samacharsecretary.com

इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने शुरू किया 4 वर्षीय BA-BEd पाठ्यक्रम, दाखिले हेतु प्रवेश परीक्षा आवेदन शुरू

इलाहाबाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से चार वर्षीय एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (बीए-बीएड) शुरू करने की घोषणा की है। यह आइटीईपी (सेकेंडरी स्टेज) कोर्स है। आइटीईपी कार्यक्रम शिक्षा नीति को ध्यान में रखकर समग्र शिक्षक तैयार करने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत छात्र प्रमुख विषयों जैसे भूगोल, अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान, इतिहास, हिंदी और अर्थशास्त्र में से कोई एक विषय चुन सकते हैं, इसके साथ ही वे शिक्षा में भी मेजर कर सकते हैं। कार्यक्रम में प्रवेश राष्ट्रीय सामान्य प्रवेश परीक्षा (एनसीईटी)-2026 से होंगे। यह परीक्षा राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) आयोजित करेगी। परीक्षा 17 अप्रैल 2026 को होगी। अहम तिथियां आवेदन पत्र ऑनलाइन जमा करने की तिथि 12 फरवरी से 10 मार्च 2026 क्रेडिट/डेबिट कार्ड/नेट-बैंकिंग/यूपीआई के माध्यम से शुल्क कीअंतिम तिथि 11 मार्च 2026 फॉर्म में करेक्शन की तिथि – 12 मार्च से 14 मार्च 2026 परीक्षा शहर की घोषणा – बाद में तिथि घोषित होगी एडमिट कार्ड – बाद में तिथि घोषित होगी परीक्षा की तिथि – 17 अप्रैल 2026 आवेदन फीस जनरल कैटेगरी के कैंडिडेट्स के लिए एप्लीकेशन फीस 1200 रुपये है। OBC-NCL और EWS कैंडिडेट्स के लिए फीस 1000 रुपये है। SC, ST, PwD और थर्ड जेंडर कैंडिडेट्स को 650 रुपये देने होंगे। एलएलबी के छात्रों ने मांगा पंचम सेमेस्टर का परिणाम इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विधि विभाग में एलएलबी (ऑनर्स) तृतीय वर्ष (षष्ठम सेमेस्टर) के छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। छात्रों ने कुलपति व इविवि प्रशासन को शुक्रवार को ज्ञापन सौंपकर दिसंबर में आयोजित पंचम सेमेस्टर की परीक्षा का परिणाम घोषित करने की मांग की। कहा कि परिणाम घोषित न होने के कारण वे अखिल भारतीय बार परीक्षा के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। इसके लिए ऑनलाइन पंजीकरण 11 फरवरी से शुरू है और अंतिम तिथि 30 अप्रैल है। इस परीक्षा के पंजीकरण के लिए प्रथम से पंचम सेमेस्टर तक की अंकतालिकाएं अपलोड करना अनिवार्य है। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि 30 अप्रैल से पहले परिणाम घोषित नहीं किए गए तो पूरा बैच इस महत्वपूर्ण परीक्षा से वंचित रह जाएगा। इससे छात्रों का आठ महीने का समय बर्बाद होगा। ज्ञापन सौंपने वालों में छात्रनेता गोलू पासवान, प्रियांशु यादव, शिवम सिंह, राहुल चौधरी, विश्वजीत प्रजापति, सक्षम आदि शामिल रहे।

बिहार बोर्ड और CBSE 10वीं की 17 फरवरी से होगी परीक्षा

पटना. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की मैट्रिक वार्षिक परीक्षा 2026 का आयोजन 17 से 25 फरवरी तक होगा। परीक्षा राज्य के सभी जिलों में निर्धारित केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। प्रथम पाली के लिए सुबह 8:30 बजे से प्रवेश मिलेगा। द्वितीय पाली के लिए दोपहर एक बजे से प्रवेश की अनुमति रहेगी। परीक्षा शुरू होने से आधा घंटा पहले मुख्य द्वार बंद कर दिया जाएगा। छात्रों को समय से पहले केंद्र पहुंचने की सलाह दी गई है। प्रथम पाली की परीक्षा से पहले प्रवेश एक घंटा पूर्व से शुरू होगा। दोपहर 1:30 बजे द्वितीय पाली के लिए मुख्य द्वार बंद कर दिया जाएगा। लेट पहुंचने वाले छात्रों को प्रवेश नहीं मिलेगा। एडमिट कार्ड और आवश्यक दस्तावेज साथ रखना जरूरी है। केंद्र पर अनुशासन और नियमों का पालन अनिवार्य होगा। बोर्ड ने सभी छात्रों से निर्देशों का गंभीरता से पालन करने को कहा है। CBSE की परीक्षा भी 17 से इसी दिन से Central Board of Secondary Education की 10वीं परीक्षा भी शुरू हो रही है। राज्य में हजारों छात्र दोनों बोर्ड की परीक्षाओं में शामिल होंगे। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। अभिभावकों से भी अपील की गई है कि बच्चों को समय से भेजें। परीक्षा के दौरान अनुचित साधनों के प्रयोग पर सख्ती रहेगी। सभी केंद्रों पर निगरानी की व्यवस्था की गई है। बिना तनाव ऐसे करें रिविजन विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा से पहले हल्का और योजनाबद्ध रिविजन करें। आखिरी समय में नया विषय शुरू करने से बचें। छोटे-छोटे ब्रेक लेकर पढ़ाई करें ताकि दिमाग तरोताजा रहे। पर्याप्त नींद और संतुलित आहार भी जरूरी है। सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास सफलता की कुंजी है। तनाव मुक्त रहकर परीक्षा देने से बेहतर प्रदर्शन संभव है।

