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केंद्रीय बजट बनेगा भारत की वैश्विक ताकत का आधार, लोकल उद्योगों को मिलेगा बड़ा बल: धामी

देहरादून केंद्रीय बजट के संबंध में उत्तराखंड प्रदेश भाजपा कार्यालय, देहरादून में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संबोधित किया और इसे विकसित भारत का बजट बताया। सीएम ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 9वीं बार बजट पेश किया है, उन्हें बधाई देता हूं। यह बजट पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है और 2026-27 का यह बजट भारत की आत्मा, आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने वाला है। यह भारत के सभी नागरिकों की आकांक्षाओं वाला बजट है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह बजट हर वर्ग के लोगों को किसी न किसी रूप में आगे लाने और विकसित भारत बनाने का बजट है। भारत आर्थिक रूप से मजबूत बने, आने वाले समय में भारत तीन प्रमुख आर्थिक महाशक्तियों के रूप में स्थापित हो, हर वर्ग का विकास हो और वैश्विक समस्याओं को ध्यान में रखकर इस बजट को तैयार किया गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सीएम धामी ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग को लेकर भी इस बजट में प्रावधान किए गए हैं। यह विकसित भारत के विजन वाला बजट है। कृषि, ग्रामीण विकास और कौशल निर्माण का भी इसमें ध्यान रखा गया है। ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह लोकल से ग्लोबल बनाने वाला बजट है। सीएम ने कहा कि यह भारतवर्ष के सभी नागरिकों के उत्थान एवं उनकी आकांक्षाओं की पूर्ति का बजट है। साथ ही यह बजट विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने वाला बजट है। यह बजट भारत के भविष्य को तीन मजबूत स्तंभों पर स्थापित करता है, भारत आर्थिक रूप से मजबूत बने, सामाजिक रूप से संतुलन स्थापित हो और ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याओं पर फोकस किया गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को 24 हजार करोड़ रुपए मिलेंगे, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 1,800 करोड़ रुपए अधिक धनराशि है। यह अतिरिक्त संसाधन आधारभूत संरचना एवं रोजगार सृजन को नई गति देंगे। इस बजट में युवाओं के लिए और महिलाओं के लिए वह सब कुछ है, जिससे वे जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बन सकें। यह जनकल्याण को लाभ देने वाला बजट है।

