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प्रगति मॉडल से उत्तर प्रदेश बना देश का इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन: मुख्यमंत्री

‘प्रगति’ नए भारत की कार्यसंस्कृति का प्रतीक : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इंटेंट, टेक्नोलॉजी और अकाउंटेबिलिटी के समन्वय से सुनिश्चित हो रहे हैं ठोस परिणाम प्रगति मॉडल से उत्तर प्रदेश बना देश का इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन: मुख्यमंत्री इंटर-एजेंसी बाधाएँ समाप्त, अनुमतियों और मंजूरियों में आई तेजी बॉटलनेक स्टेट से ब्रेकथ्रू स्टेट बना उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री ₹10.48 लाख करोड़ की 330 परियोजनाओं के साथ यूपी के पास देश का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो यूपी में 39% परियोजनाएँ पूरी, 202 परियोजनाएँ समयबद्ध प्रगति पर ₹2.37 लाख करोड़ की 128 परियोजनाएँ पूर्ण, ₹8.11 लाख करोड़ की 202 परियोजनाएँ प्रगति पर लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन (प्रगति) केवल बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा का मंच नहीं, बल्कि नए भारत की नई कार्यसंस्कृति का सशक्त उदाहरण है। मंगलवार को आयोजित विशेष प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘प्रगति’ उस प्रशासनिक मॉडल को दर्शाता है, जिसकी नींव आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए रखी और 2014 के बाद इसे राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति ने यह सिद्ध किया है कि जब इंटेंट, टेक्नोलॉजी और अकाउंटेबिलिटी एक साथ आती हैं, तो आउटकम अपने आप सुनिश्चित हो जाते हैं। डिजिटल गवर्नेंस और कोऑपरेटिव फेडरलिज्म को मजबूती देते हुए प्रगति एक ऐसा प्लेटफॉर्म बना है, जहां अंतर-मंत्रालयीय और अंतर-विभागीय समन्वय के माध्यम से जटिल समस्याओं का समयबद्ध समाधान संभव हुआ है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रगति मॉडल की अवधारणा वर्ष 2003 में गुजरात में 'स्वागत' (स्टेट वाइड अटेंशन ऑन ग्रीवांसेज बाई एप्लिकेशन ऑफ टेक्नोलॉजी) के रूप में प्रारंभ हुई थी, जिसका उद्देश्य नागरिक शिकायतों के निवारण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना था। यही मॉडल आगे चलकर ‘प्रगति’ के राष्ट्रीय स्वरूप के रूप में विकसित हुआ, जिसने मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं, सामाजिक योजनाओं और सिस्टम रिफॉर्म के क्षेत्र में टीम इंडिया अप्रोच को मजबूती प्रदान की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति केवल एक रिव्यू मैकेनिज्म नहीं, बल्कि गवर्नेंस रिफॉर्म है। इसने शासन को फाइल-केंद्रित संस्कृति से फील्ड-आधारित परिणामों की दिशा में अग्रसर किया है। इसके माध्यम से निर्णय प्रक्रिया तेज हुई है, समय और लागत की बर्बादी रुकी है तथा केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय के साथ-साथ स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति के प्रभाव का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके माध्यम से ₹86 लाख करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को गति मिली है। इनमें से 377 प्रमुख परियोजनाओं की प्रत्यक्ष समीक्षा प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, जबकि 3162 में से 2958 मुद्दों का समाधान किया जा चुका है, जो शासन की विश्वसनीयता को दर्शाता है। उत्तर प्रदेश के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति मॉडल राज्य के लिए एक गेम-चेंजर सिद्ध हुआ है। उत्तर प्रदेश आज देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन के रूप में उभरा है। एक्सप्रेस-वे नेटवर्क, देश का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क, सर्वाधिक शहरों में मेट्रो और एयर कनेक्टिविटी, देश की पहली रैपिड रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग और रोपवे जैसे प्रोजेक्ट समयबद्ध ढंग से आगे बढ़े हैं, जिनके पीछे निरंतर समीक्षा और समस्या-समाधान का प्रभावी मंच प्रगति रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के पास ₹10.48 लाख करोड़ की 330 परियोजनाओं के साथ देश का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो है। इनमें परिवहन, ऊर्जा, शहरी विकास, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास से जुड़े प्रमुख प्रोजेक्ट शामिल हैं। इनमें से ₹2.37 लाख करोड़ की लागत की 128 परियोजनाएं (39%) पहले ही पूर्ण होकर कमीशन हो चुकी हैं, जबकि ₹8.11 लाख करोड़ की 202 परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा के अनुरूप गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करते हुए सभी अड़चनों का समाधान कर परियोजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है, और इसमें ‘प्रगति’ एक सशक्त आधार बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति मॉडल ने उत्तर प्रदेश को रेलवे, हाईवे और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में यदि परियोजनाओं, एमओयू और अनुमतियों में देरी होती है तो निवेशक दूसरे राज्यों की ओर रुख करता है। प्रगति ने वर्षों में होने वाली प्रक्रियाओं को महीनों और महीनों की प्रक्रियाओं को दिनों में समेटते हुए परियोजनाओं को तय समय-सीमा में धरातल पर उतारने का सशक्त माध्यम प्रदान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ₹4.19 लाख करोड़ की लागत के 65 बड़े प्रोजेक्ट प्रगति के अंतर्गत शामिल हैं। इनमें से 26 परियोजनाएँ पूरी होकर कमीशन हो चुकी हैं, जबकि 39 परियोजनाएँ निर्माण के विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से प्रदेश में इंटर-एजेंसी बाधाओं का प्रभावी समाधान हुआ है। राजस्व, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन, नगर विकास, पंचायती राज सहित सभी संबंधित विभाग एक ही मंच पर बैठकर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित कर रहे हैं। इससे हाईवे, रेलवे, पावर और टेलीकॉम जैसी परियोजनाओं में तेज़ प्रगति संभव हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रक्रिया सुशासन का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 515 मुद्दों में से 494 का समाधान (96%) किया गया है। वहीं, प्रगति के अंतर्गत 287 मुद्दों में से 278 मुद्दों का समाधान (97%) सुनिश्चित किया गया है। यह उच्च समाधान दर प्रशासनिक तत्परता, स्पष्ट जवाबदेही और निर्णायक नेतृत्व की क्षमता को दर्शाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति जैसे तकनीक-आधारित प्लेटफॉर्म के कारण उत्तर प्रदेश आज बॉटलनेक स्टेट से ब्रेकथ्रू स्टेट में परिवर्तित हो चुका है। राज्य सरकार अब केवल फैसिलिटेटर नहीं, बल्कि एक्सेलेरेटर की भूमिका में परियोजनाओं को गति दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रगति ने टीम इंडिया स्पिरिट को और सशक्त किया है। केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वय से अब समस्या पर नहीं, बल्कि समाधान पर चर्चा होती है। वर्ष 2014 से पहले जहां परियोजनाएं स्वीकृत तो होती थीं लेकिन पूरी नहीं हो पाती थीं, आज हर परियोजना के शिलान्यास के साथ उसकी पूर्णता की समय-सीमा तय होती है और उसकी नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समयबद्ध परियोजनाएं रोजगार सृजन के साथ-साथ विकास की गति को भी तेज़ करती हैं और इसके लिए उन्होंने प्रदेशवासियों की ओर से आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन के प्रति आभार व्यक्त किया।

