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बीएलओ से सीईओ तक सभी इलेक्शन कमीशन हैं, सभी की भूमिका महत्वपूर्ण: पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त रावत

हर वोट है महत्वपूर्ण : पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त परशुराम म.प्र. राज्य निर्वाचन आयोग को निर्वाचन आयोगों का कहा जाता है वर्ल्ड बैंक : राज्य निर्वाचन आयुक्त श्रीवास्तव राज्य निर्वाचन आयोग के 32वें स्थापना दिवस समारोह में वक्ताओं ने रखे विचार भोपाल बीएलओ से लेकर चीफ इलेक्शन ऑफिसर तक सभी इलेक्शन कमीशन हैं। निर्वाचन में सभी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। भारत निर्वाचन आयोग के पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओ.पी. रावत ने यह बात सोमवार को प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के 32वें स्थापना दिवस समारोह में कही। रावत ने "वन नेशन-वन इलेक्शन में स्थानीय निर्वाचन की भूमिका" विषय पर बोलते हुए कहा कि इस पर चर्चा 2015 में शुरू हई थी। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा इसमें सहमति व्यक्त की गयी थी। राज्य निर्वाचन आयोग जरूरी रावत ने कहा कि "वन नेशन-वन इलेक्शन" को लागू करने पर भी राज्य निर्वाचन आयोग जरूरी होंगे। पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनाव इनके माध्यम ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरी उम्मीद है कि "वन नेशन-वन इलेक्शन" का ड्राफ्ट जरूर मंजूर होगा। रावत ने माडल कोड ऑफ कंडक्ट के बारे में भी विस्तार से चर्चा की। चुनाव, चुनाव होता है, चाहे वह लोकसभा का हो या पंचायत का पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त आर. परशुराम ने "स्थानीय निर्वाचन में सुधार की चुनौती"  विषय पर कहा कि 'हर वोट-हर निकाय' महत्वपूर्ण है। परशुराम ने कहा कि चुनाव, चुनाव होता है, चाहे वह लोकसभा का हो या पंचायत का। उन्होंने कहा कि निर्वाचन में प्रिपेयर, प्रिपेयर और प्रिपेयर के फार्मूले का हमेशा पालन करना चाहिए। नवीनतम तकनीकों के उपयोग से घबराना नहीं चाहिए। म.प्र. राज्य निर्वाचन आयोग तुलनात्मक रूप से अधिक अधिकार संपन्न है। विभागाध्यक्ष दैनिक भास्कर स्कूल ऑफ जर्नलिज्म नरेन्द्र कुमार सिंह ने "जमीनी लोकतंत्र में पारदर्शी एवं निष्पक्ष चुनाव " विषय पर 1952 के प्रथम लोकसभा निर्वाचन से लेकर वर्तमान लोकसभा निर्वाचन तक के अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि सन 1977 के चुनावों ने सिद्ध कर दिया कि देश में मतदाता बहुत हुए जागरूक हैं और लोकतंत्र में आस्था मजबूत हुई। सिंह ने बताया कि ब्रिटेन में वर्ष 1928 में सभी को मताधिकार मिला जबकि भारत ने स्वतंत्र होने के साथ ही सभी को मताधिकार (युनिवर्सल एडल्ट फ्रेंचाइज) दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ ने "स्थानीय निर्वाचन में न्यायालीन सबक" विषय पर विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि संविधान एक जीवंत ग्रंथ है। उन्होंने निर्वाचन से संबधित कानूनी प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी। राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोगों की पिछली बैठक में मध्यप्रदेश को राज्य निर्वाचन आयोगों का वर्ल्ड बैंक कहा गया। उन्होंने रावत, परशुराम, सिंह और सेठ के द्वारा किये गये कार्यों का उल्लेख किया। श्रीवास्तव ने कहा कि यह समारोह विशेष इसलिए भी है, क्योंकि सभी उपस्थित अतिथियों ने निर्वाचन की यात्रा को प्रेरणा और दिशा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि इलेक्टोरल टेक्नॉलोजी में परशुराम ने मध्यप्रदेश को पॉयनियर बना दिया है। श्रीवास्तव ने कहा कि मैदानी अधिकारियों ने आयोग में नवाचारों को लागू करने में निष्ठा और मनायोग से काम किया। इससे हमारे आत्मविश्वास में वृद्धि हुई। अतिथियों ने आयोग के 'निर्वाचन साहित्य ई-बुक' का विमोचन और 'प्रेक्षा मोबाइल ऐप' का शुभारंभ किया। उन्होंने उल्लेखनीय कार्य करने वाले कलेक्टर्स, उप जिला निर्वाचन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया। सचिव राज्य निर्वाचन आयोग दीपक सिंह ने आभार व्यक्त किया। इस दौरान आयोग अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।  

