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वाहन रैली और कृषि रथ के माध्यम से किसानों को किया जा रहा है जागरूक

भोपाल राज्य शासन द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसके लिए किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। प्रदेश में वाहन रैली के माध्यम से किसानों को खेती की नवीन तकनीकों को अपनाकर फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए जागरूक किया गया। इसके तहत विभिन्न जिलों में वाहन रैली आयोजित की गईं। धार जिला मुख्यालय पर विधायक श्रीमती नीना वर्मा एवं कलेक्टर श्री प्रिंयक मिश्रा द्वारा हरी झण्डी दिखाकर किसान जागरूकता वाहन रैली को रवाना किया गया। जिले में किसानों के लिए कृषि एवं कृषि से संबंधित विभागों की योजनाओं का प्रचार-प्रसार कृषि रथ के माध्यम से निंरतर प्रत्येक ग्राम पंचायत में किया जा रहा है। कृषक कल्याण वर्ष के प्रचार-प्रसार के लिए कृषि रथ के मुख्य आधार स्तंभ:- जैविक खेती एवं प्राकृतिक कृषि क्षेत्रों का विस्तार, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का प्रचार-प्रसार, एकीकृत पोषक तत्व, कीट एवं रोग प्रबंधन, कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के उपाय, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना, विभागीय कृषि योजनाओं का प्रचार-प्रसार, प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना, ई-विकास प्रणाली अंतर्गत ई-टोकन उर्वरक वितरण व्यवस्था, पराली प्रबंधन आदि विभागीय योजनाओं से जागरूक किया जा रहा है। सिवनी जिला मुख्यालय पर किसानों को जागरूक करने के लिए मोटरसाइकिल रैली का आयोजन किया गया। रैली का उद्देश्य किसानों में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें शासन की विभिन्न कृषक हितैषी योजनाओं से जोड़ना रहा। मोटरसाइकिल रैली में सिवनी विधायक श्री दिनेश राय ने स्वयं मोटरसाइकिल चलाकर सहभागिता की और किसानों का उत्साहवर्धन किया। बैतूल जिले में किसानों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से जिला स्तरीय वाहन रैली का आयोजन किया गया। रैली का शुभारंभ किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर अधिकारियों ने किसानों को शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, नवाचारों और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी देने का संदेश दिया। रैली में मोटरसाइकिल, चार पहिया वाहन एवं विभागीय वाहनों के माध्यम से आकर्षक बैनर-पोस्टर लगाकर किसान कल्याण से जुड़े संदेश प्रसारित किए गए। इसी तरह पांढुर्णा जिले में भी किसान मोटरसाइकिल रैली का आयोजन किया गया।  

