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कभी टीम इंडिया का चैंपियन, अब मैदान पर अंपायर की भूमिका में — WPL में दिखा पुराना वर्ल्ड कप विजेता

नई दिल्ली क्रिकेट की दुनिया में कई खिलाड़ी ऐसे होते हैं जो अपने करियर के शुरुआती दौर में मैदान पर चमक बिखेरते हैं लेकिन इसके बाद गुमनामी में खो जाते हैं। हालांकि, कुछ अपनी लगन से खेल के साथ रिश्ता बनाए रखने का नया रास्ता खोज लेते हैं। ऐसी ही एक कहानी है अजितेश अर्गल की। साल 2008 में विराट कोहली की कप्तानी में अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के हीरो रहे अजितेश अब महिला प्रीमियर लीग यानी WPL 2026 में अंपायरिंग करते नजर आ रहे हैं।   2008 U-19 वर्ल्ड कप फाइनल के हीरो अजितेश अर्गल का नाम भारतीय क्रिकेट इतिहास में फाइनल में भारत को खिताब जिताने के कारण लिया जाएगा। साल 2008 में जब भारत ने विराट कोहली की कप्तानी में मलेशिया में अंडर-19 वर्ल्ड कप का खिताब जीता था, उसके फाइनल मकाबले में अजितेश का अहम योगदान था। साउथ अफ्रीका के खिलाफ फाइनल मैच में अजितेश ने घातक गेंदबाजी करते हुए दो महत्वपूर्ण विकेट झटके थे। उनके इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' के खिताब से नवाजा गया था। उस समय यह माना जा रहा था कि यह तेज गेंदबाज जल्द ही सीनियर नेशनल टीम में जगह बनाएगा, लेकिन उनका खिलाड़ी के तौर पर सफर उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ पाया। IPL और घरेलू क्रिकेट करियर वर्ल्ड कप की सफलता के बाद अजितेश को किंग्स इलेवन पंजाब (अब पंजाब किंग्स) ने अपनी टीम में शामिल किया। हालांकि, उन्हें आईपीएल में एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। घरेलू स्तर पर उन्होंने बड़ौदा की टीम का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने अपने करियर में कुल 10 फर्स्ट क्लास, 6 टी-20 और 3 लिस्ट-A मैच खेले, जिनमें उन्होंने 29 विकेट झटके। उन्होंने अपना आखिरी प्रोफेशनल मैच साल 2015 में खेला था। अंपायरिंग के रूप में नई पारी क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद अजितेश ने इनकम टैक्स ऑफिसर के रूप में अपनी प्रोफेशनल जिम्मेदारी संभाली। क्रिकेट से हटने के बाद भी इस खेल के प्रति उनका जुनून कम नहीं हुआ। साल 2023 में उन्होंने अंपायरिंग की परीक्षा पास की और अब वे मैदान पर रेफरी और अंपायर की भूमिका निभा रहे हैं। मौजूदा WPL सीजन में वे गुजरात जायंट्स, यूपी वॉरियर्स, आरसीबी और दिल्ली कैपिटल्स के मैचों में मैदानी अंपायर के तौर पर दिख चुके हैं। अब तक वे 3 फर्स्ट क्लास, 9 लिस्ट-ए और 21 टी20 मैचों में अंपायरिंग कर चुके हैं।  

