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बॉटलनेक से ब्रेक-थ्रू स्टेट तक, राज्यपाल ने दिखाई यूपी के विकास की तस्वीर

लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र के प्रथम दिन दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का अभिभाषण प्रदेश की बदली हुई पहचान का स्पष्ट घोषणापत्र बनकर सामने आया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने बीते वर्षों में ‘बॉटलनेक स्टेट’ की छवि से बाहर निकलकर ‘ब्रेकथ्रू स्टेट’ के रूप में सुशासन, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, आर्थिक सशक्तिकरण, कृषि विस्तार, महिला सशक्तिकरण, अवसंरचना विकास और व्यापक जनकल्याण के क्षेत्रों में ठोस उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की नीतिगत दृढ़ता, प्रशासनिक दक्षता और विकसित उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ते आत्मविश्वासपूर्ण कदमों का तथ्यात्मक और संवैधानिक प्रस्तुतीकरण रहा। यूपी बना देश के लिए मॉडल राज्य राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति आज देशभर में एक प्रभावी मानक के रूप में उभर रही है। सरकार की कठोरता और संवेदनशीलता के संतुलित दृष्टिकोण ने संगठित अपराध और माफिया तंत्र पर निर्णायक नियंत्रण स्थापित किया है। आधुनिक तकनीक के व्यापक उपयोग, पुलिस बल के सुदृढ़ीकरण, त्वरित एवं प्रभावी न्याय व्यवस्था तथा पारदर्शी प्रशासनिक प्रणालियों के माध्यम से प्रदेश में भयमुक्त और विश्वासपूर्ण वातावरण तैयार हुआ है। यही सुरक्षित परिवेश उत्तर प्रदेश को उद्योग, व्यापार, स्टार्टअप, निवेश और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के लिए देश के सर्वाधिक आकर्षक और भरोसेमंद राज्यों में स्थापित कर रहा है। जीरो टॉलरेंस, सख्त कार्रवाई राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति ने ठोस और निर्णायक परिणाम दिए हैं। संगठित अपराध के विरुद्ध कार्रवाई में अब तक 35 माफिया व 94 सह-अपराधी दोषसिद्ध, 2 अपराधियों को मृत्युदंड, जबकि 267 अपराधी मुठभेड़ में ढेर किए गए हैं। 977 अभियुक्तों को एनएसए के तहत निरुद्ध किया गया है और माफिया तत्वों से ₹4,137 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त की जा चुकी है। त्वरित पुलिसिंग के लिए यूपी-112 का रिस्पॉन्स टाइम 25 मिनट 42 सेकंड से घटकर 6 मिनट 51 सेकंड किया गया है। साइबर अपराधों से निपटने हेतु प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम थाने कार्यरत हैं, जबकि एटीएस ने 148 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है। 146 रोहिंग्या बांग्लादेशी, पाकिस्तानी व अन्य अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। भ्रष्टाचार पर सख्त प्रहार करते हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन द्वारा 999 सफल ट्रैप ऑपरेशन किए गए हैं। मजबूत हुए संस्थान राज्यपाल ने कहा कि सुरक्षा तंत्र की संस्थागत मजबूती की दिशा में 2017 के बाद 8 नई विधि विज्ञान प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं और 6 अन्य निर्माणाधीन हैं। इसी अवधि में 2.19 लाख से अधिक पुलिस भर्तियां, 1.58 लाख कर्मियों को प्रोन्नति तथा 83,122 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। पुलिस बल के सुदृढ़ीकरण हेतु बजट में लगभग 150 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। 41,424 होमगार्ड पदों पर नामांकन, 6 नए जिला कारागारों सहित इटावा केंद्रीय कारागार का निर्माण, और 1,010 बंदियों की समयपूर्व रिहाई कारागार सुधारों की दिशा में अहम कदम हैं। न्याय व्यवस्था को सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए 10 जिलों में एकीकृत न्यायालय परिसरों को स्वीकृति, प्रयागराज में डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना, 81 फास्ट ट्रैक न्यायालयों का स्थायीकरण, लोक अदालतों में 3.60 करोड़ मामलों का निस्तारण, तथा 2,609 विधिक साक्षरता शिविरों का आयोजन किया गया है, जिससे प्रदेश में त्वरित, पारदर्शी और जन-संवेदनशील न्याय व्यवस्था को नई मजबूती मिली है। तेज कनेक्टिविटी, तेज विकास राज्यपाल ने अवसंरचना विकास के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में संपर्क, परिवहन और लॉजिस्टिक्स को नई दिशा दी गई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 168 विकासखंड मुख्यालयों को डबल-लेन सड़कों से जोड़ा जा चुका है, जबकि 1,410 किलोमीटर लंबाई की 161 सड़कों का निर्माण कार्य पूर्ण किया गया है। राज्य सरकार ने वर्ष 2025–26 तक 46,600 किलोमीटर सड़कों के सुदृढ़ीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है, वहीं अब तक लगभग 28,000 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण पूरा हो चुका है। अंतर्राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े प्रमुख मार्गों को न्यूनतम फोर-लेन कनेक्टिविटी प्रदान करने का कार्य तेजी से प्रगति पर है, जिससे व्यापार, परिवहन, पर्यटन और औद्योगिक निवेश को व्यापक गति मिल रही है। उत्पादन, उत्पादकता और कृषि अर्थव्यवस्था तीनों मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है उत्तर प्रदेश: राज्यपाल विधानमंडल के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने अभिभाषण में उत्तर प्रदेश के विकास की व्यापक और तथ्यपरक तस्वीर प्रस्तुत की। उन्होंने ऊर्जा आपूर्ति से लेकर कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था, गन्ना किसानों के भुगतान, पशुपालन, पर्यावरण संरक्षण, खनन सुधार, सार्वजनिक परिवहन, सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, शहरी आवास और श्रमिक कल्याण तक सरकार की नीतियों और उनके ठोस परिणामों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया।  रोशनी, भरोसा और राहत राज्यपाल ने ऊर्जा क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों को रेखांकित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन दर्ज किया गया है। वर्तमान में नगरीय मुख्यालयों को 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों को 21 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों को 19 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ‘इंटेंसिव डिस्ट्रीब्यूशन स्कीम’ के अंतर्गत अब तक 59.83 लाख स्मार्ट/इलेक्ट्रिक मीटर स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 37.45 लाख पुराने मीटरों का प्री-पेड में प्रतिस्थापन किया गया है। राज्यपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले 6 वर्षों में बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई, जिससे उपभोक्ताओं को स्थायी राहत मिली है और ऊर्जा क्षेत्र में भरोसे का वातावरण मजबूत हुआ है। अन्नदाता की ताकत, प्रदेश की प्रगति राज्यपाल ने कृषि क्षेत्र में हुई ऐतिहासिक प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज उत्पादन, उत्पादकता और कृषि अर्थव्यवस्था तीनों मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2016–17 में 557.46 लाख मीट्रिक टन रहा खाद्यान्न उत्पादन 2023–24 में बढ़कर 670.80 लाख मीट्रिक टन हो गया, और 2024–25 में यह 737.40 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा। कृषि क्षेत्र के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में भी उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है, जो 2016–17 में ₹2.96 लाख करोड़ से बढ़कर वर्तमान में ₹6.95 लाख करोड़ हो गया है। यह 135 प्रतिशत वृद्धि के साथ लगभग 18 प्रतिशत वार्षिक विकास दर को दर्शाता है। बागवानी बना ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार बागवानी क्षेत्र में भी प्रदेश ने नई ऊंचाइयां छुई हैं। खेती का क्षेत्रफल 21.40 लाख हेक्टेयर … Read more