हर मुश्किल में शांत रहना सीख लिया तो कामयाबी आपसे दूर नहीं

किसी भी परिस्थिति में कंट्रोल करना जरूरी है। पर ये कंट्रोल दूसरों पर ना होकर खुद पर होना जरूरी है। अपने आप को और दिमाग को इस तरह से ट्रेनिंग दे कि मुश्किल, विपरीत और बिल्कुल अलग तरह की सिचुएशन में कैसे खुद को शांत रखें। क्योंकि ज्यादातर गलतियां हम तभी करते हैं जब हमारी सोच, फिजिकल एक्टीविटी और हमारे शब्द जल्दी से रिएक्ट कर देते हैं। जब अपने दिमाग पर हमारा कंट्रोल होगा तो इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना आसान होगा। जानें कैसे विपरीत सिचुएशन में खुद को कूल रखें। खुद पर कंट्रोल खोने से बचाना जब भी सामने वाला आपको प्रोवोक करे, नीचा दिखाए तो खुद से यहीं कहना है कि मेरा रिएक्शन मेरी ताकत है और मैं इसे ऐसे ही नहीं दूंगा। क्योंकि गुस्से में खुद पर कंट्रोल खो देने से पावर भी चली जाती है। धीरे से रिएक्ट करें जब भी बहुत ही गंभीर, डिप्रेशन और स्ट्रेसफुल सिचुएशन आए तो तीन बार गहरी सांस लें और सोचें क्या मेरा इस जगह पर रिस्पांड करना जरूरी है। जो इंसान शांत रहते हैं वो अपनी प्रतिक्रिया देने के मामले में जल्दीबाजी नहीं दिखाते। और, जो लोग जल्दी प्रतिक्रिया देते हैं अक्सर वो कमजोर ही होती है। सिचुएशन नहीं माइंड पर कंट्रोल करें अक्सर लोग सिचुएशन को कंट्रोल करने में लग जाते हैं लेकिन सिचुएशन नहीं खुद के माइंड पर कंट्रोल करने की जरूरत होती है। मेंटली स्ट्रांग लोगों से इन बातों को सीखें। जैसे ही कोई निगेटिव सिचुएशन आए तो सोचें कि हर समस्या का समाधान होता है। इससे पहले भी कई मुश्किल परिस्थितियां संभाली हैं। इसे भी संभाल लेंगे और ज्यादा सोचने से नहीं बल्कि अपने ऐक्शन में क्लियरिटी लाएं। जिससे प्रॉब्लम सॉल्व की जा सके। बॉडी लैंग्वेज पर कंट्रोल जब भी निगेटिव सिचुएशन आती है तो अपने बॉडी लैंग्वेज पर भी कंट्रोल करें। स्पाइन को सीधा करें, चेस्ट को ओपन करें और सांसों को धीरे से लें। ऐसा करने से बॉडी लैंग्वेज कंट्रोल में दिखेगी। निगेटिव विचारों को रोकें मन में जैसे ही निगेटिव विचार आएं तो खुद से बात करें कि क्या जो मैं सोच रहा हूं वो सही है या केवल मन का भ्रम। अपने विचारों को लिखें, ऐसा करने से ज्यादा क्लियर होगा माइंड।  

उपेंद्र कुशवाहा का ‘फैमिली पॉलिटिक्स प्लान’? घर की बहू साक्षी मिश्रा भी क्या संभालेंगी मोर्चा

