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पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ बड़ा खुलासा, पति की हत्या में पत्नी गिरफ्तार

मंदसौर  सुरजनी के हिस्ट्रीशीटर भय्यू लाला की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। पुलिस का दावा है कि भय्यू लाला की गोली मारकर हत्या करने वाली उसकी पत्नी रुखसाना ही है। पुलिस की गिरफ्त में दो आरोपित हैं जिन्होंने साक्ष्य मिटाने में रुखसाना की मदद की बात स्वीकारी है। हत्या में उपयोग की गई पिस्टल भी जब्त कर ली गई है। रुखसाना अभी भी फरार है। एसआईटी ने किया हत्याकांड का राजफाश एसआईटी टीम द्वारा भय्यू लाला उर्फ वाहिद खान की हत्या का राजफाश कर दिया गया है। मंदसौर जिले के सीतामऊ थाना क्षेत्र के गांव सुरजनी के भय्यू लाला की हत्या की गुत्थी पुलिस ने नौवें दिन सुलझा दी। हत्या उसकी ही पत्नी रुखसाना ने ही की थी जो अभी फरार है। साजिश के तहत सुनाई गई थी दम घुटने की कहानी एसपी विनोद कुमार मीना ने बताया कि 18 फरवरी को याकूब पुत्र बाबर खान निवासी सुरजनी ने सूचना दी थी कि पुलिस के डर से 42 वर्षीय वाहिद उर्फ भय्यू लाला पुत्र बाबर खान पलंग पेटी में छुपा था, दम घुटने से उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा भय्यू लाला के शव का पोस्टमार्टम जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों के पैनल से कराया गया। पोस्टमार्टम में यह खुलासा हुआ कि भय्यू लाला की मौत गोली लगने से हुई थी। मामले की जांच गरोठ एएसपी के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने की। टीम द्वारा घटनास्थल पर मिले साक्ष्य के आधार पर मौके पर उपस्थित संदेहियों से पूछताछ की गई। साक्ष्य छुपाने वाले दो आरोपित गिरफ्तार संदेहियों ने अपना जुर्म स्वीकार करने के बाद बताया कि भय्यू लाला की हत्या उसकी पत्नी रुखसाना ने की है। रुखसाना का सहयोग करते हुए सलमान खान पुत्र जमाल खान पठान निवासी सुवासरा हाल मुकाम सुरजनी व बबलू खान पिता अब्दुल गनी पठान निवासी सुरजनी ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर साक्ष्य छुपाए हैं। पुलिस ने सलमान व बबलू की निशानदेही पर हत्या में उपयोग की गई पिस्टल जब्त कर ली है। अभी सलमान खान एवं बबलू खान को गिरफ्तार किया है। इनको न्यायालय में पेश किया जा रहा है। मामले में फरार रुखसाना की तलाश की जा रही है।