सिर्फ कानून नहीं, नए भारत की सोच है UCC — सामाजिक समरसता पर बोले धामी

देहरादून उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानून को एक साल पूरा होने पर इसे 'समान नागरिक संहिता दिवस' के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से शुरू हुई यह ऐतिहासिक पहल सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि समानता, पारदर्शिता और सामाजिक समरसता की एक सशक्त नींव है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "समान नागरिक संहिता का मूल उद्देश्य महिलाओं को उनके वैधानिक अधिकारों में पूर्ण समानता दिलाना है। यह व्यवस्था विवाह, तलाक, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे महत्वपूर्ण विषयों में महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करते हुए उन्हें समान और न्यायसंगत अधिकार सुनिश्चित करती है।" उन्होंने लिखा, "पिछले एक साल में यूसीसी के अंतर्गत विवाह पंजीकरण और नागरिक सेवाओं में उल्लेखनीय तेजी आई है। राज्य सरकार की ओर से 23 भाषाओं में सहायता और एआई-आधारित सपोर्ट की सुविधा के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि हर नागरिक इस सकारात्मक परिवर्तन का लाभ उठा सके।" इससे पहले, सोमवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानून में एक अहम संशोधन किया गया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश-2026 को मंजूरी दी। इसमें, आपराधिक प्रक्रिया संहिता-1973 के स्थान पर अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 और दंडात्मक प्रावधानों के लिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 को लागू किया गया है। धारा 12 के अंतर्गत सचिव के स्थान पर अपर सचिव को सक्षम प्राधिकारी नामित किया गया है। संसोधन के जरिए विवाह के समय पहचान से संबंधित गलत जानकारी को विवाह निरस्तीकरण का आधार बनाया गया है। विवाह और लिव-इन संबंधों में बल, दबाव, धोखाधड़ी व विधि-विरुद्ध कृत्यों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं। लिव-इन संबंध की समाप्ति पर पंजीयक की ओर से समाप्ति प्रमाण पत्र जारी किए जाने का प्रावधान किया गया है। अनुसूची-2 में 'विधवा' शब्द के स्थान पर 'जीवनसाथी' शब्द का प्रतिस्थापन किया गया है। विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध और उत्तराधिकार से संबंधित पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति पंजीयक जनरल को प्रदान की गई है।

प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में देश के साथ बदल रहा मध्यप्रदेश भी

भोपाल . दो सिंचाई परियोजनाएं मंजूर होने पर सोहागपुर वासियों ने किया मुख्यमंत्री का आत्मीय अभिनंदन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश को हर क्षेत्र में लगातार बड़ी सौगातें मिल रही हैं। पिछले 11 वर्षों के कालखंड में संपूर्ण देश के साथ हमारा प्रदेश भी बदल रहा है। राज्य सरकार ने वर्ष-2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया है। पूरे साल में अनेक किसान हितैषी निर्णय लिए जाएंगे। प्रदेश सरकार ने हर खेत तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। प्रधानमंत्री  मोदी ने बुंदेलखंड से केन-बेतवा नदी जोड़ो अभियान की शुरुआत की है। इस परियोजना के पूर्ण होने पर क्षेत्र के कई जिलों के किसानों के खेतों में फसलें लहलहाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की प्रगति में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। मंगलवार को हुई मंत्रि-परिषद् की बैठक में नर्मदापुरम जिले में 2 सिंचाई परियोजनाओं के लिए 215 करोड़ 47 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। इससे सोहागपुर और पिपरिया क्षेत्र के किसानों एवं स्थानीय जनजातीय भाई-बहनों को अनुपम सौगात मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार की शाम मुख्यमंत्री निवास में आयोजित अभिनंदन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर सोहागपुर विधायक  विजयपाल सिंह ने क्षेत्रवासियों को मिली सौगातों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार माना। सोहागपुर से आए पार्टी पदाधिकारी, स्थानीयजन एवं विस्थापित जनजातीय परिवारों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आत्मीय अभिनंदन किया। विरासत भी और विकास भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश का वार्षिक बजट अब 4 लाख 21 हजार करोड़ रुपए हो चुका है। प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति प्रदान करने के लिए हमारी सरकार संकल्पित है और इसके सुखद परिणाम अब जमीन पर नजर आने लगे हैं। नर्मदापुरम जिले में बाबई-मोहासा औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। इससे निकट भविष्य में सोहागपुर-पिपरिया और आसपास के क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। राज्य सरकार विरासत के संरक्षण के साथ विकास के पथ पर अग्रसर है। प्रदेश के गरीब, किसान, युवा और नारी कल्याण के लिए जनहितैषी निर्णय लिए गए हैं। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पचमढ़ी में कैबिनेट बैठक आयोजित कर हमने क्षेत्र के गौरव राजा भभूत सिंह का स्मरण किया। इसी प्रकार इंदौर, खजुराहो, ग्वालियर जैसे स्थानों पर भी कैबिनेट बैठकों में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। सोहागपुर विधानसभा के 63 गांवों को मिलेगा पर्याप्त जल विधायक  विजयपाल सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश का कोना-कोना सिंचाई सुविधा से लैस हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोहागपुर विधानसभा क्षेत्र की जनता से किया अपना वादा निभाया और आज कैबिनेट ने क्षेत्रवासियों के कल्याण के लिए लगभग 226 करोड़ रुपए लागत की दो महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाएं स्वीकृत की हैं। उन्होंने कहा कि तवा परियोजना (दायीं तट नहर) की बागरा शाखा नहर होज सिंचाई परियोजना से बाबई एवं सोहागपुर तहसील के 33 गांवों की 4200 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी। वहीं, तवा परियोजना की दांयी तट नहर से पिपरिया ब्रांच केनाल होज सिंचाई परियोजना से 6000 हैक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होगा। परियोजना से सोहागपुर तहसील के 30 ग्राम लाभान्वित होंगे। दोनों परियोजनाओं से सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के आसपास रहने वाला जनजातीय समुदाय सर्वाधिक लाभान्वित होगा और उन्हें स्वच्छ पेयजल के साथ सिंचाई की सुविधा भी मिलेगी। अभिनंदन समारोह में नर्मदापुरम के लोकसभा सांसद  दर्शन सिंह चौधरी, राज्यसभा सदस्य श्रीमती माया नारोलिया,  राजेंद्र सिंह,  महेश उपाध्याय सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में स्थानीयजन उपस्थित थे।  