एक छोटी सी लापरवाही और चली गई जान—बस में जिंदा जला कंडक्टर, वजह बनी अगरबत्ती

नई दिल्ली दिल्ली के विकासपुरी में एक प्राइवेट बस में आग लगने की वजह से 25 वर्षीय हेल्पर की मौत हो गई। पुलिस को संदेह है कि आग लगने की वजह अगरबत्ती है। पुलिस ने सोमवार को बताया कि मृतक का नाम सुनील है वह रात में बस में ही सोता था। इस दौरान मच्छरों को भगाने के लिए अगरबत्ती जलाता था। पुलिस के मुताबिक मामले में अभी जांच जारी है लेकिन शुरुआती जांच में आग की वजह अगरबत्ती को माना जा रहा है। पुलिस का मानना है कि आग अगरबत्ती से लगी और धीरे-धीरे पूरी बस को अपने चपेट में ले लिया। आग इतनी तेज थी कि सुनील को बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिल सका। आग इतनी तेज थी कि सुनील को बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिल सका। पूरी बस जल चुकी थी सुनील के जले हुए शव को दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे पोस्टमार्टम के लिए रखा गया है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि बस में लगी आग इतनी भयंकर थी कि जब तक दमकलकर्मी वहां पहुंचे पूरी बस जल चुकी थी। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया और सुनील के शव को बाहर निकाला गया। मौके पर पहुंचे दमकलकर्मी प्रिया अपार्टमेंट्स में रहने वाले विजय ने बताया, 'रविवार रात करीब 12:30 बजे हमने देखा कि बस में आग लग गई है। मैंने दमकलकर्मियों को फोन कर दिया था। जब दमकलकर्मी रात 12:45 बजे पहुंचे, तो उन्होंने खिड़कियां तोड़ दीं। तब तक पूरी बस आग की लपटों में घिर चुकी थी। हमें बताया गया कि बस के अंदर सो रहा व्यक्ति सफाईकर्मी था और इसके बाद बस के ड्राइवरों को भी बुलाया गया। बस का रजिस्ट्रेशन नंबर हरियाणा का आपको बता दें कि बस का मालिक विजय कुमार (46) है और बस का रजिस्ट्रेशन नंबर हरियाणा का था। फिलहाल मामले में पुलिस ये पता लगाने में लगी है कि अगरबत्ती ही आग लगने की असल वजह थी या फिर कोई तकनीकी खराबी के चलते ऐसा हुआ।

