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झारखंड में 50 करोड़ की सरकारी जमीन पर गरजा बुलडोजर

धनबाद. धनबाद में सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले भू माफिया की हिम्मत इतनी बढ़ी हुई है कि दिन के उजाले में बिनोद बिहारी चौक पर सरकारी जमीन पर अवैध रूप से दस पक्की दुकानें खड़ी कर दीं। लगभग 50 करोड़ रुपए की इस सरकारी जमीन पर कब्जे का खेल पिछले एक महीने से चल रहा था। डीसी को सूचना मिलने पर धनबाद अंचल कार्यालय की टीम ने धनबाद थाने की टीम के साथ मिलकर सभी दस अवैध दुकानों को तोड़ दिया। डीसी आदित्य रंजन के निर्देश पर एवं एसडीओ लोकेश बारंगे के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन ने अभियान चलाकर आठ लेन रोड के बिनोद बिहारी महतो चौक को अतिक्रमण से मुक्त कराया। इस दौरान कार्यपालक दंडाधिकारी नारायण राम तथा धनबाद सीओ रामप्रवेश कुमार ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके बनाई गई दुकानें, अस्थाई निर्माण तथा पक्के निर्माण को हटाकर सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया। जिला प्रशासन के इस अभियान से आसपास अतिक्रमण करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है। विरोध करने पहुंची महिला को हिरासत में लिया: जिस समय दुकानों को तोड़ा जा रहा था, उसी समय एक महिला वहां पहुंचकर हंगामा करने लगी। महिला ने इसे अपनी जमीन बताकर हंगामा करना शुरू कर दिया। मौके पर मौजूद महिला पुलिस की टीम ने उसे हिरासत में लेकर धनबाद थाने के हवाले कर दिया। देर शाम उसे थाने से छोड़ा गया। जिला प्रशासन को सूचना मिली है कि किसी ने इस जमीन को बेचा भी है। इसकी जांच होने के बाद ही पूरा मामले सामने आएगा। सरकारी जमीन पर अवैध रूप से लिया बिजली कनेक्शन : अभियान के दौरान यह भी उजागर हुआ कि सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा करने वालों ने बिजली कनेक्शन भी ले रखा था। इसकी भी जांच की जाएगी। मौके से करीब 50 बोरी सीमेंट, स्टोन चिप्स सहित कुछ अन्य निर्माण सामग्री भी जप्त की गई है। डीसी ने सभी सीओ को अपने-अपने अंचल में ऐसा अभियान चलाकर सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने का निर्देश दिया है। विशेषकर अंचल के प्रमुख स्थान तथा उन स्थानों पर, जिसके कारण हमेशा ट्रैफिक जाम होता है। ट्राफिक जाम के कारण अक्सर स्कूली वाहन, एम्बुलेंस सहित जिले की बड़ी आबादी प्रभावित होती है। इस मामले की जानकारी देते हुए धनबाद के कलेक्टर आदित्य रंजन ने बताया कि बिनोद बिहारी चौक के समीप सरकारी जमीन पर कब्जे करने की शिकायत जिला प्रशासन को मिली थी। कई बार लोगों को उस सरकारी जमीन को खाली कर देने की सूचना भी दी गई थी। नोटिस के बाद भी किसी अवैध कब्जाधारी ने अतिक्रमण नहीं हटाया। जिसके बाद आज यह कार्रवाई की गई।