तालिबान सरकार के फैसले से विवाद, मौलाना–मौलवी को कानूनी छूट पर सवाल

 विदेश.  तालिबान का नया नियम: मौलाना–मौलवी पर नहीं चलेगा मुकदमा, फैसले पर मचा बवाल अफगानिस्तान में तालिबानी प्रशासन ने अपनी अदालतों के लिए एक निर्देश जारी कर दिया है जिसको लेकर बवाल शुरू हो गया है। अफगानिस्तान की सरकार ने 'क्रिमिनल प्रोसीजर कोड फॉर कोर्ट' के तहत निर्देश जारी करते हुए कहा है कि देश में मुल्ला और मौलवियों पर केस नहीं चलाए जाएंगे।इसके अलावा इस कोड के आर्टिकल 9 के तहत अफगान सोसाइटी को चार वर्गों में बांट दिया गया है। इसमें सबसे ऊपर मुल्ला और मौलवी होंगे। इस निर्देश में कहा गया है कि मुस्लिम धर्म गुरु अगर कोई भी अपराध करते हैं तो उनपर मुकदमा नहीं दर्ज किया जाएगा। वहीं अगर अन्य कैटिगरी के लोगों के खिलाफ अपराध साबित होता है तो उन्हें कड़ा दंड मिलेगा। ऐसे में एक ही अपराध के लिए अलग-अलग वर्गों के लोगों को अलग-अलग दंड भी दिया जाएगा। सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर देवबंदी इस्लामिक नाम के अकाउंट से कहा गया कि तालिबान प्रशासन ने चतुर्वर्ण व्यवस्था लागू कर दी है। नशनल रजिस्टेंस फ्रंट की मीडिया सेल ने कहा कि तालिबान ने गुलमी को कानूनी बना दिया है। अब कोर्ट अलग-अलग लोगों को स्टेटस के हिसाब से सजा सुनाएगी। ऐसे में उच्च वर्ग वालों की सुरक्षा की जाएगी और गरीबों को सजा दी जाएगी। बता दें कि तालिबान प्रशासन पहले ही भेदभाव और महिलाओं पर अत्याचार के लिए बदनाम था। पहली बार जब अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हुआ था तब भी इस तरह के नियम लगाए गए थे। 2021 में तालिबान की वापसी के बाद एक बार फिर से इसपर चर्चा होने लगी। बता दें कि लगभग एक महीने पहले एक 13 साल के किशोर को परिवार के 13 सदस्यों की हत्या के आरोप में मौत की सजा दी गई थी। उसकी मौत की सजा के लगभग 80 हजार लोग गवाह बने थे। तालिबान के सुप्रीम लीडर अखुंदजादा की मंजूरी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसे मौत की सजा सुनाई थी।  

