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झारखंड में बदली सदियों पुरानी रीति! 400 साल में पहली बार पंचायत की जगह पुलिस तक पहुंचा विवाद

गढ़वा झारखंड के गढ़वा जिले के भवनाथपुर प्रखंड का लरहरा गांव अपनी अनोखी परंपरा को लेकर चर्चा में है। यहां पिछले करीब 400 वर्षों से किसी भी विवाद का मामला थाने तक नहीं पहुंचा। गांव के लोग आज भी आपसी मामलों को पंचायत के जरिए ही सुलझाते हैं। पिछले 400 सालों से एक भी केस थाने में नहीं पहुंचा दरअसल, जिले के गढ़वा जिला अंतर्गत भवनाथपुर प्रखंड के लरहरा गांव में आज भी परंपरागत पंचायत व्यवस्था कायम है। इस गांव में कोरवा जनजाति के करीब 40 परिवार रहते हैं, जिन्हें आदिम जनजाति की श्रेणी में रखा जाता है। हाल ही में गांव में एक संवेदनशील मामला सामने आया। बताया जाता है कि गांव के एक चार बच्चों के पिता और चार बच्चों की मां को आपत्तिजनक स्थिति में देखा गया। दोनों रिश्ते में चाची-भतीजा बताए जा रहे हैं। मामला सामाजिक मर्यादा से जुड़ा होने के कारण गांव में हलचल मच गई और तुरंत पंचायत बुलाई गई। पंचायत ने कड़ी चेतावनी और माफी के साथ मामला सुलझाया इसी दौरान महिला ने गांव वालों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए थाने में शिकायत दर्ज करा दी। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई। थाने से बुलावा आने पर गांव के सभी लोग एकजुट होकर वहां पहुंचे। पुलिस पूछताछ में ग्रामीणों ने कहा कि पिछले 400 सालों से एक भी केस थाने में नहीं पहुंचा। यहां हर मामला पंचायत स्तर पर ही सुलझा गया है और आगे भी पंचायत स्तर पर ही सुलझाया जाएगा। आखिरकार पुलिस ने बिना हस्तक्षेप किए मामला पंचायत पर छोड़ दिया। पंचायत ने दोनों पक्षों को कड़ी चेतावनी और माफी के साथ मामला सुलझा दिया। गांव के बुजुर्ग रामपृत कोरबा, बिठल कोरबा, मुंद्रिका कोरबा, मणि कोरबा और सुरेंद्र कोरबा का कहना है कि उनके पूर्वजों के समय से ही गांव में यही नियम चला आ रहा है कि हर विवाद पंचायत में ही सुलझाया जाएगा। इससे गांव में आपसी भाईचारा बना रहता है। लरहरा गांव के लोगों का मुख्य पेशा जंगल से लकड़ी काटकर उसे भवनाथपुर बाजार में बेचना है। आधुनिक दौर में भी यह गांव अपनी परंपरा और सामाजिक व्यवस्था को कायम रखे हुए है।  