UN मंच पर भारत का पलटवार: IMF लोन से ज्यादा J&K पर खर्च, पाकिस्तान को आईना

संयुक्त राष्ट्र भारतीय डिप्लोमैट अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में जोरदार लताड़ लगाई। उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा कि पाकिस्तान सपनों की दुनिया में है। हमारे जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए बजट पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष बेलआउट से भी बड़ा है। ऐसा पहली बार नहीं है जब वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर को लेकर अपने राग अलाप रहा हो। अक्सर पाकिस्तान एक ही मुद्दे को लेकर भारत पर निशाना साधने की कोशिश करता है। ताजा मामले में जब पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर का राग अलापा, तो यूएन के मंच पर भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने जमकर क्लास लगाई। पाकिस्तान को जवाब देते हुए अनुपमा सिंह ने कहा, "भारत, पाकिस्तान और ओआईसी की हाई-लेवल मीटिंग में भारत के बारे में कही गई बातों के जवाब में अपने जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर है। हम इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हैं। ओआईसी, पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा को दोहराकर, सिर्फ यह दिखाता है कि उसने खुद को एक सदस्य के कब्जे में कितना गहराई से आने दिया है और खुद को एक देश की राजनीतिक मजबूरियों के लिए एक ईगो चैंबर बना लिया है। पाकिस्तान के लगातार प्रोपेगेंडा से अब जलन की बू आ रही है।" भारतीय अधिकारी ने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए कहा, "शायद पाकिस्तान को यह यकीन नहीं हो रहा कि जम्मू-कश्मीर का विकास बजट आईएमएफ से मांगे गए हालिया बेलआउट पैकेज से दोगुने से भी ज्यादा है। आखिर में, पाकिस्तान की लगातार स्टेट-स्पॉन्सर्ड टेररिज्म के जरिए इलाके को अस्थिर करने की कोशिशों के बावजूद, जम्मू-कश्मीर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक तौर पर आगे बढ़ रहा है। पाकिस्तान के लिए अच्छा होगा कि वह ऐसे प्लेटफॉर्म पर दिखावा करने के बजाय अपने बढ़ते अंदरूनी संकट को ठीक करने पर ध्यान दे। दुनिया जरूर उसके दिखावे को समझ सकती है।" पाकिस्तान को मुहतोड़ जवाब देते हुए अनुपमा सिंह ने कहा, "हम ऐसे प्रोपेगेंडा को बढ़ावा नहीं देना चाहते, लेकिन हम इसे फैक्ट्स के साथ खत्म करने के लिए कुछ बातें जरूर कहेंगे। जम्मू और कश्मीर भारत का एक जरूरी और अटूट हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। पाकिस्तान की कोई भी मनगढ़ंत बातें या प्रोपेगेंडा इस पक्की बात को नहीं बदल सकता कि जम्मू-कश्मीर का भारत में शामिल होना पूरी तरह से वैध और पक्का था और यह भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 और अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक था।" पीओके को लेकर पाकिस्तान पर पलटवार करते हुए भारतीय अधिकारी ने कहा, "इस इलाके से जुड़ा एकमात्र विवाद पाकिस्तान का भारतीय इलाकों पर गैर-कानूनी कब्जा है। हम पाकिस्तान से इन इलाकों को खाली करने की अपील करते हैं, जिन पर उसने जबरदस्ती कब्जा किया हुआ है। ऐसे देश से लोकतंत्र पर भाषण सुनना वाकई मुश्किल है, जहां की सरकारें शायद ही कभी अपना कार्यकाल पूरा करती हैं।" उन्होंने कहा, "ये बातें खोखली लगती हैं। जम्मू-कश्मीर में आम चुनाव और विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड वोटिंग इस बात का सबूत है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने पाकिस्तान की फैलाई आतंकवाद और हिंसा की सोच को नकार दिया है और विकास और लोकतंत्र के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं। पिछले साल जम्मू-कश्मीर में दुनिया के सबसे ऊंचे पुल चिनाब रेल ब्रिज की शुरुआत हुई है। यह दिखाता है कि पाकिस्तान जरूर भ्रम में है।"