खेती में नवाचार की पहचान: किसान सुरेश कुमार नाग को ‘भुइयां के भगवान’ सम्मान

रायपुर. किसान सुरेश कुमार नाग को मिला ‘भुइयां के भगवान’ सम्मान छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के ग्राम कासौली (विकासखंड दंतेवाड़ा) के प्रगतिशील किसान  सुरेश कुमार नाग को आईबीसी 24 द्वारा प्रदान किए जाने वाले प्रतिष्ठित ‘भुइयां के भगवान’ सम्मान से नवाजा गया है। 06 फरवरी 2026 को आयोजित कार्यक्रम में राज्य के उपमुख्यमंत्री  अरुण साव ने उन्हें प्रशस्ति पत्र एवं सम्मान राशि प्रदान कर सम्मानित किया। यह उपलब्धि दंतेवाड़ा जिले के किसानों के लिए गर्व का विषय है। खेतों में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग पूरी तरह बंद सुरेश कुमार नाग लंबे समय से जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने रासायनिक खेती के दुष्परिणामों को समझते हुए अपने खेतों में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग पूरी तरह बंद कर दिया और जीवामृत, घन-जीवामृत तथा नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे जैविक उपायों को अपनाया। इसके अच्छे परिणाम मिलने के बाद उन्होंने अपने अनुभव अन्य किसानों के साथ साझा किए, जिससे आसपास के कई किसान भी प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित हुए। जैविक खेती को बढ़ावा देने चलाए जा रहे प्रयास नाग 100 से अधिक परंपरागत धान की किस्मों के संरक्षण का कार्य भी कर रहे हैं। इसके साथ ही  विधि से रागी और कोसरा की खेती जैसे नवाचारों को अपनाकर जिले में प्राकृतिक खेती को नई दिशा दी है। जिला प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे प्रयासों को  नाग जैसे किसानों ने जमीन पर सफल बनाया है। उनकी इस उपलब्धि पर किसानों, कृषि विशेषज्ञों और अधिकारियों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता बचाने का महत्वपूर्ण कार्य उपमुख्यमंत्री  अरुण साव ने कहा कि सुरेश कुमार नाग जैसे किसान समाज के लिए प्रेरणा स्रोत हैं, जो खेती के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता बचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। सम्मान प्राप्त करने के बाद  नाग ने कहा कि यह पुरस्कार उन सभी किसानों को समर्पित है, जो प्राकृतिक खेती अपनाकर धरती और आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित बनाने का प्रयास कर रहे हैं। युवाओं में खेती के प्रति सकारात्मक सोच सुरेश कुमार नाग को मिला यह सम्मान दंतेवाड़ा जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है और इससे युवाओं में खेती के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होने की उम्मीद है।

थोक से खुदरा तक नेटवर्क ध्वस्त: गांजा तस्करी मामले में 11 आरोपी पकड़े गए, 132.5 किलो बरामद

