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चलते ई-रिक्शा अचानक बंद होने की समस्या खत्म, 20 हजार चालकों ने ली राहत की सांस

 रांची  शहर के ई-रिक्शा चालकों को बड़ी राहत मिली है। कथित रूप से ई-रिक्शों को दूर से नियंत्रित कर बंद करने वाले बीएटी-बीएमएस मोबाइल एप के बंद होने के बाद अब चालकों ने राहत की सांस ली है। पिछले कुछ दिनों से शहर में कई ई-रिक्शा चालकों ने शिकायत की थी कि उनके वाहन चलते-चलते अचानक बंद हो जा रहे हैं, जिससे यात्रियों और चालकों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। वहीं रांची के कई ई-रिक्शा चालकों ने बताया कि किसी का वाहन तीन बार तो किसी का छह से सात बार तक अचानक बंद हो गया। सड़क पर चलते वाहन के अचानक रुक जाने से न केवल आय प्रभावित हो रही थी, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई थी। कई बार व्यस्त सड़कों पर ई-रिक्शा रुकने से जाम और अफरा-तफरी की स्थिति भी बन रही थी। चालकों ने खुद निकाला समाधान चालकों के अनुसार जब उन्हें इस एप के बारे में जानकारी मिली, तो कई लोगों ने स्वयं एप डाउनलोड कर लिया। इसके बाद वाहन बंद होने पर वे उसी माध्यम से ई-रिक्शा को दोबारा चालू करने लगे। राजधानी के ज्याचालकों का कहना है कि कुछ असामाजिक तत्व इस तकनीक का दुरुपयोग कर रहे थे, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था। सरकार की कार्रवाई से मिली राहत मामला तेजी से फैलने के बाद भारत सरकार ने संबंधित एप पर कार्रवाई की। एप के बंद होने के बाद अब ऐसी शिकायतें लगभग समाप्त हो गई हैं। ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि इससे काफी राहत मिली है और वे पहले की तरह सामान्य रूप से अपना काम कर पा रहे हैं। चालकों ने बताया कि यह एप मुख्य रूप से लिथियम बैटरी से संचालित ई-रिक्शों पर असर डालता था। हालांकि वर्तमान में समस्या खत्म हो गई है, लेकिन चालकों को आशंका है कि यदि भविष्य में इसी तरह का कोई दूसरा एप सामने आया तो परेशानी फिर बढ़ सकती है। रांची में करीब 20 हजार से अधिक ई-रिक्शा विभिन्न मार्गों पर संचालित होते हैं। ऐसे में समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो यह समस्या बड़े स्तर पर परिवहन व्यवस्था और यात्रियों की सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती थी। बढ़ गई थी परेशानी     बीएटी-बीएमएस एप की वजह से मेरी ई-रिक्शा तीन बार चलते-चलते बंद हो गई थी। यात्री भी घबरा जाते थे। एप बंद होने के बाद अब राहत मिली है। सरकार ने समय रहते कार्रवाई की, नहीं तो चालकों की परेशानी और बढ़ जाती।     -दीपक कुमार, ई-रिक्शा चालक     मेरी गाड़ी छह-सात बार अचानक रुक गई थी। पहले समझ नहीं आया कि दिक्कत क्या है। बाद में एप के बारे में जानकारी मिली और खुद डाउनलोड कर गाड़ी चालू करनी पड़ी। अब एप बंद होने से निश्चिंत होकर काम कर रहे हैं।     -रणवीर कुमार, ई-रिक्शा चालक     चलते वाहन का अचानक बंद हो जाना बहुत खतरनाक था। इससे यात्रियों की सुरक्षा भी प्रभावित हो रही थी। एप बंद होने के बाद स्थिति सामान्य हुई है। उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी किसी तकनीक का दुरुपयोग रोकने के लिए सख्त व्यवस्था होगी।     -विकास सिंह, ई-रिक्शा चालक  

महिलाओं की सुरक्षा और रोजगार पर बड़ा कदम, जबलपुर में 100 महिला ई-रिक्शा चालक बनेंगी