दुर्ग में तांत्रिक ने युवती का अपहरण कर रेप करने वाला आरोपी गिरफ्तार

दुर्ग. जिले में युवती से रेप करने वाला तांत्रिक 2 महीने बाद पकड़ाया है। आरोपी हेमंत अग्रवाल (41) खुद को तांत्रिक बताकर परिवार के संपर्क में आया था। उसने समस्याएं दूर करने का दावा किया और युवती को अपने प्रभाव में ले लिया। शादी का झूठा भरोसा देकर वह युवती को पत्नी की तरह साथ रखने लगा और उससे रेप करता था। मामला जामुल थाना क्षेत्र का है। 19 नवंबर 2025 को आरोपी दिनदहाड़े युवती को घर से उठाकर ले गया था। 21 नवंबर को पुलिस ने दोनों को बरामद किया, लेकिन आरोपी थाने से फरार हो गया था। 13 जनवरी 2026 को आरोपी बलौदाबाजार जिले के बारनवापारा में दूसरे बैगा-तांत्रिक से मिलने पहुंचा पुलिस के जाल में फंस गया। पूरे मामले की जड़ भी तंत्र-मंत्र ही है। पीड़िता के अनुसार आरोपी खुद को तांत्रिक बताकर परिवार के संपर्क में आया था। उसने समस्याएं दूर करने का दावा किया और धीरे-धीरे युवती को अपने प्रभाव में ले लिया। शादी का झूठा भरोसा देकर वह युवती को पत्नी की तरह साथ रखने लगा और उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। आरोपी ने युवती के अश्लील वीडियो बनाए और उन्हें वायरल करने की धमकी देकर लंबे समय तक शोषण किया। उसने आर्य समाज में युवती की मर्जी के बिना जबरन शादी करवाई। इस दौरान युवती दो-तीन बार गर्भवती हुई, लेकिन आरोपी ने दबाव डालकर जबरन गर्भपात कराया। 19 नवंबर 2025 को आरोपी दिनदहाड़े युवती को घर से उठाकर कोंडागांव और दंतेवाड़ा ले गया, फिर रायपुर पहुंचा। 21 नवंबर को पुलिस ने दोनों को बरामद किया, लेकिन भिलाई-3 थाने से आरोपी मौका पाकर फरार हो गया था। दो महीने की फरारी के बाद अब वही तंत्र-मंत्र, जिस पर आरोपी खुद भरोसा करता था, उसकी गिरफ्तारी का कारण बना। आरोपी अमलेश्वर का रहने वाला है। जामुल थाना में अपराध क्रमांक 918/2025 धारा 85, 115(2), 64(2)(एम), 138, 351(3), 89 बीएनएस के तहत मामला दर्ज है। तंत्र-मंत्र की दुनिया में उलझा फरार तांत्रिक आखिरकार अपने ही जैसे दूसरे बैगा-तांत्रिक से मिलने की वजह से पुलिस के जाल में फंस गया। दुर्ग जिले के जामुल थाना क्षेत्र के अपहरण, दुष्कर्म और धोखाधड़ी के सनसनीखेज मामले में आरोपी हेमंत अग्रवाल (41) की गिरफ्तारी का सबसे अहम एंगल यही रहा कि वह अपनी फरारी के दौरान बारनवापारा के जंगलों में दूसरे बैगा-तांत्रिक से मिलने गया, और यही उसकी सबसे बड़ी चूक साबित हुई। पुलिस ने आरोपी को बलौदाबाजार जिले के गीतपुरी इलाके से गिरफ्तार किया, जहां वह नाम बदलकर छिपा हुआ था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी का पैदल जुलूस निकाला और उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया। फरारी के दौरान आरोपी लगातार अपनी पहचान और ठिकाने बदल रहा था। मोबाइल फोन अधिकतर बंद रखता था, ताकि पुलिस उसे ट्रेस न कर सके। इसी बीच वह बारनवापारा के जंगलों में रहने वाले एक दूसरे बैगा-तांत्रिक से मिलने और दवा लेने गया। पुलिस को इसी गतिविधि का इनपुट मिला। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने उड़ीसा, बारनवापारा और बलौदाबाजार इलाके में उसकी तलाश में भटकती रही। दो पुलिसकर्मी लगातार कई दिनों तक एक ही लोकेशन पर सिविल ड्रेस में निगरानी करते रहे। पुलिस को पता था कि बैगा-तांत्रिक से मिलने के बाद आरोपी वापस जरूर लौटेगा। बारनवापारा के एक इलाके में दूसरे तांत्रिक से मिलने का इनपुट छोटा था, लेकिन पुलिस के लिए निर्णायक साबित हुआ। जामुल थाना पुलिस ने अंदाजा लगाया कि आरोपी जंगल से लौटकर गीतपुरी बलौदाबाजार जरूर आएगा। इसी इंतजार में पुलिस के जवान कई दिनों तक उसका इंतजार करते रहे। आखिरकार वह गीतपुरी आया और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

मंत्री सिलावट ने निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं को समय-सीमा में पूरा करने का निर्देश दिया

निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाओं का कार्य समय-सीमा में करें पूर्ण: जल संसाधन मंत्री सिलावट विभागीय कार्यों की समीक्षा की भोपाल जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है की प्रदेश में विभिन्न निर्माणाधीन वृहद एवं मध्यम परियोजनाओं का कार्य समय से पूरा किया जाए। वरिष्ठ अधिकारी परियोजनाओं के कार्य का निरंतर निरीक्षण करें और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करें। कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न हो। मंत्री सिलावट ने मंत्रालय स्थित अपने प्रतिकक्ष में बुधवार को विभाग के अंतर्गत धसान केन कछार सागर में निर्माणाधीन वृहद एवं मध्यम परियोजनाओं की समीक्षा की। बैठक में अपर मुख्य सचिव जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख अभियंता विनोद कुमार देवड़ा, मुख्य अभियंता सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कार्य से संबंधित निर्माण ऐजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। मंत्री सिलावट ने निर्देश दिए कि वरिष्ठ अधिकारी स्वीकृत परियोजनाओं को समय-सीमा में पूर्ण करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करें और प्रति 15 दिन में कार्य की समीक्षा करें। बैठक में बताया गया कि परियोजनाओं के पूर्ण होने पर सागर, पन्ना, दमोह एवं छतरपुर जिले की लगभग 81 हजार हैक्टेयर में अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। मंत्री सिलावट द्वारा कछार के अंतर्गत आपचंद, मंझगाय, सतधारू, पवई, रूंज एवं काठन सिंचाई परियोजनाओं से सिंचाई सम्बन्धी व्यवस्थाओं के निर्देश दिये गये।  