HC का आदेश: सोशल मीडिया से हटाएं विवादित लाइव स्ट्रीमिंग लिंक, 48 घंटे का अल्टीमेटम

जबलपुर  मप्र हाईकोर्ट में प्रकरणों की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग के वीडियो का सोशल मीडिया में दुरूपयोग किये जाने को चुनौती देते हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने विवादित 102 यूआरएल 48 घंटों में हटाने के आदेश जारी किये हैं। याचिका पर अगली सुनवाई 24 मार्च को निर्धारित की गई है।जबलपुर निवासी अधिवक्ता अरिहंत तिवारी, विदित शाह और डॉ. विजय बजाज की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में मांग की गई कि हाईकोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग के वीडियो को काट-छांट कर, मीम्स या सनसनीखेज शॉर्ट्स के रूप में सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने पर तत्काल रोक लगाई जाए। जबलपुर निवासी अधिवक्ता अरिहंत तिवारी और विदित शाह तथा डॉ. विजय बजाज की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग के वीडियोज़ यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर मीम्स या शॉर्ट्स के माध्यम से डाली जाती है। अदालती कार्रवाई की चयनात्मक क्लिपिंग और सनसनीखेज प्रस्तुति न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा कमजोर करती है। पूर्व में दायर याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के नियम 11 (बी) के अनुरूप, किसी भी रूप में अदालत की लाइव-स्ट्रीम सामग्री को संपादित करने, छेड़छाड़ करने या अवैध रूप से उपयोग करने से रोक दिया न्यायाधीशों द्वारा ओपन कोर्ट में कही बातों को मिर्च मसाला लगाकर उन्हें प्रसारित किया जाता है, जो न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है। यू-ट्यूब के स्थान पर वेबेक्स आधारित प्लेटफॉर्म के जरिए प्रकरणों की लाइव स्ट्रीमिंग की जाए, जोकि कुछ हद तक सुरक्षित है। यह मांग भी की गई कि रजिस्ट्रार आईटी भी इस तरह की गतिविधियों पर मॉनिटरिंग करें और नियंत्रण सुनिश्चित करें। न्यायिक गरिमा को कमजोर कर रही क्लिपिंग: याचिकाकर्ता याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि अदालती कार्यवाही की क्लिपिंग कर उसे मसालेदार अंदाज में पेश करना न्यायिक प्रक्रिया और अदालत की गरिमा को कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि ओपन कोर्ट में न्यायाधीशों द्वारा कही गई बातों को संदर्भ से हटाकर वायरल किया जा रहा है, जो कि न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है। लाइव स्ट्रीमिंग नियमों का हवाला याचिका में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग नियम 11(बी) का हवाला देते हुए कहा गया कि किसी भी रूप में अदालत की लाइव-स्ट्रीम सामग्री को संपादित करने, छेड़छाड़ करने या अवैध रूप से उपयोग करने की अनुमति नहीं है। पूर्व में इस नियम के तहत हाईकोर्ट ऐसे कृत्यों पर रोक भी लगा चुका है। यूट्यूब की जगह वेबेक्स प्लेटफॉर्म की मांग याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से यह भी मांग की कि यूट्यूब के बजाय वेबेक्स आधारित सुरक्षित प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रकरणों की लाइव स्ट्रीमिंग की जाए, ताकि सामग्री के दुरुपयोग की संभावना कम हो। साथ ही, रजिस्ट्रार (आईटी) को इस तरह की गतिविधियों पर नियमित मॉनिटरिंग और नियंत्रण के निर्देश देने की मांग भी की गई। मेटा कंपनी का पक्ष सुनवाई के दौरान मेटा कंपनी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि यदि आपत्तिजनक वीडियो के यूआरएल लिंक उपलब्ध करा दिए जाएं, तो उन्हें हटाया जा सकता है। इस पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को विवादित यूआरएल कंपनी को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। 102 विवादित लिंक की सूची पेश याचिकाकर्ता अधिवक्ता अरिहंत तिवारी ने बताया कि उनकी ओर से 102 विवादित यूआरएल लिंक की सूची कोर्ट के समक्ष पेश की गई थी। याचिका की सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस की युगलपीठ ने इन सभी लिंक को 48 घंटे के भीतर हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं। पहले भी लग चुकी है रोक इससे पहले हाईकोर्ट ने क्रिमिनल कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग पर भी रोक लगा दी थी। कोर्ट का स्पष्ट मत है कि न्यायालय की पारदर्शिता के नाम पर उसकी गरिमा और अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। पूर्व में याचिका की सुनवाई के दौरान क्रिमिनल कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक लगा दी थी। मेटा कंपनी की तरफ से आपत्तिजनक वीडियो के यूआरएल लिंक उपलब्ध करा दिए जाएं तो उन वीडियो को हटा दिया जाएगा। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को उक्त लिंक कंपनी को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। याचिकाकर्ता अधिवक्ता अरिहंत तिवारी ने बताया कि उनकी तरफ से 102 विवादित यूआरएल लिंक की सूची पेश की गयी थी। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने पेश की गयी विवादित यूआरएल को 48 घंटों में हटाने के आदेश जारी किये हैं। 

