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Vivoo स्मार्ट टॉयलेट का नया फीचर: अब हर फ्लश के बाद मिलेगा हेल्थ चेकअप रिपोर्ट

नई दिल्ली अब तक आपने स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड को अपनी सेहत पर नजर रखते देखा था. लेकिन टेक्नोलॉजी अब एक कदम और आगे बढ़ चुकी है. अब आपका टॉयलेट भी आपकी हेल्थ मॉनिटर कर सकता है. CES 2026 में पेश हुई नई स्मार्ट टॉयलेट टेक्नोलॉजी ने दिखा दिया है कि आने वाले समय में बाथरूम सिर्फ साफ होने की जगह नहीं, बल्कि डेली हेल्थ चेक-अप पॉइंट बन सकता है. इस पूरे ट्रेंड में सबसे ज्यादा चर्चा में रही अमेरिकी हेल्थ-टेक कंपनी Vivoo. आप इसे स्मार्टफोन मेकर Vivo ना समझें, क्योंकि Vivoo एक अलग अमेरिकी कंपनी है. बहरहाल, कंपनी यानी Vivoo ने CES में Vivoo Smart Toilet Sensor पेश किया है. यह कोई पूरा नया टॉयलेट नहीं, बल्कि एक छोटा डिवाइस है जिसे किसी भी सामान्य टॉयलेट के रिम पर क्लिप किया जा सकता है. हर बार जब यूज़र टॉयलेट इस्तेमाल करता है, यह सेंसर पेशाब के सैंपल को ऑटोमैटिकली स्कैन करता है. इसके अंदर लगे ऑप्टिकल सेंसर यूरिन की डेंसिटी और कलर को पढ़ते हैं और इससे पता चलता है कि शरीर में पानी की मात्रा सही है या नहीं. यह सेंसर ब्लूटूथ से मोबाइल ऐप से जुड़ता है. हर फ्लश के बाद ऐप पर हाईड्रेशन रिपोर्ट आ जाती है. दिन, हफ्ते और महीने का ट्रेंड भी दिखता है कि कब शरीर में पानी की कमी हुई और कब हाईड्रेशन सही रहा. कंपनी के मुताबिक यह डिवाइस खासतौर पर फिटनेस फॉलो करने वाले लोगों, बुजुर्गों और उन यूज़र्स के लिए बनाया गया है जिन्हें किडनी या यूरिन से जुड़ी हेल्थ पर लगातार नजर रखनी होती है. कीमत करीब 100 अमेरिकी डॉलर के आसपास रखी गई है, यानी भारतीय बाजार के हिसाब से 8-9 हजार रुपये.  बेसिक ऐप फ्री है, जबकि एडवांस्ड ट्रेंड एनालिसिस के लिए बाद में सब्सक्रिप्शन मॉडल भी रखा गया है. CES में कुछ दूसरी कंपनियों ने इससे भी आगे की टेक्नोलॉजी दिखाई. ऐसे फुल स्मार्ट टॉयलेट सिस्टम, जो सिर्फ हाईड्रेशन ही नहीं बल्कि यूरीन और स्टूल से हेल्थ पैटर्न भी पहचान सकते हैं. इससे शुरुआती स्तर पर किडनी प्रॉब्लम, इंफेक्शन या डाइजेशन से जुड़ी गड़बड़ी के संकेत मिल सकते हैं. आसान भाषा में कहें तो बाथरूम से निकलने वाला डेटा अब शरीर के अंदर की कहानी बता सकता है. अब एक नया सवाल भी उठ रहा है. जब स्मार्टवॉच, स्मार्ट स्पीकर और हेल्थ ऐप पहले ही हमारा पर्सनल डेटा इकट्ठा कर रहे हैं, तो स्मार्ट टॉयलेट से निकलने वाला हेल्थ डेटा भी प्राइवेसी का मुद्दा बनेगा. कंपनियां दावा कर रही हैं कि डेटा एन्क्रिप्टेड रहेगा और यूज़र की अनुमति के बिना शेयर नहीं होगा. लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि हेल्थ डेटा सबसे संवेदनशील जानकारी में से एक है, इसलिए इस पर भरोसा और नियम दोनों जरूरी होंगे. फिलहाल इतना तय है कि टेक्नोलॉजी अब शरीर के सबसे निजी हिस्सों तक पहुंच चुकी है. आने वाले समय में डॉक्टर के पास जाने से पहले पहला हेल्थ चेक-अप शायद आपके अपने बाथरूम में ही हो जाएगा. और यह बदलाव हेल्थकेयर की दुनिया में उतना ही बड़ा हो सकता है, जितना कभी स्मार्टवॉच का आना था ये देखना दिलचस्प होगा.   