खुले नाले ने ली मासूम की जान, पटना में दो साल की बच्ची की दर्दनाक मौत

पटना पटना में दिल्ली की तरह हादसा हुआ है, जहां एक खुले नाले के चैंबर में गिरकर दो साल की मासूम बच्ची की मौत हो गई। घटना फुलवारीशरीफ की है। स्थानीय लोगों ने नगर परिषद पर लापरवाही का आरोप लगाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। खुले नाले में गिरने से दो साल की बच्ची की मौत, अब पटना में दिल्ली जैसा हादसा बिहार के पटना में खुले नाले में गिरने से शनिवार को दो साल की मासूम बच्ची की जान चली गई। घटना फुलवारीशरीफ के रायचौक की है। बताया जा रहा है कि बच्ची खेलते-खेलते नाले के पास चली गई और उसके खुले चेंबर के अंदर गिर गई। स्थानीय लोगों ने प्रशासन की लापरवाही से बच्ची की मौत का आरोप लगाया है। हाल के दिनों में ऐसी कुछ घटनाएं दिल्ली और नोएडा जैसे शहरों से भी आ चुकी हैं, जहां खुले मैनहोल और गड्ढों में गिरकर लोगों की जानें चली गईं। उनमें भी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई थीं। पटना के फुलवारीशरीफ में नाले में गिरकर जान गंवाने वाली दो साल की मासूम का नाम खादिजा था। शनिवार को वह लापता हुई तो घर वालों ने उसकी खोजबीन शुरू की। आसपास के लोगों से पूछने के बाद भी कहीं बच्ची का पता नहीं चला तो इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए। जब नाले के पास स्थित एक मकान का सीसीटीवी फुटेज देखा गया, तो बच्ची खुले चैंबर में गिरती हुई नजर आई। इसके बाद तुरंत बच्ची को नाले से निकाला गया और पटना एम्स ले जाया गया। हालांकि, अस्पताल के डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद घर में मातम छा गया। बच्ची का परिवार मूलरूप से असम का रहने वाला बताया जा रहा है। इस घटना से स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश है। उन्होंने फुलवारीशरीफ नगर परिषद पर लापरवाही का आरोप लगाया है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। लोगों का कहना है कि खुले नाले को कई जगहों पर ढंका नहीं गया है, इस वजह से हादसा हो गया। दिल्ली में समस्तीपुर के मजदूर की ऐसे ही हुई मौत समस्तीपुर जिले से मजदूरी करने दिल्ली गए बिरजू कुमार की 5 दिन पहले खुले मैनहोल में गिरने से मौत हो गई थी। यह घटना रोहिणी क्षेत्र में हुई। बताया गया कि बीते सोमवार की रात को बिरजू रास्ते से गुजर रहा था। तभी एक खुले मैनहॉल में गिर गया। मंगलवार को इसकी सूचना प्रशासन को मिली तो फायर ब्रिगेड की टीम ने उसकी तलाश की। शाम को उसका शव मैनहोल से निकाला गया। बिरजू की मौत के बाद बिहार में मौजूद उसकी बूढ़ी मां, जवान पत्नी और तीन बच्चों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। इससे पहले, 5 फरवरी को भी दिल्ली में ऐसा एक और हादसा हुआ था। बैंक कर्मी 25 वर्षीय कमल ध्यानी बाइक से घर लौट रहा था। तभी वह दिल्ली जल बोर्ड द्वारा खोदे गए 15 फीट गहरे खुले गड्ढे में जा गिरा और उसकी मौत हो गई। पिछले महीने दिल्ली से सटे नोएडा में भी सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहरा की ऐसे ही मौत हुई थी। उसकी कार 16-17 जनवरी की रात को एक पान से भरे गड्ढे में समा गई थी। मदद के लिए घंटों इंतजार के बाद भी उसकी जान नहीं बचाई जा सकी थी। इन मामलों में प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया और देश भर में चर्चा का विषय बने।

