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आपत्तिजनक स्थिति पर मुंडन की चेतावनी, भोपाल के चिनार पार्क के बाहर वैलेंटाइन डे पर तनाव

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में वैलेंटाइन-डे के मौके पर शुक्रवार को हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला. अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद और राष्ट्रीय बजरंग दल के कार्यकर्ता हाथों में लट्ठ (डंडे) लेकर सड़कों पर उतर आए. चिनार पार्क के बाहर जमा हुए इन कार्यकर्ताओं ने न केवल नारेबाजी की, बल्कि सार्वजनिक स्थलों पर 'मर्यादा' का उल्लंघन करने वाले जोड़ों का 'मुंडन' करने की सीधी चेतावनी भी दे डाली. प्रशासन की सतर्कता स्थिति को देखते हुए शहर के प्रमुख पार्कों, मॉल और सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। पुलिस ने कहा कि शांति व्यवस्था भंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। अधिकारियों ने नागरिकों से भी अपील की कि वे किसी भी तरह के विवाद से बचें और कानून का पालन करें। पार्क के बाहर पुलिस तैनात स्थिति को देखते हुए पार्क के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियातन सुरक्षा व्यवस्था की गई है और किसी भी तरह की अवैध या हिंसक कार्रवाई की अनुमति नहीं दी जाएगी। गौरतलब है कि वैलेंटाइन डे को लेकर शहर में विभिन्न संगठनों की ओर से विरोध दर्ज कराया जा रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थलों पर शांति भंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बजरंग दल की चेतावनी: मुंह काला करेंगे राष्ट्रीय बजरंग दल ने सार्वजनिक रूप से सख्त चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि वैलेंटाइन डे के नाम पर किसी भी तरह की अश्लीलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रांत मंत्री राकेश प्रजापति ने तीखे शब्दों में कहा कि यदि कोई युवक-युवती सार्वजनिक स्थानों पर आपत्तिजनक स्थिति में मिले, “बाबू-सोना” करते दिखाई दें, तो उनका सिर मुंडवाकर मुंह काला किया जाएगा और सड़कों पर जुलूस निकाला जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जहां कहीं भी अश्लीलता करते पाए गए, वहां “शरीर का कोना-कोना तोड़ देंगे।” संगठन का आरोप है कि वैलेंटाइन डे के बहाने शहर में योजनाबद्ध तरीके से अशोभनीय गतिविधियां बढ़ाई जाती हैं, जिसका राष्ट्रीय बजरंग दल विरोध करेगा। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। 15 निगरानी दस्ते गठित वैलेंटाइन डे पर अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद और राष्ट्रीय बजरंग दल ने पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव का विरोध करते हुए सख्त रुख अपनाया है। वहीं संस्कृति बचाओ मंच ने शहरभर में 15 निगरानी दस्ते गठित कर होटल, मॉल और पार्कों पर नजर रखने की घोषणा की है। इससे एक दिन पहले शुक्रवार को हिंदू परिषद और बजरंग दल ने ‘दंड पूजन’ कर विरोध दर्ज कराया। संगठन के प्रांत मंत्री राकेश प्रजापति ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रेम मर्यादा और सम्मान से जुड़ा है, लेकिन पश्चिमी प्रभाव में सार्वजनिक अश्लीलता को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिसे भोपाल में किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन सच्चे प्रेम या पारिवारिक मूल्यों के खिलाफ नहीं, बल्कि सार्वजनिक मर्यादा भंग करने वालों के विरोध में हैं। बजरंग दल की एक दर्जन टीमें रहेंगी तैनात संगठनों ने ऐलान किया है कि 14 फरवरी को राष्ट्रीय बजरंग दल की करीब एक दर्जन टीमें शहर के प्रमुख पार्कों, सार्वजनिक स्थलों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में तैनात रहेंगी। किसी भी आपत्तिजनक गतिविधि पर सार्वजनिक विरोध दर्ज कराया जाएगा। विशेष आयोजन न करें होटल संचालक उधर, संस्कृति बचाओ मंच ने होटल संचालकों को चेतावनी दी है कि वैलेंटाइन डे पर विशेष आयोजन न करें। मंच पदाधिकारियों ने कहा कि भारतीय संस्कृति और संस्कार देश की पहचान हैं। युवाओं से अपील की गई है कि वे वैलेंटाइन डे के बजाय अगले दिन पड़ने वाली महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करें। संगठनों की घोषणाएं कुछ संगठनों ने दावा किया कि उन्होंने शहरभर में निगरानी टीमें गठित की हैं, जो सार्वजनिक स्थानों पर नजर रखेंगी। वहीं होटल संचालकों से अपील की गई कि वे 14 फरवरी को विशेष आयोजन न करें। सांस्कृतिक बहस तेज वैलेंटाइन डे को लेकर हर साल की तरह इस बार भी शहर में सांस्कृतिक बहस देखने को मिली। एक पक्ष इसे निजी अभिव्यक्ति और उत्सव का दिन मानता है, जबकि विरोध करने वाले इसे भारतीय परंपराओं के विपरीत बताते हैं। प्रशासन ने दोहराया है कि सभी नागरिकों को कानून के दायरे में रहते हुए अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन किसी भी तरह की हिंसक या जबरन कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शक्ति प्रदर्शन: 'दंड पूजन' के बाद मैदान में उतरे दस्ते राजधानी में विरोध की लहर एक दिन पहले ही शुरू हो गई थी, जब संगठनों ने 'दंड पूजन' कर अपनी रणनीति साफ कर दी थी. निगरानी दस्ते: संस्कृति बचाओ मंच ने शहर के होटलों, मॉल्स और पार्कों पर नजर रखने के लिए 15 विशेष निगरानी दस्ते गठित किए हैं. संस्कृति का तर्क: संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि वे प्रेम के खिलाफ नहीं, बल्कि पाश्चात्य संस्कृति के नाम पर परोसी जा रही 'अश्लीलता' के विरुद्ध हैं. महाशिवरात्रि की अपील: युवाओं से अपील की गई है कि वे विदेशी त्योहार के बजाय अगले दिन आने वाली महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती की पूजा करें. प्रशासन अलर्ट: पुलिस का सख्त घेरा हंगामे की आशंका को देखते हुए भोपाल पुलिस ने चिनार पार्क और अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है. सुरक्षा चक्र: पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी संगठन को कानून हाथ में लेने या हिंसक कार्रवाई करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. होटलों को हिदायत: दक्षिणपंथी संगठनों ने होटल संचालकों को भी चेतावनी दी है कि वे वैलेंटाइन-डे पर किसी भी तरह का विशेष आयोजन न करें.

