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जयपुर में दो नए रूट पर मेट्रो चलाने की भजनलाल सरकार ने की तैयारी

जयपुर. भजनलाल सरकार ने जयपुर में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार के संकेत दिए हैं। राजस्थान विधानसभा में देर रात अनुदान मांगों पर बहस का जवाब देते हुए यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने जयपुर में जगतपुरा और वैशाली नगर तक भी मेट्रो चलाने की संभावनाओं पर विचार करने के लिए घोषणा की। मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि जगतपुरा, वैशाली नगर सहित अन्य क्षेत्रों में मेट्रो के लिए संभावित कॉरिडोर चिन्हित किए जाएंगे। सलाहकार स्तर पर संभावित मार्गों और आवश्यकताओं का अध्ययन करवाया जा रहा है। यदि फिजिबल हुआ तो मेट्रो का विस्तार किया जाएगा। जयपुर को जाम से राहत देने की दिशा में ठोस कदम उन्होंने कहा कि जयपुर मेट्रो फेज-2 का विस्तृत ट्रैफिक-ट्रांसपोर्ट अध्ययन, सर्वेक्षण और वित्तीय-आर्थिक विश्लेषण के आधार पर वैज्ञानिक रूप से रूट तय किया गया है। प्रह्लादपुरा से टोडी मोड़ तक का मेट्रो कॉरिडोर ज्यादा यात्री भार वाले क्षेत्रों को जोड़ेगा, जो जयपुर को जाम से राहत देने की दिशा में ठोस कदम है। मेट्रो फेज-2 की डीपीआर को जल्द स्वीकृति की उम्मीद जयपुर मेट्रो फेज-2 की डीपीआर अब केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति के लिए लंबित है। राजस्थान सरकार को मेट्रो फेज-2 की स्वीकृति जल्द मिलने की उम्मीद है, जिससे जयपुर शहर की परिवहन व्यवस्था और मजबूत होगी। बता दें कि जयपुर मेट्रो फेज-2 की लंबाई लगभग 42.80 किलोमीटर होगी। इसमें कुल 36 स्टेशन प्रस्तावित हैं। इनमें से 34 एलिवेटेड और 2 अंडरग्राउंड होंगे।

Irfan Pathan बोले – T20 World Cup में जीत जरूरी, नेट रन रेट अपने आप सुधरेगा

नई दिल्ली पूर्व भारतीय ऑलराउंडर इरफान पठान ने टीम इंडिया को साफ संदेश दिया है कि नेट रन-रेट की गणित में उलझने के बजाय पहले मैच जीतने पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि अगर भारत शुरुआत से ही नेट रन-रेट का पीछा करने की सोच रखेगा, तो दबाव और बढ़ेगा। वेस्टइंडीज का नेट रन-रेट +5 से ऊपर और साउथ अफ्रीका का +3 से ज्यादा है, जबकि भारत फिलहाल निगेटिव में है। ऐसे में बड़े अंतर से जीत दर्ज करना आसान नहीं होगा। पठान के मुताबिक, 'पहली प्राथमिकता मैच जीतना होना चाहिए। अगर जीत मिलती है, तभी रन-रेट की बात करें।' भारत को सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए: साउथ अफ्रीका का बाकी मैच जीतना जरूरी है भारत को जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज दोनों के खिलाफ जीत दर्ज करनी होगी अगर ऐसा नहीं हुआ तो फैसला नेट रन-रेट से हो सकता है, जो भारत के लिए फिलहाल बड़ी चुनौती है। टीम कॉम्बिनेशन पर उठे सवाल हार के बाद टीम संयोजन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। टॉप ऑर्डर में तीन लेफ्ट हैंडर — अभिषेक शर्मा, ईशान किशन और तिलक वर्मा अभिषेक चार पारियों में सिर्फ 15 रन बना सके हैं, जिसमें तीन बार शून्य पर आउट हुए तिलक वर्मा ने 107 रन बनाए, लेकिन उनका स्ट्राइक रेट 118 के आसपास रहा ईशान और अभिषेक ऑफ स्पिन के खिलाफ असहज दिखे सूर्यकुमार यादव का स्ट्राइक रेट भी मिड-130s में रहा, जिससे संकेत मिलता है कि कप्तान ने आक्रामक खेलने के बजाय पारी संभालने की कोशिश की। क्या नंबर 3 पर उतरेंगे सूर्या? इरफान पठान का मानना है कि बल्लेबाजी में संतुलन के लिए सूर्यकुमार यादव को नंबर 3 पर उतारने पर विचार किया जा सकता है। इससे टॉप ऑर्डर में तीन लेफ्ट हैंडर का पैटर्न टूटेगा और टीम को लचीलापन मिलेगा। हालांकि, नई गेंद के खतरे को देखते हुए टीम मैनेजमेंट अब तक उन्हें मिडिल ओवर्स के लिए बचाकर रख रहा है। भारत और जिम्बाब्वे के बीच टी20 वर्ल्ड कप 2026 का मुकाबला 26 फरवरी को चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेला जाएगा। यह मैच भारत के लिए करो या मरो जैसा साबित हो सकता है।  