महासमुंद जिले में एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स (ANTF) ने गांजा तस्करी के खिलाफ रिकॉर्ड कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के भीतर तीन अलग-अलग मामलों में बड़ी सफलता हासिल की है। महज 6 घंटे के अंदर एंड-टू-एंड ऑपरेशन के तहत थोक विक्रेता से लेकर खरीदार तक पूरे नेटवर्क को पकड़ लिया गया। इस संयुक्त कार्रवाई में थाना सिंघोड़ा, कोमाखान और बागबाहरा क्षेत्र से कुल 132.5 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया। साथ ही 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गांजा तस्करी में प्रयुक्त 6 चार पहिया वाहन (अनुमानित कीमत 55 लाख रुपए) भी जब्त किए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों में मध्यप्रदेश के 5, महाराष्ट्र के 4 और ओडिशा के 2 आरोपी शामिल हैं। इस कार्रवाई में रायपुर, राजनांदगांव और महाराष्ट्र के भंडारा जिले की पुलिस के साथ बेहतर समन्वय देखने को मिला। पूरे ऑपरेशन में साइबर थाना के डाटा एनालिटिक्स और इंटेलिजेंस डेस्क की भूमिका अहम रही। वर्ष 2026 में अब तक की बड़ी उपलब्धि पुलिस के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक 34 प्रकरणों में 2285 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया है, जिसकी कीमत करीब 11 करोड़ 42 लाख 74 हजार रुपए है। 35 वाहन (कीमत 1 करोड़ 20 लाख रुपए) जब्त किए जा चुके हैं। इन मामलों में 93 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 69 आरोपी अन्य राज्यों से हैं। थाना सिंघोड़ा मामला 09 फरवरी 2026 को ओडिशा के सोनपुर से गांजा तस्करी की सूचना पर नेशनल हाईवे-53 पर नाकेबंदी की गई। इस दौरान स्विफ्ट डिजायर और टाटा इंडिका कार से 52.5 किलो गांजा बरामद किया गया। जब्ती विवरण गांजा: 52.5 किलो, 2 कार (कीमत लगभग 10 लाख रुपए), 4 मोबाइल फोन, 10 हजार रुपए नकद गिरफ्तार आरोपी अमित राय – जबलपुर (म.प्र.), राजकुमार केंवट – जबलपुर (म.प्र.), प्रकाश शर्मा – जबलपुर (म.प्र.)। तीनों के खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 20(b) के तहत मामला दर्ज किया गया है। एक आरोपी फरार है, जिसकी तलाश जारी है। थाना कोमाखान मामला नाकेबंदी के दौरान बोलेरो वाहन (OD-08-P-0321) से 40 किलो गांजा बरामद किया गया। इस केस में परिवहनकर्ता, पायलट वाहन, फॉलो वाहन और गांजा मंगाने वाले सहित कुल 6 आरोपी गिरफ्तार किए गए। आरोपियों से गांजा 40 किलो (कीमत 20 लाख रुपए), 3 कार और 1 बोलेरो (कुल कीमत लगभग 50 लाख रुपए) जब्त किए गए। मामले में धारा 20(b)(2)(c), 29 NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। थाना बागबाहरा मामला वाहन चेकिंग के दौरान हुंडई वेरना कार (MP07AG8311) से 40 किलो गांजा बरामद किया गया। गिरफ्तार आरोपी सुमित श्रीवास्तव – मुरैना (म.प्र.) रीना भदौरिया उर्फ रीना तोमर – मुरैना (म.प्र.) आरोपियों से जब्ती गांजा: 40 किलो, हुंडई वेरना कार (कीमत लगभग 15 लाख रुपए)

मां बनने का दावा, सियासी हलचल तेज: तेजप्रताप यादव बोले—अनुष्का से मेरा कोई संबंध नहीं

पटना कुछ वक्त पहले तेजप्रताप यादव और अनुष्का यादव की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थीं। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद हड़कंप मच गया था। अनुष्का यादव और तेजप्रताप यादव के बीच लव अफेयर की चर्चा ने भी जोर पकड़ लिया था। इतना ही नहीं तस्वीर वायरल होने के बाद लालू यादव ने तेजप्रताप यादव को पार्टी और परिवार से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। अब सोशल मीडिया पर अनुष्का यादव को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि वो मां बनी हैं। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि अनुष्का यादव ने बेटी को जन्म दिया है। इधर तेजप्रताप यादव ने अनुष्का यादव और बेटी दोनों से ही पल्ला झाड़ लिया है। उल्टे तेजप्रताप यादव ने यह कहा है कि अनुष्का यादव और आकाश भाटी के बीच क्या संबंध है, इसका पता लगाया जा।   बिहार के पूर्व मंत्री और लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव ने रविवार को आरोप लगाया कि उनके विरोधियों ने पहले गलत तरीके से उनके नाम को एक महिला से जोड़ा था और अब वे दावा कर रहे हैं कि महिला ने उनके बच्चे को जन्म दिया है। तेजप्रताप यादव ने रविवार को कहा, ‘सोशल मीडिया पर फैल रही उन अफवाहों से मैं बहुत परेशान हूं कि जिस महिला से मेरा नाम कुछ महीने पहले गलत तरीके से जोड़ा गया था, जिसके कारण मुझे पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था, उसने मेरे बच्चे को जन्म दिया है।’ तेजप्रताप ने कहा, ''मैं अपने विरोधियों से विनती करता हूं कि मुझे शांति से जीने दें। मैं उस व्यक्ति को जानता हूं जिसके साथ वह महिला रिश्ते में है और जो, मेरा मानना ​​है, बच्चे का पिता है। वे मेरा नाम घसीटकर मुझे मानसिक पीड़ा पहुंचा रहे हैं।'' तेजप्रताप यादव ने 5 जयचंदों के नाम गिनाए तेजप्रताप यादव ने राज्यसभा सदस्य और विधान परिषद के एक सदस्य को 'जयचंद' करार देते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की बात की। तेज प्रताप की उनके फेसबुक पेज पर एक महिला के साथ तस्वीर साझा हुई थी जिसके बाद उनके पिता लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से उन्हें निष्कासित कर दिया गया था। तेज प्रताप ने आरोप लगाते हुए कहा, ''जिन जयचंदों की मैं बात कर रहा हूं, उनके बारे में कुछ रहस्य बना हुआ है। उनके नाम मुकेश रोशन, संजय यादव, शक्ति सिंह यादव, रमीज और सुनील सिंह है।'' उन्होंने दावा किया था कि सोशल मीडिया पर जारी की गयी पोस्ट पांच 'जयचंदों' द्वारा उनके फेसबुक प्रोफाइल को हैक कर किया गया था। उक्त पोस्ट में कथित तौर पर तेज प्रताप की ओर से कहा था कि वह महिला के साथ 12 साल से रिश्ते में हैं।