भारत मॉडल की ओर झुकाव! 70% बांग्लादेशी ने ‘जुलाई चार्टर’ को दी मंजूरी

ढाका   बांग्लादेश के इतिहास में 12 फरवरी, 2026 की तारीख एक नए युग की शुरुआत के रूप में दर्ज हो गई है। देश में संपन्न हुए आम चुनावों में तारिक रहमान के नेतृत्व वाले बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) गठबंधन ने 297 में से 210 सीटों पर धमाकेदार जीत दर्ज की है। इस जीत के साथ ही, लगभग 35 वर्षों में तारिक रहमान बांग्लादेश के पहले पुरुष प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार हैं। यह चुनाव केवल सत्ता हस्तांतरण के लिए नहीं था, बल्कि देश की शासन प्रणाली को पूरी तरह से बदलने के लिए एक राष्ट्रीय जनमत संग्रह भी था। चुनाव आयोग द्वारा शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जनमत संग्रह में 60.26 प्रतिशत मतदान हुआ। इनमें से 70 प्रतिशत लोगों ने भारत की तरह संसदीय व्यवस्था के पक्ष में मतदान किया है। मतदाताओं ने व्यापक सुधार पैकेज, जिसे "जुलाई चार्टर 2025" के रूप में जाना जाता है, के कार्यान्वयन के पक्ष में भारी जनादेश दिया है। हां के पक्ष में 4,80,74,429 मत मिले हैं। यह स्पष्ट बहुमत है। वहीं, ना के पक्ष में 2,25,65,627 पड़े हैं। आयोग के वरिष्ठ सचिव अख्तर अहमद ने मीडिया को बताया कि जनता ने देश के पुनर्गठन के पक्ष में अपनी मुहर लगा दी है। क्या है जुलाई चार्टर? यह चार्टर अगस्त 2024 में प्रधान मंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाने वाले छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के बाद तैयार किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य सत्ता के केंद्रीकरण को रोकना और राज्य की प्रमुख संस्थाओं को पुनर्गठित करना है ताकि भविष्य में तानाशाही और फासीवादी शासन की पुनरावृत्ति न हो। इस चार्टर में 84 सुधार बिंदु शामिल हैं, जिन्हें लागू करने के लिए एक संवैधानिक सुधार परिषद (Constitutional Reform Council) 270 कार्य दिवसों के भीतर काम करेगी। जुलाई चार्टर के प्रमुख प्रस्ताव 1. प्रधानमंत्री कार्यकाल की सीमा: सत्ता के दीर्घकालिक केंद्रीकरण को रोकने के लिए प्रधानमंत्री के लिए सख्त कार्यकाल सीमा निर्धारित करना। 2. द्विसदनीय संसद: विधायी शक्ति को संतुलित करने के लिए 100 सीटों वाले एक नए उच्च सदन का निर्माण, जिसमें सीटें पार्टी के राष्ट्रीय वोट शेयर के आधार पर आवंटित की जाएंगी। आपको बता दें कि भारत में भी लोकसभा और राज्यसभा जैसी दो सदन वाली संसदीय व्यवस्था है। 3. कार्यकारी शक्तियों में कमी: प्रधानमंत्री कार्यालय की शक्तियों को कम करने के लिए राष्ट्रपति की भूमिका को मजबूत करना। 4. न्यायिक और संस्थागत स्वतंत्रता: न्यायपालिका और अन्य प्रमुख राज्य संस्थाओं को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखने के उपाय। 5. विपक्ष की भागीदारी: प्रमुख संसदीय समितियों का नेतृत्व करने और डिप्टी स्पीकर के रूप में सेवा करने के लिए विपक्षी नेताओं के प्रावधान शामिल करना। 6. जुलाई सेनानियों को सुरक्षा: विद्रोह में भाग लेने वाले प्रतिभागियों जिन्हें "जुलाई सेनानी" कहा जाता है, को सुरक्षा प्रदान करना। 7. महिलाओं का प्रतिनिधित्व: संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाना। यह तीसरी बार है जब बांग्लादेश में सुधारों का चार्टर पेश किया गया है। अब BNP की नई सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह इन सुधारों को कैसे लागू करती है और पिछले शासन की अस्थिरता के बाद देश को स्थिरता की ओर कैसे ले जाती है।  

अमृतसर एयरपोर्ट पर फ्लाइट से उतरे यात्री से डेढ़ करोड़ के गांजे के साथ पकड़ा

अमृतसर. अमृतसर के श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कस्टम विभाग को उस समय बड़ी सफलता मिली, जब उन्होंने नशा तस्करी के एक मामले का पर्दाफाश किया। विभाग ने एयरपोर्ट पर एक यात्री के पास से करीब 1 करोड़ 64 लाख रुपए की कीमत का गांजा बरामद किया है। मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किया गया व्यक्ति बैंकॉक से अमृतसर एयरपोर्ट पहुंचा था। जब अधिकारियों ने उसकी तलाशी ली तो उसके कब्जे से 1 किलो 654 ग्राम गांजा बरामद हुआ। कस्टम विभाग ने नशीले पदार्थ को जब्त कर लिया है और आरोपी को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