कलेक्टर ऑफिस में नौकरी दिलाने के नाम पर 11 लाख की ठगी

डोंगरगढ़. कलेक्टर कार्यालय खैरागढ़ में कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी दिलाने का झांसा देकर पांच लोगों से 11 लाख रुपये की ठगी का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है. इस प्रकरण में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन जांच में राजनीतिक संरक्षण और रसूखदार लोगों की भूमिका सामने आने की चर्चा ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है. पीड़ित धीरज साहू की शिकायत पर डोंगरगढ़ थाना में अपराध क्रमांक 97/2026 धारा 420 और 34 भादवि के तहत मामला दर्ज किया गया. आरोप है कि बेरोजगार युवाओं और उनके परिजनों को कलेक्टर कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर की सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया गया और उनसे अलग-अलग किस्तों में बड़ी रकम वसूली गई. कुल मिलाकर पांच लोगों से 11 लाख रुपये की ठगी की पुष्टि हुई है. पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया. हालांकि जांच यहीं नहीं रुकी है और अब इस ठगी के नेटवर्क के पीछे छिपे प्रभावशाली लोगों की भूमिका की जांच तेज कर दी गई है. सूत्रों की मानें तो इस पूरे खेल में कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है. बताया जा रहा है कि भोले-भाले युवाओं को भरोसे में लेने और नौकरी का विश्वास दिलाने में इन प्रभावशाली चेहरों की भूमिका अहम रही. यही कारण है कि अब तक इस मामले के कई कथित सूत्रधार पुलिस कार्रवाई से दूर बने हुए हैं. पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव अंकिता शर्मा ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी है और इसमें शामिल अन्य रसूखदार आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी की प्रक्रिया चल रही है. उन्होंने कहा कि जल्द ही और आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा और पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा. यह मामला एक बार फिर बेरोजगारी के नाम पर सक्रिय ठगी गिरोहों और उनके कथित राजनीतिक संरक्षण पर सवाल खड़े कर रहा है. पुलिस की आगामी कार्रवाई पर अब पीड़ितों समेत पूरे जिले की नजरें टिकी हुई हैं.

