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ई-रिक्शा चालकों के लिए बड़ा अलर्ट, रायपुर में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया तो फंसेंगे

रायपुर. राजधानी में संचालित ई-रिक्शा और ऑटो के ऑनलाइन पंजीयन के लिए विशेष अभियान शुरू कर दिया गया है। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने इस अभियान का शुभारंभ किया। जनहित फाउंडेशन के सहयोग से तैयार किए गए क्यूआर कोड और ऑनलाइन पंजीयन लिंक के जरिए ई-रिक्शा चालकों और मालिकों को अगले 15 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। पूरी जानकारी होगी दर्ज ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया में ई-रिक्शा मालिक और चालक का नाम, पता, मोबाइल नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस नंबर दर्ज किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस अभियान से राजधानी में संचालित ई-रिक्शा और ऑटो की वास्तविक संख्या का पता चल सकेगा। साथ ही वाहन संचालकों का पूरा डेटा भी पुलिस के पास उपलब्ध रहेगा। बिना पंजीयन पर होगी कार्रवाई पुलिस प्रशासन ने 5 जून तक विशेष पंजीयन अभियान चलाने का निर्णय लिया है। ई-रिक्शा और ऑटो चालक अपने मोबाइल फोन के माध्यम से भी आसानी से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 5 जून के बाद बिना पंजीयन के संचालित होने वाले ई-रिक्शा और ऑटो के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। राजधानी में यातायात व्यवस्था को बेहतर और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से यह पहल की गई है।

ई-रिक्शा से कैबिनेट बैठक में पहुंचे मंत्री टेटवाल और पंवार, दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

ई-रिक्शा से कैबिनेट बैठक के लिए मंत्रालय पहुंचे मंत्री द्वय श्री टेटवाल और  पंवार भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देशवासियों से किए गए ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण के आह्वान को आत्मसात करते हुए, बुधवार को कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल और मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास (स्वतंत्र प्रभार) श्री नारायण सिंह पंवार कैबिनेट बैठक में शामिल होने के लिए ई-रिक्शा से मंत्रालय पहुंचे। "सुरक्षित पर्यावरण का यही आधार-ईंधन बचत हर बार" का संदेश देते राज्यमंत्री श्री टेटवाल कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने संसाधनों के संयमित उपयोग का जो आह्वान किया है, उसे आत्मसात कर हम सभी को अपने आचरण से दूसरों को प्रेरित करना चाहिए। ऊर्जा बचत को जन आंदोलन बनाने की अपील मंत्री श्री टेटवाल और श्री मंत्री पंवार ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि हम सभी को पेट्रोल-डीजल की खपत को कम करने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और ऊर्जा बचत को एक जनआंदोलन बनाने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति द्वारा किए गए छोटे-छोटे प्रयास ही भविष्य में एक आत्मनिर्भर, स्वच्छ एवं सशक्त भारत के निर्माण की मजबूत नींव तैयार करेंगे।  