UGC एक्ट को लेकर बढ़ा समर्थन, जिले में प्रदर्शन तेज, लोगों ने खोला मोर्चा

महाराजगंज आज महाराजगंज में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ। अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के शिक्षकों-छात्रों से जुड़े भेदभाव निरोधक प्रावधानों पर लगी रोक के विरोध में भारतीय बौद्ध महासभा व एससी, एसटी, ओबीसी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले लोगों ने जवाहरलाल नेहरू स्मारक पीजी कॉलेज से प्रदर्शन शुरू किया। यूजीसी एक्ट के समर्थन और विरोध में प्रदर्शनों का दौर थम नहीं रहा है। एक्ट के समर्थन और उच्च शिक्षा में समान अवसर और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की मांग को लेकर सोमवार को यूपी के महाराजगंज की सड़कों पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ। अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछड़ा वर्ग के शिक्षकों-छात्रों से जुड़े भेदभाव निरोधक प्रावधानों पर लगी रोक के विरोध में भारतीय बौद्ध महासभा व एससी, एसटी, ओबीसी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले सैकड़ों लोगों ने जवाहरलाल नेहरू स्मारक पीजी कॉलेज के खेल मैदान से नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन शुरू किया। जुलूस की शक्ल में जिला मुख्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को संबोधित छह सूत्रीय मांग पत्र प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। इसका नेतृत्व भारतीय बौद्ध महासभा के जिलाध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह व प्रांतीय महासचिव श्रवण कुमार पटेल ने किया। जिलाध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यूजीसी एक्ट का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान व दिव्यांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव पर सख्त रोक लगाना था। उनका आरोप था कि संबंधित प्रावधानों के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में प्रभावी पैरवी नहीं की, जिसके चलते आदेश पर स्थगन लग गया। प्रांतीय महासचिव श्रवण पटेल ने कहा कि यूजीसी की रिपोर्टों में दलित-पिछड़े वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव की घटनाओं में वृद्धि दर्ज है और उन्होंने आरोप लगाया कि उत्पीड़न व मानसिक दबाव के कारण कई छात्र आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हुए हैं। संयुक्त मोर्चा ने मांग की कि सरकार तत्काल हस्तक्षेप कर स्थगन हटवाए और पूर्व व्यवस्था बहाल कराए, जिससे विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में पारदर्शी, जवाबदेह व भेदभाव-मुक्त शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित किया जा सके। इस दौरान शिवमंगल गौतम, अरविन्द प्रताप निषाद, रामचंद्र बौद्ध, वकील प्रजापति, रामसमुझ मौर्या, डॉ. एलबी प्रसाद, हरिश्चन्द्र बौद्ध, बाल गोपाल, बैजनाथ बौद्ध, पदमाकर बौद्ध, प्रदीप कुमार गौतम, सुधाकर भारती, सतीश चन्द, नागेंद्र बौद्ध, सूर्यमनि प्रसाद, चन्द्रबली, अतुल, अमरनाथ यादव, मदन मोहन साहनी, शैलेश मौर्या सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।  

शहीद निरीक्षक आशीष शर्मा के भाई अंकित को मिली एसआई पद पर नियुक्ति

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस ने शहादत का सम्मान करते हुए बालाघाट में नक्कल आपरेशन के दौरान पिछले दिनों शहीद हुए है हॉक फोर्स के इंस्पेक्टर स्वर्गीय आशीष शर्मा के भाई अंकित शर्मा को उपनिरीक्षक पद पर नियुक्ति प्रदान की है। अंकित शर्मा ने जिला नरसिंहपुर में उपनिरीक्षक पद का पदभार ग्रहण कर लिया है। अमर शहीद स्वर्गीय आशीष शर्मा पुलिस-नक्सल मुठभेड़ के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए थे। मध्यप्रदेश शासन के आदेशानुसार अमर शहीद के भाई अंकित को उपनिरीक्षक पद पर विशेष अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की गई है।

