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प्रभारी मंत्री बिश्नोई ने जनसंवाद में सुनी ग्रामीणों की परिवेदनाएं

जयपुर. प्रभारी मंत्री के.के. विश्नोई की अध्यक्षता में सिरोही जिले के पालडी एम. में रात्रि चौपाल एवं जनसंवाद कार्यक्रम का आयोजन हुआ। उन्होंने रात्रि चौपाल में आमजन की परिवेदनाओं को सुना और संबंधित को निस्तारण के लिए निर्देशित किया। प्रभारी मंत्री ने कहा कि आमजन के समस्याओं का समयबद्ध एवं गुणवत्ता पूर्ण निस्तारण राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वीबीजीरामजी गांवों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने का एक सशक्त माध्यम है इससे गांवों में प्रगति का पथ अग्रसर होगा। वीबीजीरामजी से भारत के विकसित भारत में बदलने की संकल्पना सत्य सिद्ध होगी। गांव मजबूत होंगे तभी देश मजबूत होगा। किसान एवं श्रमिकों के समृद्ध होने से भारत विकसित होगा। यह योजना सिर्फ रोजगार की योजना न हो के गांवों को सशक्त करने का माध्यम है। प्रभारी मंत्री ने इस दौरान ग्रामीणों की परिवेदनाओं को सुनते हुए उन्हें शीघ्र राहत प्रदान करने के लिए अधिकारियों को मौके पर ही निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि जनप्रतिनिधि एवं प्रशासन दोनो ही सामुहिक रूप से क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है और आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए सतत प्रयास किए जा रहे है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा नियमित रूप से क्षेत्र के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की बात कही एवं बताया कि भारत अब विश्व में अपनी विशेष पहचान कायम करते हुए निरन्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर हो रहा है। रात्रि चौपाल में विभिन्न योजनाओं के तहत लाभार्थियों को संबंधित दस्तावेज एवं लाभ प्रदान किया गया। रात्रि चौपाल में राजस्व विभाग द्वारा 3 सम्मानजनक नाम दर्ज किए गए। जिसमें बजट घोषणा क्रियान्विति के तहत राजकीय कृषि महाविद्यालय सिरोही उच्च शिक्षा विभाग राजस्थान को 30 हेक्टेयर भूमि यानि 185 बीघा भूमि आवंटन के भू अभिलेख उपलब्ध कराए व भूमि का कब्जा सुपुर्द दस्तावेज राजकीय महाविद्यालय के सहायक आचार्य को सौपा गया। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग द्वारा 4 स्वामित्व कार्ड, 2 जन्म प्रमाण पत्र व 1 विवाह प्रमाण पत्र संबंधित को सौपा गया। महिला अधिकारिता विभाग तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा लाडो योजना के लाभार्थियों का स्वागत एवं अभिनन्दन किया गया। वही आयुष्मान कार्ड के लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड वितरित किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा लाभार्थियों की गोद भराई की गई। पशुपालन विभाग द्वारा मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना की पॉलिसी का वितरण किया गया। उद्यानिकी विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं में अनुदान की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति के दस्तावेज प्रदान किए गए। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत 31 हजार का चैक पंकुदेवी भगाराम मेघवाल को व मुद्रा ऋण योजना के तहत अनाराम हिरागर को 50 हजार रूपये अनुदान का चैक प्रदान किया गया। सांसद लुंबाराम चौधरी ने रात्रि चौपाल में विभिन्न विभागों से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने इस दौरान पशुपालकों, किसानों सहित विभिन्न वर्ग की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए प्रत्येक पात्र को लाभान्वित होने की बात कही। जिला प्रमुख अर्जुनराम पुरोहित ने रात्रि चौपाल में प्रभारी मंत्री बिश्नोई का स्वागत करते हुए कहा कि रात्रि चौपालों के माध्यम से जनता की समस्याओं का निस्तारण करना एक अनुपम पहल है उन्होंने इस दौरान उपस्थित सभी पात्र को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी प्रेरित किया।