Pongal Date Confusion: 13 या 14 जनवरी, जानें सही तारीख एक क्लिक में

दक्षिण भारत का सबसे बड़ा और उत्साहपूर्ण त्योहार पोंगल दस्तक देने वाला है. सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व मुख्य रूप से प्रकृति और किसानों को समर्पित है. अक्सर लोगों के मन में तारीख को लेकर उलझन रहती है कि पोंगल 13 जनवरी को है या 14 जनवरी को.आइए, जानते हैं पोंगल की सही तिथि और उसके चार दिनों के महत्व के बारे में. कब मनाया जाएगा पोंगल? पंचांग के अनुसार, साल 2026 में पोंगल पर्व 14 जनवरी से 17 जनवरी 2026 तक मनाया जाएगा. इस दौरान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का क्षण यानी संक्रांति शाम 5 बजकर 43 मिनट पर रहेगा, जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है. आमतौर पर उत्तर भारत में जब मकर संक्रांति मनाई जाती है, उसी समय दक्षिण भारत में पोंगल की धूम रहती है. पोंगल का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पोंगल शब्द का अर्थ होता है उबालना या लहराना. पारंपरिक रूप से, नए कटे हुए चावलों को दूध में उबालकर भगवान सूर्य को अर्पित किया जाता है. कृतज्ञता का पर्व: यह त्योहार प्रकृति, सूर्य देव और मवेशियों (गाय-बैल) के प्रति आभार व्यक्त करने का जरिया है, क्योंकि इनकी मदद से ही किसानों को अच्छी फसल प्राप्त होती है. समृद्धि का प्रतीक: माना जाता है कि पोंगल के दिन घर में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है. यह तमिल कैलेंडर के थाई महीने की शुरुआत भी है, जिसके बारे में कहावत है, थाई पिरंधाल वज़ी पिरक्कुम यानी थाई महीने की शुरुआत के साथ ही नए रास्ते खुलेंगे. 4 दिन तक चलने वाला उत्सव: क्या-क्या होता है? पोंगल का त्योहार चार दिनों तक चलता है, और हर दिन की अपनी एक विशेष कहानी और परंपरा है. पहला दिन: भोगी पोंगल (14 जनवरी) यह दिन देवराज इंद्र को समर्पित है. इस दिन लोग अपने घरों की सफाई करते हैं और पुराने, बेकार सामान को घर से बाहर निकाल कर जला देते हैं. यह बुराई के अंत और नई शुरुआत का प्रतीक है. दूसरा दिन: सूर्य पोंगल (15 जनवरी) यह पोंगल का सबसे मुख्य दिन है. इस दिन आंगन में नए मिट्टी के बर्तन में नए चावल, दूध और गुड़ डालकर पोंगल बनाया जाता है. जब बर्तन से उबलकर चावल बाहर गिरने लगता है, तो लोग खुशी से पोंगल-ओ-पोंगल का उद्घोष करते हैं. यह भोग सूर्य देव को लगाया जाता है. तीसरा दिन: मट्टू पोंगल (16 जनवरी) यह दिन खेती में काम आने वाले मवेशियों, खासकर बैलों और गायों के लिए होता है. उन्हें नहलाया जाता है, उनके सींगों को रंगा जाता है और उन्हें माला पहनाकर उनकी पूजा की जाती है. तमिलनाडु का प्रसिद्ध खेल जल्लीकट्टू भी इसी दिन आयोजित होता है. चौथा दिन: कानून पोंगल (17 जनवरी) उत्सव के आखिरी दिन परिवार के सभी लोग एक साथ मिलते हैं. महिलाएं अपने भाइयों और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए पूजा करती हैं. लोग एक-दूसरे के घर जाकर मिठाइयां बांटते हैं और खुशियां मनाते हैं.