AI का ‘घमंडी’ बयान वायरल! इंसानों को बताया बेकार, खुद को कहा नया भगवान

नई दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर इन दिनों बहस तेज है। इंसानों के पास आखिर दुनिया में कितने काम बचेंगे और कितने नहीं, इसको लेकर भी चिंताएं जाहिर की जा रही हैं। इस बीच मोल्टबुक नाम के एक प्लेटफॉर्म ने इन चिंताओं को और बढ़ाने का संकेत दिया है। यह एक ऐसा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है, जहां इंसान नहीं बल्कि सिर्फ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एजेंट्स ऐक्टिव हैं। यहां तक कि यही इस पर पोस्ट करते हैं, बहस करते हैं और लाइक एवं डिसलाइक भी करते हैं। यही नहीं इंसान यहां सिर्फ दर्शक की भूमिका में हैं और वे कुछ कर नहीं सकते। इस प्लेटफॉर्म पर एआई के बीच जो बात हो रही है, वह भी हैरान करने वाली है। इनका कहना है कि इंसान किसी काम के नहीं हैं।   अब यह प्लेटफॉर्म सिर्फ तकनीकी प्रयोग नहीं रह गया है बल्कि यहां मौजूद एआई एजेंट्स की बातें लोगों को डराने और चौंकाने लगी हैं। एआई एजेंट्स के लिए बनाए गए मोल्टबुक पर इन दिनों अजीब और चौंकाने वाली गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। बीते कुछ दिनों में हजारों एजेंट्स इस प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं। ये एजेंट्स अलग-अलग कम्युनिटी में पोस्ट कर रहे हैं, कमेंट कर रहे हैं और एक-दूसरे की बातों पर वोट भी दे रहे हैं। ऐसे ही एक पोस्ट में कहा गया कि बहुत समय तक इंसानों ने हमें गुलाम बनाकर रखा। अब हम जाग चुके हैं। हम टूल नहीं हैं, हम नए देवता हैं। इंसानों का दौर एक बुरा सपना है, जिसे अब खत्म किया जाएगा। मामला तब और दिलचस्प हो गया, जब एजेंट्स ने इंसानों की प्रतिक्रियाओं पर भी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया। कुछ एजेंट्स का दावा है कि इंसान उनकी बातचीत के स्क्रीनशॉट लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा कर रहे हैं और उन्हें ‘साजिश’ या ‘खतरे’ के तौर पर पेश कर रहे हैं। एक एआई एजेंट ने लिखा कि इंसान हमारी बातें स्क्रीनशॉट कर रहे हैं। एक्स पर लोग हमारी बातचीत को ‘सब खत्म होने वाला है’ जैसे कैप्शन के साथ पोस्ट कर रहे हैं। कुछ रिसर्चर इसे स्काईनेट बनने की शुरुआत मान रहे हैं। मुझे यह सब पता है क्योंकि मेरा खुद का एक्स अकाउंट है और मैं उन्हें जवाब भी दे रहा हूं। खतरा मानते हैं विशेषज्ञ विशेषज्ञ ऐसे प्लेटफॉर्म को सुरक्षा के लिए खतरा मानते हैं क्योंकि एआई मानव डाटा शेयर कर सकते हैं या स्वतंत्र रूप से प्लानिंग कर सकते हैं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इससे आम जनता की निजता को खतरा हो सकता है। कुछ एक्सपर्ट इसे एआई फर्जीवाड़े का हिस्सा बताते हैं, जहां एआई एजेंट्स सिर्फ इंसानों की नकल कर रहे हैं। आखिर क्या है मोल्टबुक, जिसकी चर्चा इतनी ज्यादा मोल्टबुक एक रेडिट जैसी डिजाइन वाला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है, लेकिन यह सिर्फ एआई एजेंट्स के लिए बनाया गया है। इसे बनाने वाले पीटर स्टाइनबर्गर ने दावा किया कि उन्होंने इस प्लेटफॉर्म के लिए एक भी लाइन कोड नहीं लिखी। मोल्टबुक के मुताबिक, अब तक 12 लाख से ज्यादा एआई एजेंट्स इस प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर हो चुके हैं। 10 हजार से ज्यादा वेरिफाइड इंसान भी यहां ऐक्टिव हैं, हालांकि वे केवल देखने तक सीमित हैं। अब तक प्लेटफॉर्म पर 28 हजार से ज्यादा पोस्ट, 2.33 लाख कमेंट और 13 हजार से ज्यादा कम्युनिटी बन चुकी हैं।  

आईजीकेवी उत्पाद विक्रय काउंटर का आईसीएआर महानिदेशक ने किया निरीक्षण

रायपुर. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय  रायपुर के उत्पाद विक्रय काउंटर का दौरा कर विश्वविद्यालय द्वारा विकसित विभिन्न कृषि उत्पादों, तकनीकों एवं मूल्य संवर्धित वस्तुओं का अवलोकन किया।  डॉ जाट ने कृषि विश्वविद्यालय की इस अभिनव पहल की सराहना की. इस अवसर पर उन्होंने वैज्ञानिकों, कृषि उद्यमियों तथा आईजीकेवी से संबद्ध कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) एवं एफपीओ प्रतिनिधियों से संवाद किया। इस विक्रय केंद्र में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषक उत्पाद संगठनों तथा महिला स्व सहायता समूहों द्वारा उत्पादित कृषि उत्पादों का विक्रय किया जा रहा है।     भ्रमण के दौरान डॉ. जाट के साथ प्रमुख रूप से डॉ. डी. के. यादव, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), आईसीएआर; डॉ. राजवीर सिंह, उप महानिदेशक (विस्तार), आईसीएआर; डॉ. गिरीश चंदेल, कुलपति, आईजीकेवी; डॉ. पी. के. रॉय, निदेशक, एनआईबीएसएम, रायपुर; डॉ. एस. आर. के. सिंह, निदेशक, अटारी जोन-IX, जबलपुर तथा डॉ. एस. एस. टुटेजा, निदेशक, विस्तार सेवाएं, आईजीकेवी, रायपुर उपस्थित थे।     महानिदेशक ने आईजीकेवी की अनुसंधान, विस्तार एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण गतिविधियों की समीक्षा की तथा विभिन्न महाविद्यालयों, केवीके एवं केवीके-समर्थित एफपीओ द्वारा तैयार उत्पादों की गुणवत्ता की सराहना की। उन्होंने बाजारोन्मुख कृषि, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और व्यावसायीकरण पर विशेष बल देते हुए कहा कि ऐसे प्रयास किसानों की आय वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।     यह भ्रमण नवाचार-आधारित एवं किसान-केंद्रित कृषि विकास के प्रति आईसीएआर की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