आखिरी 60 दिन में न करें ये गलतियां, पैरेंट्स भी रहें सतर्क

बोर्ड एग्जाम नजदीक आ रहे हैं। लगभग हर बोर्ड से जुड़े एग्जाम फरवरी महीने में शुरू हो जाएंगे। ऐसे में स्टूडेंट्स और पेरेंट्स दोनों को ही एक अलग तरह का प्रेशर महसूस होने लगा है। समय कम है और सिलेबस इतना ज्यादा, ऐसे में घबराहट की वजह से कई स्टूडेंट्स कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो उनकी तैयारी को नुकसान पहुंचाती हैं। एक्सपर्ट मेघना मिश्रा का कहना है कि बोर्ड एग्जाम में बैठने वाले स्टूडेंट्स के लिए आखिरी के लगभग तीन महीने बहुत कीमती होते हैं। अगर इस समय सही दिशा में मेहनत की जाए, तो अच्छे नंबर लाना पूरी तरह संभव है। वहीं इस दौरान की गई कुछ गलतियां काफी भारी भी साबित हो सकती हैं। एक्सपर्ट ने ऐसी ही गलतियां बताई हैं, जो आपको हर हाल में अवॉइड करनी चाहिए। नई किताबें शुरू करने की गलती कई छात्र परीक्षा के नजदीक आते ही नई-नई किताबें खरीद लेते हैं। उन्हें लगता है कि जितनी ज्यादा किताबें पढ़ेंगे, उतना ज्यादा सीखेंगे। लेकिन मेघना के मुताबिक आपकी यह सोच गलत है। ज्यादा किताबें पढ़ने से अक्सर कन्फ्यूजन बढ़ती है। बेहतर यही है कि छात्र NCERT की किताबों पर पूरा ध्यान दें और साथ में सिर्फ एक अच्छी प्रैक्टिस बुक रखें। जो किताबें आपके पास पहले से हैं, उन्हीं को अच्छे से समझें और बार-बार रिवाइज करें। गहराई से पढ़ाई करना, ऊपर-ऊपर सब कुछ देखने से कहीं बेहतर होता है। पूरी रात जागकर पढ़ने से बचें कुछ बच्चे एग्जाम आते ही पूरी-पूरी रात जागकर पढ़ाई करने लगते हैं, उन्हें लगता है रात भर जागकर पढ़ने से ज्यादा सिलेबस पूरा हो जाएगा। लेकिन स्टूडेंट्स की ये आदत सही नहीं है। उनका कहना है कि नींद की कमी याददाश्त को कमजोर कर देती है। नींद दिमाग को मजबूत बनाती है और पढ़ी हुई चीजों को याद रखने में मदद करती है। दिमाग को एक्टिव रखने के लिए कम से कम सात घंटे की नींद बहुत जरूरी है। इसे किसी भी हालत में नजरअंदाज ना करें। जब आप पूरी नींद लेते हैं, तो पढ़ाई में मन भी लगता है और समझ भी बेहतर होती है। सोशल मीडिया से दूरी बनाएं एक्सपर्ट का कहना है कि आज के समय में सोशल मीडिया पढ़ाई का सबसे बड़ा दुश्मन बन चुका है। स्टूडेंट्स सिर्फ पंद्रह मिनट के लिए फोन उठाते हैं, वही कब दो घंटे बर्बाद कर देते हैं, उन्हें पता भी नहीं चलता। अगर सच में पढ़ाई पर ध्यान देना है, तो सोशल मीडिया एप्स को कुछ समय के लिए हटा देना ही बेहतर है। वेबसाइट ब्लॉकर का इस्तेमाल करें और खुद पर कंट्रोल रखें। याद रखें, यह समय दोबारा नहीं आएगा। टॉपर्स से तुलना करना छोड़ें अक्सर छात्र खुद की तुलना टॉपर्स से करने लगते हैं। इससे सिर्फ तनाव और डर बढ़ता है। मेघना मिश्रा के मुताबिक हर छात्र की क्षमता अलग होती है। किसी और की तैयारी देखकर खुद को कम आंकना सही नहीं है। आपको सिर्फ अपनी तैयारी पर ध्यान देना चाहिए। जो आप कर सकते हैं, वही आपके लिए सबसे जरूरी है। तुलना से दूर रहकर शांत मन से पढ़ाई करना ही सफलता पाने का सही रास्ता है। कमजोर विषयों से भागने की आदत कई स्टूडेंट्स कमजोर विषयों को बाद के लिए छोड़ देते हैं, यह बहुत बड़ी गलती है। हर विषय को संतुलन के साथ पढ़ना जरूरी है। कमजोर विषयों पर थोड़ा-थोड़ा रोज ध्यान दें। 80-20 नियम को याद रखें और जहां कमी है, वहां अभ्यास बढ़ाएं। कमजोर विषय ही अक्सर अच्छे नंबरों का रास्ता बनते हैं। परफेक्ट समय का इंतजार ना करें कई स्टूडेंट्स सोचते हैं कि जब सब कुछ सही होगा, तभी पढ़ाई शुरू करेंगे। लेकिन सच ये है कि पढ़ाई के लिए कभी परफेक्ट हालात नहीं होते। आपको खुद की दिनचर्या बनानी होगी और उसी में पढ़ाई को जगह देनी होगी। शुरुआत करना सबसे जरूरी है, परफेक्ट होना नहीं। जैसे-जैसे आप आगे बढ़ेंगे, चीज़ें अपने आप बेहतर होती जाएंगी।  

