यान में प्रविष्ठि कर सकते हैं। इसके बाद विशेषज्ञों द्वारा गमलों का मूल्यांकन कर अंक प्रदान किए जायेंगे। कट-फ्लावरों का प्रदर्शन गुलाब उद्यान परिसर में 10 जनवरी को किया जायेगा और 11 जनवरी को विजेताओं को पुरस्कार वितरित होंगे।  

उज्जैन में शिप्रा नदी के 200 मीटर के भीतर अवैध निर्माण तोड़े जाएंगे, आदेश जारी

उज्जैन मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में सिंहस्थ के मद्देनजर हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शिप्रा नदी के किनारे हो रहे निर्माणों पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगल पीठ ने स्पष्ट किया कि शिप्रा के दोनों ओर 200 मीटर के भीतर किए गए सभी निर्माण अवैध हैं और इन्हें हटाया जाना चाहिए। कोर्ट ने इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए हैं। साथ ही पूर्व में जनहित याचिका में मांगी जानकारी को 21 जनवरी तक दाखिल करने को कहा। चेतावनी दी कि तय तिथि तक रिपोर्ट नहीं पेश हुई तो उज्जैन कलेक्टर व निगम आयुक्त को उपस्थित होना पड़ेगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चंदेसरा ब्रिज से राजगढ़ तक केवल शासकीय निर्माण ही होंगे। वहीं शिप्रा के 200 मीटर में किसी नए निजी निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी और नियमों के उल्लंघन में हो रहे निर्माण तुरंत हटाए जाएंगे। ये है मामला उज्जैन के सत्यनारायण सोमानी द्वारा दायर जनहित याचिका पर यह आदेश दिया गया। याचिका में आरोप है कि उज्जैन के मास्टर प्लान के विपरीत शिप्रा के 200 मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण की अनुमति दी जा रही है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से इस पर जवाब मांगा था। बुधवार को सरकारी वकील की याचिका पर कोर्ट ने 21 जनवरी तक रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कब होगा सिंहस्थ उज्जैन में अगला सिंहस्थ मेला 27 मार्च से 27 मई 2028 तक आयोजित किया जाएगा, जो लगभग दो महीने तक चलेगा और इसमें शाही स्नान (Royal Bath) और पर्व स्नान (Festival Bath) होंगे, और मध्य प्रदेश सरकार इसे 'जीरो वेस्ट कुंभ' बनाने की तैयारी कर रही है, जिसमें घाटों का सुंदरीकरण और पुलों का निर्माण जैसे काम शामिल हैं। मुख्य जानकारी: अवधि: 27 मार्च से 27 मई 2028 (कुल 2 महीने) स्नान: इस दौरान 3 शाही स्नान और 7 पर्व स्नान होंगे। विशेषता: इसे देश का पहला 'जीरो वेस्ट कुंभ' बनाने का लक्ष्य है, जिसमें कई विकास कार्य किए जा रहे हैं। पिछला सिंहस्थ: पिछला सिंहस्थ 2016 में हुआ था, और अगला 2028 में है, जो हर 12 साल में आता है।

Navratri 2026: कब हैं चैत्र, शारदीय और गुप्त नवरात्र? जानें तिथियाँ और घटस्थापना का मुहूर्त