खाड़ा गांव में हाथियों का कहर: घर ध्वस्त, दो गायों की मौत

शहडोल, मध्यप्रदेश में अनूपपुर जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत खाड़ा गांव में सोमवार को छत्तीसगढ़ से आए तीन हाथियों के दल ने जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने बलराम केवट के मकान पर हमला कर उसमें रखा अनाज खा लिया, वहीं बगीचे में बंधी दो गायों को कुचलकर मार डाला।  घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग का अमला मौके पर पहुंचा। मृत पशुओं का पोस्टमार्टम कराया गया और नुकसान का सर्वे किया गया। वनकर्मियों ने हाथियों की लोकेशन के आधार पर गांव में मुनादी कराते हुए ग्रामीणों को सतर्क किया तथा उन्हें पक्के मकानों में रहने और अपने पशुओं को सुरक्षित स्थान पर हटाने की अपील की।  

भारी बर्फबारी से हिमाचल में जनजीवन अस्त-व्यस्त, लाहौल-स्पीति में स्कूलों पर ताला

देश. हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर बर्फबारी ने जनजीवन को मुश्किल में डाल दिया है। लाहौल-स्पीति, किन्नौर, कुल्लू और शिमला जिले के ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात के चलते सड़क, बिजली और आवाजाही पर असर पड़ा है। बर्फबारी से जहां लाहौल-स्पीति में शिक्षण संस्थान बंद कर दिए गए हैं, वहीं अप्पर शिमला क्षेत्र में सड़कें बंद होने से आवाजाही बाधित हुई है। शिमला से सटे पर्यटन स्थलों कुफरी और नारकण्डा में भी बर्फ गिरी है। एनएच-5 बंद इससे शिमला-रामपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-05) भी बाद दोपहर कुफरी में दोबारा बंद करना पड़ा है। पिछले कुछ दिनों में मौसम खुलने पर इस राष्ट्रीय राजमार्ग को बहाल किया गया था, लेकिन दोबारा बर्फबारी ने प्रशासन की कोशिशों पर पानी फेर दिया है। सड़क बंद होने से सेब उत्पादक क्षेत्रों और दूरदराज के इलाकों में आवाजाही प्रभावित हो रही है। प्रशासन द्वारा सड़क को बहाल करने का कार्य जारी है। चौपाल-देहा-शिमला मुख्य मार्ग भी बंद शिमला जिले के चौपाल क्षेत्र में भी लगातार बर्फबारी जारी है। इसके चलते चौपाल-देहा-शिमला मुख्य मार्ग को एक बार फिर वाहनों की आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया है। सड़क पर बर्फ जमने और फिसलन बढ़ने के कारण प्रशासन ने एहतियातन यातायात रोक दिया है। चौपाल और आसपास के गांवों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है और लोगों को जरूरी कामों के लिए भी आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लाहौल-स्पीति में बिगड़े हालात, कई सड़कें बंद लाहौल-स्पीति में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। लाहौल-स्पीति जिले में लगातार हो रही भारी बर्फबारी के कारण जनजीवन लगभग ठहर सा गया है। घाटी के भीतर कई संपर्क सड़कें बंद हैं और गांवों का आपसी संपर्क प्रभावित हुआ है। लाहौल-स्पीति में स्कूल कॉलेज बंद मौसम की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए लाहौल-स्पीति जिले के सभी शिक्षण संस्थानों को बंद रखने का फैसला किया है। स्कूलों के साथ कॉलेज, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और आंगनबाड़ी केंद्र 28 जनवरी तक बंद कर दिए गए हैं, ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। बिजली और संचार सेवाएं भी प्रभावित