8वें वेतन आयोग को लेकर सरकार की चेतावनी, कर्मचारियों के लिए अहम अपडेट

नई दिल्ली केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारी और पेंशनभोगी जहां 8वां वेतन आयोग के तहत संभावित वेतन बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे हैं, वहीं साइबर ठग उनकी इसी उत्सुकता का फायदा उठा रहे हैं। हाल ही में “8th पे कमीशन सैलरी कैलकुलटर” नाम का एक फर्जी ऐप तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे डाउनलोड करने के लिए लोगों को मैसेज और व्हाट्सएप के जरिए लिंक भेजे जा रहे हैं। दावा किया जाता है कि इस ऐप से कर्मचारी अपनी संशोधित सैलरी का हिसाब लगा सकते हैं, लेकिन असल में यह एक बड़ा साइबर फ्रॉड है। कई लोगों के साथ ठगी की घटनाएं सामने आने के बाद एजेंसियों ने चेतावनी जारी की है। सरकार की चेतावनी गृह मंत्रालय की साइबर सुरक्षा पहल Cyber Dost ने इस मामले को लेकर अलर्ट जारी किया है। बताया गया है कि यह ऐप किसी भी आधिकारिक प्लेटफॉर्म जैसे गुगल प्ले पर उपलब्ध नहीं है। ठग इसे APK फाइल के रूप में भेजते हैं और लोगों से कहते हैं कि इसे सीधे फोन में इंस्टॉल कर लें। आमतौर पर अनजान लोग यह समझ नहीं पाते कि APK फाइल को साइडलोड करना कितना खतरनाक हो सकता है। सरकार ने साफ कहा है कि वह कभी भी व्हाट्सएप या किसी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए APK फाइल नहीं भेजती। जानकारों की राय विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे ही यह फर्जी ऐप फोन में इंस्टॉल होता है, यह बैकग्राउंड में काम करना शुरू कर देता है। इसके जरिए ठग मोबाइल के मैसेज, बैंक डिटेल और यहां तक कि OTP तक एक्सेस कर लेते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि यूजर को भनक भी नहीं लगती और कुछ ही मिनटों में उनके बैंक खाते खाली हो जाते हैं। साइबर अपराधी इसी तरीके से लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं। इसलिए किसी भी अनजान लिंक या फाइल को डाउनलोड करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल जरूरी है। क्या करें कर्मचारी अगर गलती से ऐसा कोई संदिग्ध ऐप डाउनलोड हो जाए तो उसे तुरंत अनइंस्टॉल करें और जरूरत पड़े तो फोन को फैक्ट्री रीसेट कर दें। किसी भी सूरत में OTP या बैंक से जुड़ी जानकारी साझा न करें। 8th पे कमीशन से जुड़ी जानकारी केवल आधिकारिक सरकारी वेबसाइट से ही प्राप्त करें। किसी भी तरह की साइबर ठगी की शिकायत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर या आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से तुरंत दर्ज कराएं। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें—क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही भारी नुकसान का कारण बन सकती है।