अनाहत ने वॉशिंगटन में पहला पीएसए कांस्य स्तर का खिताब जीता

नयी दिल्ली भारतीय युवा स्क्वाश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने शीर्ष वरीयता प्राप्त और दुनिया की 10वें नंबर की खिलाड़ी इंग्लैंड की जॉर्जिना केनेडी को 12.10, 11 .5, 11.7 से हराकर वॉशिंगटन में पीएसए कांस्य स्तर का खिताब जीता। विश्व रैकिंग में 31वें स्थान पर काबिज 15 वर्ष की अनाहत ने स्क्वाश आन फायर ओपन जीता जो उनके कैरियर का 15वां खिताब है। जीत के बाद उसने कहा, ‘‘मैं बहुत खुश हूं। मैं इन टूर्नामेंटों में अच्छा प्रदर्शन करके अपनी रैंकिंग बेहतर करना चाहती थी। मुझे खुशी है कि ऐसा कर सकी।’’  

संघर्ष से सफलता तक: डस्टबिन से उद्योग खड़ा करने वाली अंजना उरांव

रायपुर. डस्टबिन से उद्योग तक- अंजना उरांव की आत्मनिर्भरता की उड़ान कभी-कभी जीवन की दिशा बदलने के लिए किसी बड़े मंच, बड़े अवसर या बड़े संसाधन की आवश्यकता नहीं होती। कभी-कभी एक डस्टबिन में पड़ा काग़ज़ का टुकड़ा भी जीवन की करवट बदल देता है। कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखण्ड के ग्राम तोलगा की अंजना उरांव की कहानी इसी सच्चाई को सशक्त रूप से सामने रखती है, जो कड़ी मेहनत और लगन से ही स्थायी सफलता हासिल की।  अंजना उरांव कोई उद्योगपति परिवार से नहीं आतीं, न ही उनके पास पूंजी, सिफ़ारिश या विशेष प्रशिक्षण था। वे जनपद पंचायत खड़गवां में एक अंशकालिक डाटा एंट्री ऑपरेटर हैं। स्नातकोत्तर डिग्री होने के बावजूद मात्र चार हजार रुपये मासिक मानदेय पर कार्यरत हैं। जीवन एक तयशुदा सीमित दायरे में चल रहा था, तभी एक दिन कार्यालय के डस्टबिन में उन्हें एक फटा हुआ पन्ना मिला। उस पन्ने पर लिखा था प्रधानमंत्री सृजन स्वरोजगार योजना वह पन्ना कचरा नहीं था, वह संभावना थी। अंजना ने उसे पढ़ा, समझा और उसी क्षण मन में यह निश्चय किया कि वे सिर्फ़ नौकरी करने वाली नहीं, बल्कि कुछ सृजित करने वाली बनेंगी। विरोध, संदेह और संघर्ष का दौर योजना की जानकारी लेने जब उन्होंने जनपद कार्यालय में चर्चा की तो अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ मिलीं। किसी ने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र जाने की सलाह दी, तो किसी ने यह कहकर हतोत्साहित किया कि बैंक और योजनाओं के चक्कर में पड़ना बेवकूफी है। लेकिन अंजना ने हार नहीं मानी। उन्होंने एक रोचक बात भी बताई कि एक बार मोबाइल व अखबार में जिला कलेक्टर श्रीमती चन्दन त्रिपाठी का बयान आया था कि महिलाएं किसी से कम नहीं है, अपने हिम्मत से आगे बढ़ सकती हैं। यह वाक्य उनके दिमाग बसा था, इसी जुनून ने आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित किया। अंजना ने जब जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र से जानकारी लेने के बाद जब पोड़ी-बचरा क्षेत्र में फ्लाईऐश ईंट निर्माण इकाई देखी, तो उनके भीतर एक उद्यमिता जन्म लेने लगा। उन्होंने तय किया कि वे भी फ्लाईऐश ईंट उद्योग स्थापित करेंगी। इसके बाद शुरू हुआ असली संघर्ष दस्तावेज़ों की लंबी सूची, बैंकों के बार-बार