इंदौर केस अपडेट: MBA छात्रा के साथ क्रूरता करने वाला आरोपी मुंबई से हिरासत में

इंदौर  मध्य प्रदेश के इंदौर के द्वारकापुरी थाना क्षेत्र में चार दिन से लापता एमबीए छात्रा की निर्मम हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। दुष्कर्म के बाद रस्सी से गला घोंटकर हत्या करने वाला फरार सहपाठी छात्र पीयूष धामनोदिया मुंबई से गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी की लोकेशन ट्रेस होने के बाद मुंबई पुलिस की मदद से उसे पकड़ा गया। वहीं आरोपी के परिजन मंदसौर से इंदौर पहुंच चुके हैं, जिनके बयान आज पुलिस दर्ज करेगी। द्वारकापुरी थाना पुलिस की टीम आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर लेने मुंबई पहुंच गई है और देर शाम तक उसे इंदौर लाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ के बाद हत्या की असली वजह और पूरी साजिश का खुलासा होगा। वहीं आज छात्रा का पोस्टमार्टम भी कराया जाएगा। पुलिस के अनुसार सांवेर रोड स्थित एक कॉलेज में एमबीए सेकेंड ईयर की पढ़ाई कर रही 24 साल की छात्रा 10 फरवरी की दोपहर घर से दस्तावेज अपडेट कराने का कहकर निकली थी। पिता उसे मोती तबेला फायर स्टेशन के पास छोड़कर लौट गए थे। शाम को छात्रा ने छोटी बहन को फोन कर बताया था कि वह द्वारकापुरी की अंकली गली में किराए से रहने वाले अपने सहपाठी पीयूष धामनोदिया के साथ एक दोस्त के जन्मदिन में जा रही है। रात में उसके मोबाइल से बहन को मैसेज आया कि वह घर नहीं आएगी। अगले दिन संपर्क नहीं होने पर 11 फरवरी को परिजनों ने पंढरीनाथ थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। जांच के दौरान पुलिस को छात्रा का नग्न शव उसके घर से करीब आधा किलोमीटर दूर अंकली गली स्थित आरोपी के किराए के कमरे से मिला। शव को कंबल से ढंका गया था और कमरे पर बाहर से ताला लगा हुआ था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि छात्रा की हत्या रस्सी से गला घोंटकर की गई। शव पर धारदार हथियार से हमले के निशान भी मिले हैं, जो दरिंदगी की कहानी बयान कर रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की सटीक परिस्थितियां स्पष्ट होंगी। लोकेशन मुंबई की मिलते ही भेजी फोटो, ऐसे पकड़ा गया आरोपी डीसीपी जोन-1 कृष्ण लालचंदानी ने बताया कि आरोपी की तलाश में पुलिस टीमें लगातार सक्रिय थीं। जांच में पता चला कि आरोपी मूल रूप से मंदसौर के कालाखेत रोड का निवासी है और उसके पिता की धानमंडी में किराना दुकान है। पूछताछ में छात्रा के परिजनों ने खुलासा किया कि कॉलेज के वाट्सएप ग्रुप पर छात्रा के मोबाइल से आपत्तिजनक वीडियो वायरल किए गए थे, जिनमें छात्रा का चेहरा स्पष्ट दिख रहा था जबकि युवक ने अपना चेहरा इमोजी से छिपा रखा था। परिजनों ने आरोप लगाया कि पीयूष वीडियो बनाकर छात्रा को ब्लैकमेल कर रहा था और उसके परिचितों को भी वीडियो भेज रहा था। मोबाइल टॉवर लोकेशन मुंबई मिलने पर तत्काल अंधेरी पुलिस स्टेशन को सूचना देकर आरोपी की फोटो भेजी गई, जिसके आधार पर मुंबई पुलिस ने उसे दबोच लिया। अब इंदौर पुलिस आरोपी को शहर लाकर गहन पूछताछ करेगी, जिससे पूरे घटनाक्रम की परतें खुलने की उम्मीद है।