फोटोशूट में व्यस्त थी मां, इधर पूल में डूब गया बेटा—हादसे ने झकझोरा

कर्नाटक बेंगलुरु में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां तीन साल के बच्चे की मौत वाटर पूल में गिरने से हो गई। मां की मैटरनिटी फोटोशूट में बिजी थी। बच्चे का नाम लक्ष्मी था, जो चरण और स्वाति का बेटा था। स्वाति 8 महीने की गर्भवती थी और वह अपने दूसरे बच्चे के आने की तैयारी में मैटरनिटी फोटोशूट करवा रही थी। यह घटना शनिवार को बेंगलुरु के गिद्दनहल्ली इलाके में एक प्राइवेट स्टूडियो में हुई, जहां फोटोशूट के लिए छोटा सा आर्टिफिशियल वाटर पूल बनाया गया था। बच्चा मां के साथ स्टूडियो में मौजूद था और खेलते-खेलते वह इस पूल में फिसलकर गिर गया। घटना के समय स्वाति फोटोशूट में व्यस्त थी, जबकि लक्ष्मी आसपास खेल रहा था। अचानक वह पूल में गिर गया, लेकिन मौके पर मौजूद लोगों को इसकी सूचना तुरंत नहीं मिल सकी।जब बच्चे को बाहर निकाला गया, तब तक वह बेहोश हो चुका था और डूबने के कारण उसकी सांसें रुक गई थीं। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम जांच के लिए शव को सरकारी अस्पताल भेजा गया। पुलिस के अनुसार, बच्चे के पिता चरण उस समय काम के सिलसिले में विदेश में थे और उन्हें सूचना मिलते ही वे बेंगलुरु लौट रहे हैं। सुरक्षा के लिए उचित इंतजाम नहीं यह हादसा एक छोटी सी लापरवाही का नतीजा माना जा रहा है। स्टूडियो में मौजूद पूल फोटोशूट के लिए सजावट के तौर पर बनाया गया था, लेकिन बच्चे की सुरक्षा के लिए उचित इंतजाम नहीं किए गए थे। पुलिस ने मामले में लापरवाही की जांच शुरू कर दी है और यह देखा जा रहा है कि फोटोशूट के दौरान पर्याप्त सावधानियां बरती गई थीं या नहीं। कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि बच्चा मां की दोस्त की मैटरनिटी शूट के लिए भी साथ गया था, लेकिन मुख्य रूप से यह स्वाति की ही फोटोशूट से जुड़ा मामला है। इस घटना ने माता-पिता और स्टूडियो मालिकों के लिए बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सबक दिया है। लापरवाही के चलते मौत का मामला यह दर्दनाक घटना परिवार के लिए बेहद झटका लेकर आई है। एक तरफ स्वाति दूसरी संतान के स्वागत की खुशी में थीं, वहीं दूसरी तरफ उनके बड़े बेटे की अचानक मौत ने सब कुछ उजाड़ दिया। पुलिस जांच जारी है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। ऐसी घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि बच्चों के साथ हर जगह सतर्क रहना कितना जरूरी है, खासकर ऐसी जगहों पर जहां पानी या खतरनाक चीजें मौजूद हों। लोगों ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना जताई है और उम्मीद है कि जांच से सच्चाई सामने आएगी।  

क्या है AI-पावर्ड भारत-विस्तार? जानिए कैसे बदल देगा खेती का भविष्य और बढ़ाएगा किसानों की आमदनी