पंचायत चुनाव और मतदाता सूची का काम पूरा

जयपुर. राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया। चार करोड़ दो लाख बीस हजार 734 मतदाता मतदान कर सकेंगे।प्रदेश में 41 जिला परिषद, 457 पंचायत समिति और 14 हजार 403 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से जिनके कार्यकाल खत्म हो चुके हैं, उनमें कोर्ट के निर्देशों के अनुसार संभवतः अगले महीने चुनाव कराए जा सकते हैं। आयोग ने 29 जनवरी को मतदाता सूची का प्रारूप जारी किया था। इसमें 3 करोड़ 96 लाख 47 हजार 166 मतदाता थे। वहीं, आपत्तियां और सुझाव आने के बाद उनका निपटारा करते हुए 13 लाख 66 हजार 435 नाम जोड़े गए हैं। जबकि 7 लाख 92 हजार 867 हटाए गए हैं। अब मतदाता सूची में कुल वृद्धि 5 लाख 73 हजार 568 मतदाताओं की हुई है। अंतिम मतदाता सूची में 4,02,20,734 वोटर हैं। इनमें 2,08,62,380 पुरुष, 1,93,58,147 महिला तथा 207 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। बांसवाड़ा में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी बांसवाड़ा जिले में सर्वाधिक 4.55 तथा फलोदी जिले में 4.46 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, टोंक जिले में न्यूनतम 0.04 प्रतिशत एवं श्रीगंगानगर जिले में 0.19 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। 12 जिला परिषद और 130 पंचायत समितियों का कार्यकाल शेष आयोग के अनुसार, फिलहाल 41 में से 12 जिला परिषद और 457 पंचायत समितियों में से 130 का कार्यकाल शेष है। इनका कार्यकाल अलग-अलग समय पर दिसंबर 2026 तक पूरा होगा। 5 सितंबर तक 6 जिला परिषद और 78 पंचायत समितियों का कार्यकाल पूरा होगा। वहीं, 29 अक्टूबर तक 2 जिला परिषद और 22 पंचायत समितियां का कार्यकाल खत्म होगा। इसके बाद 22 दिसंबर तक 4 जिला परिषद और 30 पंचायत समितियों का कार्यकाल पूरा हो जाएगा। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का बढ़ रहा इंतजार पंचायत-नगरीय निकाय चुनाव कराने से पहले वार्डों का आरक्षण तय करने के लिए ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आना जरूरी है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही आरक्षण तय होगा, लेकिन आयोग की रिपोर्ट का इंतजार खत्म नहीं हो रहा। इससे चुनावों को लेकर वार्डों की आरक्षण प्रक्रिया रुकी हुई है।