महंगाई का असर: दिल्ली में ई-रिक्शा सफर होगा महंगा, नई दरें जल्द लागू

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में ई-रिक्शा से सफर करने वाले यात्रियों को जल्द ही ज्यादा किराया चुकाना पड़ेगा। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स फेडरेशन ने बढ़ती महंगाई और लंबे समय से किराए में कोई बदलाव न होने का हवाला देते हुए न्यूनतम किराया 20 रुपये करने का फैसला लिया है। नई दरें अगले महीने से लागू होने की संभावना है। फेडरेशन के चेयरमैन अनुज शर्मा ने बताया कि दिल्ली में ई-रिक्शा वर्ष 2010 से चल रहे हैं, लेकिन तब से अब तक इनके किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। वहीं, इसी अवधि में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी के किराए दो बार बढ़ चुके हैं। उनका कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई, बैटरी, मेंटेनेंस और अन्य खर्चों में इजाफे के कारण किराया बढ़ाना जरूरी हो गया है, ताकि ड्राइवरों की आय प्रभावित न हो। रिक्शा ड्राइवरों और मैन्युफैक्चरर्स की बैठक में फैसला यह फैसला बुधवार को ई-रिक्शा ड्राइवरों, डीलरों और मैन्युफैक्चरर्स की संयुक्त बैठक में लिया गया, जिसमें दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह भी मौजूद थे। बैठक में किराया बढ़ाने के साथ-साथ सेक्टर से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की गई। कुल 2 लाख ई-रिक्शा चल रहे वर्तमान में दिल्ली में 2 लाख से अधिक ई-रिक्शा आधिकारिक रूप से पंजीकृत हैं, जबकि करीब 1.5 लाख बिना रजिस्ट्रेशन के भी सड़कों पर चल रहे हैं। ये ई-रिक्शा खासकर मेट्रो स्टेशनों और रिहायशी इलाकों में लास्ट माइल कनेक्टिविटी का अहम साधन बने हुए हैं। अभी अधिकांश जगहों पर पहले दो किलोमीटर के लिए 10 रुपये और उसके बाद हर किलोमीटर के लिए 5 रुपये किराया लिया जाता है। 2022 का सर्कुलर लिया वापस इस बीच, दिल्ली सरकार ने 2022 के उस सर्कुलर को वापस लेने का भी फैसला किया है, जिसमें कंपनियों को अपने नाम पर कई ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक कार्ट रजिस्टर कराने की अनुमति दी गई थी। परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य कुछ कंपनियों के हाथों में मालिकाना हक के केंद्रीकरण को रोकना और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के शोषण को कम करना है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से मालिक-ड्राइवर को अधिक अवसर मिलेंगे, आत्मनिर्भर रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और ई-रिक्शा सेक्टर में एकाधिकार की संभावना भी कम होगी। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से अधिक से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और लास्ट माइल कनेक्टिविटी का ढांचा भी मजबूत होगा।

इंदौर में 6 हजार से अधिक ई-रिक्शाओं के रजिस्ट्रेशन, जोन के हिसाब से कलर करवा रहे संचालक, नई व्यवस्था लागू

इंदौर  इंदौर में ट्रैफिक पुलिस ने 6 हजार से ज्यादा ई-रिक्शाओं के रजिस्ट्रेशन करा लिए हैं। इन ई-रिक्शाओं का संचालन अलग-अलग जोन में किया जाएगा, जिसके लिए इन पर कलर कराए जा रहे। पिछले दिनों ट्रैफिक पुलिस ने अलग-अलग जोन में अलग-अलग कलर कोड तैयार किया था, जिसके आधार पर इन पर कलर कराए जा रहे हैं, आगामी 15 दिनों में ये व्यवस्था शुरू हो जाएगी। डीसीपी राजेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि शहर को चार जोन में बांटा गया था। जिसमें अलग-अलग कलर कोड की ई-रिक्शाओं का संचालन किया जाएगा। एक महीने ट्रैफिक पुलिस ने संचालकों के साथ बैठक कर यह निर्णय ले लिया था। इसके बाद संचालकों को रिक्शाओं का थाने पर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कहा था। इसके लिए उन्हें समय भी दिया था। उन्होंने बताया कि अब तक 6 हजार से ज्यादा ई-रिक्शाओं के रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं, जिनके नहीं हुए हैं, उनके भी रजिस्ट्रेशन किए जा रहे हैं। कौन सी रिक्शा किस जोन में चलेगी उसके अनुसार उन पर कलर रोड किया जा रहा है, ताकि वह आसानी से पहचान में आ सके। शहर का जोनवार बाटा, कलर कोड भी ई-रिक्शा संचालन को व्यवस्थित करने के लिए शहर को संबंधित ट्रैफिक के 4 जोन के आधार पर 4 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। इसमें जोन 1 में ब्लू, जोन 2 में येलो, जोन 3 में रेड और जोन 4 में व्हाइट कलर कोड की ई-रिक्शाओं का संचालन किया जाएगा। बता दें कि इसके पीछे का उद्देश्य है यह है कि शहर में बेहतर ट्रैफिक व्यवस्था बन सके। जोनवार व्यवस्था होने से संबंधित जोन की ई-रिक्शा उसी जोन में चलेगी। अगर वह दूसरे जोन में संचालित होगी तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। .