नई दिल्ली कृषि क्षेत्र में डिजिटल क्रांति लाकर भारत मंगलवार (17 फरवरी) को एक इतिहास रचने जा रहा है क्योंकि उस दिन केंद्र सरकार भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR) नाम का एक क्रांतिकारी AI-पावर्ड मल्टीलिंगुअल टूल लॉन्च करने जा रही है। यह किसानों को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने हालिया बजट में आर्टिफिशियल इंटेलिसजेंस (AI) पर आधारित कृषि प्लेटफॉर्म भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR) को जल्द लॉन्च करने का ऐलान किया था। इस प्लेटफॉर्म का शुभारंभ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा जयपुर में किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य किसानों तक तकनीक को सरल तरीके से और सरल भाषा में पहुंचाना है, ताकि वे सही समय पर सही खेती संबंधी निर्णय ले सकें। यह टूल किसानों को उनकी अपनी भाषा में खेती से जुड़ी जरूरी जानकारी मोबाइल ऐप या फोन कॉल के जरिए उपलब्ध कराएगा। क्या है Bharat-VISTAAR यह AI आधारित एक मल्टीलिंगुअल अत्याधुनिक टूल है, जो देश के करोड़ों किसानों के लिए ‘डिजिटल कृषि विशेषज्ञ’ की भूमिका निभाएगा। इसका पूरा नाम 'वर्चुअली इंटीग्रेटेड सिस्टम टू एक्सेस एग्रीकल्चरल रिसोर्सेज' (Virtually Integrated System to Access Agricultural Resources _VISTAAR) है। यह डिजिटल सिस्टम किसानों के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहेगा और इसमें ‘भारती’ नाम का AI वॉइस असिस्टेंट होगा। किसान इसे मोबाइल ऐप या साधारण वॉइस कॉल यानी हेल्पलाइन नंबर 155261 नंबर डायल करके सीधे जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। शुरुआत में यह सेवा हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध होगी, बाद में इसे क्षेत्रीय भाषाओं में भी शुरू किया जाएगा। ओला-बारिश, बाढ़-सुखाड़ का पूर्वानुमान इस टूल के माध्यम से किसानों को फसल योजना, खेती की तकनीक, कीट नियंत्रण, मौसम पूर्वानुमान, बाजार कीमत और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलेगी। इसके जरिए किसान प्रधानमंत्री किसान योजना, फसल बीमा योजना, सॉइल हेल्थ कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड और अन्य कई सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी लेकर आवेदन भी कर सकेंगे। सरकार के अनुसार यह सिस्टम देश के कृषि डेटा और रिसर्च को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ने का काम करेगा। इसमें कृषि अनुसंधान संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की जानकारी और राष्ट्रीय AI ढांचे जैसे India AI Mission और BHASHINI का सहयोग लिया जाएगा। परियोजना पर इस वर्ष 150 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में इस परियोजना पर लगभग 150 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस राशि का हालिया बजट में आवंटन किया गया है। सरकार का मानना है कि यह सिर्फ एक ऐप नहीं बल्कि देश का डिजिटल कृषि ढांचा बनेगा, जिससे किसानों की आय बढ़ाने, खेती का जोखिम कम करने और कृषि नीति को डेटा के आधार पर बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह योजना सही तरीके से लागू होती है, तो यह भारत के कृषि क्षेत्र में डिजिटल क्रांति साबित हो सकती है और छोटे किसानों को भी तकनीक का पूरा लाभ मिल सकेगा। बजट में सीतारमण ने किया था ऐलान बता दें कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, 2026 को अपना लगातार 9वां बजट पेश करते हुए इस स्कीम की घोषणा की थी और कहा था, “मैं भारत-विस्तार लॉन्च करने का प्रस्ताव करती हूं—एक मल्टीलिंगुअल AI टूल जो एग्रीस्टैक पोर्टल्स और खेती के तरीकों पर ICAR पैकेज को AI सिस्टम के साथ इंटीग्रेट करेगा। इससे खेती की प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी, किसानों को बेहतर फैसले लेने में मदद मिलेगी और कस्टमाइज्ड एडवाइजरी सपोर्ट देकर रिस्क कम होगा।” विशेषज्ञों के मुताबिक, “भारत विस्तार इंटरैक्टिव है। इसके जरिए किसानों का फीडबैक सरकारी सिस्टम में वापस आएगा। इसके सबूतों के आधार पर पॉलिसी बनाने और रिसर्च को प्राथमिकता देने में मदद मिलेगी।”  