UP के आजमगढ़ दंगों का मामला: अदालत ने 12 आरोपियों को किया दोषी घोषित

आजमगढ़  यूपी के आजमगढ़ के मुबारकपुर कस्बे में 27 साल पूर्व शिया-सुन्नी दंगे के दौरान हुई युवक की हत्या के मुकदमे में सुनवाई पूरी करने के बाद कोर्ट ने 12 लोगों को दोषी करार दिया है। उनकी सजा 17 फरवरी को सुनाई जाएगी। यह फैसला जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयप्रकाश पांडेय ने शुक्रवार को सुनाया। मामले में कुल 16 आरोपी थी। सुनवाई की अवधि के बीच चार की मौत हो गई। अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी मुकदमा नासिर हुसैन ने मुबारकपुर थाने में 30 अप्रैल 1999 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तहरीर में नासिर हुसैन ने बताया कि उसके चाचा अली अकबर निवासी पूराख्वाजा 27 अप्रैल 1999 से लापता थे। अली अकबर के लड़के जैगम ने 28 अप्रैल को गुमशुदगी की सूचना थाने में दी थी। 30 अप्रैल को अली की सिर कटी लाश राजा भाट के पोखरे से बरामद की गई। पुलिस की विवेचना के दौरान यह पता चला कि मोहर्रम के जुलूस से लौटते समय अली अकबर की सुन्नी समुदाय के लोगों ने मारपीट कर हत्या कर दी थी। अभियोजन पक्ष की तरफ से डीजीसी फौजदारी प्रियदर्शी पीयूष त्रिपाठी और एडीजीसी दीपक कुमार मिश्रा ने कुल नौ गवाहों को कोर्ट में परीक्षित कराया। चार लोगों की मुकदमे के दौरान हो गई थी मौत दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने 12 लोगों को हत्या का दोषी करार दिया। अदालत ने सजा पर सुनवाई के लिए 17 फरवरी की तिथि निर्धारित की है। बता दें कि पुलिस ने कुल 14 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। बाद में दो और लोगों को न्यायालय ने बतौर मुलजिम तलब किया। इस तरह कुल 16 आरोपी हो गए थे। 16 आरोपियों में से हाजी मोहम्मद सुलेमान निवासी दुल्हनपुरा, नजीबुल्लाह निवासी पूरासोफी, हमीदुल्लाह उर्फ झीनक निवासी हैदराबाद और हाजी अब्दुल खालिक निवासी हैदराबाद की मुकदमे के दौरान मौत हो गई। सिर कटी लाश मिलने से भड़की थी हिंसा मुबारकपुर कस्बे में 30 अप्रैल 1999 को पूराख्वाजा निवासी अली अकबर की पोखरे में सिरकटी लाश मिलने के बाद शिया और सुन्नी समुदाय के बीच हिंसा भड़क गई थी। रुक-रुककर करीब 19 महीने तक मुबारकपुर सुलगता रहा। दोनों समुदायों के बीच विवाद की शुरुआत मोहर्रम के दिन हुई थी। मुबारकपुर कस्बे में मोहर्रम की नौवीं की रात जुलूस निकाला जा रहा था। कस्बे के पुरासोफी टुन्न स्थित शिया समुदाय के इमामबाड़ा के बगल में महिलाओं के बैठने के लिए पर्दा लगाया गया था। दसवीं के दिन सुबह किसी ने पर्दे में आग लगा दी। सुबह 11 बजे शिया समुदाय की तरफ से जुलूस निकाला जाना था। पर्दा जलाने की बात थोड़ी देर में ही कस्बे में फैल गई। जिसके बाद शिया समुदाय के लोगों ने जुलूस निकालने से मना कर दिया। 19 महीने तक सुलगता रहा मुबारकपुर, 17 ने गंवाई जान मामले की जानकारी होने के बाद प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। अफसरों ने शिया समुदाय के लोगों को समझाकर जुलूस निकलवाना शुरू किया। दोपहर में कस्बे के भुतही पक्कड़ के पास जुलूस पर कुछ लोगों ने पत्थर और गर्म पानी फेंक दिया। जिसके बाद विवाद बढ़ता चला गया। पुलिस के रिकार्ड के मुताबिक, पूराख्वाजा निवासी अली अकबर की कर्बला जाते समय सुन्नी समुदाय के लोगों ने पीटने के साथ ही चाकू मारकर हत्या कर दी। इस घटना के बाद दोनों तरफ से लोग बवाल पर आमादा थे। प्रशासन की सख्ती और पुलिस की सूझबूझ के बाद किसी तरह बवाल टला, लेकिन दोनों समुदायों में अंदर ही अंदर चिंगारी भड़कती रही। जनवरी 2000 में यह चिंगारी फिर शोला बन गई। सुन्नी समुदाय के तीन लोग साड़ी का कारोबार कर वाराणसी से मुबारकपुर लौट रहे थे, तभी कस्बे के शाह मोहम्मदपुर मोहल्ले में तीनों लोगों की हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद बवाल बढ़ने लगा। दोनों पक्षों के लोग एक बार फिर आमने-सामने आ गए थे, लेकिन प्रशासन की सख्ती के कारण बड़ी घटना टल गई। पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी। जिसके बाद करीब नौ महीने तक कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। हालांकि दोनों पक्षों के लोग ताक में बैठे थे। नवंबर 2000 में आखिर उन्हें मौका मिल ही गया। कस्बे में करीब दर्जनभर जगहों पर एक साथ सुनियोजित तरीके से बम ब्लास्ट हुए। जिसमें दोनों पक्षों से तेरह लोगों की मौत हो गई। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में कई लोगों को कर दिया था बरी सुन्नी समुदाय के बीच हुए दंगे में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अगस्त 2023 में पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में 22 आरोपियों को बरी कर दिया था। मुकदमे के अनुसार, पांच नवंबर 2000 को मुबारकपुर कस्बे में वादी मुकदमा अजादर हुसैन शाम सात बजे अपनी दुकान में बैठा था। इस दौरान सुन्नी समुदाय के कई लोग धारदार हथियार लेकर पहुंचे। शिया समुदाय के खिलाफ नारा लगाते हुए व जान से मारने की धमकी देते हुए अजादार हुसैन की दुकान पर लूटपाट की। इस घटना में मुख्तार व मोहम्मद हुसैन घायल हो गए। पुलिस ने इस मामले में कुल 26 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। आरोपी खलीलुर्रहमान, फुरतुल ऐम, एहकसामुर्रहमान, नौशाद की मौत हो गई। कुल सात गवाहों को अदालत ने पेश किया गया था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद 22 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। पुलिस जांच में थे 14 आरोपी, बाद में हो गए 16 शिया-सुन्नी बवाल के दौरान युवक की हत्या के मुकदमे में तेरह आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट 22 जुलाई 1999 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में भेजी गई। जबकि एक आरोपी हुसैन अहमद के विरुद्ध 21 नवंबर 1999 को चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित की गई। मुकदमे की फाइल 5 फरवरी 2002 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सत्र न्यायालय में भेज दी। सत्र न्यायालय ने सुनवाई करते हुए 24 जुलाई 2002 को मुकदमे में 14 आरोपियों पर आरोप तय किया। प्रारंभिक गवाहों के बयान के आधार पर 18 जनवरी 2005 को मुकदमे में दिलशाद तथा वसीम अहमद को धारा 319 सीआरपीसी के तहत आरोपी के तौर पर कोर्ट ने तलब किया। इन दोनों आरोपियों के विरुद्ध 31 जनवरी 2005 को आरोप तय किया गया। अदालत ने इन 12 लोगों को माना हिंसा का दोषी 1. हुसैन अहमद, हैदराबाद 2. मोहम्मद अयूब … Read more