जल संरक्षण की ताकत: मोर गांव मोर पानी अभियान ने बदली 45 परिवारों की तस्वीर

रायपुर. जल संरक्षण की पहल से पांच एकड़ से अधिक भूमि में लहलहाई खेती मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी पहल मोर गांव मोर पानी अभियान आज गांवों में जल आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत एमसीबी जिले के मनेन्द्रगढ़ जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम मुख्तियारपारा में वर्षों से उपेक्षित एक अनुपयोगी स्टापडेम को नया जीवन मिला है। बहते पानी को सहेजने की इस सामूहिक कोशिश ने न सिर्फ जल संकट दूर किया बल्कि खेती, पशुपालन और ग्रामीण जीवन को नई दिशा दे दी। जब जर्जर स्टापडेम बना समस्या ग्राम मुख्तियार पारा में कई वर्ष पूर्व एक स्थानीय नाले पर निर्मित स्टापडेम समय के साथ जर्जर हो चुका था। गाद जमाव के कारण इसकी जल धारण क्षमता लगभग समाप्त हो गई थी। सर्दियों के बाद नाले का प्रवाह कम होते ही ग्रामीणों को दैनिक उपयोग तक के लिए पानी नहीं मिल पाता था। खेतों की सिंचाई तो दूर, पशुओं के लिए भी जल का संकट बना रहता था। ग्राम सभा से निकली समाधान की राह गत वित्तीय वर्ष में आयोजित ग्राम सभा में मोर गांव मोर पानी अभियान पर चर्चा हुई। ग्रामीणों ने एकजुट होकर खराब पड़े स्टापडेम के पुनरुद्धार का प्रस्ताव रखा। सामुदायिक जलभराव क्षेत्र निर्माण एवं भूमि सुधार कार्य को सर्वसम्मति से स्वीकृति मिली। महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत लगभग 4.95 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई और ग्राम पंचायत मुख्तियार पारा को निर्माण एजेंसी बनाया गया। तकनीकी निगरानी में यह कार्य समय-सीमा के भीतर सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ। जल से समृद्ध हुआ गांव का भविष्य सिल्ट हटने और भूमि सुधार कार्य के बाद स्टापडेम में जल का ठहराव पहले की तुलना में कहीं अधिक हो गया है। इसका सीधा लाभ ग्राम सलका और सिरौली के लगभग 45 परिवारों को मिल रहा है। आज यहां घरेलू उपयोग, पशुपालन और निस्तार के लिए भरपूर जल उपलब्ध है। आसपास के जलस्तर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इस जलसंचय के कारण 8 से 10 परिवारों ने रबी फसल के साथ-साथ सब्जी उत्पादन भी शुरू कर दिया है और पांच एकड़ से अधिक कृषि भूमि सिंचित हो चुकी है। यह कहानी बताती है कि जब सरकार की योजना, ग्राम सभा की सहभागिता और श्रमशक्ति एक साथ आती है, तो अनुपयोगी संरचनाएं भी समृद्धि का आधार बन जाती हैं। मोर गांव मोर पानी अभियान के तहत किया गया यह कार्य ग्रामीण आत्मनिर्भरता, जल संरक्षण और टिकाऊ विकास की एक प्रेरणादायी सफलता की कहानी बनकर उभरा है।

सजावट में की गई ये गलती बिगाड़ सकती है घर की सुख-शांति, जानें मूर्तियों से जुड़े नियम