40,000 करोड़ के घोटाले में ED ने लिया बड़ा कदम, अनिल अंबानी सामने हुए

नई दिल्ली  उद्योगपति और रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी की कानूनी मुश्किलें लगातार गहराती जा रही हैं. गुरुवार, 26 फरवरी 2026 को अनिल अंबानी दिल्ली स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुख्यालय पहुंचे, जहाँ उन्होंने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCOM) और उससे जुड़ी कंपनियों द्वारा किए गए कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अपना बयान दर्ज कराया. अंबानी सुबह करीब 11 बजे केंद्रीय जांच एजेंसी के दफ्तर पहुंचे. सूत्रों के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय की स्पेशल टास्क फोर्स (मुख्यालय) ने उनसे कई घंटों तक पूछताछ की. यह पूछताछ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है. ₹3,716 करोड़ का निजी आवास 'अबोड' कुर्क अनिल अंबानी की यह पेशी उस बड़ी कार्रवाई के ठीक बाद हुई है, जिसमें ED ने मुंबई के पॉश इलाके पाली हिल स्थित उनके आलीशान निजी आवास 'अबोड' (Abode) को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) कर लिया है. इस संपत्ति की अनुमानित कीमत लगभग 3,716.83 करोड़ रुपये है. इससे पहले भी इस संपत्ति के एक हिस्से को कुर्क किया गया था, लेकिन अब पूरी इमारत जांच एजेंसी के घेरे में है. इस ताज़ा कार्रवाई के साथ ही, रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप की अब तक कुर्क की गई कुल संपत्तियों का मूल्य 15,700 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है. पिछले साल भी एजेंसी ने नवी मुंबई स्थित 'धीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी' (DAKC) की 132 एकड़ जमीन कुर्क की थी, जिसकी कीमत 4,462 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई थी. क्या है पूरा मामला? यह पूरा मामला सीबीआई (CBI) द्वारा दर्ज की गई उस एफआईआर (FIR) पर आधारित है, जिसमें रिलायंस कम्युनिकेशंस, अनिल अंबानी और अन्य पर आपराधिक साजिश (120-B), अमानत में खयानत (406) और धोखाधड़ी (420) के आरोप लगाए गए हैं. ED की जांच के अनुसार, RCOM और उसकी सहयोगी कंपनियों ने घरेलू और विदेशी बैंकों से भारी-भरकम कर्ज लिया था. वर्तमान में समूह पर बैंकों का कुल बकाया 40,185 करोड़ रुपये है. जांच एजेंसी का आरोप है कि इस पैसे का इस्तेमाल उसी काम के लिए नहीं किया गया जिसके लिए कर्ज लिया गया था. इसके बजाय, फंड को अन्य समूह कंपनियों के कर्ज चुकाने (एवरग्रीनिंग), संबंधित पक्षों को ट्रांसफर करने या म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए डाइवर्ट किया गया. SBI ने घोषित किया 'फ्रॉड' संसद में भी इस मुद्दे की गूंज सुनाई दी है. वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने पुष्टि की थी कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार रिलायंस कम्युनिकेशंस और इसके प्रमोटर अनिल अंबानी के खातों को 'फ्रॉड' (धोखाधड़ी) के रूप में वर्गीकृत किया है. केवल SBI ही नहीं, केनरा बैंक ने भी आरोप लगाया है कि RCOM ने उनके साथ 1,050 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की है. कुल मिलाकर पांच बड़े बैंकों ने समूह के खातों को संदिग्ध माना है. शेल कंपनियों और विदेशी संपत्तियों की जांच जांच का दायरा केवल घरेलू बैंकों तक सीमित नहीं है. ED उन "अघोषित विदेशी बैंक खातों" और विदेशी संपत्तियों की भी जांच कर रही है, जिनका लिंक अंबानी परिवार से होने का संदेह है. इसके अलावा, यस बैंक (Yes Bank) के साथ हुए संदिग्ध लेनदेन भी रडार पर हैं, जहाँ रिलायंस म्यूचुअल फंड ने कथित तौर पर 'क्विड प्रो को' (Quid Pro Quo) के तहत यस बैंक के AT-1 बॉन्ड में 2,850 करोड़ रुपये का निवेश किया था. रिलायंस इंफ्रा में भी बड़ी गड़बड़ी का शक जांच में यह भी सामने आया है कि रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने सेबी (SEBI) के नियमों को ताक पर रखकर एक अघोषित संबंधित पार्टी (C-Company) के माध्यम से करोड़ों रुपये डाइवर्ट किए. एजेंसी का मानना है कि लोन डाइवर्जन का यह आंकड़ा 10,000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है.