राजस्थान के राज्यपाल बागडे से मिले मिजोरम के गवर्नर

जयपुर. राज्यपाल हरिभाऊ बागडे से बुधवार को मिजोरम के राज्यपाल विजय कुमार सिंह ने लोकभवन पहुंचकर मुलाकात की। इस दौरान दोनों ने विभिन्न विषयों पर चर्चा की। राज्यपाल से उनकी यह शिष्टाचार भेंट थी। भारतीय सशस्त्र सेना भूतपूर्व सैनिक दिवस मनाया श्रीगंगानगर. भारतीय सशस्त्र सेना भूतपूर्व सैनिक (वेटरन्स डे) दिवस 14 जनवरी 2026 को सैनिक विश्राम गृह श्रीगंगानगर में मनाया गया। इसमें मुख्य अतिथि वेटरन कर्नल श्री संदीप शर्मा, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी श्री आत्मेश बेनीवाल की अध्यक्षता में दो मिनट का मौन व कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सेना मेडल आॅ केप्टेन रामकिशन यादव, श्रीमती रतना कंवर वीरांगना शहीद सुगन सिंह, श्रीमती सरस्वती देवी माता शहीद काॅन्सटेबल सुभाष, वरिष्ठ पूर्व सैनिक सूबेदार मेजर किशनलाल लिम्बा को शाॅल प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिले के पूर्व सैनिक, वीरांगनाएं एवं उनके आश्रित भूतपूर्व सैनिक सहित अन्य मौजूद रहे। 