कुबेरेश्वर धाम में रुद्राक्ष वितरण 15 जनवरी से 15 मार्च तक बंद, जानिए कारण

सीहोर  प्रदीप मिश्रा के सीहोर स्थित कुबेरेश्वर धाम में 14 से 20 फरवरी तक होने वाले रुद्राक्ष महोत्सव की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों और आयोजन समिति के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में फैसला लिया गया कि भारी भीड़ के चलते सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुबेरेश्वर धाम में 15 जनवरी से 15 मार्च तक रुद्राक्ष वितरण पूरी तरह बंद रहेगा। आपात स्थिति के लिए मिनी आईसीयू और एम्बुलेंस की तैनाती भी की जाएगी। 15 जनवरी से 15 मार्च तक नहीं बांटे जाएंगे रुद्राक्ष बैठक में फैसला लिया गया कि कुबेरेश्वर धाम में अगले दो महीनों तक रुद्राक्ष नहीं बांटे जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए 15 जनवरी से 15 मार्च तक रुद्राक्ष वितरण पर पूरी तरह रोक रहेगी। इस महत्वपूर्ण बैठक में भोपाल संभागायुक्त संजीव सिंहए आईजी अभय सिंह, कलेक्टर बालागुरू के. और पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार शुक्ला के साथ कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा और अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। लाखों लोगों के आने की संभावना अधिकारियों ने कहा कि रुद्राक्ष महोत्सव में देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन और समिति को मिलकर सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी करनी होंगी। किसी भी तरह की लापरवाही भक्तों की सुरक्षा में बड़ी बाधा बन सकती है। अतः सभी विभाग अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभाएं। बैठक में एक प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रस्तावित सुविधाओं, सेवाओं और पूरी कार्ययोजना का खाका भी पेश किया गया। बड़ी संख्या में वॉलेंटियर्स तैनात करने के निर्देश बैठक में आयोजन समिति को निर्देश दिए गए कि वे पर्याप्त पार्किंग, रास्तों पर दिशा सूचक बोर्ड, भोजन का उचित प्रबंध और बड़ी संख्या में वॉलेंटियर्स की तैनाती सुनिश्चित करें। मुख्य सड़कों और हाईवे पर जाम से बचने के लिए प्रभावी डायवर्जन प्लान लागू करने, पार्किंग क्षेत्रों को अलग-अलग जोन में बांटने और वहां से कथा स्थल तक श्रद्धालुओं के सुरक्षित आने-जाने की व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया ताकि अव्यवस्था न फैले। जगह-जगह बोर्ड लगाने के निर्देश प्रशासन ने भीड़ पर काबू पाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ पीने के पानी, साफ-सफाई और बिजली की निर्बाध आपूर्ति के कड़े निर्देश दिए हैं। मोबाइल नेटवर्क, सूचना प्रसारण सिस्टम और एलईडी स्क्रीन को दुरुस्त रखने को कहा गया है ताकि श्रद्धालुओं को कथा सुनने और जरूरी जानकारी पाने में कोई दिक्कत न हो। यही नहीं रुद्राक्ष वितरण बंद रहने की जानकारी प्रमुख जगहों पर बोर्ड लगाकर और मीडिया के जरिए पहुंचाई जाए ताकि लोग परेशान न हों। एम्बुलेंस, डॉक्टर और उपचार केंद्र लगाने के निर्देश आयोजन स्थल पर पर्याप्त एम्बुलेंस, डॉक्टर और जरूरी दवाओं के साथ प्राथमिक उपचार केंद्र लगाने के निर्देश दिए गए। इमरजेंसी से निपटने के लिए मिनी आईसीयू तैयार रखने और मरीजों को बड़े अस्पताल भेजने की व्यवस्था करने को कहा गया है।अधिकारियों ने पंडित प्रदीप मिश्रा के साथ कथा स्थल, पंडाल प्रवेश और निकास द्वारों का निरीक्षण किया। उन्होंने पार्किंग, भोजनशाला और कंट्रोल रूम का भी जायजा लिया गया। जरूरी सुधार के निर्देश दिए गए।