मस्जिद में हिंदू निशान क्यों? कमाल मौला केस में मुस्लिम पक्ष की दलील जानिए

धार मध्य प्रदेश के धार में विवादित भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट के खुलासे के बाद जहां हिंदू पक्ष उत्साहित है तो वहीं मुस्लिम पक्ष इसको खारिज करते हुए 1903 के सर्वेक्षण की याद दिला रहा है। वहीं, कमाल मौला मस्जिद में हिंदुओं से जुड़े प्रतीक चिह्नों की मौजूदगी की बात कबूल करते हुए दलील दी जा रही है कि निर्माण में किसी मंदिर नहीं, बल्कि राजा भोज के महल के अवशेषों का इस्तेमाल किया गया था। मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के चेयरमैन और धार के मुस्लिम सदर (प्रमुख) अब्दुल समद इस केस में याचिकाकर्ता भी हैं। बातचीत में वह इंदौर हाई कोर्ट में पेश किए गए एएसआई रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहते हैं, 'यह रिपोर्ट गलत दिशा में है। 1903 में एएसआई की रिपोर्ट में इस इमारत को कमाल मौला मस्जिद घोषित किया गया था और इसे संरक्षित किया गया। हम अदालत में नई रिपोर्ट को चुनौती देंगे।' समद ने आरोप लगाया कि परिसर में अधिकांश संरचनाओं को 'छिपे हुए मकसद' से लाया गया था। वह कहते हैं, 'यह पूर्व नियोजित था। हम 2003 से इस पर आपत्ति जाहिर कर रहे हैं। सर्वे का आदेश 2024 में दिया गया था।' वह जोर देकर कहते हैं कि ब्रिटिश काल में हुए सर्वे में इस स्थान को मस्जिद बताया गया था। समद ने कहा, 'यह मस्जिद था, यह मस्जिद है। यहां नमाज पढ़ना जारी रहेगा।' कमाल मौला मस्जिद का निर्माण और हिंदू प्रतीक चिह्न समद कहते हैं कि मस्जिद का निर्माण निजामुद्दीन औलिया के करीब कमाल मौला ने कराया था, जो 1925 में धार के आसपास इस्लाम के प्रचार के लिए आए थे। उन्होंने इस क्षेत्र में कई मदरसों और मस्जिदों का निर्माण कराया। मालवा के शासक महमूद खिलजी ने इनके लिए जमीन उपलब्ध कराई थी। अब्दुल समद ने कहा, 'तब भारी निर्माण सामग्रियों को लाना मुश्किल था इसलिए निर्माणकर्ताओं ने राजा भोज के महल के अवशेषों का इस्तेमाल कर लिया। राजा भोज के महल को गुजरात के चालुक्य-सोलंकी वंश ने नष्ट किया था। वे कुछ ढांचे गुजरात ले गए जबकि बाकी वहां पड़े रहे। चूंकि राजा भोज हिंदू राजा थे, परिसर में पाए जाने वाले ढांचे हिंदुओं के प्रतीक वाले होंगे।' उन्होंने कहा कि इन दलीलों को वह आगे कोर्ट में भी पेश करेंगे। मंदिर मस्जिद विवाद और 2000 पन्नों की रिपोर्ट पक्षकारों के मुताबिक एएसआई की 2,000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि विवादित स्थल पर धार के परमार राजाओं के शासनकाल की एक विशाल संरचना पहले से मौजूद थी और वहां वर्तमान में मौजूद संरचना प्राचीन मंदिरों के हिस्सों से बनाई गई थी। भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष संभवतः 11वीं सदी के इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह परिसर एएसआई द्वारा संरक्षित है और इस निकाय ने उच्च न्यायालय के आदेश पर दो साल पहले विवादित परिसर का सर्वेक्षण करके अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट को लेकर अदालत के ताजा आदेश के बाद इस विवादित स्थल का मसला फिर सुर्खियों में आ गया है। नई रिपोर्ट में क्या कहा गया पक्षकारों के मुताबिक 2,000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया,'प्राप्त स्थापत्य अवशेषों, मूर्तिकला के टुकड़ों, साहित्यिक ग्रंथों वाले शिलालेखों की बड़ी शिलाओं, स्तंभों पर नागकर्णिका शिलालेख आदि से संकेत मिलता है कि इस स्थल पर साहित्यिक और शैक्षिक गतिविधियों से संबंधित एक विशाल संरचना विद्यमान थी। वैज्ञानिक जांच के दौरान प्राप्त पुरातात्विक अवशेषों के आधार पर पहले से मौजूद इस संरचना को परमार काल का माना जा सकता है।' रिपोर्ट में कहा गया कि सर्वेक्षण के दौरान कुल 94 मूर्तियां, मूर्तिकला के टुकड़े और मूर्तिकला से सजे स्थापत्य तत्व पाए गए जो बेसाल्ट, संगमरमर, मृदु पत्थर, बलुआ पत्थर और चूना पत्थर से बने हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर और कमाल मौला के मकबरे में अरबी और फारसी के 56 शिलालेख भी मिले जिनमें मकबरे में रखीं शिलाएं और स्याही से लिखे 43 शिलालेख शामिल हैं। क्या कहना है हिंदू पक्ष का याचिकाकर्ताओं में शामिल 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' के पक्षकार आशीष गोयल ने पीटीआई से कहा,'उच्च न्यायालय में विचाराधीन हमारी याचिका की मुख्य गुहार है कि विवादित परिसर का धार्मिक स्वरूप तय किया जाए। एएसआई की रिपोर्ट से हमारी इस बात को बल मिलता है कि भोजशाला एक परमारकालीन स्मारक है और इसे नुकसान पहुंचाकर एक नया ढांचा खड़ा किया गया था।' उन्होंने दावा किया कि एएसआई को वैज्ञानिक सर्वेक्षण में मिले सिक्के, मूर्तियां और शिलालेख दर्शाते हैं कि विवादित परिसर पर एक प्राचीन मंदिर था।

नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: करोड़ों की हशीश-गांजा बरामद

जगदलपुर ओडिशा पुलिस ने नशे के कारोबार पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम देते हुए करीब 200 करोड़ रुपये की हशीश और पांच करोड़ रुपये का गांजा जब्त किया है। यह कार्रवाई कोरापुट जिले के झोलापुट जलाशय के पास जंगलों के बीच बने एक गुप्त डिपो में की गई। ओडिशा पुलिस के अनुसार, देश में यह पहली बार है जब एक साथ इतनी बड़ी मात्रा में गांजा और उससे तैयार की गई हशीश बरामद हुई है। जांच में सामने आया है कि नशे का यह डिपो ओडिशा और आंध्र प्रदेश की सीमा पर रणनीतिक रूप से तैयार किया गया था, ताकि पुलिस की निगरानी से बचते हुए कच्चे माल और तैयार उत्पाद की आवाजाही हो सके। यहां गांजे से तेल निकालकर हशीश तैयार की जा रही थी, जिसे देश के कई राज्यों में सप्लाई करने के लिए पूरा नेटवर्क खड़ा किया गया था। इस मामले में हरियाणा से पहुंचे दो पैडलरों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि डिपो चलाने वाले मुख्य आरोपितों की तलाश जारी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, बस्तर से सटे ओडिशा के मलकानगिरी और कोरापुट जिले लंबे समय से गांजा उत्पादन के लिए कुख्यात रहे हैं। दुर्गम पहाड़ी और जंगल इलाकों में गांजे की फसल उगाई जाती है, जिसे स्थानीय नेटवर्क के जरिए देशभर में भेजा जाता है। इस सप्लाई चेन में जगदलपुर एक प्रमुख ट्रांजिट रूट के तौर पर इस्तेमाल होता रहा है, जहां से माल मध्य भारत और उत्तर भारत के बाजारों तक पहुंचाया जाता है। हशीश क्या है? हशीश गांजे से निकाले गए रेज़िन (तेल) से तैयार की जाने वाली एक गाढ़ी और महंगी नशीली वस्तु है। इसकी मात्रा कम होती है, लेकिन नशे की तीव्रता अधिक होती है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत काफी ऊंची होती है। गांजे की तुलना में इसे छिपाकर ले जाना आसान होता है, यही वजह है कि तस्कर अब गांजे को प्रोसेस कर हशीश में बदलने लगे हैं।  

बलूचिस्तान में बढ़ा तनाव: ISI ने मुख्यालय के आसपास चलाया बुलडोजर, रात का कर्फ्यू सख्त