‘20 साल का काम 5 साल में’—एयरो इंजन पर रक्षामंत्री का मिशन मोड बयान

नई दिल्ली रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि देश एडवांस्ड मीडियम कॉम्बेट एयरक्राफ्ट यानी एमका के डिजाइन और डेवलपमेंट की ओर तेजी से बढ़ रहा है। पूर्व में भी एयरो इंजन के क्षेत्र में महारथ हासिल करने के कई प्रयास किए हैं। अब समय आ गया है कि हमारे जो प्रयास अधूरे रह गए थें, उनको हम पूरा करें। रक्षा मंत्री सोमवार को गैस टरबाइन रिसर्च स्टेब्लिशमेंट बेंगलुरु में विशेषज्ञों के बीच बोल रहे थे। रक्षामंत्री ने विशेषज्ञों व शोधकर्ताओं से कहा, “अगर किसी इंजन को विकसित करने में 25 साल लग रहे हैं, तो भारत की मौजूदा स्थिति , हमारी रणनीतिक जरूरत और हमारी महत्वाकांक्षा ऐसी हैं कि आप मानकर चलिए कि आपके 20 साल पहले ही खत्म हो चुके हैं और अब सिर्फ 5 साल ही आपके पास बचे हैं। यह कोई अचरज वाली बात नहीं है, यह एक चुनौती है। हमें 5 साल में वो कर दिखाना है, जो दूसरे देश 20 साल में करते हैं। इसी में हमें अपना सर्वश्रेष्ठ देना है।” उन्होंने कहा कि हमें भविष्य की तरफ भी देखना होगा। हम सिर्फ 5वीं पीढ़ी के इंजन तक सीमित नहीं रह सकते। छठी पीढ़ी की एडवांस टेक्नोलॉजी का विकास भी हमें जल्द से जल्द शुरू करना होगा। उस पर रिसर्च , समय की मांग है। जैसे-जैसे दुनिया में टेक्नोलॉजी बदल रही है, आर्टिफिशियल मशीन लर्निंग और न्यू मटीरियल का प्रयोग बढ़ रहा है, हमें उनमें आगे रहना होगा। उन्होंने यहां मौजूद वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं से कहा कि आप इंग्लैंड के साथ एयरो इंजन विकसित करने के लिए संयुक्त अध्ययन कर रहे हैं। यह बहुत अच्छी पहल है। इसके अलावा, फ्रांस के साथ भी, एयरो इंजन के लिए, हम नेशनल एयरो इंजन मिशन के तहत प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं। फ्रांस और यूके, दोनों ही देश एयरो इंजन टेक्नोलॉजी में बहुत आगे रहे हैं। उनके साथ यह समझौता हमें न सिर्फ नई टेक्नोलॉजी सीखने का मौका देगा बल्कि उन चुनौतियों को भी समझने में सहायता करेगा, जिनका हमने पिछले दशकों में सामना किया है। रक्षामंत्री ने कहा कि जब हम सरकार में आए, तो हमने आत्मनिर्भरता की ओर अपने कदम बढ़ाए। रक्षा क्षेत्र में भी,आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के हमने कई प्रयास किए। उन्होंने कहा, “मैंने अपने लगभग 7 साल के कार्यकाल में, अपना पूरा प्रयास किया कि हम एयरो इंजन के डेवलपमेंट को प्राथमिकता पर रखें और ऐसा हमने किया भी। आज की वैश्विक राजनीतिक स्थिति को देखते हुए, इस तरह की महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता कितनी जरूरी है, यह मैं समझता हूँ कि बताने की जरूरत नहीं है। ऑपरेशन सिंदूर में हमने साफ देखा, कि हमारी अपनी टेक्नोलॉजी ने, हमारे देश में बने हथियारों ने, हमारी फोर्स का कितना सहयोग किया। चाहे संचार सिस्टम हो, सर्विलांस के साधन हों, या फिर अटैक करने वाले हथियार, सबमें स्वदेशी टेक्नोलॉजी की झलक साफ दिखी।” उन्होंने कहा कि इससे सेना का मनोबल और बढ़ा व देश के लोगों को भी गर्व हुआ। अब जैसे-जैसे समय बदल रहा है, चुनौतियां बदल रही हैं, हमारे लिए बहुत जरूरी हो गया है कि हम स्वदेशी तौर-तरीकों पर और ज्यादा फोकस करें, और हमारी फोर्स को विश्व स्तरीय प्रणालियां और उपकरण उपलब्ध कराएं। रक्षामंत्री ने कहा कि आज भारत के सामने बहुत सारे अवसर हैं। हमें उन अवसरों को भुनाने की जरूरत है। उन्होंने भारत और यूरोपीय यूनियन के फ्री ट्रेड समझौते का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यह समझौता 18 सालों से नहीं हो पा रहा था, वह अब पूरा हो गया। यह ट्रेड एग्रीमेंट भारत की बढ़ती आर्थिक और राजनीतिक शक्ति की स्वीकार्यता भी है। रक्षामंत्री ने कहा कि अभी कुछ दिन पहले ही, वह ग्रीक के रक्षामंत्री से मिले थे। उस बातचीत के दौरान, उन्हें एक बहुत सुखद सरप्राइज मिला। दरअसल इस मुलाकात में ग्रीक के रक्षामंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि वह भारत को एक उभरती हुई ताकत के तौर पर नहीं, बल्कि एक सुपर पावर की तरह देख रहे हैं। उनकी नजर में भारत अब कोई साधारण राष्ट्र नहीं, बल्कि एक ग्लोबल लीडर है।

पहले इस्तीफा फिर पलटी: असम कांग्रेस में घमासान, भूपेन बोरा ने क्या कहा?

