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‘पिंक कोकीन’ से दहशत: अमेरिका में उभरा खतरनाक नशा, खाते ही शरीर का रंग बदलने का दावा

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई चल रही है। कैरेबियन में ड्रग बोट्स पर हमले, वेनेजुएला जैसे देशों पर सैन्य ऑपरेशन, और बड़े पैमाने पर जब्तियां। लेकिन फिर भी अमेरिका में नया खतरनाक ड्रग पिंक कोकीन (जिसे तुसी या Tuci भी कहते हैं) क्लबों और पार्टियों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। Axios की ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह ड्रग अब बड़े शहरों से ग्रामीण इलाकों तक पहुंच चुका है, और स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है।   पिंक कोकीन आखिर है क्या? असल में यह कोकीन नहीं है, बल्कि एक खतरनाक कॉकटेल है यानी कई नशीले पदार्थों का मिश्रण। मुख्य रूप से इसमें केटामाइन (डिसोसिएटिव) और एमडीएमए (एक्सटेसी) होते हैं। जांच में अक्सर मेथामफेटामाइन, ओपिओइड्स, फेंटानिल जैसे घातक तत्व भी मिलते हैं। ऊपर से इसे आकर्षक बनाने के लिए गुलाबी फूड कलरिंग मिलाई जाती है, जो देखने में 'कूल' लगता है। यही वजह है कि हर बैच अलग होता है। कोई हल्का लगता है, तो कोई सीधे जान ले लेता है। ओवरडोज होने पर सांस रुक सकती है, दिल की धड़कन बिगड़ सकती है, और शरीर में ऑक्सीजन की कमी से नीला पड़ना ( Cyanosis) जैसी स्थिति आ सकती है। यह ड्रग नहीं, जहर है दरअसल, हाल के महीनों में अमेरिका के कई बड़े शहरों जैसे लॉस एंजिल्स, मियामी, न्यूयॉर्क और कोलोराडो स्प्रिंग्स में पिंक कोकीन से जुड़े छापे और चेतावनियां जारी हुई हैं। 2025 में न्यूयॉर्क में एक तस्करी केस में पिंक कोकीन के साथ दर्जनों हथियार जब्त किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2020 से जुलाई 2024 तक कई मौतें इससे जुड़ी पाई गईं। बताया जा रहा है कि 2024 की शुरुआत से अब तक चार राज्यों में कम से कम 18 मामले सामने आए, जिनमें ज्यादातर लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था। कहां से शुरुआत? अब सवाल उठता है कि इसकी शुरुआत कहां से हुई? बताया जाता है कि इसकी शुरुआत कोलंबिया से मानी जाती है, जहां इसे क्लब और पार्टी ड्रग के तौर पर पेश किया गया। वहां इसे 2सी (एक साइकेडेलिक ड्रग) से प्रेरित होकर 'तुसी' नाम दिया गया और गुलाबी रंग को ब्रांडिंग बना दिया। धीरे-धीरे यह लैटिन अमेरिका से अमेरिका और यूरोप तक फैल गया। एक्सपर्ट का कहना है कि पिंक कोकीन अब सिर्फ एक ड्रग नहीं, बल्कि एक 'कॉन्सेप्ट' बन चुका है। तस्करों को किसी फिक्स सप्लाई की जरूरत नहीं है, जो भी नशे उपलब्ध हों, उन्हें मिलाकर नया बैच तैयार कर देते हैं। यह कैसे बन जाता है जानलेवा? रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बड़ा खतरा यह है कि पिंक कोकीन का कोई सीधा इलाज या एंटीडोट नहीं है। डॉक्टर और फर्स्ट रिस्पॉन्डर सिर्फ सपोर्टिव केयर दे सकते हैं, जब तक नशा शरीर से बाहर न निकल जाए। कई बार जान बचाना मुश्किल हो जाता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अब यह ड्रग सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। ग्रामीण इलाकों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं।

चीन से पाक तक जुड़े तार, ताइवानी सरगना निकला डिजिटल ठगी का मास्टरमाइंड; 100 करोड़ की ठगी उजागर