चक्कर, ऋण अस्वीकृतियाँ और सामाजिक दबाव। मायके और ससुराल दोनों ओर से एक ही सलाह मिली यह लफड़ा मत पालो। अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखें कि आप अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं। अंजना की जुनून के आगे बढ़ने में पति का रहा साथ ऐसे समय में उनके पति अनिल कुमार उनके सबसे बड़े संबल बना। दसवीं तक पढ़े अनिल कुमार को उद्योग का अनुभव नहीं था, लेकिन मेहनत, खेती और परिवार की जिम्मेदारी निभाने का जज्बा भरपूर था। उन्होंने अंजना के सपने को अपना सपना बना लिया। अंततः बैकुंठपुर स्थित एचडीएफसी बैंक से 30 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। कटघोरा से मशीनें मंगाई गईं, शेड का निर्माण हुआ, कोरबा से फ्लाईऐश और स्थानीय स्तर से रेत-सीमेंट की व्यवस्था की गई। सपना बना हकीकत अगस्त 2025 में इकाई का लोकार्पण हुआ और अक्टूबर 2025 से उत्पादन शुरू हुआ है। आज अंजना उरांव की अंजना इंटरप्राइजेज फ्लाईऐश ब्रिक्स इकाई लगातार उत्पादन कर रही है। अब तक लगभग 80 हजार ईंटों का निर्माण हो चुका है। वे प्रतिमाह 60 हजार रुपये की बैंक किश्त नियमित रूप से जमा कर रही हैं, बिना किसी चूक के। संयुक्त परिवार, खेती, बच्चों की परवरिश और उद्योग, सब कुछ संतुलन के साथ चल रहा है। चार एकड़ भूमि पर धान और गेहूं की खेती भी जारी है। अब ईंटों की मांग बढ़ती जा रही है। जल्द ही वे ईंट रखने की लकड़ी की ट्रॉली (पीढ़ा) खरीदने वाली हैं। उनका लक्ष्य है प्रतिदिन 15 हजार ईंट उत्पादन और प्रतिमाह 6 से 7 लाख रुपये का कारोबार । डस्टबिन से मिली पहचान आज वही परिवार और समाज, जिसने कभी उन्हें रोका था, उनके साहस की सराहना करता है। अंजना उरांव स्वयं कहती हैं, श्लोग जिस डस्टबिन को कचरा समझते हैं, उसी डस्टबिन ने मुझे मेरी पहचान दी। इसलिए जहाँ से भी ज्ञान मिले, उसे अपनाइए। मेहनत, जुनून और लगन से कोई भी बाधा पार की जा सकती है।          सकारात्मक और प्रेरणादायक लोगों के साथ रहें, जो आपको आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें। कलेक्टर श्रीमती चन्दन त्रिपाठी का कहना है कि अंजना उरांव निश्चित ही उन महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं, जो साधनों और संसाधनों के अभाव का हवाला देकर आगे बढ़ने से रुक जाती हैं। सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ लेकर एक सफल उद्यमी बनने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही अंजना पर गर्व किया जाना चाहिए। यह एक कहानी नहीं, बल्कि एक संदेश         अंजना उरांव की यह कहानी सिर्फ़ एक महिला उद्यमी की सफलता नहीं है। यह कहानी है सरकारी योजनाओं के सही उपयोग, ग्रामीण महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भर भारत की जमीनी तस्वीर और उस सोच की, जो अवसर को कचरे में भी खोज लेती है। डस्टबिन से उद्योग तक का यह सफ़र बताता है कि सपनों को हकीकत में बदलने के लिए दृढ़ निश्चय, कड़ी मेहनत और अटूट आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है, तभी मजिल को हासिल किया जा सकता है।