मुख्यमंत्री का निर्देश, अपरिहार्य होने पर ही वृक्षों की कटान हो, जितने वृक्ष कटें उससे अधिक पौधरोपण सुनिश्चित किया जाए

विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का निर्देश, अपरिहार्य होने पर ही वृक्षों की कटान हो, जितने वृक्ष कटें उससे अधिक पौधरोपण सुनिश्चित किया जाए एनएचएआई सड़क परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा, समन्वय और समयबद्ध निस्तारण के निर्देश जिलाधिकारी साप्ताहिक एवं मुख्य सचिव पाक्षिक समीक्षा कर परियोजनाओं को समय से पूर्ण कराएं: मुख्यमंत्री भूमि अधिग्रहण के लिए किसानों से सीधा संवाद करें, बिचौलियों का हस्तक्षेप न हो: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास प्रदेश की अनिवार्य आवश्यकता है, किंतु यह पर्यावरण की कीमत पर नहीं हो सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वर्ष प्रदेश में 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है तथा सरकार की नीति है कि किसी भी परियोजना में अपरिहार्य स्थिति में ही वृक्षों की कटान की जाए और जितने वृक्ष कटें, उससे अधिक संख्या में पौधरोपण अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए, ताकि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बना रहे। मुख्यमंत्री सोमवार को प्रदेश में संचालित एवं प्रस्तावित भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की विभिन्न सड़क परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलावार समीक्षा करते हुए उन्होंने एनएचएआई के स्थानीय अधिकारियों एवं जिला प्रशासन के बीच बेहतर, सतत और प्रभावी समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि प्रत्येक जनपद के जिलाधिकारी एनएचएआई परियोजनाओं की साप्ताहिक समीक्षा सुनिश्चित करें। जहां भी किसी स्तर पर कोई विषय लंबित हो, उसे मुख्य सचिव की सोमवारीय समीक्षा बैठक में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत कर समयबद्ध निस्तारण किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि मुख्य सचिव स्वयं इन परियोजनाओं की पाक्षिक समीक्षा करें, जिससे कार्यों में अनावश्यक विलंब न हो और निर्णय शीघ्रता से लिए जा सकें। भूमि अधिग्रहण से संबंधित विषयों पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सीधे किसानों से संवाद स्थापित किया जाए। किसी भी स्थिति में बिचौलियों को हस्तक्षेप का अवसर न मिले, ताकि किसानों के हित सुरक्षित रहें और परियोजनाएं पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क परियोजनाएं प्रदेश के आर्थिक विकास, औद्योगिक विस्तार और आमजन की सुविधा से सीधे जुड़ी हैं। अतः सभी कार्य गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पूर्ण किए जाएं, जिससे उत्तर प्रदेश में सुदृढ़ कनेक्टिविटी के माध्यम से विकास को नई गति मिल सके।

1 लाख करोड़ का परमाणु युद्धपोत, समंदर में बना महाबली, 25 साल तक फ्यूल की जरूरत नहीं