बीजेपी अध्यक्ष चुनाव में नितिन नबीन के प्रस्तावक बनेंगे पीएम मोदी, निर्विरोध जीत की संभावना

 नई दिल्ली बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन अब पार्टी के स्थायी अध्यक्ष बनने जा रहे हैं. वो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की जगह कार्यकार संभालेंगे. मकर संक्रांति के बाद बीजेपी के नए अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. नितिन नबीन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे. नितिन नबीन के नामांकन में प्रस्तावकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह समेत कई केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री भी नितिन नबीन के नामांकन में प्रस्तावक होंगे. सूत्रों की माने तो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए सिर्फ नितिन नबीन ही अपना नामांकन दाखिल करेंगे और उनके के खिलाफ कोई भी नेता नामांकन नहीं भरेगा. ऐसे में नितिन नबीन का निर्विरोध अध्यक्ष चुना जाना तय माना जा रहा है. मकर संक्रांति के बाद अध्यक्ष का चुनाव मकर संक्रांति गुरुवार को है, उसके बाद बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. माना जा रहा है कि मकर संक्रांति के दो-तीन के बाद बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव का औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा. इसके बाद नितिन नबीन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे. इस दौरान पीएम मोदी से लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और राजनाथ सिंह सहित बीजेपी के तमाम बड़े नेता उनके प्रस्तावक होंगे. केंद्रीय मंत्री, बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, पार्टी के वरिष्ठ राष्ट्रीय पदाधिकारी, प्रदेश इकाइयों के अध्यक्ष और पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी चुनाव नतीजे की घोषणा के दौरान अध्यक्ष पद का चुनाव होगा. नितिन नबीन के लिए प्रस्तावकों और उसका समर्थन करने वाले लोगों के हस्ताक्षरों के साथ नामांकन पत्र के कई सेट बनाने की तैयारियां चल रही हैं.

Meta बनने का सपना चुराया, फेसबुक के 1000 कर्मचारियों को जकरबर्ग ने किया नौकरी से बाहर