नई दिल्ली दिल्ली पुलिस ने शनिवार को एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इसमें हजारों लोगों को कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डरा-धमकाकर लगभग 100 करोड़ रुपये की ठगी की गई। आरोप है कि यह ठगी करने वाला गिरोह खुद को एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) का अधिकारी बताकर लोगों को कॉल करता था और कहता था कि उनके मोबाइल नंबर आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े मामलों में इस्तेमाल हुए हैं। इस सिंडिकेट के तार पाकिस्तान समेत कई देशों तक फैले हुए हैं। पुलिस ने अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।   कैसे दिया जाता था ठगी को अंजाम दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (IFSO) विनीत कुमार ने बताया कि सितंबर 2025 से शुरू हुई इस ठगी में फ्रॉडस्टर्स पीड़ितों को फोन कर पहलगाम हमला और दिल्ली के रेड फोर्ट ब्लास्ट जैसे आतंकी मामलों से उनके फोन नंबरों के जुड़े होने का आरोप लगाते थे। उन्हें तत्काल गिरफ्तारी की धमकी दी जाती थी और 'डिजिटल अरेस्ट' में रखकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था। इस पूरे नेटवर्क का संचालन चीन, नेपाल, कंबोडिया, ताइवान और पाकिस्तान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों द्वारा किया जा रहा था। अब तक इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें एक ताइवान का नागरिक भी शामिल है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिंडिकेट ने अवैध SIMBOX डिवाइसों का इस्तेमाल किया, जो कई SIM कार्ड रखकर अंतरराष्ट्रीय कॉल्स को भारतीय नंबरों के रूप में दिखाते हैं। ये कॉल्स विदेशों (खासकर कंबोडिया) से आती थीं, लेकिन SIMBOX के जरिए स्थानीय दिखाई देती थीं। यानी विदेशी कॉल भी भारत की लोकल कॉल जैसी दिखाई देती है। फ्रॉडस्टर्स ने जानबूझकर 2G नेटवर्क का उपयोग किया ताकि रीयल-टाइम ट्रैकिंग मुश्किल हो जाए। SIMBOX में IMEI नंबरों को ओवरराइट और रोटेट किया जाता था, जिससे एक ही नंबर एक दिन में कई शहरों से आता दिखता था, जिससे जांच एजेंसियां भ्रमित हो जाती थीं। फॉरेंसिक जांच में 5,000 से ज्यादा कम्प्रोमाइज्ड IMEI नंबर और करीब 20,000 SIM कार्ड इस नेटवर्क से जुड़े पाए गए। पुलिस ने दिल्ली, मुंबई और मोहाली से 22 SIMBOX डिवाइस, मोबाइल फोन, लैपटॉप, राउटर, CCTV कैमरे, पासपोर्ट और विदेशी SIM कार्ड बरामद किए। जांच और गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट के डिप्टी कमिश्नर विनीत कुमार ने बताया कि सितंबर में कई शिकायतें मिलने के बाद मामला दर्ज किया गया और करीब 25 पुलिसकर्मियों की एक विशेष टीम बनाई गई। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) और डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) की मदद से तकनीकी जांच शुरू की गई। सबसे पहला SIM बॉक्स इंस्टॉलेशन गॉयला डेयरी, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में ट्रेस किया गया। इसके बाद एक महीने की गोपनीय निगरानी में दिल्ली के चार अलग-अलग इलाकों में सक्रिय ठिकानों का पता चला। छापेमारी में शशि प्रसाद (53) और परविंदर सिंह (38) को गिरफ्तार किया गया, जो कथित तौर पर दिल्ली में पांच जगहों पर इस अवैध इंफ्रास्ट्रक्चर को संभाल रहे थे। ताइवानी कनेक्शन और अंतरराष्ट्रीय साजिश फॉरेंसिक जांच से खुलासा हुआ कि SIM बॉक्स डिवाइस ताइवानी नागरिकों द्वारा सप्लाई और कॉन्फिगर किए गए थे। इनका समन्वय एन्क्रिप्टेड टेलीग्राम चैनलों के जरिए किया जा रहा था। पुलिस ने रणनीतिक जाल बिछाकर ताइवान के नागरिक आई-त्सुंग चेन (30) को भारत बुलाया और 21 दिसंबर 2025 को दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, चेन इस पूरे नेटवर्क का तकनीकी मास्टरमाइंड था और कथित तौर पर ताइवान-आधारित अपराधी गिरोह के लिए काम कर रहा था, जिसका नेतृत्व गैंगस्टर शांगमिन वू करता है। पाकिस्तान, क्रिप्टो और दक्षिण भारत तक फैला नेटवर्क जांच आगे बढ़ने पर मोहाली (पंजाब) में SIM बॉक्स हब मिला, जहां से सरबदीप सिंह और जसप्रीत कौर को गिरफ्तार किया गया। दोनों पहले कंबोडिया स्थित स्कैम कॉल सेंटर्स में काम कर चुके थे। आरोप है कि एक पाकिस्तानी हैंडलर इस नेटवर्क को फंडिंग और दिशा-निर्देश दे रहा था। जांच में पाकिस्तान-ऑरिजिन IMEI नंबरों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है, जिसे पुलिस राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चिंता मान रही है। तमिलनाडु के कोयंबटूर में क्रिप्टोकरेंसी के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल का खुलासा हुआ, जहां से दिनेश के. को गिरफ्तार किया गया। वहीं मुंबई के मलाड इलाके से एक और SIM बॉक्स सेटअप बरामद हुआ और अब्दुस सलाम की गिरफ्तारी हुई। पुलिस ने बताया कि यह ऑपरेशन काफी विस्तृत और अत्याधुनिक था। जांच में क्रिप्टो ट्रांजेक्शन, मनी लॉन्ड्रिंग चैनलों और बाकी घरेलू व अंतरराष्ट्रीय ऑपरेटरों की तलाश जारी है। यह मामला भारतीय नागरिकों के खिलाफ भय और आतंक के नाम पर चलाए गए संगठित अंतरराष्ट्रीय अपराध को उजागर करता है। दिल्ली पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने और ऐसी धमकियों पर तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत करने की अपील की है।