लाहौर के गुरुद्वारा साहिब में पार्टिशन के बाद पहली बार गूंजी गुरबाणी

चंडीगढ़. लाहौर के मॉल रोड स्थित एचिसन कॉलेज परिसर में बने पुरातन गुरुद्वारा साहिब में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक और भावनात्मक सिख शबद कीर्तन आयोजित हुआ व अरदास की गई। इसमें पाकिस्तान के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा सहित स्थानीय सिख संगत और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। डॉ. तरुणजीत सिंह बुतालिया ने कॉलेज प्रशासन के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया। वर्ष 1947 के बाद सिख विद्यार्थियों की अनुपस्थिति के कारण यह गुरुद्वारा साहिब बंद हो गया था। परंतु इसकी देखरेख कॉलेज प्रशासन द्वारा लगातार की जाती रही। यह विशेष शबद कीर्तन कॉलेज की 140वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। कॉलेज की आधारशिला 3 नवंबर 1886 को अविभाजित पंजाब के शाही और प्रमुख परिवारों को उच्च शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से रखी गई थी। 1886 में हुई थी कॉलेज की स्थापना ज्ञात हो कि कि एचीसन कॉलेज का इतिहास काफी पुराना रहा है। इस कॉलेज की स्थापनी 3 नवंबर, 1886 को अविभाजित पंजाब के शाही परिवारों और मुख्य घरानों के बच्चों को शिक्षा देने के इरादे से की गई थी। कॉलेज कैंपस में मौजूद  गुरुद्वारे की डिजाइन प्रसिद्ध सिख वास्तुकार राम सिंह ने तैयार की थी। यह उस समय के मेयो स्कूल ऑफ आर्ट्स से जुड़े थे, जिसे आज नेशनल कॉलेज ऑफ आर्ट्स के नाम से जाना जाता है

निखिल गुप्ता मामले में सजा की संभावना और अमेरिका की डिमांड पर अपडेट

न्यूयॉर्क खालिस्तानी आतंकवादी और अमेरिकी नागरिक गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश वाले मामले में एक बड़ा नाटकीय मोड़ आया है। इस मामले के मुख्य आरोपी 54 साल के भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने शुक्रवार को अमेरिकी अदालत के समक्ष अपना गुनाह कबूल कर लिया है। यह कदम उनके पिछले रुख से बिल्कुल उलट है। जून 2024 में चेक गणराज्य से प्रत्यर्पण के बाद से वे लगातार खुद को निर्दोष बता रहे थे। निखिल गुप्ता ने अमेरिकी मजिस्ट्रेट जज सारा नेटबर्न के समक्ष तीन गंभीर आरोपों में अपना दोष स्वीकार किया है। उनके खिलाफ सुपारी देकर हत्या कराने, हत्या की साजिश रचने और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश रचने का आरोप है। उन्होंने इन तीनों में दोष कबूल कर लिया है। कानूनी विश्लेषकों का मानना है कि अभियोजकों द्वारा जुटाए गए पुख्ता सबूतों के कारण निखिल गुप्ता के पास अपना गुनाह कबूल करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। इस मामले की सुनवाई 30 मार्च से शुरू होने वाली थी, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक संचार और वायरटैप की गई बातचीत पेश की जानी थी। इन रिकॉर्डिंग्स में कथित तौर पर निखिल गुप्ता को एक हिटमैन के साथ 1,00,000 डॉलर की सुपारी पर बातचीत करते हुए सुना गया था। अपना गुनाह कबूल करने के बाद अब निखिल गुप्ता एक हाई-प्रोफाइल ट्रायल से बच जाएंगे, जिसमें उन्हें अधिकतम 40 साल की सजा हो सकती थी। हालांकि सजा का अंतिम निर्णय न्यायाधीश के विवेक पर निर्भर करेगा, लेकिन अमेरिकी सरकार ने गुप्ता के लिए 21 से 24 साल की कैद की सिफारिश की है। सीनियर जिला जज विक्टर मरेरो आने वाले महीनों में सजा सुनाने के लिए औपचारिक सुनवाई की तारीख तय करेंगे। इस पूरी साजिश के केंद्र में भारत की खुफिया एजेंसी रॉ (RAW) के पूर्व अधिकारी विकास यादव का नाम भी उछला है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि यादव ने ही पन्नू की हत्या के समन्वय के लिए गुप्ता को भर्ती किया था। साल 2024 के अंत में यादव के खिलाफ संघीय गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, लेकिन वे फिलहाल भारत में हैं। भारत सरकार ने पुष्टि की है कि विकास यादव अब सरकारी सेवा में नहीं हैं, लेकिन उनके प्रत्यर्पण को लेकर फिलहाल कोई सहमति नहीं जताई गई है। भारत की आंतरिक जांच समिति ने स्वीकार किया है कि उक्त अधिकारी के आपराधिक लिंक थे, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं थी। कौन है गुरपतवंत सिंह पन्नू? गुरपतवंत सिंह पन्नू 'सिख फॉर जस्टिस' (SFJ) नामक संगठन का जनरल काउंसल है, जो अमेरिका में सक्रिय है। हाल के महीनों में पन्नू ने भारत विरोधी गतिविधियों को तेज किया है, जिसमें अमेरिकी शहरों में खालिस्तान जनमत संग्रह आयोजित करना, एयर इंडिया के बहिष्कार के वीडियो जारी करना और भारत विरोधी हरकतों के लिए इनामों की घोषणा करना शामिल है। इन गतिविधियों के कारण भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पन्नू के खिलाफ आतंकवाद से संबंधित नए मामले दर्ज किए हैं।