लाहौल-स्पीति के कई हिस्सों में भारी हिमपात दर्ज किया गया है। ताजा बर्फबारी से तापमान में तेज गिरावट आई है, जिससे कड़ाके की ठंड पड़ रही है। घाटी में बिजली और संचार सेवाएं भी कई जगह प्रभावित हुई हैं। सीमा सड़क संगठन और लोक निर्माण विभाग की टीमें बर्फ हटाने के काम में जुटी हैं, लेकिन लगातार हो रहे हिमपात के कारण बहाली कार्य में मुश्किलें आ रही हैं। इन जिलों में भी ट्रैफिक पर असर किन्नौर और कुल्लू जिले के ऊंचे इलाकों में भी बर्फबारी का असर देखने को मिल रहा है। किन्नौर के कल्पा, सांगला और आसपास के क्षेत्रों में हल्का से मध्यम हिमपात हुआ है। कुल्लू जिले के मनाली और आसपास के ऊंचाई वाले इलाकों में भी मौसम खराब बना हुआ है। खराब मौसम के चलते कई ग्रामीण सड़कों पर यातायात बाधित है। 60 की स्पीड से चलेंगी जमा देने वाली हवाएं मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी, बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने राज्य में कुछ स्थानों पर 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी है। साथ ही शीतलहर और घने कोहरे का असर भी आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है। इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम खराब बना रह सकता है और लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के दौरान राज्य के चंबा, कुल्लू, किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों के अलग-अलग हिस्सों में गरज चमक के साथ भारी बारिश या बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से हवाएं चलने का अनुमान जताया है। इन जिलों में येलो अलर्ट मौसम विभाग का कहना है कि कभी कभी हवा की स्पीड 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। उना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर जिलों के अलग-अलग हिस्सों में कोल्ड डे रहने का येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान अलग-अलग हिस्सों में बिजली कड़कने के साथ आंधी-तूफान और बारिश की चेतावनी दी गई है। हवा की स्पीड 40 से 50 किलोमीटी प्रति घंटे रह सकती है। कल कैसा रहेगा मौसम? 28 जनवरी को ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम खराब रहने का अनुमान है। कल कुछ जिलों में घने कोहरे का भी येलो अलर्ट जारी किया गया है। 29 जनवरी को मौसम के साफ रहने की संभावना है, लेकिन 30 जनवरी से 2 फरवरी के बीच एक और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से फिर मौसम बिगड़ सकता है। इसके अलावा 27 से 30 जनवरी के बीच कुछ स्थानों पर घने कोहरे और शीतलहर की चेतावनी भी दी गई है। Himachal Pradesh Weather पर्यटकों के लिए एडवाइजरी प्रशासन ने पर्यटकों को एडवाइजरी जारी की है कि वे गैरजरूरी यात्रा से बचें। पर्यटकों से ऊंचाई वाले और बर्फबारी प्रभावित इलाकों की ओर नहीं जाने को कहा गया है। पिछले हफ्ते हुई भारी बर्फबारी के बाद प्रशासन ने बड़ी मशक्कत से सड़कों को बहाल किया था लेकिन ताजा हिमपात से हालात फिर बिगड़ने लगे हैं। हिमाचल प्रदेश में कई सड़कें एक बार फिर बंद हो गई हैं, जिससे राहत कार्यों और रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर पड़ा है।

भारत आने की तैयारी में स्कॉटलैंड, वीजा मिलने की उम्मीद तेज — पाक मूल खिलाड़ी पर भी नजर