होली के लिए स्व सहायता समूह की महिलाएं बना रहीं प्राकृतिक गुलाल

रायपुर. रंगों के त्योहार होली को स्वसहायता समूह की महिलाएं इस बार और खास बना रही है। होली के त्योहार को प्राकृतिक रंगों से मनाने के लिए महिलाएं हर्बल गुलाल बना रही है। गरियाबंद जिले के ग्राम सढ़ौली की राखी महिला ग्राम संगठन की 10 सक्रिय महिलाएँ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के तहत हर्बल गुलाल का निर्माण कर आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की मिसाल पेश कर रही हैं। समूह की महिलाएं पलाश से पीला, चुंकदर से लाल और पालक के पत्तों से हरा रंग निकालकर मक्के की सूखी डंठल से प्राप्त अरारोट पाउडर में मिलाकर प्राकृतिक गुलाल का निर्माण कर रही है। इसमें हानिकारक रसायनिक तत्वों का बिल्कुल भी उपयोग नहीं किया जाता। जिससे हर्बल गुलाल त्वचा एवं सेहत के लिए सुरक्षित रहता है। राखी महिला ग्राम संगठन की ये महिलाएँ न केवल होली के त्योहार को प्राकृतिक और सुरक्षित बना रही हैं, बल्कि अपनी आजीविका को भी मजबूत कर रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाएँ आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की नई कहानी लिख रही हैं। यह पहल प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रही है। कलेक्टर एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने इन महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज महिलाएं स्वरोजगार सृजित कर आत्मनिर्भर बन रही है और समाज में अपनी अलग पहचान बना रही है। पीआरपी मीना साहू ने बताया कि पिछले वर्ष भी बिहान समुह के दीदियों द्वारा कुल 30 हजार रूपये से अधिक की बिक्री कर लगभग 10 हजार रूपये से अधिक की शुद्ध मुनाफा अर्जित की थी। समूह की महिलाओं से चर्चा के फलस्वरूप पारंपरिक तरीकों से बनाए गए प्राकृतिक गुलाल से न केवल सेहत स्वस्थ रहेगा, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी अनुकूल रहेगा। साथ ही महिलाओं के लिए आमदनी का नया स्रोत भी बन रहा है। पिछले वर्ष हर्बल गुलाल की मांग अधिक रही, जिसे देखते हुए इस बार महिलाओं ने रंग बनाना शुरू कर दिया है। महिलाओं ने बताया कि गुलाल बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह प्राकृतिक है। इसे तैयार करने में फूलों और पत्तियों का उपयोग किया जाता है, जिससे यह त्वचा के लिए सुरक्षित होता है। विभिन्न रंग बनाने के लिए प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग किया जाता है गुलाबी रंग के लिए चुकंदर और गुलाब की पंखुड़ियां, पीला रंग के लिए हल्दी और गेंदे के फूल, हरा रंग के लिए पालक व मेंहदी के पत्ते, नीला रंग के लिए अपराजिता के फूल और लाल रंग के लिए टेसू के फूलों का इस्तेमाल कर रही है।

इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड रोड का प्लान बदला, अब एलिवेटेड नहीं, जमीन पर ही निर्माण होगा

इंदौर  इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर को लेकर किसान विरोध कर रहे थे। किसानों के विरोध को देखते हुए सरकार झुक गई है। सीएम मोहन यादव ने कहा कि मेट्रो पॉलिटन सिटी इंदौर-उज्जैन भविष्य की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण होगा। इस नाते इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड फोर लेन प्रोजेक्ट भी किसानों के हित में उनके सुझाव के अनुरूप एलिवेटेड नहीं जमीनी स्तर पर बनाया जाएगा। किसानों को मिलेगा उचित मुआवजा सीएम मोहन यादव ने कहा कि जिन किसानों की भूमि प्रभावित होगी, उन्हें उचित मुआवजा देने के लिये शासन-प्रशासन प्रतिबद्ध है। उन्होंने   इंदौर और उज्जैन जिलों के विभिन्न गांवों से आए किसान प्रतिनिधियों से चर्चा की है। सरकार के फैसले का किसानों ने आभार जताया है। फोर लेन का हो रहा है निर्माण मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के माध्यम से 2935.15 करोड़ रुपये की परियोजना के अंतर्गत क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए 2 जिलों के 28 ग्रामों को नया स्वरूप और जनसुविधा देने के लिये फोर लेन मार्ग निर्मित किया जा रहा है। उन्नत संरचना के अंतर्गत इंदौर-उज्जैन के मध्य 2 स्थानों वेस्टर्न रिंग रोड और उज्जैन बदनावर मार्ग क्रॉसिंग पर वृहद जंक्शन का प्रावधान है। परिवहन तेज और सुरक्षित रहे इसके लिये प्रत्येक टोल प्लाजा पर आवश्यक प्रबंध भी होंगे। सिंहस्थ को देखते हुए निर्माण मोहन यादव ने कहा कि इंदौर-उज्जैन के इस पुराने मार्ग से जानापाव आने-जाने के लिये भी परिवहन होता रहा है। पूर्व के वर्षों में मार्ग के संकुचित होते जाने से जो दुर्घटनाएं होती रही हैं, वह सिलसिला अब थम जायेगा। किसानों से विचार विमर्श के पश्चात इस ग्रीन फील्ड फोर लेन मार्ग परियोजना के कार्यों को गति दी जा रही है। गत 20 फरवरी को अनुबंध निष्पादन के पश्चात अन्य कार्यवाही प्रचलन में है। आगामी सिंहस्थ को देखते हुए यह परियोजना बड़ी जनसंख्या को लाभान्वित करेगी। प्रदेश में सड़क अधोसंरचना को सशक्त करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। गौरतलब है कि इसे लेकर आसपास के किसानों ने विरोध शुरू कर दिया था। बड़े पैमाने पर किसान अनिश्चितकालीन धरना पर बैठने वाले थे। इसके बाद किसानों को भोपाल बुलाया गया और उनसे बातचीत के बाद सीएम मोहन यादव ने समस्या का हल निकाला है।