इस्लामाबाद पाकिस्तान की सेना ने बलूचिस्तान के नुश्की जिले के काजियाबाद इलाके में आईएसएआई मुख्यालय के पास कई घर गिरा दिए हैं। बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार इन घरों में रहने वाले लोगों को कई दिन पहले ही नोटिस जारी किए गए थे। उन्हें कहा गया था कि वे घर छोड़ दें। इन नोटिस में लिखा गया था कि तय समयसीमा के भीतर यदि ये लोग घरों से बाहर नहीं निकले तो इमारतों को जमींदोज कर दिया जाएगा। बीते कुछ दिनों में पाकिस्तानी सेना ने कई घरों को गिरा दिया है। इन घरों को विस्फोटक और अन्य भारी उपकरण लगाकर गिराया गया है। माना जा रहा है कि आईएसआई के पास बनी इन इमारतों से हमला होने का खतरा था। इसलिए उन्हें गिरा दिया गया है। कहा जा रहा है कि जिन इमारतों को गिराया गया है, उनमें से एक मकान बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के नेता बशीर जेब बलोच का पैतृक आवास है। इसके अलावा भी कई राजनीतिक लोगों के घरों को गिराया गया है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के ऑपरेशन हेरॉफ के बाद पाकिस्तान ने यह कार्रवाई की है। माना जा रहा है कि इस इलाके में पाकिस्तान को बलूचों से डर सता रहा था। इसी के चलते उसने उनके घर तक गिरा दिए हैं। यही नहीं बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट में तो कहा गया है कि कच्छ और ग्वादर जैसे इलाकों में भी इमारतों को जमींदोज किया गया है। हर दिन शाम 6 बजे के बाद लगेगा कर्फ्यू नुश्की के काजियाबाद के लोगों का कहना है कि प्रशासन ने हर दिन शाम को 6 बजे के बाद यहां कर्फ्यू लगाने का फैसला भी लिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार सुरक्षा बलों ने चेतावनी दी है कि जब तक यहां के लोग पाकिस्तान के समर्थन में रैली नहीं निकालते हैं और अपने घरों में पाकिस्तानी झंडा नहीं फहराते हैं। तब तक कर्फ्यू हर दिन लगता रहेगा। वित्तीय संस्थानों पर भी यह बात लागू की गई है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने 31 जनवरी को कई शहरों में ऑपरेशन हेराफ लॉन्च किया था। इसमें उसने बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया था। उसके बाद ही पाकिस्तान ने यह ऐक्शन लिया है। पूरे नुश्की शहर को ही बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने घेरा था बता दें कि एक साथ कई शहरों में हमले करके पाकिस्तान को बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने करारा झटका दिया है। उसके बाद से ही पाकिस्तानी सरकार और सेना बौखलाए हुए हैं। दरअसल बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने हमलों के दौरान नुश्की शहर को ही घेर लिया था। माना जा रहा है कि इसी के चलते पाकिस्तानी सेना ने यह ऐक्शन लिया है। इसके अलावा आईएसआई के मुख्यालय पर भी हमले का डर है।  

कुल 10 प्रकरणों पर की गई समीक्षा एवं सुनवाई, 04 प्रकरणों में आदेश जारी करने के दिए गए निर्देश