पटना बिहार विधानसभा चुनाव तक परिवार को राजनीति से दूर रखने वाले समाजवादी नेता और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा अब बेलाग परिवारवादी हैं। राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की विधायक बीवी स्नेहलता कुशवाहा और मंत्री बेटे दीपक प्रकाश के बाद उनकी बहू साक्षी मिश्रा कुशवाहा भी जनता के बीच नजर आ रही हैं। कोई चुनाव और मौका फिलहाल तो नहीं दिख रहा है, लेकिन साक्षी मिश्रा कुशवाहा के राजनीति में उतरने की अटकलें तेज हो गई हैं। चर्चा है कि कुशवाहा परिवार के सुरक्षित राजनीतिक भविष्य के लिए बीवी और बेटे को राजनीति में उतारने के लिए उपेंद्र कुशवाहा को साक्षी मिश्रा ने ही मनाया था।   कुशवाहा परिवार से बीवी और बेटा राजनीति में लॉन्च तो हो गए हैं, लेकिन विधानसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) को बंपर सीट मिलने के बाद उनकी भावी राजनीति पर चर्चा शुरू है। एक तरफ जहां कुशवाहा का सांसद कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो रहा है, तो दूसरी तरफ दीपक प्रकाश को मंत्री पद पर बने रहने के लिए 20 मई से पहले विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना होगा। नई चर्चा है कि बीजेपी विधानसभा के बदले सीट-गणित के दम पर कुशवाहा पर खुद की राज्यसभा या दीपक की विधान परिषद की सीट में से कोई एक चुनने का दबाव डाल सकती है। पार्टी दफ्तर के कार्यक्रम से आम लोगों के मंच तक नजर आ रही हैं साक्षी मिश्रा साक्षी मिश्रा कुशवाहा पहली बार सास स्नेहलता के चुनाव प्रचार के दौरान लोगों की नजर में आईं, जब वो सासाराम सीट पर उनके लिए वोट मांगने मैदान में उतरीं। दीपक प्रकाश के मंत्री बनने के बाद वो उनके साथ सार्वजनिक सभाओं और सामाजिक कार्यों में दिख रही हैं। मसलन, जब दही-चूड़ा के मौके पर कुशवाहा ने अपने गांव में भोज रखा, तो वहां साक्षी ना सिर्फ खाना परसोते दिखीं, बल्कि मंच पर माला और माइक के साथ भी सहज रहीं। पार्टी दफ्तर में लाल बहादुर शास्त्री और ज्योतिबा फुले की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में वो कार्यकर्ताओं के साथ शामिल रहीं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बड़े नेता इंद्रेश कुमार जब उपेंद्र कुशवाहा के आवास गए थे, तब बातचीत के दौरान साक्षी सक्रिय दिखी थीं। उत्तर प्रदेश के एक रिटायर्ड अफसर की बेटी साक्षी और दीपक की लव मैरिज हुई है। दोनों इस समय राज्य के सबसे ज्यादा चर्चित राजनीतिक कपल हैं। बड़े नेताओं के बच्चों में चिराग पासवान और निशांत कुमार ने अभी तक शादी नहीं की है, जबकि तेजस्वी यादव की पत्नी राजश्री यादव घर से बाहर राजनीतिक कदम कम ही रखती हैं। ऐसे में ‘जनेऊधारी ब्राह्मण की बेटी और चंद्रगुप्त मौर्य के वंशज की पतोहू’ साक्षी मिश्रा कुशवाहा अगर राजनीति में आती हैं, तो बिहार की परिवारवादी राजनीति में नया अध्याय शुरू हो सकता है।

पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री पटेल ने माँ नर्मदा का किया पूजन

अनूपपुर  मध्यप्रदेश शासन के पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  लखन पटेल ने पवित्र नगरी अमरकंटक स्थित माँ नर्मदा मंदिर में माँ नर्मदा का पूजन-अर्चन किया। उन्होंने माँ नर्मदा से प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की। इस दौरान उप संचालक पशु पालन डॉ बी बी चौधरी, जनप्रतिनिधि, पत्रकार, मां नर्मदा मंदिर के पुजारी तथा श्रद्धालु उपस्थित रहे।

सबका सशक्तिकरण, समग्र विकास: केंद्रीय बजट 2026 पर डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का दृष्टिकोण