सुपर 8 की रेस तेज: T20 वर्ल्ड कप 2026 में आज तय होगा किसका सफर खत्म

नई दिल्ली T20 World Cup 2026 super 8 scenario: भारत और श्रीलंका में खेले जा रहे आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 को शुरू हुए 7 दिन बीत चुके हैं। 7 दिन में 21 मुकाबले खेले जा चुके हैं। हर दिन की तरह आज यानी शनिवार 14 फरवरी को भी 3 मैच होने हैं, लेकिन अभी तक एक भी टीम को सुपर 8 का टिकट नहीं मिला है और न ही कोई टीम टूर्नामेंट से आधिकारिक तौर पर एलिमिनेट हुई है। हालांकि, आज यानी 14 फरवरी को एक टीम एलिमिनेट हो जाएगी, जबकि एक टीम को सुपर 8 का टिकट मिल जाएगा। पूरा सिनेरियो क्या है? ये समझ लीजिए। दरअसल, आज यानी 14 फरवरी को 3 मुकाबले होने हैं, जिनमें एक मैच आयरलैंड वर्सेस ओमान, दूसरा मैच इंग्लैंड वर्सेस स्कॉटलैंड और तीसरा मैच न्यूजीलैंड वर्सेस साउथ अफ्रीका है। इनमें से एक मैच ऐसा है, जिसमें कोई भी टीम हारे वह टूर्नामेंट से एलिमिनेट हो जाएगी और उसके सुपर 8 में पहुंचने के सारे रास्ते बंद हो जाएंगे, जबकि एक मैच में जीतने वाली टीम सुपर 8 में अपनी जगह पक्की कर लेगी। पहले बात उस मैच की करते हैं, जो कि एलिमिनेटर की तरह है। ये मैच है आयरलैंड वर्सेस ओमान मैच, जो कोलंबो के एसएससी में खेला जाना है। इस मैच में जीतने वाली टीम सुपर 8 की रेस में बनी रहेगी, लेकिन सुपर 8 में पहुंचने के लिए उसे बहुत मेहनत करनी होगी और अन्य टीमों के नतीजों पर भी निर्भर रहना होगा, जबकि हारने वाली टीम का सफर समाप्त हो जाएगा। हालांकि, उसका एक मुकाबला बाकी रहेगा, जो वह अगले कुछ दिनों में खेलेगी। ये दोनों टीमें ग्रुप बी में हैं और पॉइंट्स टेबल में सबसे आखिरी पायदानों पर विराजमान हैं। इस मैच की विजेता टीम टूर्नामेंट में जीवित रहेगी, लेकिन हारने वाली टीम इस ग्रुप में किसी भी स्थिति में टॉप 2 में नहीं जा पाएगी और एलिमिनेट हो जाएगी, क्योंकि हारने वाली टीम ज्यादा से ज्यादा 2 अंकों तक पहुंच सकती है और इस ग्रुप में पहले से ही दो टीमों के 4-4 अंक हो गए हैं। ऐसे में यह मैच खास होगा। वहीं, अगर बात करें कि सुपर 8 में कौन सी टीम आज पहुंच सकती है तो इनमें साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड का नाम शामिल है। ग्रुप डी में ये टीमें हैं। दोनों टीमें 2-2 मैच जीत चुकी हैं। एक और मैच जीतकर टीम के खाते में 6 पॉइंट हो जाएंगे और ग्रुप की हालत और टीमों को देखें तो साफ पता चलता है कि 6 अंकों से क्वालिफिकेशन पक्की है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि शायद न हो, क्योंकि 6 या इससे ज्यादा अंक इस ग्रुप में इन दोनों टीमों के अलावा यूएई भी हासिल कर सकती है।

पटवारी-आरआई 15 दिन बाद हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटे

मुंगेली. जिले के लोरमी तहसील में पिछले 15 दिनों से चल रहा पटवारी, राजस्व निरीक्षक (आरआई) और तहसीलदार के बीच का गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। कलेक्टर के मार्गदर्शन और हस्तक्षेप के बाद उनके निर्देशन में प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के अधिकारियों तथा पटवारी-आरआई संगठनों के बीच बैठक आयोजित की, जिसमें आपसी सामंजस्य से समाधान निकाल लिया गया। इसके बाद हड़ताली पटवारी और राजस्व निरीक्षक अपने-अपने कार्य पर लौट आए। दरअसल, पटवारी और राजस्व निरीक्षक संघ ने लोरमी तहसील में पदस्थ तहसीलदार शेखर पटेल को हटाने की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया था। हड़ताली कर्मचारियों का आरोप था कि तहसीलदार द्वारा कार्य के दौरान अनावश्यक दबाव और प्रताड़ना दी जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर 29 जनवरी से लोरमी तहसील के पटवारी और आरआई अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब तीन दिनों के लिए जिला पटवारी–आरआई संघ ने भी समर्थन दे दिया। वहीं कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ (नायब तहसीलदार एवं तहसीलदार) ने तहसीलदार शेखर पटेल को हटाने की स्थिति में जोरदार विरोध दर्ज कराने की बात कही थी। संघ पदाधिकारियों ने कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी नाराजगी और मांगें रखी थीं। लगातार बढ़ते गतिरोध और प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की स्थिति को देखते हुए कलेक्टर को हस्तक्षेप करना पड़ा। वहीं कलेक्टर द्वारा बुलाई गई बैठक में सभी पक्षों को विस्तार से सुना गया। बैठक में आपसी संवाद, संयम और प्रशासनिक मर्यादा बनाए रखते हुए कार्य करने पर सहमति बनी। कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि कर्मचारियों की जो भी जायज मांगें या शिकायतें हैं, उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए गए। इससे पहले उन्होंने मीटिंग में राजस्व प्रकरणों के मामलों का तेजी से निपटारा करने के निर्देश दिए, साथ ही शासन एवं जिला प्रशासन के प्राथमिकता वाले कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों, नीतिगत बदलावों और भविष्य की दिशा का व्यापक खाका प्रस्तुत किया