रायपुर आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में आज उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति की महत्वपूर्ण बैठक आदिम जाति अनुसंधान एक प्रशिक्षण संस्थान के सभाकक्ष, नवा रायपुर में संपन्न हुई। बैठक में कुल 10 प्रकरणों की समीक्षा एवं सुनवाई की गई। इनमें जाति जांच प्रकरण से संबंधित 08 प्रकरणों में पक्षकार समिति के समक्ष उपस्थित हुए। 04 प्रकरणों में गुण-दोष के आधार पर विनिश्चय किए जाने का निर्णय करते हुए आदेश जारी करने के निर्देश दिए गए। इनमें एक डीजे स्तर के अधिकारी एवं एक ग्रामीण विकास विभाग में ईएनसी स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। 02 प्रकरणों में वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से सुनवाई की गई एवं पक्षकार को 10 दिवस के भीतर समिति के समक्ष उपस्थित होकर अपने पक्ष में प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। 01 प्रकरण में विजिलेंस टीम को दुबारा मौके पर जाकर सोशल स्टेटस एवं अन्य प्रमाणित तथ्यों की गहन जांच कर 45 दिवस के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। जबकि 03 प्रकरणों में जाति प्रमाण पत्र धारकों को सुनवाई का एक और अंतिम अवसर प्रदान करते हुए आगामी बैठक में उपस्थित होकर अपनी जाति के संबंध में प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत करन के निर्देश दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति द्वारा नियमित अंतराल में बैठक आयोजित कर जाति प्रमाण पत्र एवं सामाजिक प्रस्थिति से संबंधी प्रकरणों का निपटारा किया जा रहा है। माननीय सर्वाेच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय से संबद्ध प्रकरणों पर भी नियमानुसार पारदर्शी एक समयबद्ध तरीके से सुनवाई कर प्रकरणों का शीघ्र निपटारा किया जा रहा है। आज की बैक में बड़ी संख्या में पक्षकार एवं अधिवक्ता अपना पक्ष प्रस्तुत करने हेतु उपस्थित हुए। बैठक में आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास डॉ. सारांश मित्तर (सदस्य), संचालक, आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान मती हिना अनिमेष नेताम (सदस्य सचिव), संचालक लोक शिक्षण संचालनालय  ऋतुराज रघुवंशी (सदस्य), संचालक, भू अभिलेख,  विनीत नदनवार, संयुक्त संचालक, टीआरटीआई मती गायत्री नेताम (प्रभारी अधिकारी, जाति जांच पकोष्ठ), मती रमा उइके (सदस्य), डॉ. अनिल विरूलकर (सदस्य) सहित, विजिलेंस टीम से  एमानुअल लकड़ा (डीएसपी),  जितेन्द्र गुप्ता एवं मती अंजनी भगत इत्यादि उपस्थित थे। विदित हो माननीय सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में दिये गये मार्गदर्शी निर्देश एवं छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक प्रास्थिति के प्रमाणीकरण का विनियमन) अधिनियम 2013 में विहित प्रावधानों के अंतर्गत कुल 07 सदस्यीय उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति का गठन किया गया है। समिति अर्द्ध न्यायिक स्वरूप में कार्य करते हुए निष्पक्ष एंव समयबद्ध निर्णय सुनिश्चित कर रही है।

मध्यप्रदेश में अब ऑनलाइन बनेंगे शस्त्र लाइसेंस, ऑफलाइन सिस्टम खत्म

भोपाल मध्य प्रदेश में अब शस्त्र लाइसेंस लेने के लिए ऑफलाइन आवेदन नहीं लिए जाएंगे। ये केवल ऑनलाइन ही स्वीकार होंगे। सरकार आगामी एक मार्च से शस्त्र लाइसेंस संबंधी नई व्यवस्था लागू करने जा रही है। इसमें किसी व्यक्ति को नया शस्त्र, बंदूक अथवा अन्य हथियार लेना है तो भारत सरकार द्वारा बनाए पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य होगा। बिना ऑनलाइन आवेदन के फार्म स्वीकार नहीं होंगे। अनियमितताओं और गड़बड़ियों पर लगेगी रोक दरअसल, प्रदेश में जिलों से कारतूस में हेरफेर और लाइसेंस प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायतें आती रही हैं। नई व्यवस्था लागू होने से इस तरह की गड़बड़ियों पर रोक लगेगी। आवेदक का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन सत्यापित किया जा सकेगा, जिससे अयोग्य या नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान आसान होगी। न तो व्यक्तिगत सिफारिशों का असर रहेगा और न ही रिकॉर्ड में हेरफेर की गुंजाइश बचेगी। डिजिटल प्रक्रिया से बढ़ेगी पारदर्शिता नई प्रणाली से पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत होगा। ऑनलाइन आवेदन पूर्ण करने के बाद आवेदक को एक यूनिक फाइल नंबर प्राप्त होगा। इसी फाइल नंबर के साथ आवेदन का प्रिंटआउट निकालकर निर्धारित प्रक्रिया अनुसार मैन्युअल जमा किया जा सकेगा। ऑफलाइन आवेदन पूरी तरह से बंद यदि किसी आवेदक द्वारा पहले ऑनलाइन आवेदन नहीं किया गया है, तो उसका ऑफलाइन फार्म किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। एक मार्च तथा उसके बाद प्राप्त होने वाले सभी आवेदन केवल ऑनलाइन पद्धति से ही मान्य होंगे। इस प्रणाली से नए लाइसेंस आवेदनों की ट्रैकिंग कर लाइसेंस नवीनीकरण और स्पोर्ट्स कोटे के तहत जारी लाइसेंसों की स्थिति की भी निगरानी की जा सकेगी।  