जन्म कुंडली का शिव रहस्य – 12 राशियाँ, 12 ज्योतिर्लिंग और आपका आध्यात्मिक संबंध

शिवलिंग केवल पत्थर नहीं है. यह सृष्टि की मूल ऊर्जा का प्रतीक है. इसका गोलाकार ऊपरी भाग आकाश का प्रतीक माना जाता है और उसका आधार, जिसे योनिपीठ कहते हैं, पृथ्वी का प्रतीक है. यह शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है चेतना और ऊर्जा का एकत्व. महाशिवरात्रि की रात को भक्त शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाते हैं. यह केवल पूजा की विधि नहीं है, बल्कि उस अनंत चेतना के प्रति समर्पण है. बारह ज्योतिर्लिंग: शिव तत्व के बारह प्रकाश-स्थल भारत में स्थित 12 ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के सबसे पवित्र और स्वयंभू (खुद से प्रकट) धाम माने जाते हैं. इन्हें अनंत प्रकाश स्तंभ (स्तंभ रूप ज्योति) का प्रतीक माना जाता है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, ये 12 ज्योतिर्लिंग 12 राशियों (राशि चक्र) से जुड़े हुए हैं और हर किसी के लिए एक तरीके से व्यक्तिगत तीर्थ के रूप में काम करते हैं, जिससे ग्रहों के प्रभाव संतुलित होते हैं, बाधाएं दूर होती हैं और आध्यात्मिक उन्नति मिलती है. 12 ज्योतिर्लिंग और राशियों का संबंध वैदिक ज्योतिष में व्यक्ति की राशि (चंद्र राशि या लग्न) के अनुसार संबंधित ज्योतिर्लिंग की उपासना खास फलदायी मानी जाती है. मेष  – रामेश्वरम (तमिलनाडु) यह अग्नि तत्व का प्रतीक है. इससे आवेग और अधीरता पर नियंत्रण मिलता है तथा स्पष्टता आती है. वृषभ  – सोमनाथ (गुजरात) यह चंद्रमा के रक्षक रूप में माना जाता है. इससे भावनात्मक स्थिरता और सहनशीलता बढ़ती है. मिथुन – नागेश्वर (गुजरात) यह विष और राहु/सर्प दोष से रक्षा का प्रतीक है. इससे बौद्धिक स्पष्टता और चंचलता पर नियंत्रण मिलता है. कर्क – ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश) यह जल तत्व और गुरु के ज्ञान का प्रतीक है. इससे मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन प्राप्त होता है. सिंह – वैद्यनाथ (झारखंड) यह पंचम भाव (बुद्धि/मन) का प्रतीक माना जाता है. इससे अहंकार कम होता है, स्वास्थ्य लाभ और ऊर्जा की पुनर्स्थापना होती है. कन्या – मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश) यह पृथ्वी तत्व और बुध की उच्च अवस्था से जुड़ा है. इससे सेवा, कर्तव्य और आध्यात्मिक उन्नति में संतुलन आता है. तुला – महाकालेश्वर (मध्य प्रदेश) यह काल (समय/शनि) और न्याय का प्रतिनिधित्व करता है. इससे जीवन में सामंजस्य और संतुलन स्थापित होता है. वृश्चिक – घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र) यह परिवर्तन और तीव्रता (केतु/मंगल) से जुड़ा है. इससे आध्यात्मिक जागरण और आत्म-नवीनीकरण होता है. धनु – काशी विश्वनाथ (उत्तर प्रदेश) यह मोक्ष और ज्ञान के मार्ग का प्रतीक है. इससे वैराग्य और उच्च ज्ञान की प्राप्ति होती है. मकर – भीमाशंकर (महाराष्ट्र) यह कर्तव्य और धैर्य का प्रतीक है. इससे अनुशासन के माध्यम से सफलता प्राप्त करने की शक्ति मिलती है. कुंभ  – केदारनाथ (उत्तराखंड) यह उच्च दर्शन और वैराग्य (राहु/शनि) से जुड़ा है. इससे गहन ध्यान और जीवन के उच्च उद्देश्य की अनुभूति होती है. मीन – त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र) यह शुक्र की उपचारात्मक शक्ति और पवित्र जल से जुड़ा है. इससे भावनाओं की शुद्धि और आध्यात्मिक विकास होता है. व्यक्तिगत आध्यात्मिक उन्नति: अपनी राशि से जुड़े ज्योतिर्लिंग की उपासना आत्मा (आत्म तत्व) से जुड़ने का माध्यम मानी जाती है. इससे पूर्व जन्म के पापों का क्षय होता है. ग्रह दोषों का शमन: यदि जन्म कुंडली में कोई ग्रह नीच, अशुभ या पीड़ित अवस्था में हो, तो संबंधित ज्योतिर्लिंग की पूजा से उसके नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं. आध्यात्मिक ऊर्जा और शुद्धि: ये 12 तीर्थ अत्यंत शक्तिशाली ऊर्जा केंद्र माने जाते हैं. श्रद्धा है कि इनकी उपासना व्यक्ति की चेतना को उच्च स्तर पर ले जाती है. ब्रह्मांडीय सामंजस्य: कहा जाता है कि 12 ज्योतिर्लिंगों के स्थान शंख या फिबोनाची पैटर्न जैसी सर्पिल संरचना बनाते हैं, जो दिव्य ब्रह्मांडीय ऊर्जा के प्रवाह का प्रतीक है. जीवन की बाधाओं से मुक्ति: प्रत्येक ज्योतिर्लिंग की अपनी विशिष्ट ऊर्जा है, जैसे महाकालेश्वर काल और स्वास्थ्य से जुड़े कष्टों के निवारण के लिए, जबकि काशी विश्वनाथ मोक्ष और ज्ञान के लिए विशेष माने जाते हैं. इस प्रकार 12 ज्योतिर्लिंग केवल तीर्थ स्थल ही नहीं, बल्कि वैदिक ज्योतिष और आध्यात्मिक साधना के महत्वपूर्ण केंद्र भी माने जाते हैं.