भर्ती के पुराने नियम होंगे खत्म! इस कंपनी में इंसानों से आगे निकले AI एजेंट

डेवलपर्स के लिए टूल बनाने वाली कंपनी StackBlitz ने बड़ा ऐलान किया है. कंपनी ने कहा है कि वह इस साल इंसानों से ज्यादा AI एजेंट्स को काम पर रखेगी. यानी कंपनी की ग्रोथ अब मानव कर्मचारियों से नहीं बल्कि डिजिटल वर्कर्स से होगी. कंपनी के सीईओ का कहना है कि AI एजेंट अब सिर्फ कोडिंग हेल्पर नहीं रहे, बल्कि बिजनेस के एक्टिव योगदानकर्ता बन रहे हैं. यह ट्रेंड आने वाले समय में पूरी सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री की हायरिंग सोच बदल सकता है. इससे जॉब मार्केट पर भी गहरा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है. StackBlitz के सीईओ एरिक सिमंस ने साफ कहा है कि कंपनी अब पारंपरिक तरीके से टीम नहीं बढ़ाएगी. इंजीनियर, सेल्स और सपोर्ट स्टाफ जोड़ने के बजाय AI सॉफ्टवेयर एजेंट्स की संख्या बढ़ाई जाएगी. ये एजेंट एक साथ कई काम संभाल सकते हैं और टाइम जोन या काम के घंटों की सीमा में बंधे नहीं होते. कंपनी का मानना है कि डिजिटल एजेंट्स ऑपरेशन को ज्यादा स्केलेबल और तेज बनाते हैं. यह मॉडल लागत घटाने और स्पीड बढ़ाने दोनों में मदद कर सकता है. AI एजेंट सिर्फ कोड नहीं, फैसले भी लेंगे एरिक सिमंस के मुताबिक AI एजेंट भविष्य में यूजर की तरफ से दूसरे एजेंट्स से बात करेंगे. वे कीमतों पर बातचीत, बुकिंग चेक करना और ऑनलाइन राय बनाना जैसे काम भी कर सकेंगे. उनका कहना है कि लोग अपने AI एजेंट की सलाह पर खरीद, रिजर्व और फैसले लेने लगेंगे. यह AI को एक पर्सनल डिजिटल प्रतिनिधि के रूप में स्थापित करता है. यानी AI एजेंट यूजर का एक्सटेंशन बनकर काम करेंगे, सिर्फ टूल नहीं रहेंगे. AI एजेंट इकोसिस्टम के शुरुआती संकेत इस दिशा में शुरुआती उदाहरण भी सामने आ चुके हैं, जैसे ओपनक्लॉ नाम का ओपन सोर्स AI असिस्टेंट. यह व्हाट्सएप, स्लैक और आईमैसेज जैसे प्लेटफॉर्म के भीतर काम कर सकता है और सीमित मानव हस्तक्षेप के साथ एजेंट्स को आपस में समन्वय करने देता है. सिमंस ने सॉफ्टवेयर और SaaS शेयरों में हाल की गिरावट को भी इससे जोड़ा है. उनका मानना है कि जब AI हजारों गुना तेजी से सॉफ्टवेयर बना और बदल सकता है, तो पारंपरिक एक्सपर्ट आधारित मॉडल दबाव में आएंगे. अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो कई टेक कंपनियां इसी रास्ते पर चल सकती हैं.

मैनपाट महोत्सव शुरू: 523 करोड़ की सौगात, कई निर्माण कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण

अंबिकापुर.  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को तीन दिवसीय मैनपाट महोत्सव का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि दो वर्ष पहले मैनपाट महोत्सव में आना हुआ था, इस वर्ष महोत्सव में बड़ा परिवर्तन दिख रहा है। समारोह में भव्यता दिख रही है, मैनपाट महोत्सव को आने वाले हर वर्ष मनाया जाएगा। सभी से चर्चा कर आयोजन के लिए एक तिथि निर्धारित करेंगे। दो वर्ष पहले मैनपाट महोत्सव हेतु 50 लाख रुपये स्वीकृत किया गया था, आने वाले समय में समारोह की और भव्यता के लिए सरकार चिंता करेगी। सरगुजा की संस्कृति, अस्मिता को दिखाने का माध्यम यह समारोह है। आने वाले समय में यहां की संस्कृति से देश दुनिया परिचित होगी। बाहर से आने वाले एवं स्थानीय कलाकारों को भी मंच मिलेगा और अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों की विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने 523 करोड़ रुपये से अधिक के विकास व निर्माण कार्यों का भूमिपूजन तथा लोकार्पण किया। कार्यक्रम में सांसद मनोज तिवारी, संभागायुक्त नरेन्द्र दुग्गा, पुलिस महानिरीक्षक दीपक झा, कलेक्टर अजीत वसंत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि व आमजन उपस्थित थे। पर्यटन क्षेत्र में विकास पथ पर अग्रसर है प्रदेश : राजेश पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में पर्यटन के क्षेत्र में निरंतर विकास हो रहा है।   राज्य सरकार पर्यटन स्थलों के समग्र विकास, आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण और नई संभावनाओं के सृजन की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मैनपाट जैसे प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण स्थल पर पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से स्थानीय युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। होम-स्टे, होटल व्यवसाय, स्थानीय हस्तशिल्प, परिवहन सेवाएं और खाद्य व्यवसाय से जुड़े लोगों की आय में वृद्धि हो रही है। इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। समारोह को सीतापुर विधायक राम कुमार टोप्पो व लुंड्रा विधायक प्रबोध मिंज ने भी संबोधित किया। मैनपाट में पर्यटन विकास के लिए एक करोड़,सीतापुर में बनेगा नया बस स्टैंड मुख्यमंत्री ने मैनपाट में पर्यटन के विकास हेतु एक करोड़ रुपये की घोषणा की। उन्होंने सीतापुर में सर्व सुविधायुक्त नए बस स्टैंड के निर्माण किए जाने की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने नगर पालिक निगम अंबिकापुर के आठ करोड़ के नवीन कार्यालय भवन का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का तिब्बती बंधुओं द्वारा तिब्बती संस्कृति पर आधारित ताशी शोपा नृत्य के साथ आत्मीय स्वागत किया ग    मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टालों का अवलोकन किया तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से पात्र हितग्राहियों को हितग्राहीमूलक सामग्रियों का वितरण किया गया   इस अवसर पर सांसद व भोजपुरी गायक मनोज तिवारी के साथ स्थानीय कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं।  