हरियाणा सरकार आपराधिक मामलों को जल्द निपटाने दलील व्यवस्था को करेगी प्रभावी

चंडीगढ़. आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे की दिशा में हरियाणा सरकार ने दलील (प्ली बार्गेनिंग) व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने का फैसला किया है। कानून के तहत आरोप तय होने की तारीख से 30 दिन के अंदर आरोपी प्ली बार्गेनिंग के लिए आवेदन कर सकता है। इससे वर्षों तक चलने वाले मुकदमों का समय रहते समाधान संभव हो सकेगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि प्ली बार्गेनिंग एक न्याय हितैषी कानूनी व्यवस्था है जिसका उद्देश्य ऐसे आपराधिक मामलों का जल्दी निपटारा करना है जिनमें अधिकतम सजा सात वर्ष या उससे कम है। इस प्रक्रिया में अदालत की निगरानी में अभियोजन पक्ष और आरोपी आपसी सहमति से समाधान पर पहुंचते हैं और इसके बाद अदालत कानून के अनुसार फैसला सुनाती है। डॉ. मिश्रा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अध्याय-23 में शामिल इन प्रावधानों को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए हरियाणा पुलिस और अभियोजन विभाग को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। वहीं गृह विभाग ने सभी जिलों में   जांच अधिकारियों, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और अभियोजन कर्मचारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण और क्षमता-विकास कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्ली बार्गेनिंग के कानूनी प्रावधानों, प्रक्रिया और नैतिक मानकों की जानकारी दी जाएगी, ताकि इसका सही, एकरूप और कानूनसम्मत उपयोग सुनिश्चित हो सके। डॉ. सुमिता मिश्रा ने पुलिस और अभियोजन एजेंसियों के बीच निरंतर समन्वय पर भी जोर दिया। इसके लिए समय-समय पर समीक्षा बैठकें की जाएंगी, ताकि प्रगति की निगरानी हो और सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान किया जा सके।

मकर संक्रांति: स्नान न करने पर मिलने वाले दंड क्या हैं?

मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में शुभ प्रवेश का प्रतीक है, जो उसकी उत्तर दिशा की यात्रा का संकेत देता है. हिंदू परंपरा में सूर्य की इस गति को बढ़ती रोशनी, गर्मी और नई ऊर्जा से जोड़ा जाता है इसलिए इस त्योहार को शारीरिक शुद्धि, मानसिक स्पष्टता और आध्यात्मिक उत्थान के लिए एक शक्तिशाली समय माना जाता है. मकर संक्रांति का त्योहार को लेकर इस बार कंफ्यूजन की स्थिति हुई. कई जगह आज मनाया जा रहा और कई जगह कल मनाया जाएगा. ऐसे में जानते हैं कि इस त्योहार पर स्नान न करने पर श्रद्धालु के जीवन में किस तरह का प्रभाव पड़ता है? सबसे पहले बात करते हैं कि मकर संक्रांति को लेकर कंफ्यूजन की स्थिति क्यों हुई? दरअसल, कई पंचांगों में कहा गया है कि ये त्योहार 14 जनवरी को ही मनाया जाएगा, लेकिन काशी के पंचांग में दावा किया गया है कि सूर्यदेव मकर राशि में 14 जनवरी रात 9 बजकर 19 मिनट पर प्रवेश करेंगे. यही कारण है कि अगले दिन उदया तिथि में त्योहार मनाया जाएगा. इसके अलावा एक तर्क ये भी दिया जा रहा था कि 14 जनवरी को षटतिला एकादशी है, जिसके चलते चालव या अन्न दान नहीं किया जा सकता है. इसे अगले दिन ही मनाना शुभ रहेगा. आखिरकार 15 जनवरी को त्योहार को मनाना शुभ माना गया है. मकर संक्रांति पर स्नान, ध्यान, दान का विशेष आध्यात्मिक महत्व है. इस दिन स्नान करने से पापों का नाश होता है. अगर कोई श्रद्धालु मकर संक्रांति पर स्नान नहीं करता है तो उसे सजा के तौर पर उसके जीवन में कई चीजें घटित हो सकती हैं. मान्यता है कि इस त्योहार पर पवित्र नदियों में ब्रह्म मुहूर्त में स्नान किया जाता है. खासकर गंगा में स्नान करने का अपना एक महत्व है. इससे पिछले पापों का विनाश होता है, जो भी व्यक्ति घर पर और पवित्र नदी में स्नान नहीं करता है वो विशेष पुण्य लाभ से वंचित रह सकता है. मकर संक्रांति पर स्नान न करने से मनुष्य बनता है दरिद्र? मान्यता ये भी है कि सूर्यदेव के उत्तरायण होने की वजह से प्रकृति में पॉजिटिव एनर्जी का प्रवाह बढ़ता है. कहा गया है कि स्नान न करने से शरीर में तामसिक ऊर्जा और आलस्य बना रहता है. इसकी वजह से सुबह का स्नान करने से शरीर शुद्ध होता है, जोकि नई ऊर्जा के संचार के लिए बहुत जरूरी होता है. कुछ पौराणिक कथाओं में जिक्र किया गया है कि जो व्यक्ति मकर संक्रांति जैसे पर्व पर स्नान और दान नहीं करता, वह अगले जन्म में दरिद्र या रोगों से ग्रसित हो सकता है. शनिदेव हो जाते हैं नाराज! मान्यता के मुताबिक, मकर संक्रांति पर स्नान और दान करने से सूर्य और शनि देव की कृपा बरसती है क्योंकि सूर्य देव के बेटे शनि अपने पिता का स्वागत इस दिन करते हैं. स्नान की अनदेखी करने से इन ग्रहों के शुभ प्रभाव में कमी आ सकती है. अगर कोई श्रद्धालु स्वास्थ्य कारणों या अन्य मजबूरी से नदी में पवित्र स्नान नहीं कर पार रहा है तो उसके लिए एक अलग तरह का विधान है. वह श्रद्धालु घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल डाले और काले तिल मिलाकर स्नान करे. इससे संक्रांति का पूरा पुण्य मिलेगा.