कैलिफोर्निया अमेरिकी टेक कंपनी Meta ने 2026 की शुरुआत में अपने Reality Labs डिविज़न में 1,000 से ज़्यादा कर्मचारियों को निकाल दिया है. यह खबर सिर्फ नौकरी छंटनी नहीं है, बल्कि एक बड़ा इशारा है कि Meta किस दिशा में जा रहा है. Reality Labs वही यूनिट है जो Virtual Reality (VR), Metaverse और XR (Extended Reality) जैसी टेक पर काम करती थी. अगर आपको याद हो तो कंपनी के को-फाउंडर और सीईओ मार्क जकरबर्ग ने पूरी कंपनी का नाम फेसबुक से Meta कर दिया था और Metaverse पर बिलियन डॉलर्स निवेश किए थे. हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि मेटावर्स एक बबल की तरह था जो फूट रहा है और कंपनी अब दूसरे डायरेक्शन में शिफ्ट हो रही है.  Metaverse पर लगाया था बड़ा दांव, लेकिन टूटा सपना   Meta ने Reality Labs में करीब 10% से ज़्यादा स्टाफ को निकालने का फैसला लिया है, जिससे यह साफ़ होता है कि कंपनी अब Metaverse प्रोजेक्ट पर उतना बड़ा भरोसा नहीं कर रही जितना पहले कर रही थी. यह बदलाव अलग अलग टीमों और प्रोडक्ट्स को प्रभावित कर रहा है, खासकर उन लोगों को जो Meta के VR हेडसेट्स, Horizon Worlds जैसे Metaverse प्लेटफ़ॉर्म और कुछ अन्य इमर्सिव गेमिंग स्टूडियोज़ पर काम करते थे. यह छंटनी बुधवार सुबह से शुरू हुई और इसके बारे में कंपनी ने अपने इनसाइड मैसेज में भी बताया. Meta के Chief Technology Officer एंड्रयू बोस्वर्थ ने इंटर्नली स्टाफ को बताया कि यह कदम कंपनी की सबसे महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले लिया गया है, जो इस साल की रणनीति को तय करेगा. Meta के एक प्रवक्ता ने कहा है कि यह बदलाव Metaverse में भारी खर्च और कम उपयोग के कारण ज़रूरी था, और कंपनी अब अपने संसाधनों को AI-ड्राइव्ड प्रोडक्ट्स और वियरेबल टेक की तरफ़ ज़्यादा फोकस कर रही है.  LinkedIn पर Open to Work की भरमार इस बदलाव के बाद LinkedIn जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर Meta के पूर्व कर्मचारियों की तरफ़ से 'Open to Work' पोस्ट्स की भरमार देखी जा रही है, जिससे यह साफ़ होता है कि कई अनुभवी टेक प्रोफेशनल अब नई नौकरी की तलाश में हैं. इस हफ्ते से LinkedIn पर हजारों Open to Work पोस्ट्स वायरल हो रही हैं, जो दिखाती हैं कि यह सिर्फ एक कंपनी की नौकरी छंटनी नहीं, बल्कि पूरे टेक सेक्टर में बदलाव की हवा है. Meta के Reality Labs ने पिछले कुछ सालों में Metaverse और XR टेक पर अरबों डॉलर खर्च किए, लेकिन इन प्रोडक्ट्स को Mainstream यूज़र्स द्वारा उतना अपनाया नहीं गया जितना कंपनी ने सोचा था. कई रिपोर्ट्स के अनुसार Reality Labs ने पिछले कुछ वर्षों में भारी वित्तीय नुकसान भी झेला है, जिससे Meta को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ा. अब Meta को लगता है कि दुनिया अभी मेटावर्स के लिए तैयार नहीं है, बल्कि AI और Wearables जैसे प्रोडक्ट्स ज़्यादा प्रैक्टिकल हैं और कंपनियों को वहीं ज़्यादा फायदा मिलेगा. Meta स्मार्ट AI ग्लासेस पर पूरा फोकस इसी वजह से Ray-Ban Smart Glasses जैसे AI वाले डिवाइसेज़ पर ज़्यादा निवेश कर रही है, जिनकी मांग बढ़ रही है, वहीं VR हेडसेट्स और Metaverse प्लेटफ़ॉर्म की दिशा थोड़ी धीमी पड़ रही है. स्मार्ट ग्लासेज अपने कॉम्पैक्ट साइज और प्रैक्टिकल होने की वजह से दुनिया भर में काफी पॉपुुलर हुए और इनकी बिक्री भी खूब हुई. हाल ही में Meta ने डिस्प्ले वाले स्मार्ट ग्लासेज भी लॉन्च किए हैं जो अमेरिका में Out Of Stock हो रहा है. इतना  ही नहीं, कंपनी Orion ग्लासेज पर भी काम कर रही है जो चश्मा की तरह ही है, लेकिन उसमें मिक्स्ड रिएलिटी के तमाम फीचर्स मिलेंगे जैसे Apple Vision Pro में देखने को मिलते हैं. Meta के इस बड़े बदलाव से यह भी पता चलता है कि Tech इंडस्ट्री में जो भी प्रोडक्ट तेजी से पैसा नहीं कमा रहे, उनसे कंपनियां जल्दी दूरी बना रही हैं. पिछले साल भी कई बड़ी टेक कंपनियों ने Job Cuts का दौर देखा है, जिसमें Meta, Microsoft, Google जैसे बड़े नाम शामिल रहे. इस साल की शुरुआत में Meta ने Reality Labs में छंटनी कर यह संदेश दिया है कि अब कंपनी का ध्यान भविष्य की AI फर्स्ट तकनीकों पर है न कि सिर्फ़ हॉलीवुड-ज़्यादा फ्यूचरिस्टिक Metaverse पर.  