संगरूर सीमेंट प्लांट विवाद: सुप्रीम कोर्ट सख्त, पर्यावरण और लोगों की सुरक्षा पर उठाए सवाल

पंजाब पंजाब के संगरूर जिले में प्रस्तावित सीमेंट प्लांट को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ताओं और किसानों को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने श्री सीमेंट को दिए गए सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) को रद्द कर दिया है। जानकारी के अनुसार, संगरूर में सीमेंट प्लांट स्थापित करने को लेकर लंबे समय से स्थानीय किसानों और पर्यावरण प्रेमियों द्वारा विरोध किया जा रहा था। उनका कहना था कि इससे कृषि भूमि और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। मामला अदालत तक पहुंचने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कंपनी को दिया गया सीएलयू रद्द कर दिया। कोर्ट के इस फैसले को आंदोलन कर रहे किसानों और पर्यावरण संगठनों की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल इस फैसले के बाद क्षेत्र में प्रस्तावित प्लांट की स्थापना पर रोक लग गई है। कोर्ट ने एनवायरनमेंट पर पड़ने वाले असर और CLU प्रोसेस में कमियों के आधार पर फैसला सुनाया, जिससे इलाके की खेती और एनवायरनमेंट को बड़ा नुकसान होने से बचाया जा सका। आपको बता दें कि, श्री सीमेंट संगरूर में एक बड़ा प्लांट लगाना चाहता था, जिसके खिलाफ स्थानीय किसानों और पर्यावरणविदों का लंबे समय से संघर्ष चल रहा था।