नई दिल्ली कल्पना कीजिए समंदर के सीने पर तैरते एक ऐसे लोहे के पहाड़ की जिसके एक इशारे पर दुनिया के किसी भी कोने में तबाही का मंजर बिछाया जा सकता है. यह कोई हॉलीवुड फिल्म का दृश्य नहीं बल्कि अमेरिकी नौसेना का गेराल्ड आर. फोर्ड विमानवाहक पोत है. जब यह 1 लाख टन वजनी दैत्य समंदर की लहरों को चीरता हुआ आगे बढ़ता है तो दुश्मन देशों के रडार कांपने लगते हैं और सैटेलाइट्स की नजरें इसी पर टिक जाती हैं. इसे समंदर का अजेय किला कहना गलत नहीं होगा क्योंकि इसकी सुरक्षा में तैनात मिसाइलें और लेजर गन परिंदे को भी पर मारने की इजाजत नहीं देते. यह सिर्फ एक जहाज नहीं बल्कि अमेरिका का वो घमंड है जिसे चुनौती देने की हिम्मत फिलहाल दुनिया की किसी भी सेना में नहीं है. फोर्ड क्लास की बेजोड़ खासियतें फोर्ड क्लास के विमानवाहक पोत अपने पूर्ववर्ती ‘निमित्ज़ क्लास’ से कई गुना उन्नत हैं. इसकी सबसे बड़ी क्रांति EMALS (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम) है. पहले विमानों को भाप (Steam) के जरिए लॉन्च किया जाता था लेकिन अब शक्तिशाली चुंबकीय तरंगों का उपयोग होता है, जिससे भारी से भारी और हल्के से हल्के (ड्रोन) विमानों को तेजी से लॉन्च किया जा सकता है. • मारक क्षमता: यह पोत एक दिन में 160 से 220 सॉर्टीज़ (उड़ानें) संचालित कर सकता है. इस पर 75 से अधिक लड़ाकू विमान तैनात रहते हैं, जिनमें F-35C और F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट शामिल हैं. • स्वचालन (Automation): इसमें उन्नत तकनीक के कारण निमित्ज क्लास के मुकाबले 700 से 1,000 कम सैनिकों की जरूरत पड़ती है, जिससे परिचालन लागत कम होती है. • A1B न्यूक्लियर रिएक्टर: इसमें दो शक्तिशाली परमाणु रिएक्टर लगे हैं जो इसे असीमित रेंज देते हैं. यह 25 साल तक बिना ईंधन भरे समंदर में रह सकता है. • दोहरी रडार प्रणाली: इसमें ‘डुअल बैंड रडार’ (DBR) लगा है, जो दुश्मन की मिसाइल और विमानों को बहुत दूर से ही ट्रैक कर लेता है. लागत और मालिकाना हक फोर्ड क्लास दुनिया का सबसे महंगा सैन्य प्रोजेक्ट माना जाता है. पहले USS Gerald R. Ford (CVN 78) को बनाने में लगभग 13.3 बिलियन डॉलर (करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये) की लागत आई है. इसके अलावा इसके अनुसंधान और विकास (R&D) पर अलग से 5 बिलियन डॉलर खर्च किए गए. किन देशों के पासफोर्ड क्लास की ताकत? वर्तमान में यह तकनीक केवल संयुक्त राज्य अमेरिका के पास है. अमेरिकी नौसेना ने कुल 10 फोर्ड-क्लास कैरियर बनाने की योजना बनाई है. 1. USS Gerald R. Ford (CVN 78): वर्तमान में सेवा में है. 2. USS John F. Kennedy (CVN 79): परीक्षण के अंतिम चरण में है. 3. USS Enterprise (CVN 80) और USS Doris Miller (CVN 81): निर्माणाधीन हैं. जियो पॉलिटिक्स: समंदर का ‘सुपरपावर’ संदेश जियो पॉलिटिक्स में फोर्ड क्लास एक डिप्लोमैटिक टूल की तरह काम करता है. जब भी अमेरिका को किसी देश (जैसे चीन या ईरान) को चेतावनी देनी होती है तो वह उस क्षेत्र में अपना विमानवाहक पोत तैनात कर देता है. • इंडो-पैसिफिक में चीन को चुनौती: दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए फोर्ड क्लास एक बड़ा हथियार है. यह ताइवान की सुरक्षा और मुक्त व्यापार मार्ग सुनिश्चित करने का प्रमुख जरिया है. • शक्ति का संतुलन: एक फोर्ड क्लास कैरियर के साथ पूरा ‘कैरियर स्ट्राइक ग्रुप’ चलता है जिसमें विध्वंसक, पनडुब्बियां और क्रूजर शामिल होते हैं. यह किसी छोटे देश की पूरी वायुसेना को अकेले तबाह करने की क्षमता रखता है. क्या यह भविष्य के युद्धों के लिए तैयार है? विशेषज्ञों के बीच एक बहस यह भी है कि क्या ‘हाइपरसोनिक मिसाइलों’ के दौर में इतने महंगे जहाज सुरक्षित हैं? चीन और रूस जैसे देश अब कैरियर किलर मिसाइलें विकसित कर रहे हैं. हालांकि, फोर्ड क्लास के पास उन्नत मिसाइल डिफेंस सिस्टम और लेजर हथियारों की क्षमता है जो इसे सुरक्षा कवच प्रदान करती है. फोर्ड क्लास केवल एक जहाज नहीं बल्कि अमेरिकी तकनीकी श्रेष्ठता का प्रतीक है. उच्च लागत के बावजूद यह अमेरिका को वैश्विक शक्ति संतुलन में वह बढ़त देता है जिसे तोड़ पाना फिलहाल किसी भी देश के लिए नामुमकिन है. यह 2026 और उसके बाद के दशकों में अमेरिकी नौसेना की रीढ़ बना रहेगा.