जबलपुर  नगर निगम और यूएन वूमेन के सांझा प्रयास से "सेफ सिटीज एंड सेफ पब्लिक स्पेसेज फॉर वूमेन" परियोजना की पहली वार्षिक समीक्षा बैठक का आयोजन जबलपुर में किया गया. जिसमें यूएन की महिलाएं शामिल हुईं. महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू की अध्यक्षता में आयोजित हुई. बैठक में जिला प्रशासन, पुलिस, सेना, रेलवे, नगर निगम, विभिन्न शासकीय विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।  यूएन के साथ जबलपुर नगर निगम का करार जबलपुर नगर निगम ने 1 साल पहले यूनाइटेड नेशंस के वूमेंस सेफ सिटी कार्यक्रम में यूनाइटेड नेशन से करार किया था. इसके तहत जबलपुर को महिलाओं के लिए एक सुरक्षित शहर बनाने की कोशिश करने के लिए कदम उठाने की बात कही गई थी. इस कार्यक्रम को शुरू हुए 1 साल हो गए हैं।  महिला सुरक्षा में जबलपुर पुलिस ने दिखाई मुस्तैदी जबलपुर के महापौर जगत बहादुर सिंह अनु ने बताया कि, ''बीते 1 साल में उन्होंने जबलपुर शहर में महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने के पहले की है. हमने शहर की सड़कों को लाइट से रोशन किया है, ताकि रात में महिलाओं को अंधेरे में भी निकलने में डर ना लगे.'' उन्होंने बताया कि, ''जबलपुर पुलिस ने भी बड़ी मुस्तैदी से काम किया. जहां पर भी महिलाओं को जरूरत हुई पुलिस नजर आई।  100 महिलाओं को मिलेंगे ई-रिक्शा जगत बहादुर सिंह अनु का कहना है कि, ''इसी वजह से जबलपुर में अब कुछ ऐसे काम जो पहले केवल पुरुष करते थे पर महिलाएं भी करती हुई नजर आ रही हैं जबलपुर में कई महिलाएं स्ट्रीट वेंडर हैं, महिलाएं ऑटो रिक्शा चला रही हैं.'' महापौर ने घोषणा की की आने वाले साल में वे 100 महिलाओं को ऑटो रिक्शा दिलवाने में मदद करेंगे. इसमें कुछ पैसा सब्सिडी के माध्यम से और कुछ लोन के माध्यम से महिलाओं को दिया जाएगा।  महिलाओं की सुरक्षा पर यूएन ने मिलाया हाथ बैठक का उद्देश्य परियोजना के एक वर्ष के कार्यों की समीक्षा करना, उसकी उपलब्धियों और अनुभवों को साझा करना तथा महिलाओं और बालिकाओं के लिए शहर को और अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक बनाने की आगामी योजना तैयार करना था. कार्यक्रम में यूएन वूमेन की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव शोको इशिकावा और डिप्टी कंट्री रिप्रेजेंटेटिव कांता सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए मिलकर काम करने पर जोर दिया।  इस समीक्षा बैठक में आने वाले साल को लेकर भी रोड मेंप बनाया गया है और शहर को महिलाओं के लिए और बेहतर करने के दिशा में और प्रयास किए जाएंगे. समीक्षा बैठक में पुलिस विभाग, जिला प्रशासन, पश्चिम मध्य रेलवे, धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी और भारतीय सेना के प्रतिनिधियों ने भी महिलाओं की सुरक्षा के लिए किए गए कार्यों की जानकारी दी और भविष्य में बेहतर समन्वय के साथ काम करने की बात कही. कार्यक्रम के अंत में सभी विभागों और संस्थाओं ने मिलकर जबलपुर को महिलाओं और बालिकाओं के लिए सुरक्षित, समान अवसरों वाला और समावेशी शहर बनाने का संकल्प लिया। 