शिक्षा में उत्कृष्टता की ओर कदम — एमबी पावर स्कूल अब DAV प्रबंधन के साथ।

अनुपपुर. एमबी पावर (मध्य प्रदेश) लिमिटेड, प्रबंधन के द्वारा, परियोजना टाउनशिप स्थित 10+2 सीबीएसई संबद्ध विद्यालय का संचालन एवं प्रबंधन, DAV कॉलेज ट्रस्ट एवं मैनेजमेंट सोसायटी को सौंपने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय विद्यालय के शैक्षणिक मानकों, आधारभूत संरचना और समग्र प्रशासन को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विद्यालय की स्थापना, कर्मचारियों के बच्चों, परियोजना प्रभावित परिवारों तथा आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। बता दें कि यह संस्थान वर्षो से सामाजिक एवं शैक्षणिक विकास के क्षेत्र में जाना जाने बाला एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। देश की अग्रणी शैक्षणिक श्रृंखला DAV वर्तमान में भारतभर में 1000 से अधिक शिक्षण संस्थानों का संचालन कर रही है। मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में 136 से अधिक विद्यालयों का सफल संचालन DAV द्वारा किया जा रहा है। उत्कृष्ट शैक्षणिक परिणाम, अनुशासित वातावरण, संस्कारयुक्त शिक्षा एवं विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए DAV विद्यालयों की व्यापक पहचान है। ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकास : "कंपनी परिसर में स्थित इस स्कूल को पेशेवर प्रबंधन द्वारा शिक्षा के एक 'उत्कृष्टता केंद्र' (Center of Excellence) के रूप में निखारा जाएगा।" उत्कृष्टता (Excellence) की दिशा में विशेष प्रयास इन बिंदुओं पर आधारित होंगे : * शैक्षणिक गुणवत्ता एवं परिणामों में निरंतर सुधार * शिक्षकों का नियमित प्रशिक्षण एवं आधुनिक शिक्षण पद्धतियों का अनुपालन * सह-पाठयक्रम एवं खेल गतिविधियों का विस्तार * डिजिटल लर्निंग एवं स्मार्ट शिक्षण साधनों का समावेश * मूल्य-आधारित शिक्षा, अनुशासन एवं चरित्र निर्माण "नया प्रबंधन विद्यालय की आत्मनिर्भरता और सामुदायिक सेवा के बीच एक आदर्श संतुलन स्थापित करने के प्रति संकल्पित है, ताकि सेवा का मूल उद्देश्य निरंतर बना रहे।" "कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह परिवर्तन विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए किया गया है। संस्थान इस परिवर्तन की अवधि (Transition Period) को पूर्णतः पारदर्शी और सुचारु बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।" बेहतर शिक्षा की ओर एक मजबूत कदम — उज्ज्वल भविष्य की नई नींव।

रुद्राक्ष महोत्सव के लिए सिहोर में ट्रैफिक और ट्रेन इंतजाम, देवास मार्ग में डायवर्ट लागू