मंगलवार को गोरखपुर महोत्सव के समापन समारोह में शामिल होंगे मुख्यमंत्री

सीएम योगी के मार्गदर्शन में और मजबूत होगा विरासत व विकास का भरोसा मंगलवार को गोरखपुर महोत्सव के समापन समारोह में शामिल होंगे मुख्यमंत्री अलग-अलग क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए छह लोगों को देंगे गोरखपुर रत्न सम्मान गोरखपुर कला, संस्कृति, मेधा और रोजगार के मंच गोरखपुर महोत्सव के समापन समारोह में मंगलवार (13 जनवरी) को शामिल होकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विरासत व विकास के भरोसे को और मजबूत करेंगे। समापन समारोह में अलग-अलग क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए मुख्यमंत्री छह लोगों को गोरखपुर रत्न से सम्मानित भी करेंगे।  वर्ष 2017 से गोरखपुर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रगति की नई उड़ान भरी है। कभी पिछड़ेपन का दंश झेलने वाले इस जिले ने हर क्षेत्र में विकास के नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। बहुमुखी विकास के साथ यहां की कला, संस्कृति भी लगातार संरक्षित और समृद्ध हुई है। इन सबको समेटते हुए गोरखपुर महोत्सव कला, संस्कृति, पर्यटन व रोजगार का सशक्त मंच बना है।  इस बार गोरखपुर महोत्सव का शुभारंभ रविवार (11 जनवरी) को प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने किया। रामगढ़ताल के सामने चंपा देवी पार्क में चल रहे महोत्सव के औपचारिक समापन समारोह को मंगलवार अपराह्न मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सान्निध्य प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री इस समारोह में छह विशिष्ट लोगों को गोरखपुर रत्न सम्मान प्रदान करेंगे। यह सम्मान खेल, विज्ञान, सामाजिक कार्य उद्योग व कृषि के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को मिलेगा।  सीएम योगी के हाथों इन्हें मिलेगा गोरखपुर रत्न सम्मान 1. शिवम यादव (खेल) : पैरा बैडमिंटन के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी। थाइलैंड में आयोजित पैरा बैडमिंटन इंटरनेशनल 2025 में पदक विजेता। 2. अनन्या यादव (खेल) : अंतरराष्ट्रीय हैंडबाल खिलाड़ी। थाइलैंड में नवंबर 2025 में आयोजित आईएचएफ ट्रॉफी में रजत पदक। 3. नीतिश सिंह (खेल) :  अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही। अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी किलिमंजारो, यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस, टर्की की सबसे ऊंची चोटी अरारत को फतह करने वाले। 2023 में विवेकानंद यूथ अवार्ड से सम्मानित। 4. प्रो. शरद मिश्रा (विज्ञान) : दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग में प्रोफेसर। 25 वर्षों का शोध अनुभव। गोरखपुर क्षेत्र में भूजल में उपस्थित आर्सेनिक प्रदूषण पर गहन शोध और बचाव का फार्मूलेशन। गाल ब्लैडर कैंसर पर भी सराहनीय शोध।  5. अविनाश कुमार मौर्य (कृषि) : प्रगतिशील कृषक। औद्यानिक फसलों विशेषकर टमाटर की खेती कर एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में 10 लाख रुपये से अधिक का लाभ अर्जित किए। 6. आशीष श्रीवास्तव (सामाजिक कार्य) : सक्रिय समाजसेवी।

आर अश्विन का खुलासा: विराट कोहली के एटीट्यूड को लेकर क्यों कही ये चौंकाने वाली बात

नई दिल्ली दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली पिछले कुछ समय से गजब की फॉर्म में हैं। 37 वर्षीय क्रिकेटर ने अपने वनडे भविष्य को लेकर चल रही बहस को लगभग खत्म कर दिया है। वह पिछले साल अक्टूबर में वापसी के बाद से भारतीय टीम के लिए लगातार पांच 50 प्लस स्कोर बना चुके हैं। उन्होंने हाल ही में वडोदरा में भारत बनाम न्यूडीलैंड पहले वनडे में 93 रनों की पारी शानदार पारी खेली। भारत को इस मैच में चार विकेट से रोमांचक जीत मिली थी। भारत के पूर्व स्पिनर अश्विन ने कोहली की शान में कसीदा पढ़ा है। उन्होंने कोहली के माइंडसेट को लेकर कहा कि वह अपने पुराने दिनों की तरह खेल का मजा ले रहे हैं। अश्विन को लगता है कि कोहली का फिलहाल बैटिंग के मामले में बचपन जैसा एटीट्यूड नजर आ रहा।   'कोहली के दिमाग में कुछ नहीं चल रहा' अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, "ऐसा लगता है कि उनके दिमाग में कुछ नहीं चल रहा है। आपने मुझसे पूछा कि उन्होंने क्या बदलाव किया है? उन्होंने कुछ नहीं बदला है। वह किसी चीज के बारे में नहीं सोच रहे हैं। उन्होंने फैसला किया है कि वह बस अपने क्रिकेट का मजा लेना चाहते हैं। ऐसा लगता है कि वह बचपन में बैटिंग करने के एटीट्यूड की तरह खेल रहे हैं और साथ ही इतने साल का अनुभव भी है।" कोहली वडोदरा में इंटरनेशनल क्रिकेट में दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले क्रिकेटर बने। उन्होंने श्रीलंका के कुमार संगकारा (28016) को पछाड़ा। कोहली से आगे सचिन तेंदुलकर (34357) हैं। 'भारत के लिए मिस्टर कंसिस्टेंट रहे हैं' पूर्व स्पिनर ने कोहली के अलावा उपकप्तान श्रेयस अय्यर की तारीफ की, जिन्होंने पहले वनडे में कमबैक करते हुए 47 गेंदों में 49 रन बनाए। उन्होंने चार चौके और एक छक्का लगाया। मध्य क्रम के बल्लेबाज अय्यर स्प्लीन इंजरी के कारण अक्टूबर से इंटरनेशनल क्रिकेट से दूर थे। अश्विन ने कहा, “हम जानते हैं कि श्रेयस वनडे क्रिकेट में भारत के लिए मिस्टर कंसिस्टेंट रहे हैं। उनका आउट होना श्रेयस जैसा बिल्कुल नहीं था। वह कभी भी इस तरह से गेम नहीं छोड़ते। वह आमतौर पर मैच फिनिश करके लौटते हैं। हालांकि, यह बात समझ में आती है कि वह वापसी कर रहे हैं और काइल जैमीसन ने एक अच्छी बॉल डाली थी।”  

मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना से सरकारी दफ्तरों में करें इंटर्नशिप

पटना. बिहार के युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने और उन्हें व्यावहारिक कार्य अनुभव उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा इंटर्नशिप योजना का प्रभावी संचालन किया जा रहा है। युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग के अंतर्गत कार्यरत बिहार कौशल विकास मिशन (बीएसडीएम) के माध्यम से लागू यह योजना युवाओं के लिए सरकारी संस्थानों में काम सीखने का एक सशक्त मंच बनकर उभरी है। इस योजना की खास बात यह है कि इसमें केवल सरकारी विभाग ही नहीं, बल्कि देश की कई प्रतिष्ठित निजी कंपनियां और औद्योगिक घराने भी भागीदार के रूप में जुड़े हैं। कुछ निजी संस्थानों द्वारा इंटर्न्स को स्टाइपेंड के अलावा भोजन, आवासन और आवागमन जैसी अतिरिक्त सुविधाएं भी दी जा रही हैं। इससे बिहार के युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर कार्य अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है, जो उनके करियर निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा इंटर्नशिप योजना के तहत पात्र अभ्यर्थियों को विभिन्न सरकारी विभागों, राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों, राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों, निगमों और अन्य सरकारी संस्थाओं में इंटर्नशिप का अवसर दिया जा रहा है। इन संस्थानों में युवाओं को प्रयोगशाला सहायक, पुस्तकालय सहायक, डाटा एंट्री ऑपरेटर, सोशल मीडिया प्रबंधन, वित्त, मानव संसाधन, हिंदी टाइपिंग सहित अन्य प्रशासनिक और तकनीकी क्षेत्रों में काम करने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होता है। अनुभवी अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ काम कर युवाओं को वास्तविक कार्य वातावरण को समझने का मौका मिलता है। इंटर्नशिप के साथ स्टाइपेंड की सुविधा इस योजना के अंतर्गत 18 से 28 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को तीन माह से लेकर एक वर्ष तक की अवधि के लिए इंटर्नशिप का अवसर दिया जाता है। 12वीं से स्नातकोत्तर स्तर तक के अभ्यर्थियों को उनकी शैक्षणिक योग्यता के अनुसार 4,000 से 6,000 रुपये प्रतिमाह तक स्टाइपेंड प्रदान किया जा रहा है। इसके अलावा, जो युवा अपने गृह जिले के अलावा किसी अन्य जिले में इंटर्नशिप करते हैं, उन्हें प्रारंभिक तीन माह तक 2,000 रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त सहायता और 5,000 रुपये की एकमुश्त राशि दी जाती है। यदि कोई अभ्यर्थी बिहार के बाहर अन्य राज्यों में इंटर्नशिप करता है, तो उसे पूरी इंटर्नशिप अवधि के दौरान यह सहायता राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से उसके बैंक खाते में प्रदान की जाती है। इंटर्नशिप की अवधि पूरी होने पर बिहार कौशल विकास मिशन और संबंधित विभाग द्वारा संयुक्त प्रमाण-पत्र भी दिया जाता है। राज्य सरकार ने आगामी पांच वर्षों में इस योजना के अंतर्गत कुल 1,05,000 युवाओं को इंटर्नशिप प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा इंटर्नशिप योजना बिहार के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है।