जयपुर,  प्रदेश के कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने सोमवार को सवाई माधोपुर जिला कलक्ट्रेट सभागार में केंद्रीय बजट 2026 के संबंध में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गरीब, युवा, अन्नदाता, नारी, मध्यम वर्ग और उद्यमी के लिए स्पष्ट दिशा एवं मजबूत आधार प्रस्तुत करता है। कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार का यह बजट रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के सिद्धांत पर आधारित है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल सामाजिक न्याय तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक भागीदारी, तकनीकी नेतृत्व और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की भूमिका को मजबूत करने वाला बजट है। डॉ. मीणा ने विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिलाएं अब केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि भारत की ‘ग्रोथ इंजन’ हैं। महिला शिक्षा और सुरक्षा के लिए बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के सभी 41 जिलों में महिला छात्रावास की स्थापना की जाएगी। बजट में महिलाओं की भूमिका को सामाजिक योजनाओं से आगे बढ़ाकर आर्थिक निर्णय, उद्यमिता, तकनीकी क्षेत्र और वैश्विक प्रतिस्पर्धा तक विस्तारित किया गया है। कृषि मंत्री ने कहा कि बजट में भारत स्किल इंडिया, डिजिटल स्किल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स एवं ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षित करने पर विशेष जोर दिया गया है। पर्यटन क्षेत्र में आई.आई.एम. के सहयोग से 10 हजार गाइडों के कौशल उन्नयन और खेलो इंडिया मिशन के माध्यम से अगले दशक में खेल क्षेत्र में बदलाव लाने की योजना से युवाओं को नई दिशा मिलेगी। इससे देश का युवा वर्ग भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार होगा और भारत वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की ओर अग्रसर होगा। स्वास्थ्य क्षेत्र पर चर्चा करते हुए डॉ. मीणा ने बताया कि आमजन पर चिकित्सा व्यय का बोझ कम करने के उद्देश्य से दवाओं पर लगने वाले शुल्क में कटौती की गई। वहीं कैंसर की 17 जीवन रक्षक दवाओं पर सीमा शुल्क शून्य किया गया है। मध्यम वर्ग के परिवारों को गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराने के लिए जिला स्तर पर बायोफार्मा एवं आयुष केन्द्रों की स्थापना हेतु 10 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित होंगी। उन्होंने कहा कि बजट में मध्यम वर्ग के हितों का विशेष ध्यान रखा गया है। एलआरएस के अंतर्गत अब इस वर्ग के परिवारों के बच्चों की विदेश शिक्षा सुलभ बनाने हेतु विदेश यात्रा के टूर पैकेज पर टीसीएस की दर को 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे अभिभावकों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा। डॉ. मीणा ने कहा कि बजट में कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र में प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण, सूक्ष्म सिंचाई, भंडारण एवं मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया गया है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी। किसानों की आय में वृद्धि हेतु भारत-विस्तार नाम बहुभाषीय ए.आई. टूल के माध्यम से कृषि प्रणालियों की तकनीकी जानकारी क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट से राजस्थान के टेक्सटाइल तथा हथकरघा क्षेत्र को विशेष लाभ मिलेगा, जिसके तहत भीलवाड़ा के टेक्सटाइल हब, जयपुर हैंडलूम तथा बाड़मेर-जोधपुर में रोजगार और निर्यात बढ़ेगा। महात्मा गांधी स्वरोजगार योजना के तहत खादी-हथकरघा को प्रशिक्षण, मार्केट लिंकेज तथा ब्रांडिंग के माध्यम से सशक्त किया जाएगा, जिससे बुनकरों एवं कारीगरों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट में 10 हजार करोड़ रुपये के समर्पित एमएसएमई विकास कोष से जयपुर, अलवर, भीलवाड़ा, कोटा तथा उदयपुर जैसे शहरों के छोटे उद्योगों को बड़ा बूस्ट मिलेगा। वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर तथा कनेक्टिविटी के तहत 5 लाख से अधिक आबादी वाले टियर-2 एवं टियर-3 शहरों और तीर्थ-पर्यटन स्थलों का विकास होगा। साथ ही 11 फरवरी को राज्य बजट में सवाई माधोपुर के पर्यटन को गति देने हेतु रणथम्भौर के विकास, 150 करोड़ से अधिक की अमरूद प्रसंस्करण इकाई, हवाई अड्डा विकास, लघु उद्योग, आपदा प्रबंधन परियोजनाएं, लटिया नाला सौंदर्यीकरण तथा धार्मिक-पर्यटन सर्किट की संभावनाएं शामिल होंगी। कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026 “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के संकल्प को साकार करने वाला बजट है और इसके सकारात्मक प्रभाव शीघ्र ही प्रदेश एवं जिले के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था बनकर वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर है।  

सॉइल टू सिल्क की संपूर्ण प्रक्रिया का होगा जीवंत प्रदर्शन, शुद्ध रेशमी वस्त्रों के लिए बनेगा भरोसेमंद केंद्र