बिहार के 10 शहरों की हवा हुई सबसे जहरीली

पटना. बिहार के छोटे शहरों में हवा लगातार खराब रह रही है। राज्य के 10 शहरों की हवा में पीएम (पार्टिकुलेट मैटर) 2.5 की मात्रा बढ़ी रहती है। जिन छोटे शहरों की हवा ज्यादा जहरीली है, उनमें आरा, हाजीपुर, कटिहार, मोतिहारी, अररिया, बेगूसराय, बेतिया, बिहारशरीफ, मुजफ्फरपुर और बक्सर शामिल है। आरा और हाजीपुर का राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 से अधिक रहा। इस बीच पटना में हुए एक अध्ययन की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। खुले नाले से निकलने वाले अमोनिया गैस भी हवा में पीएम 2.5 बना रही है। इससे वायु प्रदूषण काफी बढ़ जाता है। छोटे शहरों में भी वायु प्रदूषण को बढ़ाने में खुले नालों की महत्वपूर्ण भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। आईआईटी बीएचयू के अध्ययन के अनुसार खुले नाले से अमोनिया गैस निकल रही है। यह वाहनों से निकलने वाले सल्फर डाईऑक्साइड(एसओ2) से मिलकर पीएम 2.5 बन रहा है। पीएम2.5 यानी महीन धूलकण। दोनों गैस के आपस में मिलने से महीन कण बन रहे हैं। इसके कारण पीएम2.5 की मात्रा लगातार बढ़ी हुई पायी जा रही है। पटना के वायु प्रदूषण में कमी जरूर आयी है, लेकिन पीएम2.5 अक्सर बढ़ा हुआ रहता है। ऐसी ही स्थिति सूबे के अन्य छोटे शहरों की भी है। खुले नालों को बंद करना होगा बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष डॉ. डीके शुक्ला ने बताया कि अध्ययन की प्रारंभिक रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है कि पटना के खुले नाले से निकल रही अमोनिया गैस से भी पीएम 2.5 बढ़ रहा है। अभी अंतिम रिपोर्ट आनी बाकी है। शहरों के खुले नालों को बंद करने से ही पीएम2.5 में कमी आएगी। हालांकि कई खुले नालों को बंद किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद इस संबंध में कार्ययोजना बनाकर सरकार को भेजा जाएगी। खुले नाले में आर्गेनिक मेटेरियल होते हैं। गंदगी और कचरा के कारण अमोनिया गैस निकलती है। शहर के वायु में पहले से ही वाहनों से निकलने वाले सल्फरडाई ऑक्साइड मौजूद रहता है। दोनों के मिलने से भी पीएम2.5 बन रहा है। धूप निकलने पर अमोनिया हवा में प्रवेश कर जाता है। अंतिम रिपोर्ट आने में अभी दो महीने और लगेंगे बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने आईआईटी बीएचयू को पटना में वायु प्रदूषण के कारणों का पता लगाने के लिए अध्ययन करने को लेकर समझौता किया था। अध्ययन के लिए एक साल का समय निर्धारित था, जो अब पूरा हो चुका है। हालांकि अंतिम रिपोर्ट आने में अभी दो महीने का समय और लगेगा। आईआईटी बीएचयू की टीम ने पटना के खुले नाले का सैंपल लेकर उसकी जांच की थी। अभी प्रारंभिक रिपोर्ट में यह साबित हो चुका है कि खुले नाले से निकलने वाली अमोनिया गैस के कारण भी वायु में पीएम2.5 की मात्रा बढ़ रही है।