DGCA का बड़ा एक्शन: सेफ्टी नियमों की अनदेखी पर एयर इंडिया पर एक करोड़ का फाइन

नई दिल्ली  एयर इंडिया पर डीजीसीए ने एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। जानकारी के मुताबिक एयर इंडिया की एयरबस ने बिना जरूरी परमिशन के उड़ान भरी। ऐसा एक या दो नहीं, बल्कि आठ बार हुआ। सुरक्षा में लापरवाही को लेकर एयर इंडिया पर चला डंडा, DGCA ने ठोका एक करोड़ रुपए का जुर्माना एयर इंडिया पर डीजीसीए ने एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। जानकारी के मुताबिक एयर इंडिया की एयरबस ने बिना जरूरी परमिशन के उड़ान भरी। ऐसा एक या दो नहीं, बल्कि आठ बार हुआ। डीजीसीए ने इसको बहुत गंभीर किस्म का उल्लंघन माना है। साथ ही लापरवाही के लिए टॉप लेवल मैनेजमेंट को जिम्मेदार ठहराया है। डीजीसीए ने जुर्माना लगाते हुए अपने आदेश में लिखा है कि एयरबस ए320 विमान ने कई सेक्टर्स में उड़ान भरी। इसमें नई दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद की कनेक्टिंग फ्लाइट्स भी शामिल हैं। ऐसा पिछले साल 24 से 25 नवंबर के बीच हुआ। इन उड़ानों के लिए एयर इंडिया ने अनिवार्य एयरवर्दीनेस रिव्यू सर्टिफिकेट (ARC) नहीं लिया था। एआरसी एक बेहद अहम सर्टिफिकेट है जो सालाना तौर पर डीजीसीए द्वारा जारी किया जाता है। इसके लिए विमान को सभी जरूरी सुरक्षा मानकों को पूरा करना होता है। बिना एआरसी के उड़ान भरना उड़ान के सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है। डीजीसीए ने माना बेहद गंभीर डीजीसीए ने एयर इंडिया के इस उल्लंघन को बेहद गंभीर माना है। एनडीटीवी के मुताबिक इसे एयरलाइन की कैजुअल अप्रोच बताया गया है। जानकारी के मुताबिक डीजीसीए ने कहाकि इस तरह के उल्लंघन को लेकर हम बहुत कड़ी कार्रवाई करते हैं। इसलिए जितनी ज्यादा संभव हो सकती थी, उतनी पेनाल्टी लगाई गई है। जब किसी संस्था पर जुर्माना लगाया जाता है तो जिम्मेदार मैनेजर को नोटिस दी जाती है। डीजीसीए ने शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय की है, और एयर इंडिया के सीईओ कैम्पबेल विल्सन को इस चूक के लिए जिम्मेदार ठहराया है। एयर इंडिया ने क्या कहा डीजीसीए के आदेश का जवाब देते हुए, एयर इंडिया के एक प्रवक्ता ने एक बयान में कहाकि एयर इंडिया ने 2025 में स्वेच्छा से रिपोर्ट किए गए एक घटना से संबंधित डीजीसीए आदेश की प्राप्ति को स्वीकार किया है। सभी पहचाने गए गैप्स को तब से संतोषजनक रूप से संबोधित किया गया है, साथ ही प्राधिकरण के साथ साझा किया गया है। एयर इंडिया अपने संचालन की निष्पक्षता और सुरक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता में अडिग है।  

प्यार या जाल? Valentine’s Day पर बढ़े AI रोमांस फ्रॉड, ‘लैला-मजनू’ स्टाइल ठगी से बचें

नई दिल्ली वैलेंटाइन डे (Valentine's Day) के नजदीक आते ही जहां चारों तरफ प्यार की चर्चा है वहीं साइबर अपराधी भी हनी ट्रैप का जाल बिछाकर सक्रिय हो गए हैं। इस साल सबसे बड़ी चुनौती AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) बनकर उभरी है। एक्सपर्ट्स का दावा है कि स्कैमर्स अब AI की मदद से इतने असली दिखने वाले प्रोफाइल बना रहे हैं कि एक आम यूजर के लिए धोखे को पहचानना लगभग नामुमकिन हो गया है। AI के जरिए कैसे बुना जा रहा है इश्क का जाल? अब स्कैमर्स केवल फोटो ही नहीं बल्कि आपकी भावनाओं से खेलने के लिए एडवांस्ड तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं: नेचुरल चैटिंग: टेक्स्ट-जनरेशन टूल्स (जैसे ChatGPT) का उपयोग कर स्कैमर्स आपकी भाषा और पसंद-नापसंद के हिसाब से बिल्कुल इंसानी लहजे में बात करते हैं। वॉइस क्लोनिंग: स्कैमर्स सिर्फ एक छोटे ऑडियो सैंपल से किसी की भी आवाज कॉपी कर लेते हैं। आपको लगेगा कि आप अपने पार्टनर से फोन पर बात कर रहे हैं लेकिन वह एक मशीन होगी। डीपफेक वीडियो: वीडियो कॉल पर भी अब भरोसा करना मुश्किल है। डीपफेक के जरिए स्कैमर्स किसी और का चेहरा लगाकर आपसे बात कर सकते हैं। स्कैम पहचानने के Red Flags साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के अनुसार रोमांस स्कैम में अक्सर ये पैटर्न देखे जाते हैं। इनकी तस्वीरें किसी मॉडल जैसी दिखेंगी और प्रोफाइल एकदम परफेक्ट लगेगा। ये लोग बहुत जल्दी इमोशनल बातें शुरू कर देते हैं और शादी या गहरे रिश्ते के सपने दिखाने लगते हैं। जब भी आप आमने-सामने मिलने की बात करेंगे ये कोई न कोई बहाना (जैसे- दूसरे शहर में नौकरी या विदेश यात्रा) बनाकर टाल देंगे। अंत में बात हमेशा किसी इमरजेंसी, बीमारी या शानदार इन्वेस्टमेंट स्कीम पर आकर रुकेगी। वर्चुअल प्यार के इस दौर में इन तरीकों से अपनी सुरक्षा करें: वीडियो कॉल पर हेड टेस्ट: अगर आपको वीडियो कॉल पर शक हो, तो सामने वाले को अपना सिर चारों तरफ घुमाने या चेहरे के आगे हाथ हिलाने को कहें। अगर वह डीपफेक होगा, तो वीडियो के पिक्सल फट जाएंगे या चेहरा अजीब दिखने लगेगा। निजी जानकारी न दें: अपनी बैंक डिटेल्स, ओटीपी या प्राइवेट फोटोज किसी अजनबी के साथ शेयर न करें। पैसे भेजने से बचें: चाहे कितनी भी बड़ी इमरजेंसी बताई जाए जिस व्यक्ति से आप कभी मिले नहीं हैं उसे एक रुपया भी न भेजें। रिवर्स इमेज सर्च: पार्टनर की फोटो को गूगल पर 'रिवर्स इमेज सर्च' करके देखें कि कहीं वह फोटो इंटरनेट से चुराई गई तो नहीं है।  