गुवाहाटी असम कांग्रेस में सोमवार को खूब ड्रामा देखने को मिला। पहले तो असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने इस्तीफा दे दिया। लेकिन कुछ ही घंटों बाद यू-टर्न लेते हुए उन्होंने इस्तीफा वापस भी ले लिया। बताया जा रहा है कि इसके पीछे कांग्रेस आलाकमान की भूमिका भी है। असम कांग्रेस में सोमवार को खूब ड्रामा देखने को मिला। पहले तो असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने इस्तीफा दे दिया। लेकिन कुछ ही घंटों बाद यू-टर्न लेते हुए उन्होंने इस्तीफा वापस भी ले लिया। बताया जा रहा है कि इसके पीछे कांग्रेस आलाकमान की भूमिका भी है। कांग्रेस के असम प्रभारी जितेंद्र सिंह ने भी यही दावा किया। बोरा के इस्तीफा देने के बाद सिंह और पार्टी की असम इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने बोरा से उनके आवास पर मुलाकात की। इस बीच, बोरा ने अपने आवास के बाहर मीडिया से कहा कि उन्होंने अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कांग्रेस आलाकमान से समय मांगा है। गोगोई ने कहा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बोरा से बात की है और उनका इस्तीफा आलाकमान ने स्वीकार नहीं किया है। गोगोई ने कहाकि अगर पार्टी में कुछ मुद्दों के कारण भूपेन बोरा को ठेस पहुंची है तो हम उनसे माफी मांगते हैं। किस तरफ बोरा का इशारा मीडिया से बातचीत में भूपेन बोरा ने विस्तार से जानकारी देने से मना कर दिया। उन्होंने कहाकि मैं अभी इस पर बोलना ठीक नहीं समझता कि मैंने इस्तीफा क्यों दिया। हां, मैंने इस्तीफा दिया था। इसे आलाकमान को भी भेजा था। जब भी मुझे जरूरी लगेगा, मैं आप लोगों को बुलाऊंगा और विस्तार से बात करूंगा। हालांकि उन्होंने इशारों-इशारों में इस्तीफे की वजह का भी जिक्र कर दिया। बोरा ने कहाकि थोड़ा-बहुत तो आप लोग भी जानते ही हैं कि मैंने इस्तीफा क्यों दिया। इस सबकी शुरुआत बेहाली से हुई थी। इसके अलावा उन्होंने पार्टी में निर्णय लेने की अंदरूनी प्रक्रिया को लेकर भी असहमति जताई। खासतौर पर मजुली यात्रा में भाग लेने को लेकर। उन्होंने कहाकि मैंने पीसीसी चीफ से कहाकि अगर कांग्रेस पार्टी यह भी तय नहीं कर पा रही है कि मजुली यात्रा में कौन जाएगा तो मुझे लगता है कि फिर भविष्य की तरफ ध्यान देना चाहिए। इससे पहले असम के मुख्यमंत्री हिमंता सरमा ने भूपेन बोरा के इस्तीफे पर कहाकि भाजपा के दरवाजे उनके लिए खुले हैं। सरमा ने यह भी कहा कि अगर बोरा भाजपा में शामिल होते हैं तो वह उन्हें किसी सेफ सीट से चुनाव जितवाने की कोशिश करेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष को भेजे अपने त्यागपत्र में बोरा ने दावा किया कि पार्टी नेतृत्व द्वारा उन्हें उपेक्षित किया जा रहा है और राज्य इकाई में उन्हें उनका हक नहीं दिया जा रहा है। बोरा 2021 से 2025 तक असम कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष थे और पिछले साल उनकी जगह गौरव गोगोई को असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान सौंप दी गई। वह असम में दो बार विधायक रह चुके हैं।  