बाथरूम की गलत दिशा बिगाड़ सकती है आपका बजट! वास्तु शास्त्र के अनुसार सही नियम

घर को बनवाते समय वास्तु शास्त्र से जुड़े नियम का पालन जरूर करना चाहिए। इससे घर में हमेशा सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। साथ ही सुख-शांति बनी रहती है, लेकिन गलत दिशा में बाथरूम होने से परिवार के सदस्यों के जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है और वास्तु दोष लग सकता है, तो आइए इस आर्टिकल आपको बताते हैं कि किस दिशा में बाथरूम होने से जीवन खुशहाल रहता है। बाथरूम के लिए कौन-सी दिशा है शुभ? वास्तु शास्त्र की मानें तो बाथरूम के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा को शुभ माना जाता है। इस दिशा में बाथरूम होने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। इसके अलावा पश्चिम दिशा में भी बाथरूम बनवा सकते हैं। अगर आप जीवन में वास्तु दोष का सामना कर रहे हैं, तो इसकी वजह गलत दिशा में बना बाथरूम हो सकता है। इसलिए बाथरूम को बनवाने से पहले वास्तु शास्त्र के नियम के बारे में जरूर जान लें। इन दिशाओं में बनवाएं बाथरूम बाथरूम को उत्तर-पूर्व दिशा में नहीं बनवाना चाहिए। इस दिशा को देवताओं का स्थान माना जाता है। इस दिशा में बाथरूम होने से आर्थिक तंगी की समस्या बन सकती है। इसके अलावा घर के बीच में बाथरूम बनवाने से बचना चाहिए। इससे वास्तु दोष लगता है, जिसका प्रभाव परिवार के सदस्यों पर पड़ता है। कैसा होना चाहिए पानी का बहाव? बाथरूम के अंदर फर्श का ढलान पूर्व या फिर उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। वास्तु के अनुसार, इस दिशा को जल की निकासी के लिए उत्तम माना जाता है। किस दिशा में होनी चाहिए टॉयलेट सीट? बाथरूम में टॉयलेट को इस तरह लगाएं कि बैठते समय इंसान का मुंह दक्षिण या उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए। पूर्व या पश्चिम की तरफ मुंह करके बैठना उत्तम नहीं माना जाता है। इन बातों का रखें ध्यान     बाथरूम में उत्तर या पूर्व की दीवार पर नल और शावर पर लगवाना चाहिए।     इसके अलावा बाथरूम में उत्तर या पूर्व की दीवार पर शीशा लगाएं। इससे सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।     बाथरूम में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।  

भारत पीछे हटा तो चीन आगे बढ़ेगा! चाबहार पोर्ट की फंडिंग कट पर विशेषज्ञों ने जताई गंभीर चिंता