नई दिल्ली क्रिकेट स्कॉटलैंड की मुख्य कार्यकारी अधिकारी ट्रुडी लिंडब्लेड को भरोसा है कि उनके राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ियों को टी20 विश्व कप के लिए भारत की यात्रा करने के लिए समय पर वीजा मिल जाएगा। बांग्लादेश ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए भारत में खेलने से इनकार कर दिया था जिसके बाद उसके स्थान पर स्कॉटलैंड को टी20 विश्व कप में शामिल किया गया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने स्पष्ट किया था कि भारत में किसी भी तरह सुरक्षा को खतरा नहीं है। स्कॉटलैंड सात फरवरी को कोलकाता में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगा। स्कॉटलैंड की टीम में पाकिस्तानी मूल के तेज गेंदबाज सफयान शरीफ भी शामिल हैं। भारतीय वीजा के लिए आवेदन करने वाले पाकिस्तानी मूल के आवेदकों की अधिक गहन जांच की जाती है, जिसके कारण प्रक्रिया में अधिक समय लगता है। ईएसपीएनक्रिकइंफो के अनुसार लिंडब्लेड ने कहा, ‘हम सभी आईसीसी के साथ मिलकर इसे साकार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वीजा का मामला हमेशा थोड़ा अनिश्चित होता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके पास तीन दिन हैं या 45 दिन।’ उन्होंने कहा, ‘पिछले 48 घंटों में हमारा पूरा ध्यान इसी बात पर रहा है। खिलाड़ियों के वीजा की प्रक्रिया पूरी करना ताकि वे खेलने के लिए पूरी तरह तैयार हों। वे सभी अपने वीजा के लिए आवेदन कर रहे हैं और हम जितनी जल्दी हो सके भारत पहुंच जाएंगे। इसमें अब केवल कुछ समय की बात है।’ शरीफ का जन्म हडर्सफील्ड में एक पाकिस्तानी पिता और एक ब्रिटिश-पाकिस्तानी मां के घर हुआ था। वह सात साल की उम्र में स्कॉटलैंड चले गए थे। लिंडब्लेड ने कहा, ‘आईसीसी हमें केवल उन्हीं चीजों के बारे में आश्वासन दे सकता है जिन पर उनका नियंत्रण है। हम उनके साथ मिलकर काम कर रहे हैं और जाहिर है कि वे बीसीसीआई और वहां के स्थानीय लोगों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि हमें वह सभी सहयाेग मिले जिसकी हमें जरूरत है।’ स्कॉटलैंड के सीनियर अधिकारी स्टीव स्नेल ने कहा, ‘हम बीसीसीआई से जब भी संभव हो सहयोग मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। स्कॉटलैंड को विश्व कप में शामिल किए जाने के बाद उसका वहां न पहुंच पाना किसी के लिए भी अच्छा नहीं होगा।’ लिंडब्लेड ने कहा कि स्कॉटलैंड बांग्लादेश के प्रति सहानुभूति रखता है और वे आईसीसी के इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में इस तरह से शामिल नहीं होना करना चाहते थे। उन्होंने कहा, ‘हमें बांग्लादेश टीम के लिए निश्चित रूप से सहानुभूति है। हम इस तरह से विश्व कप में प्रवेश नहीं करना चाहते थे। एक क्वालिफिकेशन प्रक्रिया होती है और कोई भी उस तरह से क्वालिफाई करना, भाग लेना या विश्व कप के लिए आमंत्रित होना नहीं चाहता जिस तरह से हमने किया है। हम बांग्लादेश के खिलाड़ियों के प्रति सहानुभूति रखते हैं।’  

मोदी सरकार की सफाई: यूजीसी रूल्स पर उठे बवाल के बीच धर्मेंद्र प्रधान का भरोसेमंद बयान