सिरफिरों की हरकत से ई-रिक्शा हो रहे हैक, पुलिस भी जांच में जुटी

 ग्वालियर ग्वालियर की सड़कों पर इन दिनों ई-रिक्शा चालकों के सामने एक अजीबोगरीब और बेहद परेशान करने वाली मुसीबत खड़ी हो गई है। कुछ शरारती और सिरफिरे युवक राह चलते ई-रिक्शा को निशाना बना रहे हैं। ये युवक 'चाइनीज मोबाइल एप्लीकेशन' का इस्तेमाल कर चलते-चलते ही ई-रिक्शा की इलेक्ट्रिक बैटरी को रिमोटली लाक कर देते हैं। बैटरी लॉक होते ही गाड़ी का चक्का जाम हो जाता है और वह टस से मस नहीं होती। इस नए किस्म की खुराफात से न सिर्फ गरीब ई-रिक्शा चालक परेशान होना पड़ रहा है, बल्कि पुलिस महकमा भी हैरान है। पुलिस के पास ऐसी एक-दो नहीं, बल्कि दर्जनों शिकायतें पहुंच चुकी हैं, लेकिन तकनीकी पेंच और अचानक गायब हो जाने वाले ऐसे सिरफिरों के कारण पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। ऐसे दिया जा रहा वारदात को अंजाम पीड़ित ई-रिक्शा चालकों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि इन दिनों बाजार में आने वाले नए ई-रिक्शा आधुनिक फीचर्स और ब्लूटूथ कनेक्टिविटी से लैस हैं। शरारती तत्व इसी का फायदा उठा रहे हैं।    कनेक्टिविटी की कमजोरी: शरारती युवक ई-रिक्शा के पास आते हैं या पीछे बैठते हैं और अपने मोबाइल ऐप के जरिए रिक्शा के ब्लूटूथ सिग्नल को हैक कर लेते हैं।      बैटरी लॉक: ऐप के जरिए वे रिक्शा के 'बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम' में सेंध लगाकर उसे लाक कर देते हैं।    एजेंसी के चक्कर: एक बार बैटरी लॉक होने के बाद रिक्शा सड़क पर ही ठप हो जाता है। इसे दोबारा चालू करने का कोई तरीका चालकों के पास नहीं होता। मजबूरी में उन्हें भारी-भरकम किराया देकर रिक्शा खिंचवाकर संबंधित कंपनी की एजेंसी ले जाना पड़ता है, जहां साफ्टवेयर के जरिए ही इसे दोबारा अनलाक किया जाता है। दिनभर की कमाई बैटरी खुलवाने में चली गई ग्वालियर थाने पहुंचे रमेश कुमार, नवीन कुशवाह सहित करीब आधा दर्जन ई-रिक्शा चालकों के साथ ऐसा हुआ। इन लोगों ने बताया कि पूरे दिन में 400 से 500 रुपये की कमाई होती है। ई-रिक्शा लाक होने के कारण एक बार में करीब एक हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं। साइबर एक्सपर्ट के मुताबिक यह मामला बीएमएस हैकिंग से जुड़ा है। कई चाइनीज और सस्ते ई-रिक्शा या उनकी बैटरियों में डिफाल्ट ब्लूटूथ पासवर्ड (जैसे 0000 या 1234) होता है। शरारती तत्व इंटरनेट पर मौजूद एपीके फाइलों या चाइनीज क्लोन ऐप्स के जरिए इन डिफाल्ट पासवर्ड को क्रैक कर लेते हैं। या कई कंपनियां पासवर्ड से लैस ही नहीं करती। ब्लूटूथ आन रख देती हैं। ई-रिक्शा चालक रखें इन बातों का ध्यान  डिफाल्ट पासवर्ड बदलें: ई-रिक्शा खरीदते ही चालक सबसे पहले अपनी बैटरी के ब्लूटूथ का डिफाल्ट पासवर्ड बदलें।  ब्लूटूथ विजिबिलिटी बंद रखें: यदि संभव हो, तो रिक्शा के ब्लूटूथ की 'विजिबिलिटी' को 'हिडन' मोड पर रखें ताकि कोई बाहरी डिवाइस उसे सर्च न कर सके।  लागिन-पासवर्ड याद रखें: जब ई-रिक्शा खरीदते हैं तो कंपनी द्वारा लागिन-पासवर्ड, कंपनी का एप डाउनलोड कर दिया जाता है। इसे हमेशा याद रखें। कंपनी सामान्य पासवर्ड रखती है। इसके अपने हिसाब से बदल दें। पुलिस की अपील- संदिग्धों की तुरंत दें सूचना इस मामले में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायतें लगातार मिल रही हैं। साइबर सेल को इस मामले की जांच में लगाया गया है और उस ऐप को भी ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है जिससे यह लाक किया जा रहा है। आरोपित राह चलते या सवारी बनकर इस हरकत को अंजाम देते हैं, इसलिए उन्हें तुरंत पकड़ना चुनौती बना हुआ है। पुलिस ने चालकों से अपील की है कि यदि कोई सवारी रिक्शा में बैठकर मोबाइल पर संदिग्ध हरकत करती दिखे, तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाने को सूचना दें। आटो-टेंपो चालकों पर शक और सोशल मीडिया का असर पुलिस को इस मामले में आटो-टेंपो चालकों पर शक है। ऐसा इनपुट मिला है। सवारी के चक्कर में आटो, टेंपो चालक यह हरकत कर रहे हैं। ई-रिक्शा लाक करने की वीडियो इंस्टा, फेसबुक, यूट्यूब पर इन दिनों खूब चल रही हैं। इसी में एप का प्रचार भी हो रहा है।  