रांची से लापता दोनों बच्चे स्लम बस्ती से बरामद

रांची. रांची में बीते कई दिनों से लापता बच्चे रामगढ़ के चितरपुर की स्लम बस्ती से बरामद कर लिए गए हैं। इस मामले में पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए संदिग्धों से पुलिस पूछताछ कर रही है। इस मामले की जानकारी देते हुए स्थानीय लोगों ने बताया कि लड़का को बजरंग दल के युवकों ने देखा उसके बाद उसे अपने पास रखकर पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने के बाद पुलिस पहुंची और दोनों बच्चों को बरामद कर लिया। बच्चों के साथ पकड़े गए आरोपियों से रामगढ़ एसपी पूछताछ कर रहे हैं। बता दें कि रांची के जगन्नाथपुर मौसीबाड़ी खटाल से दो जनवरी को अंश और अंशिका लापता हुए थे। दोनों बच्चे की तलाश में रांची पुलिस की टीम दिल्ली, मुंबई, बंगाल, बिहार और यूपी के इलाके में लगातार छापेमारी कर रही थी। क्या बोले सीएम सोरेन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि अपहरणकर्ताओं के चंगुल से दो मासूम बच्चों को सुरक्षित मुक्त कराना बेहद राहत भरा और सराहनीय कार्य है। पिछले कुछ दिन व्यक्तिगत रूप से काफी परेशान करने वाले रहे, लेकिन अंततः पुलिस को सफलता मिली। दूसरे राज्य में हुई समान घटनाओं के तार जोड़कर रांची पुलिस ने अपराधियों तक पहुंच बनाई। रांची पुलिस व झारखंड पुलिस की टीम को बधाई और अंश और अंशिका के परिवार को शुभकामनाएं। डीजीपी तदाशा मिश्रा ने टीम को ‘डीजी डिस्क’ देने की घोषणा की झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा ने रांची पुलिस को इस बड़ी कामयाबी के लिए बधाई दी है। एडीजी मनोज कौशिक के नेतृत्व में गठित रांची पुलिस की विशेष टीम ने अपहरण किए गए दोनों बच्चों को सकुशल बरामद कर लिया है। डीजीपी ने कहा कि इस सफलता के पीछे पुलिस टीम की कड़ी मेहनत और ठोस रणनीति रही है। बच्चों की तलाश के लिए पुलिस ने सघन अभियान चलाते हुए ऑटो, ट्रेन और निजी वाहनों सहित सार्वजनिक स्थलों पर पोस्टर लगाए थे। साथ ही, अपराधियों की सूचना देने पर दो-दो लाख रुपये के इनाम की भी घोषणा की गई थी। डीजीपी ने बताया कि मीडिया में हुए व्यापक प्रचार-प्रसार और पुलिस की सक्रियता के कारण अपराधियों पर भारी दबाव बन गया था। इसी वजह से वे बच्चों को लेकर झारखंड से बाहर भागने में असफल रहे और अंततः पुलिस ने उन्हें रामगढ़ से बरामद कर लिया। इस सराहनीय कार्य के लिए ऑपरेशन में शामिल पूरी टीम को ‘डीजी डिस्क’ से सम्मानित किया जाएगा। मामले का खुलासा करते हुए उन्होंने बताया कि इस अपहरण के पीछे मानव तस्करी में शामिल एक बड़ा अंतरराज्यीय गिरोह सक्रिय था। पुलिस ने इस मामले में अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया है, जो झारखंड के बाहर के रहने वाले हैं। फिलहाल पकड़े गए आरोपियों से विस्तृत पूछताछ की जा रही है ताकि इस गिरोह के पूरे नेटवर्क और इनके संपर्कों का पूरी तरह से पर्दाफाश किया जा सके।

मकर संक्रांति दो दिन क्यों? जानें सही वजह

मकर संक्रांति को लेकर इस साल लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह पर्व आज यानी 14 जनवरी 2026 को मनाया जाए या फिर 15 जनवरी 2026 को. यही वजह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मकर संक्रांति आज और कल दोनों दिन मनाई जा रही है. इसके पीछे ज्योतिष, पंचांग, परंपरा और धार्मिक मान्यताओं से जुड़े कई कारण हैं. आइए आसान भाषा में पूरे मामले को समझते हैं. क्यों है तारीखों को लेकर कंफ्यूजन? मकर संक्रांति तब मनाई जाती है जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. ज्योतिषियों के बीच मतभेद सूर्य के प्रवेश के समय को लेकर है. अधिकांश पंचांगों के अनुसार, सूर्य आज यानी 14 जनवरी को दोपहर 3:13 बजे मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं. वहीं, बनारस के कुछ पंचांगों का मानना है कि यह प्रवेश रात 9:19 बजे होगा. इसी समय के अंतर के कारण त्योहार दो दिन मनाया जा रहा है. आज 14 जनवरी कहां-कहां है धूम? चूंकि अधिकांश पंचांगों के अनुसार, सूर्य का गोचर आज दोपहर में हो रहा है, इसलिए देश के कुछ हिस्सों में ये उत्सव आज भी मनाया जा रहा है. गुजरात और राजस्थान: यहां उत्तरायण और पतंगबाजी का मुख्य जश्न आज ही मनाया जा रहा है. तमिलनाडु: दक्षिण भारत में थाई पोंगल का मुख्य दिन आज 14 जनवरी ही है. शुभ मुहूर्त: द्रिक पंचांग के अनुसार, संक्रांति का पुण्य काल आज दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:45 बजे तक रहेगा. कल (15 जनवरी) क्यों मनाई जाएगी संक्रांति? उत्तर प्रदेश, बिहार और वाराणसी के विद्वान 15 जनवरी को त्योहार मनाना अधिक उचित मान रहे हैं. इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं. उदया तिथि और स्थानीय परंपरा शास्त्रों में माना जाता है कि जो तिथि सूर्योदय के समय होती है, उसी का महत्व पूरे दिन रहता है. चूंकि आज सूर्य का प्रवेश दोपहर या रात में हो रहा है, इसलिए उदया तिथि के अनुसार कल 15 जनवरी को मुख्य स्नान और दान होगा. षटतिला एकादशी और चावल का धर्मसंकट इस बार 14 जनवरी को षटतिला एकादशी भी है. हिंदू धर्म में एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित है. मकर संक्रांति का मुख्य प्रसाद ‘खिचड़ी’ है, जो बिना चावल के नहीं बन सकती. ऐसे में व्रत रखने वाले लोग 14 जनवरी को खिचड़ी नहीं खा सकते, इसलिए वे 15 जनवरी को यह पर्व मनाएंगे. दोपहर के स्नान को लेकर शास्त्र क्या कहते हैं? प्रयागराज के ज्योतिषाचार्य पंडित दिवाकर त्रिपाठी के अनुसार, शास्त्रों में दोपहर के स्नान को अच्छा नहीं माना गया है. धर्म सिंधु और नारद पुराण के अनुसार, संक्रांति का पुण्यकाल अगले दिन के मध्याह्न तक रहता है. इसलिए 15 जनवरी की सुबह स्नान और दान करना सबसे उत्तम है. आपके लिए क्या है सही? अगर आप परंपरा और पंचांग को मानते हैं, तो दान-पुण्य और पवित्र नदियों में स्नान के लिए 15 जनवरी की सुबह का समय सबसे श्रेष्ठ है. वहीं, अगर आप केवल उत्सव और पतंगबाजी का आनंद लेना चाहते हैं, तो 14 जनवरी को इसकी शुरुआत हो चुकी है.