इंदौर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए प्रशासन का नया कदम, ई रिक्शा पर लगाए जाएंगे रंग-बिरंगे स्टीकर और रूट तय होंगे

इंदौर  देश के विभिन्न शहरों में बेतरतीब तरीके से दौड़ रहे ई-रिक्शा को इंदौर में पहली बार सेक्टर आधारित सिस्टम से चलाया जाएगा. इस सिस्टम के तहत सभी रिक्शा के लिए कलर कोड, रूट नंबर और रूट सिस्टम लागू किया गया है. यह सिस्टम क्या है और इसे कैसे व्यस्ततम सड़कों पर सैकड़ों की तादात में होने वाले रिक्शों से मुक्ति मिलेगी. आखिर कैसे शहर के सभी रूटों पर अलग-अलग रंग के हिसाब से ई रिक्शा शिफ्ट हो जाएंगे. एक दूसरे के इलाके और रूट पर अतिक्रमण करने से क्या सजा मिलेगी, और कैसे इन रिक्शों की निगरानी होगी।  ट्रैफिक की समस्या बढ़ा रहे ई रिक्शा दरअसल, महंगे होते पेट्रोल-डीजल और ई व्हीकल के युग में फिलहाल ई रिक्शा ही अब महानगरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सबसे सस्ती सवारी है. यही वजह है कि दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और लखनऊ समेत दक्षिण भारत के तमाम शहरों में मुख्य सड़कों पर सबसे बड़ी संख्या में ई-रिक्शा ही नजर आते हैं. हालांकि ई रिक्शा की बढ़ती संख्या ने अब सड़कों पर ट्रैफिक की समस्या को और विकराल बना दिया है, जो बीते कुछ सालों में कई दुर्घटनाओं की वजह बने हैं।  राजवाड़ा में प्रतिबंधित ई रिक्शा मूवमेंट मध्य प्रदेश में सर्वाधिक जनसंख्या वाले इंदौर शहर में पहले से ही बिगड़े हुए ट्रैफिक और सीमित सकरी सड़कों के बीच 10 से 15000 ई रिक्शा यहां के ट्रैफिक के लिए चुनौती बने हुए हैं. इनके लिए न तो कोई निश्चित रूट तय है, न कोई रिक्शा स्टॉप या फिर सवारी बिठाने का कोई नियम कायदा. नतीजतन शहर के मुख्य व्यापारिक केंद्र राजवाड़ा, जवाहर मार्ग और आसपास के अन्य इलाकों में आए दिन रिक्शों की इतनी मारामारी होती थी कि अन्य वाहनों का इलाके की सड़कों से गुजरना मुश्किल था. यही वजह रही कि इंदौर ट्रैफिक पुलिस ने सबसे पहले ई-रिक्शा के मूवमेंट को शहर के राजवाड़ा और आसपास के इलाकों में प्रतिबंधित किया।  4 जोन में चलेंगे ई रिक्शा, सभी का रूट तय इसके बाद इन्हें शहर के निश्चित रूट पर बराबर-बराबर संख्या में चलाने का फैसला किया गया. जिससे कि शहर की सड़कों से ई-रिक्शा का ट्रैफिक समानांतर रूप से अन्य रूट पर डाइवर्ट हो सके. इतना ही नहीं रिक्शा चालकों को भी अपने तय रूट पर प्रतिदिन की कमाई के हिसाब से सवारी भी मिल सके. इस योजना को अमल में लाने के लिये रिक्शा चालक संघ और ट्रैफिक पुलिस की कई दौर की चर्चा का परिणाम यह निकला कि शहर में सभी ई रिक्शा अपने-अपने इलाके के तय किये गए 4 जोन में चलेंगे. पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण दिशा के अनुसार इन चार जोन में शहर के अलग-अलग चार हिस्से शामिल रहेंगे।  