सिहोर सीहोर स्थित कुबेरेश्वर धाम में आयोजित रुद्राक्ष महोत्सव के मद्देनजर देवास, सीहोर प्रशासन ने ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया है। इसके अलावा रेलवे ने भी शुक्रवार से स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया है। बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए इंदौर से भोपाल जाने वाले यात्रियों ने भी सड़क मार्ग के बजाए रेलमार्ग को ज्यादा सुविधाजनक समझा है। इस कारण इंदौर से भोपाल जाने वाली ट्रेनों में भी आम दिनों की तुलना में ज्यादा भीड़ नजर आ रही है।   पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल ने 14 से 20 फरवरी तक चलने वाले इस आयोजन को ध्यान में रखते हुए 21 जोड़ी ट्रेनों का सिहोर में अस्थायी ठहराव शुरू किया है। इसके अलावा उज्जैन से सीहोर व भोपाल के बीच तीन जोड़ी स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। यदि भीड़ बढ़ती है तो अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन किया जा सकता है। इसके अलावा भोपाल की ओर जाने वाली सभी ट्रेनें इंदौर के प्लेटफार्म नंबर दो से संचालित होंगी। उज्जैन की ओर जाने वाली सभी ट्रेनें प्लेटफार्म संख्या एक से संचालित होंगी। भीड़ नियंत्रण के लिए 'क्राउड होल्डिंग एरिया' और नए प्रवेश नियम लागू सीहोर स्थित कुबेरेश्वर धाम में 14 से 20 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाले भव्य रुद्राक्ष महोत्सव को लेकर पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने अभूतपूर्व तैयारियां की हैं। संभावित भारी भीड़ को देखते हुए सीहोर रेलवे स्टेशन पर पैदल ऊपरी पुल (FOB) को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। यात्रियों को ट्रेन आने तक स्टेशन परिसर में बनाए गए विशेष 'क्राउड होल्डिंग एरिया' में रोका जाएगा। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म व्यवस्था में बदलाव करते हुए भोपाल की ओर जाने वाली ट्रेनों के लिए प्लेटफॉर्म नंबर 2 और उज्जैन की ओर जाने वाली ट्रेनों के लिए प्लेटफॉर्म नंबर 1 निर्धारित किया गया है, ताकि यात्रियों का आवागमन सुव्यवस्थित रहे। 21 जोड़ी ट्रेनों का ठहराव और स्पेशल रेल सेवाओं का संचालन श्रद्धालुओं की सुगम यात्रा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ने 13 से 22 फरवरी तक सीहोर स्टेशन पर 21 जोड़ी ट्रेनों का अस्थायी ठहराव दिया है। साथ ही उज्जैन और सीहोर/भोपाल के बीच 3 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। मंडल रेल प्रबंधक (DRM) अश्वनी कुमार ने स्वयं स्टेशन का निरीक्षण कर सुरक्षा और सुविधाओं का जायजा लिया है। यात्रियों की सहायता के लिए अतिरिक्त टिकट काउंटर खोले गए हैं और वाणिज्य विभाग का विशेष दस्ता तैनात किया गया है, ताकि टिकट खिड़कियों पर लंबी कतारों से बचा जा सके। सुरक्षा और यात्री सुविधाओं पर रेलवे का विशेष ध्यान अभेद सुरक्षा घेरा: RPF, GRP और सीसीटीवी से पैनी नजर महोत्सव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए RPF और GRP के अतिरिक्त जवानों के साथ-साथ सिविल डिफेंस टीम को भी तैनात किया गया है। पूरे स्टेशन परिसर की सीसीटीवी कैमरों के जरिए मंडल कार्यालय से सीधी मॉनिटरिंग की जा रही है। चिकित्सा आपात स्थिति के लिए डॉक्टरों की टीम और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इसके अतिरिक्त, यात्रियों के लिए स्वच्छ पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और पर्याप्त शौचालयों का प्रबंध किया गया है। मेला क्षेत्र से लेकर स्टेशन तक दिशा-सूचक बैनर लगाए गए हैं ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को रास्ते खोजने में कोई असुविधा न हो। स्टेशन परिसर में विशेष ‘क्राउड होल्डिंग एरिया’ बनाया गया है, जहां यात्रियों को ट्रेन आगमन से पूर्व रोका जाएगा तथा ट्रेन आने पर ही प्लेटफार्म पर प्रवेश दिया जाएगा, जिससे प्लेटफार्म पर अनावश्यक भीड़ एकत्रित न हो। प्लेटफार्म एवं स्टेशन परिसर में व्यापक बैरिकेडिंग की गई है। आने और जाने के लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए हैं। स्टेशन के गेटों पर सुरक्षा कर्मी नियुक्त किए गए हैं। स्टेशन परिसर में सीसीटीवी कैमरों के जरिए भी निगरानी की जा रही है। आपको बता दें कि तीन साल पहले सीहोर में शिवरात्रि के दौरान हुए महोत्सव में लाखों की संख्या में लोग जुटे थे। इस कारण इंदौर-भोपाल रोड पर लंबा जाम लगा था। हालांकि इस बार रुद्राक्ष नहीं बांटे जा रहे हैं।  भारी वाहनों के लिए रूट     भोपाल से आने वाले भारी वाहन: थाना परवलिया के मुबारकपुर जोड़ एवं थाना खजूरी के तुमड़ा जोड़ से होते हुए श्यामपुर-कुरावर-ब्यावरा-शाजापुर-मक्सी मार्ग से देवास और इंदौर जा सकेंगे.     देवास-इंदौर से भोपाल जाने वाले भारी वाहन: देवास से मक्सी-शाजापुर-ब्यावरा-कुरावर-श्यामपुर मार्ग से होकर भोपाल पहुंचेंगे. छोटे और सवारी वाहनों के लिए रूट     भोपाल से आष्टा-देवास-उज्जैन-इंदौर जाने वाले छोटे वाहन: सीहोर न्यू क्रिसेंट चौराहा से भाऊखेड़ी जोड़-अमलाहा होते हुए आष्टा, देवास, उज्जैन और इंदौर जा सकेंगे.     इंदौर-उज्जैन-देवास से भोपाल जाने वाले छोटे वाहन: आष्टा-अमलाहा-भाऊखेड़ी जोड़-न्यू क्रिसेंट चौराहा मार्ग से भोपाल पहुंचेंगे. कुबेरेश्वर धाम आने वाले वाहनों को नहीं रहेगा डायवर्जन भोपाल, इंदौर, देवास और उज्जैन से सीधे कुबेरेश्वर धाम कथा स्थल पर आने वाले वाहनों को किसी डायवर्जन का सामना नहीं करना पड़ेगा. वे नियमित हाईवे मार्ग से सीधे धाम तक पहुंच सकेंगे. धाम परिसर में बनाई गई विभिन्न पार्किंग में वाहन व्यवस्थित रूप से पार्क किए जाएंगे. आईजी और डीआईजी ने की समन्वय बैठक रूद्राक्ष महोत्सव के सुरक्षित और सफल आयोजन को लेकर पुलिस कंट्रोल रूम सीहोर में अहम बैठक आयोजित की गई. बैठक में आईजी देहात जोन भोपाल संजय तिवारी, डीआईजी देहात रेंज भोपाल राजेश सिंह चंदेल और एसपी सीहोर दीपक कुमार शुक्ला सहित सीहोर, भोपाल देहात, भोपाल शहर, रेलवे और देवास जिले के अधिकारी मौजूद रहे. बैठक में दिए गए प्रमुख निर्देश     सभी डायवर्जन पॉइंट्स पर बैरिकेडिंग, टेंट, टेबल-कुर्सी, पीए सिस्टम, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.     डायवर्जन मार्गों पर नियमित पेट्रोलिंग की जाए.     आपात स्थिति के लिए बड़ी क्रेन, गैस कटर/वेल्डिंग कटर और मैकेनिक उपलब्ध रहें.     सभी प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं.     सीमावर्ती जिलों के अधिकारियों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान किया जाए.     रेलवे स्टेशन के प्रवेश और निकास मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं.     ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान समय पर विशेष निगरानी रखी जाए.     श्रद्धालुओं के लिए अस्थायी होल्डिंग एरिया बनाए जाएं, जहां पानी, प्रकाश और शौचालय की व्यवस्था हो.     रेलवे बल और आरपीएफ आपसी समन्वय से पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार कार्य करें.