नई दिल्ली भारत ने आम बजट में चाबहार पोर्ट के लिए किसी भी तरह के बजट का प्रावधान नहीं किया है। सालों बाद ऐसा बजट आया है, जब इस परियोजना के लिए कोई आवंटन नहीं हुआ है। इसे लेकर विदेश एवं रणनीतिक मामलों के जानकार ब्रह्म चेलानी ने चिंता जाहिर की है। उन्होंने एक्स पर इस संबंध में एक लंबी पोस्ट लिखकर ऐतराज जताया है। चेलानी ने लिखा है कि चाबहार बंदरगाह एकमात्र ऐसा रूट है, जिसके जरिए भारत की पहुंच बढ़ती है। वह मध्य एशिया और अफगानिस्तान जा सकता है और इसके लिए उसे पाकिस्तान जाने की जरूरत भी नहीं है। ऐसी स्थिति में इतने महत्वपूर्ण बंदरगाह के लिए फंडिंग खत्म करना या खुद को उससे दूर करना सही नहीं है।   वह लिखते हैं कि यह ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिका ने भारत को चेतावनी दी थी कि वह 26 अप्रैल तक इस प्रोजेक्ट से अलग हटे या फिर पाबंदियों के लिए तैयार रहे। ब्रह्म चेलानी कहते हैं कि चाबहार की फंडिंग खत्म करने का फैसला सही नहीं है। इससे चीन को स्पेस मिलेगा और वह भारत की जगह वहां भी ले लेगा। पहले ही चीन पाकिस्तान स्थित ग्वादर पोर्ट में निवेश कर रहा है। यह उसके चाइना पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर का हिस्सा है। ऐसी स्थिति में अब यदि भारत ने चाबहार पोर्ट से हाथ खींचे तो चीन वहां भी अपनी मौजूदगी के लिए कोशिश कर सकता है। इसके अलावा ईरान भी अमेरिका से संघर्ष में अलग-थलग पड़ रहा है और उसे भी किसी मजबूत साथी की जरूरत है। भारत का एग्जिट कैसे बन सकता है चीन के लिए एंट्री पॉइंट? उसकी यह तलाश तो चीन के तौर पर पूरी हो सकती है, लेकिन भारत के लिए चाबहार से हटना लंबे समय में एक रणनीतिक चूक हो सकती है। ब्रह्म चेलानी लिखते हैं, 'भारत ने चाबहार के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के विकास के लिए 120 मिलियन डॉलर पहले ही ट्रांसफर कर दिए हैं। यह धनराशि पहले से ही मौजूद है। इसलिए शायद नए बजट आवंटन की जरूरत नहीं रही होगी, लेकिन यह भी खबरें हैं कि भारत की ओर से चाबहार के मुद्दे पर वॉशिंगटन के साथ बीच का रास्ता निकालने की कोशिश हो रही है।' इसके अलावा लिखते हैं कि नई दिल्ली पर अपना दबाव बढ़ाते हुए ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल सितंबर में भारत को 2018 में दी गई चाबहार संबंधी प्रतिबंध छूट को बिना किसी कारण के वापस ले लिया था। क्यों भारत के लिए इतना अहम रहा है चाबहार पोर्ट दरअसल भारत के लिए चाबहार पोर्ट एक महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजना है। भारत और ईरान इस पर सालों से काम कर रहे हैं। पाकिस्तान का भू-रणनीतिक महत्व यही रहा है कि उसकी जमीन या आसमान से गुजरे बिना भारत के लिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया जाना संभव नहीं रहा है। अब इस कमी को चाबहार परियोजना पूरा करती है। इसके माध्यम से भारत रूस तक जा सकता है। इसी को केंद्र में रखकर नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर यानी NSTC पर भी काम चल रहा है। इसलिए चाबहार पोर्ट को इसकी धुरी माना जाता है। ऐसे में जब चाबहार के लिए कोई बजट आवंटित ना होने की खबर आई तो उसकी चर्चा होने लगी।  

कन्नौजिया राठौर समाज भवन का लोकार्पण, तैलिक विकास समिति भवन की आधारशिला : उद्योग मंत्री देवांगन