खुद को IAS बताकर मंत्रालय पहुंचा युवक, पूछताछ में फर्जीवाड़े का हुआ खुलासा

भोपाल मंत्रालय में शुक्रवार को एक व्यक्ति स्वयं को 2019 बैच का अधिकारी बताकर पहुंच गया। योगेंद्र सिंह चौहान नाम का यह व्यक्ति मूल रूप से इंदौर का रहने वाला है और स्वयं को अपर कलेक्टर बताकर कर सामान्य प्रशासन विभाग के उपसचिव अजय कटेसरिया के पास स्वयं का तबादला कराने के लिए पहुंचा था। बातचीत में संदेह हुआ तो उन्होंने सुरक्षाकर्मी बुला लिए। पूछताछ में यह बात सामने आई कि वह कोई आईएएस अधिकारी नहीं है। हालांकि, युवक की मानसिक स्थिति को देखते हुए उसके विरुद्ध कोई कानूनी कार्रवाई स्वजन को सौंप दिया। योगेंद्र सिंह चौहान स्वयं को आइएएस अधिकारी बताकर सामान्य प्रशासन विभाग के उप सचिव के पास पहुंचा था। वह अपना तबादला करने की बात कर रहा था। इससे अजय कटेसरिया को संदेह हुआ। उन्होंने सिलेक्शन बैच पूछा तो वह 2019 बताने लगा। सिलेक्शन बैच वह होता है जिसमें व्यक्ति परीक्षा देता है। संवर्ग का बैच उसके एक साल बाद का होता है। उसे जब और पूछा गया तो बताया कि इंदौर में अपर कलेक्टर पदस्थ हूं लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग मुझे भूल गया है। जब पूछा कि आपका सुरक्षा कर्मी कहां है, तो कहने लगा कि कलेक्टर ने ले लिया है। इस पर संदेह पुख्ता हो गया और फिर उन्होंने मंत्रालय के सुरक्षाकर्मी बुलाकर उन्हें सौंप दिया। मंत्रालय के सुरक्षा अधिकारी अविनाश शर्मा ने पूछताछ की। उसे 2019 बैच की सूची दिखाई, जिसमें उसका नाम नहीं था। यह भी पढ़ें- बीएनएस में बदली धारा से खुला रास्ता, कोर्ट ने सुधरने के वादे पर लूट के आरोपियों का राजीनामा किया स्वीकार मानसिक अस्थिर है, हिदायत देकर छोड़ा सुरक्षा अधिकारी का कहना है कि पूछताछ में ही यह लगा कि वह मानसिक तौर पर अस्थिर लगा। एकटक सुरक्षाकर्मियों को देखता रहा। चेहरे पर कोई चिंता नहीं। उसके पास फर्जी आईडी या अन्य कोई चीज नहीं मिली। स्वजन का नंबर लिया और फिर उन्हें मंत्रालय बुलाया। उन्होंने बताया कि इसका उपचार चल रहा है, जिसके बाद बिना कोई कार्रवाई किए स्वजन के हवाले इस हिदायत के साथ कर दिया कि जब तक उपचार चल रहा है, तब तक ऐसे कहीं जाने न दें।  