श्रद्धांजलि सभा में भावुक हुए CM हेमंत, पिता शिबू सोरेन के संघर्षपूर्ण जीवन को किया याद

  रांची आज यानी रविवार को दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जन्मदिन है। वहीं, सीएम हेमंत सोरेन ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री हेमंत ने कहा कि बाबा दिशोम शिबू सोरेन का संघर्ष, जीवन और उनके आदर्श सदियों तक लोगों को न्याय, स्वाभिमान और अधिकारों के लिए प्रेरित करते रहेंगे। उनका जीवन झारखंड के इतिहास का प्रेरणास्रोत है। सीएम हेमंत ने आज गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की भी शुरुआत की। इस योजना से राज्य के छात्रों को उच्च शिक्षा में मदद मिलेगी। वहीं, इससे पहले सीएम हेमंत ने अपने सोशल मीडिया हैंडल के जरिए अपने पिता के संघर्षों को याद किया। सीएम हेमंत ने लिखा, "आज, मेरे बाबा, दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी की जन्म जयंती है। यह मेरे लिए महज एक महान नेता का जन्मदिन नहीं है, बल्कि उस पिता की याद है जिन्होंने मुझे जीवन जीने की कला सिखाई, संघर्ष करना सिखाया और सबसे महत्वपूर्ण, बिना झुके अपनी गरिमा, मूल्यों और सच्चाई पर अडिग रहना सिखाया।" सीएम हेमंत सोरेन ने आगे कहा, "बाबा ने पूरे जीवन अन्याय के सामने कभी सिर नहीं झुकाया। उन्होंने जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। मैंने उन्हें कई बार थका हुआ देखा, लेकिन टूटते कभी नहीं देखा। उनकी वो अटूट इच्छाशक्ति और दृढ़ता आज भी मेरे  

देशभर में टेरर का नेटवर्क: 6 गैंग का मास्टरमाइंड असली रहमान डकैत सूरत में दबोचा गया