ऐप से ई-रिक्शा लॉक होने का दावा कितना सच? साइबर एक्सपर्ट ने बताई हकीकत

नई दिल्ली  एक वायरल वीडियो से ईवी की बैटरी सुरक्षा को सस्ती लिथियम बैटरी वाले ई-रिक्शा में लग सकता है 'रिमोट ब्रेक' लेकर सवाल उठ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें ई-रिक्शा को चलते चलते एक ऐप(BAT/BMS) से लॉक होने की बात कही जा रही है। बैटरियों में नहीं होती ब्लूटूथ की सुविधा साइबर एक्सपर्ट शौर्य कौशिक ने बताया कि वायरल वीडियो में जो दावा किया जा रहा है, वैसा कमजोर बैटरी वाले ई-रिक्शा में हो सकता है। भारत में लिथियम बैटरी वाले कई ई-रिक्शा निर्माता अपनी अलग-अलग बैटरी मैनेजमेंट तकनीक और अलग मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करते है। इन्हें इस ऐप से कनेक्ट नहीं किया जा सकता। लेड एसिड बैटरियों पर चल रहे हैं ई-रिक्शा साथ ही कई ई-रिक्शा पारंपरिक लेड एसिड बैटरियों पर चल रहे हैं। इन बैटरियों में भी ब्लूटूथ की सुविधा नहीं होती। उन्होंने साफ कहा कि यह साइबर सुरक्षा में सेंध या साइबर हमला नहीं है, बल्कि कुछ बैटरी सिस्टम में मौजूद कमजोर सुरक्षा व्यवस्था की समस्या है। 'सभी ई-रिक्शा नहीं हो सकते ऐप से ऑफ' एनबीटी रिपोर्टर ने इस ऐप को डाउनलोड कर हकीकत जानने की कोशिश की। ई-रिक्शा स्टैंड के बाहर जब इस ऐप को ऑन किया तो इस पर कुछ ब्लूटूथ डिवाइस कनेक्ट हुए, लेकिन इन्हें कनेक्ट करने पर भी बैटरी को बंद करने का विकल्प ऐप पर नही दिखा। द्वारका के ई-रिक्शा डीलर सुमित अग्रवाल ने बताया कि यह ऐप बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम के लिए है। यह सिर्फ उन्हीं बैटरियों के साथ काम करता है, जिनमें संबंधित बीएमसी और ब्लूटूथ मॉड्यूल मौजूद होता है। ऐसे ई-रिक्शा को उस ऐप से कट्रोल करना संभव है।