इंदौर  Navratri 2026 Dates: नवरात्र देवी दुर्गा को समर्पित सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण पर्वों में से एक माना जाता है. इस दौरान भक्त व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं. हर साल भक्त चैत्र नवरात्र, शारदीय नवरात्र और दो गुप्त नवरात्र की तिथियों का बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि इनका विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में चारों नवरात्र शुभ समय पर पड़ रही हैं, जिससे भक्तों को साधना, व्रत और देवी पूजा के कई अवसर मिलेंगे. इस नए वर्ष में श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से घटस्थापना कर सकते हैं और मां दुर्गा की कृपा प्राप्त कर सकते हैं. यहां नवरात्र 2026 का पूरा कैलेंडर दिया गया है, जिसमें सभी नवरात्र की तिथियां और घटस्थापना का सही मुहूर्त शामिल है.  चैत्र नवरात्र 2026 तिथियां और घटस्थापना का मुहूर्त  द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार चैत्र नवरात्र 19 मार्च 2026 से शुरू होकर 27 मार्च 2026 तक समाप्त होंगे. चैत्र नवरात्र के पहले दिन का घटस्थापना मुहूर्त सुबह 6 बजकर 52 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा. इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा. 19 मार्च, प्रतिपदा तिथि- घटस्थापना, मां शैलपुत्री 20 मार्च, द्वितीया तिथि- मां ब्रह्मचारिणी 21 मार्च, तृतीया तिथि- मां चंद्रघंटा 22 मार्च, चतुर्थी तिथि- मां कुष्मांडा 23 मार्च, पंचमी तिथि- मां स्कंदमाता 24 मार्च, षष्ठी तिथि- मां कात्यायनी 25 मार्च- सप्तमी तिथि- मां कालरात्रि 26 मार्च, अष्टमी तिथि- मां महागौरी, रामनवमी 27 मार्च, नवमी तिथि- मां सिद्धिदात्री, व्रत का पारण शारदीय नवरात्र 2026 तिथियां और घटस्थापना का मुहूर्त  द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 20 अक्टूबर 2026 तक समाप्त होगी. शारदीय नवरात्र के पहले दिन का घटस्थापना मुहूर्त सुबह 6 बजकर 19 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 12 मिनट तक रहेगा. इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा.  11 अक्टूबर, प्रतिपदा तिथि- घटस्थापना, मां शैलपुत्री 12 अक्टूबर, द्वितीया तिथि- मां ब्रह्मचारिणी 13 अक्टूबर, तृतीया तिथि- मां चंद्रघंटा 14 अक्टूबर, चतुर्थी तिथि- मां कुष्मांडा 15 अक्टूबर, पंचमी तिथि- मां स्कंदमाता 16 अक्टूबर, षष्ठी तिथि- मां कात्यायनी 17 अक्टूबर- सप्तमी तिथि- मां कालरात्रि 18 अक्टूबर, अष्टमी तिथि- सप्तमी तिथि ही रहेगी 19 अक्टूबर, महाअष्टमी- मां महागौरी 20 अक्टूबर, महानवमी- मां सिद्धिदात्री, व्रत का पारण, विजयादशमी  माघ गुप्त नवरात्र 2026  गुप्त नवरात्र का विशेष आध्यात्मिक और तांत्रिक महत्व होता है. इस दौरान साधक और भक्त दस महाविद्याओं की विधि-विधान से पूजा और साधना करते हैं. साल 2026 में इसकी शुरुआत 19 जनवरी 2026 से होगी और समापन 27 जनवरी 2026 को होगा.  आषाढ़ गुप्त नवरात्र 2026    साल 2026 की दूसरी गुप्त नवरात्र आषाढ़ मास में शुरू होगी. इसकी शुरुआत 15 जुलाई 2026 से होगी और इसका समापन 23 जुलाई 2026 को होगा. इसका घटस्थापना मुहूर्त सुबह 5 बजकर 33 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 39 मिनट तक रहेगा.