सूरत रहमान डकैत की दी हुई मौत बड़ी कसाईनुमा होती है… इस एक डायलॉग ने फिल्म धुरंधर में निभाए एक किरदार ने अक्षय खन्ना को सदा के लिए लोगों का दीवाना बना दिया है। लोगों को फिल्म से ही मालूम चला कि पाकिस्तान के लियारी में खौफ का दूसरा नाम रहे रहमान की कितनी दहशत थी,लेकिन हम आपसे कहें कि भारत में भी एक रहमान डकैत है, तो शायद आप चौंक जाएं। गुजरात के सूरत में पुलिस को कई राज्यों तक फैले नेटवर्क और गैंग चलाकर खतरनाक वारदात को अंजाम देने वाले रहमान डकैत को गिरफ्तार किया है। रहमान डकैत का नाम असल में राजू ईरानी ऊर्फ आबिद अली उर्फ रहमान डकैत है। एमपी का ये खतरनाक अपराधी सूरत क्राइम ब्रांच ने बकायदा भारत के असल अपराधी रहमान डकैत की तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा कि सूरत सिटी क्राइम ब्रांच ने अंतरराज्यीय इरानी गैंग के सरदार आबिद अली उर्फ राजू उर्फ रहमान डकैत को सूरत में किसी वारदात को अंजाम देने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। वह कई राज्यों में अपराध करने के लिए जाना जाता है। यह एक 'इरानी गैंग' है जो अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय है, यानी यह गैंग एक से अधिक राज्यों में अपराध करता है। बता दें कि राजू ईरानी उर्फ रहमान डकैत असल में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का रहने वाला है। सूरत क्राइम ब्रांच के डीसीपी भावेश रोजिया ने मीडिया से बातचीत में बताया कि रहमान डकैत सूरत में किसी वारदात को अंजाम देने के इरादे से आया था, हमें जैसे ही सूचना मिली हमने उसे पकड़ लिया। कई चौंकाने वाले खुलासे पुलिस की पूछताछ में इस खतरनाक अपराधी के बारे में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोपी राजू ईरानी भोपाल के ‘ईरानी डेरा’ इलाके से अपना पूरा नेटवर्क चलाता है। वह अपने भाई जाकिर अली के साथ मिलकर इस पूरे गिरोह को संभालता है। इनके नीचे 6 से ज्यादा अलग-अलग गैंग काम कर रहे हैं, जो देश के 14 राज्यों में सक्रिय हैं। राजू ईरानी फिलहाल 6 से अधिक राज्यों की पुलिस की तलाश में है और उसके खिलाफ 10 से ज्यादा गंभीर मामले दर्ज हैं। राजू उर्फ रहमान डकैत खुद अपराध करने कम जाता था। वह एक मैनेजर की तरह यह तय करता था कि कौन सी गैंग किस राज्य में जाएगी और क्या काम करेगी। यह गिरोह ज्यादातर सीनियर सिटीजन (बुजुर्गों) को अपना शिकार बनाता था। कभी खुद को पुलिस या CBI अफसर बताकर लोगों को डराते और उनके गहने उतरवा लेते थे। रास्ते में फर्जी चेकिंग के बहाने लोगों की नकदी और जेवर लूट लेते थे। लूट के अलावा यह गिरोह जमीनों पर कब्जा करने, अवैध हथियार रखने और चोरी का सामान बेचने जैसे कामों में भी शामिल है।  

मानसिक शांति की तलाश है? गुलाब की पंखुड़ियों से करें तनाव और क्लेश दूर

आज के आधुनिक दौर में हम अपने घरों को महकाने के लिए केमिकल वाले रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन, वास्तु शास्त्र के अनुसार, ये सुगंध केवल गंध को छिपाती हैं, घर की ऊर्जा को नहीं बदलतीं। अगर आप अपने घर में असली सकारात्मकता और शांति चाहते हैं, तो 'फूलों के राजा' गुलाब का सहारा लें। क्या आपको महसूस होता है कि घर में एंट्री लेते ही किसी तरह का भारीपन या चिड़चिड़ापन होने लगता है? अक्सर यह घर में मौजूद वास्तु दोष या स्थिर ऊर्जा के कारण होता है। ऐसे में गुलाब की पंखुड़ियां हमारे जीवन में एक प्राकृतिक हीलर की तरह काम करती हैं। वास्तु और गुलाब का गहरा संबंध गुलाब न केवल सुंदरता का प्रतीक है, बल्कि इसमें दैवीय ऊर्जा का वास भी माना जाता है। वास्तु के अनुसार, ताजे गुलाब की पंखुड़ियां घर के वातावरण से नकारात्मकता को सोख लेती हैं। एक कांच के कटोरे में साफ पानी भरकर उसमें ताजे गुलाब की पंखुड़ियां डालकर रखने से घर की वायु शुद्ध होती है और मानसिक तनाव कम होता है। शुक्र ग्रह की कृपा बनी रहती है ज्योतिष और वास्तु में गुलाब का संबंध शुक्र ग्रह से माना गया है। शुक्र देव सुख, समृद्धि और प्रेम के कारक हैं। अगर आप इसे अपने घर के मुख्य द्वार या बैठक रूम में रखते हैं, तो इससे घर में धन और वैभव का आगमन होता है। बस ध्यान रहे कि पंखुड़ियां सूखते ही उन्हें बदल दें, क्योंकि सूखे हुए फूल वास्तु दोष पैदा कर सकते हैं। गुलाब लाता है रिश्तों में मिठास वास्तु शास्त्र के अनुसार, बेडरूम में ताजे गुलाब की पंखुड़ियां रखने से पति-पत्नी के बीच के झगड़े कम होते हैं और आपसी प्रेम बढ़ता है। इसकी सौम्य सुगंध मस्तिष्क के 'स्ट्रेस हार्मोन' को कम कर सुकून की नींद लाने में मदद करती है। यह रूम फ्रेशनर से कहीं ज्यादा असरदार माना गया है। सही दिशा का करें चुनाव वास्तु के अनुसार, उत्तर या पूर्व दिशा (ईशान कोण) में जल के साथ गुलाब की पंखुड़ियां रखना सबसे शुभ है। यह दिशा जल तत्व और देवताओं की मानी जाती है, जहां गुलाब की खुशबू रखने से घर के सदस्यों के बीच तालमेल बेहतर होता है और करियर में सफलता के नए रास्ते खुलते हैं। हर सुबह इन पंखुड़ियों को बदलना एक नई शुरुआत और उत्साह का प्रतीक है।  