कानूनी सीमा से आगे भी राहत: 28 हफ्ते की गर्भवती नाबालिग रेप पीड़िता को हाईकोर्ट ने दी अबॉर्शन की इजाजत

भोपाल Madhya Pradesh High Court ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 13 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता की 28 सप्ताह से अधिक की गर्भावस्था को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने की अनुमति दे दी है।   अदालत ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और पीड़िता की शारीरिक व मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने माना कि इतनी कम उम्र में गर्भावस्था जारी रखना नाबालिग के स्वास्थ्य और जीवन के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। मामले की सुनवाई के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि गर्भ जारी रहने से बच्ची पर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके बाद अदालत ने मानवीय आधार पर गर्भ समापन की अनुमति प्रदान की। यह निर्णय राज्य में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।

14 लड़कियों का ‘अश्लील फोटो’ ब्लैकमेल कांड विधानसभा में गूंजा

अजमेर. राजस्थान का चर्चित 'अजमेर ब्लैकमेल कांड' एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। दरअसल, विधानसभा के बजट सत्र के बीच गुरुवार को 1992 के अजमेर ब्लैकमेल कांड की पीड़िताओं के मुआवजे का मुद्दा गरमाया रहा। कोटा दक्षिण से भाजपा विधायक संदीप शर्मा ने सरकार से पूछा कि आखिर न्यायालय के आदेश के बावजूद पीड़िताओं के खातों में 'पीड़ित प्रतिकर राशि' क्यों नहीं पहुंची? सरकार की ओर से जो जवाब आया, उसने इस मामले की पेचीदगी और पीड़िताओं के सामाजिक डर को एक बार फिर उजागर कर दिया। 17 में से सिर्फ 2 तक पहुंची मदद विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, माननीय न्यायालय ने 20 अगस्त 2024 को एक ऐतिहासिक आदेश जारी करते हुए इस कांड की 17 पीड़िताओं को प्रत्येक को 7-7 लाख रुपये की मुआवजा राशि देने का निर्देश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) को दिया था। हैरान करने वाला आंकड़ा: आदेश के महीनों बाद भी अब तक केवल 2 पीड़िताओं को ही कुल 14 लाख रुपये का भुगतान हो पाया है। बाकी का क्या हुआ? शेष 14 पीड़िताओं को मिलने वाली 98 लाख रुपये की राशि अभी भी सरकारी फाइलों में कैद है। एक पीड़िता का निधन हो चुका है। "इच्छा जाहिर नहीं की": सामाजिक डर या प्रशासन की विफलता? सरकार ने सदन में जो तर्क दिया, वह काफी चौंकाने वाला है। उत्तर में बताया गया कि प्रशासन ने पीड़िताओं से संपर्क करने के प्रयास किए, लेकिन कई पीड़िताओं या उनके परिजनों ने मुआवजा राशि प्राप्त करने की 'इच्छा जाहिर नहीं की' है। विशेषज्ञों का मानना है कि 32 साल बीत जाने के बाद कई पीड़िताएं अब अपनी नई पहचान के साथ समाज में रह रही हैं। वे मुआवजा लेने के लिए सामने आकर अपनी पहचान उजागर होने से डर रही हैं। यह 'खामोशी' उस गहरे मानसिक आघात का प्रतीक है जो अजमेर कांड ने इन मासूमों को दिया था। 1992 का वो 'काला अध्याय' जिसने अजमेर को रुला दिया था जो लोग नहीं जानते, उनके लिए बता दें कि 1992 में अजमेर में रसूखदार लोगों के एक गिरोह ने स्कूल और कॉलेज जाने वाली दर्जनों लड़कियों को नशीला पदार्थ खिलाकर या डरा-धमका कर उनके अश्लील फोटो खींचे थे। आरोप था कि इन फोटो के आधार पर लड़कियों का सालों तक यौन शोषण और ब्लैकमेल किया गया। यह आजाद भारत के सबसे बड़े और घिनौने सेक्स स्कैंडल्स में से एक माना जाता है, जिसकी गूँज संसद तक सुनाई दी थी। विधायक संदीप शर्मा की मांग: "घर जाकर दें हक" विधायक संदीप शर्मा ने सरकार के जवाब पर असंतोष जाहिर करते हुए एक मानवीय सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन को केवल औपचारिक पत्राचार नहीं करना चाहिए, बल्कि पीड़िताओं की निजता का ध्यान रखते हुए उनके घर जाकर संपर्क करना चाहिए। शर्मा ने मांग की कि सरकार ऐसी व्यवस्था करे जिससे पीड़िताओं की पहचान गुप्त रहे और उनका हक (7 लाख रुपये की राशि) सीधे उनके खातों में जमा हो जाए। अगले 3 साल तक जारी रहेंगे प्रयास सरकार ने आश्वासन दिया है कि आगामी 3 साल तक शेष पीड़िताओं को मुआवजा दिलाने के निरंतर प्रयास किए जाएंगे। यदि इस अवधि के बाद भी कोई पीड़िता सामने आती है, तो नियमानुसार उसे भुगतान किया जाएगा। वर्तमान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिए गए हैं कि वे संवेदनशीलता के साथ इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं।