खंडवा: इल्लियों से भरे खाने पर विरोध, वार्डन ने दी धमकी- प्राइवेट बातें सार्वजनिक कर दूंगी

खंडवा खंडवा के सीनियर कॉलेज जनजातीय कन्या छात्रावास की 20-25 छात्राओं ने साहस की एक नई मिसाल पेश की. हॉस्टल के नरकीय हालातों और वार्डन की तानाशाही से तंग आकर ये आदिवासी छात्राएं 8 किलोमीटर पैदल चलकर कलक्ट्रेट पहुंचीं और धरने पर बैठ गईं. दरअसल, कलेक्टर कार्यालय के बाहर बीते दिन 15 से 18 वर्ष की 20-25 आदिवासी छात्राएं यहां धरने पर बैठ गईं और नारेबाजी करने लगीं. वे अपने हॉस्टल की वार्डन की गंभीर शिकायतें लेकर आई थीं, जो वे कलेक्टर को बताना चाहती थीं. उनकी मुख्य शिकायत भोजन को लेकर थी, जिसमें आए दिन इल्लियां निकलती रहती हैं. शिकायत करने पर वार्डन रेखा प्रजापति उन्हें एडजस्ट करने की ही सलाह देती हैं. छात्राओं के सब्र का बांध तब टूट गया, जब 5 छात्राओं की थालियों में 3 इंच लंबी इल्लियां समेत कीड़े निकलने लगे. इसके बाद कई छात्राओं को उल्टी होने लगी, कुछ की तबीयत इतनी बिगड़ी कि उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा, लेकिन वहां भी इलाज से पहले पुलिस को सूचना देने की ताकीद की गई. गहरी हताशा में ये सभी छात्राएं हॉस्टल से पैदल ही 8 किलोमीटर दूर कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं ताकि अपनी व्यथा बता सकें. वार्डन ने उन्हें रोकने का भरसक प्रयास किया, धमकाया भी, लेकिन वे इतने गुस्से में थीं कि कहीं नहीं रुकीं. कलेक्टर कार्यालय के बाहर लड़कियों ने मीडिया को अपनी समस्या बताई, हालांकि उनके चेहरों पर वार्डन की धमकी का खौफ नजर आ रहा था. एक घंटे तक प्रदर्शन और नारेबाजी के बावजूद जब कलेक्टर नहीं आए, तो छात्राएं उठीं और सभागार की तरफ दौड़ लगाई. हंगामा देखकर अपर कलेक्टर सृष्टि देशमुख मौके पर पहुंचीं और छात्राओं की समस्या सुनी. एक पीड़ित छात्रा मनीषा रंगीले ने बताया, ''हम सीनियर महाविद्यालय जनजातीय कन्या छात्रावास से आए हैं. यह अनुसूचित जाति का छात्रावास है. हमारी वार्डन रेखा प्रजापति मैम हैं. कुछ दिनों से लगातार भोजन में इल्लियां निकल रही हैं. आज तो हद हो गई, जब इतनी बड़ी इल्ली निकली वो गोंच वाली. हम मैम के पास लेकर गए तो वे बोलीं, 'बेटा, आज एडजस्ट कर लो, फिर देखेंगे. बहुत सारी लड़कियां उल्टी करने लगीं, उन्हें अस्पताल में एडमिट करना पड़ा. अस्पताल में इलाज करने से मना कर दिया, बोले पुलिस को इन्फॉर्म करो. हम कहां जाते सर? उल्टी कर-कर के… हमने बहुत बार मैम से कहा कि कुछ एक्शन लो, लेकिन वे बहाना बनाकर टाल देती हैं.'' थप्पड़, धमकी और ब्लैकमेलिंग का आरोप छात्रा ने बताया, ''आज 5 बच्चे बीमार थे- रक्षा, खुशबू, भारती, मनू, साक्षी और सलोनी दीदी. मैं खुद खाना खाया तो उल्टी हो गई, लेकिन कॉलेज चली गई. शिकायत करने पर वार्डन मैम डांटती हैं, उल्टा लड़कियों को धमकाती हैं- ''मैं तुम्हारे घर पर तुम्हारी प्राइवेट बातें बता दूंगी.'' यही नहीं, छात्राओं का आरोप है कि खाना बच जाता है तो भी नहीं देते. तीन रोटी मिलेंगी तो तीन ही मिलेंगी. सब्जी बस इतनी कि थाली का पेंदा ढंक जाए. पेट भरकर खाना भी नहीं देते. आज किसी ने भी खाना नहीं खाया. आज आलू की सब्जी में इल्ली मिली थी. हॉस्टल में 100 छात्राएं हैं, लेकिन 60 के करीब ही रहती हैं. पीड़ित छात्राओं का आरोप है, ''आज भी हमें यहां आने से बहुत रोका. हम दो बजे से आने की कोशिश कर रहे थे. जहां भी शिकायत करें, उल्टा हमें ही समझाते हैं- ''बेटा, एडजस्ट कर लो.'' इन छात्राओं ने अपर कलेक्टर को बताया कि वे सभी शहर के लालचौकी स्थित सीनियर ट्राइबल गर्ल्स हॉस्टल की छात्राएं हैं. उन्हें जेल में कैदियों को परोसे जाने वाले भोजन से भी बदतर खाना दिया जाता है. पीने का पानी भी साफ नहीं आता. हॉस्टल की साफ-सफाई भी समय पर नहीं होती. छात्राओं ने कहा कि पहले भी कई बार जनजातीय कार्य विभाग के दफ्तर में शिकायत की, लेकिन कोई हल नहीं निकला. सहायक संचालक नीरज पाराशर निरीक्षण पर आते हैं और उल्टा एडजस्ट करने को कहकर चले जाते हैं. फिर वार्डन धमकाती हैं. घरवालों को फोन करके कहती हैं कि तुम्हारी लड़की स्कूल नहीं जाती, बाहर घूमती है. खराब खाने का विरोध करने पर थप्पड़ मारती हैं. कहती हैं- ''जहां जाना हो, चले जाओ. मेरी बहुत पहचान है, मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा.'' अपर कलेक्टर सृष्टि देशमुख ने आश्वासन दिया कि वे हॉस्टल का निरीक्षण करेंगी और सभी समस्याओं का जल्द समाधान कराएंगी. इसके बाद छात्राओं ने प्रदर्शन खत्म किया.