हर रिक्शा पर अलग चार रंग के स्टीकर ट्रैफिक डीसीपी राजेश त्रिपाठी बताते हैं कि "शहर में ई रिक्शा चलाने के लिए 4 जोन को अलग-अलग कलर में बांटा गया है. जिसमें जोन क्रमांक एक में चलने वाले रिक्शा पर नीला स्टीकर, 2 पर पीला स्टीकर, 3 पर लाल स्टीकर और जोन क्रमांक 4 पर सफेद कलर का स्टीकर उपयोग में लाया जाएगा. यह स्टीकर शहर के ट्रैफिक थानों में किए जा रहे ऑटो रिक्शा के पंजीयन के दौरान रिक्शा पर ट्रैफिक पुलिस की ओर से लगाए जा रहे हैं. इसके अलावा इन्हें रूट भी दिया जा रहा है।  पहले दौर में 6000 रिक्शा का पंजीयन इंदौर शहर में करीब 15000 ई रिक्शा मौजूद हैं. इनमें से 4000 से 5000 ई रिक्शा ऐसे हैं, जो आरटीओ अथवा पुलिस के पास पंजीकृत न होने के कारण अवैध रूप से निजी तौर पर चल रहे हैं. ऐसे रिक्शा चालकों के खिलाफ अब चालानी कार्रवाई होगी. इसके अलावा फिलहाल 6000 रिक्शा ऐसे हैं. जिन पर 4 रंगों के स्टिकर लगाकर उन्हें उनके रूट पर चलने के निर्देश दिए गए हैं।  अपराध से मिलेगी मुक्ति इस सिस्टम के जरिए न केवल पुलिस के पास ई रिक्शा की तमाम जानकारी, उसके मालिक अथवा ड्राइवर की जानकारी होगी, बल्कि यह जानकारी एक ऐप के माध्यम से ट्रैफिक पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज रहेगी. यदि किसी रिक्शा में यात्रा के दौरान कोई घटना होती है, तो यात्री को उस रिक्शा का नंबर या कलर कोड को ट्रैफिक पुलिस की हेल्पलाइन पर बताना होगा. जिससे पुलिस संबंधित ई-रिक्शा के चालक अथवा मलिक की पहचान कर उस पर तत्काल कार्रवाई कर सकेगी, ऐसी स्थिति में यात्रियों को भी सुरक्षित यात्रा की सुविधा मिल सकेगी।  हाईकोर्ट के निर्देशों का भी पालन इंदौर ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक हाईकोर्ट ने ट्रैफिक की व्यवस्था सुधारने के जो निर्देश दिए हैं, उसके मुताबिक पहले चरण में भारी वाहनों का शहर में प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है. जिसमें यात्री बसें भी हैं. जिन्हें बाहर से ही बस स्टैंड पर लाकर डायवर्ट किया गया है. इसी तरह अब ई रिक्शा को भी शहर के खाली रूटों पर डायवर्ट किया जा रहा है. इंदौर ई रिक्शा ऑटो चालक संघ के संस्थापक राजेश बड़कर बताते हैं कि "सभी ई रिक्शा चालकों को वर्दी तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा रिक्शा चालक अपने जोन में ही चलेंगे. अन्य जोन में जाने पर उनके खिलाफ चालानी कार्रवाई होगी. इसके अलावा बिना रजिस्ट्रेशन के अथवा लाइसेंस आदि नहीं पाए जाने पर भी पुलिस द्वारा जब्ती और अन्य कठोर कार्रवाई होगी. वहीं जोन क्रॉस करने पर भी रिक्शा चालक जिम्मेदार होंगे। 