पोंगल क्यों है खास? जानिए दक्षिण भारत की परंपराएं

हर वर्ष जनवरी माह में मनाया जाने वाला पोंगल पर्व दक्षिण भारत की संस्कृति और कृषि परंपरा का प्रमुख उत्सव माना जाता है. वर्ष 2026 में पोंगल 14 जनवरी से 17 जनवरी तक मनाया जाएगा. यह पर्व केवल नई फसल के स्वागत तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति, सूर्य और धरती के प्रति आभार प्रकट करने का अवसर भी माना जाता है. पोंगल के दौरान की जाने वाली पूजा, अनुष्ठान और पारंपरिक विधियां जीवन में समृद्धि, संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती हैं. यही कारण है कि पोंगल को दक्षिण भारत का सबसे महत्वपूर्ण कृषि पर्व कहा जाता है. पोंगल पर्व का मुख्य उद्देश्य नई फसल के प्रति आभार व्यक्त करना है. इस दिन किसान अपनी पहली उपज को सूर्यदेव और धरती माता को अर्पित करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नई फसल की पूजा करने से अन्न की शुद्धता बनी रहती है और आने वाला वर्ष समृद्धि लेकर आता है. पोंगल शब्द का अर्थ ही उफनना या भरपूर होना है, जो समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है. नई फसल की पूजा यह संदेश देती है कि मनुष्य और प्रकृति का संबंध संतुलन और सम्मान पर आधारित होना चाहिए. सूर्य उपासना और पोंगल का ज्योतिषीय पक्ष पोंगल का पर्व सूर्यदेव से विशेष रूप से जुड़ा हुआ है. यह त्योहार सूर्य के उत्तरायण होने और मकर राशि में प्रवेश के समय मनाया जाता है. ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय सकारात्मक ऊर्जा, नई शुरुआत और स्थिर प्रगति का प्रतीक माना गया है. सूर्यदेव को अन्न, ऊर्जा और जीवन का आधार माना जाता है, इसलिए पोंगल पर सूर्य उपासना का विशेष महत्व है. इस दिन सूर्य को अर्घ्य देना, दीप जलाना और पोंगल अर्पित करना शुभ माना जाता है, जिससे जीवन में स्पष्टता और आत्मबल बढ़ने के संकेत माने जाते हैं. पोंगल पर दक्षिण भारत की विशेष परंपराएं दक्षिण भारत में पोंगल चार दिनों तक अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है. पहले दिन भोगी पोंगल पर पुराने सामान का त्याग और नए जीवन की शुरुआत का संदेश दिया जाता है. दूसरे दिन थाई पोंगल पर नए चावल, दूध और गुड़ से पोंगल बनाकर सूर्यदेव को अर्पित किया जाता है. तीसरे दिन मट्टू पोंगल पर पशुधन की पूजा की जाती है, क्योंकि कृषि जीवन में उनका विशेष योगदान माना जाता है. चौथे दिन कानूम पोंगल पर परिवार और सामाजिक मेल-मिलाप को महत्व दिया जाता है. खान-पान, रंगोली और सामूहिक उत्सव पोंगल पर्व पर खान-पान और सजावट का विशेष महत्व होता है. घरों के सामने रंगोली या कोलम बनाई जाती है, जो शुभता और सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती है. पोंगल प्रसाद, गन्ना, नारियल और ताजे फल इस पर्व की पहचान होते हैं. लोग पारंपरिक वस्त्र पहनते हैं और सामूहिक रूप से उत्सव मनाते हैं. यह पर्व सामाजिक एकता, परिवारिक संबंधों और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का माध्यम माना जाता है. जीवन पर प्रभाव और संदेश पोंगल केवल एक कृषि पर्व नहीं, बल्कि जीवन दर्शन से जुड़ा उत्सव माना जाता है. नई फसल की पूजा यह सिखाती है कि परिश्रम, धैर्य और कृतज्ञता से ही जीवन में स्थायी सुख मिलता है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पोंगल के समय किए गए संकल्प और पूजा जीवन में सकारात्मक दिशा देने वाले माने जाते हैं. कुल मिलाकर, पोंगल 2026 प्रकृति के साथ सामंजस्य, परंपरा के सम्मान और नए आरंभ का पर्व है, जो समृद्धि और संतुलन का संदेश देता है.