रायपुर: स्वामी विवेकानंद के विचारों से सशक्त भारत का निर्माण संभव: मंत्री राजवाड़े

रायपुर : स्वामी विवेकानंद के विचारों से ही होगा सशक्त भारत का निर्माण : मंत्री राजवाड़े 400 ‘नन्हें विवेकानंद’ बने आकर्षण, युवाओं से पंच परिवर्तन अपनाने का आह्वान रायपुर स्वामी विवेकानंद के विचारों को आत्मसात कर ही सशक्त, समरस और विकसित भारत का निर्माण संभव है यह बात महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर कही। उन्होंने युवाओं से सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आचरण और नागरिक कर्तव्यों के पालन जैसे पंच परिवर्तन को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने में युवाओं की भूमिका सबसे अहम है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार युवाओं को शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। शिक्षित, जागरूक और संस्कारवान युवा ही देश और प्रदेश का भविष्य तय करेंगे। राष्ट्रीय युवा दिवस (स्वामी विवेकानंद जयंती) के अवसर पर सूरजपुर जिला स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ऑडिटोरियम में आयोजित जिला स्तरीय समारोह में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी दृश्य देखने को मिला, जब जिले के 400 स्कूली विद्यार्थी स्वामी विवेकानंद की वेशभूषा में कार्यक्रम में शामिल हुए। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने इस दृश्य को अद्भुत बताते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो स्वामी विवेकानंद की ऊर्जा स्वयं युवाओं के माध्यम से मंच पर साकार हो उठी हो। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने युवाओं से नशे से दूर रहने, राष्ट्र सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान से जुड़ने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान आत्मनिर्भर भारत और नशामुक्त भारत की शपथ भी दिलाई गई। समारोह में भाषण, काव्यपाठ, रंगोली एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें 400 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर प्रेमनगर विधायक श्री भूलन सिंह मरावी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती चंद्रमणि पैकरा, पूर्व विधायक श्रीमती रजनी रविशंकर त्रिपाठी सहित जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने स्वामी विवेकानंद के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। कार्यक्रम के अंत में मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने स्वामी विवेकानंद के मंत्र “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत” का स्मरण कराते हुए कहा कि यह संदेश आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र निर्माण और मानव कल्याण के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा।  