‘आक्रमणकारी चले गए, आस्था बची रही’— सोमनाथ मंदिर पर पीएम मोदी का बड़ा बयान

सोमनाथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने 108 अश्वों के साथ निकाली गई भव्य शौर्य यात्रा में भाग लिया। यह यात्रा उन वीर योद्धाओं की स्मृति में निकाली गई, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी। यात्रा को साहस, बलिदान और वीरता का प्रतीक बताया गया। शौर्य यात्रा में शामिल होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की और इसके बाद एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह इसे अपना बड़ा सौभाग्य मानते हैं कि सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में उन्हें इस स्वाभिमान पर्व की सेवा का अवसर मिला। उन्होंने देश और दुनिया से जुड़े श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए “जय सोमनाथ” का उद्घोष किया। पीएम मोदी ने कहा कि यह समय, यह वातावरण और यह उत्सव अपने आप में अद्भुत है। एक ओर भगवान महादेव की उपस्थिति, दूसरी ओर समुद्र की लहरें, मंत्रोच्चार की गूंज और भक्तों की आस्था, यह सब मिलकर इस पर्व को दिव्य बना रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में गौरव, गरिमा और आध्यात्मिक अनुभूति का संगम देखने को मिल रहा है। उन्होंने 72 घंटे तक चले अनवरत ओंकार नाद और मंत्रोच्चार का उल्लेख किया। पीएम मोदी ने बताया कि ड्रोन शो के जरिए सोमनाथ मंदिर के 1000 वर्षों के इतिहास को दर्शाया गया, जिसमें वैदिक गुरुकुलों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि 108 अश्वों के साथ निकली शौर्य यात्रा, मंत्रों और भजनों की प्रस्तुति अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक रही, जिसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है। 1000 साल पुराने इतिहास का जिक्र प्रधानमंत्री मोदी ने 1026 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय हमारे पूर्वजों ने अपनी आस्था और विश्वास की रक्षा के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि आक्रांता यह सोचते रहे कि उन्होंने सोमनाथ को नष्ट कर दिया, लेकिन हजार साल बाद भी सोमनाथ मंदिर उसी शान से खड़ा है और भारत की शक्ति का प्रतीक बना हुआ है। 'आक्रांता इतिहास बन गए, सोमनाथ आज भी अडिग' : पीएम पीएम मोदी ने कहा कि गजनी से लेकर औरंगजेब तक जिन आक्रांताओं ने सोमनाथ को नष्ट करने की कोशिश की, वे इतिहास के पन्नों में सिमट गए, लेकिन सोमनाथ मंदिर आज भी सागर तट पर अडिग खड़ा है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ का अर्थ ही अमरता और शक्ति से जुड़ा है, जो विनाश के बाद भी पुनर्निर्माण का संदेश देता है। सोमनाथ का इतिहास हार नहीं, विजय का है प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश या पराजय का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का इतिहास है। उन्होंने बताया कि यह पर्व केवल विध्वंस की याद नहीं, बल्कि हजार वर्षों की यात्रा और भारत के आत्मसम्मान का प्रतीक है। पीएम मोदी ने यह भी बताया कि यह वर्ष विशेष है, क्योंकि एक ओर सोमनाथ पर पहले हमले के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं, वहीं 1951 में हुए मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं। आजादी के बाद मंदिर पुनर्निर्माण का विरोध हुआ था प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आजादी के बाद कुछ लोगों ने सोमनाथ जैसे पवित्र स्थलों से दूरी बनाने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ इतिहासकारों और नेताओं ने आक्रांताओं के अत्याचारों को छिपाने का प्रयास किया और धार्मिक हमलों को केवल लूट तक सीमित बताया गया। उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा सोमनाथ के पुनर्निर्माण की घोषणा का भी विरोध हुआ था और तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के मंदिर आने पर भी आपत्तियां जताई गई थीं। 'आज भी भारत को बांटने की ताकतें सक्रिय' : पीएम पीएम मोदी ने कहा कि जो ताकतें पहले तलवारों से हमला करती थीं, वे आज अलग-अलग रूपों में भारत को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि देश को एकजुट और सतर्क रहकर ऐसी साजिशों का मुकाबला करना होगा। भारत ने दिल जीतने का रास्ता दिखाया प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि भारत की सभ्यता घृणा नहीं, बल्कि प्रेम और सृजन का मार्ग दिखाती है। भारत ने दुनिया को दूसरों को मिटाकर आगे बढ़ना नहीं, बल्कि लोगों का दिल जीतना सिखाया है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ का हजार साल का इतिहास हमें आने वाले हजार वर्षों के लिए भी प्रेरणा देता रहेगा।  