शिवहर से पूर्वी चंपारण व सीतामढ़ी को जोड़ने बागमती पर बनेगा नया रेल पुल

पटना. बिहार में बागमती नदी पर एक नया हाई-लेवल रेलवे पुल बनने जा रहा है, जो राज्य के पूर्वी चंपारण, शिवहर और सीतामढ़ी जिलों को मजबूत रेल नेटवर्क से जोड़ेगा। यह परियोजना एक बहुप्रतीक्षित रेलखण्ड का हिस्सा है, जिसका मकसद क्षेत्र की कनेक्टिविटी, आर्थिक गतिविधियों और आम जनता की सुविधा को और बेहतर बनाना है। रेलवे विभाग ने सीतामढ़ी-शिवहर-मोतिहारी रेलखंड के अंतर्गत शिवहर में बागमती नदी पर 61 मीटर लंबे और करीब 9 मीटर चौड़े हाई लेवल पुल का निर्माण करने का वर्क ऑर्डर जारी कर दिया है। यह पुल दो ट्रैक के लिए बनाया जाएगा और इसे इस रेलखंड का सबसे बड़ा पुल बताया गया है। परियोजना पर लगभग 70 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह नया रेलखंड सीतामढ़ी से शुरू होकर शिवहर तक और वहां से मोतिहारी तक विस्तृत होगा। इस रेल लाइन के बनने से यह क्षेत्र रेल नेटवर्क में पहले से कहीं अधिक मजबूती से जुड़ जाएगा और यात्रियों तथा माल ढुलाई के रास्ते सुगम होंगे। परियोजना के पहले चरण में सीतामढ़ी से शिवहर तक लगभग 28 किलोमीटर और उसके बाद शिवहर से मोतिहारी तक करीब 51 किलोमीटर रेल लाइन बिछाई जाएगी। स्थानीय लोगों को सीधा फायदा शिवहर स्टेशन से मीनापुर प्रखंड सहित आसपास के कई पंचायतों, जैसे सिवाईपट्टी, तुर्की, बेलहिया लच्छी, चतुरसी और बनघारा, की करीब पांच लाख से अधिक आबादी को इस रेल नेटवर्क से सीधा लाभ मिलेगा। ये लोग अब रेल मार्ग से आसानी से यात्रा कर सकेंगे और उनके लिए बड़े शहरों तक पहुंचना भी सरल होगा। वर्तमान में इन इलाकों से मुख्य रेल स्टेशनों की दूरी लगभग 10–12 किलोमीटर अधिक है, जो इस पुल से काफी कम हो जाएगी। रेल पुल के निर्माण से न सिर्फ यात्री सुविधा में सुधार होगा बल्कि स्थानीय बाजारों, कृषि उत्पादकों और व्यापार में भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। रेल सुविधा के विस्तार से यह क्षेत्र आर्थिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है। विदित हो कि यह परियोजना अब तक की अनुमानित लागत 926 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है, जिसमें भूमि अधिग्रहण और सर्वे काम में काफी प्रगति हो चुकी है। रेल परियोजनाओं का विस्तार बिहार में व्यापक विकास की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। इससे न केवल ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि इन क्षेत्रों में निवेश, रोजगार और आधारभूत ढांचे के विकास को भी बल मिलेगा। रेल नेटवर्क विस्तार से यात्रियों को तेज, सुरक्षित और सस्ती यात्रा के अवसर मिलेंगे, जिससे क्षेत्र की समग्र प्रगति को बल मिलेगा। यह पुल निर्माण के साथ-साथ पूरे सीतामढ़ी–शिवहर–मोतिहारी रेलखंड का विस्तार बिहार के रोड और रेल कनेक्टिविटी मानचित्र में एक नया अध्याय जोड़ने वाला है। इसके पूरा होने के बाद यहां के युवाओं, व्यवसायियों और यात्रियों को बेहतर अवसरों के साथ-साथ जवाबदेह और सुरक्षित रेल सेवा का लाभ मिलेगा।

ईडी ने सौम्या चौरसिया की 2.66 करोड़ की संपत्ति को किया जब्त, कोयला घोटाले में बड़ी कार्रवाई

रायपुर  कोयला लेवी घोटाले केस में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भूखंडों और आवासीय फ्लैट सहित सौम्या चौरसिया और निखिल चंद्राकर की 2.66 करोड़ रुपये की आठ अचल संपत्तियों को जब्त किया है। ईडी के रायपुर के क्षेत्रीय कार्यालय ने बताया कि ये संपत्तियां कोयला उगाही की अवैध वसूली और अन्य जबरन वसूली जैसे अपराधों के जरिये हासिल धनराशि से खरीदी गयी थीं। ईडी ने बेंगलुरु पुलिस और भ्रष्टाचार-विरोधी ब्यूरो रायपुर द्वारा दर्ज प्राथमिकी तथा छत्तीसगढ़ में कोयला उगाही की अवैध वसूली के संबंध में आयकर विभाग द्वारा दायर चार्जशीट के आधार पर अपनी जांच शुरू की। जांच में पता चला कि कुछ लोगों के एक समूह ने राज्य के वरिष्ठ राजनेताओं और नौकरशाहों की मिलीभगत से कोयले पर 25 रुपये प्रति टन की दर से कोयले की ढुलाई करने वालों से पैसे वसूलने के लिए एक रैकेट बनाया था। इस दौरान इन अपराधियों ने अवैध रूप से लगभग 540 करोड़ रुपये इकट्ठा किए। ये वसूली जुलाई 2020 और जून 2022 के बीच हुई थी। जबरन वसूली की गयी नकदी का इस्तेमाल सरकारी अधिकारियों और राजनेताओं को रिश्वत देने, चुनाव से संबंधित खर्चे उठाने और चल एवं अचल संपत्तियों को खरीदने के लिए किया गया था। अब तक आरोपियों की 273 करोड़ रुपये की संपत्ति की पहचान करके जब्त कर ली गयी है। ईडी ने जांच के दौरान 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। अब तक 35 आरोपियों के खिलाफ पांच शिकायतें माननीय विशेष न्यायालय के समक्ष दायर की गई हैं। आगे की जांच जारी है।  