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के पारंपरिक और ग्रामीण उद्योगों को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसके तहत, रेशम उद्योग के सुदृढ़ीकरण, शुद्ध रेशमी वस्त्रों की पहचान तथा आमजन को रेशम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराने के उद्देश्य से प्रदेश में ‘सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स’ की स्थापना की गई है। स्थानीय कारीगरों को उपलब्ध होगा सीधा बाजार सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स में ‘सॉइल टू सिल्क’ की समस्त विधाओं, नर्सरी विकास, शहतूत वृक्षारोपण, रेशम कीट पालन, कोया उत्पादन, धागाकरण से लेकर साड़ी एवं परिधान निर्माण तक का चरणबद्ध और व्यावहारिक प्रदर्शन किया जाएगा। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को यह समझाना है कि शुद्ध रेशम क्या होता है, उसकी गुणवत्ता कैसे पहचानी जाए और बाजार में उपलब्ध नकली या मिश्रित रेशम से कैसे भेद किया जा सकता है। यह केन्द्र न केवल प्रशिक्षण और जागरूकता का माध्यम होगा, बल्कि एक्जीबिशन, मार्केटिंग कम सेल सेंटर के रूप में भी कार्य करेगा, जहां शुद्ध रेशमी वस्त्रों और परिधानों का सीधा विक्रय किया जाएगा। इससे स्थानीय बुनकरों, कारीगरों, किसानों और स्वयं सहायता समूहों को सीधा बाजार उपलब्ध होगा। हजारों परिवारों की आजीविका होगी सुदृढ़ योगी सरकार की यह पहल आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है, जिससे रेशम उद्योग से जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका सुदृढ़ होगी और प्रदेश की पारंपरिक कला एवं विरासत को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। इस महत्वाकांक्षी केन्द्र का उद्घाटन सोमवार को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि रेशम निदेशालय परिसर में स्थापित यह सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जहां रेशम उत्पादन की पूरी श्रृंखला का प्रत्यक्ष एवं जीवंत प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यहां रेशम कीट से धागा बनने की प्रक्रिया, धागाकरण एवं वस्त्र निर्माण की संपूर्ण विधि को एक ही स्थान पर देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि पूर्व में यह स्थल अनुपयोगी अवस्था में था, जिसे विभागीय प्रयासों से आधुनिक, भव्य एवं उपयोगी स्वरूप प्रदान किया गया है। अब यह केन्द्र प्रदेश मुख्यालय पर देश-विदेश से आने वाले आगंतुकों के लिए रेशम उद्योग की पहचान का प्रमुख केन्द्र बनेगा। यहां एरी, शहतूती एवं टसर रेशम की उत्पादन प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से समझा जा सकेगा। प्रदेश में लगभग 300 से 350 मीट्रिक टन रेशम उत्पादन मंत्री सचान ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार वर्ष 2022 से प्रदेश में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 300 से 350 मीट्रिक टन रेशम उत्पादन हो रहा है, जिसे निरंतर बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों को प्रशिक्षण देकर रेशम उत्पादन से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त हों। भारत सरकार एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से रेशम उत्पादकों को अनुदान, प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं रेशम, उत्तर प्रदेश शासन, विशेष सचिव/निदेशक (रेशम), केन्द्रीय रेशम बोर्ड (भारत सरकार) के अधिकारी एवं वैज्ञानिकों सहित विभागीय एवं तकनीकी अधिकारी उपस्थित रहे।