भोपाल मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के तहत 40 आरा मशीनें शिफ्ट की जाएंगी, योजना दो चरणों में तैयार

भोपाल  शहर के बीचों बीच भारत टाकीज से बोगदा पुल रोड पर स्थित आरा मशीनों की शिफ्टिंग दो चरणों में की जाएगी। इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा योजना बनाई जा रही है। पहले चरण में मेट्रो की राह में आ रहीं 40 आरा मशीनों को शिफ्ट किया जाएगा, इनके लिए परवलिया सड़क स्थित छोटा रातीबड़ में प्लाट का काम पूरा हो चुका है। बता दें कि मेट्रो ने आरा मशीन जल्द से जल्द शिफ्ट हो, इसके लिए छोटा रातीबड़ में सुविधा विकसित करने के लिए करीब छह करोड़ रुपये प्रशासन को दिए थे। इसके बाद से बिजली, पानी, सड़क आदि सुविधाएं उपलब्ध करवाई हैं। जानकारी के अनुसार फर्नीचर शोरूम एवं आरा मशीनों के संचालक एसडीएम शहर वृत्त दीपक पांडे से मिले थे, जहां उन्होंने अपनी मांग रखी थी कि सभी कारोबारियों को एक साथ परवलिया सड़क स्थित छोटा रातीबड़ में शिफ्ट किया जाए। संचालकों का कहना था कि अभी वहां एप्रोच रोड नहीं बनी है, जिससे वाहनों के आवागमन में दिक्कत तो होगी। साथ ही अभी सभी तरह की सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। इस पर एसडीएम ने बताया कि आरा मशीनों को शिफ्ट करने की योजना दो चरण में तैयार की जा रही है, पहले वह 40 मशीनें शिफ्ट होंगी, जो मेट्रो रेल लाइन के कार्य में बाधा बनी हुई हैं। इनको हटाने के लिए छोटा रातीबड़ में 40 प्लाट का काम पूरा हो चुका है, जिनके लिए मेट्रो प्रबंधन ने राशि भी दी है। इसके बाद दूसरे चरण में बची हुई 100 आरा मशीनों को शिफ्ट किया जाएगा। आग लगने के बाद तेज हुई प्रक्रिया पिछले दो महीने में आरा मशीनों में लगातार लगी बड़ी आग के बाद से शिफ्टिंग की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसके लिए आरा मशीन संचालक भी प्रशासन से लगातार मांग कर रहे हैं, लेकिन छोटा रातीबड़ में काम की गति बहुत धीमी होने के कारण शिफ्टिंग का काम नहीं हो पा रहा है। हालांकि, आग की घटना के बाद से तेजी से विकास कार्य किए जा रहे हैं। ऐसे में उम्मीद है जल्द शिफ्टिंग हो सकेगी। कारोबारी कर रहे एक साथ शिफ्टिंग करने की मांग टिंबर मर्चेंट एंड आरा मशीन एसोसिएशन के अध्यक्ष बदर ए आलम ने बताया कि कारोबारियों की मांग है कि छोटा रातीबड़ में एक साथ सभी आरा मशीनों को शिफ्ट किया जाए, जिससे कि कारोबार की रफ्तार निरंतर बनी रहे। फिलहाल प्रशासन ने दो चरणों में शिफ्टिंग की बात कही है। पहले चरण का काम जल्द शुरू होगा     आरा मशीनों की शिफ्टिंग को लेकर दो चरणों में योजना तैयार की गई है। पहले चरण में मेट्रो कार्य के लिए 40 आरा मशीनों को शिफ्ट किया जाएगा, इसके बाद दूसरे चरण में शेष आरा मशीनों को हटाया जाएगा। पहले चरण का कार्य जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा। – कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर  

625 किमी लंबा टूरिज्म कॉरिडोर: एमपी में पेंच से पन्ना तक जुड़ेगा प्रमुख टूरिस्ट प्लेस