नई दिल्ली यूजीसी रूल्स 2026 का देश भर में विरोध हो रहा है। सवर्ण बिरादरियों से जुड़े संगठन ने इन नियमों पर सख्त आपत्ति जताई है और प्रदर्शन भी हो रहे हैं। इस बीच केंद्र सरकार की पहली प्रतिक्रिया आ गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि इन नियमों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा और किसी को इसका बेजा इस्तेमाल भी नहीं करने दिया जाएगा। उनका यह बयान अहम है क्योंकि इस समय यूजीसी नियमों को लेकर देश भर में डिबेट तेज चल रही है। इसके चलते भाजपा की मुश्किलें बढ़ने की बात कही जा रही है, जिसका एक मजबूत वोट बैंक सवर्ण समाज के लोग रहे हैं। मैं एक बात बहुत विनम्रता से कहना चाहता हूं कि किसी का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। कोई भेदभाव नहीं होगा। यूजीसी, भारत सरकार और राज्य सरकारों की यह जिम्मेदारी होगी। यह मसला तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में ही है। मैं स्पष्ट कह रहा हूं कि किसी के भी साथ अत्याचार या भेदभाव नहीं होगा। इसके अलावा भेदभाव के नाम पर किसी को भी यह अधिकार नहीं होगा कि वह कानून का बेजा इस्तेमाल करे। उन्होंने कहा कि हर चीज संविधान के दायरे में होगी। बता दें कि यह मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। सत्ताधारी दल भाजपा के ही कई नेताओं ने रायबरेली और लखनऊ जैसे जिलों में अपने पदों से इस्तीफा दिया है। लखनऊ औऱ दिल्ली में इसके खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। इसके अलावा बरेली जिले के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दिया है। इसके पीछे उन्होंने शंकराचार्य के अपमान और यूजीसी रूल्स को वजह बताया है। प्रियंका चतुर्वेदी बोलीं- वापस लिए जाएं यूजीसी रूल्स, रामगोपाल क्या बोले इस बीच राजनीति भी तेज हो गई है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी का कहना है कि इस नियम को वापस लिया जाए या फिर संशोधन किया जाए। वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने यूजीसी रूल्स का समर्थन किया है। बता दें कि कांग्रेस पार्टी ने अब तक इस मसले पर खुलकर कुछ भी नहीं कहा है।  

उत्तराखंड सरकार की बड़ी पहल: 46 मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक का प्रस्ताव