पंजाब के नवाशंहर में जीरो डिग्री तक लुढ़का पारा

लुधियाना. पंजाब में लोहड़ी पर रिकार्ड ठंड पड़ी। नवांशहर राज्य में सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान शून्य डिग्री पहुंच गया, जोकि सामान्य से सात डिग्री कम रहा। मौसम विभाग ने बुधवार को भी अति शीतलहर का रेड अलर्ट जारी किया है। कई जिलों में न्यूनतम तापमान शून्य व एक डिग्री के आसपास पहुंच सकता है। अधिकतम तापमान सात से आठ डिग्री रहने का अनुमान है। 19 जनवरी तक राज्य में घनी धुंध पड़ने की संभावना है। शहर           न्यूनतम तापमान (°C)     अधिकतम तापमान (°C) नवांशहर               0.0                            11.4 बठिंडा                  1.6                            13.4 फरीदकोट               2.0                          13.0 गुरदासपुर               2.5                           13.0 होशियारपुर             2.6                           10.7 लुधियाना                 2.6                           13.4 रूपनगर                 2.4                           15.0 पटियाला                3.0                            13.6 अमृतसर               4.1                              8.1

पर्यावरण से कमाई तक: दिल्ली सरकार का नया कार्बन क्रेडिट प्लान, कैसे होगी बंपर आमदनी?