उत्तर प्रदेश ने तय की है अपराध व अव्यवस्था से अनुशासन और कर्फ्यू से कानून के राज की यात्राः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों, नीतिगत बदलावों और भविष्य की दिशा का व्यापक खाका प्रस्तुत किया सीएम योगी ने कहा, उत्तर प्रदेश अब भय का नहीं, विश्वास और विकास का प्रदेश है अपराध व अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि मानसिकता और नीतिगत प्रतिबद्धता का परिणामः मुख्यमंत्री राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारीः सीएम योगी लखनऊ  राज्यपाल के अभिभाषण पर शुक्रवार को विधानसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले नौ वर्षों की यात्रा अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा है। कर्फ्यू से कानून के राज की यात्रा है। उपद्रव से उत्सव की यात्रा है। समस्या से समाधान की यात्रा है और अविश्वास से आत्मविश्वास की यात्रा है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों, नीतिगत बदलावों और भविष्य की दिशा का व्यापक खाका प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश अब भय का नहीं, विश्वास और विकास का प्रदेश है। अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि मानसिकता और नीतिगत प्रतिबद्धता का परिणाम है। राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।  विपक्ष का आचरण संवैधानिक प्रमुख और मातृशक्ति का अपमान मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष की शुरुआत में राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की उपलब्धियों और भावी योजनाओं का आधिकारिक दस्तावेज होता है। इस दौरान विपक्षी दलों के सदस्यों का सदन में आचरण अनुचित था। नेता प्रतिपक्ष पर सवाल खड़े हुए करते हुए सीएम ने कहा कि संभवतः इसीलिए आप सदन में उपस्थित नहीं हुए, क्योंकि समाजवादी पार्टी के सदस्य आपके नियंत्रण से बाहर रहे होंगे। यही वह आचरण था, जिससे बिटिया घबराती थी और व्यापारी कारोबार समेटता था। मुख्यमंत्री ने विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए गालिब का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गालिब ने कहा था 'उम्र भर मैं ये भूल करता रहा, धूल चेहरे पर थी और आईना साफ करता रहा।' समाजवादी पार्टी के और मुख्य विपक्षी दलों के इस आचरण के कारण पूरा सदन अपने आप को आहत महसूस कर रहा था।  ‘परसेप्शन’ और कानून-व्यवस्था पर जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की छवि अचानक खराब नहीं हुई थी, बल्कि वर्षों तक चले अव्यवस्थित आचरण और अपराध के वातावरण ने उसे प्रभावित किया था। बेटियां भयभीत थीं, व्यापारी अपना कारोबार समेटने को मजबूर थे और दंगे-कर्फ्यू आम बात थे। 2017 के बाद से प्रदेश में “जीरो टॉलरेंस” नीति लागू की गई है। 2017 से पहले नीतिगत उदासीनता और प्रशासनिक शिथिलता का माहौल था, जबकि अब कानून का राज स्थापित हुआ है। 2017 के बाद से कोई सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ है और प्रदेश में भयमुक्त वातावरण बना है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा विकास का लाभ राज्यपाल के अभिभाषण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि “डबल इंजन सरकार” के प्रयासों से 6 करोड़ से अधिक लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला गया है। यह आंकड़ा नीति आयोग के अनुसार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गरीबी से बाहर आने का अर्थ यह नहीं कि लाभार्थियों को अन्य योजनाओं से वंचित किया जाएगा। राशन, स्वास्थ्य, आवास, पेंशन और अन्य सुविधाएं जारी रहेंगी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हर गरीब को पक्का घर उपलब्ध कराया जा रहा है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा दिया जा रहा है। निःशुल्क राशन की व्यवस्था जारी है। वृद्ध, निराश्रित और दिव्यांगजन को 12,000 रुपये वार्षिक पेंशन दी जा रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। पुलिस सुधार और आधुनिक सुरक्षा तंत्र मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पुलिस बल में बड़े पैमाने पर भर्ती की गई है। पुलिस बल में महिलाओं की संख्या 10,000 से बढ़कर आज 44,000 हो गई है। 2017 से पहले हमारी प्रशिक्षण क्षमता 3,000 भी नहीं थी। आज यह स्थिति है कि हाल में 60,200 से अधिक पुलिस भर्ती की गईं, जिसके सभी चयनितों को प्रदेश में ही ट्रेनिंग दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराध से निपटने के लिए सभी 75 जिलों में साइबर थाने की स्थापना के साथ-साथ प्रदेश के हर थाने में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित की गई है। फॉरेंसिक साइंस इकोसिस्टम को मजबूत किया गया है, जिससे जांच प्रक्रिया अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी हुई है। बीमारू से विकास की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब “बीमारू राज्य” की छवि से बाहर निकल चुका है। पहली बार आर्थिक सर्वेक्षण को सदन में व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया गया, जो “विचार से व्यवस्था और व्यवस्था से विकास” की यात्रा का प्रतीक है। उन्होंने इसे अविश्वास से आत्मविश्वास की ओर बढ़ता प्रदेश बताया, जहां पहले उपद्रव की खबरें सुर्खियां बनती थीं, अब निवेश, इन्फ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक कल्याण की खबरें प्रमुखता पा रही हैं।  उत्तर प्रदेश आज ट्रिपल-टी की त्रिवेणी बनकर उभरा मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 9 वर्ष की जो यात्रा है, ये अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा है, कर्फ्यू से कानून के राज की यात्रा है, उपद्रव से उत्सव की यात्रा है, समस्या से समाधान की यात्रा है और अविश्वास से आत्मविश्वास की यात्रा है। यानी ये यात्रा केवल एक सत्ता प्राप्त करने की होड़ नहीं है, इसको प्राप्त करने के लिए सरकार की स्पष्ट नीति थी, साफ नीयत थी, दृढ़ इच्छाशक्ति थी और सुशासन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हम लोगों ने जब सामूहिक रूप से प्रयास किया, हर व्यक्ति के मन में विश्वास भरा,  हां यूपी भी कर सकता है, यूपी से भी परिणाम दिए जा सकते हैं और वही आज उत्तर प्रदेश के अंदर देखने को मिल रहा है। आज उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य नहीं है, आज यह ट्रिपल-टी का एक प्रतीक बना है। ट्रिपल टी मतलब टेक्नोलॉजी, ट्र्स्ट और ट्रांसफॉर्मेशन। यानी एक त्रिवेणी बनकर के उभरा है।  2017 के पहले केंद्र सरकार की योजनाओं का बॉटलनेक था उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री … Read more