उत्तर प्रदेश को बड़ी सौगात: जेवर एयरपोर्ट इस दिन से होगा शुरू, PM मोदी दिखा सकते हैं हरी झंडी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन इस महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए जाने की संभावना है। इसके शुरू होने के बाद यह उत्तर प्रदेश का पांचवां अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बन जाएगा। सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि एयरपोर्ट तैयार है और एयरोड्रम लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री द्वारा इस महीने एयरपोर्ट का उद्घाटन कर किया जाएगा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट एक ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट है, जिसे गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर क्षेत्र में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जा रहा है। लगभग 1,300 हेक्टेयर में फैले इस प्रोजेक्ट के पहले चरण का संचालन शुरू में सितंबर 2024 में शुरू होने वाला था और यह कई डेडलाइन चूक चुका है। निवेश व रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे बता दें कि उत्तर प्रदेश में जल्द ही सबसे अधिक 21 हवाई अड्डों वाला प्रदेश बनने की राह पर है। लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या जैसे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के बाद अब जेवर का नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी शीघ्र चालू होने वाला है। जेवर एयरपोर्ट के शुभारंभ से उत्तर प्रदेश एयर कार्गो हब के रूप में उभरेगा और निवेश व रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। जेवर एयरपोर्ट से पश्चिमी यूपी की अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार जेवर एयरपोर्ट न सिर्फ दिल्ली-एनसीआर की वैश्विक कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी नई गति देने के लिए तैयार है। यह एयरपोर्ट नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य पर काम करने वाला अत्याधुनिक एयरपोर्ट होगा, जिसमें स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिलेगा। प्रारंभिक चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की वार्षिक क्षमता वाला यह एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक आर्थिक हब का काम करेगा। यह एयरपोर्ट न केवल बुनियादी सुविधाओं को नई ऊंचाई देगा, बल्कि पश्चिमी यूपी के युवाओं के लिए रोजगार और संभावनाओं के अनगिनत द्वार खोलेगा।  

प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत पर SIT सक्रिय, पिता को तलब कर पूछताछ

जोधपुर जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच तेज कर दी गई है। सोमवार को डीसीपी वेस्ट विनीत बंसल सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एसीपी कार्यालय पहुंचे, जहां साध्वी के पिता को बुलाकर पूछताछ की गई। मीडिया से बातचीत करते हुए डीसीपी वेस्ट विनीत बंसल ने बताया कि घटना के बाद से पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर पूरी टीम गंभीरता से जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि मृतका के बैकग्राउंड, उनके पिता के बैकग्राउंड, किसी से रंजिश या दुश्मनी, मेडिकल लापरवाही सहित सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। डीसीपी ने बताया कि रविवार को एफएसएल टीम द्वारा दोबारा घटनास्थल का निरीक्षण कराया गया है और वहां से मिले अहम तथ्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। इसके साथ ही साध्वी के पिता के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स और सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जांच की जा रही है, ताकि मामले से जुड़े हर संभावित सुराग की पड़ताल की जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में फिलहाल कोई भी व्यक्ति शक के दायरे से बाहर नहीं है और किसी को भी क्लीन चिट नहीं दी गई है। पूछताछ के लिए किसी व्यक्ति को दोबारा बुलाया जाना जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। डीसीपी विनीत बंसल ने भरोसा दिलाया कि गठित एसआईटी द्वारा किसी के साथ अनावश्यक दबाव या दुर्व्यवहार नहीं किया जाएगा। प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किसी प्रकार की बाहरी या आंतरिक चोट के स्पष्ट निशान सामने नहीं आए हैं, हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। वहीं पूछताछ के बाद साध्वी के पिता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें केवल बातचीत के लिए बुलाया गया था और उन पर किसी तरह का पुलिस दबाव नहीं बनाया गया। मोबाइल फोन का पासवर्ड मांगे जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनसे अब तक कोई पासवर्ड नहीं मांगा गया है। उन्होंने बताया कि वे साध्वी के समाधि स्थल जा रहे थे, इसी दौरान पुलिस ने उनसे एक बार कार्यालय आने को कहा था। बातचीत के बाद वे समाधि स्थल के लिए रवाना हो गए।

जब से पीएम मोदी ने पद संभाला, खेलों में कभी भी बड़ी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ा: बृज भूषण शरण