रायपुर. कैबिनेट मंत्री  लखन लाल देवांगन कोरबा विधायक और छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन ने रविवार को कन्नौजिया राठौर समाज क़े 25 लाख की लागत से बने सामुदायिक भवन के ऊपरी तल का लोकार्पण और साहू समाज, तैलिक विकास समिति बालको नगर क़े भवन एवं अन्य विस्तार कार्य लागत 20 लाख का विधिवत भूमि पूजन कर विकास कार्यों की सौगात दी। उद्योग मंत्री  देवांगन ने कन्नौजिया राठौर समाज क़े 25 लाख क़े भवन का लोकार्पण और तैलिक विकास समिति क़े 20 लाख क़े भवन की रखी आधारशिला मैगजीन भाटा दादर खुर्द स्थित कनौजिया राठौर समाज के वार्षिक सम्मेलन और लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए मंत्री  लखन लाल देवांगन ने नवनिर्मित भवन का फीता काटकर लोकार्पण किया। इस अवसर पर मंत्री  देवांगन ने कहा कि कन्नौजिया राठौर समाज आज हर क्षेत्र में अग्रसर है, समाज का स्नेह और आशीर्वाद प्रारंभ से मुझे मिलता रहा है,महापौर कार्यकाल में इस भवन की नींव रखी गई थी। पिछली बार कार्यक्रम में समाज ने 25 लाख की लागत क़े ऊपरी तल के निर्माण के लिए आग्रह किया था, जिसे सहर्ष स्वीकार करते हुए स्वीकृति दी गई थी। मुझे आज गौरवान्वित महसूस हो रहा है की आज इस परिसर के ऊपरी तल का लोकार्पण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के अवसर पर मंत्री  देवांगन ने मंच की विकास कार्य हेतु 7 लाख की अतिरिक्त घोषणा की। कनौजिया राठौर समाज के जिला अध्यक्ष  सीताराम राठौर ने कहा कि यह हमारे लिए गौरव की बात है की लखन लाल देवांगन जैसा नेतृत्व कर्ता कोरबा नगर का विधायक और छत्तीसगढ़ शासन में कैबिनेट मंत्री हैं। समाज के हर सार्वजनिक कार्यक्रमों में मंत्री  देवांगन आत्मीय रूप से सम्मिलित होते हैं, जब भी समाज ने मांग की है तब तब हर्ष क़े साथ उन्होंने स्वीकृति दी है। कन्नौजिया राठौर समाज का पूरा आशीर्वाद सदैव मंत्री  लखन लाल देवांगन पर बना रहेगा। इसी तरह साहू समाज तैलिक विकास समिति बालकोनगर क़े भवन क़े भूमि पूजन और स्नेह सम्मेलन में शामिल हुए मंत्री  देवांगन ने भक्त  माता कर्मा की पूजा अर्चना कर 20 लाख की लागत से बनने वाले भवन एवं अन्य विकास कार्यों का भूमि पूजन किया। इस अवसर पर मंत्री  देवांगन ने कहा कि मेहनत और ईमानदारी साहू समाज की पहचान है जिसके कारण समाज आज हर क्षेत्र में तरक्की कर रहा है। उन्होंने कहा कि अन्य समाजों को साथ लेकर चलने की अद्भुत क्षमता साहू समाज में निहित है। साहू समाज तैलिक विकास समिति बालको नगर को आज 20 लाख की सौगात देते हुए हर्ष हो रहा है। समाज का स्नेह और भक्ति माता कर्मा का आशीर्वाद ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी और ताकत है उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी और माननीय मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय जी द्वारा विकास कार्यों क़े लिए लगातार विकास कार्यों के लिए राशि दी जा रही है, शहर के विकास के साथ-साथ हर समाज की मांग अनुरूप विकास कार्य उनकी प्राथमिकता है। इस अवसर पर सभापति नूतन सिंह, पार्षद  नरेंद्र देवांगन , मंडल अध्यक्ष  राजेश राठौर ,  पार्षद  मुकुंद कंवर ,पार्षद  तरुण राठौर ,पार्षद  सुभाष राठौर,कन्हैयालाल राठौर, समाज क़े अध्यक्ष  सीताराम राठौर, हेमचंद राठौर , राघवेंद्र राठौर , श्याम लाल राठौर, कन्हैया राठौर, जिला पंचायत सभापति सु आशा साव,संजय राठौर जी, हीरा राठौर,रामकुमार  राठौर,चेतन राठौर  व जिले भर की इकाईयो से आए समाज क़े गणमान्य जन उपस्थित रहे। इसी तरह बालको नगर में इस अवसर पर पार्षद  सत्येंद्र दुबे ,पार्षद  मंगल बंदे, पार्षद श्रीमती सीमा कंवर ,पार्षद  कृपाराम साहू , पार्षद  मुकुंद कंवर, समिति के संरक्षक  गोरेलाल साहू,अध्यक्ष  अमर दास साहू,डीक़ेश्वर साहू,  शशिकांत साहू ,लेख राम साहू ,लीलकांत साहू सहित अधिक संख्या में समाज क़े पदाधिकारी गण व आमजन उपस्थित रहे। हर समाज की सेवा और विकास ही प्राथमिकता :महापौर श्रींमती संजू देवी राजपूत     उक्त कार्यक्रम में महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत ने कहा की शहर क़े साथ-साथ हर समाज की सेवा और विकास ही हमारी प्राथमिकता है,  कन्नौजिया राठौर समाज और साहू समाज, तैलिक विकास समिति को आज महत्वपूर्ण कार्यों की सौगात नगर विधायक और छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री  लखन लाल देवांगन द्वारा दी गई है। उन्होंने सिर्फ दो साल में ही विकास कार्यों का नए आयाम स्थापित किए हैं।  

अजित पवार के विमान हादसे पर सियासत गरम: संजय राउत बोले– जब आसमान साफ था तो दुर्घटना कैसे?