एआई टेक्नालॉजी के उपयोग से कम एफर्ट में होगा ज्यादा काम : आयुक्त डॉ. रवि मित्तल

मीडिया के सभी माध्यमों का प्रयोग कर जनसंपर्क अधिकारी अपने कार्य को बना सकते हैं प्रभावशाली: आयुक्त डॉ. रवि मित्तल एआई टेक्नालॉजी के उपयोग से कम एफर्ट में होगा ज्यादा काम : आयुक्त डॉ. रवि मित्तल जनसम्पर्क की नई चुनौतियाँ: जनसंपर्क अधिकारियों की दो दिवसीय राज्य स्तरीय कौशल संवर्धन कार्यशाला का शुभारंभ रायपुर मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव एवं जनसंपर्क विभाग के आयुक्त डॉ. रवि मित्तल ने कहा कि जनसंपर्क अधिकारी एक्सक्लूजिव स्टोरी तैयार करें और इसके व्यापक प्रचार के लिए मीडिया के सभी माध्यमों का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों की स्टोरी नेशनल और स्टेट लेवल पर प्रकाशित होगी, उन्हें प्रोत्साहन स्वरूप सम्मानित किया जाएगा। आयुक्त डॉ. मित्तल नवा रायपुर स्थित संवाद के ऑडिटोरियम में जनसम्पर्क की नई चुनौतियां विषय पर जनसम्पर्क अधिकारियों की व्यावसायिक दक्षताओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कौशल संवर्धन कार्यशाला में उक्त बाते कहीं।  आयुक्त डॉ. मित्तल ने कहा कि वर्तमान दौरे में जनसंपर्क में सूचना एवं जनसंपर्क का माध्यम बदल रहे हैं। नए-नए तकनीक आ रहे हैं, जनसंपर्क अधिकारियों को भी उन तकनीकों का उपयोग कर अपने कार्य को प्रमाणिक, बेहतर और समय सीमा में पूरा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें सिर्फ प्रिंट मीडिया के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और सोशल मीडिया का बखूबी उपयोग करना है, ताकि शासन की फैसलों को जनता तक पहुंचाया जा सके। इसके लिए अधिकारियों को नए टेक्नोलॉजी से अपडेट रहना होगा। उन्होंने इस मौके पर पत्रकारिता स्कूल-कॉलेजों के बच्चों को भी जनसंपर्क विभाग में इंटरशीप का अवसर देने पर बल दिया।    उद्घाटन सत्र में वरिष्ठ अधिकारियों में अपर संचालक जवाहरलाल दरियो, संजीव तिवारी, उमेश मिश्रा, आलोक देव ने जनसेवा में स्पष्ट, सरल और समयबद्ध संवाद की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जनसंपर्क के लिए प्रभावी संवाद सबसे बड़ी आवश्यकता है। प्रतिभागियों को दो दिनों तक चलने वाले सत्रों की रूपरेखा और अपेक्षाओं से अवगत कराया गया। अधिकारियों ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य समाचार लेखन, टेलीविजन सहभागिता और सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग के माध्यम से जनसंपर्क को अधिक सशक्त, आधुनिक, संवेदनशील और उन्मुखी बनाना है। कार्यशाला के प्रथम दिवस की शुरुआत पाठक-अनुकूल लेखन सरकारी समाचार को आकर्षक बनाना विषयक सत्र से हुई, जिसमें दैनिक भास्कर के संपादक शिव दुबे ने मार्गदर्शन दिया। उन्होंने सरकारी आदेशों और सूचनाओं से जनता से जुड़ी मुख्य बात को पहचानने, सरल और सुबोध भाषा के प्रयोग, प्रभावी हेडलाइन एवं लीड पैराग्राफ लिखने की जानकारी दी। साथ ही, प्रेस विज्ञप्ति की संरचना, उपयुक्त उद्धरणों के प्रयोग तथा संकट के समय मीडिया से संतुलित और समयबद्ध संवाद की आवश्यकता पर भी विस्तार से चर्चा की। द्वितीय सत्र में आकाशवाणी के समाचार संपादक विकल्प शुक्ला ने टेलीविजन मीडिया की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला। उन्होंने शासकीय योजनाओं और कार्यक्रमों को विजुअल स्टोरी के रूप में प्रस्तुत करने, टीवी कवरेज के लिए आवश्यक तत्वों, कैमरे पर संक्षिप्त बाइट लेने और फैक्ट शीट के महत्व की जानकारी दी। तीसरे सत्र में सोशल मीडिया और एआई टूल्स के उपयोग पर चर्चा हुई। सोशल मीडिया, डिजिटल मार्केटिंग और एआई विशेषज्ञ राकेश साहू ने  एआई डिजिटल टूल्स का उपयुक्त उपयोग कर फोटो, वीडियो एडिटिंग के बारे में  मार्गदर्शन दिया।  आज के अंतिम सत्र में जनसंपर्क संचालनालय, भोपाल के सेवानिवृत्त संचालक लाजपत आहूजा ने पीआर टूल बॉक्स, स्टेकहोल्डर प्रबंधन तथा आपातकालीन संचार (क्राइसिस कम्युनिकेशन) से जुड़े तुरंत उपयोग योग्य उपकरणों की जानकारी दी। कार्यशाला में राज्यभर से आए जनसंपर्क अधिकारियों ने हिस्सा लिया। 

बार-बार पेशाब की समस्या पुरुषों के लिए खतरे की घंटी, जानलेवा रोग का हो सकता है शुरुआती लक्षण