भ्रष्टाचार मामलों में हरियाणा में अब जांच से पहले अनुमति लेना जरूरी

चंडीगढ़. अब सरकारी अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर जांच एजेंसी सीधे कार्रवाई नहीं कर सकेगी। पहले उच्च अधिकारी से स्वीकृति जरूरी होगी। मगर रंगे हाथ पैसे लेने वाले वाले मामलों में पहले की तरह कार्रवाई जारी रहेगी। हरियाणा सरकार ने अधिकारियों व कर्मचारियों से संबंधित भ्रष्टाचार के मामलों में जांच के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की है। इसके तहत भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर अब सरकारी अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ जांच या पूछताछ से पहले सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि यह फैसला उन मामलों में लागू नहीं होगा, जहां अधिकारी व कर्मचारी रंगे हाथ पकड़े जाएंगे। भ्रष्टाचार के मामलों में जांच के लिए केंद्र सरकार ने हरियाणा समेत सभी राज्यों को नए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों का अध्ययन करने के बाद हरियाणा सरकार ने सभी विभागों को जांच से संबंधित एसओपी लागू करने के निर्देश दिए हैं। अब ऐसे मामलों में जांच के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 17ए की पालना जरूरी है। यह एसओपी उन सभी लंबित मामलों में भी लागू होगी, जिसमें अभी तक धारा 17ए के तहत अनुमति नहीं ली गई है। जांच की अनुमति मुख्य सचिव के स्तर पर ही दी जाएगी। वहीं, दूसरी एजेंसी के मामलों में संबंधित अधिकारी के प्रशासनिक विभाग को ही सक्षम प्राधिकारी माना जाएगा। नई एसओपी का मकसद यही है कि किसी भी अधिकारी को बेवजह प्रताड़ित न किया जाए। पुख्ता सबूत के बाद ही कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाए। एसओपी में यह भी प्रावधान किया गया है कि शिकायत की पहले जांच की जाएगी। उसके बाद संबंधित अधिकारी से पूछताछ व जांच के लिए अनुमति मांगी जाएगी। सिंगल विंडो के जरिये ही अनुमति ली जाएगी। तीन महीने में अनुमति पर लेना होगा फैसला नई एसओपी में यह भी तय कर दिया गया है कि जांच की अनुमति पर फैसला तीन महीने के भीतर लेना होगा। विशेष परिस्थितियों में एक महीने का समय बढ़ाया जा सकता है, मगर इस बारे में लिखित में बताना होगा। वहीं, एसओपी में यह भी निर्देश दिया गया है कि तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के कर्मियों के भ्रष्टाचार के मामलों में जांच की अनुमति की जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारी निचले अधिकारी को सौंप सकते हैं। मगर एसओपी के अनुपालन की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक विभाग की रहेगी।