पीएम मोदी ने असम में साधा कांग्रेस पर निशाना, बोले- सत्ता से दूर होकर और तीखी हुई पार्टी

गुवाहाटी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम में कांग्रेस पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है. उन्होंने कांग्रेस की तुलना ‘जहर’ से करते हुए कहा कि सत्ता से 10 साल दूर रहने के कारण यह पार्टी और भी ज्यादा खतरनाक हो गई है. उन्होंने जनता को आगाह किया कि कांग्रेस असम की शांति और संस्कृति के लिए सबसे बड़ा खतरा है. वह शनिवार को गुवाहाटी में कई परियोजनाओं का शुभारंभ करने के बाद एक जनसभा में बोल रहे थे. पीएम मोदी ने कांग्रेस की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह पार्टी असम को फिर से पुराने दौर में ले जाना चाहती है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस असम को फिर से अशांति और अराजकता में झोंकना चाहती है. पीएम मोदी ने सीधा आरोप लगाया कि कांग्रेस तुष्टिकरण के लिए असम को ‘घुसपैठियों के हवाले’ करना चाहती है. उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस का एजेंडा असम की असली पहचान और संस्कृति को मिटाना है. पीएम मोदी ने कांग्रेस की मानसिकता पर प्रहार करते हुए कहा, “10 वर्ष सत्ता से बाहर रहने की वजह से कांग्रेस और ज्यादा जहरीली हो गई है.” उनका इशारा था कि सत्ता पाने के लिए कांग्रेस किसी भी हद तक जा सकती है, चाहे इसके लिए राज्य की सुरक्षा से समझौता ही क्यों न करना पड़े. ‘कांग्रेस कभी भारत का भला नहीं कर सकती’ कांग्रेस पर हमला करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “जो कांग्रेस भारत को राष्ट्र मानने से भी इनकार करती हो… जो सवाल करते हैं कि मां भारती क्या होती है, जो मां भारती के नाम तक से परहेज करती हो, जो मां भारती के प्रति जरा सा सम्मान तक नहीं दिखाते, वो कांग्रेस कभी भारत का भला नहीं कर सकती. आज की कांग्रेस हर उस विचार… हर उस आतंकी को कंधे पर बिठाती है… जो देश का बुरा सोचता है. जो लोग देश के टुकड़े-टुकड़े करने का सपना देखते हैं… जो लोग, नॉर्थईस्ट को भारत से अलग करने के नारे लगाते हैं… वो कांग्रेस के लिए पूजनीय बन चुके हैं.” बजट में रखा गया नॉर्थ-ईस्ट का ध्यान पीएम मोदी ने कहा, कांग्रेस के समय असम को टैक्स के हिस्से के रूप में सिर्फ 10 हजार करोड़ रुपये मिलते थे. अब भाजपा सरकार में असम को कांग्रेस सरकार के मुकाबले 5 गुना ज्यादा रुपये मिल रहे हैं. अगर पिछले 11 वर्ष की बात करें तो असम को तमाम विकास परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से 5.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक मिले हैं. बजट में बहुत अधिक फोकस नॉर्थ-ईस्ट को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर है. इस बार असम को टैक्स की हिस्सेदारी के रूप में लगभग 50 हजार करोड़ रुपये मिलने वाले हैं. कांग्रेस के समय असम को कैसे पाई-पाई के लिए तरसा कर रखा जाता था. वो आपको भलीभांति याद होगा.” अगले 5 साल गेम-चेंजर: पीएम मोदी विपक्ष पर हमले के बाद पीएम मोदी ने असम के विकास का रोडमैप भी रखा. उन्होंने कहा कि आने वाले 5 साल असम के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. इस दौरान कई बड़े प्रोजेक्ट्स पूरे होने वाले हैं, जो असम की ग्रोथ को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे. पीएम ने जनता से अपील की कि विकास की इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए यहां ‘डबल इंजन’ (केंद्र और राज्य में भाजपा) की सरकार फिर एक बार बहुत जरूरी है. ‘नॉर्थ ईस्ट हमारे लिए अष्ठलक्ष्मी की तरह’ पीएम मोदी ने आगे कहा, “अभी कुछ दिन पहले ही देश का बजट आया है. बजट के बाद असम का और नार्थईस्ट का मेरा ये पहला दौरा है. जिस नार्थईस्ट को कांग्रेस ने हमेशा नजरअंदाज किया, हम उस नार्थईस्ट की भक्तिभाव से सेवा कर रहे हैं. नॉर्थ ईस्ट हमारे लिए अष्ठलक्ष्मी है. इस वर्ष का बजट… अष्टलक्ष्मी के लिए BJP-NDA के vision को और मजबूती देने वाला है.” भाजपा कार्यकर्ताओं की तारीफ भाजपा के कार्यकर्ताओं की प्रशंसा करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आज भाजपा जहां पहुंची है, उसका श्रेय अगर किसी को मिलता है, तो वो सिर्फ और सिर्फ भाजपा के कार्यकर्ताओं को जाता है. हमारा विश्वास संगठन में है. हम राष्ट्रजीवन में परिवर्तन का आधार संगठन की शक्ति मानते हैं. इसलिए, इतनी बड़ी तादाद में जमीन की जड़ों से जुड़े हुए कार्यकर्ताओं के दर्शन करना बहुत बड़ा सौभाग्य है. हम लोग एक ही मंत्र को लेकर जिए हैं, हम लोग एक ही मंत्र को साकार करने के लिए अपने आप को खपा रहे हैं.”