युद्ध क्षमता पर खतरा! चीनी सेना को लेकर चौंकाने वाला खुलासा

बीजिंग चीनी सेना पर एक बड़े संकट ने दस्तक दे दी है। हाल ही में सामने आई कुछ रिपोर्ट्स में उसे लेकर चौंकाने वाले दावे किए गए हैं। इस दावे के मुताबिक चीन की सेना में चल रही भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई से उसकी सैन्य कमान व्यवस्था में दरार आ रही है और इससे उसकी तेजी से आधुनिक हो रही सैन्य ताकत की तैयारी प्रभावित हो सकती है। यह दावा लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) ने अपनी वार्षिक ‘मिलिट्री बैलेंस’ रिपोर्ट में किया है। रिपोर्ट के मुताबिक व्यापक जांच के कारण पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के वरिष्ठ स्तर पर गंभीर कमियां पैदा हो गई हैं और जब तक खाली पद नहीं भरे जाते, तब तक संगठनात्मक स्तर पर दिक्कत बनी रहेगी। चीन की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की कार्रवाई के कारण यह दरार सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC), क्षेत्रीय थिएटर कमांड, हथियार खरीद एजेंसियों और रक्षा अकादमिक संस्थानों तक फैल चुकी है और यह प्रक्रिया अभी पूरी भी नहीं हुई है। यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब हाल ही में चीन के दो सबसे वरिष्ठ जनरल भी अनुशासनात्मक जांच के घेरे में आए हैं। इसे कई दशकों में चीन की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक इस तरह की कार्रवाई का निकट भविष्य में असर लगभग तय है। हालांकि IISS ने यह भी कहा है कि यह प्रभाव अस्थायी हो सकता है और सैन्य आधुनिकीकरण की प्रक्रिया तेज गति से जारी रहने की संभावना है। चीन का रक्षा बजट बढ़ा लेकिन चुनौती बरकरार IISS के मुताबिक चीन का रक्षा खर्च एशिया के अन्य देशों की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। 2025 में एशिया के कुल रक्षा खर्च में चीन की हिस्सेदारी करीब 44 प्रतिशत पहुंच गई। रिपोर्ट में इस बात के संकेत है कि जहां चीन अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की रणनीति जारी रखे हुए है, लेकिन कमान ढांचे में आई कमी उसकी संचालन क्षमता को प्रभावित कर सकती है।  