सीएम योगी ने स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप, डेटा सेंटर और रोजगार सृजन पर विस्तार से रखा पक्ष

उत्तर प्रदेश इमर्जिंग टेक्नोलॉजी और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसरः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीएम योगी ने स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप, डेटा सेंटर और रोजगार सृजन पर विस्तार से रखा पक्ष एआई, डिजिटल टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, डेटा साइंस, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में नए सेंटर स्थापित किएः मुख्यमंत्री  आज की आवश्यकता है कि अधिक से अधिक युवाओं को भविष्य उन्मुख तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाएः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  लखनऊ उत्तर प्रदेश विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य सरकार की नीतियों, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को कौशल, तकनीक और उद्यमिता से जोड़कर उत्तर प्रदेश को इमर्जिंग टेक्नोलॉजी और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर कर रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि स्किल डेवलपमेंट और आईटीआई व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत आते हैं। सरकार ने व्यावसायिक शिक्षा के ढांचे को आधुनिक तकनीकों से जोड़ते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, डेटा साइंस, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में नए सेंटर स्थापित किए हैं। उन्होंने बताया कि टाटा टेक्नोलॉजी के सहयोग से प्रत्येक जनपद के दो आईटीआई को इमर्जिंग टेक्नोलॉजी से जोड़ा जा रहा है। इन संस्थानों को ‘हब एंड स्पोक मॉडल’ पर विकसित किया जा रहा है, ताकि एक केंद्रीय संस्थान से जुड़े अन्य संस्थानों को तकनीकी संसाधन और प्रशिक्षण सहायता मिल सके। उन्होंने कहा कि आज की आवश्यकता है कि अधिक से अधिक युवाओं को भविष्य उन्मुख तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाए। इमर्जिंग टेक्नोलॉजी आधारित कोर्स से युवाओं को जोड़ा गया मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से स्किल डेवलपमेंट और तकनीकी उन्नयन को नई दिशा मिली है। तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए पाठ्यक्रमों को आधुनिक बनाया है। माध्यमिक शिक्षा के तहत प्रत्येक जनपद के राजकीय कॉलेजों को इमर्जिंग टेक्नोलॉजी आधारित कोर्स से जोड़ा जा रहा है। विद्यार्थियों को डेटा उपयोग, इंटरनेट सुविधा और डिजिटल संसाधनों से सशक्त करने की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने सीएम युवा उद्यमी योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि अब तक 1,10,000 युवाओं को 10 प्रतिशत मार्जिन मनी के साथ ब्याज-मुक्त और गारंटी-मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि योजना में चयन और प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाया गया है, ताकि युवा सफल उद्यमी बन सकें। उन्होंने महिला उद्यमियों के लिए भी विशेष योजना लागू करने की बात कही गई। साथ ही स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के माध्यम से युवाओं के डिजिटल सशक्तिकरण पर भी जोर दिया जा रहा है। स्टार्टअप और निवेश में वृद्धि मुख्यमंत्री ने कहा कि स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्टैंडअप इंडिया जैसी पहलों को प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू किया गया है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 20,000 से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं। 76 इनक्यूबेटर, 7 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और 8 यूनिकॉर्न राज्य में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश से पलायन रोजगार के अभाव और कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण होता था। अब कानून-व्यवस्था में सुधार और निवेश अनुकूल वातावरण के चलते रोजगार के अवसर बढ़े हैं और निवेश में वृद्धि हुई है। डेटा सेंटर और एआई पर फोकस मुख्यमंत्री ने बजट में घोषित यूपी डेटा अथॉरिटी और डेटा सेंटर क्लस्टर की स्थापना को भविष्य की जरूरत बताया। उनका कहना था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए डेटा सेंटर बुनियादी ढांचा आवश्यक है और उत्तर प्रदेश इस दिशा में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। इमर्जिंग टेक्नोलॉजी की फैब यूनिट स्थापना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के औद्योगिक विकास की नई दिशा का संकेत है। बेरोजगारी दर 19 से 2.24 प्रतिशत पर आई मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछली सरकार के समय लगभग 19 प्रतिशत रही बेरोजगारी दर अब घटकर 2.24 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने इसे नीतिगत सुधार, निवेश वृद्धि और कानून-व्यवस्था में सुधार का परिणाम बताया। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि विकास कार्यों को लेकर अविश्वास की स्थिति उसी मानसिकता को दर्शाती है, जो सीमित दृष्टिकोण से बाहर नहीं निकल पाती। उन्होंने कहा कि प्रदेश ने पिछले वर्षों में व्यापक परिवर्तन देखा है और सरकार विकास, निवेश और रोजगार सृजन की दिशा में प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को तकनीक, नवाचार और युवा शक्ति के माध्यम से देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य लेकर सरकार आगे बढ़ रही है।