उत्तराखंड. चार धाम यात्रा से पहले बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन की तैयारी की जा रही है। यही नहीं प्रदेश के कुछ और प्रमुख मंदिरों में भी गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन लगाया जा सकता है।  बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। हेमंत द्विवेदी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा है कि ‘राज्य के सभी प्रमुख मंदिरों के स्टेक होल्डर और पुजारियों का मानना ​​है कि मंदिरों की पवित्रता को बनाए रखने के लिए गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन लगाना बेहद जरूरी है। हम आगामी बीकेटीसी की बैठक में बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी 46 मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन लगाने का प्रस्ताव लाने जा रहे हैं।’ बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। आदि शंकराचार्य ये व्यवस्था बनाकर गए थे उन्होंने आगे कहा कि 'हमने कोई नया फरमान जारी नहीं किया है ये तो आदि शंकराचार्य के कालखंड से होता चला आ रहा है। यहां की धार्मिक परंपराएं और प्राचीन मान्याताओं और आस्थाओं के अनुरूप आदि शंकराचार्य ये व्यवस्था बनाकर गए थे। समय की मांग के हिसाब से राज्य के अंदर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा अवैध मजार, थूक जिहाद और लैंड जिहाद के जरिए यहां पर धीरे-धीरे माहौल खराब किया गया है। ऐसे में मंदिरों के स्टेक होल्डर और पुजारियों की लंबे समय से मांग थी कि पूरी तरह से गैर हिंदुओं को बैन किया जाए।' वहीं लंबे समय से केदारनाथ और बद्रीनाथ धामों में आते रहे सिख और जैन श्रद्धालुओं के बारे में उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार, सिख, जैन और बौद्ध हिंदू धर्म का हिस्सा हैं। गंगा सभा की भी तैयारी मालूम हो कि हाल में हरिद्वार में हर की पौड़ी और आसपास के घाटों का प्रबंधन करने वाली संस्था गंगा सभा ने भी अगले साल आयोजित होने वाले अर्धकुंभ से पहले कुंभ क्षेत्र में आने वाले सभी गंगा घाटों और धार्मिक स्थानों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को बैन करने की मांग की है। यही नहीं हाल में हर की पौड़ी क्षेत्र में ‘अहिंदुओं का प्रवेश निषेध' लिखे पोस्टर लगाए गए हैं। गंगोत्री धाम में गैर हिंदुओं पर रोक का इस इमाम ने किया समर्थन, दी तगड़ी दलील उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थस्थलों बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री में अब गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित करने की तैयारी है। बद्रीनाथ, केदारनाथ मंदिर समिति ने सभी हितधारकों के साथ इस पर सहमति बना ली है। जल्द ही बोर्ड की बैठक में इसे औपचारिक रूप दिया जाएगा। गंगोत्री मंदिर समिति ने निर्णय कर लिया है। हालांकि सनातन धर्म में आस्था रखने वालों का स्वागत जारी रहेगा। इस घटनाक्रम पर मुस्लिम उलेमा की अलग-अलग राय सामने आई है। मुस्लिमों का वहां कोई काम नहीं ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने कहा कि यह धर्म और आस्था का विषय है। यदि मंदिर कमेटी यह तय करती है कि गैर-हिंदू अंदर नहीं आ सकते हैं तो इस फैसले पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। हर जगह के अपने नियम होते हैं। वैसे भी मुस्लिमों का गंगोत्री में कोई काम नहीं है। ऐसे में यदि कोई मुस्लिम वहां जाता है तो इससे टकराव होगा।  

नकली दस्तावेजों के सहारे डॉक्टर बना युवक, भोपाल कोर्ट का सख्त फैसला—तीन साल की जेल

भोपाल जिला कोर्ट ने फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्र के आधार पर मेडिकल सीट हासिल करने वाले एक डाक्टर को दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया है। 23वें अपर सत्र न्यायाधीश अतुल सक्सेना की अदालत ने आरोपित सुनील सोनकर को जालसाजी का दोषी पाते हुए 3 वर्ष के कठोर कारावास और 2000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।यह मामला वर्ष 2010 की पीएमटी परीक्षा से जुड़ा है। आरोपित सुनील सोनकर ने व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा आयोजित इस परीक्षा में सफलता प्राप्त की थी। मध्यप्रदेश राज्य कोटे की सीट का अनुचित लाभ उठाने के उद्देश्य से आरोपित ने कूटरचित (फर्जी) मूल निवासी प्रमाण पत्र तैयार करवाया और उसे प्रवेश प्रक्रिया के दौरान पेश किया।   एसटीएफ ने धोखाधड़ी की शिकायत मिलने पर एसटीएफ थाना भोपाल ने मामले की जांच शुरू की थी। जांच में प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने पर पुलिस ने आरोपित के खिलाफ धोखाधड़ी और दस्तावेजों की कूटरचना (धारा 420, 467, 468 और 471) के तहत मामला दर्ज किया था। इस मामले की पैरवी विशेष लोक अभियोजक अकील खान और सुधाविजय सिंह भदौरिया ने की। अभियोजन द्वारा पेश किए गए पुख्ता सबूतों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने माना कि आरोपित ने एक योग्य उम्मीदवार का हक मारकर फर्जी तरीके से सीट हासिल की थी। साक्ष्यों से सहमत होते हुए अदालत ने आरोपित को विभिन्न धाराओं में दोषसिद्ध ठहराते हुए सजा का ऐलान किया।