यात्रियों की जेब पर बढ़ा बोझ, तय किराये से अधिक वसूली पर डीटीओ सख्त

पटना राजधानी पटना में ऑटो और ई-रिक्शा चालकों की मनमानी से यात्रियों की भारी फजीहत हो रही है। इन चालकों ने बिना किसी सरकारी आदेश के किराये में अचानक बढ़ोतरी कर दी है। ऑटो और ई-रिक्शा चालक मनमाने ढंग से यात्रियों से पैसे वसूल रहे हैं। यह बात सामने आने के बाद अब डीटीओ ने चालकों पर ऐक्शन लेने की बात कही है। अभी हालत यह है कि बोरिंग रोड से राजापुर के बीच कई जगहों पर निर्धारित किराया सात रुपये है, लेकिन पिछले एक सप्ताह से ऑटो और ई-रिक्शा चालक यात्रियों से 10 रुपये वसूल रहे हैं। इसी तरह पटना जंक्शन से कंकड़बाग का तय किराया 15 रुपये है, जबकि चालक 20 रुपये तक ले रहे हैं। वहीं बेली रोड से गोला रोड तक का किराया 30 रुपये निर्धारित है, लेकिन कई चालक 35 रुपये वसूल रहे हैं। अधिक किराया वसूले जाने को लेकर आए दिन यात्रियों और चालकों के बीच कहासुनी हो रही है। कई मामलों में जिला परिवहन अधिकारियों के औचक निरीक्षण के दौरान यात्रियों ने इसकी शिकायत भी की है। बता दें कि सीएनजी कीमतों में बढ़ोतरी के बाद ऑटो चालक संघ ने किराया बढ़ाने की मांग को लेकर परिवहन सचिव को पत्र भेजा है। हालांकि, अभी तक परिवहन विभाग की ओर से किराया बढ़ाने की अनुमति नहीं दी गई है। नियमानुसार परिवहन विभाग की स्वीकृति मिलने के बाद ही पटना के प्रमंडलीय आयुक्त किराये में संशोधन का आदेश जारी कर सकते हैं। इसके बावजूद शहर के कई रूटों पर ऑटो और ई-रिक्शा चालक मनमाने तरीके से तीन से पांच रुपये अतिरिक्त वसूल रहे हैं। कई मामलों में अतिरिक्त किराया देने से इनकार करने पर यात्रियों के साथ विवाद भी हो रहा है। पटना के डीटीओ उपेंद्र कुमार पाल ने कहा कि राजधानी पटना समेत पूरे जिले में ऑटो और ई-रिक्शा के किराये में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। ऐसे में कोई भी चालक निर्धारित किराये से अधिक राशि नहीं वसूल सकता। इस संबंध में शिकायतें मिल रही हैं। जांच के दौरान दोषी पाए जाने पर संबंधित चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वाहन पर किराया प्रदर्शित करना अनिवार्य पटना जिला परिवहन कार्यालय के अनुसार जब भी किराये में आधिकारिक रूप से बढ़ोतरी की जाएगी, इसकी सार्वजनिक सूचना जारी की जाएगी। इसके बाद सभी ऑटो और ई-रिक्शा चालकों को अपने वाहन पर रूटवार किराया सूची प्रदर्शित करनी होगी, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कई रूटों पर चालक खुले पैसे (खुदरा) नहीं होने का हवाला देकर यात्रियों को एक-दो रुपये कम वापस करते हैं। इसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी यात्रियों को उठाना पड़ता है।

ई-रिक्शा चालकों के लिए बड़ा अलर्ट, रायपुर में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया तो फंसेंगे

रायपुर. राजधानी में संचालित ई-रिक्शा और ऑटो के ऑनलाइन पंजीयन के लिए विशेष अभियान शुरू कर दिया गया है। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने इस अभियान का शुभारंभ किया। जनहित फाउंडेशन के सहयोग से तैयार किए गए क्यूआर कोड और ऑनलाइन पंजीयन लिंक के जरिए ई-रिक्शा चालकों और मालिकों को अगले 15 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। पूरी जानकारी होगी दर्ज ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया में ई-रिक्शा मालिक और चालक का नाम, पता, मोबाइल नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस नंबर दर्ज किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस अभियान से राजधानी में संचालित ई-रिक्शा और ऑटो की वास्तविक संख्या का पता चल सकेगा। साथ ही वाहन संचालकों का पूरा डेटा भी पुलिस के पास उपलब्ध रहेगा। बिना पंजीयन पर होगी कार्रवाई पुलिस प्रशासन ने 5 जून तक विशेष पंजीयन अभियान चलाने का निर्णय लिया है। ई-रिक्शा और ऑटो चालक अपने मोबाइल फोन के माध्यम से भी आसानी से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 5 जून के बाद बिना पंजीयन के संचालित होने वाले ई-रिक्शा और ऑटो के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। राजधानी में यातायात व्यवस्था को बेहतर और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से यह पहल की गई है।

ई-रिक्शा से कैबिनेट बैठक में पहुंचे मंत्री टेटवाल और पंवार, दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

ई-रिक्शा से कैबिनेट बैठक के लिए मंत्रालय पहुंचे मंत्री द्वय श्री टेटवाल और  पंवार भोपाल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देशवासियों से किए गए ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण के आह्वान को आत्मसात करते हुए, बुधवार को कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल और मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास (स्वतंत्र प्रभार) श्री नारायण सिंह पंवार कैबिनेट बैठक में शामिल होने के लिए ई-रिक्शा से मंत्रालय पहुंचे। "सुरक्षित पर्यावरण का यही आधार-ईंधन बचत हर बार" का संदेश देते राज्यमंत्री श्री टेटवाल कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने संसाधनों के संयमित उपयोग का जो आह्वान किया है, उसे आत्मसात कर हम सभी को अपने आचरण से दूसरों को प्रेरित करना चाहिए। ऊर्जा बचत को जन आंदोलन बनाने की अपील मंत्री श्री टेटवाल और श्री मंत्री पंवार ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि हम सभी को पेट्रोल-डीजल की खपत को कम करने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और ऊर्जा बचत को एक जनआंदोलन बनाने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति द्वारा किए गए छोटे-छोटे प्रयास ही भविष्य में एक आत्मनिर्भर, स्वच्छ एवं सशक्त भारत के निर्माण की मजबूत नींव तैयार करेंगे।  