एराज मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में आयोजित हुआ पेशेंट सेफ्टी कार्यक्रम

एराज मेडिकल कालेज एण्ड हॉस्पिटल में हुआ पेशेंट सेफ्टी  कॉन्क्लेव-2026 । विशेषज्ञों ने कहा कि "एआई हर मर्ज की दवा नहीं हो सकता"  लखनऊ   एराज मेडिकल कालेज एण्ड हॉस्पिटल में संपन्न हो रहे पेशेंट सेफ्टी कॉन्क्लेव-2026 में विशेषज्ञों ने एक मत से माना कि "एआई हर मर्ज की दवा नहीं हो सकता" दो दिनों तक चलने वाले पेशेंट सेफ्टी कॉन्क्लेव-2026 में उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के कुलपति प्रो. अजय सिंह ने बताया कि मरीज की सुरक्षा (पेशेंट सेफ्टी) किसी एक चिकित्सक या स्टाफ की जिम्मेदारी नहीं यह एक टीम वर्क है। चिकित्सीय पेशे में त्रुटि (कॉम्लीकेशन) और गलती (एरर) में अंतर होता है। उन्होंने कहा कि मरीज की सुरक्षा में होने वाली 50 फीसद से ज्यादा गलतियों को रोका जा सकता है साथ ही एआई (आर्टिफिशियन इंटेलिजेंस) हर मर्ज की दवा नहीं हो सकती हालांकि पेशेंट सेफ्टी में एआई मददगार बन सकता है इलाज के दौरान होने वाली गलतियों को AI पूरी तरह से रोक नहीं सकता इसके लिए लगातार सीखने की जरूरत है। मुख्य अतिथि प्रो. अजय एराज लखनऊ मेडिकल कालेज एण्ड हॉस्पिटल में आयोजित पेशेंट सेफ्टी कॉन्क्लेव-2026 में  उन्होंने बताया कि जब भी बात होती है तो बड़े अस्पतालों या चिकित्सा संस्थानों को लेकर ही योजनाएं बनाई जाती हैं। पीएचसी और सीएचसी पर भी ध्यान देने की जरूरत है। वहां गलतियों की संभावना अधिक है जो मरीज के लिए साबित होती हैं। प्रो. अजय ने बताया कि अगर किसी प्रोसीजर में डाक्टर से गलती हो जाए तो उसे सुधारे न कि गलती करने वाले का नाम सार्वजनिक करें। ऐसा करना डाक्टर के प्रति मरीज के मन में विश्वास को कम करता है। उन्होंने सलाह दी कि मरीज की सुरक्षा के प्रति बने मानकों के बारे में युवा डाक्टरों को लगातार प्रशिक्षित करें। उन्हें उन बिन्दुओं पर सीखाएं जहां चूक की संभावना अधिक होती है। कार्यक्रम में आए इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ क्वालिटी मैनेजमेंट के निदेशक डॉक्टर गिरधन ज्ञानी ने बताया कि आज कई चिकित्सा संस्थानों और अस्पतालों में पेशेंट सेफ्टी पर कोई बात ही नहीं करता। इसी का कारण है कि गड़बडिय़ों की संभावना लगातार बनी रहती है। करीब 60 प्रतिशत गलतियों मानवीय चूक के कारण होती हैं। इनको रोकने के लिए सबसे बेहतर तरीका मॉनीटरिंग बढ़ाना है। चाहे आईसीयू हो, ओटी हो, ओपीडी या वार्ड निगरनी तंत्र मजबूत होने से गलतियां कम होंगी। इस अवसर पर एराज मेडिकल कालेज के लिए तैयार पेशेंट सेफ्टी सिवोनियर और पेशेंट सेफ्टी फ्लायर का लोकार्पण भी किया गया।  काम में गलती हो तो सुधारें जरूर: वीसी एरा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अब्बास अली महदी ने बताया कि काम करने पर गलतियां होने की संभावना हमेशा बनी रहती है। अगर गलती हो तो उसे समझें। गलती से सीखें और उसे सुधारें जरूर तभी मरीज की जान बचाना आसान होगी। उन्होंने युवा चिकित्सकों और स्टाफ को सलाह दी कि गलती हो जाए तो उसे स्वीकार करें और सुधारने की कोशिश करें। गलती को अनदेखा न करें क्योंकि चिकित्सीय पेशे में एक ही गलती को बार बार दोहराना उचित नहीं है। कार्यक्रम में एरा यूनिवर्सिटी की प्रो-वीसी प्रोफेसर फरजाना महदी ने कहा कि गलतियों को कम करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करें। तकनीक का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है और इसका लाभ मरीजों को मिले इसके लिए जरूरी है कि डाक्टर नई तकनीक को हमेशा सीखते रहें।  पेशेंट सेफ्टी कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने दी सलाह  – डॉ. नीलिमा क्षीरसागर ने कहा कि ‘उचित दवा लेखन कौशल ही रोगी सुरक्षा की नींव है।’ दवा देने के साथ ही मरीज की शंकाओं का समाधान जरूरी करें।  – डॉ. बिकाश मेधी ने कहा कि कम्युनिकेशन स्किल पर ध्यान दें। भाषा सबंधी गलतियों से भी मेडिकेशन एरर हो सकती है जिसका खामियाजा मरीज को भुगतना पड़ता है।  – डॉ. बनानी पोद्दार ने कहा कि मरीज के अनुसार मानक बदल जाते हैं। गर्भवती महिला और साठ साल के बुजुर्ग को एक ही बीमारी में समान दवा नहीं दी जा सकती। उनकी दवाएं अलग-अलग होंगी।