नई दिल्ली दिल्ली कैबिनेट ने मंगलवार को कार्बन क्रेडिट मोनेटाइजेशन फ्रेमवर्क को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से दिल्ली की हरित परियोजनाओं से होने वाली कार्बन उत्सर्जन में कमी को मापकर कार्बन क्रेडिट में बदला जाएगा और इन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचा जाएगा। इससे पर्यावरण संरक्षण के लिए बिना सरकारी खजाने पर कोई अतिरिक्त बोझ डाले नया राजस्व स्रोत बनेगा।   दिल्ली अब हरित प्रयासों से कमाएगी राजस्व मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, 'दिल्ली सरकार जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस फ्रेमवर्क से अतिरिक्त राजस्व मिलेगा, जिससे विकास कार्य तेज होंगे। यह पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगा और राजस्व को राज्य के कंसॉलिडेटेड फंड में जमा कर सार्वजनिक कल्याण योजनाओं में लगाया जाएगा। दिल्ली कार्बन बाजार में अग्रणी राज्य बनेगी।' पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि दिल्ली पहले से ही बड़े पैमाने पर हरित बदलाव ला रही है। इसमें इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार, इलेक्ट्रिक बसें, शहरी वानिकी, यमुना की सफाई, सोलर ऊर्जा का बढ़ता उपयोग, वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट और लैंडफिल से बायोगैस उत्पादन शामिल हैं। इन प्रयासों से होने वाली उत्सर्जन कटौती को वैज्ञानिक तरीके से मापा जाएगा। कैसे काम करेगा फ्रेमवर्क? एक मीट्रिक टन CO₂ (या समकक्ष ग्रीनहाउस गैस) कम होने पर एक कार्बन क्रेडिट मिलेगा। क्रेडिट को वीरा, गोल्ड सेटेंडर्ड या भारत के उभरते कार्बन मार्केट जैसे प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर किया जाएगा। इन्हें बेचकर मिलने वाली कमाई सीधे राज्य के फंड में जाएगी। ये पूरी प्रक्रिया राजस्व-साझेदारी मॉडल पर आधारित है। सरकार को कोई शुरुआती खर्च नहीं करना पड़ेगा। विशेष एजेंसियां सफलता के बाद ही फीस लेंगी। पर्यावरण विभाग तीन विशेषज्ञ एजेंसियों को पैनल में शामिल करेगा, जो प्रोजेक्ट की पहचान, दस्तावेजीकरण, सत्यापन, क्रेडिट जारी करना और ट्रेडिंग में मदद करेंगी। मॉनिटरिंग, रिपोर्टिंग और वेरिफिकेशन (MRV) सिस्टम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होगा। अन्य राज्यों से प्रेरणा दिल्ली ने सफल मॉडलों से सीख ली है। इंदौर ने कंपोस्टिंग और सोलर प्रोजेक्ट्स से 50 लाख रुपये कमाए। मेघालय में किसानों को प्रति टन 40 यूरो मिले, जबकि अरुणाचल प्रदेश के छोटे हाइड्रो प्रोजेक्ट से 16,000 से ज्यादा टन क्रेडिट बने। दिल्ली अब इनसे आगे बढ़कर शहरी स्तर पर मिसाल कायम करेगी। दिल्ली फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन बंद कैबिनेट ने दिल्ली फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन (DFC) को बंद करने का भी फैसला लिया। यह संस्था लगातार घाटे में चल रही थी। इसकी नेट वर्थ माइनस 15.45 करोड़ रुपये हो गई और बैड लोन 55.8% तक पहुंच गए। रिकवरी की कोई संभावना नहीं बची थी। अब इन संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा।  

पटना एम्स में बन रहा बिहार का पहला स्किन बैंक

पटना. अब जले हुए मरीजों को इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी. पटना एम्स में बनने जा रहा नया भवन बिहार में बर्न ट्रीटमेंट की तस्वीर बदलने वाला है. मार्च 2026 से एम्स पटना में अत्याधुनिक बर्न और प्लास्टिक सर्जरी विभाग का नया भवन पूरी तरह चालू हो जाएगा. नया भवन पूरी तरह आधुनिक तकनीक पर आधारित होगा. इसमें कुल 50 बेड की व्यवस्था की गई है, जिसमें 12 आईसीयू बेड शामिल होंगे. मरीजों के ऑपरेशन के लिए मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर बनाए गए हैं. इसके अलावा स्किन बैंक, डरमाटोम मशीन, हाइड्रोथेरेपी टब जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं भी होंगी, जो अब तक राज्य के किसी सरकारी अस्पताल में उपलब्ध नहीं थीं. बिना हाथ लगाए होगी जख्मों की सफाई इस केंद्र की सबसे खास बात हाइड्रोथेरेपी टब है, जिससे मरीजों के जख्मों की सफाई बिना हाथ लगाए की जा सकेगी. इससे संक्रमण का खतरा कम होगा और मरीज को कम दर्द का सामना करना पड़ेगा. माइक्रोस्कोप की मदद से सर्जरी की जाएगी, जिससे सटीक और सुरक्षित ऑपरेशन संभव होगा. कॉस्मेटिक सर्जरी की भी मिलेगी सुविधा यह केंद्र सिर्फ बर्न मरीजों तक सीमित नहीं रहेगा. यहां कॉस्मेटिक सर्जरी और अन्य तरह की प्लास्टिक सर्जरी की सुविधा भी मिलेगी. माइक्रोवस्कुलर सर्जरी, एंडोस्कोपिक सर्जरी और लेजर सेवाएं भी यहां उपलब्ध कराई जाएंगी. इससे बिहार के मरीजों को इलाज के लिए बाहर के बड़े शहरों में जाने की मजबूरी नहीं रहेगी. भवन में इलाज के साथ-साथ मरीजों की संपूर्ण देखभाल की भी व्यवस्था होगी. यहां नर्सिंग स्टाफ, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, तकनीशियन, फिजियोथेरेपिस्ट, साइकोलॉजिस्ट, सोशल वर्कर, हैंड थेरेपी विशेषज्ञ और डाइटिशियन की तैनाती की जाएगी. इसका उद्देश्य सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि मरीजों को शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ करना है. मार्च से शुरू होने की उम्मीद बर्न और प्लास्टिक सर्जरी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. वीणा सिंह के अनुसार भवन का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. जिन मशीनों का ऑर्डर दिया गया है, उनकी आपूर्ति जल्द हो जाएगी. उम्मीद है कि मार्च महीने से मरीजों को यहां आधुनिक और समर्पित इलाज की सुविधा मिलने लगेगी.