महंगाई का असर: दिल्ली में ई-रिक्शा सफर होगा महंगा, नई दरें जल्द लागू

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में ई-रिक्शा से सफर करने वाले यात्रियों को जल्द ही ज्यादा किराया चुकाना पड़ेगा। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स फेडरेशन ने बढ़ती महंगाई और लंबे समय से किराए में कोई बदलाव न होने का हवाला देते हुए न्यूनतम किराया 20 रुपये करने का फैसला लिया है। नई दरें अगले महीने से लागू होने की संभावना है। फेडरेशन के चेयरमैन अनुज शर्मा ने बताया कि दिल्ली में ई-रिक्शा वर्ष 2010 से चल रहे हैं, लेकिन तब से अब तक इनके किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। वहीं, इसी अवधि में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी के किराए दो बार बढ़ चुके हैं। उनका कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई, बैटरी, मेंटेनेंस और अन्य खर्चों में इजाफे के कारण किराया बढ़ाना जरूरी हो गया है, ताकि ड्राइवरों की आय प्रभावित न हो। रिक्शा ड्राइवरों और मैन्युफैक्चरर्स की बैठक में फैसला यह फैसला बुधवार को ई-रिक्शा ड्राइवरों, डीलरों और मैन्युफैक्चरर्स की संयुक्त बैठक में लिया गया, जिसमें दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह भी मौजूद थे। बैठक में किराया बढ़ाने के साथ-साथ सेक्टर से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की गई। कुल 2 लाख ई-रिक्शा चल रहे वर्तमान में दिल्ली में 2 लाख से अधिक ई-रिक्शा आधिकारिक रूप से पंजीकृत हैं, जबकि करीब 1.5 लाख बिना रजिस्ट्रेशन के भी सड़कों पर चल रहे हैं। ये ई-रिक्शा खासकर मेट्रो स्टेशनों और रिहायशी इलाकों में लास्ट माइल कनेक्टिविटी का अहम साधन बने हुए हैं। अभी अधिकांश जगहों पर पहले दो किलोमीटर के लिए 10 रुपये और उसके बाद हर किलोमीटर के लिए 5 रुपये किराया लिया जाता है। 2022 का सर्कुलर लिया वापस इस बीच, दिल्ली सरकार ने 2022 के उस सर्कुलर को वापस लेने का भी फैसला किया है, जिसमें कंपनियों को अपने नाम पर कई ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक कार्ट रजिस्टर कराने की अनुमति दी गई थी। परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य कुछ कंपनियों के हाथों में मालिकाना हक के केंद्रीकरण को रोकना और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के शोषण को कम करना है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से मालिक-ड्राइवर को अधिक अवसर मिलेंगे, आत्मनिर्भर रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और ई-रिक्शा सेक्टर में एकाधिकार की संभावना भी कम होगी। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से अधिक से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और लास्ट माइल कनेक्टिविटी का ढांचा भी मजबूत होगा।

इंदौर में 6 हजार से अधिक ई-रिक्शाओं के रजिस्ट्रेशन, जोन के हिसाब से कलर करवा रहे संचालक, नई व्यवस्था लागू