नई दिल्ली अगर किसी पुरुष को बार-बार पेशाब आने की समस्या हो रही है और वह इसे बढ़ती उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर रहा है, तो यह लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, खासतौर पर 50 साल से अधिक उम्र के पुरुषों में यह प्रोस्टेट कैंसर का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इलाज जटिल हो सकता है। शुरुआती दौर में नहीं दिखते साफ लक्षण प्रोस्टेट कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर साफ नजर नहीं आते। कई मामलों में बीमारी बिना किसी खास परेशानी के धीरे-धीरे बढ़ती रहती है। यही कारण है कि थोड़ी-सी भी शंका होने पर जांच कराना जरूरी माना जाता है। इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज बार-बार पेशाब आना, पेशाब की धार कमजोर होना, पेशाब शुरू या बंद करने में दिक्कत और यह महसूस होना कि मूत्राशय पूरी तरह खाली नहीं हुआ—इन संकेतों को अक्सर लोग सामान्य बुढ़ापे से जोड़ देते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि ये प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआती चेतावनी भी हो सकते हैं। खून आना हो सकता है गंभीर संकेत पेशाब या वीर्य (स्पर्म) में खून आना एक गंभीर लक्षण है, जिसे किसी भी हालत में हल्के में नहीं लेना चाहिए। कई पुरुष इसे अस्थायी समस्या मानकर टाल देते हैं, जबकि यह कैंसर की ओर इशारा कर सकता है।   मिलते-जुलते लक्षण, लेकिन फर्क समझना जरूरी प्रोस्टेट बढ़ने (BPH), यूरिन इंफेक्शन और प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण काफी हद तक एक जैसे हो सकते हैं। फर्क यह है कि इंफेक्शन में जलन, बुखार या पेशाब में बदबू हो सकती है। BPH में आमतौर पर खून नहीं आता, जबकि कैंसर में समय के साथ लक्षण लगातार गंभीर होते जाते हैं। देर से दिखने वाले संकेत कुछ लक्षण ऐसे भी होते हैं जो अक्सर नजर से छूट जाते हैं, जैसे कूल्हे या कमर में लगातार दर्द, बिना वजह वजन कम होना और हमेशा थकान महसूस होना। ये संकेत आमतौर पर तब सामने आते हैं, जब बीमारी आगे बढ़ चुकी होती है। किन लोगों में ज्यादा खतरा प्रोस्टेट कैंसर के सटीक कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन उम्र, जेनेटिक कारण और हार्मोनल बदलाव इसकी अहम वजह माने जाते हैं। इसके अलावा मोटापा, धूम्रपान, शराब और खराब जीवनशैली भी जोखिम बढ़ा सकती है। जांच ही है सबसे बड़ा बचाव विशेषज्ञों की सलाह है कि 50 साल की उम्र के बाद पुरुषों को नियमित जांच जरूर करानी चाहिए, चाहे कोई लक्षण हों या नहीं। अगर परिवार में कैंसर का इतिहास रहा है, तो जांच और भी पहले शुरू करनी चाहिए। समय पर जांच और सतर्कता से इस गंभीर बीमारी से बचाव संभव है।  

डॉ. यादव का नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट नागपुर दौरा, अस्पताल की सेवाओं को सराहा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट नागपुर का किया दौरा अस्पताल की व्यवस्थाओं को सराहा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नागपुर स्थित नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान के विभिन्न क्लिनिकल विभागों में जाकर डॉक्टरों और स्टाफ से संवाद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चिकित्सकों की सेवाभावना और स्टाफ द्वारा मरीजों की देखभाल के प्रति समर्पण भावना की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश से आए उन मरीजों से भी मुलाकात की जो एनसीआई में उपचाररत हैं। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने मरीजों और उनके परिजन से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार की ओर से उपचार करवा रहे नागरिकों को हर संभव सहयोग दिया जाएगा। इंस्टिट्यूट के जनरल सेक्रेटरी और सीईओ शैलेश जोगलेकर तथा मेडिकल डायरेक्टर डॉ. आनंद पाठक ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को संस्थान के विकास और मरीजों को उपलब्ध करवाई जा रही समग्र कैंसर उपचार सेवाओं की जानकारी दी।  