हम अपने घर को सुंदर बनाने और सकारात्मक ऊर्जा के लिए अक्सर देवी-देवताओं की सुंदर मूर्तियां लाते हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र कहता है कि हर मूर्ति घर के लिए सही नहीं होती। कई बार हम केवल कलात्मकता देखकर ऐसी मूर्तियां ले आते हैं जो असल में घर की ऊर्जा को अशांत कर सकती हैं। क्रोधित और उग्र स्वरूपों से बचें वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में कभी भी भगवान के उग्र या क्रोधित स्वरूप वाली मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। उदाहरण के लिए, भगवान शिव का 'नटराज' स्वरूप कला का अद्भुत नमूना है, लेकिन यह उनके 'तांडव' यानी विनाश के नृत्य को दर्शाता है। शास्त्रों के अनुसार, ऐसी मूर्ति घर में रखने से कलह और मानसिक तनाव बढ़ सकता है। इसी तरह, मां काली का विकराल रूप या भगवान हनुमान का ऐसा चित्र जिसमें वे लंका दहन कर रहे हों, घर की शांति में बाधा डाल सकता है। युद्ध और विनाश के दृश्य पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, घर में कभी भी युद्ध से जुड़ी तस्वीरें या मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। अक्सर लोग महाभारत के दृश्य या भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को गीता उपदेश देने वाली तस्वीर लगाते हैं। उपदेश वाली तस्वीर तो ठीक है, लेकिन अगर उसमें युद्ध के अस्त्र-शस्त्र और रथ प्रमुखता से दिख रहे हों, तो वह घर के सदस्यों के बीच वैचारिक मतभेद पैदा कर सकती है। खंडित और पुरानी मूर्तियां वास्तु के अनुसार, खंडित (टूटी हुई) मूर्ति घर में रखना सबसे बड़ा दोष माना जाता है। अगर मूर्ति का एक छोटा सा कोना भी चटक गया हो या उसका रंग पूरी तरह उतर गया हो, तो वह अपनी सकारात्मकता खो देती है। ऐसी मूर्तियों को तुरंत हटाकर किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए या किसी पीपल के पेड़ के नीचे रख देना चाहिए। इन विशेष मूर्तियों से भी करें परहेज वास्तु नियमों के अनुसार, घर के भीतर शनि देव, राहु और केतु की मूर्तियां स्थापित नहीं करनी चाहिए। इनकी पूजा मंदिर में करना ही श्रेष्ठ माना गया है। इसके अलावा, एक ही भगवान की दो मूर्तियां इस तरह न रखें कि उनका मुख एक-दूसरे की तरफ हो या उनकी पीठ एक-दूसरे से मिलती हो। यह स्थिति घर में धन के आगमन को रोकती है। घर के मंदिर के लिए कुछ जरूरी नियम: बैठी हुई मुद्रा: घर में हमेशा भगवान की बैठी हुई और मुस्कुराती हुई मुद्रा वाली मूर्तियां लाएं। अंगूठे से बड़ी न हो: घर के मंदिर में रखी मूर्ति का आकार बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए, अंगूठे के बराबर की मूर्ति सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। आमने-सामने न हो: मूर्तियों को कभी भी एक-दूसरे के आमने-सामने न रखें। साफ-सफाई: धूल जमी हुई या जाले लगी हुई मूर्तियों से नकारात्मक ऊर्जा पैदा होती है।

एशियन राइफल/पिस्टल चैंपियनशिप: शूट-ऑफ में गोल्ड से चूकीं मनु भाकर, ईशा ने जीता ब्रॉन्ज