बिहार कैबिनेट से वकीलों को तोहफा और कई विभागों में होंगी भर्तियां

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित संपन्न हो गई। नए साल 2026 में यह नीतीश सरकार की पहली कैबिनेट बैठक हुई। सीएम नीतीश कुमार मुख्य सचिवालय के मंत्रिमंडल कक्ष में अपने मंत्रियों के साथ बैठक की। इसमें 41 प्रस्ताव पर सीएम नीतीश ने स्वीकृति दी। सीएम नीतीश कुमार नए साल पर जनता को बड़ा तोहफा दिया है। उन्होंने कृषि जल संसाधन विभाग, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग, शिक्षा विभाग, विधि विभाग समेत कई विभाग में नए पदों के सृजन के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। बैठक में गया में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (आईएमसी) परियोजना को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति के लिए 220 केवी डीसी ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इस योजना पर करीब 33.29 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं, दरभंगा एयरपोर्ट के पास लॉजिस्टिक पार्क और कार्गो हब के निर्माण के लिए चिन्हित 50.0004 एकड़ भूमि के अधिग्रहण को भी प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इसके लिए 138.82 करोड़ रुपये की राशि तय की गई है। इसके अलावा, माननीय उच्च न्यायालय, पटना के लिए कोर्ट मैनेजर के पदों की स्वीकृति सहित कई अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी मिली है। अधिवक्ताओं से लेकर जेल सुरक्षा तक के फैसले कैबिनेट की बैठक में बिहार के विकास और प्रशासनिक सुधार से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए बिहार राज्य आकस्मिकता निधि से 30 करोड़ रुपये का अग्रिम देने को मंजूरी दी गई है। वहीं, पटना उच्च न्यायालय में चार विधि सहायकों के नए पद सृजित करने और 45 विधि लिपिकों का पदनाम बदलकर विधि सहायक करने का निर्णय लिया गया। तकनीकी शिक्षा को मजबूती देते हुए बगहा स्थित नए राजकीय पॉलिटेक्निक के लिए 106 पदों के सृजन को हरी झंडी दी गई। जेलों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए राज्य की 53 काराओं में 9,073 नए सीसीटीवी कैमरे लगाने और 8 काराओं में पुराने सिस्टम के एकीकरण को मंजूरी दी गई, जिस पर करीब 155 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा, सात निश्चय-3 कार्यक्रमों की निगरानी का दायित्व बिहार विकास मिशन को सौंपा गया है। राजवंशीनगर और शास्त्रीनगर के पुनर्विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार करने हेतु परामर्शी शुल्क को भी स्वीकृति दी गई। 16 जनवरी से सीएम निकलेंगे समृद्धि यात्रा पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 16 जनवरी से ‘समृद्धि यात्रा’ पर निकलने वाले हैं। यह यात्रा चार चरणों में संपन्न होगी। पहले चरण में मुख्यमंत्री 16 जनवरी को पश्चिमी चंपारण से दौरे की शुरुआत करेंगे। इसके बाद 17 जनवरी को पूर्वी चंपारण, 19 जनवरी को सीतामढ़ी और शिवहर, 20 जनवरी को गोपालगंज, 21 जनवरी को सिवान, 22 जनवरी को सारण, 23 जनवरी को मुजफ्फरपुर और 24 जनवरी को वैशाली जिले का दौरा करेंगे। इन फैसलों पर भी मुहर लगाई झारखंड के साथ सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर एमओयू के लिए कैबिनेट में स्वीकृति मिली. 7.75 मिलियन एकड़ फीट जल में से 5. 75 मिलियन एकड़ फीट बिहार को और 2 मिलियन एकड़ फीट झारखंड को पानी मिलेगा. दरभंगा हवाई अड्डा के पास लॉजिस्टिक पार्क एवं कार्गो हब निर्माण के लिए 50 एकड़ भूमि अधिग्रहणकिए जाने के लिए 138 करोड़ 82 लाख 88 हजार रुपए की स्वीकृति. बिहार अधिवक्ता कल्याण न्यास समिति को सहायता हेतु एक मोस्ट 30 करोड रुपए राशि दिए जाने की स्वीकृति. राज्य के 13 काराओं में नए सिरे से 9073 सीसीटीवी कैमरा लगाए जाने की स्वीकृति दी गई. इसमें 155 करोड़ 38 लाख 36 हजार 153 रुपए की राशि खर्च होगी. रोहतास में लगेगी सीमेंट फैक्ट्री बिहार कैबिनेट बैठक में रोहतास वालों के लिए खुशखबरी है. रोहतास में सीमेंट फैक्ट्री लगेगी. इसके लिए 107 करोड़ 32 लाख रुपए की स्वीकृति दी गई. डालमिया सीमेंट लिमिटेड बंजारी रोहतास का विस्तार होगा. 594 कुशल एवं और कुशल कामगारों का नियोजन होगा. राजवंशी नगर और शास्त्री नगर पटना में आवासीय एवं गैर आवासीय रूप में पुनर्विकास हेतु मास्टर प्लान निर्माण के लिए परामर्शी को एक करोड़ 59 लाख ₹30000 भुगतान की स्वीकृति.                          जानिए, नई सरकार में क्या-क्या हुआ? पहली कैबिनेट बैठक- 25 नवंबर 2025 नई सरकार की पहली कैबिनेट बैठक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में बुलाई गई थी। नौकरी-रोजगार पर फोकस। बंद पड़ी सरकारी चीनी मिलों को फिर से चालू करने की मंजूरी। दूसरी कैबिनेट बैठक- 9 दिसंबर 2025 एक करोड़ नौकरी/रोजगार का लक्ष्य पूरा करने के लिए तीन नए विभागों का गठन को मंजूरी दी गई। सरकार ने कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए उनके महंगाई भत्ते में सीधे 5% की वृद्धि को मंजूरी दी। रोजगार, औद्योगिक विकास और आधारभूत संरचना एजेंडों पर प्रस्तावों पर मुहर लगाई। तीसरी कैबिनेट बैठक- 15 दिसंबर 2025 सीएम नीतीश कुमार ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट सात निश्चय योजना 3.0 को मंजूरी दी। सात निश्चय-3 का पहला निश्चय ‘दोगुना रोजगार- दोगुनी आय’ रखा गया। इसके अलावा उद्योग, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी फोकर रखा गया