इंदौर  इंदौर में ट्रैफिक पुलिस ने 6 हजार से ज्यादा ई-रिक्शाओं के रजिस्ट्रेशन करा लिए हैं। इन ई-रिक्शाओं का संचालन अलग-अलग जोन में किया जाएगा, जिसके लिए इन पर कलर कराए जा रहे। पिछले दिनों ट्रैफिक पुलिस ने अलग-अलग जोन में अलग-अलग कलर कोड तैयार किया था, जिसके आधार पर इन पर कलर कराए जा रहे हैं, आगामी 15 दिनों में ये व्यवस्था शुरू हो जाएगी। डीसीपी राजेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि शहर को चार जोन में बांटा गया था। जिसमें अलग-अलग कलर कोड की ई-रिक्शाओं का संचालन किया जाएगा। एक महीने ट्रैफिक पुलिस ने संचालकों के साथ बैठक कर यह निर्णय ले लिया था। इसके बाद संचालकों को रिक्शाओं का थाने पर रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कहा था। इसके लिए उन्हें समय भी दिया था। उन्होंने बताया कि अब तक 6 हजार से ज्यादा ई-रिक्शाओं के रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं, जिनके नहीं हुए हैं, उनके भी रजिस्ट्रेशन किए जा रहे हैं। कौन सी रिक्शा किस जोन में चलेगी उसके अनुसार उन पर कलर रोड किया जा रहा है, ताकि वह आसानी से पहचान में आ सके। शहर का जोनवार बाटा, कलर कोड भी ई-रिक्शा संचालन को व्यवस्थित करने के लिए शहर को संबंधित ट्रैफिक के 4 जोन के आधार पर 4 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। इसमें जोन 1 में ब्लू, जोन 2 में येलो, जोन 3 में रेड और जोन 4 में व्हाइट कलर कोड की ई-रिक्शाओं का संचालन किया जाएगा। बता दें कि इसके पीछे का उद्देश्य है यह है कि शहर में बेहतर ट्रैफिक व्यवस्था बन सके। जोनवार व्यवस्था होने से संबंधित जोन की ई-रिक्शा उसी जोन में चलेगी। अगर वह दूसरे जोन में संचालित होगी तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। .

इंदौर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए प्रशासन का नया कदम, ई रिक्शा पर लगाए जाएंगे रंग-बिरंगे स्टीकर और रूट तय होंगे