हौसलों की सवारी: गीता दीदी ई-रिक्शा से गढ़ रहीं आत्मनिर्भरता की कहानी

रायपुर ई-रिक्शा से बच्चों को विद्यालय पहुंचाकर स्वावलंबन की मिसाल बनीं गीता दीदी कभी घरेलू कार्यों तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं अब स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर सशक्त कदम बढ़ा रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित ‘बिहान’ योजना ने महिलाओं को संगठित कर उनके आर्थिक विकास की मजबूत नींव रखी है। कलेक्टर मती चंदन त्रिपाठी के मार्गदर्शन में जिले में बिहान से जुड़ी महिलाओं को पारंपरिक कार्यों से आगे बढ़ाकर नए व्यवसायों से जोड़ा जा रहा है। इसी पहल का प्रेरक उदाहरण है ग्राम पंचायत रटगा की गीता दीदी, जो अब ई-रिक्शा से बच्चों को विद्यालय पहुंचाकर स्वावलंबन की राह पर अग्रसर हैं। बिहान से जुड़कर मिली नई दिशा बैकुंठपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रटगा की 14 महिलाओं ने वर्ष 2018 में ‘जय मां लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह’ का गठन किया। समूह की अध्यक्ष चुनी गईं गीता दीदी ने वर्ष 2020 में पौधों की सुरक्षा हेतु ट्री-गार्ड निर्माण कार्य शुरू किया। लगभग 50 हजार रुपये की सामूहिक लागत से शुरू हुए इस कार्य से समूह ने तीन लाख रुपये की आय अर्जित की, जिससे आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। वर्ष 2021 में गीता दीदी ने समूह के माध्यम से बैंक से व्यक्तिगत ऋण प्राप्त कर 70 हजार रुपये की लागत से किराना दुकान शुरू की। इससे उनके परिवार की दैनिक आय सुनिश्चित हुई और आर्थिक स्थिति में सुधार आया। गत वर्ष कलेक्टर मती चंदन त्रिपाठी द्वारा बिहान से जुड़ी महिलाओं को नए व्यवसायों से जोड़ने की पहल की गई। ई-रिक्शा संचालन के विकल्प को गीता दीदी ने उत्साहपूर्वक स्वीकार किया। मुख्यमंत्री के हाथों मिली ई-रिक्शा की चाबी गत 17 फरवरी को कोरिया महोत्सव के अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के हाथों गीता दीदी को ई-रिक्शा की चाबी प्रदान की गई। इसके पश्चात उन्होंने अपने गांव में अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों को विद्यालय पहुंचाने की सेवा प्रारंभ की। शुरुआत में ही उन्हें 5600 रुपये की अग्रिम राशि प्राप्त हुई और अब वे नियमित रूप से ग्राम पंचायत रटगा एवं आश्रित ग्राम दुधनियां के बच्चों को विद्यालय पहुंचा रही हैं।

हरियाणा के पानीपत में ट्रैफिक नियम में बदलाव: ई-रिक्शा व ऑटो पर ऑड-ईवन, यूनियन नाराज