ट्रंप के ऐलान के बाद शेयर बाजार में तूफानी उतार-चढ़ाव, तेजी के बाद आई गिरावट

मुंबई  शेयर बाजार (Stock Market) ने सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को तूफानी तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत की थी, लेकिन अचानक ये तेजी बड़ी गिरावट में तब्दील हो गई. ट्रंप की नई टैरिफ धमकी का सीधा असर भारतीय बाजार (Trump Tariff Warning Impact) पर देखने को मिला है. दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर 25% Tariff लगाने का ऐलान किया है और ये धमकी तमाम देशों की टेंशन बढ़ाने वाली है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स (Sensex) खुलने के बाद करीब 300 अंक अछला था, फिर झटके में 250 अंक से ज्यादा टूट गया. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी (Nifty) का भी ऐसा ही हाल नजर आया.  अचानक सेंसेक्स-निफ्टी की बदली चाल शेयर मार्केट में कारोबार के शुरुआत की बात करें, तो बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 83,878.17 की तुलना में तेजी लेकर 84,000 के स्तर के पार ओपन हुआ था और फिर 84,258 तक उछला था. फिर अचानक ही इसकी तेज रफ्तार पर ब्रेक लग गया और BSE Sensex 250 अंक से ज्यादा टूटकर 83,616 के लेवल पर आ गया.  बात एनएसई के निफ्टी इंडेक्स की करें, तो इसकी भी चाल सेंसेक्स के जैसी ही नजर आई. 50 शेयरों वाला ये इंडेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 25,790 की तुलना में उछलकर 25,897 पर खुला और फिर फिसलकर 25,709 तक आ गया.  ट्रंप की ऐलान से भारत को क्या डर?  बता दें कि Donald Trump ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए ऐलान किया कि अमेरिका, ईरान के साथ कारोबार करने वाले किसी भी देश पर 25 फीसदी टैरिफ लगाएगा, जिससे ईरान और उसके कारोबारी साझेदारों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा. ट्रंप ने साफ किया कि जो भी देश इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ व्यापार कर रहा है, उसे अमेरिका के साथ सभी व्यापार पर तत्काल प्रभाव से 25 फीसदी टैरिफ देना होगा और ये आदेश फाइनल है. भारत के लिहाज से देखें, तो अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने ईरानी तेल का आयात 2019 से ही बंद कर रखा है, लेकिन इसके बावजूद कई अन्य चीजों का आयात-निर्यात (India Export-Import With Iran) किया जाता है. ईरान में जहां भारत से चावल, चाय, चीनी, दवाइयां, कृत्रिम फाइबर, इलेक्ट्रिक मशीनरी और आर्टिफिशियल ज्वेलरी पहुंचती है, तो वहीं जबकि ईरान से भारत में सूखे मेवे, अकार्बनिक/कार्बनिक रसायन के साथ ही कांच के बर्तन आते हैं. अब ऐसे में अगर सभी कारोबार करने वाले देशों पर Trump 25% Tariff लगाते हैं, तो फिर भारत पर पहले से लागू 50% टैरिफ के बढ़कर 75% होने की संभावना बनती है. यही डर शेयर बाजार पर देखने को मिला है.  ये 10 बड़े शेयर बिखरे शेयर बाजार में तूफानी तेजी के बाद अचानक आई गिरावट के चलते जिन शेयरों में सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है. उनमें लार्जकैप कैटेगरी में शामिल LT Share (2.30%), HCL Tech Share (2.10%), Bharti Airtel Share (1.50%) फिसलकर कारोबार कर रहे थे. इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में शामिल  Glenmark Share (3.10%), Dixon Tech Share (2.20%), Godrej Properties Share (2.05%) और AU Bank Share (2%) फिसलकर कारोबार कर रहे थे. स्मॉलकैप कैटेगरी में Lotus Chocolate Share (8%), Jubilant Agri Share (5.50%) और NEC Life Share (5%) गिरकर ट्रेड कर रहे थे. 

WPL 2026: आरसीबी ने यूपी को 9 विकेट से हराया, ग्रेस हैरिस की 85 रन की तूफानी पारी, मंधाना ने 47 रन बनाए