राजस्थान की भजनलाल शर्मा कैबिनेट ने किए वरिष्ठ बीडीओ के 750 नए पद मंजूर

जयपुर. राजस्थान कैबिनेट ने बुधवार को एक बड़ा फैसला लिया। अब पंचायती राज संस्थाओं में कार्यरत ग्राम विकास अधिकारियों को पदोन्नति का अतिरिक्त अवसर मिलेगा। राज्य मंत्रिपरिषद ने वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी के 750 नए पद सृजित करने की स्वीकृति दी है। इसके लिए राजस्थान ग्रामीण विकास एवं अधीनस्थ सेवा नियम, 1998 में संशोधन किया गया है। प्रदेश में 11 हजार से अधिक ग्राम विकास अधिकारी कार्यरत हैं। प्रथम पदोन्नति के लिए पूर्व में सहायक विकास अधिकारी के 2465 पद स्वीकृत थे, जो पर्याप्त नहीं थे। संघ ने कहा महत्वपूर्ण निर्णय संगठन की मांग पर 3600 ग्रेड वेतन तथा वेतन स्तर-10 में 750 नए पद स्वीकृत किए हैं। संघ के प्रदेशाध्यक्ष महावीर शर्मा एवं प्रदेश महामंत्री शिवराज चौधरी ने निर्णय का स्वागत किया। जिलाध्यक्ष भरत कुमार पटोत ने कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय बताया।

मुख्यमंत्री साय से पूर्व क्रिकेटर कपिल देव ने की सौजन्य मुलाकात

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज नया रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने कपिल देव को बेल मेटल से बनी प्रतिकृति, पुण्यभूमि छत्तीसगढ़ कॉफी टेबल बुक भेंट कर उनका अभिनंदन किया। मुलाकात के दौरान दोनों के बीच प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने, आधुनिक खेल अधोसंरचना के विकास, अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण केंद्र तथा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को तैयार करने जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह  उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने राज्य सरकार द्वारा खेलों के प्रोत्साहन और खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराने हेतु किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खेल संस्कृति को मजबूत करने के लिए अधोसंरचना, प्रशिक्षण और अवसरों का विस्तार सरकार की प्राथमिकता है। पूर्व कप्तान कपिल देव ने छत्तीसगढ़ में हो रहे सकारात्मक परिवर्तनों की सराहना करते हुए कहा कि सुरक्षा, विश्वास और विकास के इस माहौल में प्रदेश की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट मंच प्राप्त होगा तथा छत्तीसगढ़ सुरक्षित, समृद्ध और विकसित राज्य के रूप में आगे बढ़ेगा।