डिप्टी सीएम साव के नेतृत्व में विश्व रिकॉर्ड की तैयारी, राष्ट्रीय युवा दिवस पर 1500 से ज्यादा बच्चे बनेंगे स्वामी विवेकानंद

बिलासपुर उप मुख्यमंत्री सह खेल मंत्री अरुण साव ने बताया कि, 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जी की जयंती को पूरा देश राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाता है। छत्तीसगढ़ में अलग अलग प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। कई स्थानों में स्वदेशी दौड़ का आयोजन होगा। उन्होंने कहा कि, खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा युवा रत्न अवार्ड भी प्रदान किया जाएगा। डिप्टी सीएम अरुण साव ने बताया कल 12 जनवरी को उनके नेतृत्व में खेल एवं युवा कल्याण विभाग बिलासपुर में विश्व रिकॉर्ड बनाने जा रहा है। पुलिस ग्राउंड बिलासपुर में 1500 से अधिक बच्चे विश्व रिकॉर्ड बनाने स्वामी विवेकानंद की वेशभूषा में इकट्ठे होंगे और वंदे मातरम् का गान करेंगे। एक साथ 1500 स्कूली बच्चे नशा ना करने की शपथ लेंगे। साथ ही कंपनी गार्डन, बिलासपुर में विवेकानंद जी की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने जानकारी दी कि पुलिस ग्राउंड बिलासपुर में 5500 स्क्वायर फीट से बड़ी आकर्षक और विशाल रंगोली से भी स्वामी विवेकानंद का चित्र बनाया जा रहा है।  राष्ट्रीय युवा दिवस पर इस बार बिलासपुर देश भर में आकर्षण का केंद्र रहने वाला है, ये बिलासपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है।

चंडीगढ़ मेयर चुनाव से पहले पार्षद की भाभी को पंजाब पुलिस ने किया अरेस्ट

चंडीगढ़. मेयर चुनाव से ठीक पहले पंजाब पुलिस के एक्शन से चंडीगए़ में माहौल बेहद गरमा गया है। वार्ड नंबर-4 की बीजेपी पार्षद सुमन देवी की भाभी को मोहाली की सुहाना थाना पुलिस ने चंडीगढ़ के आईटी पार्क स्थित उनके घर से रविवार तड़के गिरफ्तार कर लिया। भाजपा ने इस कार्रवाई को सरेआम गुंडागर्दी और राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बताते हुए पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्षद सुमन देवी कुछ दिन पहले ही आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुई थीं। उनके परिवार का आरोप है कि पुलिस बिना कोई जानकारी दिए अचानक घर में घुसी और महिला को हिरासत में ले गई।परिजनों ने कहा कि गिरफ्तारी का कारण तक नहीं बताया गया। दूसरी ओर, मोहाली पुलिस ने अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। भाजपा कार्यकर्ताओं ने मनीमाजरा पुलिस स्टेशन घेरा गिरफ्तारी की खबर मिलते ही भाजपा चंडीगढ़ अध्यक्ष जितेंद्र पाल मल्होत्रा, कई पार्षद और दर्जनों कार्यकर्ता मनीमाजरा पुलिस स्टेशन के बाहर पहुंच गए और पंजाब सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। भाजपा नेताओं का कहना है कि विधानसभा और नगर निगम चुनावों से पहले विपक्षी नेताओं को डराने की यह कोशिश है। 29 जनवरी को होने हैं चुनाव गौरतलब है कि चंडीगढ़ नगर निगम में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए चुनाव 29 जनवरी को होने हैं। इसी दिन मौजूदा मेयर का कार्यकाल समाप्त होगा और उसी दिन परिणाम भी आएंगे। खास बात यह है कि आम आदमी पार्टी ने हाल ही में कांग्रेस के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया है, जिससे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। भाजपा के पास 18 पार्षद चंडीगढ़ नगर निगम में कुल 35 पार्षद और एक सांसद वोट देते हैं। भाजपा के पास इस समय 18 पार्षद हैं। हाल में सुमन देवी और पूनम के भाजपा में आने से पार्टी की स्थिति और मजबूत हुई है। यदि कांग्रेस और AAP एक साथ रहते तो उनके भी कुल 18 वोट बनते, पर गठबंधन टूटने से अब भाजपा को बढ़त मिलती दिख रही है। वोटिंग इस बार सीक्रेट बैलेट की बजाय हाथ उठाकर होगी, जिससे क्रॉस-वोटिंग की संभावना नहीं रहती और भाजपा के एकजुट होने से तीनों पदों पर उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही है।