पानीपत  पानीपत प्रदेश का पहला ऐसा शहर बन गया है, जहां पर ऑटो व ई-रिक्शा के लिए ऑड-ईवन नियम लागू किया गया है। प्रशासन ने 7 दिन के ट्रायल के बाद 8 सितंबर से ऑड ईवन नियम नियमित रूप से लागू करने का फैसला लिया है पानीपत: पानीपत प्रदेश का पहला ऐसा शहर बन गया है, जहां पर ऑटो व ई-रिक्शा के लिए ऑड-ईवन नियम लागू किया गया है। प्रशासन ने 7 दिन के ट्रायल के बाद 8 सितंबर से ऑड ईवन नियम नियमित रूप से लागू करने का फैसला लिया है। इससे शहर की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम हो गया, वाहन चालक कम समय में गंतव्य पर पहुंच रहे हैं। इसके अलावा प्रदूषण के स्तर में भी गिरावट आई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार शहर में 4632 ई-रिक्शा और 3414 ऑटो रजिस्टर्ड हैं, जिन्हें 4 अंक का एक कोड जारी किया है। जबकि 15 हजार के आसपास ऑटो-ई-रिक्शा चल रहे थे। जिनकी वजह से शहर की सड़कों पर जाम लगा रहा था। 10 मिनट के सफर को पूरा करने में 30 से 45 मिनट तक लगते थे। ऑटो यूनियन के प्रधान नरेश डाहर ने 10 सितंबर तक प्रशासन को नियम वापस लेने का अल्टीमेटम दिया है। उनकी मांग है कि प्रशासन ऑड-ईवन के बजाय रूट निर्धारित करे। डीएसपी ट्रैफिक सुरेश सैनी और नगर निगम कमिश्नर पंकज कुमार का कहना है कि यातायात सुचारू रहे इसलिए नियम पूर्णतया लागू रखने का फैसला लिया गया है। यह व्यवस्था दो बार फेल हो चुकी है, इस कारण इस बार पुलिस प्रशासन ने पूरी तरह से कमर कस ली है। शहर के सभी प्रमुख मार्गों पर नाकेबंदी की जाएगी। जीटी रोड पर नांगल खेड़ी और टोल प्लाजा पर नाके लगाए जाएंगे। सनौली रोड पर बबैल नाका, गोहना रोड पर पुराना शुगर मिल और असंध रोड पर गाबा ढाबा पर नाकेबंदी की जाएगी। वहीं 150 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। शहर में करीब आठ हजार ऑटो व ई-रिक्शा प्रतिदिन दौड़ते हैं। जिससे जाम की स्थिति बनी रहती है।  

यात्रियों के लिए राहत! इंदौर में ई-रिक्शा का न्यूनतम किराया ₹10 फिक्स

इंदौर इंदौर में आठ हजार से ज्यादा ई रिक्शा सड़कों पर चल रहे है और रिक्शा चालक मनमाना किराया ले रहे है। इस पर लगाम लगाने की तैयारी अब हो रही है। संभागायुक्त दीपक सिंह ने ई रिक्शा के किराए को लेकर आदेश जारी किए है। ई रिक्शा चालक दो किलोमीटर तक प्रति यात्री दस रुपये तक किराया ले सकेंगे। दो किलोमीटर के बाद प्रति किलोमीटर के लिए पांच रुपये देना होंगे। यह दरें शुक्रवार से लागू की गई है। इससे ज्यादा किराया अब रिक्शा चालक नहीं ले सकते है।  क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी प्रदीप शर्मा ने कहा कि ई रिक्शा चालकों द्वारा मनमाना किराया लेने की शिकायतें प्राप्त हो रही थी। अब हमने किराया तय किया है। उससे अधिक किराया लेने पर रिक्शा चालकों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। उन्होंने किया कि इंदौर में ई रिक्शा चार या उससे अधिक बैठक क्षमता वाले संचालित हो रहे है। रुट भी तय नहीं,ट्रैफिक मे भी बाधक  प्रशासन ने ई रिक्शा के रुट तय करने की कवायद भी की थी, लेकिन अभी तक रुट नहीं बनाए गए। इंदौर में कई रुटों पर ई रिक्शा संचालित हो रहे। उनके स्टैंड भी नहीं है। इस कारण वे कही भी खड़े हो जाते है। चौराहों पर लेफ्ट टर्न पर भी कई बार ई रिक्शा खड़े नजर आते है। इंदौर में चार किलोमीटर के 80 से 100 रुपये तक ई रिक्शा चालक किराया वसूलते है। मनमाने किराए को लेकर कई बार यात्रियों के साथ बदसलूकी भी की जाती है। कई ई रिक्शा अटाला बेचने, सब्जी बेचने के उपयोग में भी आ रहे है।