नई दिल्ली एशियन राइफल/पिस्टल चैंपियनशिप में सोमवार को 25 मीटर विमेंस पिस्टल का रोमांचक फाइनल खेला गया, जिसमें मनु भाकर को वियतनाम की थुय ट्रांग गुयेन से हार का सामना करना पड़ा। इसी के साथ मनु ने गोल्ड मेडल जीतने का मौका भी गंवा दिया। डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज में यह फाइनल दो शूट-ऑफ के बाद तय हुआ। फाइनल में, ईशा सिंह ने पहली सीरीज में परफेक्ट पांच शॉट लगाए, जबकि मनु और थुय ट्रांग ने चार-चार शॉट लगाए। कड़े मुकाबले वाले फाइनल में हर सीरीज के बाद तीनों निशानेबाज मेडल की पोजीशन बदल रहे थे। भारतीय निशानेबाज वियतनामी निशानेबाज पर दबाव बना रहे थे, लेकिन छठी सीरीज में परफेक्ट पांच शॉट लगाकर उन्होंने दो अंकों की बढ़त बना ली। मनु और ईशा ने गुयेन की सातवीं सीरीज में एक शॉट का फायदा उठाकर अंतर कम किया। ईशा आठवीं सीरीज के अंत में 30 अंकों के साथ आगे चल रही थीं। वह नौवीं सीरीज में अपने सभी शॉट चूक गईं, जिसके चलते उन्हें ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा। आखिरी सीरीज में, मनु ने तीन शॉट लगाए, जबकि गुयेन ने दो शॉट लगाए और फाइनल 35 शॉट पर खत्म हुआ, जिससे मुकाबला शूट-ऑफ में चला गया। पहले शूट-ऑफ में, दोनों निशानेबाजों ने दो-दो शॉट लगाए, और अगले शूट-ऑफ में मनु तीन शॉट चूक गईं और गोल्ड मेडल से चूक गईं। फाइनल में तीसरी भारतीय, रिदम सांगवान चौथे स्थान पर रहीं। दूसरी ओर, ईशा सिंह ने चैंपियनशिप में अपना दूसरा व्यक्तिगत मेडल जीता, उन्होंने ब्रॉन्ज पर निशाना साधा। नाम्या कपूर ने जूनियर कैटेगरी में एक और कड़े शूट-ऑफ में गोल्ड मेडल जीता, जबकि अंजलि भागवत ने इसी इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। इसी के साथ भारत के कुल मेडल की संख्या 60 हो गई है, जिसमें 37 गोल्ड, 13 सिल्वर और 10 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। जूनियर फाइनल में, नाम्या कपूर ने शूट-ऑफ में गोल्ड मेडल जीता। वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल जीतने वाली सबसे युवा भारतीय निशानेबाज ने 29 शॉट लगाए, जो इंडोनेशिया की रिहादतुल अस्यिफा के बराबर थे। युवा निशानेबाज ने शूट-ऑफ में अपना संयम बनाए रखा, उन्होंने तीन शॉट लगाए जबकि अस्यिफा अपने सभी शॉट चूक गईं। अंजलि भागवत ने 24 के स्कोर के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। टॉप स्थान पर रहकर फाइनल के लिए क्वालीफाई करने वालीं पारिशा गुप्ता 14 के स्कोर के साथ पांचवें स्थान पर रहीं। भारतीय टीमों ने सीनियर और जूनियर दोनों कैटेगरी में गोल्ड मेडल भी हासिल किया।

मुड़ापार हेलीपेड पर सामुदायिक भवन का लोकार्पण, कैबिनेट मंत्री व महापौर रहे मौजूद

रायपुर. उद्योग मंत्री  लखन लाल देवांगन ने मथुरा माली मरार पटेल समाज को दी 10 लाख के सामुदायिक भवन की सौगात कोरबा नगर विधायक और छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री  लखन लाल देवांगन ने रविवार को मुड़ापार, हेलीपेड में मथुरा माली मरार पटेल समाज को 10 लाख की लागत से बने सर्व सुविधायुक्त सामुदायिक भवन की सौगात दी। कार्यक्रम में मंत्री  लखन लाल देवांगन और महापौर मती संजू देवी राजपूत ने समाज के पदाधिकारियों के साथ मां शाकम्भरी देवी की पूजा अर्चना कर प्रदेश और शहर की खुशहाली की कामना की।नवनिर्मित सामुदायिक भवन का फीता काटकर लोकार्पण किया।  इस अवसर पर मंत्री  लखन लाल देवांगन ने कहा कि सभी समाज की आर्थिक उत्थान और प्रगति के लिए छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव सरकार सभी समाज के साथ खड़ी है और उनके उत्थान और विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। कोरबा विधानसभा में भी सभी समाज की मांग अनुरूप विकास कार्यों को तेजी से पूर्ण किया जा रहा है। मंत्री  देवांगन ने कहा कि मथुरा माली मरार पटेल समाज का आशीर्वाद मुझे सदैव मिलता रहा है, समाज की सेवा करने का मुझे यह सौभाग्य मिला है। समाज की मांग पर प्रभारी मंत्री मद से 10 लाख की लागत से भवन का निर्माण कराया गया है, आज भवन समाज को समर्पित किया जा रहा है। इसी के साथ-साथ वार्ड क्रमांक 55 सुमेधा नागिन भाटा में समाज के लिए सामुदायिक भवन हेतु 10 लाख की स्वीकृति दी गई है, जल्द ही भवन पूर्ण हो जाएगा। मथुरा माली मरार पटेल समाज  के समाज के सभी प्रमुख जनों को बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने समाज की प्रशंसा करते हुए कहा कि पटेल समाज एक संगठित और सशक्त समाज है।  समाज  एक सशक्त और संगठित समाज की अवधारणा को पूरा करते हुए आगे बढ़ रहा है। पटेल समाज एक मेहनतकश समाज है। कड़ी मेहनत कर धरती को हरा भरा बनाने का कार्य मरार समाज करता है। उन्होंने कहा कि समाज आज खेती किसानी, सब्जी-भाजी के उत्पादन के साथ- साथ हर क्षेत्र में काफी आगे है।  इस अवसर पर सभापति नूतन सिंह ठाकुर, एमआइसी सदस्य मती धन कुमारी गर्ग, पार्षद ईश्वर पटेल, पार्षद  नरेंद्र देवांगन, पार्षद  मुकुंद कंवर, कोरबा मंडल अध्यक्ष  योगेश मिश्रा,  रामकृष्ण साहू, मती स्मिता सिंह, मती पूर्णिमा पासवान,  नवनीत शुक्ला,  सुकेश दलाल, मती संगीता साहू,  अनुज यादव व समाज के प्रमुख, वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे। इस अवसर पर महापौर मती संजू देवी राजपूत ने कहा कि माननीय कैबिनेट मंत्री  लखन लाल देवांगन की नेतृत्व में कोरबा शहर विकास के नए आयाम गढ़ रहा है। शहर के वार्ड, बस्तियों के मूलभूत विकास कार्य की बात हो, या फिर बड़े निर्माण कार्यों की बात हो, और सबसे महत्वपूर्ण सभी समाज को उनके मांग अनुरूप विकास कार्यों की सौगात देने की बात हो। सभी कार्यों के लिए   शासन से राशि की स्वीकृति भी ला रहे हैं, विकास कार्यों को शुरू कर पूर्ण कर सौगात भी दे रहे हैं। समाज ने किया मंत्री और महापौर का अभिनंदन     इस सौगात पर समाज के अध्यक्ष श्  आर डी पटेल,  महादेव पटेल,  लक्ष्मण पटेल, उपाध्यक्ष मती राजकुमारी पटेल, मती संध्या पटेल, मती संगीता पटेल,  राम अवतार पटेल,  चंद्र लाल पटेल,  गोविंद पटेल,  संतोषी पटेल,  राजाराम पटेल के साथ-साथ अधिक संख्या में समाज के पदाधिकारियों ने मंत्री  लखन लाल देवांगन और महापौर मती संजू देवी राजपूत का आभार जताते हुए उनका अभिनंदन किया।