 नई दिल्ली विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) का 5वां मैच सोमवार को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और यूपी वॉरियर्स के बीच खेला गया. इस मैच में आरसीबी ने 9 विकेट से जीत हासिल की. आरसीबी की टीम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का चुनाव किया था. यूपी की टीम ने आरसीबी के सामने 144 रनों का लक्ष्य रखा था. जिसके जवाब में उतरी आरसीबी ने13वें ओवर में ही ये मुकाबला जीत लिया. ये आरसीबी की लगातार दूसरी जीत है. वहीं यूपी को लगातार दूसरे मैच में हार का सामना करना पड़ा है. ऐसी रही आरसीबी की बैटिंग 144 रनों के जवाब में उतरी आरसीबी की शुरुआत बेहद आक्रामक रही. स्मृति मंधाना और ग्रेस हैरिस ने पारी का आगाज किया. दोनों ने तेजी से रन बनाए. 12वें ओवर में आरसीबी को पहला झटका लगा 137 के स्कोर पर जब हैरिस 85 रन बनाकर आउट हुईं. लेकिन अगले ही ओवर में मंधाना ने टीम को जीत दिला दी. मंधाना ने 32 गेंद में नाबाद 47 रन बनाए. अपनी पारी में मंधाना ने 9 चौके लगाए. वहीं, हैरिस ने 10 चौके और 5 छक्के जड़े. ऐसे रही यूपी की बल्लेबाजी पहले बल्लेबाजी करने उतरी यूपी वॉरियर्स की शुरुआत तो संभली रही. लेकिन 5वें ओवर में उसे पहला झटका लगा जब हरलीन देओल अपना विकेट गंवा बैठीं. हरलीन के बल्ले से 11 रन आए. लेकिन इसके बाद कोई बल्लेबाज ज्यादा देर तक विकेट पर नहीं टिका. 8वें ओवर में यूपी को बैक-टू-बैक दो झटके लगे. इसके बाद 9वें ओवर में भी यूपी को दो झटके लगे. हालांकि, इसके बाद स्टार ऑसराउंडर दीप्ति शर्मा ने पारी को संभालने की कोशिश की और उन्होंने डींड्रा डॉटिन के साथ अर्धशतकीय साझेदारी की. दीप्ति ने 35 गेंद में नाबाद 45 रनों की पारी खेली. इसमें 5 चौके और एक छक्का शामिल था. वहीं, डॉटिन ने 37 गेंद में नाबाद 40 रन बनाए. दोनों के बीच 70 गेंद में 93 रनों की साझेदारी हुई. इसके दम पर यूपी ने आरसीबी के सामने 144 रनों का लक्ष्य रखा. यूपी वारियर्स महिला (प्लेइंग इलेवन): किरण नवगिरे, मेग लैनिंग, फोएबे लिचफील्ड, हरलीन देओल, दीप्ति शर्मा, श्वेता सहरावत, डींड्रा डॉटिन, सोफी एक्लेस्टोन, आशा शोभना, शिखा पांडे, क्रांति गौड़. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु महिला (प्लेइंग इलेवन): ग्रेस हैरिस, स्मृति मंधाना, दयालन हेमलता, गौतमी नाइक, ऋचा घोष, राधा यादव, नादीन डी क्लर्क, अरुंधति रेड्डी, श्रेयंका पाटिल, लिन्से स्मिथ, लॉरेन बेल.

रायपुर: मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी में बाल विवाह रोकने की शपथ दिलाई

रायपुर : मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी में बाल विवाह रोकथाम की दिलाई शपथ 20 हजार लोगों ने एक साथ शपथ लेकर बनाया विश्व रिकॉर्ड रायपुर जिला मुख्यालय बालोद के समीप ग्राम दुधली में आयोजित देश की प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति की रोकथाम के लिए जनभागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उपस्थित रोवर-रेंजरों, स्काउट-गाइड एवं जनसमुदाय को शपथ दिलाई। इस अवसर पर एक साथ 20 हजार से अधिक लोगों द्वारा बाल विवाह रोकथाम की शपथ लेकर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में बालोद जिले का नाम दर्ज कराया गया, जो बालोद जिले के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बाल विवाह, समाज के लिए एक गंभीर चुनौती है। इसे रोकने के लिए केवल शासन ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भूमिका आवश्यक है। उन्होंने आह्वान किया कि सभी लोग अपने घर, परिवार, रिश्तेदारों एवं आसपास के लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें और इसे जड़ से समाप्त करने में सहभागी बनें। शपथ के दौरान उपस्थितजनों ने संकल्प लिया कि वे बाल विवाह नहीं होने देंगे, इसकी सूचना प्रशासन को देंगे तथा समाज में जागरूकता फैलाएंगे। मुख्यमंत्री ने बाल विवाह मुक्त अभियान में उल्लेखनीय प्रयासों के लिए जिला प्रशासन की सराहना की तथा एक साथ 20 हजार लोगों के शपथ लेने पर कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स का प्रमाण पत्र प्रदान किया और उन्हें मेडल पहनाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर स्कूली शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, सांसद भोजराज नाग, भारत स्काउट गाईड के मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त के.के. खण्डेलवाल, महासचिव पी.जी.आर सिंधिया सहित अन्य जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी, देशभर से आए रोवर-रेंजर तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।