मोदी कैबिनेट का बड़ा ऐलान: 4 राज्यों में बिछेंगे रेलवे के पटरियों के जाल, लागत 1.6 लाख करोड़

नई दिल्ली  देश में तेज विकास और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. कैबिनेट बैठक में रेलवे, स्टार्टअप और डेवलपमेट से जुड़े कई बड़े फैसले लिए गए हैं. इन योजनाओं पर करीब 1.6 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. सरकार का कहना है कि इन फैसलों से देश के परिवहन नेटवर्क को मजबूती मिलेगी और आर्थिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलेगी. यह फैसला देश के विकास मॉडल को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ये फैसले लिए गए. आज शनिवार को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी है. अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार का फोकस रेलवे नेटवर्क के विस्तार, स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने पर है. उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी. सरकार का मानना है कि इन फैसलों से देश की लॉजिस्टिक लागत कम होगी और औद्योगिक विकास को नया बल मिलेगा. कैबिनेट के 1.6 लाख करोड़ के फैसलों में क्या-क्या शामिल है? सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे विस्तार, अर्बन चैलेंज फंड और स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड 2.0 जैसी बड़ी योजनाओं को मंजूरी दी है. इन योजनाओं का उद्देश्य देश के विकास को गति देना है. रेलवे विस्तार से माल और यात्री परिवहन आसान होगा, जबकि स्टार्टअप फंड से युवाओं को नए व्यवसाय शुरू करने में मदद मिलेगी. रेलवे प्रोजेक्ट्स में कौन-कौन से प्रमुख काम होंगे? कैबिनेट ने तीन बड़े रेलवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है. इसमें अंबाला से दिल्ली, कसारा से मनमाड और होसपेट से बल्लारी रेल मार्ग पर तीसरी और चौथी लाइन बनाई जाएगी. खास तौर पर 131 किलोमीटर लंबे कसारा-मनमाड सेक्शन पर करीब 10,154 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. यह कॉरिडोर मुंबई को उत्तर और पूर्व भारत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. स्टार्टअप इंडिया फंड 2.0 का क्या उद्देश्य है? सरकार का लक्ष्य स्टार्टअप सेक्टर को मजबूत करना और नवाचार को बढ़ावा देना है. इस फंड के जरिए नए व्यवसायों को वित्तीय सहायता मिलेगी. इससे युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और देश में टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा. इन फैसलों से आम लोगों को क्या फायदा होगा? रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से यात्रा आसान होगी और माल परिवहन तेज होगा. इससे व्यापार और उद्योग को फायदा मिलेगा. साथ ही स्टार्टअप योजनाओं से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आर्थिक विकास को गति मिलेगी. विकास को नई दिशा देने वाला मास्टरप्लान     सरकार का कहना है कि इन फैसलों से देश के परिवहन और लॉजिस्टिक सेक्टर में बड़ा बदलाव आएगा. रेलवे लाइन विस्तार से ट्रेनों की क्षमता बढ़ेगी और ट्रैफिक जाम कम होगा. इससे उद्योग और व्यापार को भी सीधा फायदा मिलेगा. सरकार का लक्ष्य देश को तेज रफ्तार विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाना है.     इन परियोजनाओं से क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिलेगा. खासकर औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों में निवेश बढ़ेगा. इससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार पर सरकार का फोकस     अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया है कि इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी. रेलवे विस्तार और शहरी विकास परियोजनाएं देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगी.     केंद्रीय कैबिनेट ब्रीफिंग में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह सिर्फ स्थान परिवर्तन नहीं है, बल्कि इतिहास से जुड़ा एक अहम बदलाव है. उन्होंने कहा कि साउथ ब्लॉक के कमरों ने देश के कई महत्वपूर्ण फैसले देखे हैं, जहां जवाहरलाल नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक के कार्यकाल के निशान मौजूद हैं. उन्होंने आगे बताया कि इन कमरों ने टाइपराइटर से डिजिटल युग तक का सफर देखा और यहीं कई अहम फैसले, जैसे सर्जिकल स्ट्राइक, लिए गए. करीब 95 साल बाद इन भवनों को खाली किया जा रहा है और यहां ‘युगे-युगीन भारत संग्रहालय’ बनाया जाएगा.     कैबिनेट ने तीन मल्टी-ट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है, जो 12 जिलों और दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र व कर्नाटक सहित चार राज्यों को कवर करेंगी. इन परियोजनाओं से भारतीय रेल के नेटवर्क में करीब 389 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी, जिससे रेल क्षमता बढ़ेगी, भीड़ कम होगी और माल एवं यात्री परिवहन तेज और सुगम होगा. इसके अलावा असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे 33.7 किलोमीटर लंबी अंडरवॉटर टनल परियोजना को मंजूरी दी गई है. इसे ट्विन-ट्यूब टनल बोरिंग मशीन डिजाइन से बनाया जाएगा. इसमें दोनों ट्यूब में दो-दो लेन सड़क होगी और एक ट्यूब में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर की भी व्यवस्था की जाएगी, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और विकास को बढ़ावा मिलेगा.