हरियाणा में हर चौथा बिजली उपभोक्ता डिफाल्टर

चंडीगढ़. हरियाणा में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन इसके साथ ही बिजली बिलों का बकाया भी गंभीर संकट का रूप लेता जा रहा है। राज्य में लगभग हर चौथा बिजली उपभोक्ता डिफाल्टर की श्रेणी में आ चुका है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में कुल 83.40 लाख से अधिक बिजली कनेक्शन हैं। इनमें से 22.50 लाख उपभोक्ताओं पर 7,742 करोड़ रुपये से ज्यादा का बिजली बिल बकाया है। अक्तूबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार डिफाल्टर उपभोक्ताओं में 15.98 लाख कनेक्टेड हैं। इन पर 3,873.98 करोड़ रुपये बकाया है जबकि 6.52 लाख डिस्कनेक्टेड उपभोक्ताओं पर 3,868.17 करोड़ रुपये की राशि लंबित है। इसका सीधा अर्थ है कि बड़ी संख्या में कनेक्शन काटने के बावजूद बकाया राशि की वसूली नहीं हो पा रही है। डीएचबीवीएन पर सबसे ज्यादा दबाव वितरण निगमों में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) पर सबसे अधिक बकाया है। डीएचबीवीएन के 12.95 लाख डिफाल्टर उपभोक्ताओं पर 4,817.81 करोड़ रुपये लंबित हैं। वहीं उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) में 9.55 लाख डिफाल्टरों पर 2,924.32 करोड़ रुपये का बिल बकाया है। ग्रामीण घरेलू उपभोक्ता सबसे बड़े डिफाल्टर श्रेणीवार आंकड़े बताते हैं कि सबसे ज्यादा बकाया घरेलू ग्रामीण उपभोक्ताओं पर है। ग्रामीण घरेलू श्रेणी के 11.17 लाख उपभोक्ताओं पर अकेले 4,282.12 करोड़ रुपये बकाया हैं। इसके मुकाबले घरेलू शहरी उपभोक्ताओं पर 959.07 करोड़ रुपये, औद्योगिक उपभोक्ताओं पर 1,087.78 करोड़ रुपये और व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर 749.98 करोड़ रुपये बकाया है। कृषि उपभोक्ताओं पर 200.59 करोड़ रुपये और सरकारी विभागों के 23,672 कनेक्शनों पर भी 418.06 करोड़ रुपये की राशि अटकी हुई है। बिजली निगमों की सेहत पर असर इतनी बड़ी डिफाल्टिंग राशि से बिजली वितरण निगमों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है। इसका असर बिजली ढांचे के सुधार, नए निवेश और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बकाया वसूली के लिए ठोस नीति नहीं बनाई गई तो नुकसान अंततः ईमानदार उपभोक्ताओं पर बढ़ी हुई दरों के रूप में पड़ेगा। दरें तय करने से पहले चुनौती गौरतलब है कि आठ जनवरी को हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग नई बिजली दरों को लेकर जन सुनवाई कर रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या आयोग दरें बढ़ाने से पहले बकाया वसूली को लेकर बिजली निगमों को सख्त और स्पष्ट दिशानिर्देश देगा या फिर बोझ आम उपभोक्ताओं पर ही डाला जाएगा। कई मामले न्यायालयों में भी लंबित बिजली बकाया से जुड़े कई मामले न्यायालयों में भी लंबित हैं और इन पर तेजी से कार्रवाई के लिए विभाग को निर्देश दिए जा चुके हैं। सरकारी भवनों और संस्थानों में बकाया राशि के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकारी व अन्य सभी भवनों में बिजली की बकाया राशि की वसूली सख्ती से की जाएगी और भुगतान में आनाकानी होने पर कानून अनुसार कार्रवाई होगी। -अनिल विज, ऊर्जा मंत्री, हरियाणा।