नोएडा बीजेपी नेता और भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह ने प्रो रेसलिंग लीग (पीडब्ल्यूएल) 2026 को सराहा है। उन्होंने इस लीग को एक बड़ी सफलता बताते हुए खेल के लगातार विकास का श्रेय पिछले एक दशक में विकसित बेहतर स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को दिया। हरियाणा थंडर ने रविवार रात नोएडा इंडोर स्टेडियम में एक रोमांचक फाइनल में दिल्ली दंगल वॉरियर्स को 5-4 से हराकर प्रो रेसलिंग लीग (पीडब्ल्यूएल) 2026 का खिताब जीता। इस मुकाबले पर प्रतिक्रिया देते हुए बृज भूषण ने कहा कि फाइनल आखिरी तक प्रतिस्पर्धी बना रहा, जिससे यह हाल के कुश्ती इतिहास के सबसे रोमांचक मुकाबलों में से एक बन गया। उन्होंने कहा, “यह एक बहुत ही प्रभावशाली मैच था, जिसमें आखिरी पलों तक रोमांच बना रहा, क्योंकि स्कोर 4-4 से बराबरी पर था। दिल्ली के 4 प्वाइंट्स थे और हरियाणा के भी 4 ही प्वाइंट्स थे। नतीजतन, आखिरी पलों तक विजेता तय नहीं हो पाया। ज्यादातर मुकाबलों में, नतीजा जल्दी स्पष्ट हो जाता है, और कोई भी विजेता का अनुमान लगा सकता है, लेकिन इस फाइनल में, सस्पेंस आखिर तक बना रहा, जिससे यह एक बेहतरीन मुकाबला बन गया।” कुश्ती में भारत की बढ़ती ताकत पर प्रकाश डालते हुए, बृज भूषण शरण सिंह ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के भविष्य की संभावनाओं पर विश्वास जताते हुए कहा, “भारत कुश्ती में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। भविष्य में और भी बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है। सभी खेलों में, कुश्ती में भारत के लिए सर्वाधिक मेडल लाने की सबसे ज्यादा क्षमता है।” डब्ल्यूएफआई के पूर्व अध्यक्ष ने सरकार के तहत खेल की लगातार प्रगति के लिए पिछले एक दशक में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार का भी श्रेय दिया। उन्होंने कहा, “जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पद संभाला है, खेल सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार सुधार हुआ है। इस दौरान कभी भी बड़ी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ा।” हरियाणा थंडरर्स ने चैंपियनशिप ट्रॉफी के साथ 1.5 करोड़ रुपये की प्राइज मनी जीती है, जबकि रनर-अप दिल्ली दंगल वॉरियर्स को 75 लाख रुपये मिले।  

पुलवामा हमले पर सख्ती दिखी, पर पूरा पाकिस्तान बॉयकॉट क्यों नहीं? अंदर की रणनीति क्या थी