इंदौर  देश के विभिन्न शहरों में बेतरतीब तरीके से दौड़ रहे ई-रिक्शा को इंदौर में पहली बार सेक्टर आधारित सिस्टम से चलाया जाएगा. इस सिस्टम के तहत सभी रिक्शा के लिए कलर कोड, रूट नंबर और रूट सिस्टम लागू किया गया है. यह सिस्टम क्या है और इसे कैसे व्यस्ततम सड़कों पर सैकड़ों की तादात में होने वाले रिक्शों से मुक्ति मिलेगी. आखिर कैसे शहर के सभी रूटों पर अलग-अलग रंग के हिसाब से ई रिक्शा शिफ्ट हो जाएंगे. एक दूसरे के इलाके और रूट पर अतिक्रमण करने से क्या सजा मिलेगी, और कैसे इन रिक्शों की निगरानी होगी।  ट्रैफिक की समस्या बढ़ा रहे ई रिक्शा दरअसल, महंगे होते पेट्रोल-डीजल और ई व्हीकल के युग में फिलहाल ई रिक्शा ही अब महानगरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सबसे सस्ती सवारी है. यही वजह है कि दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और लखनऊ समेत दक्षिण भारत के तमाम शहरों में मुख्य सड़कों पर सबसे बड़ी संख्या में ई-रिक्शा ही नजर आते हैं. हालांकि ई रिक्शा की बढ़ती संख्या ने अब सड़कों पर ट्रैफिक की समस्या को और विकराल बना दिया है, जो बीते कुछ सालों में कई दुर्घटनाओं की वजह बने हैं।  राजवाड़ा में प्रतिबंधित ई रिक्शा मूवमेंट मध्य प्रदेश में सर्वाधिक जनसंख्या वाले इंदौर शहर में पहले से ही बिगड़े हुए ट्रैफिक और सीमित सकरी सड़कों के बीच 10 से 15000 ई रिक्शा यहां के ट्रैफिक के लिए चुनौती बने हुए हैं. इनके लिए न तो कोई निश्चित रूट तय है, न कोई रिक्शा स्टॉप या फिर सवारी बिठाने का कोई नियम कायदा. नतीजतन शहर के मुख्य व्यापारिक केंद्र राजवाड़ा, जवाहर मार्ग और आसपास के अन्य इलाकों में आए दिन रिक्शों की इतनी मारामारी होती थी कि अन्य वाहनों का इलाके की सड़कों से गुजरना मुश्किल था. यही वजह रही कि इंदौर ट्रैफिक पुलिस ने सबसे पहले ई-रिक्शा के मूवमेंट को शहर के राजवाड़ा और आसपास के इलाकों में प्रतिबंधित किया।  4 जोन में चलेंगे ई रिक्शा, सभी का रूट तय इसके बाद इन्हें शहर के निश्चित रूट पर बराबर-बराबर संख्या में चलाने का फैसला किया गया. जिससे कि शहर की सड़कों से ई-रिक्शा का ट्रैफिक समानांतर रूप से अन्य रूट पर डाइवर्ट हो सके. इतना ही नहीं रिक्शा चालकों को भी अपने तय रूट पर प्रतिदिन की कमाई के हिसाब से सवारी भी मिल सके. इस योजना को अमल में लाने के लिये रिक्शा चालक संघ और ट्रैफिक पुलिस की कई दौर की चर्चा का परिणाम यह निकला कि शहर में सभी ई रिक्शा अपने-अपने इलाके के तय किये गए 4 जोन में चलेंगे. पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण दिशा के अनुसार इन चार जोन में शहर के अलग-अलग चार हिस्से शामिल रहेंगे।  हर रिक्शा पर अलग चार रंग के स्टीकर ट्रैफिक डीसीपी राजेश त्रिपाठी बताते हैं कि "शहर में ई रिक्शा चलाने के लिए 4 जोन को अलग-अलग कलर में बांटा गया है. जिसमें जोन क्रमांक एक में चलने वाले रिक्शा पर नीला स्टीकर, 2 पर पीला स्टीकर, 3 पर लाल स्टीकर और जोन क्रमांक 4 पर सफेद कलर का स्टीकर उपयोग में लाया जाएगा. यह स्टीकर शहर के ट्रैफिक थानों में किए जा रहे ऑटो रिक्शा के पंजीयन के दौरान रिक्शा पर ट्रैफिक पुलिस की ओर से लगाए जा रहे हैं. इसके अलावा इन्हें रूट भी दिया जा रहा है।  पहले दौर में 6000 रिक्शा का पंजीयन इंदौर शहर में करीब 15000 ई रिक्शा मौजूद हैं. इनमें से 4000 से 5000 ई रिक्शा ऐसे हैं, जो आरटीओ अथवा पुलिस के पास पंजीकृत न होने के कारण अवैध रूप से निजी तौर पर चल रहे हैं. ऐसे रिक्शा चालकों के खिलाफ अब चालानी कार्रवाई होगी. इसके अलावा फिलहाल 6000 रिक्शा ऐसे हैं. जिन पर 4 रंगों के स्टिकर लगाकर उन्हें उनके रूट पर चलने के निर्देश दिए गए हैं।  अपराध से मिलेगी मुक्ति इस सिस्टम के जरिए न केवल पुलिस के पास ई रिक्शा की तमाम जानकारी, उसके मालिक अथवा ड्राइवर की जानकारी होगी, बल्कि यह जानकारी एक ऐप के माध्यम से ट्रैफिक पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज रहेगी. यदि किसी रिक्शा में यात्रा के दौरान कोई घटना होती है, तो यात्री को उस रिक्शा का नंबर या कलर कोड को ट्रैफिक पुलिस की हेल्पलाइन पर बताना होगा. जिससे पुलिस संबंधित ई-रिक्शा के चालक अथवा मलिक की पहचान कर उस पर तत्काल कार्रवाई कर सकेगी, ऐसी स्थिति में यात्रियों को भी सुरक्षित यात्रा की सुविधा मिल सकेगी।  हाईकोर्ट के निर्देशों का भी पालन इंदौर ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक हाईकोर्ट ने ट्रैफिक की व्यवस्था सुधारने के जो निर्देश दिए हैं, उसके मुताबिक पहले चरण में भारी वाहनों का शहर में प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है. जिसमें यात्री बसें भी हैं. जिन्हें बाहर से ही बस स्टैंड पर लाकर डायवर्ट किया गया है. इसी तरह अब ई रिक्शा को भी शहर के खाली रूटों पर डायवर्ट किया जा रहा है. इंदौर ई रिक्शा ऑटो चालक संघ के संस्थापक राजेश बड़कर बताते हैं कि "सभी ई रिक्शा चालकों को वर्दी तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा रिक्शा चालक अपने जोन में ही चलेंगे. अन्य जोन में जाने पर उनके खिलाफ चालानी कार्रवाई होगी. इसके अलावा बिना रजिस्ट्रेशन के अथवा लाइसेंस आदि नहीं पाए जाने पर भी पुलिस द्वारा जब्ती और अन्य कठोर कार्रवाई होगी. वहीं जोन क्रॉस करने पर भी रिक्शा चालक जिम्मेदार होंगे।