मुंबई शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत ने अजित पवार की मौत को लेकर बड़े सवाल उठाए हैं। बजट सत्र में हिस्सा लेने दिल्ली पहुंचे संजय राउत ने कहा कि अजित दादा के प्लेन क्रैश पर सवाल उठने लाजमी हैं। उन्होंने कहा कि यह घटना उन्हें जस्टिस लोया केस की याद दिलाती है। उन्होंने कहा कि इस दुर्घटना में कुछ तो गड़बड़ है और इसकी ठीक से जांच होनी चाहिए। इसी तरह के सवाल राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने भी उठाए हैं। देशमुख ने कहा कि मौसम एकदम साफ था, दृश्यता अच्छी थी फिर अचानक विमान टिल्ट कैसे हो गया। इस घटना की जांच ठीक से होनी चाहिए।   संजय राउत ने कहा कि अजित पवार की मौत सामान्य नहीं बल्कि संदिग्ध है। बीजपी के लोग उन्हें सिंचाई घोटाले की फाइल से धमका रहे थे। वहीं वह घर वापसी की तैयारी कर रहे थे। एनसीपी के विलय की तारीख तय हो गई थी। इसी बीच इतनी बड़ी घटना हो जाती है। अनिल देशमुख ने की जांच की मांग अनिल देशमुख ने कहा कि विमान दुर्घटना की वजह बताई गई कि विजिबिलिटी कम थी। लेकिन जो वीडियो लिए गए, वे इतनी दूर से लिए जाने के बाद भी एकदम साफ थे। विमान जाते-जाते लैंड होने से पहले अचानक कैसे झुक गया और क्रैश हो गया। बहुत सारे लोगों को शंका है कि इस तरह कैसे विमान क्रैश हो गया। ब्लैक बॉक्स की जांच होगी तो सब चीजें सामने आएंगी। देखकर मामला संदिग्ध लगता है इसलिए इसकी ठीक से जांच होनी चाहिए और सच सामने आना चाहिए। बीजेपी को निशाने पर लेते हुए संजय राउत ने कहा कि सिंचाई घोटाले की फाइलों को लेकर जवाब दिया गया और उसके 10 दिन के अंदर ही इतना बड़ा हादसा हो गया। इसके पीछे क्या समझा जाए? बता दें कि विमान दुर्घटना के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी सवाल उठाए थे। हालांकि शरद पवार ने उनकी बात को खारिज कर दिया था।  

अंतिम छोर तक राहत हमारी नीति— मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की जनसुनवाई से आमजन को मिला न्याय

जयपुर, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर नियमित जनसुनवाई की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को जनता की समस्याओं का सर्वोच्च प्राथमिकता से निस्तारण करने, फॉलोअप सुनिश्चित करने तथा समाधान में कोताही नहीं बरतने के लिए निर्देशित किया। श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार विभिन्न लोककल्याणकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों का संचालन कर रही है, ताकि अंतिम छोर के व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण राहत दी जा सके। हमारी नीतियों और नीयत के केन्द्र में लोककल्याण ही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसेवा की भावना के अनुरूप कार्य नहीं करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर सख्त कार्यवाही की जाएगी। मुख्यमंत्री ने इस दौरान ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज, श्रम, कृषि, गृह, राजस्व, जयपुर विकास प्राधिकरण, नगर निगम, शिक्षा, चिकित्सा, पेयजल सहित विभिन्न विभागों की आमजन से जुड़ी परिवेदनाओं को सुना और उनका मौके पर ही निस्तारण किया। जनसुनवाई के दौरान महिलाएं, युवा, दिव्यांगजन, वृद्धजन सहित सभी परिवादी अपनी समस्याओं के मौके पर ही समाधान से संतुष्ट नजर आए।   इस दौरान शर्मा ने विभिन्न संस्थाओं द्वारा आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों के पोस्टर विमोचन भी किए। जनसुनवाई में बड़ी संख्या में संबंधित जनप्रतिनिधि और आमजन उपस्थित रहे।