CBI ने सेंधवा में कई ठिकानों पर मारा छापा, नाबार्ड लोन घोटाले के राज खुलेंगे

बड़वानी  सेंधवा में बुधवार उस समय हड़कंप मच गया, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने नाबार्ड भोपाल से जुड़े करीब 13 करोड़ रुपए के कथित लोन धोखाधड़ी मामले में छापा मारा. कार्रवाई के दौरान शहर के कई इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात रहा. सीबीआई की टीम ने सेंधवा की जगन्नाथपुरी कॉलोनी स्थित उद्योगपति के निवास सहित अन्य ठिकानों पर छापेमारी की. कोलकाता सीबीआई में पहले से एफआईआर छापे के दौरान उद्योगपति के आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा. किसी को अंदर जाने और अंदर से बाहर आने की अनुमति नहीं मिली. सीबीआई छापे से पूरे शहर में हलचल तेज रही. रामकटोरा क्षेत्र में भी सीबीआई की एक अन्य टीम ने दबिश दी. छापे में क्या-क्या मिला, इस बारे में सीबीआई या स्थानीय पुलिस प्रशासन ने कोई जानकारी नहीं दी. इस मामले में कोलकाता स्थित सीबीआई पहले ही एफआईआर दर्ज कर चुकी है. कृषि प्रसंस्करण क्लस्टर परियोजना के लिए लिया लोन कोलकाता सीबीबीआई की एफआईआर में सेंधवा के उद्योगपतियों पर गंभीर आरोप हैं. एफआईआर के मुताबिक उद्योगपतियों ने सरकारी कर्मचारियों से मिलकर धोखाधड़ी की. आपराधिक साजिश और दस्तावेजों की जालसाजी के आरोप हैं. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वर्ष 2019 में आरोपियों ने नाबार्ड की फूड प्रोसेसिंग फंड योजना के तहत सेंधवा के समीप जामली गांव में कृषि प्रसंस्करण क्लस्टर परियोजना स्थापित करने के लिए करीब 13 करोड़ रुपए का ऋण लिया था. बैंक की लोन राशि कंपनियों के खातों में जमा की इस परियोजना की कुल लागत 31 करोड़ रुपए से अधिक थी. परियोजना के लिए केंद्र सरकार के फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय द्वारा लगभग 10 करोड़ रुपए का अनुदान भी स्वीकृत किया गया था. आरोप है कि आरोपियों ने फर्जी समझौतों और कागजी लेनदेन के जरिए ऋण राशि को अन्य कंपनियों और बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया. साथ ही, समय-समय पर परियोजना की समय-सीमा बढ़वाकर बैंक अधिकारियों को गुमराह किया गया. सितंबर 2024 में एनपीए घोषित हुआ खाता लगातार अनियमितताओं के चलते सितंबर 2024 में ये लोन खाता एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) घोषित कर दिया गया. इसके बाद ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर नाबार्ड बैंक द्वारा सीबीआई को जांच के लिए पत्र भेजा गया. सीबीआई छापे के बाद और बड़े खुलासे होने की संभावना है. फिलहाल सीबीआई टीम दस्तावेजों की जांच और साक्ष्य एकत्र करने में जुटी हुई है.