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नए अध्यक्ष के लिए उमेश और सिंहदेव के नाम की चर्चा

रायपुर. कांग्रेस आलाकमान छत्तीसगढ़ में जल्द ही नए अध्यक्ष नियुक्त करने जा रही है, नए अध्यक्ष के लिए दो नामों की चर्चा हो रही है, जिसमें उमेश पटेल और पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव का नाम है। कांग्रेस पार्टी के दिल्ली के अंदरूनी सूत्र ने पोस्ट में लिखा, कांग्रेस नेतृत्व कई राज्यों के अध्यक्ष बदलने की तैयारी में है। छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष दीपक बैज को भी बदला जाएगा। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खेमे से उम्मीदवार उमेश पटेल हैं तो वही दूसरे खेमें की तरफ़ से टीएस बाबा चाहते हैं कि उन्हें राज्य की कमान मिले।हाल ही में उमेश पटेल दिल्ली भी आए थे। मीडिया ने जब इन दोनों नेताओं से छग कांग्रेस में नए अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर सवाल किया तो दोनों नेताओं ने कहा, पार्टी जो जिम्मेदारी देगी निर्वाहन करने तैयार है। उमेश पटेल को लेकर क्या कहते है छग कांग्रेस के कार्यकर्ता छग कांग्रेस के कार्यकर्ता का कहना है कि अब पार्टी के सदस्यों को युवा नेता की जरूरत है, सभी चाहते है कि साफ़ छवि के नेता प्रदेश का नेतृत्व संभाले और पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी को ख़त्म कर विपक्षी पार्टी बीजेपी के खिलाफ तगड़ी रणनीति बनाए। ताकि पार्टी आने वाले विस चुनाव में जीत हासिल कर बिना विवाद-गुटबाजी के सरकार बनाए। टीएस बाबा पर क्या राय? टीएस बाबा के बयान से पार्टी में हमेशा खलबली मची रहती है, हालाँकि टीएस बाबा भी अपनी तगड़ी रणनीति को लेकर जाने जाते है, रमन की जब 15 साल तक सरकार थी तब टीएस बाबा सक्रिय रहे, रमन के कार्यकाल के दौरान टीएस बाबा और भूपेश की जोड़ी खूब जमती रही, लेकिन जब साल 2018 में कांग्रेस पार्टी ने सरक़ार बनाई तब से गुटबाजी शुरू हो गई, जो आज तक जारी है। मीडिया के सामने सिंहदेव ढ़ाई-ढ़ाई साल वाले कमेंटमेंट को बयां करते रहते है।