 भोपाल  मध्यप्रदेश को देश का टाइगर स्टेट कहा जाता है, यहां सबसे अधिक बाघ हैं। प्रदेश में सर्वाधिक टाइगर रिजर्व भी हैं। अनेक नेशनल पार्क और अभयारण्य भी हैं। एमपी के इन सभी वन्यजीव पर्यटन स्थलों को अब एक कॉरिडोर से जोड़ा जा रहा है। इसे टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर नाम दिया गया है। सीएम डॉ. मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश की भौगोलिक स्थिति के कारण टाइगर कॉरिडोर पड़ोसी राज्यों के लिए भी बड़ी सौगात साबित होगा। इसके अंतर्गत प्रदेश के प्रमुख टाइगर रिजर्व को आपस में जोड़ने वाली सड़कों को अपग्रेड किया जाएगा। टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर 625 किमी लंबा होगा जिससे सभी प्रमुख टूरिस्ट प्लेस जुडेंगे। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दो दिन मध्यप्रदेश को अनेक राजमार्गों की सौगात दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश में ग्वालियर, भिंड, श्योपुर सहित चंबल पूरे बेल्ट को अटल प्रगति पथ का लाभ मिलेगा। यह चंबल क्षेत्र को उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर को जोड़ेगा। करीब 12 हजार करोड़ का अटल प्रगति पथ एमपी से दिल्ली-एनसीआर का सफर घटाकर करीब 3 से 4 घंटे का कर देगा। भोपाल-जबलपुर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे के रूप में बड़ी सौगात मिली मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश को भोपाल-जबलपुर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे के रूप में बड़ी सौगात मिली है, जिसकी लागत 9716 करोड़ है। इसके अलावा भोपाल-इंदौर-प्रयागराज, जबलपुर-नागपुर और इंदौर-धुले-पुणे परियोजनाएं विकसित भारत@2047 के लक्ष्य हासिल करने में सहायक सिद्ध होंगी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से भविष्य में चारों दिशाओं में कई प्रकार के मार्गों को सुदृढ़ करते हुए निर्माण के संबंध में महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ है। टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर को 5 हजार करोड़ रुपए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने प्रदेश को टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर की भी सौगात दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि इसके अंतर्गत टाइगर रिजर्व पेंच से कान्हा, कान्हा से बांधवगढ़ और बांधवगढ़ से पन्ना को परस्पर जोड़ने वाली सड़कों की लम्बाई 625 किलोमीटर होगी। मार्गों के उन्नयन और विकास पर 5 हजार करोड़ रुपए की राशि खर्च की जाएगी। विलुप्त हुए चीतों को अफ्रीका से लाकर श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में बसाया बता दें कि मध्यप्रदेश को वन्य प्राणियों से संबंधित भी कई सौगातें मिल रही हैं। देशभर में विलुप्त हुए चीतों को अफ्रीका से लाकर एमपी के श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में बसाया गया। इसके बाद से ही कूनो वन्यप्राणी प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