दुगली का वन धन विकास केंद्र: एलोवेरा उत्पादों से मिली नई पहचान

रायपुर एलोवेरा आधारित पर्सनल केयर उत्पादों से पहचान बना रहा दुगली का वन धन विकास केंद्र प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन के अंतर्गत जिला धमतरी के ग्राम दुगली में स्थापित वन- धन विकास केंद्र (VDVK) आज महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आत्मनिर्भरता का सफल उदाहरण बन गया है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के मार्गदर्शन में संचालित यह केंद्र वनोपज के मूल्य संवर्धन के माध्यम से आदिवासी महिलाओं को रोजगार और सम्मानजनक आय प्रदान कर रहा है। 25 विभिन्न प्रकार के औषधीय और खाद्य उत्पाद तैयार दुगली वन धन विकास केंद्र के स्व-सहायता समूहों के संघ के रूप में कार्य कर रहा है। एक प्रमुख समूह संचालन की जिम्मेदारी संभालता है, जबकि अन्य समूह आवश्यकता और ऑर्डर के अनुसार उत्पादन कार्य में सहयोग करते हैं। केंद्र में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर मिला है। केंद्र में वर्तमान में लगभग 25 विभिन्न प्रकार के औषधीय और खाद्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें हर्बल पाउडर, स्वास्थ्य पेय और अन्य हर्बल उत्पाद शामिल हैं। सभी उत्पाद गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए बनाए जाते हैं तथा आयुष और खाद्य सुरक्षा विभाग से आवश्यक लाइसेंस प्राप्त हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यापक बाजार तक पहुँच विशेष रूप से एलोवेरा से तैयार साबुन, क्रीम, बॉडी वॉश और हैंडवॉश जैसे पर्सनल केयर उत्पादों ने बाजार में अपनी अलग पहचान बनाई है। इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे महिलाओं की आय में भी वृद्धि हुई है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा महिलाओं को प्रशिक्षण, मशीनरी सहायता, ब्रांडिंग और विपणन की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसके परिणामस्वरूप उत्पाद राज्य स्तरीय मेलों, विभागीय नेटवर्क और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यापक बाजार तक पहुँच रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में केंद्र का वार्षिक कारोबार 74 लाख 62 हजार 156 रुपए दर्ज किया गया, जो इसकी सफलता को दर्शाता है। 'छत्तीसगढ़ हर्बल' ब्रांड के अंतर्गत तैयार उत्पाद अब विभिन्न मार्ट, चयनित आउटलेट्स और ऑनलाइन माध्यमों पर उपलब्ध हैं तथा आयुष विभाग और पर्यटन मंडल को नियमित रूप से आपूर्ति की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता का सपना किया साकार दुगली वन धन विकास केंद्र आज केवल एक उत्पादन इकाई नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता और सामाजिक बदलाव की प्रेरक कहानी बन चुका है, जो यह दर्शाता है कि शासकीय योजनाओं और सामूहिक प्रयास से ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता का सपना साकार किया जा सकता है।