हौसलों की सवारी: गीता दीदी ई-रिक्शा से गढ़ रहीं आत्मनिर्भरता की कहानी

रायपुर ई-रिक्शा से बच्चों को विद्यालय पहुंचाकर स्वावलंबन की मिसाल बनीं गीता दीदी कभी घरेलू कार्यों तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं अब स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर सशक्त कदम बढ़ा रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित ‘बिहान’ योजना ने महिलाओं को संगठित कर उनके आर्थिक विकास की मजबूत नींव रखी है। कलेक्टर मती चंदन त्रिपाठी के मार्गदर्शन में जिले में बिहान से जुड़ी महिलाओं को पारंपरिक कार्यों से आगे बढ़ाकर नए व्यवसायों से जोड़ा जा रहा है। इसी पहल का प्रेरक उदाहरण है ग्राम पंचायत रटगा की गीता दीदी, जो अब ई-रिक्शा से बच्चों को विद्यालय पहुंचाकर स्वावलंबन की राह पर अग्रसर हैं। बिहान से जुड़कर मिली नई दिशा बैकुंठपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रटगा की 14 महिलाओं ने वर्ष 2018 में ‘जय मां लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह’ का गठन किया। समूह की अध्यक्ष चुनी गईं गीता दीदी ने वर्ष 2020 में पौधों की सुरक्षा हेतु ट्री-गार्ड निर्माण कार्य शुरू किया। लगभग 50 हजार रुपये की सामूहिक लागत से शुरू हुए इस कार्य से समूह ने तीन लाख रुपये की आय अर्जित की, जिससे आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। वर्ष 2021 में गीता दीदी ने समूह के माध्यम से बैंक से व्यक्तिगत ऋण प्राप्त कर 70 हजार रुपये की लागत से किराना दुकान शुरू की। इससे उनके परिवार की दैनिक आय सुनिश्चित हुई और आर्थिक स्थिति में सुधार आया। गत वर्ष कलेक्टर मती चंदन त्रिपाठी द्वारा बिहान से जुड़ी महिलाओं को नए व्यवसायों से जोड़ने की पहल की गई। ई-रिक्शा संचालन के विकल्प को गीता दीदी ने उत्साहपूर्वक स्वीकार किया। मुख्यमंत्री के हाथों मिली ई-रिक्शा की चाबी गत 17 फरवरी को कोरिया महोत्सव के अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के हाथों गीता दीदी को ई-रिक्शा की चाबी प्रदान की गई। इसके पश्चात उन्होंने अपने गांव में अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों को विद्यालय पहुंचाने की सेवा प्रारंभ की। शुरुआत में ही उन्हें 5600 रुपये की अग्रिम राशि प्राप्त हुई और अब वे नियमित रूप से ग्राम पंचायत रटगा एवं आश्रित ग्राम दुधनियां के बच्चों को विद्यालय पहुंचा रही हैं।

बटुकों से यौन शोषण की पुष्टि, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर शिकंजा कसता हुआ

प्रयागराज नाबालिग बटुकों से कथित यौन शोषण के आरोपों में घिरे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। सूत्रों के मुताबिक पुलिस द्वारा कराई गई मेडिकल जांच रिपोर्ट में पीड़ित दोनों नाबालिग बच्चों के साथ कुकर्म की पुष्टि होने की बात सामने आई है। बुधवार को पुलिस ने दोनों बच्चों का मेडिकल परीक्षण कराया था। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने भी दावा किया है कि रिपोर्ट में यौन शोषण के संकेत स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की बढ़ेंगी मुश्किलें मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने जांच की रफ्तार तेज कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, मेडिकल रिपोर्ट को अहम साक्ष्य के तौर पर केस डायरी में शामिल किया जा रहा है। यदि जांच में आरोप पुष्ट होते हैं तो स्वामी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की गिरफ्तारी की आशंका के बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है। इस याचिका पर कल जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ में सुनवाई होनी है। अदालत में पुलिस मेडिकल रिपोर्ट और अब तक जुटाए गए साक्ष्यों को प्रस्तुत कर सकती है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली तो पुलिस उन्हें किसी भी समय गिरफ्तार कर सकती है। अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज यह मामला प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज है। स्वामी और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी सहित अन्य के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया है कि मामले की विवेचना जारी है और अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। आगे की कार्रवाई अदालत के निर्देश और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पर्याप्त सबूत- आशुतोष ब्रह्मचारी वहीं पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ यौन शोषण का मुकदमा दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी ने दावा किया है कि उनके पास आरोपों से संबंधित पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने यह बात कही। इस दौरान उन्होंने एक लैपटॉप दिखाते हुए बताया कि इसमें नाबालिगों से यौन शोषण की फोटो और वीडियो सहित अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने इस मामले में दो अन्य नाम का खुलासा करते हुए राजनीतिक पार्टियों के बड़े नेताओं व वीआईपी के शामिल होने का भी दावा किया। उन्होने कहा कि दोनों पीड़ितों ने कोर्ट में कलमबद्ध गवाही दी और इनकी मेडिकल जांच पूरी हो चुकी है। कहा कि पीड़ितों में करीब 20 लड़के व महिलाएं भी शामिल हैं। उन्होंने इस मामले में साक्ष्य (स्वीमिंग पुल आदि) को मिटाने और आश्रम में करीब तीन से चार करोड़ रुपये का घोटाला करने का भी आरोप लगाया।