MP में 30 लाख फर्जी राशन कार्ड रद्द, अमीरों ने भी गरीबों का राशन किया हड़प

भोपाल  मध्य प्रदेश में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर लोग यही कह रहे हैं MP अजब है, गजब है. सोचिए, जिन लोगों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल है, उन्हीं के लिए बनी मुफ्त राशन योजना का फायदा बड़े-बड़े प्राइवेट कंपनी डायरेक्टर और मोटी कमाई करने वाले लोग उठा रहे थे. ये चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ, जब सरकार ने राशन कार्ड धारकों की बड़े स्तर पर जांच करवाई. सरकार की जांच में निकले 30 लाख अपात्र शिकायतों के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी PDS के लाभार्थियों का सत्यापन अभियान चलाया. इस करीब एक साल लंबी जांच में पता चला कि करीब 30 लाख ऐसे लोग मुफ्त राशन ले रहे थे, जो इसके हकदार ही नहीं थे. इसके बाद सभी अपात्र लोगों के राशन कार्ड रद्द कर दिए गए.  रिपोर्ट के मुताबिक, गलत तरीके से राशन ले रहे लोगों में 1500 तो ऐसे निकले जो निजी कंपनियों में डायरेक्टर जैसे ऊंचे पद पर हैं। इसके अलावा 38 हजार लोग इनकम टैक्स फाइल करने वाले थे जिनकी सालाना आमदनी 6 लाख रुपये से अधिक थी। 14 लाख नए लाभार्थी जुड़ेंगे खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से बड़े पैमाने पर कराए गए वेरिफिकेशन में करीब एक साल का समय लगा। बड़े पैमाने पर राशन कार्ड रद्द किए जाने का बड़ा फायदा उन 14 लाख योग्य लाभार्थियों को होगा जो इसमें शामिल होने का इंतजार कर रहे थे और कोटा खत्म हो जाने की वजह से उन्हें पीडीएस स्कीम का लाभ नहीं मिल रहा था। MP में 1.31 करोड़ के पास राशन कार्ड, वेटिंग में थे लोग अंत्योदय अन्न योजना (AAY) और प्रायोरिटी हाउसहोल्ड (PHH/BPL) के तहत मध्य प्रदेश में अभी 1.31 करोड़ राशन कार्ड वितरित हैं। 28 श्रेणी के लाभार्थियं को हर महीने मुफ्त राशन दिया जाता है। खाद्य आपूर्ति विभाग के कमिश्नर कर्मवारी शर्मा ने कहा, 'यह सत्यापन बहुत महत्वपूर्ण था। अयोग्य लोगों की मौजूदगी की वजह से बहुत से जरूरतमंद परिवार वेटिंग लिस्ट में थे और उन्हें मुफ्त राशन नहीं मिल पाता था।' कैसे पकड़े गए ऐसे लोग शर्मा ने बताया कि उनके विबाग ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के साथ मिलकर पीडीएस डेटाबेसा का आईटीआर डेटा से मिलान किया। उन्होंने बताया, '38 हजार लाभार्थी ऐसे निकले जिन्होंने अपनी सालाना आय 6 लाख रुपये घोषित की थी और राशन भी ले रहे थे। सत्यापन के बाद ऐसे सभी नामों को निकाल दिया गया। डेटा को रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी से भी क्रॉस चेक किया गया। 1500 ऐसे लोग मिले जो निजी कंपनियों में डायरेक्टर के पद पर थे लेकिन मुफ्त राशन का लाभ ले रहे थे। कंपनी डायरेक्टर और IT पेयर भी निकले लाभार्थी जांच में जो आंकड़े सामने आए, वो और भी हैरान करने वाले थे. करीब 1,500 प्राइवेट कंपनियों के डायरेक्टर और 38 हजार ऐसे लोग जो हर साल 6 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई दिखाकर इनकम टैक्स भरते हैं, वो भी गरीबों के लिए तय मुफ्त राशन ले रहे थे. यानी जिनके पास गाड़ी, मकान और पक्की कमाई थी, वो भी सरकारी राशन दुकानों से अनाज उठा रहे थे. कैसे पकड़े गए ये लोग खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने इस बार सख्त तरीका अपनाया. विभाग ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से डेटा मिलान किया और ITR फाइल करने वालों की जानकारी PDS डेटाबेस से जोड़ी गई. इसके अलावा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ के रिकॉर्ड भी खंगाले गए. इसके बाद फील्ड लेवल पर जांच कर यह तय किया गया कि कौन वाकई पात्र है और कौन गलत तरीके से फायदा उठा रहा है. गरीबों के लिए खुला रास्ता इस जांच का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि जिन जरूरतमंद परिवारों के नाम कोटा खत्म होने की वजह से सालों से वेटिंग लिस्ट में थे, अब उन्हें भी राशन कार्ड मिल गया. करीब 14 लाख नए पात्र परिवारों को खाद्य सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलना शुरू हो गया है. क्या बोले विभाग के अफसर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के आयुक्त करमवीर शर्मा का कहना है कि यह जांच बेहद जरूरी थी. अपात्र लोगों की वजह से असली जरूरतमंद वंचित रह जाते थे. उन्होंने साफ कहा कि अब मुफ्त राशन सिर्फ उन्हीं को मिलेगा, जो इसके सही मायनों में हकदार हैं.