नई दिल्ली पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ आगामी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में खेलने से इनकार कर दिया है। भारत और पाकिस्तान के बीच 15 फरवरी को कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में यह मुकाबला खेला जाना था। पिछले साल दोनों टीमों के बीच यह तय हुआ था कि भारत और पाकिस्तान के सभी मुकाबले न्यूट्रल वेन्यू पर होंगे, इसके बाजवजूद अब बांग्लादेश को अपना सपोर्ट दिखाने के लिए पाकिस्तान ऐसी नौटंकी कर रहा है। बता दें, बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत में टी20 वर्ल्ड कप के मैच खेलने से इनकार कर दिया था। आईसीसी के लाख समझाने के बाजवूद बांग्लादेश नहीं माना जिस वजह से आईसीसी ने उन्हें बाहर कर स्कॉटलैंड के टूर्नामेंट में शामिल किया। आईसीसी के इस फैसले के बाद अब पाकिस्तान यह बगावत कर रहा है।   भारत के पास भी पाकिस्तान के खिलाफ मैच को बॉयकॉट करने का मौका था। पिछले साल जब पुलवामा अटैक हुआ था तो पूरे देश में आक्रोश फैला हुआ था। भारत कई तरीको से पाकिस्तान के खिलाफ बड़े फैसले ले रहा था। ऐसे में इसकी आंच क्रिकेट पर भी गिरने वाली थी। पूरे देशभर में कहा जा रहा था कि पाकिस्तान के खिलाफ भारत को क्रिकेट मैच नहीं खेलना चाहिए। मगर सरकार ने समझदारी दिखाते हुए एशिया कप में पाकिस्तान के खिलाफ खेलने का फैसला किया। भारतीय सरकार ने बीसीसीआई को पाकिस्तान के खिलाफ खेलने की मंजूरी दी। इसके कई कारण थे।     अगर भारत पाकिस्तान के खिलाफ खेलने से इनकार कर देता तो आईसीसी कई तरह की पाबंदियां लगा सकता था।     भारत का पाकिस्तान के खिलाफ ना खेलने का असर आईपीएल पर भी पड़ सकता था।     भारत को वित्तीय नुकसान भी हो सकता था।     दूसरी टीमों को भी आईसीसी भारत में द्विपक्षीय सीरीज खेलने से रोक सकता था।     आगामी आईसीसी और मल्टीनेशन इवेंट में भी भारत को इस फैसले का खामियाजा उठाना पड़ सकता था। इन्हीं सभी नुकसानों को टालने के लिए भारतीय सरकार ने बीसीसीआई को पाकिस्तान के खिलाफ खेलने की मंजूरी दी। हालांकि भारतीय टीम ने पाकिस्तान का क्रिकेट फील्ड पर कई तरह से बॉयकॉट किया। कप्तान सूर्यकुमार यादव ने सबसे पहले पाकिस्तानी कप्तान से टॉस के दौरान हाथ नहीं मिलाए। वहीं मैच खत्म होने के बाद भारतीय खिलाड़ी सीधा अपने ड्रेसिंग रूम में चले गए। इस घटना के बाद ही हैंडशेक विवाद खड़ा हुआ था। एशिया कप में भारत की फाइनल समेत तीन बार पाकिस्तान से भिड़ंत हुई थी और हर बार भारत का रुख ऐसा ही था। टीम इंडिया के खिलाड़ी पाकिस्तानी खिलाड़ियों से बात तक नहीं कर रहे थे। मगर जब पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने उन्हें उकसाया तो अभिषेक शर्मा और जसप्रीत बुमराह जैसे खिलाड़ियों ने मैदान पर ही उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया। पाकिस्तान का बॉयकॉट करने का सिलसिला यहीं नहीं थमा। भारत ने एशिया कप का खिताब जीतने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के मुखिया मोहसिन नकवी, जो एसीसी के भी अध्यक्ष हैं, उनसे ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था। मोहसिन नकवी ने काफी देर भारतीय खिलाड़ियों का इंतजार किया, मगर सूर्यकुमार यादव की टीम मैदान पर होते हुए स्टेज तक नहीं पहुंची। अंत में नकवी ट्रॉफी लेकर ही मैदान के बाहर चले गए और आज तक उन्होंने भारत को एशिया कप की ट्रॉफी नहीं सौंपी। भारत ने तो बड़ी ही समझदारी से काम लिया और पाकिस्तान का अलग तरीके से बॉयकॉट करते हुए उनके खिलाफ मैच खेला। मगर बांग्लादेश को अपना सपोर्ट दिखान के चक्कर में पाकिस्तान कुल्हाड़ी पर अपना पैर मार बैठा है। बताया जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में आईसीसी इस मुद्दे पर मीटिंग कर सकता है। आईसीसी पाकिस्तान को समझाने की कोशिश कर सकता है और उनसे भारत के खिलाफ मैच खेलने के लिए कह सकता है, क्योंकि इसी मैच से आईसीसी की सबसे ज्यादा कमाई होती है। अगर पाकिस्तान फिर भी नहीं मानता तो पाकिस्तान उन पर कई तरह की पाबंदियां लगा सकता है, इसकी वजह से पाकिस्तान क्रिकेट पूरी तरह से बर्बाद भी हो सकता है।