‘इमरान खान को दिख रहा है साफ’—पाक मंत्री का बड़ा दावा, 70 फीसदी रोशनी बरकरार

इस्लामाबाद पाकिस्तान के कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने सोमवार को दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत दुरुस्त है, चिंता की कोई बात नहीं है, और चश्मे के साथ उनकी एक आंख की रोशनी 70 फीसदी बची है। इसके साथ ही उन्होंने पीटीआई शासित केपी में किए जा रहे रोड ब्लॉक को भी गैर कानूनी करार दिया। कानून मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान-तहरीक-ए-इंसाफ के संस्थापक की दूसरी आंख की रोशनी 6/6 है। तरार ने कहा, "चिंता की कोई बात नहीं है।" पंजाब के शाहदरा में बार एसोसिएशन फिरोजवाला को संबोधित करते हुए, तरार ने इमरान की सेहत के बारे में “नवीनतम रिपोर्ट जो जमा करनी थी” का जिक्र किया। मंत्री ने कहा कि बार एसोसिएशन आने से पहले उन्होंने पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल (एजीपी) मंसूर उस्मान अवान और “संबंधित” लोगों से इस बारे में चर्चा की थी। इसके साथ ही उन्होंने खैबर पख्तूनख्वा में पीटीआई सरकार के राज में जगह-जगह किए गए घेराव और प्रदर्शन को भी गलत बताया। उन्होंने कहा, "मेडिकल टीम ने विपक्षी नेताओं और पीटीआई संस्थापक के निजी चिकित्सकों को उनकी सेहत के बारे में जानकारी दे दी है। मोटरवे और जीटी रोड को बंद करना गैर-कानूनी है।" कानून मंत्री ने धमकी भरे अंदाज में खैबर पख्तूनख्वा सरकार से संविधान और कानून का पालन करने की अपील की। ​​उन्होंने पीटीआई लीडरशिप से अपील की कि वे केपी में अपनी सरकार से सड़कें खोलने के लिए कहें। तरार ने कहा, "शिकायत मत करो, अगर सड़कें नहीं खोली गईं तो फेडरल सरकार कार्रवाई करने के लिए मजबूर होगी।" कानून मंत्री ने कहा कि देश की आर्थिक स्थिरता के लिए राजनीतिक स्थिरता जरूरी है। तरार का यह बयान सुप्रीम कोर्ट (एससी) को खान के खराब विजन की जानकारी देने के बाद आया है। कोर्ट को वकील ने बताया था कि इमरान की दाहिनी आंख में सिर्फ 15 फीसदी रोशनी बची है, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 16 फरवरी (सोमवार) से पहले उनकी जांच के लिए एक मेडिकल टीम बनाई थी। इसके बाद, पांच डॉक्टरों की एक टीम रविवार को रावलपिंडी की अदियाला जेल पहुंची। जेल में बंद इमरान खान की आंखें जांची, ब्लड सैंपल लिए और उनका ब्लड प्रेशर चेक किया। हालांकि, पीटीआई ने उनके परिवार और निजी चिकित्सकों के बिना किए गए चेक-अप को खारिज कर दिया था।

21 फरवरी को मेसी के बिना ही उतरेगी इंटर मियामी

फोर्ट लॉडरडेल इंटर मियामी को 21 फरवरी को होने वाले मेजर लीग फुटबॉल (एमएलएस) कप के पहले मैच में  स्टार फुटबॉलर लियोनेल मेसी के बिना ही उतरना होगा। मैसी के बायीं हैमस्ट्रिंग में खिंचाव के कारण इस मैच तक फिट होने की संभावना नहीं है।इंटर मियामी की टीम ने कहा है कि मेसी चोटिल और उपचार के दौर से गुजर रहे हैा। एमएलएस सत्र में लगातार दो बार के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहे मेसी ने पिछले सप्ताह मेंइक्वाडोर में अभ्यास सत्र से पहले खेले गए मैच में एक गोल दागा था पर दूसरे हाफ के दौरान ही उन्हें हैमस्ट्रिंग में खिंचाव आ गया था। इस कारण वह मैदान से बाहर आ गये थे। इसी को लेकर इंटर मियामी ने कहा, अभ्यास में उनकी वापसी आने वाले दिनों में उनकी फिटनेस पर निर्भर करेगी। वहीं अगर मेसी नहीं खेलते तो ये टीम के लिए करारा झटका होगा। मेसी को क्लब कितन अहम मानना है उसका अंदाजा इसी से होता है कि पिछले अक्टूबर में इंटर मियामी ने उनके साथ अनुबंध को तीन साल के लिए बढ़ा दिया था।