भारत पर अर्जेंटीना का तूफान, हॉकी प्रो लीग में 8-0 से करारी शिकस्त

राउरकेला भारत को बृहस्पतिवार को यहां एफआईएच पुरुष प्रो लीग के राउरकेला चरण में अर्जेंटीना से 0-8 से हार का सामना करना पड़ा। अर्जेंटीना के लिए टॉमस डोमेने ने चार गोल दागे। डोमेन (15, 20, 26, 60वें मिनट) के अलावा टॉमस रुइज (14वें मिनट), लुसियो मेंडेज (22वें मिनट), इग्नासियो इबारा (25वें मिनट) और निकोलस डेला टोरे (30वें मिनट) ने भी गोल किए। भारत ने शुरुआत में बढ़त बनाने की कोशिश की, लेकिन कुछ देर तक दबदबे के बाद उन्होंने पहले क्वार्टर के अंत में पेनल्टी स्ट्रोक मिलने पर बढ़त लेने का सुनहरा मौका गंवा दिया। हरमनप्रीत सिंह के प्रयास को अर्जेंटीना के गोलकीपर ने रोक दिया। अर्जेंटीना ने तुरंत गोल दाग दिया। रुइज ने अपनी टीम को बढ़त दिला दी। मेहमान टीम ने जल्द ही अपनी बढ़त दोगुनी कर ली जब डोमेने ने सूरज करकेरा को छकाते हुए अपनी टीम को शुरुआती क्वार्टर में 2-0 की बढ़त दिला दी। भारत ने दूसरे क्वार्टर की शुरुआत अच्छी की जिसमें शिलानंद लाकड़ा और हरमनप्रीत सिंह को पेनल्टी कॉर्नर मिले। हालांकि वे गोल नहीं कर पाए। अर्जेंटीना ने दबाव बनाना जारी रखा। डोमेने ने बढ़त को तीन गुना कर दिया और मेंडेज ने जल्द ही चौथा गोल कर दिया। इबारा पांचवां गोल किया जबकि डोमेने ने जल्द ही अपनी हैट्रिक पूरी की। निकोलस डेला टोरे के गोल से अर्जेंटीना पहले हाफ में 7-0 से बढ़त बनाए था। भारत ने कुछ मौके बनाए लेकिन गोल नहीं हुआ। फिर अर्जेंटीना ने डोमेने के गोल से शानदार जीत दर्ज की।