राजस्थान में अब 3 से अधिक संतान वाले भी लड़ सकेंगे पंचायत चुनाव

जयपुर. राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव से पहले बड़ा बदलाव किया गया है। भजनलाल सरकार ने पंचायत और निकाय चुनाव लड़ने की योग्यता में बड़ा बदलाव किया है। इसके तहत अब राज्य में दो से अधिक संतान वाले भी स्थानीय चुनाव लड़ सकेंगे। यानी अब दो से ज्यादा बच्चे वाले भी सरपंच और पार्षद बन सकेंगे। उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ और संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल का कहना है कि दो से अधिक संतान होने पर चुनाव लड़ने का प्रतिबंध उस समय लागू किया गया था, जब जनसंख्या विस्फोट पर प्रभावी नियंत्रण की आवश्यकता थी। वर्ष 1991-94 के बीच प्रजनन दर 3.6 थी, जो वर्तमान में घटकर 2 रह गई है। ऐसे में इन प्रावधानों का प्रत्यक्ष प्रभाव अब कम होता जा रहा है। ऐसे में भजनलाल सरकार ने अब राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-19 और राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा-24 में संशोधन करने का निर्णय लिया है। वर्तमान सत्र में ही पारित होंगे दोनों विधेयक कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि कैबिनेट ने राजस्थान पंचायतीराज संशोधन बिल और राजस्थान नगरपालिका संशोधन बिल 2026 को मंजूरी दे दी है। इन संशोधनों के लागू होने के बाद दो से अधिक संतानों वाले व्यक्तियों पर निकाय और पंचायत चुनाव लड़ने की लगी रोक समाप्त हो जाएगी। पटेल ने कहा कि दोनों विधेयकों को वर्तमान सत्र में ही पारित कराया जाएगा। इस निर्णय से ऐसे कई जनप्रतिनिधियों और संभावित उम्मीदवारों को राहत मिलेगी, जो अब तक इस प्रावधान के कारण चुनाव नहीं लड़ पा रहे थे। समय-समय पर उठती रही बदलाव की मांग पिछली गहलोत सरकार के दौरान कांग्रेस विधायक हेमाराम चौधरी ने 2 बच्चों की शर्त हटाने की मांग की थी। पिछले साल बजट सेशन के दौरान चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने भी सवाल उठाते हुए पूछा था कि दो से ज्यादा बच्चों वाले लोगों को विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ने की इजाज़त देने और पंचायत चुनाव लड़ने से रोकने के पीछे क्या वजह है? साथ ही इस नियम पर फिर से विचार करने की अपील की थी। जनप्रतिनिधि-नेताओं के समान अवसर की मांग पर संशोधन जनप्रतिनिधियों और कई नेताओं ने दो बच्चों की बाध्यता हटाने की पुरजोर मांग की थी। खुद मंत्री झाबर सिंह खर्रा इन नेताओं की बात को कई बार दोहरा चुके हैं कि विधायक और सांसद चुनाव में ऐसी बाध्यता नहीं है। वहीं, सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन में भी यह शर्त पहले ही हटाई जा चुकी है। ऐसे में निकाय चुनाव में यह बाध्यता क्यों हो? जनप्रतिनिधियों को भी समान अवसर मिलना चाहिए। इसी आधार पर सरकार में तय हुआ कि सभी योग्य और सक्रिय लोगों को चुनाव लड़ने का मौका मिलना चाहिए, विशेषकर उन लोगों को जिन्होंने वर्षों तक जमीनी स्तर पर काम किया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के कार्यकाल में पंचायतीराज कानून और राजस्थान नगरपालिका कानून में संशोधन कर दो से अधिक संतानों वाले व्यक्तियों के चुनाव लड़ने पर रोक का प्रावधान जोड़ा गया था। उस समय इसका उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देना बताया गया था। नियम लागू होने के बाद कई निर्वाचित प्रतिनिधियों की सदस्यता समाप्त भी हुई थी। इस फैसले से राजस्थान की राजनीति गरमा गई थी। 1997 में राजस्थान हाईकोर्ट ने इस बदलाव को सही ठहराते हुए कहा था कि यह आबादी बढ़ने से रोकने के लिए एक ज़रूरी कदम है। लेकिन, अब 30 साल पहले लागू किए गए प्रावधान को बदलने के निर्णय के बाद प्रदेश में स्थानीय निकाय और पंचायतीराज की राजनीति में बदलाव की संभावना है।